NEET UG 2026 Result जारी! पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने किया टॉप, लड़कियों का शानदार रहा प्रदर्शन

NEET UG Result 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट), NEET UG 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट और फाइनल आंसर-की जारी कर दी है। एग्जाम में शामिल हुए 20 लाख से अधिक उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से 715/720 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) प्राप्त की है। कुल 11.21 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं। क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। एग्जाम 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी।

क्यों जल्दी जारी हुआ रिजल्ट?

NTA द्वारा जारी फाइनल आंसर-की के अनुसार, परीक्षा का एक सवाल ड्रॉप कर दिया गया है। इसी आधार पर अंतिम परिणाम तैयार किए गए हैं। NTA ने कहा कि NEET-UG के नतीजे समय पर घोषित किए गए हैं ताकि मेडिकल कोर्स में एडमिशन और उम्मीदवारों की काउंसलिंग का शेड्यूल योजना के अनुसार आगे बढ़ सके।

सभी क्वालिफ़ाई करने वाले उम्मीदवारों में से 58 प्रतिशत से ज़्यादा महिलाएं हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के क्वालिफ़ाई करने की दर भी अधिक रही। परीक्षा में शामिल होने वाली 56.8 प्रतिशत महिलाएं क्वालिफ़ाई हुईं हैं। जबकि पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा 55.1 प्रतिशत था।

लड़कियों का प्रदर्शन रहा बेहतर

इस साल NEET UG 2026 में लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा:-

  • कुल सफल उम्मीदवारों में 58% से अधिक लड़कियां हैं।
  • परीक्षा में शामिल हुई 56.8% छात्राएं सफल रहीं।
  • 55.1% छात्र क्वालिफाई कर सके।

कैटेगरी के अनुसार सफल उम्मीदवार

जनरल (General): 2.91 लाख

OBC-NCL: 5.12 लाख

SC: 1.59 लाख

ST: 63,716

जनरल-EWS: 95,026

PwBD: 3,666

PwD: 303

साथ ही सभी कैटेगरी के कट-ऑफ अंक और पर्सेंटाइल भी जारी कर दिए गए हैं।

कितने छात्रों ने बनाए बड़े स्कोर?

NTA ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की है। इनमें प्रमुख नाम हैं:-

जिगमेट यांगचेन लामो (लद्दाख) – 530 अंक

ध्रुव त्रिपाठी (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – 606 अंक

फहमीदा अनीस (लक्षद्वीप) – 573 अंक

इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की गई है। कुल 17 राज्य टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक। जबकि 26 राज्य टॉपर्स ने 690 से अधिक अंक हासिल किए हैं।

परीक्षा शुल्क वापसी की प्रक्रिया

NTA ने बताया कि 3 मई को आयोजित परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार परीक्षा शुल्क की वापसी (Refund) के लिए अपनी बैंक खाते की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। अब तक 11.46 लाख से अधिक उम्मीदवार अपनी बैंक डिटेल्स जमा कर चुके हैं।

ऐसे करें रिजल्ट चेक

री-NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही अब उम्मीदवारों की नजर काउंसलिंग प्रक्रिया पर होगी, जिसके जरिए देशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।

Income Tax Bill: विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने वाला बिल संसद में आएगा, जानिए क्या बदलेगा

Income Tax Bill: केंद्र सरकार मानसून सत्र में Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश करने की तैयारी में है। यह बिल पिछले महीने लाए गए अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा। इस अध्यादेश के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर आयकर से छूट दी गई थी।

इस बिल का मकसद क्या है?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा था। ऐसे में सरकार ज्यादा विदेशी निवेश लाना चाहती है। इसी मकसद से यह टैक्स छूट दी गई थी। सरकार चाहती है कि भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा विदेशी निवेश आए। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी। सरकारी बॉन्ड बाजार भी मजबूत होगा।

सरकार का मानना है कि दुनिया में इस समय काफी अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन भी कई जगह प्रभावित है। ऐसे माहौल में विदेशी पूंजी आकर्षित करना जरूरी है।

विदेशी निवेशकों को क्या फायदा होगा?

सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज से होने वाली कमाई और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी गई है।

पहले विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए शेयर और बॉन्ड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी लगता था।

अध्यादेश क्यों लाना पड़ा?

