‘AI से TCS में नौकरियां नहीं जाएंगी’, CEO बोले- बस बदल जाएगा काम का तरीका

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर के कृतिवासन का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से कंपनी में कर्मचारियों की संख्या कम नहीं होगी। उन्होंने कहा कि TCS आगे भी भर्ती जारी रखेगी। हालांकि, कर्मचारियों को नए AI स्किल्स सीखने होंगे।

यह बयान इंजीनियरिंग छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। इससे पहले TCS के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने संकेत दिए थे कि कंपनी भर्ती को लेकर पहले से ज्यादा चयनात्मक होगी।

AI खत्म नहीं करेगा नौकरियां

Q1 FY27 के नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में कृतिवासन ने कहा कि AI की वजह से कर्मचारियों का काम जरूर बदलेगा, लेकिन नौकरियां खत्म नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कोडिंग के साथ अब प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, AI मॉडल की ट्रेनिंग, मॉडल टेस्टिंग और लाइफ-साइकिल मैनेजमेंट जैसे नए रोल तेजी से बढ़ेंगे। इन क्षेत्रों में नए मौके बनेंगे।

उन्होंने कहा कि कंपनी जरूरत के मुताबिक लगातार टैलेंट हायर करेगी। उनका मानना है कि AI से व्हाइट-कॉलर नौकरियों में बहुत बड़ी कटौती नहीं होगी।

भर्ती में दिखी तेजी

कृतिवासन का बयान ऐसे समय आया है, जब TCS ने जून तिमाही में चार साल की सबसे बड़ी भर्ती की है। कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में 9,279 कर्मचारियों की नेट हायरिंग की। इसके बाद कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 5,93,798 हो गई।

कंपनी ने इस तिमाही में देश के प्रमुख संस्थानों से 14,000 फ्रेशर्स को भी शामिल किया।

तिमाही नतीजे कैसे रहे?

TCS का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 2.7% घटकर 13,349 करोड़ रुपये रहा। यह बाजार के अनुमान से थोड़ा कम था। कंपनी ने बताया कि एक कानूनी मामले के 668 करोड़ रुपये के एकमुश्त सेटलमेंट का असर मुनाफे पर पड़ा।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 72,275 करोड़ रुपये रहा, जो बाजार के अनुमान से बेहतर था। एकमुश्त खर्चों को छोड़ दें तो कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 8.5% बढ़कर 13,849 करोड़ रुपये रहा। वहीं, रेवेन्यू में सालाना आधार पर 13.9% और तिमाही आधार पर 2.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Explainer: भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा ऑस्ट्रेलिया, दोनों देशों के बीच हुई डील क्यों है इतना अहम

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गुरुवार को यूरेनियम डील पर मुहर लग गई है। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में समझौते का ऐलान हुआ है। इसके तहत अब ऑस्ट्रेलिया भारत को शांतिपूर्ण नागरिक न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए यूरेनियम की कमर्शियल सप्लाई कर सकेगा। इस फैसले के साथ करीब दस साल से लंबित प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस बड़े फैसले की घोषणा मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान की गई।

यह समझौता दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में नई साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है, जबकि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में से एक है। ऐसे में यह समझौता भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यूरेनियम डील पर भारत-ऑस्ट्रेलिया ने जताई खुशी

समझौता लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते भरोसे और साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया सिर्फ अच्छे साझेदार ही नहीं, बल्कि बेहद करीबी दोस्त भी हैं।” अल्बनीज ने बताया कि इस समझौते से ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति आसान होगी। इससे भारत को स्वच्छ और गैर-जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र को भी एक नया और बड़ा बाजार मिलेगा।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए कई नए आर्थिक अवसर लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के पास ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने का सुनहरा मौका है। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों से भारत के बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में अधिक निवेश करने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए एक सुरक्षित, स्थिर और लंबे समय तक बेहतर विकास वाला देश है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों से भारत में ज्यादा निवेश करने की अपील की।

ये डीस क्यों है खास?

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2014-15 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन इसके बाद भी भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी। इसकी वजह यह थी कि दोनों देशों ने व्यावसायिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए जरूरी प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी नहीं की थीं।

ऑस्ट्रेलिया परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है। इसलिए वहां से यूरेनियम का निर्यात कड़े नियमों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के तहत ही किया जाता है। अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।

IAEA की निगरानी में होगा यूरेनियम का इस्तेमाल

भारत परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य नहीं है, लेकिन उसने अपने नागरिक परमाणु संयंत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा नियमों को स्वीकार किया है। नए समझौते के तहत एक ऐसी निगरानी और सत्यापन व्यवस्था बनाई गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम केवल भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में ही इस्तेमाल हो। समझौते के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया से आने वाले सभी यूरेनियम की आपूर्ति IAEA की निगरानी में होगी। एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी कि इस यूरेनियम का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों और बिजली उत्पादन के लिए ही किया जाए।

भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की जरूरत क्यों है?

