Stocks to Watch: 21 अक्टूबर को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, हिंदुस्तान जिंक से IREDA तक शामिल

Stocks to Watch: बुधवार, 21 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के दम पर फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों ने सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, तो कुछ के मुनाफे में गिरावट आई है। वहीं, कुछ कंपनियां अपने कारोबार और मैनेजमेंट से जुड़े बदलावों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 10 शेयरों पर रहेगी।

Bajaj Finance

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Bajaj Finance का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ रही। कंपनी की नेट टोटल इनकम 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ पहुंच गई। तिमाही के दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन भी दिए।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की मेटल कंपनी Hindustan Zinc का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 142% उछलकर ₹6,412 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का रेवेन्यू 76.5% बढ़कर रिकॉर्ड ₹15,093 करोड़ हो गया। EBITDA भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹9,248 करोड़ रहा।

IREDA

सरकारी रिन्यूएबल एनर्जी फाइनेंस कंपनी IREDA का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट मामूली 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की ग्रॉस NPA घटकर 3.57% और नेट NPA 1.08% रह गई। इससे पिछले साल के मुकाबले खराब कर्ज के स्तर में सुधार दिखा।

Piramal Finance

पिरामल ग्रुप की फाइनेंस कंपनी Piramal Finance का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 67% बढ़कर ₹545 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 35% बढ़कर ₹1,530 करोड़ पहुंच गई। इसके अलावा, SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को 19 अक्टूबर 2026 से पांच साल के लिए कंपनी का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।

L&T Technology Services

टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी L&T Technology Services (LTTS) का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 53.7% बढ़कर ₹548.2 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹3,040 करोड़ रहा। यह ₹3,022.5 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

Waaree Renewable Technologies

वारी ग्रुप की सोलर EPC कंपनी Waaree Renewable Technologies का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा, सोलर, बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन प्रोजेक्ट्स में भी बड़े मौके मौजूद हैं।

Just Dial

हाइपरलोकल सर्च प्लेटफॉर्म Just Dial का सितंबर तिमाही में रेवेन्यू सालाना आधार पर 13.2% बढ़कर ₹343 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹303.1 करोड़ था। EBITDA भी 4.5% बढ़कर ₹91 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 26.4% रह गया। एक साल पहले यह 28.7% था।

Nelco

टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज कंपनी Nelco का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 6.79% बढ़कर ₹1.73 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹78.14 करोड़ रहा। EBITDA में 22% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹9.1 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 10% से बढ़कर 11.7% हो गया।

SML Mahindra

कमर्शियल गाड़ियों की कंपनी SML Mahindra का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 42.9% गिरकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹670 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 31% गिरकर ₹29 करोड़ रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 7.6% से घटकर 4.3% रह गया।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent के नॉन-एग्जीक्यूटिव और नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हरीश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है। वह 12 साल से ज्यादा समय से कंपनी के बोर्ड में थे। उन्होंने बढ़ती पेशेवर और निजी जिम्मेदारियों का हवाला दिया। उनका इस्तीफा 17 अक्टूबर से प्रभावी हुआ। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजे 29 अक्टूबर को आने वाले हैं।

Stock Split: एक साल में 190% और 5 साल में 1000% चढ़ी कीमत, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Urmi Sinha IPS Story: मुंगेर की बेटी बनी देश की पहली सबसे कम उम्र की IPS, महज 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर रचा इतिहास

Urmi Sinha IPS Story: बिहार के मुंगेर जिले से ताल्लुक रखने वाली उर्मी सिन्हा ने शायद खुद भी कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन पूरा देश उनका नाम सम्मान के साथ लेगा। लेकिन उनके बुलंद इरादों और सही दिशा में की गई मेहनत ने इस उपलब्धि को उनकी तरफ मोड़ दिया। उर्मी ने महज 21 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास की। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने लिए आईपीएस सेवा चुनकर सबसे कम उम्र की अधिकारी बनने का खिताब अपने नाम कर लिया।

तेलंगाना स्थित हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में 17 अक्टूबर 2026 को पासिंग आउट परेड में 135 IPS अधिकारियों देश की पुलिस सेवा में शामिल हुए। इसमें उर्मी सिन्हा अपने बैच की सबसे कम उम्र की अधिकारी बनकर उभरी हैं। उर्मी ने प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 170वीं रैंक हासिल की। उनकी आईपीएस ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। अब वह बतौर आईपीएस आंध्र प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।

