करोड़ों की नौकरी को कहा ना! Meta का पैकेज भी नहीं डिगा सका IIT बॉम्बे के इस इंजीनियर का इरादा, जानिए क्यों

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में बड़ी टेक कंपनियां टैलेंट को अपने साथ जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये के पैकेज दे रही हैं। लेकिन कुछ लोग अच्छी खासी सैलरी छोड़कर अपना सपना पूरा करने का रास्ता चुनते हैं। ऐसा ही एक मामला आईआईटी बॉम्बे से पढ़े AI रिसर्चर ऋषभ अग्रवाल का सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने मेटा की सुपरइंटेलिजेंस लैब्स से मिले 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपये) के नौकरी के ऑफर को ठुकरा दिया।

पोस्ट के मुताबिक, ऋषभ ने यह बड़ा ऑफर इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह अपना खुद का AI स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। यह खबर तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, बाद में खुद ऋषभ अग्रवाल ने इस दावे पर सफाई दी। उनके बयान के बाद इस पूरी कहानी ने नया मोड़ ले लिया और कई लोग हैरान रह गए।

IIT बॉम्बे के AI रिसर्चर ने ठुकराया करोड़ों का ऑफर

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया, जब X पर एक यूज़र विकास ऑलवेज ने ऋषभ अग्रवाल को लेकर एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में उनके आईआईटी बॉम्बे से लेकर दुनिया की बड़ी AI कंपनियों तक के सफर का जिक्र किया गया। पोस्ट में दावा किया गया कि ऋषभ अग्रवाल ने जेईई परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 33 हासिल की थी और इसके बाद आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। आगे चलकर उन्होंने गूगल ब्रेन, डीपमाइंड और वेमो जैसी दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों में काम किया।

पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने उन्हें करीब 10 लाख डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपये) का नौकरी का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार करने के बजाय ठुकरा दिया। यही दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

AI की दुनिया में बड़ी पहचान, अब बना रहे हैं अपना स्टार्टअप

वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि ऋषभ अग्रवाल AI की दुनिया का एक बड़ा नाम हैं। पोस्ट के अनुसार, वह इस समय पीरियॉडिक लैब्स (Periodic Labs) नाम की नई पीढ़ी की AI कंपनी तैयार कर रहे हैं। पोस्ट में लिखा गया कि भले ही आम लोग उन्हें ज्यादा न जानते हों, लेकिन AI क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान है। इसकी वजह यह बताई गई कि उन्होंने दुनिया की कई प्रमुख AI कंपनियों और रिसर्च लैब्स में काम किया है। इनमें गूगल ब्रेन, डीपमाइंड, वेमो और मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

करोड़ों का ऑफर छोड़कर अपने स्टार्टअप से जुड़े

वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि ऋषभ अग्रवाल ने मेटा में करीब पांच महीने काम करने के बाद मिले करीब 9.5 करोड़ रुपये सालाना के नौकरी के ऑफर को ठुकरा दिया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पीरियॉडिक लैब्स (Periodic Labs) में सह-संस्थापक (को-फाउंडर) के रूप में जुड़ गए। पोस्ट के अनुसार, पीरियॉडिक लैब्स अगली पीढ़ी की AI तकनीक पर काम कर रही है। इस स्टार्टअप को एनवीडिया (NVIDIA) और जेफ बेजोस का समर्थन भी मिला हुआ है।

बताया गया है कि कंपनी ऐसा AI वैज्ञानिक (AI Scientist) तैयार कर रही है, जो नई सामग्री, नई दवाओं और यहां तक कि भौतिक विज्ञान से जुड़ी नई खोजों के लिए वास्तविक दुनिया के प्रयोगों के आधार पर नए विचार और परिकल्पनाएं तैयार करने में मदद कर सके।

वायरल पोस्ट पर खुद ऋषभ अग्रवाल ने दी सफाई

यह पोस्ट देखते ही देखते X पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने करोड़ों रुपये की नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने के फैसले के लिए ऋषभ अग्रवाल की जमकर तारीफ की। जब यह चर्चा बढ़ने लगी, तो ऋषभ अग्रवाल ने खुद इस पोस्ट पर जवाब दिया। उन्होंने लोगों के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही एक अहम बात भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि मेटा की ओर से मिला ऑफर 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपये) से भी कहीं बड़ा था। हालांकि, ऋषभ ने ऑफर की वास्तविक रकम का खुलासा नहीं किया। लेकिन उनके बयान से इतना जरूर साफ हो गया कि वायरल पोस्ट में बताई गई राशि से कहीं ज्यादा बड़ा पैकेज उन्हें दिया गया था।

SBI Funds Management की नजरें म्चूअल फंड्स की पहुंच बढ़ाने पर, कंपनी ने बताया फ्यूचर प्लान

