विश्वकप 2027 की योजना में नहीं रविंद्र जड़ेजा, जल्द ले सकते हैं संन्यास

रोहित शर्मा के बाद भारत के एक दिग्गज ऑलराउंडर की बल्ला टांगने की खबर आ रही है। यह नाम भी रोहित शर्मा के समकालीन ही रहा है। रविंद्र जड़ेजा जो महेंद्र सिंह धोनी और फिर रोहित शर्मा की कप्तानी में चैंपियन्स ट्रॉफी जीते वह अब भारतीय एकदिवसीय टीम में जगह नहीं बना पाएंगे क्योंकि वह टीम प्रबंधन की विश्वकप 2027 की योजनाओं में नहीं है।

गौरतलब है कि ऑलराउंडर रविंद्र जड़ेजा न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में बल्ले और गेंद दोनों से फ्लॉप रहे। 3 मैचों में उन्होंने 14 की औसत से 43 रन बनाए। पूरी सीरीज में वह सिर्फ एक बार ही गेंद को सीमा पार भेज पाए।

वहीं गेंद से तो वह एक विकेट के लिए तरसते रह गए। पहले मैच में उन्होंने 9 ओवर में 56 रन दिए। दूसरे मैच में उन्होंने 8 ओवर में 44 रन दिए और अंतिम मैच में उन्होंने 6 ओवर में 41 रन दिए। कुल मिलाकर वह 21 ओवर में 141 रन देकर भी एक विकेट नहीं ले सके।रविंद्र जड़ेजा 37 साल के हो चुके हैं और अक्षर पटेल की जगह ले रहे हैं जो टीम को कई अहम मौकों पर गेंद और बल्ले से मैच जितवा चुके हैं।

फरवरी में फैंस की इस मांग को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने गंभीरता से लिया और माना कि वह उनके ही कलेवर के बल्लेबाज और गेंदबाज अक्षर पटेल को दक्षिण अफ्रीका में खेले जाने वाले एकदिवसीय विश्वकप में ले जाना चाहते हैं।इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में उनका चयन नहीं हुआ था लेकिन अब यह खबर सामने आ रही है। रविंद्र जड़ेजा चाहे तो संन्यास ले सकते हैं या फिर अगली एकदिवसीय सीरीज से खुद को ड्रॉप होते हुए देख सकते हैं।

ऐसा रहा है करियर

रविंद्र जड़ेजा के सफेद गेंद के करियर पर नजर डालें तो वह 210 मैच खेल चुके हैं। 32 की औसत के साथ उन्होंने 2905 रन बनाए हैं। इसमें 12 अर्धशतक शामिल है। इस प्रारुप में गेंद से उन्होंने 232 विकेट निकाले हैं। इसमें 7 बार 4 विकेट और 2 बार 5 विकेट लेना शामिल है।

वहीं टी-20 क्रिकेट में उन्होंने 74 मैच खेले और 21 की औसत से 515 रन बना पाए। इसमें एक भी अर्धशतक शामिल नहीं है। वहीं इस प्रारुप में वह सिर्फ 54 विकेट ही निकाल पाए।

हालांकि टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।

Reliance Industries Share Price: Q1 नतीजों से पहले शेयर 2% उछला, तिमाही आधार पर 4% बढ़ सकता है EBITDA

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे आज, 17 जुलाई को जारी होने वाले हैं। पहले बोर्ड मीटिंग में इन पर चर्चा की जाएगी और इन्हें मंजूरी दी जाएगी। मीटिंग खत्म होने के बाद रिजल्ट जारी किए जाएंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ-साथ रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के तिमाही नतीजे भी सामने आएंगे। तिमाही परफॉरमेंस की घोषणा से पहले RIL के शेयर में तेजी है। दिन में BSE पर शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से लगभग 2.5 प्रतिशत तक उछलकर 1323.80 रुपये के हाई तक गई।

एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि कंपनी का अलग-अलग क्षेत्रों में फैला कारोबार, रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूती और पेट्रोकेमिकल कारोबार से बेहतर मुनाफा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के असर को कम करने में मदद करेगा। CNBC-TV18 के एक पोल के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज जून 2026 तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले 3.7 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 3.05 लाख करोड़ रुपये की आय दर्ज कर सकती है। EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 46,000 करोड़ रुपये हो सकता है। मार्जिन 15 प्रतिशत पर स्थिर रह सकता है।