जब यह फैसला लिया गया, तब संसद का सत्र नहीं चल रहा था। इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया। बाद में इसे कानून बनाने के लिए अब संसद में बिल लाया जाएगा।

मानसून सत्र में और क्या होगा?

सरकार MSME Development (Amendment) Bill, 2026 भी पेश करेगी। इसका मकसद छोटे कारोबारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। साथ ही भुगतान में देरी से जुड़े विवादों का समाधान भी मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार वित्त वर्ष 2022-23 के लिए Demands for Excess Grants भी संसद में पेश करेगी।

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विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराने के कुछ घंटों बाद अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप HMS मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया।

अर्जेंटीना ने इसे सैन्य घुसपैठ करार दिया। विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो ने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं ब्रिटेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यात्रा की जानकारी पहले ही अर्जेंटीना सरकार को दे दी गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंचने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर ‘लास माल्विनास सन अर्जेंटीना’ (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर लहराया। अर्जेंटीना में फॉकलैंड को माल्विनास कहा जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों का पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति ने इंग्लैंड को समुद्री लुटेरा कहा मैच से पहले अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने इंग्लैंड को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाले समुद्री लुटेरे तक कहा था। मैच जीतने के बाद उन्होंने खिलाड़ियों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। हमें स्टेडियम में यह बैनर ले जाने से रोका गया, लेकिन वे भूल गए कि माल्विनास हमारे खून और हमारे दिल में बसता है।” ब्रिटेन ने नाराजगी जताई, कहा- खेल में राजनीति न हो वहीं, ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी पीटर काइल ने खिलाड़ियों के बैनर को पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और फीफा को जांच करनी चाहिए कि कहीं खिलाड़ियों ने राजनीतिक संदेश देने संबंधी नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया। उन्होंने कहा, “राजनीति को फुटबॉल से दूर रहना चाहिए। आगे क्या कार्रवाई होगी, इसका फैसला अब फीफा करेगा।” फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में 44 साल से विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड पर ब्रिटेन का रुख क्या है ब्रिटेन ने दोहराया कि फॉकलैंड द्वीप के लोगों ने कई बार जनमत के जरिए ब्रिटिश क्षेत्र बने रहने की इच्छा जताई है। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा- ब्रिटेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। फॉकलैंड द्वीप के लोग ब्रिटिश हैं और अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार उन्हीं के पास है।

विराट और श्रेयस के अर्धशतक के बावजूद भारत इंग्लैंड के खिलाफ 233 रनों पर सिमटा

 

ENGvsIND श्रेयस अय्यर (66) और विराट कोहली (65) के अर्धशतकों से भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ गुरूवार को दूसरे वनडे में 44 ओवर में 233 रन का स्कोर बनाया। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम के मध्यक्रम ने पूरी तरह से निराश किया है।

अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुन्दर और शिवम दुबे के विकेट गुच्छों में गिरे। उससे पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भारतीय टीम आसानी से 300 के स्कोर को पार कर सकती है। हालांकि जोफ़्रा आर्चर, साकिब महमूद और गस एटकिंसन ने कमाल का काउंटर अटैक किया। कोहली के विकेट पतन के बाद सबसे बड़ी साझेदारी 20 रनों की हुई, जो श्रेयस और बुमराह के बीच हुई। परिणाम यह रहा कि भारतीय टीम एक सम्मानजनक स्कोर से भी थोड़ी सी दूर रह गई।

श्रेयस ने 71 गेंदों पर 66 रन की पारी में पांच चौके और दो छक्के लगाए जबकि विराट कोहली ने 66 गेंदों पर 65 रन में आठ चौके लगाए। कप्तान शुभमन गिल ने 33 और ओपनर रोहित शर्मा ने 26 रन का योगदान दिया। जसप्रीत बुमराह ने 13 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 20 रन बनाकर भारत को 233 तक पहुंचाया। यह मेन इन ब्लू की तरफ से सबसे भरोसेमंद बैटिंग नहीं थी।

शुभमन गिल ने तेज़ शुरुआत दी, लेकिन रोहित शर्मा लय में नहीं दिखे और कुछ शुरुआती राहत मिलने के बावजूद इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए। विराट कोहली ने एक अच्छी हाफ सेंचुरी के साथ पारी को संभाला, जबकि श्रेयस अय्यर ने एक कीमती पारी खेलकर भारत को एक सम्मानजनक टोटल तक पहुंचाया।