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई को आ रहा है। यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) है। इंडिया में म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी का बड़ा प्लान है। इसे पेरेंट कंपनी और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का सपोर्ट हासिल है। मनीकंट्रोल ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के फ्यूचर प्लान के बारे में जानने के लिए इसके एमडी एवं सीईओ देबाशीष मिश्रा, ज्वाइंट सीईओ डीपी सिंह और डिप्टी सीईओ डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स से बातचीत की।

रिटेल बेस बढ़ाने पर कंपनी का फोकस

देबाशीष मिश्रा ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता रिटेल इनवेस्टर्स का बेस बढ़ाना है। लोगों तक पहुंच के मामले में भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अभी शुरुआती अवस्था में है। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के करीब 53 करोड़ कस्टमर्स हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स के यूनिक इनवेस्टर्स की संख्या सिर्फ करीब 55 लाख है। यह कस्टमर बेस का 1 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा है। अगले दो से तीन सालों में रिटेल पार्टिसिपेशन बढ़ाना और लोगों तक पहुंच का विस्तार करना हमारी पहली प्राथमिकता होगी।

पीएमएस, एआईएफ और SIF पर भी कंपनी की नजरें

उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड बिजनेस के अलावा कंपनी पीएमएस, एआईएफ, SIF और गिफ्ट सिटी में अपनी मौजूदी बढ़ा रही है। अमुंडी के सपोर्ट से हमारा इंटरनेशनल बिजनेस करीब 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हम इसे अगले दो से तीन सालों में दोगुना करना चाहते हैं। हर ग्रोथ सेगमेंट में हमारी कोशिश स्ट्रॉन्ग रिसोर्सेज, स्ट्रेटेजी और पार्टनरशिप के जरिए लीडरशिप बनाने की है। हमारा प्लान हर जगह से इनवेस्टमेंट लेने का है।

एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का मिलेगा फायदा

डीपी सिंह ने कहा कि एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को सबसे ज्यादा फायदा एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का है। उन्होंने कहा कि हमारी मंथली सिप बुक करीब 4,000 करोड़ रुपये की है। इसमें से करीब 1300 करोड़ रुपये यानी करीब एक-तिहाई एसबीआई नेटवर्क के जरिए आता है। हमारे इंटरमीडियरी बिजनेस की भी करीब इतनी ही हिस्सेदारी है। एसबीआई का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क हमारी सबसे ब़ड़ी ताकत है। एसबीआई के 53 करोड़ कस्टमर बेस को देखते हुए हमें उम्मीद है कि हमारे लिए सिप बुक दोगुना करने की काफी गुंजाइश है।

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सेविंग्स इकोनॉमी से इनवेस्टमेंट इकोनॉमी बन रहा भारत

डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स ने कहा कि दुनिया के कई देशों में बैंकिंग और म्यूचुअल फंड एक दूसरे के साथ चलते हैं। भारत में हमारे लिए मौके और भी ज्यादा हैं, क्योंकि देश अब सेविंग्स इकोनॉमी से इननवेस्टमेंट इकोनॉमी के रूप में बदल रहा है। SIP से लोगों में निवेश में अनुशासन की आदत बनी है। लोग छोटी अवधि के निवेश की जगह लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं। भविष्य में इंडस्ट्री की ग्रोथ म्यूचुअल फंड्स से आगे निकल रिटायरमेंट सॉल्यूशंस, अल्टरनेटिव्स और वेल्थ मैनेजमेंट तक जाएगी।

Defence Stock: 40% तक क्रैश हो सकता है ये डिफेंस स्टॉक, कोटक ने दी तुरंत बेचने की सलाह

Defence Stock: डिफेंस और इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी Solar Industries India के शेयर गुरुवार को शुरुआती बढ़त के बाद 3% ज्यादा गिरकर बंद हुए। कारोबार के दौरान यह दिन के हाई लेवल से 6% तक टूट गया था। इसकी वजह Kotak Institutional Equities की नई रिपोर्ट रही। ब्रोकरेज ने पहली बार कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Sell’ रेटिंग दी है।

Kotak ने शेयर के लिए 10,300 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। यह गुरुवार के बंद भाव के मुकाबले करीब 40.8% की संभावित गिरावट दिखाता है।

कंपनी की खूबियां भी गिनाईं

Kotak ने माना कि Solar Industries देश की सबसे बड़ी निजी इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी है। साथ ही यह देश की सबसे तेजी से बढ़ती डिफेंस कंपनियों में भी शामिल है।

कंपनी सिर्फ विस्फोटक ही नहीं बनाती। इसके पोर्टफोलियो में इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव, हाई-एनर्जी मैटेरियल, पिनाका रॉकेट सिस्टम, लोइटरिंग म्यूनिशन और गोला-बारूद जैसे कई डिफेंस प्रोडक्ट भी शामिल हैं।

ग्रोथ को लेकर क्या है अनुमान?

