E20 Petrol: एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल क‍ितना सही? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द‍िया जवाब, बताई सच्‍चाई

देशभर में 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लागू करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार की इस योजना को लेकर उठ रहे हर सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी इंजन खराब होने और लोगों के विरोध जैसी बातें सही नहीं हैं। एक खास बातचीत में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार का ग्रीन फ्यूल अभियान पर्यावरण को बेहतर बनाने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने खास तौर पर पुरानी गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली चिंताओं को भी खारिज किया। मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल सर्विस सेक्टर के उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से बड़े पैमाने पर वाहनों में मैकेनिकल खराबी हो रही है।

E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मारुति सुजुकी ने अब तक करीब 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की है, लेकिन E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वाहन बनाने वाली कंपनियों और मैकेनिकों, दोनों को ही कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं मिली है। मंत्री ने यह भी बताया कि शुरुआत में वारंटी और बीमा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की अफवाहें फैली थीं, जिससे वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब ये सभी समस्याएं दूर कर ली गई हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पहले कुछ बीमा कंपनियों के बारे में कहा जा रहा था कि वे E20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान का दावा स्वीकार नहीं करेंगी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वाहन मालिकों को वारंटी और बीमा से जुड़ी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

सरकार का दावा: E20 पेट्रोल से इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर

सरकार का कहना है कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) कम होती है। लेकिन सरकार का मानना है कि केवल माइलेज देखकर इस ईंधन का आकलन करना सही नहीं है।

  • बेहतर पिकअप: इथेनॉल की वजह से गाड़ी का पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर होता है। साथ ही इंजन का रिस्पॉन्स भी तेज मिलता है।
  • इंजन की बेहतर सुरक्षा: E20 पेट्रोल का ऑक्टेन स्तर ज्यादा होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग (असामान्य आवाज) की संभावना कम होती है और इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
  • लंबे समय तक सुरक्षित: सरकार का कहना है कि कई परीक्षणों में यह पाया गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन के अंदरूनी हिस्सों को लंबे समय में कोई नुकसान नहीं होता।

‘E20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर कदम…’,

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल का आकलन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी नई तकनीक को उसके सभी फायदे और लंबे समय के असर को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिला पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि नई तकनीक का उद्देश्य हमेशा ऐसी व्यवस्था अपनाना होता है, जो पहले से ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल इसी बदलाव का हिस्सा है और इसका मकसद देश को स्वच्छ ईंधन अपनाने के साथ-साथ भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाना है।

E85 पेट्रोल लाने की तैयारी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही E85 ईंधन लाने की तैयारी कर रही है। इस ईंधन में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होगा। इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) में ही किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना से देश की अर्थव्यवस्था और किसानों, दोनों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार, अगर यह योजना नहीं होती तो भारत को ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ता और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज के मुकाबले अधिक होतीं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण से विदेशों से कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। इससे देश को वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का कम असर झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से विदेशों में तेल खरीदने पर होने वाला खर्च घटता है और इसका लाभ देश के किसानों और कृषि क्षेत्र तक पहुंचता है। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिल रही है।

EV और बायोफ्यूल दोनों को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E25 पेट्रोल को लेकर लोगों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल E25 केवल परीक्षण (ट्रायल) के चरण में है और इसे अभी आम लोगों के लिए लागू नहीं किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में ईंधन से जुड़ा कोई भी बदलाव जल्दबाजी में नहीं करेगी। सभी फैसले वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से ही लागू किए जाएंगे। हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ बायोफ्यूल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी बराबर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य स्वच्छ और हरित परिवहन का है, इसलिए बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

E20 Petrol: क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से सच में घटती है माइलेज और खराब होता है इंजन? ऑयल इंडस्ट्री के 2 दिग्गज एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

भारत में E20 (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले) पेट्रोल का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम जनता के बीच गाड़ी के माइलेज में गिरावट और इंजन को संभावित नुकसान पहुंचने की बहस भी तेज हो गई है। उपभोक्ताओं की इसी चिंता और भ्रम को दूर करने के लिए ऑयल और एनर्जी इंडस्ट्री के दो दिग्गज एक्सपर्ट्स शनिवार को सामने आए और उन्होंने इस ईंधन से जुड़े तमाम मिथकों की सच्चाई उजागर की। मुंबई में आयोजित एक हाई-लेवल मीडिया ब्रीफिंग के दौरान समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए बीपीसीएल (BPCL) के रिटायर्ड डायरेक्टर (रिफाइनरीज) आर रामचंद्रन और आईजीएल (IGL) के रिटायर्ड चेयरमैन व बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने लैब के पुख्ता डेटा के आधार पर सड़क के व्यक्तिगत अनुभवों से पैदा हुए भ्रम को दूर किया और E20 को भविष्य का ईंधन बताया।

क्या E20 पेट्रोल से सच में 10% घट जाती है माइलेज?

