Viral Post: ‘न घर, न कार, न बड़ा बैंक बैलेंस’ 35 साल के इस शख्स ने बताई अपनी सबसे बड़ी दौलत

सोशल मीडिया पर इस समय एक शख्स की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में व्यक्ति ने लोगों से संपत्ति जोड़ने की बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की बात कही है। शख्स के मुताबिक लाइफ में सबसे बड़ा निवेश अच्छी सेहत है, इसलिए घर और गाड़ी जैसी पारंपरिक उपलब्धियों से पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। व्यक्ति का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोगों ने इस पर कई कमेंट किए हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आशीष जैन ने ये पोस्ट किया है। इस पोस्ट में आशीष जैन ने कहा कि उन्होंने भविष्य की जरूरत से ज्यादा चिंता करना छोड़ दिया और अपनी सेहत को सबसे ऊपर रखना शुरू किया। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब एक साल पहले धूम्रपान छोड़ दिया और जंक फूड का सेवन भी काफी कम कर दिया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

आशीष जैन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं 35 साल का हूं। मेरे पास न अपना घर है, न कार, न बड़ा बैंक बैलेंस, न स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स का बड़ा पोर्टफोलियो और न ही कोई शानदार नौकरी। लेकिन मैं एक अच्छे किराए के घर में रहता हूं, जरूरत पड़ने पर Uber से सफर कर लेता हूं और मुझ पर कोई कर्ज नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मेरी सेहत बेहतर हुई है, मानसिक रूप से भी मैं पहले से ज्यादा मजबूत महसूस करता हूं।” आशीष जैन ने अपनी पोस्ट में बताया कि पिछले एक साल के दौरान उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पहले से काफी बेहतर हुई है।

 

तनाव लेना कम कर दिया

उनका कहना है कि उन्होंने उन छोटी-छोटी बातों की चिंता करना छोड़ दिया है, जिनका भविष्य में कोई खास महत्व नहीं रहेगा। पोस्ट में आशीष ने आगे लिखा, “मैंने उन छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना छोड़ दिया, जिनका एक साल बाद कोई मतलब नहीं रहेगा। मैंने खुद पर घर या कार खरीदने का दबाव डालना बंद कर दिया और भविष्य की जरूरत से ज्यादा चिंता भी छोड़ दी है। अब मेरा पूरा ध्यान अपने शरीर और दिमाग को बेहतर बनाने पर है। एक साल से ज्यादा समय हो गया है, मैंने स्मोकिंग छोड़ दी है और जंक फूड भी काफी कम कर दिया है। हर चीज जानना या हर लक्ष्य हासिल करना जरूरी नहीं है। जिंदगी जैसे चल रही है, उसे स्वीकार करें और सबसे पहले खुद पर ध्यान दें।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

लोगों ने किया कमेंट

पोस्ट पर कई यूजर्स ने आशीष जैन की सोच का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, “जीरो कर्ज, भविष्य की जीरो टेंशन, स्मोकिंग छोड़ना और दूसरों से तुलना न करना… यह उन कई 35 साल के लोगों से कहीं बेहतर बैलेंस शीट है जिन्हें मैं जानता हूं।” एक अन्य यूजर ने कहा, “मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। यही जिंदगी जीने का सबसे व्यावहारिक तरीका है। हमेशा आभार के साथ जिएं और यह समझें कि असली मुकाबला खुद से होता है, किसी और की इंस्टाग्राम लाइफस्टाइल से नहीं।” वहीं, एक तीसरे यूजर ने लिखा, “दूसरों से तुलना करने पर मंजिल हमेशा दूर होती जाती है, लेकिन मन की शांति नहीं मिलती। पहले अंदर से मजबूत बनिए, उसके बाद बाकी चीजें हासिल करना आसान हो जाएगा।”

Core Sector Growth: जून में 5% पर पहुंची कोर सेक्टर की ग्रोथ, 5 महीने की सबसे तेज रफ्तार

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर ने जून 2026 में 5% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह पिछले 5 महीनों की सबसे तेज ग्रोथ है। मई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 3.2% रही थी। जून में तेज बढ़त की सबसे बड़ी वजह आयरन ओर (लौह अयस्क) का उत्पादन, साथ ही बिजली और सीमेंट सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन रहा।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर की कुल वृद्धि 3.6% रही। पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 1% थी। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में सुस्ती के बाद औद्योगिक गतिविधियों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

आयरन ओर बना सबसे बड़ा सहारा

रिवाइज्ड कोर सेक्टर इंडेक्स में इस बार पहली बार आयरन ओर को शामिल किया गया है। जून में इसका उत्पादन 43.9% बढ़ा। मई में इसमें 19% की वृद्धि दर्ज की गई थी। नए बेस ईयर 2022-23 के तहत इसे इंडेक्स में शामिल किए जाने से इसका योगदान भी बढ़ गया है।

बिजली और सीमेंट सेक्टर ने बनाए रखा दम

भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी, जिससे बिजली उत्पादन 9.8% बढ़ा। मई में इसमें 11.2% की वृद्धि हुई थी। वहीं, सीमेंट उत्पादन भी 9.8% बढ़ा। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