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच कंपनी का PAT (टैक्स के बाद मुनाफा) सालाना औसतन 28% (CAGR) की दर से बढ़ सकता है।

इसके पीछे कई वजहें हैं। डिफेंस कारोबार में करीब 35% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है। वहीं, 10 देशों में फैले अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 26% CAGR की उम्मीद है। इसके अलावा बिजनेस मिक्स बेहतर होने से कंपनी के मार्जिन में भी सुधार हो सकता है।

फिर ‘Sell’ रेटिंग क्यों दी?

इतनी मजबूत ग्रोथ का अनुमान होने के बावजूद Kotak ने शेयर खरीदने की सलाह नहीं दी। उनसे इसका कारण भी बताया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की मौजूदा कीमत में भविष्य की ग्रोथ पहले ही शामिल हो चुकी है। अभी Solar Industries का शेयर वित्त वर्ष 2028 के अनुमानित मुनाफे के करीब 55 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ऐसे में मौजूदा स्तर पर निवेशकों को जोखिम के मुकाबले आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना कम दिखती है।

कौन-कौन से जोखिम हैं?

Kotak ने कंपनी के सामने कुछ अहम चुनौतियों का भी जिक्र किया है। माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की मांग में उतार-चढ़ाव का असर कारोबार पर पड़ सकता है। सरकारी डिफेंस ऑर्डर एक साथ और अनियमित तरीके से मिलते हैं, इसलिए कमाई में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है।

इसके अलावा एक्सप्लोसिव कारोबार से जुड़े नियामकीय नियम, MALE UAV और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी नई डिफेंस टेक्नोलॉजी में विस्तार से जुड़े जोखिम भी मौजूद हैं।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि कंपनी के करीब 35% रेवेन्यू विदेशी बाजारों से आते हैं। वहीं, डिफेंस ऑर्डर बुक का भी बड़ा हिस्सा निर्यात पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है।

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों का हाल

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयर गुरुवार को 3.26% की गिरावट के साथ 17,385 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में इसने 31.79% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल के दौरान इसने 980% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.57 लाख करोड़ रुपये है।

Stock Split: 5 साल में 1200% रिटर्न, अब 5 छोटे टुकड़ों में टूटेगा शेयर; 20 जुलाई है रिकॉर्ड डेट

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AA23: अल्लू अर्जुन स्टारर ‘AA23’ का लुक टेस्ट जल्द होगा रिवील, जानिए पूरी डिटेल!

AA23: अल्लू अर्जुन वाकई में सबसे बड़े पैन-इंडिया सुपरस्टार्स में से एक हैं। ‘पुष्पा’ फ्रैंचाइज़ी की शानदार सफलता के साथ एक नया बेंचमार्क सेट करने के बाद, उन्होंने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘राका’ को लेकर लोगों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट पैदा कर दी है, जिसके फर्स्ट लुक ने पहले ही सोशल मीडिया पर भारी तहलका मचा दिया है।

हालांकि, जहां हर कोई इस फिल्म से और अपडेट्स देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, वहीं सुपरस्टार लोकेश कनगराज के साथ अपने अगले एक्साइटिंग कोलाबोरेशन के लिए भी तैयारी कर रहे हैं, जिसका टेंटेटिव टाइटल ‘AA23’ है।

​अल्लू अर्जुन जब भी कोई अपडेट शेयर करते हैं, तो तूफान आना तय होता है, और ऐसा लग रहा है कि वह एक बार फिर से ऐसा ही कुछ करने की तैयारी में हैं। एक इंडिपेंडेंट इंडस्ट्री सोर्स के मुताबिक, “AA23 के मेकर्स एक बीटीएस (बिहाइंड द सीन्स) वीडियो रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अल्लू अर्जुन का लुक टेस्ट दिखाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, डायरेक्टर लोकेश कनगराज ने हाल ही में यह लुक टेस्ट किया है और आने वाले दिनों में इस फुटेज को सामने लाया जा सकता है।”

​सोर्स ने आगे बताया, “यह वीडियो फिल्म का ऑफिशियल टाइटल अनाउंसमेंट टीज़र नहीं होगा, बल्कि एक प्रमोशनल झलक होगी जो फैंस को इस अपकमिंग एक्शन एंटरटेनर का एक शुरुआती लुक देगी। हालांकि, मेकर्स की तरफ से अभी तक इसकी ऑफिशियल अनाउंसमेंट होना बाकी है।”

​’AA23′ के अनाउंसमेंट टीज़र में अल्लू अर्जुन को वह सिग्नेचर सिल्वर कड़ा पहने हुए देखा गया है,  अक्सर लोकेश कनगराज की फिल्मों से जुड़ा होता है, जो एक स्टाइलिश और वेस्टर्न-इंस्पायर्ड लुक की तरफ इशारा करता है। इस फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर अनिरुद्ध रविचंदर कंपोज करेंगे, जो अल्लू अर्जुन के साथ उनका पहला कोलाबोरेशन होगा। इसके अलावा, हीसेनबर्ग (Heisenberg) द्वारा लिखे गए ’23 थीम’ ने रिलीज के बाद ऑनलाइन काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

