Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 21 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना है। क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी करीब 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

20 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गिरावट के साथ बंद हुए। जून तिमाही के नतीजों के बाद प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार का मूड खराब कर दिया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 442.93 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर और निफ्टी 95.80 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,238.50 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाज़ारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। गिफ्ट निफ्टी 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं, जापान के निक्केई में 2.28 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.53 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.39 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है। वहीं, ताइवानी बाजार में 3.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। कोस्पी करीब 3.73 फीसदी भाग गया है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.34 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 307.16 अंक या 0.59% गिरकर 51,839.26 पर आ गया, S&P 500 में 14.41 अंक या 0.19% की गिरावट हुई और यह 7,443.28 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 12.17 अंक या 0.05% गिरकर 25,508.07 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर एक हफ्ते के उच्चतम स्तर के आस-पास आ गया है। बाजार मध्य पूर्व से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के बीच उलझन में है। एक तरफ इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो रही हैं,तो दूसरी तरफ़ युद्धविराम की उम्मीदों से कुछ राहत भी मिल रही है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.96 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है और यह क्रमशः 4.58% और 4.20% पर दिख रहे हैं।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है, जिसमें 0.108% की बढ़त हुई है। इसके बाद चीनी रेनमिनबी में 0.087% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर में 0.023% की मामूली बढ़त दिख रही है। जबकि फिलीपीन पेसो में 0.006% की मामूली बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। जापानी येन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन सबसे कमजोर करेंसी है। इसमें 0.264% की गिरावट आई है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया का नंबर रहा, जो 0.15% गिरा है। ताइवान डॉलर में 0.081% की गिरावट आई है,जबकि थाई बहत 0.056% कमजोर हुआ है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

20 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,121 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,312 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

 

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Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Gold Silver Price Today: पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना ₹1,400 चढ़कर करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को चांदी ₹1,000 सस्ती हो गई और यह लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।

सोने का ताजा भाव

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना सोमवार को ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत ₹1,400 बढ़ गई।

चांदी में लगातार छठे दिन गिरावट

दूसरी ओर, चांदी की कीमत ₹1,000 घटकर ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,22,500 प्रति किलो था।

अगर 10 जुलाई से अब तक की बात करें, तो चांदी की कीमत में कुल ₹15,500 यानी करीब 6.5% की गिरावट आ चुकी है।

क्यों बढ़ा सोने का भाव?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने सस्ते भाव पर सोने की खरीदारी शुरू की। इसी वजह से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत और डॉलर में नरमी की वजह से सोने को समर्थन मिला। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना कुछ सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 2% की बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है।

कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भूराजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

हालांकि बाद में ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका की ब्याज दरों और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि MCX पर सोने में करीब ₹900 की तेजी आई है और यह ₹1,41,850 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 3,975 डॉलर के सपोर्ट से उछलकर करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, जून के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से सोने को शुरुआती समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर या दिसंबर में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

गोल्ड के लिए अहम लेवल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगे कच्चे तेल की वजह से फिलहाल सोने की तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी स्तर पर MCX गोल्ड के लिए ₹1,40,000 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ₹1,42,500 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस स्तर हो सकता है।

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Dollar Vs INR : रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब रुपया, एक्सपर्ट्स से जानें आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। जानकारों का मानना ​​है कि इस गिरावट की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,विदेशी निवेश में कमी,डॉलर की मजबूत मांग और अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल असंतुलन जैसे कई कारण हैं। 20 मई को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, आज शुक्रवार को यह 96.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर से सिर्फ 0.55 प्रतिशत दूर दिख रहा है।

रुपए की हालिया गिरावट ने 5 जून के बाद हुई करेंसी की रिकवरी को खत्म कर दिया है,जिससे रुपया इस महीने एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो गया है।

तेल की कीमतों में उछाल से अर्थव्यवस्था की स्ट्रक्चरल कमजोरियां सामने आईं

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के कोर एनालिटिकल ग्रुप के डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये के कमजोर होने में एक ट्रिगर का काम किया है,लेकिन यह इसकी मुख्य वजह नहीं है। नियोगी के मुताबिक,मज़बूत अमेरिकी डॉलर,टैरिफ की वजह से एक्सपोर्ट में आ रही मुश्किलें, चीन की आक्रामक डंपिंग और कमजोर ग्लोबल आउटलुक, इन सभी का असर रुपये पर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि करीब एक दशक तक भारत को कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा मिला,जिससे इन दबावों को झेलने में मदद मिली। लेकिन,हाल ही में तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने यह सहारा छीन लिया और अर्थव्यवस्था को कई मौजूदा ढ़ाचागत कमजेरियां उभर कर सामने आ गईं।