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश को यूरेनियम की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति की जरूरत होगी। हालांकि, भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार में से एक है, लेकिन यूरेनियम का घरेलू भंडार सीमित है। यही वजह है कि परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए भारत को दूसरे देशों से यूरेनियम आयात करना पड़ता है। फिलहाल भारत में बनने वाली करीब 75 प्रतिशत बिजली अभी भी कोयले से तैयार होती है। वहीं, सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, लेकिन ये हर समय लगातार बिजली नहीं दे सकते। ऐसे में परमाणु ऊर्जा को भविष्य की स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली का महत्वपूर्ण स्रोत माना जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा से मिलेगा स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उत्पादन

परमाणु ऊर्जा को कम कार्बन उत्सर्जन वाला और लगातार बिजली देने वाला ऊर्जा स्रोत माना जाता है। यही वजह है कि 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की भारत की योजना में परमाणु ऊर्जा की अहम भूमिका है। ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को भी मजबूती देगा। इस योजना के तहत पहले यूरेनियम आधारित परमाणु रिएक्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद भविष्य में भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग कर परमाणु ऊर्जा उत्पादन को और बढ़ाएगा।

भारत तेजी से बढ़ा रहा है परमाणु ऊर्जा क्षमता

भारत इस समय देश के 7 स्थानों पर 24 परमाणु रिएक्टर चला रहा है। इनकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 8.78 गीगावाट (GW) है। फिलहाल देश के कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 3.1 प्रतिशत है। हालांकि, कई नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण जारी है। सरकार को उम्मीद है कि 2031-32 तक यह क्षमता बढ़कर करीब 22 गीगावाट हो जाएगी। सरकार का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाना है, ताकि देश की बढ़ती बिजली जरूरतों को स्वच्छ ऊर्जा से पूरा किया जा सके। इस दिशा में भारत ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है। कलपक्कम में बने 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार सफल नियंत्रित परमाणु फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल की है। इसे भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

SIP Investment: बाजार गिरा, फिर भी लोग SIP में क्यों लगा रहे पैसा? मोतीलाल ओसवाल ने बताई बड़ी वजह

SIP Investment: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। इसके बावजूद रिटेल निवेशक SIP के जरिए लगातार निवेश कर रहे हैं। AMFI के ताजा आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान भी SIP का फ्लो मजबूत बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि निवेशकों की आदत बन चुका है।

मार्केट टाइमिंग नहीं, लंबी अवधि पर फोकस

Motilal Oswal Asset Management Company के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि अब लोग SIP को लंबी अवधि की बचत का जरिया मान रहे हैं। पहले की तरह सिर्फ शॉर्ट टर्म रिटर्न के लिए निवेश नहीं किया जा रहा।

उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू संपत्ति का सिर्फ 6% हिस्सा इक्विटी में निवेश है। अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 48% है। इसका मतलब है कि भारत में इक्विटी निवेश बढ़ने की अभी काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सेक्टरों में वैल्यूएशन ऊंचे हैं। लेकिन पूरे बाजार में ओवरवैल्यूएशन जैसी स्थिति नहीं दिख रही।

स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में क्यों आ रहा पैसा?

पिछले कुछ वर्षों में स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में निवेश लगातार बढ़ा है। वैल्यूएशन की चिंता के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

सालस्मॉलकैप फंडथीमैटिक फंड
2023₹43,291 करोड़₹31,744 करोड़
2024₹34,874 करोड़₹1,76,915 करोड़
2025₹52,321 करोड़₹38,145 करोड़

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि निवेशक इन फंड्स के जरिए तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि वैल्यूएशन का आकलन पूरी कैटेगरी के बजाय हर शेयर और सेक्टर के आधार पर करना चाहिए।

छोटे शहरों से बढ़ रहे नए निवेशक

टियर-2 और टियर-3 शहरों से नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स को तेजी से अपना रहे हैं।

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि SIP अब सिर्फ तेजी वाले बाजार का निवेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की आदत बनता जा रहा है।

शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

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Indian Railways Digital Ticket Rules: डिजिटल टिकट लेकर ट्रेन में सफर करने वाले रेलवे का ये 4 नियम जान लें वरना लगेगा जुर्माना