​अल्लू अर्जुन ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘राका’ के अनाउंसमेंट के साथ एक बार फिर देश भर में तहलका मचा दिया है। भले ही यह उनके नए अवतार का सिर्फ एक पोस्टर रिवील था, लेकिन यह देश भर में एक सनसनी बन गया और अब तक के सबसे बड़े कैरेक्टर रिवील्स में से एक साबित हुआ। अब, देश भर के दर्शक उन्हें बड़े पर्दे पर और ज्यादा देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

Once a Week Insulin Explained: साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन, भारत में लॉन्च हुए पहले वन्स-वीकली इंसुलिन की कीमत समेत 5 बड़े फैक्ट्स जानिए

Once a Week Insulin news: भारत में डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। जहां डायबिटीज पीड़ितों के दिन की शुरुआत सुई के दर्द के साथ होती है और उन्हें साल में कम से कम 365 इंसुलिन इंजेक्शन लेने पड़ते हैं, वहीं अब इस संख्या में भारी कमी आने वाली है। डेनमार्क की दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) ने भारत में दुनिया का पहला वन्स-वीकली बेसल इंसुलिन (हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन) लॉन्च कर दिया है। हमारे सहयोगी न्यूज18 की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने गुरुवार को भारत में अवीकली (Awiqli) नाम से इस इंसुलिन को लॉन्च किया है। इस दवा के 10 जुलाई से फार्मेसियों पर उपलब्ध होने की संभावना है। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय ने इसे कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।

आइए जानते हैं भारत में लॉन्च हुए इस पहले वन्स-वीकली इंसुलिन से जुड़े 5 बड़े फैक्ट्स, इसकी कीमत, काम करने का तरीका और फायदे या नुकसान।

1- कीमत और उपलब्धता: सबसे बड़ा फैक्ट

कितनी है कीमत?: कंपनी ने अवीकली को 2611 रुपये में 700 यूनिट के साथ लॉन्च किया है। यह एक डिस्पोजेबल फ्लेक्सटच पेन के रूप में आता है। इसकी प्रति यूनिट लागत लगभग 3.70 रुपये बैठती है। भारत जैसे कीमत के प्रति संवेदनशील बाजार के लिए कंपनी ने इसे बेहद किफायती रखने का प्रयास किया है। विक्रांत श्रोत्रिय के मुताबिक यह आधुनिक सेकेंड-जनरेशन इंसुलिन की तुलना में औसतन 25 से 35 प्रतिशत तक सस्ता है।

2- साल में 365 के बजाय सिर्फ 52 इंजेक्शन

रोजाना इंसुलिन लेने वाले मरीजों को साल में 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। हफ्ते में सिर्फ एक बार लिए जाने वाले अवीकली से मरीजों को साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन ही लेने होंगे। इससे मरीजों को रोज-रोज के दर्द और झंझट से बड़ी मुक्ति मिलेगी।

3- यह शरीर के भीतर कैसे काम करता है? (इसके पीछे का विज्ञान)

इस इंसुलिन का विज्ञान 1950 के दशक की खोजों से जुड़ा है। नोवो नॉर्डिस्क ने इंसुलिन चेन पर तीन अमीनो एसिड की पोजीशन में बदलाव किया है और इसके एक छोर पर फैटी एसिड जोड़ा है। इन बदलावों के कारण शरीर में दवा का प्रभाव 190 घंटे से अधिक समय तक बढ़ जाता है। यह संशोधित मॉलिक्यूल रक्त में मौजूद एल्ब्यूमिन (Albumin) प्रोटीन के साथ प्रतिवर्ती रूप से जुड़ जाता है और घंटों के बजाय कई दिनों तक धीरे-धीरे शरीर में रिलीज होता है। यही वजह है कि एक सिंगल इंजेक्शन पूरे हफ्ते का कवरेज दे देता है। कंपनी के मुताबिक इसके क्लिनिकल प्रोग्राम के छह फेज-3a ट्रायल्स में 4000 से अधिक वैश्विक मरीजों (भारतीयों सहित) पर अध्ययन किया गया। इसमें इसने प्रतिदिन दिए जाने वाले ग्लार्गिन यू100 की तुलना में बेहतर HbA1c नियंत्रण और टाइम इन रेंज का प्रदर्शन किया।

4- किसे करना चाहिए स्विच और क्या हैं इसके फायदे व साइड इफेक्ट्स?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह दवा मुख्य रूप से टाइप 2 डायबिटीज के उन वयस्क मरीजों के लिए है जिनका ब्लड शुगर ओरल दवाओं से कंट्रोस नहीं हो रहा है। फोर्टिस सी-डॉक अस्पताल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ अनूप मिश्रा के मुताबिक यह इंसुलिन रोजाना के इंजेक्शन के बोझ को कम करेगा और मरीजों में इलाज के प्रति निरंतरता को सुधारेगा। मैक्स हॉस्पिटल्स के ग्रुप चेयरमैन (एंडोक्रिनोलॉजी एंड डायबिटीज) डॉ अमरीश मित्तल ने कहा कि 24 घंटे वाले इंसुलिन की तुलना में 7 दिन में एक बार बड़ी खुराक देना एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इससे उन मरीजों को इंसुलिन थेरेपी शुरू करने के लिए मनाना आसान हो जाएगा जो रोज सुई लगाने के डर से मना कर देते हैं।

