नासिक में वॉटरफॉल घूमने गए परिवार का 15 KM पीछा किया, मारपीट की, कार भी फोड़ी

nashik car attack

महाराष्ट्र के नासिक में कुछ लोगों ने वॉटरफॉल पर घूमने गए एक परिवार का लगभग 15 किलोमीटर तक पीछा किया और उनके साथ मारपीट की। उनकी गाड़ी पर रॉड से हमले किए। परिवार की एक महिला ने छेड़छाड़ का विरोध किया था। मामले में 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। ALSO READ: रूह कंपा देगा इंदौर का ये हत्‍याकांड, पत्नी को तड़पाकर मारा, नए कपड़े पहने, तिलक लगाया, ऑनलाइन मंगाया था 7 लेयर कट चाकू

 

इस दिल दहला देने वाली घटना से महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर कानून-व्यवस्था और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यटक परिवार द्वारा छेड़छाड़ का विरोध करने से नाराज बदमाशों ने न केवल उन पर बेरहमी से हमला किया, बल्कि कई किलोमीटर तक उनकी कार का पीछा करते हुए लोहे की सरियों और डंडों से हमला किया तथा कार के शीशे भी तोड़ दिए। घटना के बाद डरे-सहमे परिवार ने सीधे पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

क्या है मामला? 

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, नासिक के भागवत परिवार के 8 सदस्य रविवार को इगतपुरी कस्बे में भवाली डैम गए थे। जब परिवार वापस लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी दो स्थानीय युवकों ने परिवार की एक युवती के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और उस पर अश्लील टिप्पणियां करने लगे। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपी वहां से चला गया और कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य हो गई।

 

पीड़ित महिला के अनुसार, विवाद शांत होने के कुछ ही देर बाद 8 से 10 स्थानीय युवकों का एक समूह वहां पहुंच गया। वे चिल्लाते हुए बोले, “तुमने हमारे लोगों से झगड़ा क्यों किया?” इसके बाद जब परिवार कार से वहां से निकला, तो बदमाशों ने बाइक पर फिल्मी अंदाज में उनका पीछा करना शुरू कर दिया। ALSO READ: राम मंदिर दान चोरी कांड पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा खुलासा

 

आरोपियों ने करीब 15 से 20 किलोमीटर तक परिवार की कार का पीछा किया। रास्ते में कई बार कार को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने चलती कार पर लोहे की सरियों और भारी लकड़ी के डंडों से लगातार हमला किया, जिससे कार के पीछे और साइड के शीशे टूट गए। परिवार किसी तरह जान बचाने में सफल रहा।

 

पुलिस ने 9 आरोपियों को हिरासत में लिया

SP धोंडोपांत स्वामी ने कहा कि शुरुआती FIR दर्ज होने के बाद, हमने वीडियो रिव्यू और तकनीकी जांच समेत पूरी जांच-पड़ताल की और अब तक 9 आरोपियों की पहचान कर ली है। हालांकि शुरुआती FIR में 6 या 7 संदिग्धों के नाम थे, लेकिन हमने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों को भी इसमें शामिल किया है जिन्होंने उन्हें पनाह दी या जो उनके साथी थे। हमने अब 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आगे की कानूनी कार्रवाई अभी चल रही है।
 

भाजपा विधायक ने क्या कहा?

भाजपा विधायक देवयानी फरांडे ने कहा कि स्थानीय गुंडों द्वारा पर्यटकों पर हमले के बाद, नासिक ग्रामीण एसपी ने मुख्यमंत्री के आदेश पर कार्रवाई करते हुए हमलावरों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया जाए। नासिक ग्रामीण पुलिस पर्यटकों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति से सख्ती से निपटेगी।

 

पहले ODI मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर भारत के खिलाफ चुनी बल्लेबाजी

इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने टॉस जीतकर भारत के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत की टीम में अर्शदीप सिंह को जगह नहीं मिली और उनकी जगह टीम में गुरुनूर ब्रार खेल रहे हैं। इसके अलावा टीम में प्रसिद्ध कृष्णा शामिल हुए हैं।