स्टील और कोयला उत्पादन भी बढ़ा

स्टील प्रोडक्शन जून में 4.6% बढ़ा। हालांकि यह मई के 5.1% से थोड़ा कम है, लेकिन सेक्टर लगातार बढ़त में बना हुआ है। मई में 9.5% की गिरावट के बाद कोयला उत्पादन भी वापसी करते हुए 1.4% बढ़ा, जिससे कोर सेक्टर को अतिरिक्त सहारा मिला।

इन सेक्टरों में रही कमजोरी

दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

  • रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% घटा। हालांकि मई में इसमें 8.2% की गिरावट थी।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 4.2% घटा। यह लगातार तीसरा महीना है जब इसमें गिरावट आई है।
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का उत्पादन 7.4% घटा, जो एक साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट है।
  • उर्वरक (Fertiliser) उत्पादन भी 3.3% घटा। मार्च से इस सेक्टर में कमजोरी बनी हुई है।

बदला कोर सेक्टर इंडेक्स

जून के आंकड़ों के साथ सरकार ने कोर सेक्टर इंडेक्स की नई सीरीज भी जारी की है। इसमें 2011-12 की जगह अब 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है।

अब इंडेक्स में 9 उद्योग शामिल हैं। पहली बार आयरन ओर को इसमें जगह मिली है। वहीं, स्टील इंडेक्स को इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के आंकड़ों के मुताबिक किया गया है। इसके अलावा, पुराने कोयला मापदंड की जगह रॉ कोल (Raw Coal) को शामिल किया गया है, ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

बिजली, सीमेंट, स्टील, कोयला और आयरन ओर में मजबूत बढ़त बताती है कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियां अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी सेक्टर की कमजोरी अब भी औद्योगिक विकास की रफ्तार पर दबाव बनाए हुए है।

Indiramma Scheme: सिर्फ 6 लाख में मिलेगा 528 sq ft का अपना फ्लैट! तेलंगाना सरकार ने लॉन्च की इंदिरम्मा आवास योजना, ये हैं शर्तें

Indiramma Scheme details: गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अपने घर का सपना सच करने की दिशा में तेलंगाना सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को हैदराबाद और आउटर रिंग रोड (ORR) के भीतर आने वाले शहरी क्षेत्रों यानी कोर अर्बन रीजन इकोनॉमी (CURE) क्षेत्र के लिए एक किफायती स्वामित्व आवास योजना इंदिरम्मा इंदलू (Indiramma Indlu) की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। हमारे सहयोगी CNBC TV 18 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के आवास मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, मंत्री पोन्नम प्रभाकर, दुद्डिला श्रीधर बाबू और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने राज्य सचिवालय में इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्घाटन करते हुए इसके लिए पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की।

आइए जानते हैं कि इस योजना के तहत फ्लैट की कीमत क्या होगी, सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है और इसमें आवेदन करने के क्या-क्या नियम हैं।

1 लाख फ्लैट बनाने की योजना, पहले चरण में बनेंगे 7680 फ्लैट्स

तेलंगाना सरकार की योजना GHMC, साइबराबाद और मलकाजगिरि नगर निगम की सीमाओं के भीतर चरणबद्ध तरीके से 1 लाख किफायती फ्लैट्स बनाने की है। शुरुआती चरण में तेलंगाना हाउसिंग बोर्ड 16 विधानसभा क्षेत्रों में 7680 लो इनकम ग्रुप (LIG) फ्लैट्स बनाएगा। बाद में इस प्रोजेक्ट का विस्तार करके 26 विधानसभा क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा। हर LIG फ्लैट का बिल्ट-अप एरिया 528 वर्ग फीट (400 वर्ग फीट कारपेट एरिया) होगा।

क्या होगी फ्लैट की कीमत? ₹5 लाख मिलेगी सरकारी सब्सिडी

आवास मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि सरकार उन इलाकों में भी घर उपलब्ध करा रही है जहां जमीन की कीमतें 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक हैं। इस योजना के तहत हर पात्र लाभार्थी को ₹5 लाख की सरकारी सब्सिडी मिलेगी। लाभार्थी महिला/परिवार को सिर्फ ₹6 लाख का भुगतान करना होगा। सरकार परियोजना के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध करा रही है। इससे घर की कुल लागत काफी कम हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग मंत्री दुद्डिला श्रीधर बाबू ने कहा कि सरकार का संकल्प तेलंगाना को झोपड़ी-मुक्त राज्य बनाना है।

कैसे करें आवेदन?

इंदिरम्मा इंदलू योजना के तहत आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया भी विस्तार से बताई गई है। इसके लिए 23 जुलाई से 10 अगस्त के बीच आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार मीसेवा (MeeSeva) केंद्रों और व्हाट्सएप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए एप्लीकेशन फीस ₹100 तय की गई है। आवेदकों को ₹10000 की रिफंडेबल अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करनी होगी। अगर फ्लैट आवंटित हो जाता है तो यह राशि लाभार्थी के हिस्से में एडजस्ट कर ली जाएगी। अगर फ्लैट अलॉट नहीं होता है तो ये पैसा रिफंड कर दिया जाएगा।

क्या हैं पात्रता की शर्तें?

योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को नीचे दी गईं शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा-

  • निवासी होना जरूरी: आवेदक कम से कम 10 वर्षों से CURE क्षेत्र में रह रहा हो।
  • कोई अन्य घर या प्लॉट न हो: आवेदक के पास आउटर रिंग रोड (ORR) की सीमा के भीतर अपना कोई मकान, फ्लैट या प्लॉट नहीं होना चाहिए।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹6 लाख तक होनी चाहिए।
  • प्रति परिवार एक आवेदन: एक परिवार से सिर्फ एक ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।

लॉटरी सिस्टम और वेरिफिकेशन: अगर आवेदनों की संख्या उपलब्ध फ्लैटों से अधिक होती है तो दस्तावेजों की जांच और 360-डिग्री सत्यापन के बाद पारदर्शी लॉटरी सिस्टम के माध्यम से फ्लैट्स का आवंटन किया जाएगा।

10 साल तक बेचने या किराए पर देने पर रोक: आवंटित फ्लैट को लाभार्थी 10 साल तक न तो बेच सकेंगे और न ही किराए पर दे सकेंगे। होम लोन के लिए बैंक में मॉर्गेज (बंधक) रखने की अनुमति होगी।

किस्तों में पेमेंट का शेड्यूल

तेलंगाना हाउसिंग बोर्ड ने लाभार्थियों के लिए चरणबद्ध पेमेंट प्लान भी पेश किया है-

  • आवेदन के समय: ₹100 फीस + ₹10000 EMD
  • अस्थायी आवंटन पर: ₹1 लाख
  • आरसीसी (RCC) स्ट्रक्चर पूरा होने पर: ₹2 लाख
  • फिनिशिंग स्टेज के दौरान: ₹2 लाख
  • कब्जा मिलने से पहले: शेष राशि

आरक्षण के नियम भी होंगे लागू

राज्य सरकार की नीति के मुताबिक योजना में विशेष आरक्षण का प्रावधान किया गया है। कुल फ्लैटों का 50% हिस्सा एससी (SC), एसटी (ST), बीसी (BC), दिव्यांगजनों, आउटसोर्सिंग/क्लास-IV कर्मचारियों और स्वच्छता कर्मचारियों ॉके लिए आरक्षित रहेगा। हर श्रेणी में 30% फ्लैट्स महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।

पहले चरण में किन-किन इलाकों में मिलेंगे 480-480 फ्लैट्स?

पहले चरण के तहत CURE क्षेत्र के 16 विधानसभा क्षेत्रों में फ्लैट आवंटित किए जाएंगे। राजेंद्रनगर (मेलारदेवपल्ली), महेश्वरम (जालपल्ली), सेरिलिंगमपल्ली (रायदुर्गम), इब्राहिमपटनम (बंदलागुड़ा एलआईजी कॉलोनी), मल्काजगिरि (कोवकूर), कारवान (कुलसुमपुरा), बहादुरपुरा (नंदी मुसलीगुड़ा), अंबरपेट (सिटी पुलिस लाइन्स), कुकटपल्ली (केपीएचबी कॉलोनी), मेडचल (पोचारम एलआईजी कॉलोनी), कुथबुल्लापुर (गाजुलारामारम), सनतनगर (पतिगड्डा), सिकंदराबाद छावनी (मारेडपल्ली-महेंद्र हिल्स), और मलकपेट (गड्डियनारम आरएंडबी क्वार्टर), इन क्षेत्रों में 480-480 फ्लैट्स मिलेंगे।

  • नामपल्ली (480 फ्लैट्स): 360 फ्लैट्स एचएमडब्ल्यूएसएसबी कार्यालय के पास रेड हिल्स में और 120 फ्लैट्स निलोफर अस्पताल के पास।
  • खैरताबाद (480 फ्लैट्स): 120 फ्लैट्स हकीमपेट दरगाह पर और 360 फ्लैट्स जुबली हिल्स में एमएलए कॉलोनी के पास।

किराए के मकान के साथ चल रहा है होम लोन? ITR दाखिल करते समय ऐसे उठाएं डबल टैक्स छूट का फायदा, बचेंगे लाखों

HRA and Home Loan Tax Benefit: नया घर खरीदने के बाद भी किराए के मकान में रहने वाले या नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर में रहने वाले नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के मन में अक्सर एक सवाल उठता है। ‘क्या मैं एक साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और होम लोन दोनों पर टैक्स छूट का दावा कर सकता हूं?’

एक व्यक्ति ने एक्सपर्ट से सवाल किया कि, ‘मैंने एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट के लिए होम लोन लिया था, जिसका पजेशन मुझे अगस्त 2025 में मिला। मैंने तुरंत इस फ्लैट को किराए पर दे दिया और खुद एक दूसरे किराए के फ्लैट में रह रहा हूं। क्या मैं फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए आईटीआर फाइल करते समय पूरे साल के लिए HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स लाभ का दावा कर सकता हूं?’

आइए टॉप फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं कि इनकम टैक्स एक्ट इस बारे में क्या कहता है और इसका पूरा नियम क्या है।

1. क्या एक साथ मिल सकती है HRA और होम लोन पर छूट?