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत बढ़कर 298621 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी के मालिकों के लिए शुद्ध मुनाफा 12.5 प्रतिशत की कमी के साथ 16971 करोड़ रुपये रहा था।

देश की मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी है RIL

RIL इस वक्त देश की मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी है। BSE के मुताबिक, इसका मार्केट कैप 17.86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 50.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर साल 2026 में अब तक 16 प्रतिशत नीचे आया है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,611.20 रुपये और एडजस्टेड लो 1,253.65 रुपये है।

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जियो फाइनेंशियल के कैसे रहे नतीजे

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने जून 2026 तिमाही के नतीजे एक दिन पहले यानि कि 16 जुलाई को जारी किए थे। तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 227.28 प्रतिशत बढ़कर 2,004.47 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 612.46 करोड़ रुपये था। शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा एक साल पहले से 155.7 प्रतिशत बढ़कर 830.25 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में मुनाफा 324.66 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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अमरनाथ यात्रा 2026: क्या इस बार टूट जाएगा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड?

amarnath yatra 2026

आतंकवादी हमले की आशंकाओं, मौसम की चुनौतियों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 2026 अब रिकॉर्ड बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है। यात्रा शुरू होने के महज 15 दिनों के भीतर चार लाख से अधिक के आंकड़े को छूने वाली यात्रा में अभी श्रद्धालुओं के कदम थम नहीं रहे हैं। इस साल अभी तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके श्रद्धालुओं की संख्‍या पिछले दो दशकों में सबसे तेज गति से यह आंकड़ा पार करने वाला वर्ष बन गया है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस बार यात्रा समाप्त होने तक श्रद्धालुओं की कुल संख्या 2022 में बने लगभग 6.35 लाख श्रद्धालुओं के सर्वकालिक रिकार्ड को भी पीछे छोड़ सकती है। ALSO READ: क्या है अमरनाथ हिमलिंग के पिघलने का राज? क्या कहते हैं पर्यावरणविद

 

इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा अवधि अपेक्षाकृत लंबी होने के साथ-साथ देशभर से पंजीकरण कराने वालों की संख्या भी काफी अधिक रही है। प्रशासन को सबसे बड़ी चुनौती बिना पंजीकरण और निर्धारित तिथि से पहले पहुंच रहे श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने की पड़ रही है। इसी कारण प्रशासन ने बार-बार अपील की है कि श्रद्धालु केवल अपनी निर्धारित तिथि पर ही यात्रा करें, क्योंकि प्रतिदिन यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सीमित रखी गई है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद यात्रा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इसके उलट श्रद्धालुओं का उत्साह पहले से अधिक दिखाई दे रहा है। पहले 15 दिनों में चार लाख के करीब श्रद्धालुओं के दर्शन इस बात का संकेत हैं कि श्रद्धालुओं का विश्वास और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत साबित हुए हैं।

 

2022 में कोविड महामारी के बाद श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व आमद ने 6.35 लाख का नया रिकॉर्ड बनाया था। 2023 और 2024 में भी यात्रा में भारी भीड़ रही, हालांकि 2022 का आंकड़ा नहीं टूट पाया। इस वर्ष शुरुआती रुझान बताते हैं कि यदि प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं का औसत बना रहा और मौसम सामान्य रहा तो नया कीर्तिमान बन सकता है। ALSO READ: अमरनाथ यात्रा 2026: क्या बर्फ के शिवलिंग के साथ पार्वती और गणेश भी होते हैं प्रकट?