बिहार से है उर्मी सिन्हा का गहरा नाता

आईपीएस उर्मी सिन्हा का देश के पूर्वी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल से गहरा नाता है। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर स्थित मारवाड़ी टोला से जुड़ी उर्मी के पिता डॉ. रंजीत सिन्हा हावड़ा के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ हैं और मां कुशल गृहिणी हैं। उनका परिवार पश्चिम बंगाल के हावड़ा में बस गया था, जहां उनकी शुरुआती पढ़ाई पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में बीए की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन पूरी होने के साथ ही उर्मी ने यूपीएससी सीएसई की तैयारी शुरू कर दी थी।

घर पर रह कर पूरी की यूपीएससी की तैयारी

उर्मी सिन्हा ने यूपीएससी की तैयारी अपने घर पर रहकर करने का फैसला किया। उन्होंने 2023 में ग्रेजुएशन के बाद ऑनलाइन स्टडी मटीरियल, मेंटर्स के सही गाइडेंस और खुद के बनाए स्टडी प्लान पर भरोसा किया। उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू, तीनों चरण एक ही बार में पार कर लिए। UPSC CSE 2024 में AIR 170 हासिल कर उन्होंने अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया।

17 अक्टूबर को पासिंग आउट परेड में ली देश सेवा की शपथ

उर्मी 17 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के SVPNPA में 78वें नियमित बैच की पासिंग आउट परेड में शामिल थीं। इस बैच में 135 भारतीय आईपीएस अफसरों (37 महिला अधिकारी शामिल हैं) के अलावा नेपाल, भूटान और मालदीव के 16 विदेशी अधिकारी भी शामिल थे। इस बैच में 23 वर्षीय उर्मी सबसे युवा अधिकारी रहीं। पासिंग आउट परेड के बाद उर्मी सिन्हा अपने आवंटित आंध्र प्रदेश कैडर में तैनात होंगी और ट्रेनी आईपीएस अधिकारी पुलिस प्रशासन, कानून-व्यवस्था और फील्ड पुलिसिंग की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हासिल करेंगी।

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अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ क्या किया? जानिए ऐसा वहां क्या हुआ कि बवाल इस हद तक पहुंच गया

Albania Supreme Court Fire: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से सुलग रहे अल्बानिया में अब गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए है। राजधानी तिराना में पिछले कई दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि गुस्साई भीड़ ने सीधे देश के सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों को ही आग के हवाले कर दिया। आखिर क्यों भड़का है यूरोप के इस छोटे से देश में ऐसा जनसैलाब कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जंग छिड़ गई है? आइए आपको बताते हैं इसकी असली वजह।

क्यों भड़का इतना बड़ा बवाल?

अल्बानिया में यह प्रदर्शन ‘फ्लेमिंगो’ नामक नागरिक और छात्र आंदोलन के बैनर तले हो रहा है। हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सोशलिस्ट प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर हैं।

यह पूरा विवाद तब और भड़क उठा जब सरकार ने एक ऐसे क्षेत्र में बड़े लक्जरी पर्यटन विकास की अनुमति दे दी, जो फ्लेमिंगो का प्राकृतिक आवास माना जाता है। इस प्रोजेक्ट के तार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर से जुड़े होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया।

भ्रष्टाचार, शिक्षा और महंगाई की मार

अल्बानिया के युवा देश में बढ़ती बेरोजगारी, चरम पर पहुंच चुके भ्रष्टाचार, और जर्जर होती सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से निराश हैं। जनता का आरोप है कि सरकार आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।

वैसे प्रधानमंत्री एडी रामा ने इन हिंसक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को बाहरी तत्वों और वामपंथी उग्रवादी समूहों (एंटीफा) द्वारा वैचारिक रूप से कट्टर बनाया गया है।

लगातार छठे दिन भी जारी इस हिंसक संघर्ष ने अल्बानिया की सरकार के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है, और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस जन-आक्रोश को संभालना बड़ी चुनौती बन गया है।

फ्रांस, इटली और स्पेन में भी भारी हिंसा और आगजनी

वैसे सिर्फ अल्बानिया ही नहीं है जो विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल की सड़कों पर भी जनसैलाब उमड़ पड़ा है, जिसने कई प्रमुख यूरोपीय शहरों को रणक्षेत्र में बदल दिया है।

फ्रांस में पिछले तीन हफ्तों से हाई स्कूल के छात्र शिक्षा संसाधनों की कमी के खिलाफ नाकाबंदी कर रहे थे, जो अब व्यापक महंगाई विरोधी आंदोलन बन चुका है। पेरिस, मार्सेली, ल्यों और लिमोगेस में भारी लूटपाट और हिंसा हुई। लिमोगेस में 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लगा दी गई।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘जिन्होंने लूटपाट की है और गणतंत्र को गिराने की कोशिश की है, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।’ अब तक 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा, ‘माइग्रेंट्स ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया है, उन्हें तुरंत सीमाएं बंद करनी चाहिए!’ वैसे फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस हिंसा में प्रवासियों की भूमिका से इनकार किया है।