Indian Railway Ticket Rule: अगर आप भी अक्सर रेलवे काउंटर की लंबी लाइनों से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन से डिजिटल अनरिजर्व्ड (सामान्य/अनारक्षित) टिकट बुक करके सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकटों को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है और यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। रेलवे ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि टिकट चेकिंग के दौरान केवल रजिस्टर्ड मोबाइल फोन पर रेल वन (Rail One) ऐप के भीतर मौजूद मूल डिजिटल टिकट ही मान्य माना जाएगा। अगर आप टीटीई को टिकट का स्क्रीनशॉट, वॉट्सऐप कॉपी या पीडीएफ दिखाते हैं तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाएगा और रेलवे नियमों के तहत आपके ऊपर जुर्माना लगाया जाएगा। आइए जानते हैं रेलवे द्वारा जारी किए गए इन नियमों की पूरी डिटेल और वह घटना जिसके बाद रेलवे को यह स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

स्क्रीनशॉट दिखाने पर महिला यात्री से वसूला गया जुर्माना: जानें पूरा मामला

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्पष्टीकरण कोरबा-विशाखापट्टनम लिंक एक्सप्रेस में घटी एक घटना के बाद आया है। इस ट्रेन में कोरबा से रायपुर की यात्रा कर रही एक महिला यात्री को टिकट चेकिंग के दौरान वॉट्सऐप स्क्रीनशॉट दिखाना भारी पड़ गया और उन पर जुर्माना ठोक दिया गया।

मामले में क्या गड़बड़ी पाई गई?

महिला यात्री ने टीटीई को बताया कि उसके भाई ने अपने मोबाइल के रेल वन ऐप से यह टिकट बुक किया था और उसे वॉट्सऐप पर इसका स्क्रीनशॉट फॉरवर्ड कर दिया था। रेलवे अधिकारियों ने जब जांच की तो पाया कि वह टिकट शाम 4:45 बजे जनरेट किया गया था जबकि ट्रेन कोरबा स्टेशन से दोपहर 4:10 बजे ही रवाना हो चुकी थी। वह टिकट यात्रा कर रही महिला यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भी उपलब्ध नहीं था। इन सभी खामियों के चलते टीटीई ने स्क्रीनशॉट को अमान्य करार दिया और रेलवे नियमों के मुताबिक पेनल्टी वसूल की।

डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट के 4 बेहद जरूरी नियम

डिजिटल टिकटों के दुरुपयोग को रोकने और यात्रा के दौरान सही वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने यहां नीचे दिए गए नियम दोहराए हैं:

  • ऐप के अंदर ही दिखाना होगा ओरिजिनल टिकट: यात्रियों को चेकिंग के दौरान रेल वन ऐप खोलकर उसके भीतर ही ओरिजिनल टिकट दिखाना होगा। इसके अलावा स्क्रीनशॉट, तस्वीरें, पीडीएफ कॉपियां या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (जैसे वॉट्सऐप) पर फॉरवर्ड किए गए टिकट स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
  • उसी फोन और नंबर पर होना चाहिए टिकट: डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट सिर्फ तभी वैध माना जाएगा जब वह उसी मोबाइल फोन और उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मौजूद हो जिसका इस्तेमाल टिकट बुक करने के लिए किया गया था।
  • ट्रेन खुलने से पहले बुकिंग जरूरी: रेलवे ने याद दिलाया है कि डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट हमेशा ट्रेन के बोर्डिंग स्टेशन से रवाना होने से पहले ही बुक हो जाना चाहिए। अगर ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी है और उसके बाद टिकट जनरेट किया जाता है तो रेल वन ऐप में दिखने के बावजूद उसे अवैध माना जाएगा।
  • फोन चार्ज रखना यात्री की जिम्मेदारी: यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे पूरी यात्रा के दौरान उस मोबाइल फोन को अपने पास रखें जिससे बुकिंग की गई है। साथ ही फोन को पर्याप्त रूप से चार्ज रखें ताकि टिकट चेकिंग के समय कोई असुविधा न हो। यात्रा से पहले अपनी जर्नी डिटेल्स को भी अच्छी तरह वेरिफाई कर लें।

क्या यह नियम रिजर्व्ड (आरक्षित) टिकटों पर भी लागू है?