चुनौतियां और साइड इफेक्ट्स

डोज एडजस्टमेंट में दिक्कत: डॉ. मित्तल के मुताबिक दैनिक इंसुलिन की तरह इसमें डोज को रोजाना माइक्रो-एडजस्ट नहीं किया जा सकता। अगर मरीज का ब्लड शुगर अचानक बहुत कम हो जाता है तो वह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है क्योंकि एक बार शरीर में जाने के बाद इस इंसुलिन को रोका नहीं जा सकता। हालांकि इसका जोखिम मौजूदा इंसुलिन जितना ही है। अगर हफ्ते की कोई खुराक छूट जाती है तो उसे प्रबंधित करना अधिक जटिल होता है और उसे तुरंत ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए डॉक्टरों और मरीजों को विशेष ट्रेनिंग की जरूरत होगी।

5- भारत में इंसुलिन से हिचकिचाहट और डायबिटीज के डरावने आंकड़े

भारत में इंसुलिन थेरेपी की उपलब्धता के बावजूद लोग जल्दी इंसुलिन लेना स्वीकार नहीं करते। अध्ययन बताते हैं कि 93 प्रतिशत मरीज इंसुलिन इंजेक्शन नहीं लेना चाहते और डॉक्टर भी हिचकिचाते हैं। लोग जरूरत से 8 या 9 साल की देरी से इंसुलिन शुरू करते हैं। तब तक स्वाभाविक रूप से इंसुलिन बनाने वाली शरीर की करीब आधी बीटा कोशिकाएं हमेशा के लिए खत्म हो चुकी होती हैं।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 20.9% पुरुषों और 17.8% महिलाओं में हाई ब्लड शुगर है या वे इसकी दवा ले रहे हैं। ये आंकड़ा जो NFHS-5 में क्रमशः 15.6% और 13.5% था। भारत में इस समय 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की श्रेणी में हैं।

नोवो नॉर्डिस्क के दूसरे अपकमिंग प्रोजेक्ट्स

इंसुलिन के अलावा नोवो नॉर्डिस्क भारत में कई दूसरी दवाएं लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने भारत में वजन घटाने वाली वेगोवी पिलृ (Wegovy pill) जो कि एक ओरल GLP-1 फॉर्मूलेशन है, की मंजूरी के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा मोटापे और हृदय जोखिम के लिए ‘कैग्रिलिनटाइड-सेमाग्लूटाइड’, ग्रोथ हार्मोन की कमी के लिए वन्स-वीकली थेरेपी और ‘सिकल सेल डिजीज’ के इलाज पर भी काम चल रहा है। भारत में सेमाग्लूटाइड (पेटेंट खत्म होने) के जेनेरिक कंपीटिशन के बावजूद कंपनी का इन-हाउस सप्लाई चेन मजबूत होने के कारण डॉक्टर और मरीज इस पर भरोसा जता रहे हैं।

Yogini Ekadashi 2026: 10 या 11 जुलाई कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके सभी दुख तकलीफें भगवान की कृपा से दूर हो जाती हैं। ऐसा ही एक व्रत है योगिनी एकादशी का, जो आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पद्म पुराण में बताया गया है कि इस व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य देता है। इस साल योगिनी एकादशी व्रत का संयोग दो दिन, 10 और 11 जुलाई को पड़ रहा है। 10 जुलाई को एकादशी तिथि सूर्योदय के बाद लग रही है, जबकि 11 जुलाई को एकादशी तिथि में सूर्योदय तो हो रहा है, लेकिन यह बहुत जल्दी समाप्त हो जा रही है। इसलिए इस व्रत की तारीख को लेकर भक्तों में कंफ्यूजन है। आइए जानें इसकी सही तारीख

दो दिन होगा योगिनी एकादशी व्रत

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है। यह 11 जुलाई शनिवार को प्रात: 5 बजकर 22 मिनट तक मान्य रहेगी। 11 जुलाई को हरि वासर सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर खत्म हो रहा है, इस वजह से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा। 10 जुलाई को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रहेंगे, वहीं 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत रखेंगे।

योगिनी एकादशी 2026 पूजा का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त (पूजन के लिए): सुबह 04:54 बजे से सुबह 05:26 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:28 बजे तक

पारण का समय

शास्त्रों के नियमों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हरि वासर समाप्त होने के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर किया जाता है।

10 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए पारण समय : 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच। इस दिन सुबह 10:32 बजे तक हरि वासर रहेगा, इसलिए पारण दोपहर के इस शुभ समय में करना श्रेष्ठ है।