जी हां, बिल्कुल! इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत एक ही समय में HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स बेनिफिट क्लेम करने पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं है। बशर्ते आप इन दोनों क्लेम से जुड़ी बुनियादी शर्तों को पूरा करते हों:

HRA के लिए शर्त: इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आपको अपनी कंपनी से HRA मिलता हो, आप वास्तव में उस घर का किराया चुका रहे हों जिसमें आप रह रहे हैं, और वह घर आपके खुद के नाम पर नहीं होना चाहिए।

होम लोन के लिए शर्त: जिस वित्तीय वर्ष में आपको प्रॉपर्टी का पजेशन मिलता है, आप उस पूरे साल के लिए होम लोन के टैक्स बेनिफिट का दावा करने के हकदार हो जाते हैं।

2. पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलेगा अधिकतम फायदा

ध्यान रखें कि HRA और होम लोन के मूलधन पर मिलने वाली टैक्स छूट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन सा टैक्स व्यवस्था चुना है। धारा 10(13A) के तहत HRA पर छूट और धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन पुनर्भुगतान पर ₹1.50 लाख तक की छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही मिलती है। अगर आप नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो ये दोनों छूट खत्म हो जाएंगी।

3. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का नियम

लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट का गणित इस बात पर निर्भर करता है कि घर से आपको क्या कमाई हो रही है और आपने कौन सा टैक्स रिजीम चुना है। टैक्स व्यवस्था होम लोन के ब्याज (Section 24b) पर मिलने वाली छूट के नियम:

पुरानी टैक्स व्यवस्था- आप साल भर में चुकाए गए पूरे ब्याज को मकान से मिले किराए के एवज में क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा, हाउस प्रॉपर्टी हेड के तहत होने वाले ₹2 लाख तक के नुकसान को अपनी अन्य आय के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। अगर नुकसान ₹2 लाख से ज्यादा है, तो उसे अगले 8 सालों तक आगे ले जाया जा सकता है।

नई टैक्स व्यवस्था- नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती केवल आपके द्वारा कमाए गए टैक्स योग्य किराए की रकम तक ही सीमित रहेगी। इसमें हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को किसी अन्य आय के साथ सेट-ऑफ करने या भविष्य के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति नहीं है।

4. प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट का अतिरिक्त लाभ

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पजेशन मिलने वाले साल में टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ा फायदा होता है। आप पजेशन वाले पूरे साल के होम लोन ब्याज का दावा तो कर ही सकते हैं। इसके साथ ही, घर का पजेशन मिलने से पहले की अवधि के दौरान आपने जो भी कुल ब्याज चुकाया था, उसका 1/5 हिस्सा भी हर साल क्लेम कर सकते हैं।

कुल मिलाकर आपकी प्रॉपर्टी किराए पर उठाई गई है और आप खुद किसी अन्य मकान में किराया देकर रह रहे हैं, तो आप नियमों का पालन करते हुए एक ही साल में HRA और होम लोन (ब्याज + मूलधन) दोनों पर डबल टैक्स ब्रेक का फायदा उठा सकते हैं। बेहतर लाभ के लिए अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार सही टैक्स रिजीम का चुनाव करें।

Gold-Silver Outlook: गोल्ड-सिल्वर मार्केट में मचा हाहाकार! भारी मंदी के बीच रॉबर्ट कियोसाकी ने कर दी ये बड़ी भविष्यवाणी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘नारायण मूर्ति की बात सुनकर ज्यादा घंटे किया ऑफिस में काम, फिर भी 5% मिली हाइक, डेलॉइट के कर्मचारी ने 10 साल बाद छोड़ी नौकरी

लगभग एक दशक तक, अर्जुन सिंह (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया है) को लगता था कि वे अपना पूरा करियर डेलॉइट (Deloitte) में ही बिताएंगे। हैदराबाद के रहने वाले इस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल ने कॉलेज से निकलते ही इस बड़ी कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे कंपनी के उस मज़बूत लॉन्ग-टर्म विज़न से सहमत थे, जिसमें कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने की बात कही जाती है।

लेकिन कंपनी में 10 साल बिताने के बाद, यह सीनियर कंसल्टेंट बुरी तरह थक-हारकर (बर्नआउट की स्थिति में) और सिर्फ़ पांच प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी के साथ नौकरी छोड़कर चला गया। अपने फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, 30-35 साल की उम्र के इस टेक प्रोफेशनल ने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि बर्नआउट, उम्मीदों का असलियत से दूर होना और मेहनत व इनाम के बीच बढ़ती दूरी ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जबकि वे सालों से कंपनी के प्रति वफ़ादार रहे थे।

सिंह ने कहा, “मैंने नारायण मूर्ति की कही बातों से भी ज़्यादा घंटे काम किया, फिर भी मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और सैलरी में सिर्फ़ पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली।” उन्होंने इन्फोसिस के को-फ़ाउंडर का ज़िक्र किया, जिनके 70 घंटे के वर्क-वीक (हफ़्ते में 70 घंटे काम) वाले बयान ने वर्क कल्चर पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। उन्होंने आगे बताया कि कई बार वे हफ़्ते में 74 घंटे तक काम करते थे।

कई प्रोफेशनल्स के उलट, जो कुछ सालों में कंपनियां बदलते रहते हैं, सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी डेलॉइट (Deloitte) छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “जब आप युवा होते हैं, तो सीनियर लीडर्स को देखकर यह सोचना आसान होता है कि ‘एक दिन, मैं भी उनकी जगह हो सकता हूं।'”