रायपुर डिवीजन के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (DCM) अवधेश कुमार त्रिवेदी ने इस पर स्थिति साफ की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के लिए सिर्फ रजिस्टर्ड डिवाइस पर उपलब्ध ओरिजिनल डिजिटल टिकट ही मान्य है। हालांकि ये नियम सिर्फ रेल वन ऐप के माध्यम से बुक किए गए डिजिटल अनरिजर्व्ड (अनारक्षित) टिकटों पर ही लागू होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस नियम का असर रिजर्व्ड टिकटों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि रिजर्व्ड टिकटों के मामले में यात्रियों की पहचान का वेरिफिकेशन पहले से ही सरकार द्वारा जारी आईडी प्रूफ (पहचान पत्र) दस्तावेजों के माध्यम से किया जाता है।

Guru Purnima 2026: इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को राशि अनुसार दें उपहार, जानें आपकी राशि के अनुसार क्या दे सकते हैं भेंट

Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में “गुरु” का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस दिन लोग अपने गुरुओं के पास जाते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। जिनके गुरु इस संसार में नहीं हैं, वे उनके चित्र की पूजा करते हैं या गुरु स्वरूप मानकर माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करते हैं। गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं को भेंट या दान करना बेहद फलदायी माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। चूंकि यह दिन महान ऋषि वेदव्यास जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। नीचे सभी 12 राशियों के अनुसार गुरु को भेंट करने या दान देने योग्य वस्तुओं की सूची दी गई है :

आपकी राशि अनुसार गुरु के लिए भेंट

मेष राशि : मेष राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को लाल रंग के वस्त्र, मूंगा, या लाल चंदन भेंट करना चाहिए। इसके साथ ही गेहूं और गुड़ का दान करना भी शुभ रहेगा।

वृषभ राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को सफेद या रेशमी वस्त्र भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा मिश्री, चांदी या चावल का दान करने से गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों को अपने गुरु को हरे रंग के वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें, या मूंग की दाल भेंट करनी चाहिए। गुरु के सानिध्य में गायत्री मंत्र का जाप करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों को गुरु को सफेद चंदन, चावल, या चांदी का कोई पात्र भेंट करना चाहिए। जरूरतमंदों को दूध या मिठाई का दान देना भी उत्तम माना जाता है।

सिंह राशि : सिंह राशि के लोग अपने गुरु को पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र, केसर, या तांबे का पात्र भेंट करें। इसके अलावा गेहूं और धार्मिक ग्रंथों का दान भी बहुत फलदायी होता है।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों को गुरु को किताबें, पेन, या शिक्षण सामग्री भेंट करनी चाहिए। इसके साथ ही हरे फल या मूंग की दाल का दान करना आपके बौद्धिक विकास के लिए शुभ है।

तुला राशि : तुला राशि के जातकों को अपने गुरु को सफेद रेशमी वस्त्र या मिश्री भेंट करनी चाहिए। आप आश्रम या मंदिर में चावल और घी का दान भी कर सकते हैं।

वृश्चिक राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को लाल या महरून रंग के वस्त्र, तांबे के बर्तन, या कलावा भेंट करें। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

धनु राशि : धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति (गुरु) हैं। आपको अपने गुरु को पीले वस्त्र, चना दाल, केसर, या हल्दी भेंट करनी चाहिए। गुरु से गुरु मंत्र दीक्षा लेना आपके लिए सबसे सर्वोत्तम रहेगा।

मकर राशि : मकर राशि वालों को गुरु को नीले या भूरे रंग के वस्त्र या कोई उपयोगी कंबल भेंट करना चाहिए। साथ ही, गुरु के चरणों में तिल या उड़द की दाल का दान समर्पित करें।

कुंभ राशि : इस राशि के जातक अपने गुरु को सफेद या नीले रंग के वस्त्र, सूखे मेवे (जैसे काजू, बादाम) या औषधि भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा अनाथालय या वृद्धाश्रम में अन्न दान करना विशेष फल देता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों को गुरु को पीले वस्त्र, सोने की कोई छोटी वस्तु, पुखराज (यदि सामर्थ्य हो) या धार्मिक पुस्तकें (जैसे भगवद गीता या रामायण) भेंट करनी चाहिए। हल्दी और चने की दाल का दान करना भी बहुत शुभ है।

Yogini Ekadashi 2026: 10 या 11 जुलाई कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

E20 Petrol: एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल क‍ितना सही? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द‍िया जवाब, बताई सच्‍चाई

देशभर में 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लागू करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार की इस योजना को लेकर उठ रहे हर सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी इंजन खराब होने और लोगों के विरोध जैसी बातें सही नहीं हैं। एक खास बातचीत में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार का ग्रीन फ्यूल अभियान पर्यावरण को बेहतर बनाने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने खास तौर पर पुरानी गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली चिंताओं को भी खारिज किया। मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल सर्विस सेक्टर के उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से बड़े पैमाने पर वाहनों में मैकेनिकल खराबी हो रही है।