11 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए पारण समय : 12 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:32 बजे से सुबह 08:18 बजे के बीच।

Yogini Ekadashi 2026 Date: योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग के साथ रहेगा भरिणी नक्षत्र, जानें कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत

TCS Dividend: हर शेयर पर ₹12 का डिविडेंड देगी टाटा की टीसीएस, रिकॉर्ड डेट भी तय

TCS Dividend: टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने पहली तिमाही के नतीजों के साथ 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी ने 15 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, उन्हें डिविडेंड मिलेगा। डिविडेंड का भुगतान 31 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

इससे पहले मार्च 2026 तिमाही में TCS ने 31 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था। वहीं जनवरी 2026 में कंपनी ने 11 रुपये का अंतरिम डिविडेंड और 46 रुपये का स्पेशल डिविडेंड मिलाकर कुल 57 रुपये प्रति शेयर का भुगतान किया था।

पिछले 5 साल में कितना डिविडेंड दिया?

सालडिविडेंड
कुल भुगतान (₹/शेयर)

2021₹6 अंतरिम + ₹7 अंतरिम + ₹7 अंतरिम + ₹15 फाइनल₹35
2022₹7 अंतरिम + ₹8 अंतरिम + ₹8 अंतरिम + ₹22 फाइनल₹45
2023₹8 अंतरिम + ₹67 स्पेशल + ₹9 अंतरिम + ₹9 अंतरिम + ₹24 फाइनल₹108
2024₹9 अंतरिम + ₹18 स्पेशल + ₹10 अंतरिम + ₹10 अंतरिम + ₹28 फाइनल₹75
2025₹10 अंतरिम + ₹66 स्पेशल + ₹11 अंतरिम + ₹11 अंतरिम + ₹30 फाइनल₹128

पिछले पांच वर्षों में TCS ने कुल 457 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है। इस दौरान कंपनी ने 2022 और 2023 में शेयर बायबैक भी किए थे।

तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 72,275 करोड़ रुपये रहा। यह सालाना आधार पर करीब 14% और पिछली तिमाही के मुकाबले 2.2% अधिक है। ऑपरेटिंग मार्जिन 24% रहा।

कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 13,349 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 4.61% ज्यादा है। वहीं कंपनी ने बताया कि उसका नेट इनकम 8.5% बढ़कर 13,849 करोड़ रुपये हो गया।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी

जून तिमाही के दौरान TCS ने 9,200 से ज्यादा नए कर्मचारियों की नेट हायरिंग की। 30 जून 2026 तक कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 5,93,798 हो गई।

TCS का शेयर गुरुवार को लगभग 2,048 रुपये के आसपास सपाट बंद हुआ। हालांकि, दिन में कारोबार के दौरान यह 2% तक गिर गया था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BSNL जल्द लॉन्च करेगा नया सैटेलाइट फोन, बिना नेटवर्क कर सकेंगे कॉल, जानें कीमत

BSNL Satellite Phone: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने गुरुवार को सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराने की घोषणा की है, जिसकी कीमत 1.34 लाख रुपये रखी गई है। कंपनी के इस कदम का उद्देश्य सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं का विस्तार करना है, ताकि इसका इस्तेमाल डिफेंस, समुद्री सेवाओं और आपदा प्रबंधन जैसे कामों में किया जा सके।

गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में BSNL ने बताया कि इस सैटेलाइट फोन की कीमत सभी टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपये प्रति यूनिट है। इसे खासकर मुश्किल हालात में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है और यह उन दूर-दराज इलाकों में भी वॉइस कॉल और SMS सर्विस देता है जहां आम मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते।

BSNL ने सैटेलाइट फोन की कीमत बताते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “जब आम मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करते, तब BSNL सैटेलाइट फोन आपको कनेक्टेड रखता है। इसे मुश्किल हालात में इस्तेमाल के लिए बनाया गया है, इसलिए यह डिफेंस, समुद्री कामकाज, आपदा के समय मदद, माइनिंग, दूर-दराज के इलाकों में कामकाज और एडवेंचर ट्रैवल के लिए एक बेहतरीन समाधान है।”

कंपनी ने पोस्ट में एक मोबाइल नंबर शेयर करते हुए लिखा कि ज्यादा जानकारी के लिए यूजर्स नजदीकी BSNL ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि, उस मोबाइल नंबर पर कोई जवाब नहीं मिला।

X पर एक वेरिफाइड अकाउंट होल्डर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हमेशा की तरह, ऊपर दिए गए नंबर पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है।”

BSNL को भेजे गए ईमेल का भी तुरंत कोई जवाब नहीं मिला।

फरवरी में एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि BSNL 1 जनवरी, 2018 से आम जनता और प्राइवेट कंपनियों को ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) के जरिए वॉइस कॉल और SMS सर्विस दे रहा है।