 

यात्रा की सफलता के पीछे सुरक्षा व्यवस्था भी बड़ी वजह मानी जा रही है। इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा, ड्रोन निगरानी, आरएफआईडी ट्रैकिंग, हाई-टेक कंट्रोल रूम, सीसीटीवी नेटवर्क और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, पोनी एंबुलेंस, हेलीकॉप्टर सहायता तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
 

हालांकि चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। जम्मू में समय से पहले पहुंचने वाले हजारों अपंजीकृत श्रद्धालुओं के कारण आवास, यातायात और पंजीकरण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। प्रशासन लगातार अपील कर रहा है कि श्रद्धालु केवल वैध पंजीकरण और निर्धारित तिथि के अनुसार ही यात्रा करें, ताकि सभी को सुरक्षित ढंग से दर्शन का अवसर मिल सके।

 

कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा 2026 केवल आस्था का नहीं बल्कि प्रबंधन, सुरक्षा और जनविश्वास की भी परीक्षा बन गई है। शुरुआती आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि यदि मौसम और सुरक्षा परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस वर्ष बाबा बर्फानी के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या नया इतिहास लिख सकती है।

Maruti Suzuki responds to Raipur Consumer Court order

Maruti Grand Vitara front quarter static

Maruti Suzuki has responded to the order issued by the District Consumer Disputes Redressal Commission of Raipur. In an official statement, the automaker contested the consumer court’s directions to provide a new, E20-compliant car to the complainant, i.e., Dr. Premraj Debta. Dr. Debta filed a complaint against Maruti Suzuki at Raipur’s consumer court over E20-related damages to his Grand Vitara.

  1. Brand says the car was E20 compatible
  2. Claims it found contamination in the fuel

Maruti challenges consumer court’s orders

Maruti Suzuki has now challenged the consumer court’s direction by stating that the Grand Vitara sold to Dr. Debta was E20 compatible. The automaker went on to say that the car was “fully equipped to handle E20 fuel and this was disclosed in the owner’s manual.”

Pushing back further, Maruti claimed that it has found evidence of contamination in the fuel collected from Dr. Debta’s Grand Vitara. “Several other facts have also not been reflected in the court’s order,” said Maruti Suzuki in its statement. The company said that it is now planning to escalate the matter in a higher court of law, while concluding that it “remains fully committed to quality, safety and customer satisfaction through robust engineering, processes and systems.”

Previously, a customer of a Toyota Innova Hycross found themselves in a similar situation when their car kept suffering frequent breakdowns due to E20 fuel. However, Vikram Gulati, Country Head & Executive Vice President at Toyota Kirloskar Motor, responded to this by saying that the culprit here was contaminated fuel, not E20. Meanwhile, Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) stated that during its nation-wide fuel quality tests, the company found no instances of adulteration, contamination, or critical quality lapses.

Maruti E20 Raipur case recap

Just to recap, on July 14, 2026, the District Consumer Disputes Redressal Commission of Raipur ordered Maruti Suzuki to replace Dr. Debta’s Grand Vitara with a new, E20-compatible car. The doctor alleged that his car’s engine had stalled several times due to E20 petrol and that the issue was never permanently fixed by Maruti despite multiple visits to the service centre. Ultimately, the consumer court ordered the automaker to replace the complainant’s car with a brand-new one within 45 days, or pay monetary compensation.

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Hero MotoCorp enters German market with XPulse 200 4V

XPulse 200 4V Pro

Hero MotoCorp has officially entered the German market, taking its international footprint to 53 countries. Germany becomes the brand’s fifth active market in Europe, alongside Italy, Spain, France and the UK.

  1. Hero enters Germany through a distribution partnership with Austria-headquartered KSR Group
  2. Initial retail network of over 28 outlets across major German cities
  3. Brand enters the German market with the XPulse 200 4V

Hero MotoCorp Germany: What’s on offer

The XPulse 200 4V is Hero’s debut product in the German market

Hero has partnered with Austria-headquartered KSR Group to manage sales, logistics and after-sales operations in Germany. The initial retail network spans more than 28 sales and service outlets across major German cities, with plans to expand to 30 outlets. To support the launch, Hero is offering a five-year warranty package, comprising a standard three-year manufacturer warranty and a two-year promotional extension.

The initial product lineup consists of the standard and Pro variants of the XPulse 200 4V, priced at €2,990 (Rs 3.30 lakh) and €3,290 (Rs 3.62 lakh), respectively. For reference, in India the two variants are priced at Rs 1.45 lakh and Rs 1.57 lakh (ex-showroom), respectively.