सिंह के अनुसार, जब वे एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुए, तो डेलॉइट का पार्टनरशिप मॉडल और एक ही ऑर्गनाइज़ेशन में पूरा करियर बिताने की संभावना उन्हें काफी आकर्षक लगी। समय के साथ, सीखने के मौके, बड़े क्लाइंट प्रोजेक्ट्स, प्रमोशन और सीनियर साथियों से मिली मेंटरशिप ने उन्हें कंपनी में बने रहने के लिए काफी वजहें दीं।

उन्होंने कहा, “आप पहले ही दिन यह तय नहीं करते कि आपको कहीं 10 साल तक रहना है। आप हर साल वहां बने रहने का फैसला करते हैं।”सिंह का मानना ​​है कि कंसल्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ज़रूरी नहीं कि क्लाइंट का काम ही हो, बल्कि टाइट डेडलाइन, कम स्टाफ वाले प्रोजेक्ट्स और बिलिंग वाले काम के अलावा अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों का मेल है।

उनके अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स के लिए असल में छह महीने में छह लोगों की ज़रूरत होती है, उनसे अब कॉम्पिटिशन के दबाव के कारण कम समय में छोटी टीमों द्वारा पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “अचानक छह लोगों की जगह चार लोग हो जाते हैं और समय सीमा भी पांच महीने की हो जाती है।”

हालांकि क्लाइंट के काम का अपना दबाव होता था, लेकिन सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से इंटरनल पहलों, हायरिंग गतिविधियों, प्रपोज़ल बनाने और प्रैक्टिस-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान देने की उम्मीद की जाती थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कर्मचारी पदानुक्रम (hierarchy) में ऊपर बढ़ते हैं, ऐसे कामों में भाग लेने की उम्मीद और मज़बूत होती जाती है।

सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे आप रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, इस तरह के ‘मुफ़्त’ काम (बिना बिलिंग वाले काम) और भी ज़्यादा होते जाते हैं।” सिंह के अनुसार, बर्नआउट (काम के तनाव से पूरी तरह थक जाने) की एक बड़ी वजह काम से अलग न हो पाना था। उन्हें याद है कि वे सोशल गैदरिंग के दौरान भी काम के फ़ोन कॉल लेते थे, कई काम के डिवाइस साथ रखते थे और ऑफ़िस के समय के बाद भी उपलब्ध रहते थे।

सिंह ने कहा कि कंसल्टिंग मॉडल अक्सर ऐसा माहौल बनाता है जहां कर्मचारियों को क्लाइंट की डेडलाइन, अंदरूनी कमिटमेंट और बिज़नेस बढ़ाने की कोशिशों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह होता है कि काम ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों पर हावी होने लगता है।

उन्होंने कहा, “आप हर समय काम में ही लगे रहते हैं।”हालांकि लंबे समय तक काम करना मुश्किल था, लेकिन सिंह ने कहा कि उन्हें ज़्यादा निराशा इस सोच से होती थी कि बहुत ज़्यादा मेहनत करने पर भी इनाम में बहुत मामूली फ़र्क ही मिलता था। उनके अनुसार, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में अक्सर उतनी ही बढ़ोतरी होती थी, जितनी उन साथियों की होती थी जो काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखते थे।

उन्होंने कहा, “इस साल लोगों की सैलरी में 5 परसेंट से भी कम बढ़ोतरी हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि औसत और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बीच का अंतर अक्सर बहुत कम लगता था। “जब काम की पहचान या तारीफ़ नहीं होती, तो इंसान थककर हार मान लेता है (बर्नआउट)।”

उन्होंने क्लाइंट के लिए डिटेल्ड प्रपोज़ल तैयार करने के लिए टेक्निकल स्टाफ़ पर डेलॉइट की निर्भरता की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि इसके बजाय डेडिकेटेड सेल्स टीमों को यह काम संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता। सिंह ने कहा, “बदलाव किसी एक बुरे प्रोजेक्ट या मुश्किल मैनेजर की वजह से नहीं आया। यह धीरे-धीरे हुआ।”

समय के साथ, उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसी रास्ते पर चलते रहने से उन्हें अपने करियर के अगले चरण में वे अनुभव मिल पाएंगे जिनकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद सिंह हैदराबाद की एक दूसरी कंपनी में शामिल हो गए। उनके अनुसार, नई भूमिका में बेहतर सैलरी तो मिलती ही है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि उन्हें अपने समय और वर्क-लाइफ़ बैलेंस पर ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।

पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें डेलॉइट में बिताए अपने दस सालों का कोई अफ़सोस नहीं है। “बल्कि, उन दस सालों ने मुझे अनुभव, आत्मविश्वास और नज़रिया दिया, जिससे मुझे यह समझ आया कि अब एक अलग रास्ता चुनने का सही समय आ गया है।” सिंह के लिए, नौकरी छोड़ने का मतलब किसी सपने को छोड़ना नहीं था। इसका मतलब यह समझना था कि 22 साल की उम्र में सफलता की जो परिभाषा उनके मन में थी, वह 35 साल की उम्र में वैसी नहीं रही।

‘नारायण मूर्ति की बात सुनकर ज्यादा घंटे किया ऑफिस में काम, फिर भी 5% मिली हाइक, डेलॉइट के कर्मचारी ने 10 साल बाद छोड़ी नौकरी