इंग्लैड ने ना केवल टॉस जीता है बल्कि सलामी बल्लेबाजी के साथ बदलाव किया है। जैकेब बेथल को सलामी बल्लेबाजी का जिम्मा सौंपा गया है जबकि अंति टी-20 में शतक जमाकर आए जोस बटलर को मध्यक्रम में जगह दी है।

Playing XI  इस प्रकार हैं:

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, लियाम डॉसन, सैम कुरेन, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग, आदिल राशिद।

भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा गुरनूर बराड़

Renault Triber पर मिल रहा ₹60,000 तक का डिस्काउंट, बस इसी महीने रहेगा यह धांसू ऑफर, जानें कीमत और फीचर्स

Renault Triber: अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Renault India अपने Triber MPV पर 60,000 रुपये तक की छूट दे रहा है। जो कि केवल इसी महीने तक लागू है। ये ऑफर राज्य, मॉडल ईयर, वेरिएंट और कस्टमर की पात्रता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। रेनॉ इंडिया की ऑफिशियल ऑफर लिस्ट के अनुसार, केरल में कस्टमर Triber पर कुल 60,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिल सकता है, जबकि गुजरात में खरीदार 45,000 रुपये तक का लाभ उठा सकते हैं। ज्यादातर दूसरे राज्यों में, MY2026 मॉडल पर ज्यादा से ज्यादा फायदे 30,000 रुपये तक हैं।

इन ऑफर्स में 30,000 रुपये तक का कैश डिस्काउंट शामिल हो सकता है। इसके अलावा, ग्राहक को एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बोनस, लॉयल्टी बोनस, रेफरल और कॉरपोरेट बेनिफिट्स जैसे फायदे भी मिल सकते हैं। हालांकि, ये लाभ ग्राहक की पात्रता और लागू स्कीम पर निर्भर करेंगे।

रेनॉ ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने शहर में लागू सही ऑफर के बारे में जानने के लिए अपने नजदीकी ऑथराइज्ड डीलर से संपर्क करें, क्योंकि ऑफर के फायदे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकते हैं और ये डीलर की भागीदारी और स्टॉक की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं।

रेनॉ ट्राइबर की कीमत अभी 5.81 लाख रुपये से 8.48 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है। यह भारतीय बाजार में सबसे सस्ती थ्री-रो वाली MPV में से एक बनी हुई है, जिसमें सात लोगों के बैठने की सुविधा मिलती है।

पावरट्रेन और इंजन

इंजन की बात करें तो, Renault Triber में 1.0 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन 72 bhp की पावर और 96 Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ ग्राहकों को 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) का विकल्प मिलता है।

ट्राइबर के मैनुअल वर्जन की ARAI-क्लेम्ड फ्यूल एफिशिएंसी 20.0 kmpl तक है, जबकि AMT वेरिएंट 17.0 kmpl तक का माइलेज देता है।

फीचर्स

वेरिएंट के आधार पर, ट्राइबर में कई फीचर्स देखने को मिलते हैं। इनमें 8 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, स्टीयरिंग पर ऑडियो कंट्रोल, पीछे की सीटों के लिए AC वेंट्स, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, कीलेस एंट्री, इलेक्ट्रिकली एडजस्ट होने वाले ORVMs और कूल्ड सेंटर स्टोरेज कंपार्टमेंट शामिल हैं।

सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो, वेरिएंट के आधार पर Triber में स्टैंडर्ड तौर पर छह एयरबैग, EBD के साथ ABS, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), हिल स्टार्ट असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), रियर पार्किंग सेंसर, रिवर्सिंग कैमरा और सीट बेल्ट रिमाइंडर दिए गए हैं।

बता दें कि Renault Triber उन खरीदारों की जरूरतों को पूरा करती है जो थ्री-रो सीटिंग वाली किफायती फैमिली गाड़ी की तलाश में हैं। जुलाई 2026 के ऑफर सीमित समय के लिए हैं और ये मैन्युफैक्चरर और भाग लेने वाली डीलरशिप द्वारा तय की गई शर्तों और नियमों के अधीन हैं।

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Chaturmas Fasting Rules: चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं, अपना लिए ये नियम तो होंगे 5 फायदे