E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मारुति सुजुकी ने अब तक करीब 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की है, लेकिन E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वाहन बनाने वाली कंपनियों और मैकेनिकों, दोनों को ही कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं मिली है। मंत्री ने यह भी बताया कि शुरुआत में वारंटी और बीमा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की अफवाहें फैली थीं, जिससे वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब ये सभी समस्याएं दूर कर ली गई हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पहले कुछ बीमा कंपनियों के बारे में कहा जा रहा था कि वे E20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान का दावा स्वीकार नहीं करेंगी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वाहन मालिकों को वारंटी और बीमा से जुड़ी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

सरकार का दावा: E20 पेट्रोल से इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर

सरकार का कहना है कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) कम होती है। लेकिन सरकार का मानना है कि केवल माइलेज देखकर इस ईंधन का आकलन करना सही नहीं है।

  • बेहतर पिकअप: इथेनॉल की वजह से गाड़ी का पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर होता है। साथ ही इंजन का रिस्पॉन्स भी तेज मिलता है।
  • इंजन की बेहतर सुरक्षा: E20 पेट्रोल का ऑक्टेन स्तर ज्यादा होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग (असामान्य आवाज) की संभावना कम होती है और इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
  • लंबे समय तक सुरक्षित: सरकार का कहना है कि कई परीक्षणों में यह पाया गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन के अंदरूनी हिस्सों को लंबे समय में कोई नुकसान नहीं होता।

‘E20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर कदम…’,

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल का आकलन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी नई तकनीक को उसके सभी फायदे और लंबे समय के असर को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिला पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि नई तकनीक का उद्देश्य हमेशा ऐसी व्यवस्था अपनाना होता है, जो पहले से ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल इसी बदलाव का हिस्सा है और इसका मकसद देश को स्वच्छ ईंधन अपनाने के साथ-साथ भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाना है।

E85 पेट्रोल लाने की तैयारी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही E85 ईंधन लाने की तैयारी कर रही है। इस ईंधन में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होगा। इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) में ही किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना से देश की अर्थव्यवस्था और किसानों, दोनों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार, अगर यह योजना नहीं होती तो भारत को ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ता और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज के मुकाबले अधिक होतीं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण से विदेशों से कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। इससे देश को वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का कम असर झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से विदेशों में तेल खरीदने पर होने वाला खर्च घटता है और इसका लाभ देश के किसानों और कृषि क्षेत्र तक पहुंचता है। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिल रही है।

EV और बायोफ्यूल दोनों को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E25 पेट्रोल को लेकर लोगों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल E25 केवल परीक्षण (ट्रायल) के चरण में है और इसे अभी आम लोगों के लिए लागू नहीं किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में ईंधन से जुड़ा कोई भी बदलाव जल्दबाजी में नहीं करेगी। सभी फैसले वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से ही लागू किए जाएंगे। हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ बायोफ्यूल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी बराबर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य स्वच्छ और हरित परिवहन का है, इसलिए बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

Stcoks to Watch: शुक्रवार 10 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 13 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: शुक्रवार, 10 जुलाई के कारोबार में कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी। तिमाही नतीजे, जून सेल्स, नए प्रोजेक्ट, बड़ी साझेदारियां और अहम कॉरपोरेट अपडेट के चलते इनमें तेज हलचल देखने को मिल सकती है। आइए जानते हैं आज किन 13 शेयरों पर बाजार की खास नजर रहेगी।

Tata Consultancy Services

टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी का प्रदर्शन बाजार के अनुमान के मुताबिक रहा। तिमाही में रेवेन्यू 2.2% बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये रहा। मार्च तिमाही में यह 70,698 करोड़ रुपये था।

Mahindra & Mahindra

ऑटो कंपनी Mahindra & Mahindra की कुल बिक्री जून 2026 में सालाना आधार पर 32.5% बढ़कर 1.04 लाख यूनिट रही। पिछले साल जून में कंपनी ने 78,142 यूनिट बेची थीं।

Anand Rathi Wealth

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी Anand Rathi Wealth का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 73.6% बढ़कर 163 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 17.5% बढ़कर 322 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, EBITDA 15% घटकर 109 करोड़ रुपये रह गया। EBITDA मार्जिन भी 46.6% से घटकर 33.7% पर आ गया।

Torrent Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Torrent Pharmaceuticals ने Semalix Injection Disposable Pen के कुछ बैच स्वेच्छा से वापस मंगाने का फैसला किया है। यह कदम Dr. Reddy’s Laboratories की रिकॉल नोटिस के बाद उठाया गया है। कंपनी प्रोडक्ट की तकनीकी जांच कराएगी।