लगभग एक दशक तक, अर्जुन सिंह (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया है) को लगता था कि वे अपना पूरा करियर डेलॉइट (Deloitte) में ही बिताएंगे। हैदराबाद के रहने वाले इस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल ने कॉलेज से निकलते ही इस बड़ी कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे कंपनी के उस मज़बूत लॉन्ग-टर्म विज़न से सहमत थे, जिसमें कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने की बात कही जाती है।

लेकिन कंपनी में 10 साल बिताने के बाद, यह सीनियर कंसल्टेंट बुरी तरह थक-हारकर (बर्नआउट की स्थिति में) और सिर्फ़ पांच प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी के साथ नौकरी छोड़कर चला गया। अपने फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, 30-35 साल की उम्र के इस टेक प्रोफेशनल ने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि बर्नआउट, उम्मीदों का असलियत से दूर होना और मेहनत व इनाम के बीच बढ़ती दूरी ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जबकि वे सालों से कंपनी के प्रति वफ़ादार रहे थे।

सिंह ने कहा, “मैंने नारायण मूर्ति की कही बातों से भी ज़्यादा घंटे काम किया, फिर भी मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और सैलरी में सिर्फ़ पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली।” उन्होंने इन्फोसिस के को-फ़ाउंडर का ज़िक्र किया, जिनके 70 घंटे के वर्क-वीक (हफ़्ते में 70 घंटे काम) वाले बयान ने वर्क कल्चर पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। उन्होंने आगे बताया कि कई बार वे हफ़्ते में 74 घंटे तक काम करते थे।

कई प्रोफेशनल्स के उलट, जो कुछ सालों में कंपनियां बदलते रहते हैं, सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी डेलॉइट (Deloitte) छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “जब आप युवा होते हैं, तो सीनियर लीडर्स को देखकर यह सोचना आसान होता है कि ‘एक दिन, मैं भी उनकी जगह हो सकता हूं।'”

सिंह के अनुसार, जब वे एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुए, तो डेलॉइट का पार्टनरशिप मॉडल और एक ही ऑर्गनाइज़ेशन में पूरा करियर बिताने की संभावना उन्हें काफी आकर्षक लगी। समय के साथ, सीखने के मौके, बड़े क्लाइंट प्रोजेक्ट्स, प्रमोशन और सीनियर साथियों से मिली मेंटरशिप ने उन्हें कंपनी में बने रहने के लिए काफी वजहें दीं।

उन्होंने कहा, “आप पहले ही दिन यह तय नहीं करते कि आपको कहीं 10 साल तक रहना है। आप हर साल वहां बने रहने का फैसला करते हैं।”सिंह का मानना ​​है कि कंसल्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ज़रूरी नहीं कि क्लाइंट का काम ही हो, बल्कि टाइट डेडलाइन, कम स्टाफ वाले प्रोजेक्ट्स और बिलिंग वाले काम के अलावा अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों का मेल है।

उनके अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स के लिए असल में छह महीने में छह लोगों की ज़रूरत होती है, उनसे अब कॉम्पिटिशन के दबाव के कारण कम समय में छोटी टीमों द्वारा पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “अचानक छह लोगों की जगह चार लोग हो जाते हैं और समय सीमा भी पांच महीने की हो जाती है।”

हालांकि क्लाइंट के काम का अपना दबाव होता था, लेकिन सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से इंटरनल पहलों, हायरिंग गतिविधियों, प्रपोज़ल बनाने और प्रैक्टिस-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान देने की उम्मीद की जाती थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कर्मचारी पदानुक्रम (hierarchy) में ऊपर बढ़ते हैं, ऐसे कामों में भाग लेने की उम्मीद और मज़बूत होती जाती है।

सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे आप रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, इस तरह के ‘मुफ़्त’ काम (बिना बिलिंग वाले काम) और भी ज़्यादा होते जाते हैं।” सिंह के अनुसार, बर्नआउट (काम के तनाव से पूरी तरह थक जाने) की एक बड़ी वजह काम से अलग न हो पाना था। उन्हें याद है कि वे सोशल गैदरिंग के दौरान भी काम के फ़ोन कॉल लेते थे, कई काम के डिवाइस साथ रखते थे और ऑफ़िस के समय के बाद भी उपलब्ध रहते थे।

सिंह ने कहा कि कंसल्टिंग मॉडल अक्सर ऐसा माहौल बनाता है जहां कर्मचारियों को क्लाइंट की डेडलाइन, अंदरूनी कमिटमेंट और बिज़नेस बढ़ाने की कोशिशों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह होता है कि काम ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों पर हावी होने लगता है।

उन्होंने कहा, “आप हर समय काम में ही लगे रहते हैं।”हालांकि लंबे समय तक काम करना मुश्किल था, लेकिन सिंह ने कहा कि उन्हें ज़्यादा निराशा इस सोच से होती थी कि बहुत ज़्यादा मेहनत करने पर भी इनाम में बहुत मामूली फ़र्क ही मिलता था। उनके अनुसार, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में अक्सर उतनी ही बढ़ोतरी होती थी, जितनी उन साथियों की होती थी जो काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखते थे।

उन्होंने कहा, “इस साल लोगों की सैलरी में 5 परसेंट से भी कम बढ़ोतरी हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि औसत और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बीच का अंतर अक्सर बहुत कम लगता था। “जब काम की पहचान या तारीफ़ नहीं होती, तो इंसान थककर हार मान लेता है (बर्नआउट)।”