जसप्रीत बुमराह ने कुछ ज़रूरी रन जोड़े, जिससे भारत को आखिर में एक और धक्का मिला। इंग्लैंड की बॉलिंग पूरी टीम की परफॉर्मेंस थी। जोफ्रा आर्चर ने तीन अहम विकेट लेकर लीड किया, जबकि गस एटकिंसन ने भी तीन विकेट लेकर उनकी बराबरी की। साकिब महमूद ने भी दो विकेट लिए, जिससे यह पक्का हो गया कि भारत कभी भी कोई मोमेंटम न बना पाए। पहली पारी में पेसरों ने नौ विकेट लिए।

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स ने ओडिशा में शुरू किया एल्युमीनियम फॉयल प्लांट, ₹800 करोड़ का निवेश

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी लिमिटेड (SMEL) की सब्सिडियरी SMEL Steel Structural Pvt. Ltd. ने ओडिशा के संबलपुर स्थित अपनी एल्युमीनियम फॉयल यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर कुल करीब ₹800 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश में एल्युमीनियम फॉयल और फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) दोनों यूनिट शामिल हैं।

18,000 TPA क्षमता वाली फॉयल यूनिट शुरू

नई एल्युमीनियम फॉयल यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 18,000 टन (TPA) है। यहां 6 से 40 माइक्रोन मोटाई वाली प्रीमियम ग्रेड एल्युमीनियम फॉयल बनाई जाएगी। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

सितंबर तक शुरू होगी FRP यूनिट

श्याम मेटालिक्स की Aluminium Flat Rolled Products (FRP) यूनिट अंतिम चरण में है। इसके सितंबर 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की सालाना क्षमता 60,000 TPA होगी। यहां 0.3 से 4.0 मिमी मोटाई वाले एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

ऑपरेटिंग मार्जिन में 40-50% बढ़ोतरी की उम्मीद

कंपनी का कहना है कि दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद ऑपरेटिंग मार्जिन में 40% से 50% तक सुधार हो सकता है। बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ज्यादा रियलाइजेशन से रेवेन्यू में भी मजबूत बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के दम पर उसकी टॉपलाइन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

श्याम मेटालिक्स का कहना है कि यह निवेश वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा। इससे हाई-क्वालिटी एल्युमीनियम उत्पादों की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

श्याम मेटालिक्स ने क्या कहा?

श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बृज भूषण अग्रवाल ने कहा कि संबलपुर में फॉयल प्रोडक्शन की शुरुआत कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के जरिए नए बाजारों में विस्तार करना है। इससे ओडिशा में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सितंबर तक FRP यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MP बनेगा निवेश का नया हब, भारत टेक्स-2026 में मिले 20,193 रुपए करोड़ के प्रस्ताव, 27 हजार नौकरियों का रास्ता साफ

'हमारे मध्यप्रदेश में लेबर की कोई प्रॉब्लम नहीं होती। अगर कोई उद्योगपति यहां उद्योग लगाकर 10-20 साल कहीं और कुछ करना चाहे तो उसके उद्योग को कुछ नहीं होगा। प्रदेश की जनता अपने काम को अच्छे से करना और निभाना जानती है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव 16 जुलाई को नई दिल्ली की होटल द लीला पैलेस में आयोजित 'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर कई उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेश संबंधी एमओयू साझा किए गए।

बता दें, राज्य ने नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 तथा “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश” के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों आयोजनों में प्रदेश को 20 हजार 193 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों से लगभग 27 हजार 592 लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। दोनों कार्यक्रमों में सीएम डॉ. यादव ने निवेशकों-उद्योगपतियों और वैश्विक ब्रांड के प्रतिनिधियों से गहन चर्चा की। उन्होंने सभी को जनवरी-2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) में भाग लेने का आमंत्रण दिया।

 

'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मैं सभी उद्योगपतियों-निवेशकों का अभिनंदन करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के नक्शे पर अपनी साख और धाक बना रहा है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हम देश के बदलते समय को देख पा रहे हैं। आदि काल से सोने की चिड़िया जैसे अलंकरणों से भारत की पहचान होती रही है। 12 साल का समय बहुत छोटा होता है। इस छोटे से समय में भी वो सारी चीजें भी हो गईं, जिसके लिए कभी-कभी कहा जाता था कि ये तो भारत में हो ही नहीं सकता, भारत के लोग ये कैसे कर देंगे, ये तो यहां असंभव है। मुझे इस बात का संतोष है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में वर्तमान के समय में असंभव भी संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात यह भी है कि वो निर्णय जो राजनेताओं के कदम रोकते थे , उन निर्णयों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने मिथक तोड़े हैं। अब तो लोग यह कहने लगे हैं कि जो सारे जहां में असंभव है, वो भारत में संभव है।  

