CAT 2026 Notification: जल्द जारी किया जाएगा कैट 2026 का नोटिफिकेशन, यहां जानें आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न

CAT 2026 Notification: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) और भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थान (IIT) में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित किया जाने वाला कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। आईआईएम जल्द ही इसके लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इससे देश भर में मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए साल का एडमिशन साइकिल शुरू हो जाएगा। पिछले साल के ट्रेंड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कैट 2026 का नोटिफिकेशन जुलाई में जारी हो सकता है। पिछले साल कैट का विज्ञापन जुलाई में पब्लिश हुआ था।

बता दें, यह परीक्षा आईआईएम में एमबीए पाठ्यक्रम का मेन गेटवे है और कई दूसरे बिजनेस स्कूल भी प्रवेश के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आईआईएम में प्रवेश के लिए कैट स्कोर एक जरूरी क्राइटेरिया है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट की सूचि संबंधित आईआईएम की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हर आईआईएम शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट को सीधे इंटरव्यू लेटर भेजेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि देश के सभी आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थानों के शॉर्टलिस्टिंग के क्राइटेरिया अलग-अलग होते हैं।

आईआईएम प्रवेश प्रक्रिया समझें

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थान अपने-अपने योग्यता मानदंड के आधार पर इंटरव्यू चरण के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करते हैं। यह एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में राइटिंग एबिलिटी टेस्ट (WAT), ग्रुप डिस्कशन (GD) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) शामिल हो सकते हैं।

कैट 2026 में परीक्षार्थियों का प्रदर्शन प्रवेश प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा होगी। आईआईएम सहित सभी प्रमुख प्रबंधन संस्थान प्रवेश प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और रैंकिंग में कैंडिडेट्स का पिछला शैक्षिक प्रदर्शन, काम का अनुभव, जेंडर और एकेडमिक डाइवर्सिटी और इसी तरह के दूसरे इनपुट जैसे दूसरे फैक्टर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रक्रिया, शैक्षिक कट-ऑफ और मूल्यांकन मानदंडों को दिया गया वेटेज अलग-अलग आईआईएम में अलग-अलग हो सकता है।

ज्यादातर आईआईएम इंटरव्यू और लिखित परीक्षा का समायोजन करते हैं। कुछ में ग्रुप एक्सरसाइज या अतिरिक्त टेस्ट भी शामिल होते हैं। हाल के साइकल में कई आईआईएम ने इन-पर्सन इंटरव्यू जारी रखे हैं जबकि कुछ ने इन्हें हाइब्रिड ऑप्शन के साथ पूरा किया है।

प्रवेश प्रक्रिया के लिए जरूरी डिटेल्स

पर्सनल डिटेल्स : आपको अपना नाम, जन्म की तारीख, जेंडर, कैटेगरी, स्कैन किए हुए पासपोर्ट-साइज फोटो और सिग्नेचर डालने होंगे।

शैक्षिक : 10वीं और 12वीं कक्षा की मार्कशीट या स्कोर और आपकी बैचलर डिग्री, और मास्टर या प्रोफेशनल डिग्री।

काम का अनुभव : उम्मीदवारों को कंपनी के नाम, पद और अवधि देने होंगे। इसमें समय के हिसाब से एम्प्लॉयमेंट ब्रेक या एग्जिट की डिटेल हो।

पाठ्यक्रम : कैंडिडेट्स को उन 21 हिस्सा लेने वाले आईआईएम में से खास पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स (PGP) और फेलो प्रोग्राम्स (FPM/PhD) चुनने होंगे जिनके लिए वे अप्लाई करना चाहते हैं, साथ ही पसंदीदा इंटरव्यू सिटी भी चुननी होगी।

परीक्षा शहर : आवेदकों को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट लिखने के लिए प्राथमिकता के अनुसार पांच पसंदीदा परीक्षा शहर चुनने का ऑप्शन दिया जाएगा।

डिक्लेरेशन : परीक्षार्थियों को शर्तों से सहमत होना होगा, यह सत्यापित करना होगा कि दी गई सभी जानकारी सही है, और अपना सबमिशन फाइनल करने के लिए पंजीकरण शुल्क देना होगा।

कैट परीक्षा पैटर्न

कैट परीक्षा पैटर्न के तीन हिस्से होते हैं, वर्बल एबिलिटी और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, डेटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एबिलिटी। कैट 2026 देश भर के आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में एमबीए या पीजीडीएम में प्रवेश चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए 120 मिनट का होता है।