उन्होंने क्लाइंट के लिए डिटेल्ड प्रपोज़ल तैयार करने के लिए टेक्निकल स्टाफ़ पर डेलॉइट की निर्भरता की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि इसके बजाय डेडिकेटेड सेल्स टीमों को यह काम संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता। सिंह ने कहा, “बदलाव किसी एक बुरे प्रोजेक्ट या मुश्किल मैनेजर की वजह से नहीं आया। यह धीरे-धीरे हुआ।”

समय के साथ, उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसी रास्ते पर चलते रहने से उन्हें अपने करियर के अगले चरण में वे अनुभव मिल पाएंगे जिनकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद सिंह हैदराबाद की एक दूसरी कंपनी में शामिल हो गए। उनके अनुसार, नई भूमिका में बेहतर सैलरी तो मिलती ही है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि उन्हें अपने समय और वर्क-लाइफ़ बैलेंस पर ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।

पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें डेलॉइट में बिताए अपने दस सालों का कोई अफ़सोस नहीं है। “बल्कि, उन दस सालों ने मुझे अनुभव, आत्मविश्वास और नज़रिया दिया, जिससे मुझे यह समझ आया कि अब एक अलग रास्ता चुनने का सही समय आ गया है।” सिंह के लिए, नौकरी छोड़ने का मतलब किसी सपने को छोड़ना नहीं था। इसका मतलब यह समझना था कि 22 साल की उम्र में सफलता की जो परिभाषा उनके मन में थी, वह 35 साल की उम्र में वैसी नहीं रही।

Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी का मुनाफा 264% उछला, ₹1000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Q1 Results: बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंपनी Sobha Ltd ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही कंपनी ने ₹1,000 करोड़ तक का फंड जुटाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

264% बढ़ गया कंपनी का मुनाफा

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में Sobha का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 264.3% बढ़कर ₹51 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹14 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी शानदार रहा। यह एक साल पहले के ₹851.9 करोड़ से बढ़कर ₹1,278.1 करोड़ पहुंच गया। यानी कंपनी के रेवेन्यू में करीब 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑपरेटिंग कमाई में भी बड़ा सुधार

शोभा लिमिटेड का EBITDA भी काफी मजबूत रहा। यह पिछले साल के ₹23.7 करोड़ से बढ़कर ₹77.6 करोड़ हो गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 2.8% से बढ़कर 6.1% पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है।

₹1,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी

तिमाही नतीजों के साथ शोभा लिमिटेड ने एक और बड़ा फैसला लिया है। Sobha के बोर्ड ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ₹1,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने को मंजूरी दे दी है।

यह रकम एक बार में या फिर एक से ज्यादा चरणों (Tranches) में जुटाई जा सकती है।

कौन तय करेगा पूरी प्रक्रिया?

शोभा के बोर्ड ने इस फंड जुटाने की पूरी प्रक्रिया Investments and Borrowings Committee को सौंप दी है।

यही कमेटी तय करेगी कि NCD कब जारी होंगे, उनकी अवधि कितनी होगी, निवेशकों को कितना कूपन (ब्याज) मिलेगा, ब्याज का भुगतान कैसे होगा और लिस्टिंग समेत बाकी शर्तें क्या रहेंगी। कंपनी ने कहा है कि इन सभी बातों की जानकारी बाद में दी जाएगी।

शोभा के शेयरों के हाल

Sobha का शेयर ₹9.30 यानी 0.63% की गिरावट के साथ ₹1,455.35 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 7% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 14.24% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 15.62 हजार करोड़ रुपये है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 21 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IIM admission after 12th: जेईई मेन और एडवांस्ड के स्कोर पर आईआईएम में सीधे प्रवेश, एआई-डाटा साइंस में बीबीए और बीएस करने का मौका

IIM admission after 12th: देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान में दाखिले का सपना देखने वाले छात्र अब तक ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद ही ऐसा कर सकते थे। लेकिन अब कई आईआईएम अपने कैंपस 12वीं पास छात्रों के लिए खोल रहे हैं। इसके लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) परीक्षा देने की भी जरूरत नहीं है। जेईई मेन और एडवांस्ड के स्कोर की मदद से छात्र ग्रेजुएट कोर्स भी आईआईएम से कर सकते हैं।

इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए वे अपनी प्रवेश परीक्षा भी लेते हैं। 12वीं के बाद जेईई के स्कोर के आधार पर छात्र मैनेजमेंट, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल बिजनेस के यूजी कोर्स आईआईएम से कर सकते हैं। बैचलर प्रोग्राम चलाने वाले आईआईएम में आईआईएम लखनऊ, आईआईएम बेंगलुरू, आईआईएम मुंबई, आईआईएम कोझिकोड और आईआईएम संबलपुर शामिल हैं।

आईआईएम लखनऊ से करें एआई और बिजनेस एनालिटिक्स में बीएस

यह कोर्स 2026 में लॉन्च हुआ उन छात्रों के लिए है जो टेक और मैनेजमेंट का कॉम्बिनेशन पढ़ना चाहते हैं। ये छात्र आईआईएम के लखनऊ कैंपस से एआई और बिजनेस एनालिटिक्स में बैचलर ऑफ साइंस (BS) कर सकते हैं। यह प्रोग्राम फिलहाल आईआईएम में अकेला ऐसा अंडरग्रेजुएट कोर्स है, जो जेईई एडवांस्ड के जरिए छात्रों को प्रवेश देता है।