स्पेन की राजधानी मैड्रिड के ‘पुएर्ता डेल सोल’ स्क्वायर पर हफ्तों से सैकड़ों तंबू गड़े हुए हैं, जो घरों के आसमान छूते किरायों और बेदखली के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। यह विरोध 87 वर्षीय मैरीकार्मेन की बेदखली के बाद अस्पताल में हुई मौत के बाद शुरू हुआ।

स्पेन में न्यूनतम वेतन 1,221 यूरो (~$1,370) है, जबकि 80 वर्ग मीटर के अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो (~$1,270) है। यानी युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा केवल रहने पर खर्च कर रहे हैं। जनता के दबाव के कारण संसद में हाउसिंग बिल पास न होने पर प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने नवंबर में मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की है।

इटली में महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई है। मिलान, ट्यूरिन और बोलोग्ना में हिंसक झड़पें हुईं। मिलान में पुलिस गाड़ियों पर वॉटर कैनन चलाए गए और 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें अधिकांश नाबालिग है। अब ’17 अक्टूबर आंदोलन’ ने हर शनिवार स्थायी प्रदर्शन का आह्वान किया है।

वहीं बाल्कन देश सर्बिया में पिछले दो सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे छात्र आगामी चुनावों में पूर्व सत्तावादी नेता अलेक्जेंडर वुसिक की वापसी को चुनौती दे रहे हैं।

ट्रम्प बोले- पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा:मैक्रों को 8 साल पहले चेताया था; फ्रांस में हिंसा के लिए इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने फ्रांस में जारी हिंसा के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया। ट्रम्प लंबे समय से इमिग्रेशन पर सख्ती करने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस सरकार ने दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने करीब 8 साल पहले मैक्रों को चेतावनी दी थी कि दूसरे देशों से आने वाले लोगों को इतनी बड़ी संख्या में फ्रांस में आने देना बड़ी गलती है। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा और तोड़फोड़ फ्रांस के कई शहरों में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई। इन घटनाओं में सरकारी इमारतों में आग लगाने, दुकानों में लूटपाट करने और ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। फ्रांस की पुलिस ने 2400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, हिंसा रोकने की कोशिश में करीब 1000 पुलिसकर्मी और सैना के जवान घायल हुए हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को सरकार की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। उन्होंने सोमवार शाम से पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश में आपातकाल भी लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट- हिंसा के पीछे सिर्फ इमिग्रेशन को वजह मानना सही नहीं ट्रम्प ने फ्रांस में हो रही हिंसा को दूसरे देशों से लोगों को आने देने की नीति से जोड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के हालात के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम, आर्थिक परेशानियां, सरकारी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दे भी हैं। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपंथी नेता और कुछ टिप्पणीकार इमिग्रेशन पर सख्ती करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, हिंसा के लिए इमिग्रेशन कितना जिम्मेदार है, यह अलग सवाल है। मैक्रों बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मैक्रों ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों की कुछ मांगें जायज हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मांगों को हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की हरकतों के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि फ्रांस के नागरिक अपने ही देश के खिलाफ ऐसी हरकतें कैसे कर सकते हैं। मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके विरोधी उन्हें अब तक का सबसे कमजोर राष्ट्रपति करार दे रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में सिर्फ 15% लोगों ने उनके प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 82% लोगों ने उनके कामकाज पर नाराजगी जताई। महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता सरकारी कर्ज और शिक्षा व दूसरी सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। गूगल पर ट्रेंड कर रहा फ्रांस प्रोटेस्ट ———————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन: पेंशन से लेकर महंगाई तक, आंदोलन के पीछे 5 बड़ी वजहें समझिए फ्रांस दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहां आधुनिक शहर हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सरकारी सुविधाओं का बड़ा तंत्र है। इसके बावजूद, सरकार के फैसलों को लेकर यहां बार-बार बड़े आंदोलन होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ऑस्ट्रेलिया की महिला सांसद हेलेन को कार से कुचला:ऑफिस के बाहर मारी टक्कर, हालत गंभीर; 43 साल का आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार

ऑस्ट्रेलिया में निर्दलीय महिला सांसद हेलेन हेन्स को सोमवार को उनकी ऑफिस के बाहर कार से कुचल दिया गया। 65 साल की हेन्स की हालत गंभीर है। उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। घटना विक्टोरिया राज्य के वांगाराटा शहर में हुई। यह मेलबर्न से करीब तीन घंटे की दूरी पर है। पुलिस के मुताबिक, हेन्स अपने चुनाव क्षेत्र की ऑफिस के बाहर थीं, तभी टोयोटा लैंड क्रूजर SUV ने उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस ने 43 साल के आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। पुलिस को शक है कि सांसद को जानबूझकर निशाना बनाया गया। मामले की जांच की जा रही है। आरोपी की कार के अंदर से एक चाकू भी बरामद किया गया है। PM अल्बनीज बोले- हमले की वजह अभी साफ नहीं प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि अभी हमले के पीछे की वजह बताना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की जांच में आतंकवाद निरोधक टीम भी शामिल होगी। विक्टोरिया पुलिस के कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट एश्ले मेसन ने कहा कि फिलहाल आम लोगों के लिए कोई अतिरिक्त खतरा नहीं है। हेलेन पर बात करते हुए भावुक हुए PM अल्बनीज PM अल्बनीज हेलेन के बारे में बात करते हुए भावुक भी हो गए। ABC के लाइव टीवी कार्यक्रम ‘730’ में इंटरव्यू के दौरान उनकी आंखें नम हो गईं। उनसे पूछा गया था कि क्या वह और उनके साथी सांसद आपस में मिलने वाली धमकियों और सुरक्षा से जुड़े खतरों पर चर्चा करते हैं। इस पर अल्बनीज ने कहा कि फिलहाल उन्हें अपने एक साथी की चिंता है। अल्बनीज ने हेलेन को ईमानदार और अपने समुदाय के लिए समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि हेलेन अपने क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को लेकर खुलकर अपनी राय रखती हैं। अल्बनीज ने कहा कि वह ऐसा राजनीतिक माहौल नहीं देखना चाहते, जिसमें जनप्रतिनिधि सुपरमार्केट, सड़कों या सार्वजनिक बैठकों में लोगों से बातचीत करने से डरें। परिवार ने हेलेन की मदद करने वालों का आभार जताया हेलेन हेन्स के परिवार ने उनके फेसबुक पेज पर जारी बयान में राहगीरों, स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस का आभार जताया। परिवार ने कहा कि लोगों ने तुरंत मदद की और स्वास्थ्यकर्मियों ने सांसद को बचाने के लिए प्रयास किए। हेलेन हेन्स 2019 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया की संसद के लिए चुनी गई थीं। वह निर्दलीय सांसद हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी:गृहमंत्री का इस्तीफा मंजूर नहीं किया, PM लेकोर्नू ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुई हिंसा और लूटपाट को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने रविवार रात अपने संबोधन में कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी:गृहमंत्री का इस्तीफा मंजूर नहीं किया, PM लेकोर्नू ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई

फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुई हिंसा और लूटपाट को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने रविवार रात अपने संबोधन में कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मैक्रों ने गृहमंत्री लॉरेंट नुनेज का इस्तीफा भी नामंजूर कर दिया। मैक्रों ने नुनेज से कहा कि वे सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाएं। इस बीच प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को सरकार की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। इसमें हिंसा की घटनाओं और उनसे निपटने के तरीकों पर चर्चा होगी। 1500 दुकानों में लूटपाट, 1000 पुलिकर्मी घायल महंगाई और सरकारी सुविधाओं में कमी के खिलाफ शनिवार को 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में हालात शांतिपूर्ण थे लेकिन बाद में काले कपड़े पहने और चेहरे ढके कुछ लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट शुरू कर दी। अनुमान है कि करीब 1,500 दुकानों और कारोबारों में लूटपाट की गई या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया। हालात संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और भीड़ पर पानी की बौछारें कीं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को करीब 1000 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें सात की हालत गंभीर थी। गृह मंत्री नुनेज पर आरोप लग रहे हैं कि वे पहले से तय प्रदर्शनों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाए। मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा हिंसा के बाद खबरें सामने आई कि मैक्रों कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा सकते हैं या आपातकाल घोषित कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने रविवार को टीवी पर देश को संबोधित किया। उन्होंने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया। मैक्रों ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की और भरोसा दिलाया कि हिंसा करने वालों को सजा मिलेगी। हालांकि, फ्रांस के मीडिया ने उनके भाषण की आलोचना की। उनका कहना है कि मैक्रों ने यह साफ नहीं किया कि सरकार आगे क्या कदम उठाएगी। लूटपाट और तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई कैसे होगी, शहरों को दोबारा ऐसी घटनाओं से कैसे बचाया जाएगा, जिन दुकानदारों का नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा। संसद तीन गुटों में बंटी, कोई भी फैसला लेना आसान नहीं फ्रांस की संसद तीन बड़े राजनीतिक गुटों में बंटी हुई है। इनके बीच इतने मतभेद हैं कि संसद का कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे माहौल में सरकार के लिए कोई बड़ा फैसला लेना आसान नहीं है। राष्ट्रपति मैक्रों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। अप्रैल 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होना है। ऐसे में देश में राजनीतिक खींचतान भी बढ़ गई है। राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबले की तैयारी कर रहे नेताओं में दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन और वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलांशों भी शामिल हैं। ले पेन प्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं, जबकि मेलांशों पूंजीवाद के विरोधी हैं। दोनों नेता मौजूदा हालात में अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। फ्रांस पर कर्ज का दबाव भी बढ़ रहा फ्रांस की सरकार के सामने आर्थिक मुश्किलें भी हैं। देश पर बढ़ते सरकारी कर्ज को काबू में करने के लिए निवेशक सरकार पर दबाव डाल रहे हैं। लेकिन सरकार को डर है कि अगर उसने सरकारी सुविधाओं या कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की, तो और ज्यादा लोग नाराज होकर सड़कों पर उतर सकते हैं। देश में लोग पूछ रहे हैं कि अब आगे क्या होगा और क्या फ्रांस की व्यवस्था टूटने की कगार पर पहुंच गई है। शनिवार को हुई हिंसा ने लोगों को डरा दिया है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन:पेंशन से लेकर महंगाई तक, आंदोलन के पीछे 5 बड़ी वजहें समझिए फ्रांस दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहां आधुनिक शहर हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सरकारी सुविधाओं का बड़ा तंत्र है। इसके बावजूद, सरकार के फैसलों को लेकर यहां बार-बार बड़े आंदोलन होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