 

राज्य कल्याण के लिए उठाए कई कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आम तौर पर जब कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठता था, तो वह जिस प्रदेश और शहर का होता था, राजनीति उसके आसपास घूमती थी। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने समान रूप से सभी को अवसर प्रदान किए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया, सभी राज्यों को प्रगति के समान अवसर और प्रमोशन के मौके दिए। हमारी सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें और बाकी राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि मैं अभी से आप सभी को जीआईएस 2027 का निमंत्रण देने आया हूं, यही समय के परिवर्तित होने का प्रमाण है। हमारी सरकार ने व्यवसाय को गंभीरता से लिया है। हमारे अधिकारियों ने प्रजेंटेशन के जरिये सरकार की नीति और नियति बताने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एक वर्ष को छोड़ दिया जाए तो, बाकी के वर्ष में हमने राज्य के कल्याण के लिए कई कदम उठाए। 

 

टेक्सटाइल में अनंत संभावनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे राज्य ने सारे सेक्टर में प्रतिबद्धता सिद्ध की है। कपास और ऑर्गेनिक कपास की खेती के लिए राज्य नंबर-1 है। लेकिन, ब्रिटिश काल की नीतियों और सरकारों की उदासीनता ने वो ताज छीन लिया। हमारे इंडस्ट्रियल पार्क का जिस दिन भूमि-पूजन होता है, उस दिन सारे प्लॉट भी आवंटित हो जाते हैं। जीआईएस 2025 में हमारे पास 32 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए थे। जीआईएस के प्रस्ताव अगर 10 फीसदी भी धरातल पर उतर जाएं तो बहुत बड़ा आंकड़ा माना जाता है। लेकिन, डेढ़ साल में ही 10 लाख करोड़ के प्रस्ताव न केवल धरातल पर उतरे, बल्कि काम भी शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बिजली मध्यप्रदेश से मिल रही है। कहीं और उद्योग लगाओ तो जनरेटर का सेट लगाना पड़ता है, लेकिन अगर प्रदेश में उद्योग लगाओ तो बिजली जाती ही नहीं है। हमारे पास बिजली सरप्लस है। मध्यप्रदेश में कुशल और व्यवहारिक कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता भी है। राज्य में एमएसएमई, लघु-कुटीर उद्योग, माइनिंग, फार्मा, टेक्सटाइल प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनंत संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश देश का दूसरा बड़ा खाद्यान्न उत्पादक राज्य है। देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं का उपार्जन मध्यप्रदेश ने किया है। मध्यप्रदेश फूड इंडस्ट्री के लिए अनुकूलता वाला राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि अगर एक रुपए निवेश करें तो 75 पैसे सब्सिडी के रूप में वापस मिल जाते हैं। हमारी सरकार रोजगार परक उद्योग स्थापित करने पर श्रमिकों के वेतन के लिए निवेशकों को 5 साल तक 5000 रुपए प्रति श्रमिक आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक है। बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश में फूड पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, मल्टी मॉडल पार्क जैसी अनेकों सौगातें मिली हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर लंबा रोड नेटवर्क है। सुदृढ़ रेलवे कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतरराष्ट्रीय कंटेनर, एक्सप्रेसवे और हाइवे हैं। आइए, मध्यप्रदेश के साथ मिलकर आगे बढ़ें।

 

भारत टेक्स-2026 में क्या हुआ

भारत मंडपम में आयोजित टेक्सटाइल राउंड टेबल में प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, तकनीकी वस्त्र, निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और निवेश प्रोत्साहन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस आयोजन में 1,592 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 15,700 रोजगार सृजित होने की संभावना है। इंटरैक्टिव सेशन के दौरान एमपीआईडीसी ने निर्यात संवर्धन, ई-कॉमर्स, वैश्विक व्यापार, एमएसएमई और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। साथ ही रक्षा, डेटा सेंटर, आईटी, एआई, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण सहित अनेक क्षेत्रों में निवेश अवसर प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा दिल्ली निवेश संवाद में रक्षा, डेटा सेंटर, ट्रांसफॉर्मर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग और खिलौना उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में 18 हजार 601 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 11,892 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों, साझेदारियों और एमओयू के माध्यम से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 