As Hero continues to expand its presence in international markets with its adventure motorcycle lineup, it is also working on a significantly more capable offering. The upcoming Xpulse 421 has been spotted testing multiple times in recent months and will be built on an all-new platform with a new liquid-cooled engine. An EICMA 2026 debut appears likely, with a market launch expected to follow in 2027.

Dev Vadchhedia

जो रूट ने 99 नाबाद बनाकर इंग्लैंड को भारत पर दिलाई 5 साल बाद ODI जीत

joe  root

ENGvsIND इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज जो रूट ने टेस्ट मैचों की भारत के खिलाफ एकदिवसीय मैच में भी एक छोर पकड़कर रखा और इंग्लैंड को भारत पर 5 साल बाद एकदिवसीय मैच में जीत दिला दी। इससे पहले अंतिम बार इंग्लैंड 2021 में भारत में अहमदाबाद में बाद में बल्लेबाजी कर मैच जीता था।

99 रनों पर नाबाद जो रूट शतक से महरूम रह गए लेकिन लगातार 2 एकदिवसीय मैच में वह अपनी टीम की इज्जत बचा गए वह भी बिना आउट हुए। इस पारी के लिए उनको मैन ऑफ द मैच का अवार्ड दिया गया। पहले मैच में उन्होंने 79 रनों की नाबाद पारी खेली थी। इंग्लैंड ने भारत को दूसरे वनडे में गुरूवार को 35 गेंद शेष रहते चार विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-1 से बराबरी हासिल कर ली।

भारत ने श्रेयस अय्यर (66) और विराट कोहली (65) के अर्धशतकों से 44 ओवर में 233 रन का स्कोर बनाया जबकि रूट की बेहतरीन पारी से इंग्लैंड ने 44.1 ओवर में छह विकेट पर 235 रन बनाकर सीरीज को बराबरी पर ला दिया। प्लेयर ऑफ द मैच बने रूट ने एक छोर संभालकर खेलते हुए 133 गेंदों की अपनी मैच विजयी पारी में नौ चौके लगाए।

जसप्रीत बुमराह और प्रसिद्ध कृष्णा ने इंग्लैंड को शुरुआती झटका दे दिया था और फिर गुरनूर बराड़ ने भी इंग्लैंड को तीसरा झटका दिया। लेकिन इसके बाद जो रूट डट गए और पहले हैरी ब्रूक(16) के साथ उन्होंने साझेदारी की। इसके बाद सैम करन (26) और जोस बटलर (17) के साथ साझेदारी करते हुए उन्होंने इंग्लैंड को मुक़ाबले में बनाए रखा। विल जैक्स (30) के साथ वह इंग्लैंड को जीत के क़रीब ले गए लेकिन जैक्स बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में कैच आउट हो गए। हालांकि रूट अंत तक डटे रहे और गस एटकिंसन (नाबाद 23) के साथ इंग्लैंड को जीत दिलाकर ही वापस लौटे।

एटकिंसन ने प्रसिद्ध कृष्णा की शॉर्ट गेंद को डीप स्क्वायर लेग की दिशा में पुल किया और बटोर लिया विजयी चौका, इसका मतलब है कि रूट 99 के स्कोर पर ही रहेंगे, बहरहाल इंग्लैंड ने सीरीज बराबर कर ली है। तीन मैचों की सीरीज़ अब 1-1 की बराबरी है जिसका फ़ैसला अब 19 जुलाई को लॉर्ड्स में होगा।

20वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट, क्या बोले पवन खेड़ा?