चर्च में प्रेयर के दौरान पादरी पर क्रूस गिरा, मौत:ऑनलाइन प्रसारण में रिकॉर्ड हुआ वीडियो; कुछ मिनट पहले कहा था- एक दिन हम सबको मरना है

दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर में शनिवार की प्रेयर के दौरान पादरी के ऊपर लकड़ी से बना क्रॉस गिर गया। इससे पादरी के सिर पर चोट लगी और उनकी मौत हो गई। प्रेयर का ऑनलाइन प्रसारण किया जा रहा था। पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। जानकारी के मुताबिक, घटना इक्वाडोर के तटीय बंदरगाह शहर ग्वायाकिल में 17 अक्टूबर को पेरपेतुओ सोकोरो चर्च में हुई। यहां आवर लेडी ऑफ परपेचुअल हेल्प चर्च में फादर पैट्रिसियो अल्फ्रेडो सांचेज मोलीनारी प्रवचन दे रहे थे। मास का ऑनलाइन प्रसारण हो रहा था, 27 मिनट बाद गिरा क्रूस मास को सोशल मीडिया पर लाइव दिखाया जा रहा था। इसका वीडियो देखने पर पता चलता है कि करीब 27 मिनट बाद चर्च की दीवार पर लगा क्रॉस और ईसा मसीह की मूर्ति फादर पैट्रिसियो के ठीक उपर गिर जाती है। घटना के बाद चर्च में मौजूद लोग पादरी की मदद के लिए पहुंचे। चर्च ने बताया कि इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ भी उन्हें बचा नहीं सका। कुछ मिनट पहले कहा था- एक दिन हम सबको मरना है फादर सांचेज ने उपदेश के दौरान स्पेनिश में कहा- ‘टोडोस वैमोस ए मोरिर’ (Todos vamos a morir); इन शब्दों का अर्थ है, ‘एक दिन हम सबको मरना है।’ उन्होंने कहा कि कम महत्वपूर्ण चीजों पर बिताया गया समय ईश्वर और प्रियजनों के साथ बिताए गए समय जितना सार्थक नहीं हो सकता। हादसे की वजह साफ नहीं, फिटिंग लूज होने की आशंका चर्च की तरफ से कहा गया कि चर्च की दीवार से बड़ा क्रूस गिरने की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन इसे दीवार पर अटैच करने वाले माउंटिंग फिक्स्चर में खराबी की आशंका है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन जांच कर रहा है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 170 फीट ऊंचाई से गिरकर सैनिक की मौत:रस्सी के सहारे उतर रहा था; स्टेडियम में 23 हजार लोग मौजूद थे अमेरिका के सैन एंटोनियो में एक सैनिक की 170 फीट की ऊंचाई से गिरने की वजह से मौत हो गई। सैनिक शनिवार को अलामडोम स्टेडियम में एक फुटबॉल मैच से पहले रस्सी से उतरने का लाइव डेमो दे रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

Stocks to Watch: 19 अक्टूबर को Axis Bank, Yes Bank, HDFC Bank, RailTel, Zen Tech समेत इन शेयरों पर नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