दुनियाभर के निवेशक हो रहे आकर्षित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2025 को मध्यप्रदेश के धार को देश के पहले पीएम मित्र पार्क की सौगात दी थी। गारमेंट सेक्टर के इस पार्क के भूमि-पूजन के साथ ही यहां 90 प्रतिशत भू-खंडों का आवंटन भी पूरा कर लिया गया। यह एक रिकॉर्ड है और काम के प्रति राज्य सरकार की दक्षता प्रकट करती है। उन्होंने कहा कि पीएम मित्र पार्क के आसपास भी निवेशक अब उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की मांग कर रहे है।

प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूलता, कच्चे धागे के लिए माल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर मध्यप्रदेश निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश की बढ़ती निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन की शक्ति से दुनिया परिचित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर में विशेष पहचान रहा है। राज्य में उद्योगों को आर्थिक सब्सिडी, बिजली आपूर्ति, भूमि आवंटन, स्टांप ड्यूटी में छूट जैसी नीतियों से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में है और अपनी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में मध्यप्रदेश को 33 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। वर्ष 2027 में फिर जीआईएस का आयोजन होगा, उम्मीद है कि इसमें निवेश का रिकॉर्ड टूटेगा।

AI Bubble: क्या AI का बबल फूट रहा? इन 5 बड़े ‘क्रैश’ ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार को नई रफ्तार दी है। AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनिया भर के बाजारों में AI शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI का बूम भी डॉट-कॉम बबल की तरह खत्म होने वाला है?

दक्षिण कोरिया का Kospi Index गुरुवार को 6% से ज्यादा टूट गया। AI चिप बनाने वाली SK Hynix के शेयर 11% और Samsung Electronics के शेयर 8% गिर गए। निवेशकों को अब कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई की चिंता सता रही है।

आइए जानते हैं हाल के समय में AI थीम से जुड़े 5 बड़े झटकों के बारे में।

IBM

आईटी और कंसल्टिंग कंपनी IBM के शेयर जुलाई 2026 में करीब 25% टूट गए। इससे कंपनी का करीब 70 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया। कमजोर शुरुआती नतीजों के साथ यह चिंता भी बढ़ी कि AI कंपनी के पारंपरिक कंसल्टिंग कारोबार पर असर डाल सकता है।

SaaS सेक्टर

सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर फरवरी 2026 में बुरी तरह टूटे। इसकी वजह Anthropic का नया Agentic AI प्लेटफॉर्म रहा। इसके बाद Salesforce, Adobe और ServiceNow जैसे शेयरों में तेज बिकवाली हुई। निवेशकों को लगा कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है।

Nvidia

AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia को जनवरी 2025 में बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 600 अरब डॉलर घट गया। इसकी वजह चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek का सस्ता AI मॉडल था। इसके बाद निवेशकों को डर सताने लगा कि महंगे AI चिप्स की मांग उम्मीद से कम हो सकती है।

Alphabet और Big Tech

टेक दिग्गज कंपनियों Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft के शेयर जून 2026 में फिसल गए। Alphabet करीब 6% और Amazon लगभग 5% टूट गया। निवेशकों को चिंता थी कि AI पर हो रहा भारी खर्च कब मुनाफे में बदलेगा।

भारतीय आईटी सेक्टर

भारतीय आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बचीं। IBM की गिरावट के बाद AI को लेकर चिंता बढ़ गई। Infosys, TCS, Wipro, HCLTech, Persistent Systems, Coforge और LTIMindtree जैसे शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT Index करीब 2% टूट गया। जबकि Nifty 50 और Sensex बढ़त के साथ बंद हुए।

फिलहाल AI सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन ऊंची वैल्यूएशन, मुनाफे को लेकर सवाल और AI से बदलते कारोबार की वजह से इस सेक्टर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

योगी सरकार की OBC छात्रावास योजना बनी वरदान, 102 हॉस्टल से हजारों पिछड़े वर्ग के छात्रों को मिल रहा शिक्षा का सहारा

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित छात्रावास निर्माण योजना प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 2013 छात्र-छात्राओं ने इन छात्रावासों में रहकर अपनी शिक्षा प्राप्त की। यह व्यवस्था उन हजारों परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनी है जिनके लिए बच्चों को बाहर रहकर पढ़ाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।