बंधन AMC के सीनियर इकोनॉमिस्ट श्रीजीत बालासुब्रमण्यन का कहना है कि रुपए में हाल में आई गिरावट को भारत के स्ट्रक्चरल करंट अकाउंट डेफिसिट के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। असल में भारत करंट अकाउंट डेफिसिट वाला देश है। हम एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई कि तुलना में इंपोर्ट पर ज्यादा खर्च करते हैं,और जब हमें बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में सरप्लस मिलता भी है,तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैपिटल इनफ्लो करंट अकाउंट डेफिसिट से ज़्यादा होता है। उन्होंने आगे कहा कि ढ़ाचागत रूप से,पिछले 10-15 सालों में रुपये की कीमत में सालाना लगभग 3-4 प्रतिशत की गिरावट आई है।

डॉलर की आवक में कमजोरी, इसकी निकासी की भरपाई करने में रही नाकाम

RBI के 5 जून के उपायों ने (जिनमें फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक (FCNR-B) डिपॉजिट के लिए इंसेंटिव भी शामिल थे) शुरुआत में बाजार का मूड बेहतर किया था। हालांकि,डॉलर की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। यह उम्मीद से कम ही रही।

आरित्या ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड में रिसर्च हेड गौरव अरोड़ा ने बताया कि इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से 36 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाली है,जो पिछले साल की निकासी से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपिटल तेजी से AI और सेमीकंडक्टर-आधारित बाज़ारों,जैसे कि अमेरिका,ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर शिफ्ट हो रहा है।

गौरव अरोड़ा ने जून में भारत के 30.43 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की ओर भी इशारा किया। यह घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल,इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात के कारण हुआ। साथ ही इसमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर कोई खास जल्दबाजी न दिखाने का भी असर रहा।

बार्कलेज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक FCNR(B) के तहत केवल 5-6 अरब डॉलर का ही विदेशी निवेश आया है,जो शुरुआती अनुमानों से काफी कम है। इससे रुपये को मिलने वाला शॉर्ट टर्म सपोर्ट कम हो गया है।

डॉलर की बढ़ती मांग ने बनाया दबाव

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP में ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉलर की मांग बढ़ने के मुख्य कारणों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के अलावा,रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने को लेकर बनी नई चिंताएं,विदेशी पोर्टफोलियो से पैसे की निकासी,रक्षा भुगतान,सरकारी कर्ज की अदायगी और विदेशों में कंपनियों के अधिग्रहण भी शामिल हैं।

भंसाली ने आगे कहा कि करेंसी में डॉलर का इनफ्लो बहुत कम है,जबकि एक्सपोर्टर अपनी डॉलर की कमाई को रोककर रख रहे हैं और इंपोर्टर तत्काल पेमेंट के लिए डॉलर खरीद रहे हैं और रुपया मजबूत होने पर फ़ॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक कर रहे हैं। इससे रुपए पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा भारत में महंगाई बढ़ने लगी है,जबकि अमेरिका में महंगाई कम हुई है। इससे रुपये को पहले जो वैल्यूएशन का फायदा मिल रहा था,वह अब खत्म हो गया है।

उधर बालासुब्रमण्यन ने कहा कि मार्केट की स्थिति ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि जब मार्केट को उम्मीद होती है कि रुपया कमजोर होगा तो एक्सपोर्टर कम हेजिंग करते हैं क्योंकि कमजोर करेंसी से उन्हें फायदा होता है। जबकि दूसरी तरफ इम्पोर्टर ज्यादा आक्रामक तरीके से हेजिंग करते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और एक ऐसा चक्र बन जाता है जो रुपये पर और दबाव डालता है।

आगे का आउटलुक

जानकारों का मानना ​​है कि नियर टर्म दबाव के बावजूद आने वाले महीनों में FCNR(B) के तहत आने वाले फंड में बढ़ोतरी से रुपये को सहारा मिलेगा। बालासुब्रमण्यन को उम्मीद है कि ज्यादातर फंड अगस्त और सितंबर के दौरान आएगा,जिससे भारत को सितंबर तिमाही में बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स में सरप्लस हासिल करने में मदद मिलेगी।