सोमवार, 19 अक्टूबर को कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। लिस्ट में एक्सिस बैंक, HDFC Bank, यस बैंक, IDBI Bank, रेलटेल, जेन टेक्नोलोजिज, वेदांता जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा सोमवार को एक शेयर एक्स-स्टॉक स्प्लिट ट्रेड करने वाला है। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजे

बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलीमर्स, HFCL, हिंदुस्तान जिंक, जस्ट डायल, डेल्टा कॉर्प, एलीवेट कैंपस, पिरामल फाइनेंस, SML महिंद्रा, वरमोरा ग्रैनिटो, शोभा, तत्व चिंतन फार्मा केम और वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीस

इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

ICICI Bank: Q2 (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) में स्टैंडअलोन बेसिस पर मुनाफा सालाना आधार पर 20.1% बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7% बढ़कर 25,338.7 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.20% हो गया, नेट NPA घटकर 0.30% हो गया।

Axis Bank: Q2 में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 7,003.28 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,371.4 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.16 प्रतिशत रहा। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.35 प्रतिशत हो गया।

Yes Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 65% बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7% बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA 1.2% और नेट NPA 0.2% दर्ज किया गया।

HDFC Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 4.7% बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 9.7% बढ़कर 34,619.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.11% और नेट NPA घटकर 0.37% हो गया।

IDBI Bank: Q2 में स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 2205.45 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 2.12 प्रतिशत और नेट NPA रेशियो घटकर 0.17 प्रतिशत पर आ गया।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफे में 21.1% का उछाल आया और यह 1,468.9 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 26.3% बढ़कर 4,145.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो 2.39% और नेट NPA रेशियो 0.31% रहा।

पंजाब नेशनल बैंक: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 12.8% बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8% बढ़कर 11,601.3 करोड़ रुपये रही। ग्रॉस NPA रेशियो 2.55% और नेट NPA रेशियो 0.25% दर्ज किया गया।

अर्बन कंपनी: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 182.5 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 41.4% बढ़कर 537.3 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के बोर्ड ने इक्विटी और कनव​र्टिबल सिक्योरिटीज के जरिए 2,500 करोड़ रुपये तक जुटाने को मंजूरी दी है।

LTM: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 0.2% घटकर 1,397.9 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 13.6% बढ़कर 11,807.6 करोड़ रुपये हो गया। LTM ने प्रति शेयर 25 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

ले ट्रैवेन्यूज टेक्नोलॉजी (Ixigo): Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 61.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले कंपनी 3.2 करोड़ रुपये के घाटे में थी। रेवेन्यू 12.9% बढ़कर 320.96 करोड़ रुपये हो गया।

RailTel: कंपनी को रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB), सिकंदराबाद से 167.52 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस’ (LoA) मिला है। यह RRB भर्ती प्रक्रिया के परीक्षा-पूर्व और परीक्षा-बाद के चरणों के लिए AM-RMS सेवाएं प्रदान करने से संबंधित है। इसके अलावा RailTel को ‘हेल्थ इंश्योरेंस TPA ऑफ इंडिया’ से 18.99 करोड़ रुपये का परचेज ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी 3 साल की अवधि के लिए IT इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराएगी।

Zen Technologies: यह कॉग्निट सिमेंटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (CSPL) में 51.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। कंपनी के बोर्ड ने 17 अक्टूबर की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उसी दिन कंपनी ने शेयर परचेज एग्रीमेंट, शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट और शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट कर लिया। डील पूरी होने के बाद कॉग्निट सिमेंटिक्स, जेन टेक की सब्सिडियरी बन जाएगी। यह खरीद फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर 135.15 करोड़ रुपये में होगी।

GPT इंफ्राप्रोजेक्ट्स: कंपनी को वेस्टर्न रेलवे के भावनगर डिवीजन के ‘चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर’ (CSTE) से 149.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। साथ ही, वेस्टर्न रेलवे के ही रतलाम डिवीजन से सिग्नलिंग कार्यों के लिए 134.11 करोड़ रुपये का एक और वर्क ऑर्डर मिला है।

ACME Solar Holdings: कंपनी की सब्सिडियरी, ‘एक्मे ग्रीनटेक ट्वेंटी’ ने ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (SECI) के साथ एक ‘पावर परचेज एग्रीमेंट’ किया है। यह समझौता FDRE ट्रेंच IX के तहत 300 MW के ‘अश्योर्ड पीक पावर प्रोजेक्ट’ के लिए है, जिसमें टैरिफ 6 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।

LCC Projects: कंपनी को गुजरात सरकार से एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ टेंडर’ मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में मच्छु-I बांध से त्रिवेणी थंगा जलाशय और वांकानेर व चोटिला तालुका के विभिन्न गांवों तक पानी की आपूर्ति करना शामिल है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 10 वर्षों तक प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव का काम भी शामिल है। कॉन्ट्रैक्ट की कुल अनुमानित वैल्यू 151.57 करोड़ रुपये है।