An image providing information regarding the rules of Chaturmas 2026, as well as what to eat and what to avoid

Chaturmas Food Guide: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। चातुर्मास यानी देवशयनी एकादशी/ आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर देवप्रबोधनी एकादशी/ कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलने वाले 4 महीने का आध्यात्मिक समय। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी/ देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी/ देवउठनी एकादशी तक के चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और भक्त पूजा, जप, तप, दान तथा सात्विक जीवन अपनाकर पुण्य अर्जित करते हैं।ALSO READ: Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

 

चातुर्मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इस समय सात्विक और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। चूंकि इन 4 महीनों में वर्षा ऋतु/मानसून अपने चरम पर होती है, जिससे हमारा पाचन तंत्र यानी डाइजेशन सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। इसीलिए सनातन धर्म में इस दौरान खान-पान के कुछ कड़े और वैज्ञानिक नियम बनाए गए हैं।

 

यहां जानें महीने के अनुसार नियम, जो आपको जानकारी देंगे कि चातुर्मास में क्या खाएं, क्या न खाएं?

 

चातुर्मास में हर महीने के हिसाब से कुछ विशेष चीजों को छोड़ने का नियम है, क्योंकि उस मौसम में उन चीजों में बैक्टीरिया या कीड़े लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है:

 

1. क्या बिल्कुल न खाएं?

पहला महीना श्रावण मास: हरी पत्तेदार सब्जियां, साग, पालक, आदि खाना पूरी तरह वर्जित है। बारिश के कारण इनमें कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया पनपने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

 

दूसरा महीना भाद्रपद मास: दही और मट्ठा/ छाछ का सेवन बंद कर देना चाहिए। इस मौसम में पेट में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

तीसरा महीना आश्विन मास: दूध का सेवन नहीं करना चाहिए या इसे बहुत कम कर देना चाहिए।

 

चौथा महीना कार्तिक मास: द्विदलन यानी दालें- जैसे चना, उड़द, मसूर, अरहर और बैंगन, मूली आदि खाने की मनाही होती है।

 

चारों महीने सामान्य परहेज: प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।ALSO READ: चातुर्मास 2026: सिद्धि की कामना है तो इन 4 कार्यों को न भूलें

 

2. क्या खाना सेहत के लिए अच्छा है?

हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दलिया, मूंग की छिलके वाली दाल, लौकी, तोरई, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाई जा सकती हैं।

 

गुनगुना पानी: इस मौसम में उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

 

सेंधा नमक: साधारण नमक की जगह भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करना अधिक फायदेमंद होता है।

 

चातुर्मास के नियम अपनाने के 5 बड़े फायदे

यदि आप इन 4 महीनों में अपनी जीभ पर नियंत्रण रखकर सात्विक भोजन अपनाते हैं, तो आपको ये 5 बड़े लाभ मिलते हैं:

 

1. मजबूत पाचन तंत्र

बारिश के मौसम में हमारी जठराग्नि यानी पाचन की शक्ति मंद हो जाती है। जब आप गरिष्ठ/ भारी, मांसाहारी या पत्तेदार भोजन नहीं खाते हैं, तो आपके पेट को आराम मिलता है। इससे गैस, अपच, और एसिडिटी जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।

 

2. इंफेक्शन और बीमारियों से बचाव

मानसून में हवा और पानी के जरिए बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों और डेयरी प्रोडक्ट्स को सही समय पर डाइट से हटाने से आप फूड पॉइजनिंग, डायरिया, टायफायड और पेट के कीड़ों से सुरक्षित रहते हैं।

 

3. बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन

चातुर्मास में केवल एक समय भोजन करने या सात्विक डाइट लेने से शरीर की सफाई होती है, यह भोजन शरीर के टॉक्सिंस अर्थात् विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह आपकी त्वचा पर चमक लाता है और वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

4. मानसिक शांति और एकाग्रता 

आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी- 'जैसा अन्न, वैसा मन'। यानी तामसिक भोजन, जैसे- लहसुन, प्याज, मांस के छोड़ने से आपके शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन सुधरता है। इससे आलस्य दूर होता है, गुस्सा कम आता है और मन शांत तथा केंद्रित रहता है।