11 फरवरी को जारी बयान में बताया गया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने 12 जून 2017 को सैटेलाइट-बेस्ड सर्विस देने के बारे में निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में यह भी शामिल था कि BSNL को मोबाइल कनेक्शन के लिए तय कस्टमर एक्विजिशन प्रोसेस (ग्राहक बनाने की प्रक्रिया) को पूरा करना होगा, जिसमें समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं।

बयान में यह भी कहा गया था कि “BSNL सब्सक्राइबर से इस्तेमाल की जगह, इस्तेमाल की अवधि और सैटेलाइट हैंडसेट के इस्तेमाल के मकसद जैसी जानकारी भी लेगा। इसके अलावा, GSPS सर्विस असल में एक सुरक्षित कम्युनिकेशन है क्योंकि इसमें जानकारी एन्क्रिप्टेड रूप में ट्रांसफर की जाती है।”

BSNL के सैटेलाइट फोन के पोस्टपेड प्लान सरकारी और कमर्शियल संस्थाओं के लिए 3,500 रुपये, 5,835 रुपये और 11,670 रुपये के फिक्स्ड मंथली चार्ज पर उपलब्ध थे, जिनमें क्रमशः 16, 30 और 60 मिनट का फ्री टॉक टाइम या SMS मिलता था।

वहीं, BSNL सरकारी संस्थाओं के प्रीपेड प्लान के लिए हर महीने 3,500 रुपये (20 मिनट के फ़्री टॉक टाइम के साथ) या हर साल 38,500 रुपये (240 मिनट के फ्री टॉक टाइम के साथ) चार्ज कर रहा है, जबकि कमर्शियल संस्थाएं हर महीने 5,835 रुपये (30 मिनट के फ्री टॉक टाइम के साथ) या हर साल 64,185 रुपये (360 मिनट के फ्री टॉक टाइम के साथ) का प्लान ले सकती हैं।

फ्री मिनट खत्म होने के बाद, सरकारी संस्थाओं से प्रति मिनट या प्रति SMS ₹18 लिए जाते हैं, जबकि कमर्शियल संस्थाओं से प्रति मिनट या प्रति SMS ₹25 लिए जाते हैं।

BSNL के बयान के अनुसार, प्रीपेड प्लान में अतिरिक्त बैलेंस के लिए टॉप-अप या रिचार्ज की सुविधा भी उपलब्ध है। ग्राहक 200 रुपये, 500 रुपये, 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रुपये के रिचार्ज विकल्प चुन सकते हैं।

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एक दिन देर से ही सही पूरे देश में छा तो गया मानसून पर बारिश के ये 3 आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले, IMD का बिग अपडेट

Monsoon Rain Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को एक बड़ा अपडेट शेयर किया है। इसके मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ते हुए पूरे देश को कवर कर लिया है। पूरे देश में मानसून के छाने में सामान्य तिथि (8 जुलाई) के मुकाबले इस बार महज एक दिन की देरी हुई है। भले ही मानसून पूरे भारत में पहुंच चुका है लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए बारिश के तीन आंकड़े देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। देश में इस समय कुल मिलाकर बारिश की कमी बनी हुई है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियों का उभरना इसके पीछे का एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अल नीनो की स्थिति भारत में कम बारिश की वजह बनती है। आइए जानते हैं मौसम विभाग के वे 3 आंकड़े जो चिंता बढ़ा रहे हैं:

चिंता बढ़ाने वाले बारिश के 3 बड़े आंकड़े

IMD के डेटा के मुताबिक मानसूनी सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक बारिश के आंकड़ों में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। इसे नीचे बिंदुवार समझा जा सकता है-

1- जून महीने में 40% की भारी कमी

भारत में इस साल जून के महीने में करीब 40 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इसमें सबसे बुरी मार मध्य भारत पर पड़ी। यहां जून में 50.4 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई। इतना ही नहीं देश में इस साल जून के दौरान साल 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश दर्ज की गई है।

2- ओवरऑल सीजनल डेफिसिट अभी भी 14% पर

भले ही जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश दिख रही है लेकिन IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 9 जुलाई की अवधि के लिए देश में कुल मिलाकर बारिश की कमी अभी भी 14 प्रतिशत पर बनी हुई है।

3- जुलाई महीने का सूखा अनुमान (94% LPA)

मौसम विभाग ने 30 जून को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में बताया था कि जुलाई के पहले 7 से 10 दिनों में देश भर में बारिश होगी (जो वर्तमान में दिख भी रही है) लेकिन इसके साथ ही विभाग ने आगाह किया है कि पूरा जुलाई महीना सामान्य से अधिक सूखा रहेगा। जुलाई में देश भर में होने वाली बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।

क्या होता है LPA?