Vedanta: कंपनी ने ‘वेदांता जिंक इंटरनेशनल’ (VZI) के तहत ‘गाम्सबर्ग प्रोजेक्ट’ के दूसरे चरण में लगभग 60 करोड़ डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इसके जरिए दक्षिण अफ्रीका में कंपनी की सालाना जिंक उत्पादन क्षमता दोगुनी होकर 5 लाख टन हो जाएगी।

ग्लोबल सेटअप क्या बिगाड़ेगा खेल या बाजार दिखाएगा अपनी चाल, जानें गिफ्ट निफ्टी से कैसे मिल रहे संकेत

RBL Bank: बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ‘एमिरेट्स NBD बैंक PJSC’ की सभी भारतीय शाखाओं को RBL बैंक में विलय करने की मंजूरी मिल गई है। यह विलय 1 दिसंबर, 2026 से प्रभावी होगा।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) मॉडल पर 765 kV GIS पुणे वेस्ट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट लगाने के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है। इसके लिए वार्षिक ट्रांसमिशन शुल्क 199.55 करोड़ रुपये तय किया गया है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के पुणे वेस्ट में एक नया 765/400 kV गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) सबस्टेशन लगाना शामिल है। इसके अलावा, इसमें पूरे महाराष्ट्र में 765 kV और 400 kV ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण और उनसे जुड़े बे (bays) का काम भी शामिल है।

स्टॉक स्प्लिट के लिए यह शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

जटाशंकर इंडस्ट्रीज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूरोप के 6 देशों में शिक्षा-महंगाई पर प्रदर्शन:फ्रांस में 1800 लोग गिरफ्तार, स्पेन में घर खरीदना मुश्किल, ग्रीस में 10 साल में किराया 3 गुना

यूरोप के 6 देशों में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, महंगाई, बेरोजगारी और महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी के हिंसक विरोध में अब तक 1800 लोग गिरफ्तार हुए हैं। स्पेन में घर खरीदना तो दूर, किराया चुकाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, ग्रीस में 10 साल में किराया 3 गुना बढ़ चुका है। बेल्जियम, इटली और अल्बानिया में भी छात्र शिक्षा पर खर्च बढ़ाने, रोजगार और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। फ्रांस: 140 शहरों में 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत, शिक्षकों की कमी और बढ़ती महंगाई के विरोध में 17 अक्टूबर को 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। करीब 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। इसमें छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियन और कर्मचारी भी शामिल थे। पेरिस, मार्सेई और बोर्डो समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई। लीमोज में 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगा दी गई और कई गाड़ियों को जला दिया गया। 18 अक्टूबर तक करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की खबर है। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की है। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फायदा उठाया। इटली: स्कूलों की हालत पर 30 अक्टूबर को हड़ताल का ऐलान इटली में छात्र शिक्षा पर कम सरकारी खर्च, जर्जर स्कूलों और पढ़ाई के बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रोम और ट्यूरिन समेत कई शहरों में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा कर लिया। 16 अक्टूबर को रोम में हजारों छात्र शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। उन्होंने शिक्षा मंत्री ग्यूसेपे वाल्दितारा के फैसलों का विरोध किया। इससे पहले हुए प्रदर्शनों में पुलिस के साथ झड़प और पथराव की घटनाएं भी हुई थीं। अब छात्र संगठन इस आंदोलन से कर्मचारियों को भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। छात्रों की मांग है कि शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाए, स्कूलों की हालत सुधारी जाए और सस्ते हॉस्टल उपलब्ध कराए जाएं। स्पेन: बढ़ते किराए के खिलाफ प्रदर्शन स्पेन में महंगे घरों और बढ़ते किराए के खिलाफ आंदोलन कई शहरों में फैल गया है। राजधानी मैड्रिड के सोल चौक पर प्रदर्शनकारी कई दिनों से टेंट लगाकर बैठे हैं। सितंबर के आखिर में 87 साल की एक बुजुर्ग महिला को किराया बढ़ने के कारण घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद आंदोलन तेज हो गया। प्रदर्शनकारी किराए पर नियंत्रण लगाने, लोगों को घरों से निकालने पर रोक लगाने और सस्ते सरकारी मकान बनाने की मांग कर रहे हैं। किराएदारों के संगठन और आवास अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। मैड्रिड के अलावा दूसरे शहरों में भी रैलियां निकाली गई हैं। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने आवास संकट दूर करने के लिए कदम उठाने की बात कही है, लेकिन प्रस्तावित उपायों पर राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच, 29 नवंबर को समय से पहले चुनाव कराने का ऐलान भी किया गया है। ग्रीस: हॉस्टल की कमी के खिलाफ टेंट लगाकर प्रदर्शन ग्रीस की राजधानी एथेंस में छात्रों ने संसद के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन किया। छात्र हॉस्टल की कमी, महंगे किराए और पढ़ाई के बढ़ते खर्च से परेशान हैं। छात्र संगठनों के मुताबिक, देश में बहुत कम छात्रों को हॉस्टल मिल पाते हैं। करीब 96% छात्रों को हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती, जबकि पिछले 10 साल में कमरों का किराया तीन गुना हो गया है। कुछ छोटे कमरों का मासिक किराया 600 यूरो तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी किराए की सीमा तय करने, सरकारी हॉस्टल बनाने, स्कॉलरशिप बढ़ाने और यूनिवर्सिटीज का बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व छात्र संगठन कर रहे हैं। बेल्जियम: शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ गुस्सा बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में शिक्षा बजट में कटौती और सुधारों के विरोध में छात्रों ने मार्च निकाला। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की और पुलिस पर चीजें फेंकीं। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। प्रदर्शन का नेतृत्व छात्र संगठन कर रहे हैं। सरकार ने हिंसा की निंदा की है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है। अल्बानिया: प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी पढ़ाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और यूनिवर्सिटीज की खराब हालत के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। हजारों युवा 15 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय के बाहर जुटे और प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। सरकारी इमारतों और बैंकों में भी आग लगा दी गई। पांच दिन से चल रहे आंदोलन में 167 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए है। आंदोलन में छात्र संगठनों के अलावा सरकार से नाराज दूसरे लोग भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री रामा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने छात्रों से बातचीत की पेशकश की, लेकिन तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही। उनका कहना है कि हिंसा से अल्बानिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश को नुकसान पहुंच सकता है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन: पेंशन से लेकर महंगाई तक, सरकार के फैसलों पर सड़कों पर उतर आते हैं लोग फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। पूरी खबर पढ़ें…