 

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता

चातुर्मास के समय में लिया गया हल्का भोजन और गुनगुना पानी आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-खांसी, जुकाम और मौसमी बुखार से लड़ने की आपकी शारीरिक क्षमता मजबूत होती है।

 

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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

अर्जेंटीना Vs इंग्लैंड, दो पुराने दुश्मनों का सेमीफाइनल में मुकाबला

फ्रांस बनाम स्पेन के मैच के नतीजे के बाद सबकी निगाहें इंग्लैंड बनाम अर्जेंटीना के मुकाबले पर जा टिकेंगी। अर्जेंटीना 1962 में ब्राज़ील के बाद से ट्रॉफ़ी बचाने वाली पहली टीम बनने की कोशिश कर रहा है। वहीं इंग्लैंड 1966 में ट्रॉफ़ी उठाने के बाद से खिताबी मुकाबले तक नहीं पहुँचा है।लेकिन दोनों चिर प्रतिद्वंदी एक बार फिर आमने सामने हैं जहां इतिहास ने इन दोनों के बीच बहुत सारे यादगार मुकाबले देखे हैं।

“Hand of God” गोल

अटलांटा में सेमीफ़ाइनल ने वर्ल्ड कप की सबसे लंबे समय तक चलने वाली राइवलरी में से एक को फिर से शुरू कर दिया है। अर्जेंटीना ने 1986 का मशहूर क्वार्टरफाइनल जीता था जिसमें डिएगो माराडोना ने “Hand of God” गोल और गोल ऑफ़ द सेंचुरी बनाया था। इसके बाद 1998 में राउंड ऑफ़ 16 में पेनल्टी पर इंग्लैंड को बाहर कर दिया गया, जब डेविड बेकहम को डिएगो शिमोन को किक आउट करने के लिए बाहर भेज दिया गया था। बेकहम, जिन्हें घर पर हार के लिए काफी दोषी ठहराया गया था, ने 2002 में जब दोनों टीमें अगली बार मिलीं तो पेनल्टी स्पॉट से एकमात्र गोल किया।

अर्जेंटीना का सफर

गत विजेता अर्जेंटीना ने कड़ी परीक्षा पार करके आखिरी चार में जगह बनाई है। लियोनेल स्कालोनी की टीम को Round of 32 में केप वर्डे को हराने के लिए अतिरिक्त समय की ज़रूरत पड़ी, फिर 11 मिनट बाकी रहते दो गोल से पीछे होने के बाद मिस्त्र को हराया। शनिवार को स्विट्जरलैंड पर 3-1 की अतिरिक्त समय जीत में भी ऐसा ही दिखा, जिसमें जूलियन अल्वारेज़ और लुटारो मार्टिनेज ने गोल किए, जब डैन एनडोये ने एलेक्सिस मैक एलिस्टर का पहला गोल कैंसिल कर दिया था।

लियोनेल मेसी इस टूर्नामेंट में स्विट्जरलैंड के खिलाफ पहली बार गोल करने में नाकाम रहे।लेकिन अर्जेंटीना की तरक्की ने उसके आस-पास की टीम के योगदान को भी दिखाया है। सात और खिलाड़ियों ने गोल किए हैं, जिससे साउथ अमेरिकन टीम 2019 कोपा अमेरिका के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में लगातार पांचवें सेमीफाइनल में पहुंची ह।

इंग्लैंड का सफर

इंग्लैंड को भी इसी तरह मुश्किलों से उबरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। थॉमस ट्यूशेल की टीम ने राउंड ऑफ़ 32 में एक गोल से पिछड़ने के बाद DR कांगो को हराया और फिर 10 खिलाड़ियों के साथ आधे घंटे से ज़्यादा समय तक खेलने के बावजूद को-होस्ट मेक्सिको को हरा दिया।