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

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वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

वनडे में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ T-20I टीम उतारी, किए सिर्फ 2 बदलाव

ENGvsIND इंग्लैंड ने 4 टी-20 में भारत के खिलाफ जीत अर्जित करने वाली टीम को ही भारत के खिलाफ एजबेस्टन में खेले जाने वाले पहले एकदिवसीय मैच में उतार दिया है। टीम ने सिर्फ 2 बदलाव किए है। सलामी बल्लेबाज फिल साल्ट की जगह बेन डकेट को टीम में शामिल किया गया है।

38 वर्षीय जॉस बटलर जिन्होंने अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में शतक लगाया था वह टीम का हिस्सा है और कीपिंग भी करेंगे।आज वह अपना 200वां एकदिवसीय मुकाबला खेलेंगे। टीम ने जो दूसरा बदलाव किया है वह टॉम बैनटन को बाहर कर टेस्ट क्रिकेट के सफल बल्लेबाज जो रूट हैं। जो रुट मध्यक्रम में स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।

इन दो बदलावों को छोड़कर पूरी टीम वैसी ही है जैसी पिछले दो टी-20 अंतरराष्ट्रीय में थी। टीम ने अभी तक किसी भी मुख्य तेज गेंदबाज (जोफ्रा आर्चर) या फिर मुख्य स्पिनर (आदिल रशीद) को आराम देने के बारे में नहीं सोचा है। अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच शनिवार को खेला गया था और टीम को मंगलवार तक 2 दिन का आराम मिल गया है।

इसके इतर भारत की टीम में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। श्रेयस अय्यर की जगह कप्तान शुभमन गिल होंगे। शीर्ष से लेकर मध्यक्रम बदला दिखेगा और मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मुख्य स्पिनर कुलदीप यादव के दिखने की संभावना है।

Playing XI  इस प्रकार हैं:

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, लियाम डॉसन, सैम कुरेन, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग, आदिल राशिद।

FIFA World Cup 2026: अमिताभ बच्चन ने उठाए ‘अनुचित फैसलों’ पर सवाल, वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

FIFA World Cup 2026: अमिताभ बच्चन ने उठाए ‘अनुचित फैसलों’ पर सवाल, वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने रोमांचक आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है और इसी बीच बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने टूर्नामेंट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बिग बी ने अपने ब्लॉग में एक लंबी पोस्ट लिखकर फुटबॉल के इस महासंग्राम में हो रहे बड़े बदलावों, चौंकाने वाले नतीजों और कुछ फैसलों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ फैसले ऐसे रहे जिन्हें देखकर हैरानी हुई, लेकिन खेल की यही खूबसूरती है कि परिस्थितियां बदलती रहती हैं और मुकाबला आगे बढ़ता रहता है।

 

बिग बी बोले- वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

अमिताभ बच्चन ने हल्के अंदाज में अपनी बात शुरू करते हुए लिखा कि फीफा वर्ल्ड कप की टाइमिंग ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। देर रात होने वाले मुकाबलों के कारण उनका समय का हिसाब बिगड़ गया है।

 

उन्होंने लिखा कि मैच देखते हुए कभी खुशी मिलती है, कभी निराशा होती है और कई बार ऐसे फैसले देखने को मिलते हैं जिन्हें लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने खास तौर पर उन फैसलों का जिक्र किया जिन्हें उन्होंने एक टीम के पक्ष में और दूसरी के खिलाफ अनुचित महसूस किया।

 

बड़े फुटबॉल देशों की हार और नए सितारों का उदय

अमिताभ बच्चन ने कहा कि इस बार वर्ल्ड कप में कई मशहूर फुटबॉल देशों को हार का सामना करना पड़ा, जो काफी चौंकाने वाला है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि जिन टीमों से ज्यादा उम्मीद नहीं थी, उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान बनाई।

 

बिग बी के मुताबिक, यही खेल की सबसे बड़ी खासियत है कि नए खिलाड़ी और नई टीमें अचानक दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखा देती हैं।

 

IPL से जोड़कर समझाया टीम भावना का महत्व

अमिताभ बच्चन ने फुटबॉल और भारतीय क्रिकेट लीग आईपीएल के बीच एक समानता भी बताई। उन्होंने कहा कि आईपीएल में खिलाड़ी अलग-अलग फ्रेंचाइजी टीमों के लिए खेलते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करते हैं, लेकिन जब वे राष्ट्रीय टीम के लिए मैदान में उतरते हैं तो सभी एक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलना एक अलग तरह के चरित्र और जिम्मेदारी की मांग करता है।