ZEN Tech खरीद रही Cogknit Semantics में 52% हिस्सा, ₹135 करोड़ की डील; सोमवार को चढ़ सकता है शेयर

एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की कंपनी जेन टेक्नोलोजिज, डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी कॉगनिट सिमेंटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (CSPL) में 51.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। कंपनी के बोर्ड ने 17 अक्टूबर की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उसी दिन कंपनी ने शेयर परचेज एग्रीमेंट, शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट और शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट कर लिया। डील पूरी होने के बाद कॉगनिट सिमेंटिक्स, जेन टेक की सब्सिडियरी बन जाएगी। यह खरीद फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर 135.15 करोड़ रुपये में होगी।

इसके तहत CSPL में एक मौजूदा शेयरहोल्डर से शेयर खरीदे जाएंगे, साथ ही सीरीज ए कंपलसरिली कनवर्टिबल क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयरों (CCCPS) को सब्सक्राइब किया जाएगा। CSPL 10 रुपये फेस वैल्यू वाले सीरीज ए CCCPS जेन टेक और दूसरे इनवेस्टर को 27,015.71 रुपये प्रति CCCPS के भाव पर जारी करेगी। CSPL का वित्त वर्ष 2025-26 में टर्नओवर 48 लाख रुपये रहा। यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन नहीं है। निवेशक आशीष कचोलिया और उनके सहयोगी भी प्राइमरी राउंड में निवेश करेंगे।

क्या बनाती है CSPL

जेन टेक ने शेयर बाजारों को बताया है कि CSPL सशस्त्र बलों के लिए आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस पर बेस्ड बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम्स और सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम्स विकसित करती है। कॉगनिट का बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम्स टैंकों, वाहनों और सैनिकों को डिजिटल रूप से जोड़ता है, जिससे हर कमांडर युद्धक्षेत्र की एक ही रियल-टाइम तस्वीर के आधार पर काम कर सके। इसने इंडियन आर्मी के साथ फील्ड ट्रायल पूरे कर लिए हैं। इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है।

Tech Mahindra देगी ₹15 का अंतरिम डिविडेंड, रिकॉर्ड डेट 23 अक्टूबर; 11 साल बाद बांटने जा रही बोनस शेयर

ZEN Tech का शेयर 3 साल में 130 प्रतिशत चढ़ा

ZEN Tech के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1655.70 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 14900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। यह एक साल में 20 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 3 साल में कीमत लगभग 130 प्रतिशत, 5 साल में 630 प्रतिशत और 10 साल में 2000 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई है। कंपनी में सितंबर 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 48.51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।