 

कुल 102 में से छात्राओं के लिए 43 छात्रावास 

 

प्रदेश में वर्तमान समय में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 102 छात्रावास संचालित हैं। इनमें 59 छात्रावास छात्रों तथा 43 छात्राओं के लिए हैं। इन छात्रावासों में लगभग 5400 छात्रों के रहने की क्षमता उपलब्ध है। छात्रावास निर्माण योजना का मुख्य उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बने। इस योजना के तहत छात्रावासों का निर्माण राजकीय शिक्षण संस्थानों के परिसरों में कराया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासित एवं सुरक्षित वातावरण भी प्राप्त हो सके।

 

वर्षों पुराने छात्रावासों में कराया जा रहा मरम्मत का कार्य

 

योगी सरकार ने छात्रावासों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी है। छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-2024 से छात्रावास अनुरक्षण योजना प्रारंभ की। इस निर्णय से वर्षों पुराने छात्रावासों के रखरखाव और मरम्मत का कार्य व्यवस्थित रूप से शुरू हुआ। अनुरक्षण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। 

 

8 छात्रावासों में मरम्मत का कार्य पूरा

 

इस समिति में निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य हैं, जो प्रत्येक प्रस्ताव का तकनीकी और वित्तीय परीक्षण कर आवश्यक स्वीकृति प्रदान करते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुरक्षण के लिए 10 छात्रावासों का चयन किया गया था। इनमें से 8 छात्रावासों का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बाकी छात्रावासों में मरम्मत कार्य प्रगति पर है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संचालित छात्रावासों का सर्वेक्षण कर 8 छात्रवासों को प्राथमिकता के आधार पर अनुरक्षण एवं मरम्मत के लिए चिन्हित किया गया है। 

 

निर्धन छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बनी योजना

 

इस तरह आवासीय सुविधाओं के माध्यम से हजारों छात्र-छात्राएं अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बन रहे हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बन रही है। इसका उद्देश्य निर्धन छात्र-छात्राओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बने। इसी सोच के अनुरूप छात्रावासों का निर्माण राजकीय शिक्षण संस्थानों के परिसरों में कराया जाता है, जिससे छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके।

UPSSSC Recruitment 2026: यूपी में ऑडिटर और असिस्टेंट अकाउंटेंट के 1829 पदों पर शुरू हुई भर्ती, पीईटी स्कोर वाले कर सकते हैं आवेदन

UPSSSC Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश के अच्छे पद पर सरकारी नौकरी की राह देख रहे उम्मीदवारों की इच्छा राज्य के अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (UPSSSC) ने पूरी कर दी है। बोर्ड ने असिस्टेंट अकाउंटेंट और ऑडिटर के 1829 पदों भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। लेकिन इस भर्ती का सबसे ज्यादा लाभ पीईटी स्कोर धारक उम्मीदवारों को मिलेगा। इस भर्ती प्रक्रिया में केवल वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2025 में हिस्सा लिया था और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता तथा अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 14 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 03 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। एप्लिकेशन फॉर्म में किसी प्रकार की गलती होने पर उम्मीदवारों को 10 अगस्त 2026 तक संशोधन का मौका मिलेगा।

किस विभाग में कितने पद?