फिर थ्री लायंस ने एंड्रियास श्जेल्डरुप के ओपनर से उबरकर अपने क्वार्टर फ़ाइनल में एक्स्ट्रा टाइम के बाद नॉर्वे को 2-1 से हराया।जूड बेलिंगहैम ने नॉर्वे के ख़िलाफ़ दो गोल किए और टूर्नामेंट में छह गोल करके हैरी केन के साथ इंग्लैंड के लिए जॉइंट टॉप स्कोरर बन गए।

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo petrol AT real-world mileage compared

Tata Harrier vs Tata Sierra

The new 1.5-litre ‘Hyperion’ turbo-petrol engine was developed in-house by Tata and first debuted on the Sierra in 2025. In January 2026, the carmaker introduced this engine into its larger stablemate, the Harrier. Since its inception in 2019, the Harrier has been offered only with a diesel engine. We’ve put the turbo-petrol automatic versions of both SUVs through our real-world mileage tests and compared their efficiency figures to find out which is more frugal. 

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo petrol AT: Specifications

Tata Harrier vs Hyundai Alcazar turbo-petrol: Specification and price 

 

Tata Harrier

Tata Sierra

Engine

4 cyls, turbo-petrol

4 cyls, turbo-petrol

Displacement (cc)

1,498

1,498

Power (hp)

170

160

Torque (Nm)

280

255

Gearbox

6AT

6AT

Fuel tank (litres)

50

50

Kerb weight (kg)

1,738

1,552

Though powered by the same 1.5-litre turbo-petrol engine, both SUVs are tuned differently. While the Sierra’s mill develops 160hp and 255Nm, the Harrier’s unit develops more power and torque at 170hp and 280Nm, respectively. However, the larger Harrier is 186 kg heavier than the Sierra. Common to both SUVs are 6-speed torque-converter automatics and 50-litre fuel tanks. 

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo petrol AT:  Real-world fuel efficiency

In our real-world fuel efficiency tests, the Sierra’s lighter weight helped it deliver 0.77kpl better fuel efficiency than the Harrier overall. Despite the Harrier getting an ‘Eco’ driving mode over the Sierra to improve fuel efficiency, the latter outperformed it by 0.32kpl in the city. On the highway, the efficiency gap increased to 1.21kpl because at 100kph, the Harrier’s engine runs at 1,900rpm in top gear, whereas the Sierra cruises at 1,750rpm in sixth gear at the same speed.

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo petrol AT: Price

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo petrol AT: Price

 

Tata Harrier

Tata Sierra

Petrol automatic price range (Rs lakh)

17.68 – 24.85

17.99 – 20.99

Considering turbo-petrol automatic price ranges, the Harrier turbo petrol automatic is Rs 31,000 cheaper than the Sierra. This is because the engine-gearbox combo is offered on the former’s one above the base trim, while the latter gets it on a mid-level trim onward. At the top end, however, the Harrier is pricier than the Sierra by Rs 3.86 lakh. 

Autocar India’s fuel-efficiency testing

Before our real-world fuel-efficiency tests, we fill our test cars’ tanks to the brim and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations. These cars are driven in fixed city and highway loops in and around Navi Mumbai, and we maintain certain average speeds. Throughout the tests, there is only one person in each car, operating the air conditioner and other electricals, such as the audio system, indicators and wipers, when required, just like a regular user would. Periodic driver swaps further neutralise variations in driver patterns. At the end of each cycle, we calculate efficiency by filling the tanks to full again.

CBSE 2nd Board Exam Result Class 10: इस हफ्ते जारी होगा 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट? जानें नतीजों में क्यों हो रही है देरी

CBSE 2nd Board Exam Result Class 10: सीबीएसई बोर्ड से 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा दे चुके 6.68 लाख छात्रों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। 15 से 21 मई के बीच हुई दूसरी बोर्ड परीक्षा के बाद से अब 52 दिनों से ऊपर हो चुके हैं और अब तक रिजल्ट का कहीं नामो-निशान नहीं है। छात्र बड़ी बेचैनी से रिजल्ट की राह देख रहे हैं। बोर्ड की ओर से भी रिजल्ट जारी होने की तारीख पर कोई अपडेट नहीं है। हालांकि मीडिया में आ रही खबरों में अब सीबीएसई बोर्ड 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट आज जारी होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