sonam wangchuk hunger strike

NEET परीक्षा मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन भी जारी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मुलाकात की। धीरे धीरे राजनीतिक पार्टियां सोनम वांगचुक के समर्थन में सामने आने लगी हैं। अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, राज ठाकरे समेत कई राजनीतिक दिग्गज सोनम वांगचुक का समर्थन कर चुके हैं। ALSO READ: 'आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए'— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि हम सभी सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं। हमारा सामना एक बेहद असंवेदनशील सरकार से है, जो लोकतांत्रिक विरोध की भाषा नहीं समझती। ऐसी सरकार के सामने विरोध के तरीकों में बदलाव लाना होगा। इस सरकार के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डालने से कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि हम छात्रों की गूंज के नाम से एक अभियान चला रहे हैं। हमारे लोग सक्रिय रूप से सड़क, कैम्पस, हर जगह इस मुद्दे को उठा रहे हैं। हम सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे बल्कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग भी कर रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, किसी भी स्थिति में देश के इस अनमोल रत्न को खो नहीं सकते है, लेकिन देश के युवाओं के भविष्य को भी अधर में नहीं छोड़ सकते हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक को मिला विपक्ष का साथ, केजरीवाल-अखिलेश ने की यह अपील, क्‍या अब तोड़ेंगे अनशन?

 

क्या बोले राज ठाकरे?

पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक को लेकर एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि सरकार ने शायद देश में विरोध प्रदर्शन के अधिकार को ही समाप्त करने का फैसला कर लिया है। राज ठाकरे ने कहा कि यदि यह सरकार अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के दौरान मूक दर्शक बनी रह सकती है, तो नागरिकों के विरोध प्रदर्शन का उस पर आखिर क्या असर हो सकता है।

 

ठाकरे ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य से संबंधित रिपोर्ट और टेलीविजन पर दिखाई जा रही तस्वीरें निश्चित रूप से चिंताजनक हैं। यह कहना बेहद पीड़ादायक है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने सोनम वांगचुक को कुर्बान करने का फैसला कर लिया है और इसके साथ ही शायद देश में विरोध प्रदर्शन के लिए मौजूद लोकतांत्रिक अधिकार को भी समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। 

केजरीवाल ने की वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की मांग

दिल्ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना चाहिए और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए।

World Emoji Day 2026: विश्व इमोजी दिवस: कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और रोचक तथ्य

The image depicts a scene reflecting deep love, affection, happiness, and a sense of belonging on World Emoji Day

World Emoji Day: हर साल 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस मनाया जाता है। आज के डिजिटल दौर में इमोजी/ Emoji हमारी रोजमर्रा की बातचीत का अहम हिस्सा बन चुके हैं। चाहे व्हाट्सएप पर हंसी साझा करनी हो, सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करनी हों या किसी संदेश को अधिक प्रभावी बनाना हो, इमोजी शब्दों से कहीं अधिक तेजी से भावनाओं को व्यक्त कर देते हैं। इन्हीं छोटे-छोटे प्रतीकों के महत्व को पहचानने के लिए हर वर्ष 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को इमोजी के इतिहास, विकास और डिजिटल संचार में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने का अवसर देता है।

  1. विश्व इमोजी दिवस कब मनाया जाता है?
  2. विश्व इमोजी दिवस क्यों मनाया जाता है?
  3. इमोजी का इतिहास
  4. विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
  5. इमोजी से जुड़े रोचक तथ्य
  6. डिजिटल दुनिया में इमोजी का महत्व

 

जानिए इस दिन का इतिहास, महत्व, शुरुआत, इमोजी के रोचक तथ्य और डिजिटल दुनिया में इसकी भूमिका…

 

विश्व इमोजी दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व इमोजी दिवस हर साल 17 जुलाई को मनाया जाता है। इस तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कैलेंडर इमोजी में 17 जुलाई की तारीख दिखाई जाती थी। इसी विशेषता के कारण यह दिन विश्व इमोजी दिवस के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

 

विश्व इमोजी दिवस क्यों मनाया जाता है?

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य डिजिटल संचार में इमोजी के महत्व को पहचान देना। लोगों को इमोजी के इतिहास और विकास से परिचित कराना तथा तकनीक और संचार के नए तरीकों का उत्सव मनाना। इसके साथ ही रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है। आज इमोजी केवल हंसी या खुशी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, व्यवसाय, मार्केटिंग और सोशल मीडिया में भी प्रभावी संचार का माध्यम बन चुके हैं।

 

इमोजी का इतिहास

इमोजी की शुरुआत 1999 में जापान के डिजाइनर शिगेताका कुरिता ने की थी। उन्होंने मोबाइल इंटरनेट सेवा के लिए 176 छोटे-छोटे प्रतीकों का पहला सेट तैयार किया था। बाद में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ इमोजी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गए। वर्ष 2010 में इमोजी को यूनिकोड (Unicode) मानक में शामिल किया गया, जिसके बाद अलग-अलग कंपनियों और प्लेटफॉर्म पर इन्हें व्यापक रूप से अपनाया जाने लगा।

 

विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत कैसे हुई?

विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत 2014 में जेरेमी बर्ज ने की थी। उन्होंने इमोजी संस्कृति को बढ़ावा देने और लोगों को इसके महत्व से जोड़ने के उद्देश्य से इस दिन की शुरुआत की।

 

इमोजी से जुड़े रोचक तथ्य

– वर्तमान समय में दुनिया में हजारों इमोजी उपलब्ध हैं और समय-समय पर नए इमोजी जोड़े जाते हैं। 

– लाल दिल (❤/ Red Heart) सबसे लोकप्रिय इमोजी में से एक है। 

– इमोजी के उपयोग का तरीका और पसंद अलग-अलग देशों में अलग हो सकती है। 

– लगभग सभी प्रमुख स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इमोजी का समर्थन करते हैं। 

– 'Face with Tears of Joy' लंबे समय तक दुनिया के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले इमोजी में शामिल रहा। 

 

डिजिटल दुनिया में इमोजी का महत्व

आज इमोजी केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। इनका उपयोग सोशल मीडिया पोस्ट को आकर्षक बनाने में, ऑनलाइन मार्केटिंग में, ग्राहकों से बेहतर संवाद स्थापित करने में, शिक्षा और डिजिटल प्रेजेंटेशन में, व्यक्तिगत बातचीत को अधिक प्रभावशाली बनाने में किया जाता है। 

 

संक्षेप में कहें तो विश्व इमोजी दिवस हमें याद दिलाता है कि छोटे-से इमोजी भी संचार को अधिक सहज, भावनात्मक और प्रभावशाली बना सकते हैं। डिजिटल युग में इमोजी भाषा की सीमाओं को कम करते हुए लोगों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। इसी यही कारण है कि हर वर्ष 17 जुलाई को दुनिया भर में विश्व इमोजी दिवस उत्साह के साथ मनाया जाता है।

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LPG Gas Price Today: गैस सिलेंडर की कीमतों पर बड़ा अपडेट! आज क्या है 14.2 किलो LPG का रेट, क्या बढ़ने वाली हैं कीमतें?

LPG Price Today (17 जुलाई): अगर आप आज यानी 17 जुलाई को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। देशभर में गैस सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है। जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है। वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में उपलब्ध है। इन शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी ₹2,930 है।

क्या अमेरिका-ईरान तनाव का पड़ेगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसका अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है।

यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है या संघर्ष और बढ़ता है, तो भारत में LPG की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या फिर बढ़ सकती हैं गैस सिलेंडर की कीमतें?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे। या तो LPG पर सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने पर उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल क्या करें उपभोक्ता?

फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 17 जुलाई को LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों और सप्लाई दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा।

आज के प्रमुख रेट

दिल्ली: घरेलू LPG (14.2 किग्रा)- ₹942, कमर्शियल (19 किग्रा) – ₹2,930

नोएडा: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

गाजियाबाद: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

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जगन्नाथ के रथ बदल रहे हैं बच्चों की ज़िंदगी|Young Artist Is Funding Education Through Jagannath Rath

ओडिशा के 20 वर्षीय सुमित कुमार दास आर्ट कॉलेज में पढ़ाई के साथ भगवान जगन्नाथ के रथ बनाते हैं। वह गरीब बच्चों को मुफ्त में रथ बनाना सिखाते हैं और रथ बेचकर होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा भी उन्हें देते हैं, ताकि वे ट्यूशन फीस भर सकें, किताबें खरीद सकें और अपने परिवार की मदद कर सकें।
आज उनके हाथों से बने रथ देश के कई शहरों तक पहुंचते हैं और उनकी कमाई कई बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।
सुमित ने साबित कर दिया कि सबसे खूबसूरत सफलता वही है, जो अपने साथ-साथ दूसरों का भविष्य भी संवार दे। :heart:

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