एलपीए (Long-Period Average) का मतलब किसी दिए गए समय (जैसे एक महीना या सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई बारिश के उस औसत से होता है जो आम तौर पर 30 से 50 वर्षों की एक लंबी अवधि का निकाला जाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी बारिश का एलपीए (LPA) 87 सेमी है।

जुलाई के शुरुआती 9 दिनों में रहा बड़ा सरप्लस

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सिर्फ जुलाई महीने के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो भारत ने अब तक बारिश का एक बड़ा सरप्लस (अधिकता) देखा है। जहां जुलाई के पहले 9 दिनों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 73.8 मिमी होता है, वहीं देश में इस अवधि में अब तक 101.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इस साल सामान्य से कम रह सकती है कुल मानसूनी बारिश

केरल में इस साल मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई थी जिसने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) की शुरुआत की थी। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को दस्तक देता है। मौसम विभाग के कुल पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल पूरे मानसून सीजन में होने वाली कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) की सिर्फ 90 प्रतिशत होने की संभावना है। इसमें 4 प्रतिशत का मॉडल एरर शामिल है। अल नीनो की स्थिति के चलते इस कमी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

बीमार पत्नी के इलाज के लिए 80 साल का यह बुजुर्ग रोज चलाता है 16 घंटे टैक्सी, इनकी कहानी सुन रो पड़ेगा दिल

लगभग 80 साल की उम्र में भी, जब उनका शरीर उनके इरादों का साथ नहीं देता, रवींद्रनाथ सरकार हर सुबह अपनी पीली टैक्सी का स्टीयरिंग व्हील थाम लेते हैं। वे ऐसा किसी बड़े मकसद के लिए नहीं, बल्कि अपनी 67 साल की बीमार पत्नी का खर्च उठाने के लिए करते हैं। घर का गुजारा करने के लिए वे किराए की पीली टैक्सी चलाते हैं।

सोशल मीडिया पर चैताली बोस नाम की यूजर द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो ने हज़ारों लोगों का दिल जीत लिया है। लोग उनके जज्बे की तारीफ कर रहे हैं और कोलकाता के दम दम में रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले इस बुज़ुर्ग जोड़े की मदद करने की अपील कर रहे हैं। क्लिप में बताया गया है कि सरकार, जो लगभग 52 सालों से गाड़ी चला रहे हैं, रोजाना सुबह 6 बजे से लेकर 16 घंटे तक कोलकाता की सड़कों पर गुजारा करने के लिए टैक्सी चलाते हैं।

उम्र बढ़ने और सेहत खराब होने के बावजूद, वे बिना एक दिन की छुट्टी लिए किराए की पीली टैक्सी चलाते रहते हैं। कभी-कभी वे रात 11 बजे तक गाड़ी चलाते हैं, और अगर उन्हें पूरे दिन कोई सवारी न मिले या एक रुपया भी न कमा पाएं, तब भी उन्हें टैक्सी का किराया मालिक को देना ही पड़ता है। यह जोड़ा, जिसकी देखभाल करने वाला कोई बच्चा नहीं है, उनकी कमाई से ही गुजारा करता है, लेकिन उनकी कमाई दवाइयां खरीदने के लिए काफी नहीं है।

उनकी अपनी सेहत की दिक्कतों को देखते हुए उनकी कहानी और भी खास हो जाती है। महिला ने बताया कि सरकार को लंबे समय से अस्थमा की बीमारी है, जबकि उनकी पत्नी को दिल से जुड़ी एक बीमारी है। बोस ने बताया कि इतनी तकलीफों के बावजूद, 80 साल के ये बुज़ुर्ग अपनी सवारी से उतना ही किराया लेते हैं जितना वे सही समझें।

इस जोड़े के रहने की हालत भी बहुत मुश्किल है। वे टीन के एक छोटे से घर में रहते हैं, जिसकी छत मॉनसून के दौरान टपकती है। बारिश का पानी घर के अंदर आ जाता है, और मरम्मत करवाना उनकी पहुंच से बाहर है। क्लिप के आखिर में, बोस ने लोगों से अपील की कि वे जिस तरह से भी हो सके, उनकी मदद के लिए आगे आएं।

उनकी कहानी ने ऑनलाइन लोगों के दिलों को छू लिया है। एक यूजर ने कहा, “जिन लोगों ने अपनी ज़िंदगी सम्मान के साथ काम करते हुए बिताई है, उन्हें कभी भी अपने बुढ़ापे के दिन गुजारा करने के लिए संघर्ष करते हुए नहीं बिताना चाहिए। अगर हम थोड़ी सी भी मदद कर सकते हैं, तो हमें करनी चाहिए। दया कोई दान नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के प्रति हमारा फर्ज है।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “ऐसे हालात में लोगों को भीख तक मांगनी पड़ती है और वे इस उम्र में भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। एक ने लिखा कि “मुझे लगता है कि अन्नपूर्णा योजना के लिए तय की गई रकम कम कर दी जानी चाहिए और उस पैसे को बुढ़ापे की पेंशन के तौर पर दिया जाना चाहिए। सक्षम महिलाएं अपनी कोशिशों से कुछ कमा सकती हैं, लेकिन इन बुज़ुर्गों की काम करने की क्षमता कम होती है और उन्हें ज्यादा पैसे की जरूरत होती है।”