बोर्ड से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं कक्षा के सेकंड एग्जाम के लिए कुल 6,68,854 छात्रों ने पंजीकरण किया था। इसमें से 5,25,655 कैंडिडेट अपने स्कोर सुधारने के लिए शामिल हुए, जबकि 85,285 छात्रों ने कंपार्टमेंट कैटेगरी में रजिस्टर किया। छात्रों के स्टैटिस्टिक्स और सीबीएसई 10वीं कक्षा के दूसरे बोर्ड एग्जाम में उनके प्रदर्शन की पूरी जानकारी रिजल्ट के साथ आने की उम्मीद है।

रिजल्ट में देरी की वजह

सीबीएसई बोर्ड ने 17 फरवरी से 11 मार्च, 2026 के बीच 10वीं कक्षा के मुख्य बोर्ड एग्जाम कराए थे। सीबीएसई 10वीं की पहली परीक्षा के रिजल्ट 15 अप्रैल, 2026 को घोषित किए गए थे। परीक्षार्थियों को अपने परीक्षा स्कोर सुधारने का दूसरा मौका देने के लिए, बोर्ड ने मई 2026 में दूसरा सीबीएसई 10वीं एग्जाम कराया था। एग्जाम 15 से 21 मई, 2026 तक हुए थे। सीबीएसई 10वीं के दूसरे बोर्ड एग्जाम खत्म हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, अब तक बोर्ड रिजल्ट जारी न होना चिंता खड़ी करता है।

बोर्ड ने 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट में इतनी देर होने का कोई ऑफिशियल कारण नहीं बताया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देरी दो-एग्जाम पॉलिसी के शुरुआती साल की वजह से हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड ने बेस्ट-ऑफ-टू स्कोर को इवैल्यूएट करने, इकट्ठा करने और कैलकुलेट करने के लिए एक नया एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस शुरू किया है। यह ध्यान रखना चाहिए कि क्लास 10 के छात्रों के फाइनल रिजल्ट की घोषणा करते समय दोनों में से सबसे अच्छे स्कोर को ध्यान में रखा जाएगा।

दूसरी बोर्ड परीक्षा में कौन शामिल हो सकता था?

इम्प्रूवमेंट श्रेणी में : जो छात्र पहला एग्जाम पास कर चुके हैं, वे अपने स्कोर सुधारने के लिए साइंस, मैथेमेटिक्स, सोशल साइंस और लैंग्वेज जैसे तीन मुख्य विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।

कम्पार्टमेंट कैटेगरी में : जो स्टूडेंट्स पहले एग्जाम में कम्पार्टमेंट में थे, वे उसी कैटेगरी में दूसरा एग्जाम दे सकते हैं।

अन्य मामलों में : कोई स्टूडेंट इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट दोनों प्रोविजन में आ सकता है और सीबीएसई की गाइडलाइंस के अनुसार, उसे दोनों ऑप्शन इस्तेमाल करने की इजाजत दी जा सकती है।

एक रिप्लेसमेंट सब्जेक्ट ऑप्शन भी है। जो स्टूडेंट्स पहले ही पास हो चुके हैं, लेकिन किसी खास सब्जेक्ट को बदलना या सुधारना चाहते हैं, वे उस मकसद के लिए दूसरे एग्जाम में बैठ सकते हैं।

CAT 2026 Notification: जल्द जारी किया जाएगा कैट 2026 का नोटिफिकेशन, यहां जानें आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न

Hyundai कार खरीदने का शानदार मौका! क्रेटा पर 1 लाख तक की छूट, जानें किस मॉडल पर मिल रहा कितना ऑफर

अगर आप जुलाई 2026 में नई हुंडई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने जुलाई 2026 में अपनी कुछ लोकप्रिय कारों पर खास ऑफर शुरू किए हैं। इन ऑफर्स के तहत ग्राहकों को 1 लाख रुपये तक की बचत का मौका मिल रहा है। ये लाभ क्रेटा, वरना (Verna), ग्रैंड i10 निओस, एक्सटर (Exter) और ऑरा (Aura) जैसी कारों पर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कंपनी आसान फाइनेंस और आकर्षक लोन योजनाएं भी दे रही है, जिससे नई कार खरीदना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। आइए जानते हैं किस हुंडई के किस मॉडल पर मिल रही छुट