Power Grid Corporation

सरकारी पावर ट्रांसमिशन कंपनी Power Grid Corporation को Bhadla-III, Ramgarh PS और Kanpur (PG) इंटरस्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी इसे BOOT मॉडल के तहत विकसित करेगी। यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए मिला है।

Havells India

कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल कंपनी Havells India ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) कारोबार में एंट्री की है। कंपनी ने नॉर्वे की एनर्जी स्टोरेज कंपनी Pixii AS के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

Pace Digitek

इलेक्ट्रिकल और पावर सॉल्यूशंस कंपनी Pace Digitek की सब्सिडियरी Lineage Power ने Onward Solar Power और Kalpa Power के साथ MoU किया है। इसके तहत कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) की सप्लाई करेगी।

Great Eastern Shipping

शिपिंग कंपनी Great Eastern Shipping ने 2015 में बने LR2 टैंकर ‘Jag Laxman’ की डिलीवरी ले ली है। इसकी क्षमता करीब 1,09,990 डेडवेट टन (DWT) है। इस खरीद का पूरा भुगतान कंपनी ने अपनी आंतरिक नकदी से किया है।

Muthoot Microfin

माइक्रोफाइनेंस कंपनी Muthoot Microfin का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून तिमाही में सालाना आधार पर 18% बढ़ा। कंपनी ने इसका श्रेय मजबूत लोन वितरण और बेहतर कलेक्शन एफिशिएंसी को दिया है।

CONCOR & GAIL

सरकारी लॉजिस्टिक्स कंपनी Container Corporation of India (CONCOR) और सरकारी गैस कंपनी GAIL (India) ने 15 साल का समझौता किया है। दोनों अहमदाबाद के Khodiyar Inland Container Depot (ICD) में LNG डिस्पेंसिंग स्टेशन स्थापित करेंगे।

Vikram Solar

सोलर कंपनी Vikram Solar ने Evervolt Solar Tech के साथ 130 मेगावाट क्षमता के सोलर सेल की सप्लाई का समझौता किया है। इस डील से कंपनी की ऑर्डर बुक और सोलर कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

AWL Agri Business

FMCG कंपनी AWL Agri Business ने अपने Regenerative Mustard Programme का विस्तार करने का ऐलान किया है। कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम के तहत सरसों की उपज में 30% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Vijaya Diagnostic

डायग्नोस्टिक सर्विसेज कंपनी Vijaya Diagnostic ने Narasimha Raju K.A. को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 9 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है।

Nifty के 24200-24300 पार करने पर दिखेगी शॉर्ट-कवरिंग, जानिए 10 जुलाई को कैसी रहेगी बाजार की चाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty के 24200-24300 पार करने पर दिखेगी शॉर्ट-कवरिंग, जानिए 10 जुलाई को कैसी रहेगी बाजार की चाल

सेंसेक्स और निफ्टी 9 जुलाई को तेजी के साथ बंद हुए। लेकिन, पूरे दिन सूचकांकों में उतार-चढ़ाव दिखा। इसमें सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का कुछ हाथ रहा। कारोबार खत्म होने के अंतिम घंटे में बाजार में प्रॉफिट-बुकिंग दिखी। इससे निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया। क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों का असर मार्केट पर पड़ रहा है। सवाल है कि आगे मार्केट की चाल कैसी रहेगी?

निफ्टी ने कारोबार के दौरान ताकत दिखाने की कोशिश की

एनालिस्ट्स का कहना है कि Nifty अगर 24,200-24,300 जोन को पार कर जाता है तो बाजार में शॉर्ट-कविरंग देखने को मिलेगी। शॉर्ट कवरिंग से मार्केट चढ़ेगा। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “निफ्टी के लिए 23,400-23,600 के लेवल पर सपोर्ट है। 8 जुलाई को बड़ी गिरावट के बाद 9 जुलाई को उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी ने बाउंस बैक करने की कोशिश की। कारोबार के अंत में यह 80 अंक ऊपर बंद हुआ।”

इंडिया वीआईएक्स 14 के नीचे आया

इस रिपोर्ट के मुताबिक, “लॉन्ग अपर शैडो के साथ डेली चार्ट पर एक स्मॉल पॉजिटिव कैंडल बना था। टेक्निकल रूप से यह ‘इनवर्टेड हैमर’ टाइप कैंडल पैटर्न बनने का संकेत है। गिरावट के बाद आम तौर पर ऐसा पैटर्न बनने को बुलिश रिवर्सल के रूप में देखा जा सकता है।” इंडिया वीआईएक्स में गिरावट आई है। यह 14 के नीचे आ गया है। आज निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी को छोड़ बाकी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।