 

17-18 साल के युवा खिलाड़ियों ने बदली तस्वीर

बिग बी ने फीफा वर्ल्ड कप में उभरती युवा प्रतिभाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर वर्ल्ड कप नई प्रतिभाओं और नई रणनीतियों को सामने लाता है।

 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 17 और 18 साल के खिलाड़ी भी अब पूरी दुनिया के सामने अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और खेल की दिशा बदल रहे हैं।

 

समय के साथ बदलती दुनिया पर भी की बात

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में बदलते समय और पीढ़ियों के बदलाव पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है और ऐसी कई चीजें सामने आ रही हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।

 

उनके मुताबिक, तेजी से हो रहे बदलाव नई पीढ़ी के लिए अवसर लेकर आते हैं। युवा इन बदलावों का फायदा उठाते हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी इन्हें देखकर हैरान होती है कि ये सब उनके समय में क्यों नहीं हुआ।

 

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नई पीढ़ी इन बदलावों की गवाह बनेगी और यही संतोष की बात है।

 

फीफा वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल में पहुंचा रोमांच

कई रोमांचक और कांटे के मुकाबलों के बाद फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब सेमीफाइनल चरण में पहुंच चुका है। खिताब की दौड़ में फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड और अर्जेंटीना जैसी बड़ी टीमें आमने-सामने हैं।

 

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि कौन सी टीम फाइनल में जगह बनाकर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करने के करीब पहुंचती है।

लगातार दो सीरीज हारने के बाद टी20 टीम में होगी सूर्यकुमार यादव की वापसी? बीसीसीआई ने रखी ये शर्त

टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने वाले सूर्यकुमार यादव को बड़ा झटका लगा। विश्व कप खत्म होने के बाद बीसीसीआई ने टी20 टीम की कप्तानी उनसे लेकर श्रेयस अय्यर को सौंप दी। वहीं अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम टी20 में अब तक एक भी मुकाबला नहीं जीत पाई है। भारतीय टीम आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज हार गई। वहीं अब सीरीज हारने के बाद सूर्यकुमार के भारतीय टीम में वापसी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम का प्रदर्शन अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। टीम अपने पिछले सात टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से छह हार चुकी है, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया।

सूर्या को होगी वापसी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई ने सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। न्यूज एजेंसी ANI ने बीसीसीआई के एक सूत्र के हवाले से कहा, “सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे अभी भी खुले हैं। फिलहाल वह टीम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं और रन बनाते हैं, तो उनकी वापसी पर जरूर विचार किया जाएगा।”

करना होगा बेहतरीन प्रदर्शन

अगर सूर्यकुमार यादव को भारतीय टीम में दोबारा जगह बनानी है, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट में मुंबई की ओर से लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। चयनकर्ताओं का भरोसा फिर से जीतने के लिए उन्हें बल्ले से लगातार रन बनाने होंगे। मजबूत प्रदर्शन ही उनके लिए राष्ट्रीय टीम में वापसी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। पिछला साल सूर्यकुमार यादव के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह लगातार 19 पारियों तक अर्धशतक नहीं बना सके। वहीं इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उन्होंने पांच मैचों में तीन अर्धशतक जड़े। इसके बाद टी20 विश्व कप के पहले मुकाबले में नाबाद 84 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर उन्होंने दमदार अंदाज में अपनी फॉर्म में वापसी के संकेत दिए।

सूर्या का प्रदर्शन

इसके बाद टी20 विश्व कप के बाकी आठ मुकाबलों में सूर्यकुमार यादव का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा और वह कुल 158 रन ही बना सके। फाइनल मैच में भी उनका बल्ला नहीं चला और वह बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने 13 पारियों में 270 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 147.54 रहा, लेकिन लगातार बड़े स्कोर नहीं बना पाने के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टी20 टीम से बाहर कर दिया।

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जानिए भारत की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेनों के बारे में, क्या वंदे भारत शामिल है इसमें?