नियोगी ने कहा कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होते हैं तो FCNR(B) और दूसरे कैपिटल फ्लो की वजह से रुपये में मजबूती आ सकती है और यह साल के बाकी समय में औसतन 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे आ सकता है।

द वेल्थ कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रैटेजी हेड,अक्षय चिंचालकर ने कहा कि रुपये के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.96 से सुधरकर 94.14 पर आने से बाजार की घबराहट तो कम हुई है,लेकिन इससे मेन ट्रेंड में कोई बदलाव नहीं आया है। डेली,वीकली और मंथली चार्ट पर टेक्निकल सेटअप मजबूती से डॉलर के पक्ष में बना हुआ है और एक साल तक एक ही दायरे में रहने के बाद डॉलर इंडेक्स का ऊपर की ओर बढ़ना (अपसाइड ब्रेकआउट) एक बहुत बड़ा सपोर्ट साबित हो रहा है।

चिंचालकर के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के आस-पास अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर को फिर से छू सकता है। गिरावट का यह ट्रेंड तभी खत्म होगा जब रुपया 94.96 के स्तर से ऊपर मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि अगर रुपया 97 के आसपास कोई सपोर्ट नहीं बना पाता है तो इसका अगला टारगेट 98 के आसपास हो सकता है। अगर रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से नीचे गिरता है तो यह 98.70 के स्तर तक जा सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

वेस्टइंडीज को बदहाल क्रिकेट को सुधारने के लिए मिली 1.28 करोड़ डॉलर की बड़ी राशि

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा घोषित अभिशासन, सदस्यता और सदस्यों की सहायता में में बदलावों के तहत कैरिबियाई क्रिकेट को लोन मिलेगा। एडिनबर्ग में हुई सिलसिलेवार वार्षिक बैठक के बाद सदस्यों से जुड़े कई फ़ैसले लिए गए, जिनमें वेस्टइंडीज़ क्रिकेट को आर्थिक मदद देना भी शामिल रहा।

अफ्रीकी देश मॉरिशस को ICC का 111वां मेंबर बनाया गया है, जिससे इसके 12 स्थायी सदस्य और 98 अन्य एसोसिएट सदस्य की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है। इसके अलावा, ICC ने घोषणा की कि क्रिकेट कनाडा के लिए बहाली की शर्तें मंज़ूर कर ली गई हैं; इस बोर्ड पर लगे मौजूदा निलंबन को हटाने से पहले इन शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है।

वहीं दूसरी ओर ICC को श्रीलंका क्रिकेट से संशोधित संविधान के बारे में अपडेट मिला है। फ़िलहाल, चुनाव होने तक श्रीलंका क्रिकेट ICC बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। इस बीच, ICC सदस्यता मानदंड का उल्लंघन करने के कारण फ़्रांस क्रिकेट को नोटिस दिया गया है।

वेस्टइंडीज़ क्रिकेट के लिए समर्थन

ICC ने क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को समर्थन के तौर पर 1.28 करोड़ डॉलर का लोन दिया है। यह बोर्ड, जो कई सालों से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है, आईसीसी से मदद की मांग करता रहा है। यह बात समय-समय पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उठाया है।

30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुए साल के वित्तीय विवरण के अनुसार, CWI को 28 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले साल उसे 24 मिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ हुआ था। 2026 चक्र में 26 मिलियन डॉलर के लॉस के अनुमान के साथ, CWI के स्टेटमेंट में अनुदान की कमी को पूरा करने के लिए ICC से Loan Financing और Commercial Banking क्रेडिट सुविधाओं का ज़िक्र किया गया था। अब यह हकीकत बन गया है।

इससे पहले 2012 में, तत्कालीन वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड को ज़िम्बाब्वे के साथ ICC से सहायता फ़ंडिंग मिली थी। 2020 में, COVID-19 महामारी के दौरान, क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को ECB से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन मिला था, जिसे समय पर चुका दिया गया।

IT Sector की रौनक पर Sensex में 300 अंकों की तेजी, 3 वजहों से 24150 के पार Nifty

Share Market Rally: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझान के बीच डॉलर इंडेक्स की नरमी से घरेलू स्टॉक मार्केट में रौनक दिख रही है। शुरुआती कारोबार में ही घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेस सेंसेक्स और निफ्टी 50 उछल पड़े। सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 भी 24150 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट को सपोर्ट मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 246.45 प्वाइंट्स यानी 0.32% की बढ़त के साथ 77,431.88 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 66.00 प्वाइंट्स यानी 0.27% के उछाल के साथ 24,144.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 328.87 प्वाइंट्स उछलकर 77,514.30 और निफ्टी 88.90 प्वाइंट्स चढ़कर 24,167.40 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: इन वजहों से मिला सपोर्ट

