एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई को आ रहा है। यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) है। इंडिया में म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी का बड़ा प्लान है। इसे पेरेंट कंपनी और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का सपोर्ट हासिल है। मनीकंट्रोल ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के फ्यूचर प्लान के बारे में जानने के लिए इसके एमडी एवं सीईओ देबाशीष मिश्रा, ज्वाइंट सीईओ डीपी सिंह और डिप्टी सीईओ डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स से बातचीत की।
रिटेल बेस बढ़ाने पर कंपनी का फोकस
देबाशीष मिश्रा ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता रिटेल इनवेस्टर्स का बेस बढ़ाना है। लोगों तक पहुंच के मामले में भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अभी शुरुआती अवस्था में है। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के करीब 53 करोड़ कस्टमर्स हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स के यूनिक इनवेस्टर्स की संख्या सिर्फ करीब 55 लाख है। यह कस्टमर बेस का 1 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा है। अगले दो से तीन सालों में रिटेल पार्टिसिपेशन बढ़ाना और लोगों तक पहुंच का विस्तार करना हमारी पहली प्राथमिकता होगी।
पीएमएस, एआईएफ और SIF पर भी कंपनी की नजरें
उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड बिजनेस के अलावा कंपनी पीएमएस, एआईएफ, SIF और गिफ्ट सिटी में अपनी मौजूदी बढ़ा रही है। अमुंडी के सपोर्ट से हमारा इंटरनेशनल बिजनेस करीब 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हम इसे अगले दो से तीन सालों में दोगुना करना चाहते हैं। हर ग्रोथ सेगमेंट में हमारी कोशिश स्ट्रॉन्ग रिसोर्सेज, स्ट्रेटेजी और पार्टनरशिप के जरिए लीडरशिप बनाने की है। हमारा प्लान हर जगह से इनवेस्टमेंट लेने का है।
एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का मिलेगा फायदा
डीपी सिंह ने कहा कि एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को सबसे ज्यादा फायदा एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का है। उन्होंने कहा कि हमारी मंथली सिप बुक करीब 4,000 करोड़ रुपये की है। इसमें से करीब 1300 करोड़ रुपये यानी करीब एक-तिहाई एसबीआई नेटवर्क के जरिए आता है। हमारे इंटरमीडियरी बिजनेस की भी करीब इतनी ही हिस्सेदारी है। एसबीआई का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क हमारी सबसे ब़ड़ी ताकत है। एसबीआई के 53 करोड़ कस्टमर बेस को देखते हुए हमें उम्मीद है कि हमारे लिए सिप बुक दोगुना करने की काफी गुंजाइश है।
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सेविंग्स इकोनॉमी से इनवेस्टमेंट इकोनॉमी बन रहा भारत
डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स ने कहा कि दुनिया के कई देशों में बैंकिंग और म्यूचुअल फंड एक दूसरे के साथ चलते हैं। भारत में हमारे लिए मौके और भी ज्यादा हैं, क्योंकि देश अब सेविंग्स इकोनॉमी से इननवेस्टमेंट इकोनॉमी के रूप में बदल रहा है। SIP से लोगों में निवेश में अनुशासन की आदत बनी है। लोग छोटी अवधि के निवेश की जगह लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं। भविष्य में इंडस्ट्री की ग्रोथ म्यूचुअल फंड्स से आगे निकल रिटायरमेंट सॉल्यूशंस, अल्टरनेटिव्स और वेल्थ मैनेजमेंट तक जाएगी।