किस कार पर मिल रहा सबसे ज्यादा ऑफर

Creta: जुलाई 2026 में हुंडई की सभी कारों में सबसे बड़ा ऑफर क्रेटा (Creta) पर दिया जा रहा है। अगर आप इस एसयूवी को खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस महीने आपको 1 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है। भारतीय बाजार में क्रेटा की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.91 लाख रुपये है, जबकि इसके टॉप मॉडल की कीमत 20.11 लाख रुपये तक जाती है। कंपनी का यह ऑफर नई कार खरीदने वालों के लिए अच्छा मौका माना जा रहा है।

Verna: जुलाई 2026 में हुंडई कंपनी ने वरना (Verna) पर 65,000 रुपये तक का लाभ दे रही है। वरना की एक्स-शोरूम कीमत 10.99 लाख रुपये से शुरू होकर 18.41 लाख रुपये तक जाती है। अपने आकर्षक डिजाइन और फीचर्स के कारण ये कार मिड-साइज सेडान श्रेणी में होंडा सिटी, स्कोडा स्लाविया और फॉक्सवैगन वर्टस जैसी कारों को कड़ी टक्कर देती है। अपने बेहतरीन फीचर्स के कारण ग्राहकों की पसंद बनी हुई है।

Grand i10 Nios: जुलाई 2026 में हुंडई ग्रैंड i10 निओस खरीदने वालों के लिए भी अच्छा मौका है। कंपनी इस हैचबैक पर 70,000 रुपये तक का लाभ दे रही है। ग्रैंड i10 निओस की एक्स-शोरूम कीमत 5.60 लाख रुपये से शुरू होकर 8.04 लाख रुपये तक जाती है। किफायती कीमत, अच्छे फीचर्स और बेहतर माइलेज के कारण यह कार अपने सेगमेंट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट जैसी लोकप्रिय हैचबैक को कड़ी चुनौती देती है।

Exter and Aura: हुंडई ने जुलाई 2026 में एक्सटर और ऑरा पर भी आकर्षक ऑफर दिए हैं। इस महीने एक्सटर खरीदने पर ग्राहकों को 40,000 रुपये तक का फायदा मिल सकता है। इस एसयूवी की एक्स-शोरूम कीमत 5.81 लाख रुपये से 9.61 लाख रुपये के बीच है। वहीं, हुंडई ऑरा पर 30,000 रुपये तक का लाभ दिया जा रहा है। इस कॉम्पैक्ट सेडान की एक्स-शोरूम कीमत 6 लाख रुपये से शुरू होकर 8.60 लाख रुपये तक जाती है।

आसान फाइनेंस की सुविधा

जुलाई 2026 में हुंडई सिर्फ कैश डिस्काउंट ही नहीं, बल्कि कार खरीदने वालों के लिए कई आसान फाइनेंस सुविधाएं भी दे रही है। कंपनी कुछ मॉडल्स पर 100% तक ऑन-रोड कीमत के लिए फाइनेंस की सुविधा, लोन की प्रोसेसिंग फीस में 50% तक की छूट और तय नियमों व शर्तों के अनुसार 100% तक फोरक्लोजर शुल्क में राहत का लाभ दे रही है। इससे ग्राहकों के लिए नई कार खरीदना पहले की तुलना में ज्यादा आसान और किफायती हो सकता है।

जुलाई 2026 के ऑफर में हुंडई के ये मॉडल शामिल हैं

  • Hyundai Creta: Rs 1 लाख तक
  • Hyundai Grand i10 Nios: Rs 70,000 तक
  • Hyundai Verna: Rs 65,000 तक
  • Hyundai Exter: Rs 40,000 तक
  • Hyundai Aura: Rs 30,000 तक