डॉलर इंडेक्स में नरमी

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। अमेरिका महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात की संभावना बढ़ी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स नरम होकर 100.46 पर आ गया। डॉलर की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है।

India VIX में गिरावट

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला है। फिलहाल यह 1.45% की गिरावट के साथ 13.08 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी हाई होने की आशंका है तो इसके कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

IT Stocks से मार्केट को सपोर्ट

आईटी सेक्टर की रौनक से मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिला है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के अलावा फिलहाल किसी भी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% या इससे अधिक की उठा-पटक नहीं है। आज मार्केट को आईटी सेक्टर ही चला रहा है। बैंकिंग सेक्टर में हल्की बढ़त है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 16 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में तेजी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद नजर आ रही है,क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,112 के स्तर पर ऊपर ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त के साथ कारोबार खत्म हुआ। सुबह हुई अच्छी बढ़त का अधिकांश हिस्सा बाद में कम हो गया,क्योंकि बैंकिंग, कैपिटल गुड्स,कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस शेयरों में खरीदारी ने मेटल,IT और FMCG शेयरों में आई कमजोरी के असर को खत्म कर दिया था। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 130.49 अंक या 0.17 प्रतिशत बढ़कर 77,185.43 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,078.50 पर सेटल हुआ था।

अमेरिका की ईरान पर भीषण बमबारी जारी

अमेरिका की ईरान पर भीषण बमबारी जारी है। इस हमले से ईरान भड़क गया है। उसकी तरफ से कह गया है कि जब तक US हमारी शर्तें नहीं मानेगा तब तक हॉर्मुज बंद रहेगा। इस बीच ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। वेस्ट एशिया टेंशन के बीच क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बरकरार है।

बाजार के लिए मिले-जुले संकेत, गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त

सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन भारतीय बाजारों के लिए मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 2100 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई है। हालांकि इंडेक्स फ्यूचर्स में FIIs ने 3000 शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट कवर किए हैं।

एशियाई बाजारों में गिरावट, बढ़त पर बंद होने में कामयाब रहे अमेरिकी बाजार

एशियाई बाजारों से संकेत अच्छे नहीं है। इनमें गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। निक्केई तीन फीसदी तो कॉस्पी 7 फीसदी फिसला है। डाओ फ्यूचर्स भी फ्लैट कारोबार कर रहा है। उधर अमेरिका में चिप शेयरों में फिर बिकवाली दिखी है। हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच US INDICES बढ़त पर बंद होने में कामयाब रहे।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 150.91 अंक या 0.29% बढ़कर 52,659.18 पर पहुंच गया,S&P 500 में 28.83 अंक या 0.38% की बढ़त हुई और यह 7,572.42 पर आ गया। नैस्डैक कम्पोजिट 162.22 अंक या 0.62% बढ़कर 26,269.23 पर पहुंच गया।

HDFC लाइफ के नतीजे अच्छे, ICICI लोम्बार्ड का मुनाफा 46% घटा

पहली तिमाही में HDFC LIFE के नतीजे अच्छे रहे हैं। इसका न्यू बिजनेस प्रीमियम 12% बढ़ा है। वहीं annual premium equivalent यानी APE में करीब 9% की बढ़त देखने को मिली है। VNB Margin हालांकि फ्लैट रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ICICI LOMBARD का मुनाफा 46% घटा है। लेकिन Net Premier Earned में 16% की बढ़त रही।

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एंजेल वन के Q1 मुनाफे और मार्जिन पर दबाव, HDB फाइनेंस के मुनाफे में 38% का उछाल

पहली तिमाही में एंजेल वन के नतीजे कमजोर रहे हैं। तिमाही आधार पर इसका मुनाफा 27 परसेंट घटा है। आय पर भी दबाव देखने को मिला है। मार्जिन में 7 परसेंट की कमी आई है। उधर, HDB फाइनेंस का मुनाफा 38 परसेंट बढ़ा है। ब्याज से कमाई भी 20 परसेंट बढ़ी है।

टेक महिंद्रा,विप्रो,जियो फाइनेंस के नतीजे आज, वायदा की तीन कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार

निफ्टी की तीन कंपनियां,टेक महिंद्रा,विप्रो और जियो फाइनेंस के रिजल्ट आज आएंगे। टेक महिंद्रा का Constant Currency Revenue एक परसेंट बढ़ सकता है। मार्जिन में भी सुधार संभव है। वहीं लार्ज कैप IT में विप्रो सबसे कमजोर रिजल्ट पेश कर सकती है। दूसरी ओर वायदा में BHEL,पॉलीकैब और 360 ONE के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी

डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई है। डीजल एक्सपोर्ट पर 15.5 रुपए प्रति लीटर तो ATF एक्सपोर्ट पर 14.5 रुपए प्रति लीटर ड्यूटी लगेगी। ये दरें पहले के मुकाबले करीब दोगुनी कर दी गई हैं। वहीं पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास दिख रहा है। महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात को बल मिला है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा,जबकि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी का जोखिम भी पैदा हो गया है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.46 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेज़री बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.55% और 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त दिख रही है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है,जिसमें 0.18% की मज़बूती आई है। इसके बाद इंडोनेशियन रुपिया का नंबर है जिसमें 0.13% की बढ़त हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.09% और फिलीपीन पेसो में भी 0.09% की बढ़त हुई है। ताइवान डॉलर और जापानी येन में 0.07% की बढ़त हुई है। जबकि सिंगापुर डॉलर में 0.02% की मामूली बढ़त नजर आ रही है।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन अपने सबसे कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.06% की गिरावट आई है। जबकि थाई बहत भी पिछले क्लोज़ के मुकाबले 0.03% गिरकर ट्रेड कर रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

15 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 735 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार छठे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 704 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

सोना खरीदने वालों के लिए राहत! अब कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी? जानिए 5 बड़े कारण

Gold Price Outlook: सोने में हालिया गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी जरूर आई है। लेकिन 2026 में जनवरी जैसा रिकॉर्ड हाई दोबारा देखने को मिले, इसकी संभावना फिलहाल कम दिख रही है। Fitch Solutions की रिसर्च यूनिट BMI ने 2026 के लिए सोने के औसत भाव का अनुमान 4,600 डॉलर से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 4026 डॉलर के आसपास है। इस हिसाब से गोल्ड में करीब ज्यादा से ज्यादा 9% उछाल का अनुमान है। रिपोर्ट का कहना है कि मजबूत डॉलर, कम होते वैश्विक तनाव और बेहतर होती अर्थव्यवस्था की वजह से सोने पर दबाव बना रह सकता है।

मजबूत डॉलर से सोना महंगा पड़ता है

जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग पर असर पड़ता है।

BMI का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स 98 से 102 के बीच रह सकता है। अगर यह बढ़कर 105 से 110 तक पहुंचा, तो सोने की तेजी पर ब्रेक लग सकता है।

ब्याज दरें घटने की उम्मीद कम

सोना ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर ज्यादा जाते हैं।

BMI का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve 2026 के बाकी समय में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। दरें 3.75% पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में सोने की मांग पर दबाव रह सकता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था संभल रही है

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक कारोबार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।

जब अर्थव्यवस्था बेहतर होती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश छोड़कर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ बढ़ते हैं। BMI ने 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2.4% रहने का अनुमान लगाया है।

कम होते वैश्विक तनाव का भी असर

पिछले एक साल में सोने की तेजी की बड़ी वजह वैश्विक तनाव रहे थे। लेकिन अब हालात पहले से कुछ शांत दिख रहे हैं।

BMI का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से सोने को मिलने वाला ‘सेफ हेवन’ सपोर्ट भी कमजोर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है, तो सोने की मांग और घट सकती है।

महंगाई कम रही, तो मांग भी घट सकती है

महंगाई बढ़ने पर लोग अक्सर सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन अगर महंगाई काबू में रहती है, तो सोने की मांग भी कम हो सकती है।

BMI का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव घट रहा है। अगर आगे भी यही स्थिति रही, तो सोने को मिलने वाला एक और बड़ा सहारा कमजोर पड़ सकता है।

क्या फिर भी सोना टूट जाएगा?

BMI ऐसा नहीं मानता। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। इससे कीमतों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

हालांकि, अगर भविष्य में Federal Reserve ब्याज दरें घटाता है या डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोना फिर 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर जा सकता है। वहीं, अगर डॉलर और मजबूत हुआ या बॉन्ड यील्ड बढ़ी, तो कीमतें 3,500 डॉलर प्रति औंस तक भी आ सकती हैं।

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