वंदे भारत एक्सप्रेस को अक्सर भारत की सबसे मॉडर्न और तेज ट्रेनों में गिना जाता है, लेकिन क्या यह सच में देश की सबसे तेज ट्रेन है? ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई यह भारत की पहली स्वदेशी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है, जो मॉडर्न टेक्निक, तेज रफ्तार और शानदार सुविधाओं के लिए जानी जाती है। इसकी मैक्सिमम स्पीड 160 किमी/घंटा तक है और यह बिना अलग इंजन के इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) सिस्टम पर चलती है। आइए जानते हैं वंदे भारत, नमो भारत, राजधानी, शताब्दी और नई वंदे भारत स्लीपर में से कौन-सी ट्रेन स्पीड, टेक्नोलॉजी और आराम के मामले में सबसे आगे है:

वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस: ​​

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2026 में शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर बनी भारत की पहली ओवरनाइट (रात भर चलने वाली) ट्रेन है। कोटा-नागदा रूट पर ट्रायल रन के दौरान इसने 180 किमी/घंटा की स्पीड हासिल की, जबकि रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर लॉन्ग डिस्टेंस के टेस्ट भी किए। हालांकि, रेगुलर कमर्शियल ऑपरेशन में यह ट्रेन मंजूर की गई ऑपरेशनल स्पीड पर चलेगी।

राजधानी एक्सप्रेस:

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​​1969 में शुरू हुई राजधानी एक्सप्रेस भारत की पहली पूरी तरह से एयर-कंडीशंड प्रीमियम ट्रेन सर्विस थी। 130 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ, यह नई दिल्ली को देश भर की कई स्टेट की राजधानियों और बड़े शहरों से जोड़ती है। दशकों से, राजधानी भारत में लॉन्ग डिस्टेंस की प्रीमियम रेल ट्रैवल के लिए एक बेंचमार्क रही है।

अमृत भारत एक्सप्रेस:

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​​2023 में शुरू की गई अमृत भारत एक्सप्रेस एक नॉन-AC पुश-पुल ट्रेन है जिसे किफायती लॉन्ग डिस्टेंस के ट्रैवल के लिए डिजाइन किया गया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनी यह ट्रेन 130 किमी/घंटा तक की स्पीड से चल सकती है। दोनों सिरों पर लोकोमोटिव होने के कारण, ट्रेन की स्पीड तेजी से बढ़ती और कम होती है। इसका ऑब्जेक्टिव छोटे कस्बों और शहरों को तेज और कम्फर्टेबल ट्रैवल ऑप्शन देना है, जहां राजधानी या शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें नहीं जाती हैं।

गतिमान एक्सप्रेस:

ये है भारत की सबसे महंगी और आलीशान ट्रेन, एक टिकट की कीमत में आ जाएगी लग्जरी कार! - News18 हिंदी

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अप्रैल 2016 में शुरू की गई गतिमान एक्सप्रेस भारत की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन सेवा थी। हजरत निजामुद्दीन और आगरा कैंट के बीच चलने वाली यह ट्रेन मैक्सिमम 160 किमी/घंटा की स्पीड से चलती है। इस ट्रेन को 5,500 HP वाले WAP-5 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से चलाया जाता है और इसमें एग्जीक्यूटिव चेयर कार और AC चेयर कार कोच होते हैं। सभी कोच बायो-टॉयलेट से लैस हैं, जो इसे इंडियन रेलवे की प्रीमियम डे की ट्रैवल सर्विस में से एक बनाता है।

शताब्दी एक्सप्रेस: ​​

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1988 में शुरू हुई शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे पॉपुलर प्रीमियम दिन की ट्रेनों में से एक है। इसे उसी दिन वापसी की जर्नी के लिए डिजाइन किया गया है और यह मैक्सिमम 130 किमी/घंटा की गति से चलती है। इस ट्रेन में केवल AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार कोच होते हैं, इसमें स्लीपर डिब्बे नहीं होते, जिससे यह कम से मीडियम डिस्टेंस की जर्नी के लिए आइडियल बन जाती है।

नमो भारत RRTS:

नमो भारत की पीक ऑवर्स में 10 और नई ट्रिप्स की शुरुआत, RRTS कॉरिडोर के यात्रियों को मिली बड़ी सौगात | Namo Bharat 10 more new Trips launched during peak hours Good

दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) पर चलने वाली नमो भारत ट्रेनें तेज स्पीड वाली रीजनल ट्रैवल के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हालांकि ये 160 किमी/घंटा की ऑपरेशनल स्पीड से चलती हैं, लेकिन इन ट्रेनों की डिज़ाइन स्पीड 180 किमी/घंटा है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) डेवलप्ड यह सिस्टम ट्रेडिशनल रेलवे लाइनों और रोड ट्रैफिक से अलग, खास तौर पर इसके लिए बनाए गए ट्रैक पर चलता है, जिससे ट्रैवल तेज और ज़्यादा भरोसेमंद होती है।