शॉर्ट टर्म में निफ्टी का ट्रेंड कमजोर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा, “निफ्टी का अंडरलाइंग शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर लगता है। लेकिन, 23,800 के सपोर्ट लेवल के करीब से इसके बाउंस बैक करने का संकेत दिख रहा है। अगर यह 24,200-24,300 के लेवल के पार हो जाता है तो बाजार में काफी शॉर्ट कवरिंग दिख सकती है।”

23,780 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है

एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने कहा, “आगे निफ्टी के लिए 23,800-23,780 अगले सपोर्ट जोन का काम करेगा। कई पिछले स्विंग लो इस रीजन में हैं। निफ्टी के 23,780 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। इससे वह पहले 23,600 और उसके बाद 23,450 की तरफ बढ़ सकता है। तेजी की स्थिति में निफ्टी के लिए अगला रेसिस्टेंस 24,070-24,100 के जोन में है।”

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गिफ्टी निफ्टी दे रहा हल्की रिकवरी का संकेत

गिफ्ट निफ्टी 10 जुलाई को बाजार में हल्की रिकवरी का संकेत दे रहा है। 9 जुलाई को शाम 7:20 बजे यह 0.19 फीसदी यानी 44.50 अंक की तेजी के साथ 24,039 पर था। हालांकि, मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने और क्रूड की कीमतों में उछाल का असर बाजार पर दिख सकता है। हालांकि, क्रूड में हल्की नरमी दिखी है।

ITR Filing 2026: हर कोई नहीं भर सकता ITR-1, इन 10 मामलों में चुनना होगा दूसरा फॉर्म

ITR 2026: ITR-1 (सहज) सबसे आसान इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म माना जाता है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर सैलरी पाने वाले कर्मचारी और पेंशनर्स करते हैं। लेकिन सिर्फ आसान होने की वजह से ITR-1 नहीं भरना चाहिए। अगर आपकी आय या निवेश कुछ खास कैटेगरी में आता है, तो आपको ITR-2 या ITR-3 भरना होगा। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स विभाग Defective Return Notice भेज सकता है।

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना बताया कि 10 स्थितियों में ITR-1 नहीं भरा जा सकता। इनके बजाय टैक्सपेयर्स को ITR-2 या ITR-3 भरा जा सकता है।

1. शेयर या म्यूचुअल फंड पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

अगर आपने शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचकर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) कमाया है, तो आप ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-2 भरना होता है। हालांकि, अगर आपकी शेयर ट्रेडिंग को बिजनेस इनकम माना जाता है (जैसे F&O या बार-बार ट्रेडिंग), तो ITR-3 लागू होगा।

2. ₹1.25 लाख से ज्यादा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

अगर लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचने पर धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) हुआ है, तो ITR-1 मान्य नहीं होगा।

3. जमीन, मकान या अन्य संपत्ति बेची हो

अगर आपने जमीन, मकान, गहने, डेट म्यूचुअल फंड या कोई अन्य कैपिटल एसेट बेचा है, तो उससे होने वाले कैपिटल गेन की जानकारी ITR-1 में नहीं दी जा सकती।

4. बिजनेस या प्रोफेशन से आय हो

अगर आपकी कमाई बिजनेस, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, प्रोफेशनल फीस या किसी प्रोप्राइटरशिप बिजनेस से होती है, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-3 भरना होता है। अगर आप प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम चुनते हैं, तो ITR-4 लागू हो सकता है।

5. F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग करते हों

अगर आपने F&O, इंट्राडे ट्रेडिंग या ऐसी ट्रेडिंग की है जिसे बिजनेस इनकम माना जाता है, तो ITR-1 आपके लिए नहीं है।

6. अनलिस्टेड शेयर होल्ड किए हों

अगर पिछले वित्त वर्ष में किसी भी समय आपके पास अनलिस्टेड इक्विटी शेयर रहे हैं, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे में ITR-2 या ITR-3 भरना होगा।

7. किसी कंपनी के डायरेक्टर हों

अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, तो ITR-1 भरने के पात्र नहीं हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में ITR-2 या ITR-3 भरना पड़ता है।

8. विदेश में संपत्ति या बैंक खाते का अधिकार हो

अगर आपके पास विदेश में कोई संपत्ति, वित्तीय निवेश या किसी विदेशी बैंक खाते पर साइन करने का अधिकार है, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में विदेशी संपत्तियों का अलग से खुलासा करना पड़ता है।