वाहन चालकों की ओर से अक्सर यह शिकायत आती है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी की माइलेज में 10 फीसदी तक की गिरावट आ रही है। इस पर बात करते हुए आर रामचंद्रन ने साफ किया कि व्यापक इंस्टीट्यूशनल टेस्टिंग से पता चलता है कि माइलेज पर इसका सिर्फ मामूली असर पड़ता है। रामचंद्रन ने समझाया कि कुछ इससे अलग मामले भी हो सकते हैं, जिन्हें अलग तरीके से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने इशारा किया कि वाहनों का पुराना होना, सामान्य टूट-फूट या अग्रेसिवी सिटी ड्राइविंग जैसी स्थिति भी कम माइलेज के पीछे की असल वजह हो सकती है।

इस मुद्दे पर राज कुमार दुबे ने एक बेहद दिलचस्प बात जोड़ी। उन्होंने कहा कि वाहन चालक पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से बिना जाने ही E20 जैसा ब्लेंडेड ईंधन खरीद रहे हैं। दुबे ने कहा कि अचानक अगर आप यह सवाल उठाते हैं कि माइलेज नाटकीय रूप से कम हो रहा है तो इन बातों का कोई तार्किक आधार नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे किसी व्यक्तिगत राय के बजाय टेस्टिंग एजेंसियों के दावों पर भरोसा करें।

क्या 2023 से पहले की गाड़ियों के इंजन हो जाएंगे खराब?

साल 2023 से पहले बनी देश की लाखों पुरानी गाड़ियों में सीधे तौर पर E20 ईंधन के इस्तेमाल की फैक्ट्री कंप्लायंस नहीं है। ऐसे में मैकेनिकल नुकसान के डर पर एक्सपर्ट्स ने स्थिति स्पष्ट की। राज कुमार दुबे ने बताया कि एक्सेलरेटेड टेस्टिंग से यह सामने आया है कि पुराने इंजनों के लिए दीर्घकालिक तौर पर सिर्फ मामूली बदलावों की ही जरूरत होगी। दुबे ने कहा कि बहुत पुराने वाहनों में रबर के पार्ट्स पर कुछ असर पड़ सकता है। सामान्य तौर पर मान लीजिए कि आप 10 साल में रबर पार्ट्स बदलना चाहते हैं तो इस ईंधन के साथ आपको रबर पार्ट्स को शायद आठ साल में बदलने पर विचार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय अभियान के लिए यह बहुत ही छोटी कीमत है।

इसके साथ ही आर रामचंद्रन ने बीमा से जुड़ी उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि ऐसी गाड़ियों का इंश्योरेंस अमान्य हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्ट अधिसूचनाएं इसकी पुष्टि करती हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसियां पूरी तरह से वैध रहती हैं।

पर्यावरण को नुकसान और पानी की बर्बादी का सच

कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि एक लीटर एथेनॉल ईंधन के उत्पादन में 10000 लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। इन पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दोनों दिग्गजों ने सिरे से खारिज कर दिया। रामचंद्रन ने कहा कि कृषि उत्पादन में होने वाली पानी की खपत का बोझ एथेनॉल पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अधिकांश नए जमाने की डिस्टिलरीज 100% वाटर रीसाइक्लिंग और जीरो-इफ्लुएंट डिस्चार्ज के सिद्धांत पर काम कर रही हैं।

देश को मिल रहा है भारी आर्थिक फायदा

एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस नीति से देश को बहुत बड़ा व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। सरकार को इससे 1.8 लाख करोड़ रुपये से 1,9 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है। राज कुमार दुबे ने ध्यान दिलाया कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अगर E20 पेट्रोल अस्तित्व में न होता और इस 20 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्से को भी हमें विदेशों से आयात करना पड़ता तो इस देश में पेट्रोल की कीमत क्या होती? आज पेट्रोल के दाम 5 से 7 रुपये प्रति लीटर और ज्यादा बढ़ गए होते। उन्होंने ये भी कहा कि देश की पूंजी को घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर बनाए रखने से सीधा फायदा हमारे स्थानीय गन्ना किसानों को मिल रहा है और वे समृद्ध हो रहे हैं।