वंदे भारत से लेकर अमृत भारत तक, इंडियन रेलवे तेजी से मॉडर्न हो रहा है और तेज ट्रेनें, बेहतर टेक्नोलॉजी और पैसेंजर के लिए ज्यादा आराम जैसी सुविधाएं ला रहा है। ये अगली जनरेशन की सर्विस ट्रैवल का समय कम कर रही हैं, सेफ्टी बढ़ा रही हैं और देश भर के ज्यादा शहरों और कस्बों तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचा रही हैं।

SBI Funds Management IPO: खुल गया ₹9813 करोड़ का इश्यू, ग्रे मार्केट में गिरी सेहत, निवेश से पहले जान लें ये 10 अहम बातें

SBI Funds Management IPO: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए आज खुल चुका है। पहले यह आईपीओ ₹11,693 करोड़ का था लेकिन प्री-आईपीओ राउंड में 30 बड़े निवेशकों से ₹1880 करोड़ जुटाने के बाद यह आईपीओ अब ₹9813 करोड़ है। यहां इस आईपीओ से जुड़ी 10 अहम बातें बताई जा रही है, जिसे जान लें और फिर आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लें।

1. प्राइस बैंड और लॉट साइज

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के ₹9813 करोड़ के आईपीओ में ₹545-₹574 के प्राइस बैंड और 26 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और एसबीआई के एंप्लॉयीज को हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिलेगा। एसबीआई के शेयरहोल्डर्स के लिए कोई छूट नहीं है।

2. अहम डेट्स

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ आज 14 जुलाई को खुला है और 16 जुलाई को बंद होगा। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 17 जुलाई को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर 21 जुलाई को एंट्री होगी।

3. एंकर बुक

आईपीओ खुलने से पहले कंपनी ने 129 एंकर निवेशकों से ₹2663 करोड़ जुटाए। इसके तहत ब्लैकरॉक, अबूधाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी, मॉर्गन स्टैनले, गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप और गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर समेत अन्य एंकर निवेशकों को ₹574 के भाव पर 17.09 करोड़ शेयर जारी हुए हैं। इसमें से ₹991 करोड़ के 1.72 करोड़ शेयर एचडीएफसी एएमसी, एक्सिस म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और मोतीलाल ओसवाल एएमसी समेत 23 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 70 स्कीम्स के जरिए जारी हुए हैं।

4. ग्रे मार्केट में स्थिति यानी GMP

ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की स्थिति कमजोर हुई है और आईपीओ खुलने से पहले इसकी जीएमपी ₹110 तक चली गई थी। हालांकि अब यह आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹93 यानी 16.20% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

5. आईपीओ में कितने शेयर होंगे जारी

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी होगा बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हो रही है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग बेच रहा है।

6. रजिस्ट्रार

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ का रजिस्ट्रार केफिन टेक है यानी कि शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद इसकी साइट पर जारी अलॉटमेंट स्टेटस देख सकेंगे कि कितने शेयर मिले। इसके अलावा बीएसई की साइट पर भी स्टेटस देख सकेंगे।

7. कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल?

चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिलेगा बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिलेगा।

8. कंपनी के बारे में?

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

9. कैसी है कारोबारी सेहत?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

10. क्या है ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ पर ब्रोकरेजेज का रुझान पॉजिटिव है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लीडरशिप पोजिशन, एसबीआई के दमदार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के सपोर्ट, मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी और हाई ऑपरेटिंग मार्जिन के चलते ब्रोकरेजेज इसे लेकर बुलिश हैं। स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है तो अरिहंत कैपिटल ने भी लॉन्ग टर्म के लिए इसे सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।

अनलिस्टेड मार्केट में निवेश आपकी पॉकेट पर पड़ सकता है भारी

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

वर्ल्ड अपडेट्स:पोलैंड की नेता ने ‘हिटलर’ जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी

पोलैंड की राजनेता और क्राकोव की मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यूक्रेन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़े विवादित राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का महिमामंडन करने का आरोप लगाया। वीडियो में श्राइबर ने जेलेंस्की की एक तस्वीर दिखाई, जिस पर हिटलर जैसी मूंछ बनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में फेंकते हुए कहा कि “अपराधियों का महिमामंडन करने वालों की जगह इतिहास के कूड़ेदान में है।” उन्होंने कहा कि “बांदेरावादी नायक नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए कलंक हैं।” साथ ही आरोप लगाया कि यूक्रेन ने अब तक पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी है। श्राइबर ने यह टिप्पणी 11 जुलाई 1943 की ‘ब्लडी संडे’ घटना की बरसी पर की। पोलैंड के अनुसार, उस दिन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने वोल्हीनिया क्षेत्र के पोलिश गांवों पर एक साथ हमले किए थे। पोलैंड का दावा है कि 1943-44 के दौरान ऐसे हमलों में लगभग एक लाख पोलिश नागरिक मारे गए थे और वह इन घटनाओं को नरसंहार मानता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… EU माइग्रेशन कानून पर विवाद: स्वीडिश सांसद ने डेनिश सांसद के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
यूरोपीय संसद में हाल ही में पारित सख्त माइग्रेशन कानून को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। स्वीडन की सांसद आबिर अल-सहलानी ने डेनमार्क के सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणी को लेकर स्वीडिश पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला से भी की है। यह विवाद पिछले महीने यूरोपीय संसद द्वारा पारित रिटर्न रेगुलेशन के बाद शुरू हुआ। नए कानून के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के लिए यूरोपीय संघ के बाहर ‘रिटर्न हब’ स्थापित करने की अनुमति दी गई है। कानून पारित होने के बाद संसद में “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारे लगे। इराकी मूल की स्वीडिश सांसद आबिर अल-सहलानी ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का चिंताजनक उदाहरण है और इस घटना के बाद उन्होंने संसद में खुद को असुरक्षित महसूस किया। इसके जवाब में डेनिश सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म ने सोशल मीडिया पर “गो होम” टिप्पणी की। अल-सहलानी ने इसे नस्लीय घृणा फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यूरोपीय संघ में माइग्रेशन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के यूरोप पहुंचने के बाद इस विषय पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जर्मनी यूक्रेन को देगा 50 हजार अटैक ड्रोन, 9 करोड़ यूरो की डील की फंडिंग करेगा
जर्मनी यूक्रेन के लिए 50,000 एफपीवी (फर्स्ट-पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन खरीदने का वित्तपोषण करेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ यूरो (10.3 करोड़ डॉलर) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये श्राइक (Shrike) नामक कम लागत वाले अटैक ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल बनाती है। इनमें अमेरिकी कंपनी ऑटेरियन का सॉफ्टवेयर लगा है, जो उड़ान के अंतिम चरण में चलते हुए लक्ष्य की खुद पहचान कर उस पर हमला करने में सक्षम है। ऑटेरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरेंज मेयर के अनुसार, कुछ ड्रोन पहले ही यूक्रेन को भेजे जा चुके हैं और बाकी की आपूर्ति 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी इस वर्ष विभिन्न निर्माताओं के कम से कम एक लाख ड्रोन के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है, जिनकी फंडिंग कई पश्चिमी सरकारें कर रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, स्काईफॉल ने इस सौदे में जर्मनी की भागीदारी की पुष्टि की है, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जर्मनी और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालयों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई पार्टी से निष्कासित
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई को कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मा पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मा शिंगरुई को अप्रैल में “कानून और पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” के आरोप में जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में पाया गया कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में दूसरों को अनुचित लाभ पहुंचाया, अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने में मदद की। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, मा ने महंगे उपहार स्वीकार किए और अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े आर्थिक लाभ दिलाए। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े पैमाने पर “पारिवारिक भ्रष्टाचार” (फैमिली करप्शन) बताया है। मा शिंगरुई पहले चीन के एयरोस्पेस उद्योग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वे राजनीति में आए और पोलित ब्यूरो तक पहुंचे। 2025 के बाद किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

वर्ल्ड अपडेट्स:पोलैंड की नेता ने ‘हिटलर’ जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी

पोलैंड की राजनेता और क्राकोव की मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यूक्रेन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़े विवादित राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का महिमामंडन करने का आरोप लगाया। वीडियो में श्राइबर ने जेलेंस्की की एक तस्वीर दिखाई, जिस पर हिटलर जैसी मूंछ बनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में फेंकते हुए कहा कि “अपराधियों का महिमामंडन करने वालों की जगह इतिहास के कूड़ेदान में है।” उन्होंने कहा कि “बांदेरावादी नायक नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए कलंक हैं।” साथ ही आरोप लगाया कि यूक्रेन ने अब तक पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी है। श्राइबर ने यह टिप्पणी 11 जुलाई 1943 की ‘ब्लडी संडे’ घटना की बरसी पर की। पोलैंड के अनुसार, उस दिन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने वोल्हीनिया क्षेत्र के पोलिश गांवों पर एक साथ हमले किए थे। पोलैंड का दावा है कि 1943-44 के दौरान ऐसे हमलों में लगभग एक लाख पोलिश नागरिक मारे गए थे और वह इन घटनाओं को नरसंहार मानता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… EU माइग्रेशन कानून पर विवाद: स्वीडिश सांसद ने डेनिश सांसद के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
यूरोपीय संसद में हाल ही में पारित सख्त माइग्रेशन कानून को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। स्वीडन की सांसद आबिर अल-सहलानी ने डेनमार्क के सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणी को लेकर स्वीडिश पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला से भी की है। यह विवाद पिछले महीने यूरोपीय संसद द्वारा पारित रिटर्न रेगुलेशन के बाद शुरू हुआ। नए कानून के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के लिए यूरोपीय संघ के बाहर ‘रिटर्न हब’ स्थापित करने की अनुमति दी गई है। कानून पारित होने के बाद संसद में “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारे लगे। इराकी मूल की स्वीडिश सांसद आबिर अल-सहलानी ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का चिंताजनक उदाहरण है और इस घटना के बाद उन्होंने संसद में खुद को असुरक्षित महसूस किया। इसके जवाब में डेनिश सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म ने सोशल मीडिया पर “गो होम” टिप्पणी की। अल-सहलानी ने इसे नस्लीय घृणा फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यूरोपीय संघ में माइग्रेशन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के यूरोप पहुंचने के बाद इस विषय पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जर्मनी यूक्रेन को देगा 50 हजार अटैक ड्रोन, 9 करोड़ यूरो की डील की फंडिंग करेगा
जर्मनी यूक्रेन के लिए 50,000 एफपीवी (फर्स्ट-पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन खरीदने का वित्तपोषण करेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ यूरो (10.3 करोड़ डॉलर) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये श्राइक (Shrike) नामक कम लागत वाले अटैक ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल बनाती है। इनमें अमेरिकी कंपनी ऑटेरियन का सॉफ्टवेयर लगा है, जो उड़ान के अंतिम चरण में चलते हुए लक्ष्य की खुद पहचान कर उस पर हमला करने में सक्षम है। ऑटेरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरेंज मेयर के अनुसार, कुछ ड्रोन पहले ही यूक्रेन को भेजे जा चुके हैं और बाकी की आपूर्ति 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी इस वर्ष विभिन्न निर्माताओं के कम से कम एक लाख ड्रोन के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है, जिनकी फंडिंग कई पश्चिमी सरकारें कर रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, स्काईफॉल ने इस सौदे में जर्मनी की भागीदारी की पुष्टि की है, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जर्मनी और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालयों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई पार्टी से निष्कासित
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई को कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मा पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मा शिंगरुई को अप्रैल में “कानून और पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” के आरोप में जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में पाया गया कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में दूसरों को अनुचित लाभ पहुंचाया, अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने में मदद की। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, मा ने महंगे उपहार स्वीकार किए और अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े आर्थिक लाभ दिलाए। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े पैमाने पर “पारिवारिक भ्रष्टाचार” (फैमिली करप्शन) बताया है। मा शिंगरुई पहले चीन के एयरोस्पेस उद्योग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वे राजनीति में आए और पोलित ब्यूरो तक पहुंचे। 2025 के बाद किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

Lionel Messi: 13 साल की उम्र में बदली किस्मत, आज हैं 9,400 करोड़ के मालिक… जानिए मेसी की पूरी कहानी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अब सेमीफाइनल के मुकाबले खेले जाएंगे। क्वार्टर फाइनल के रोमांचक मुकाबलों के बाद फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है। फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी फीफा वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टूर्नामेंट में अब तक वह 8 गोल कर चुके हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे बने हुए हैं। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना इस समय शानदार फॉर्म में नजर आ रही है। फैंस को उम्मीद है कि अर्जेंटीना एक बार फिर खिताब उठा सकती है।

हाल ही में मिस्र के खिलाफ खेले गए मुकाबले में मेसी ने टीम की जीत में अहम योगदान दिया। अर्जेंटीना एक समय 0-2 से पीछे था, लेकिन आखिरी मिनटों में शानदार वापसी करते हुए 3-2 से मैच जीतकर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इस वापसी के साथ मेसी की दीवानगी और बढ़ गई।