9. विदेश से आय होती हो

अगर आपको विदेश से सैलरी, डिविडेंड, ब्याज, किराया या कैपिटल गेन जैसी कोई आय होती है, तो ITR-1 लागू नहीं होगा। आमतौर पर ITR-2 या ITR-3 के साथ जरूरी शेड्यूल भी भरने होते हैं।

10. आय 50 लाख रुपये से ज्यादा हो

अगर आपकी कुल टैक्सेबल आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है, पिछले साल का नुकसान (Loss) आगे ले जाना है या लॉटरी, घुड़दौड़ जैसी विशेष श्रेणी की आय है, तो भी ITR-1 नहीं भर सकते।

गलत फॉर्म चुनने से क्या होगा?

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय पर ITR भरना जितना जरूरी है, उतना ही सही फॉर्म चुनना भी जरूरी है। गलत ITR फॉर्म भरने पर इनकम टैक्स विभाग Defective Return Notice भेज सकता है। इससे रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है या फिर रिवाइज्ड (Revised) रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता है।

शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

कल का मौसम 10 जुलाई: उत्तराखंड में रेड वॉर्निंग, IMD ने यूपी समेत इन 22 राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया

India Weather Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई को अपने सामान्य समय से महज एक दिन की देरी से पूरे देश में छा चुका है। उत्तर अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों को कवर करने के साथ ही मानसून पूरे भारत में सक्रिय हो चुका है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 10 जुलाई के लिए देश के 22 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों पर एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। ये अगले 24 घंटों के दौरान धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ेगा। इसके अलावा मानसून ट्रफ और अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण के एक्टिव होने से कल कई राज्यों में मौसम बेहद खराब रहने वाला है।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 10 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज:

उत्तराखंड के लिए रेड वॉर्निंग

मौसम विभाग ने 10 जुलाई के लिए उत्तराखंड को सबसे संवेदनशील जोन में रखा है। राज्य में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है। इसके साथ ही बिजली कड़कने और गरज-चमक की भी चेतावनी जारी की गई है।

उत्तर प्रदेश समेत इन 5 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

IMD के मुताबिक 10 जुलाई को देश के 5 प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जैसी स्थिति है-

उत्तर प्रदेश (कम दबाव का क्षेत्र बने होने के कारण व्यापक असर दिखेगा)

  • अरुणाचल प्रदेश
  • असम और मेघालय
  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
  • इन सभी राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
  • दिल्ली-हरियाणा और बिहार समेत इन 13 राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने 10 जुलाई को देश के कई अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। इन राज्यों में शामिल हैं:

  • बिहार
  • हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली
  • हिमाचल प्रदेश
  • पूर्वी मध्य प्रदेश
  • गंगा तटीय पश्चिम बंगाल
  • मध्य महाराष्ट्र
  • तटीय कर्नाटक
  • दक्षिण आंतरिक कर्नाटक
  • केरल और माहे
  • तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने कई राज्यों में बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल और तेलंगाना में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है।

इसी तरह बिहार, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ विदर्भ में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आंधी-तूफान का अनुमान है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, पूर्वी राजस्थान, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के साथ उत्तराखंड के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। कर्नाटक, लक्षद्वीप, रायलसीमा और तेलंगाना में धरातल पर बहुत तेज गति से हवाएं चलने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

मौसम को प्रभावित करने वाले बड़े सिस्टम

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक देश भर में इस भारी बारिश के पीछे एक साथ कई मानसूनी सिस्टम काम कर रहे हैं-

  • उत्तर प्रदेश पर लो-प्रेशर: दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके पड़ोस में समुद्र तल से 7.6 किमी ऊपर तक फैला एक ‘वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया’ सक्रिय है।
  • मानसून ट्रफ: मानसून की अक्षीय रेखा इस समय अनूपगढ़, रोहतक, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के कम दबाव वाले केंद्र, फुर्सतगंज, देहरी, धनबाद, बांकुरा, दीघा से होते हुए पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।
  • ऑफ-शोर ट्रफ: समुद्र तल पर दक्षिण गुजरात से लेकर उत्तरी केरल तक एक ऑफ-शोर ट्रफ लगातार बनी हुई है।
  • पश्चिमी विक्षोभ: उत्तरी पाकिस्तान और उसके आसपास के इलाके में समुद्र तल से 5।8 किमी ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है।
  • अन्य चक्रवाती हवाएं: उत्तरी बिहार, पूर्वी बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के ऊपर अलग-अलग ऊंचाइयों पर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं जो नमी को खींच रहे हैं।