विभाग पद का नाम रिक्तियां

उत्तर प्रदेश आंतरिक लेखापरीक्षा एवं लेखा निदेशालय सहायक लेखाकार 609

नगर निगम निदेशालय, उत्तर प्रदेश सहायक लेखाकार 600

यूपी आवास एवं विकास परिषद सहायक लेखाकार 156

स्थानीय निधि लेखापरीक्षा परीक्षा निदेशालय (सामान्य) लेखा परीक्षक 148

स्थानीय निधि लेखापरीक्षा परीक्षा निदेशालय (विशेष) लेखा परीक्षक 14

यूपी वन निगम सहायक लेखाकार 67

नगर निगम निदेशालय, उत्तर प्रदेश लेखा परीक्षक 60

यूपी राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड सहायक लेखाकार 82

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड (विशेष) सहायक लेखाकार 4

गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद सहायक लेखाकार 4

विभिन्न विश्वविद्यालय और कॉलेज सहायक लेखाकार/लेखा परीक्षक विभिन्न

उद्योग विकास विभाग (सामान्य) सहायक लेखाकार 68

उद्योग विकास विभाग (विशेष) सहायक लेखाकार 1

ये कर सकते हैं आवेदन 

शैक्षिक योग्यता : सहायक लेखाकार पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से वाणिज्य विषय में स्नातक यानी बीकॉम की डिग्री होनी चाहिए। लेखांकन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवार भी इस पद के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर डिप्लोमा होना भी जरूरी है। वहीं, लेखा परीक्षक यानी ऑडिटर पद के लिए उम्मीदवार का बीकॉम या उसके समकक्ष डिग्रीधारी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर डिप्लोमा और लेखाकार स्तर के लेखांकन का ज्ञान होना भी जरूरी है।

आयु सीमा : आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 जुलाई 2026 को न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष होनी चाहिए।

पीईटी-2025 उम्मीदवारों के लिए बड़ा मौका

यह भर्ती पीईटी-2025 के स्कोर के आधार पर होनी है, इसलिए पिछले साल परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा अवसर है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

  • आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें।
  • पीईटी-2025 से जुड़ी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।
  • इसके बाद उम्मीदवार को अपनी पसंद के पद का चयन करना होगा।
  • आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
  • आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा करें।
  • इसके बाद फॉर्म को अंतिम रूप से जमा करें।
  • आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भविष्य की जरूरत के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट आउट अपने पास सुरक्षित रख लें।

RRB NTPC CBT-2 2026: एनटीपीसी सीबीटी 2 की आंसर की पर 22 जुलाई तक आपत्ति दर्ज कराने का मौका, 5,810 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची

MSP पर रिकॉर्ड खरीद से UP के किसानों को मिल रहा बड़ा लाभ, अनाज की खरीद में बना कीर्तिमान

Farmers in UP are reaping big benefits from record procurement at MSP

– 9 साल में योगी सरकार ने धान खरीद से 80.39 लाख किसानों को पहुंचाया लाभ, 1.03 लाख करोड़ रुपए से अधिक सीधे खातों में पहुंचे

– धान, बाजरा, ज्वार और मक्का की रिकॉर्ड खरीद, किसान हितैषी नीतियों से यूपी में खेती बनी अधिक लाभकारी

– योगी सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया

Chief Minister Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में योगी सरकार की सरकारी खरीद नीति ने पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पारदर्शी खरीद व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और डिजिटल प्रक्रिया के कारण प्रदेश के किसानों का सरकारी खरीद प्रणाली पर भरोसा मजबूत हुआ है। धान खरीद के क्षेत्र में राज्य ने नया रिकॉर्ड स्थापित करते हुए वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 80,39,539 किसानों से धान की खरीद की और उनके बैंक खातों में 1.03 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया है।  

 

पारदर्शी व्यवस्था ने बढ़ाया किसानों का विश्वास

योगी सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है। प्रदेशभर में खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई, किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई, डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई और भुगतान सीधे बैंक खातों में भेजने की प्रणाली को मजबूत किया गया। इससे किसानों को एमएसपी का पूरा लाभ समय पर मिल रहा है। 

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मोटे अनाजों के लिए किसानों को मिला सरकारी खरीद का मजबूत आधार

योगी सरकार ने धान और गेहूं तक ही खरीद व्यवस्था को सीमित नहीं रखा, बल्कि पोषक अनाजों को भी प्राथमिकता दी। वर्ष 2022-23 से पहली बार बाजरा की सरकारी खरीद शुरू की गई। वर्ष 2025-26 तक 1,48,718 किसानों से 7,13,759.88 मीट्रिक टन बाजरा खरीदकर 1,854 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

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इसी प्रकार वर्ष 2023-24 से पहली बार ज्वार की सरकारी खरीद प्रारंभ हुई, जिसके तहत पिछले तीन वर्षों में 26,972 किसानों को 363.35 करोड़ रुपए का भुगतान मिला। वहीं वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मक्का खरीद के माध्यम से 34,578 किसानों को 582.04 रुपए करोड़ का भुगतान किया गया। इससे मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसानों को भी एमएसपी का लाभ मिला और उनकी आय में वृद्धि हुई।

 

कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास

खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है। समय पर भुगतान, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और खरीद केंद्रों की बेहतर उपलब्धता ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है।

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इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना है। योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण खेती को अधिक लाभकारी बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।