कैसे होती है मेसी की कमाई

फुटबॉल की दुनिया में अपने शानदार खेल से पहचान बनाने वाले लियोनेल मेसी सिर्फ मैदान के ही नहीं, बल्कि कारोबार और निवेश की दुनिया के भी बड़े नाम हैं। खेल से होने वाली कमाई के अलावा उन्होंने कई सफल बिजनेस और निवेश के जरिए अरबों रुपये की संपत्ति बनाई है। आइए जानते हैं कि कैसे एक साधारण शुरुआत करने वाले मेसी आज दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों में शामिल हो गए। जानें कितनी है फुटबॉल के दिग्गज मेसी की नेटवर्थ

आसान नहीं था मेसी का सफर

आज लियोनेल मेसी का नाम दुनिया के महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में लिया जाता है, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण माहौल से हुई थी। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में पले-बढ़े मेसी के पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे, जबकि उनकी मां परिवार की मदद के लिए छोटी-मोटी नौकरी करती थीं। बचपन में उन्हें ग्रोथ हार्मोन की समस्या का सामना करना पड़ा, जिसका इलाज कराना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे मुश्किल समय में उनके टैलेंट ने उन्हें स्पेन के क्लब एफसी बार्सिलोना तक पहुंचाया। महज 13 साल की उम्र में बार्सिलोना ने उन्हें अपनी अकादमी में शामिल किया और उनके इलाज की जिम्मेदारी भी उठाई। यहीं से मेसी के करियर ने नई उड़ान भरी और।

कितनी है मेसी की कुल संपत्ति

फोर्ब्स के मुताबिक, जून 2026 तक लियोनेल मेसी की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 1.1 बिलियन डॉलर (लगभग 9,400 करोड़ रुपये) आंकी गई है। फुटबॉल क्लबों के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स से उन्होंने करीब 1.2 बिलियन डॉलर की कमाई की है। इसके अलावा विज्ञापनों, ब्रांड एंडोर्समेंट, लाइसेंसिंग और अन्य व्यावसायिक निवेशों से भी उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे उनकी कमाई कमाई करीब 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाती है। एडिडास के साथ उनकी आजीवन साझेदारी के अलावा मास्टरकार्ड, लेज और मिशेलॉब अल्ट्रा जैसे कई बड़े वैश्विक ब्रांड भी उनकी कमाई का अहम हिस्सा हैं।

कारोबार में भी लगाए पैसे

लियोनेल मेसी ने अपनी कमाई को अलग-अलग कारोबार में भी लगाया। उन्होंने रियल एस्टेट, होटल और खेल से जुड़े बिजनेस में निवेश कर अपनी संपत्ति को लगातार बढ़ाया। उनकी प्रमुख कारोबारी कंपनियों में एडिफिसियो रोस्टावर सोसिमी भी शामिल है, जो स्पेन की एक सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनी है। इस कंपनी के पास होटल, ऑफिस, कमर्शियल बिल्डिंग और कई अन्य प्रॉपर्टियां हैं। हाल ही में कंपनी ने बार्सिलोना में करीब 11.5 मिलियन यूरो की कीमत वाली एक बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग भी खरीदी है।

इंटर मियामी क्लब में भी हिस्सेदारी

रियल एस्टेट के अलावा लियोनेल मेसी ने हॉस्पिटैलिटी, फूड और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी बड़ा निवेश किया है। वह एमआईएम होटल्स समूह में हिस्सेदार हैं और अर्जेंटीना की एल क्लब डे ला मिलानेसा रेस्टोरेंट चेन में भी उनकी हिस्सेदारी (इक्विटी) है। इसके साथ ही उन्होंने उरुग्वे के डेपोर्टिवो एलएसएम और स्पेन के यूई कॉर्नेला फुटबॉल क्लबों में भी निवेश किया है। साल 2023 में मेसी ने कथित तौर पर सऊदी अरब के बेहद बड़े प्रस्ताव को ठुकराकर अमेरिका के इंटर मियामी क्लब का दामन थामा। इस समझौते में उन्हें भविष्य में क्लब में हिस्सेदारी लेने का ऑप्शन भी मिला।

मेसी के क्लब से जुड़ने के बाद इंटर मियामी की लोकप्रियता और बाजार मूल्य में तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह फैसला उनके सबसे सफल निवेशों में गिना जाने लगा।