नई हुंडई कार खरीदने से पहले अपने नजदीकी डीलरशिप पर जाकर ऑफर की पूरी जानकारी जरूर लें। कंपनी ने अधिकतम छूट और फायदे की जानकारी दी है, लेकिन वास्तविक डिस्काउंट कार के वेरिएंट, शहर, डीलर और उपलब्ध स्टॉक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए बुकिंग करने से पहले अपने पसंदीदा मॉडल पर मिलने वाले सटीक ऑफर की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।

लॉर्ड्स जीतने के बाद बेटियों ने दिल भी जीता, 2 इंग्लैंड की खिलाड़ियो को दी विदाई (Video)

270 रनों से लॉर्ड्स टेस्ट मैच को जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्यों ने ड्रेसिंग रूम में जश्न मनाया लेकिन मैदान जीतने के बाद दिल भी जीत लिया। इंग्लैंड की दो महिला क्रिकेटरों टैमी ब्यूमोंट और हीथर नाइट ने लॉर्ड्स टेस्ट मैच से पहले और मैच के दौरान संन्यास की घोषणा की थी। इन दो क्रिकेटरों को ड्रेसिंग रूम में बुलाकर भारतीय टीम ने विदाई समारोह रखा।

ब्यूमोंट इंग्लैंड की बेहतरीन बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह रही हैं। वह इंग्लैंड की उन केवल दो महिला खिलाड़ियों में से एक हैं – और कुल मिलाकर इंग्लैंड की उन पांच क्रिकेटरों में से एक – जिन्होंने तीनों फ़ॉर्मेट में इंटरनेशनल शतक लगाया है। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 2023 विमेंस एशेज़ के दौरान ट्रेंट ब्रिज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ नाबाद 208 रन की ऐतिहासिक पारी रही, जिससे वह टेस्ट में दोहरा शतक लगाने वाली इंग्लैंड की पहली महिला खिलाड़ी बनीं।

वहीं इंग्लैंड महिला टीम की पूर्व कप्तान हीथर नाइट ने अपने करियर में 15 टेस्ट, 160 वनडे और 145 टी-20 मैच है। यह किसी भी दूसरी इंग्लैंड महिला क्रिकेटर के मुकाबले सबसे ज़्यादा मैच हैं। उन्होंने 2010 में इंग्लैंड के लिए पर्दापण किया था, जब वह 18 साल की उम्र में भारत दौरे के लिए चोटिल सारा टेलर की जगह टीम में आई थीं।

इन दोनों खिलाड़ियों के करियर का परिकथा अंत नहीं हो पाया क्योंकि भारत ने लॉर्ड्स टेस्ट रिकॉर्ड 270 रनों से जीत लिया।यास्तिका भाटिया के शतक, दोनों पारियों में स्मृति मंधाना के अर्धशतक और क्रांति गौड़ के पंजे की बदौलत भारत ने ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड को सोमवार को 270 रन के बड़े अंतर से हरा दिया। चौथे दिन का खेल जब शुरू हुआ तब भारत जीत से चार विकेट दूर था और स्नेह राणा ने अर्धशतक बना चुकीं एमी जोंस के रूप में भारत को दिन की पहली सफलता दिला दी। इसके बाद दीप्ति शर्मा ने इसी वॉन्ग और लॉरेन बेल को बोल्ड किया।

राणा ने एकलस्टन को 50 के निजी स्कोर पर बोल्ड करते हुए इंग्लैंड का अंतिम विकेट गिराया और भारत ने यह मुक़ाबला 270 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया। इंग्लैंड की ओर से इस मैच में सबसे अच्छा प्रदर्शन एकलस्टन ने किया जिन्होंने अर्धशतक लगाने के साथ ही गेंदबाज़ी में दूसरी पारी में पंजा हासिल किया।

भारत ने इंग्लैंड के सामने इस टेस्ट में जीत के लिए 457 रनों का लक्ष्य रखा था जिसके जवाब में तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने 130 के स्कोर पर छह विकेट गंवा दिए थे और जोंस अर्धशतक बनाकर खेल रही थीं। टैमी ब्यूमोंट और हीदर नाइट अपने अंतररारष्ट्रीय करियर का अंतिम मैच खेल रही थीं और दोनों को अंतिम पारी में गौड़ ने अपना शिकार बनाया।