आईआईएम बेंगलुरु से डिजिटल बिजनेस और एंटरप्रेन्योरशिप में ऑनलाइन बीबीए

आईआईएम बेंगलुरु डिजिटल बिजनेस और एंटरप्रेन्योरशिप में तीन साल का ऑनलाइन बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) कोर्स करवा रहा है। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए आप जेईई मेन (JEE Main) या फिर सीयूईटी यूजी (CUET UG) दोनों में से किसी भी माध्यम का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह प्रोग्राम खास तौर पर उन नौजवानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जिनका दिमाग हमेशा नए बिजनेस आइडियाज, डिजिटल ट्रां सफॉर्मेशन और स्टार्टअप्स की दुनिया में दौड़ता रहता है।

आईआईएम मुंबई करवा रहा डिजिटल साइंस और बिजनेस मैनेजमेंट में बीएस

आईआईएम मुंबई ने अपना पहला अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम लॉन्च कर दिया है। यह चार साल का बैचलर ऑफ साइंस (BS) कोर्स है, जिसे खासतौर पर डिजिटल साइंस और बिजनेस मैनेजमेंट की बारीकियों को सिखाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एडमिशन पूरी तरह से जेईई मेन (JEE Main) के स्कोर के आधार पर होता है। इसके पहले बैच में सिर्फ 70 सीटें रखी गई हैं, जो इसे आईआईएम में सबसे अधिक कॉम्पिटेटिव यूजी कोर्स बनाती हैं। जेईई मेन में आपके शानदार प्रदर्शन के आधार पर आपको शॉर्टलिस्ट किया जाएगा और फिर पर्सनल इंटरव्यू (PI) के लिए बुलाया जाएगा। ध्यान रहे, फाइनल मेरिट लिस्ट में आपके इंटरव्यू का 30% वेटेज होगा।

आईआईएम कोझिकोड दे रहा बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की डिग्री

आईआईएम कोझिकोड जेईई मेन के जरिए आपको सीधे तौर पर एडमिशन नहीं देता है। इसके बजाय, जेईई मेन में 80 या उससे ज्यादा परसेंटाइल हैं, या सैट (SAT) परीक्षा में 1300 या उससे ज्यादा स्कोर वाले छात्रों को आईआईएम कोझिकोड के एप्टीट्यूड टेस्ट से पूरी तरह छूट मिल जाती है। योग्य छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया के बाकी चरणों में हिस्सा लेना ही होगा, जिसमें इंस्टिट्यूट की अपनी चयन प्रक्रिया और इंटरव्यू शामिल है।

आईआईएम संबलपुर से पाएं डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीएस

आईआईएम संबलपुर ने डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीएस (BS) प्रोग्राम शुरू किया है। इस कोर्स में भी एंट्री पाने के लिए जेईई मेन का स्कोर जरूरी है। कॉलेज उम्मीदवारों को जेईई मेन स्कोर का इस्तेमाल करके शॉर्टलिस्ट करता है और फिर शॉर्टलिस्टेड कैंडिडेट्स को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इस कोर्स के लिए अधिकतम 20 साल की उम्र के आवदक अप्लाई कर सकते हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक रिजर्व कैटेगरी के छात्र-छात्राओं को उम्र सीमा में जरूरी छूट भी दी जाती है।

ATMA July Result 2026: जुलाई सत्र का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर देखें उम्मीदवार, अगस्त सत्र के लिए शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन

कल का मौसम 21 जुलाई: जम्मू कश्मीर, हिमाचल के लिए IMD की रेड वॉर्निंग! यूपी संग इन 21 राज्यों में भयंकर बारिश का अलर्ट

India Weather Update: देश भर में मानसून ने अपना सबसे विकराल और आक्रामक रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 जुलाई के लिए मौसम का बड़ा बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। इसका मतलब है कि इन जगहों पर अथॉरिटी को ऐक्शन लेने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड समेत देश के 21 से अधिक राज्यों में भयंकर बारिश और आंधी-तूफान का ऑरेंज और येलो कलर वॉर्निंग भी जारी की गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, देश भर में एक साथ 8 से अधिक चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ प्रणालियां सक्रिय हैं, जो मानसून को और अधिक घातक बना रही हैं।

इन 2 पहाड़ी राज्यों के लिए IMD की रेड कलर वॉर्निंग

मौसम विभाग ने 21 जुलाई को दो राज्यों में भारी बारिश को लेकर रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। यहां भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ के खतरे को देखते हुए उच्चतम स्तर का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने का अलर्ट है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कई जगहों पर मूसलाधार बारिश के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल आशंका है।

यूपी, बिहार और दिल्ली-एनसीआर समेत 11 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई को देश के मैदानी और पहाड़ी इलाकों के 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भयंकर बारिश होने की संभावना है। यूपी के अलग-अलग जिलों में 21 जुलाई को मूसलाधार से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में मानसून पूरी तरह मेहरबान है, यहां भी कई स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज-चमक के साथ बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। देवभूमि उत्तराखंड में 21 जुलाई को कई जगहों पर बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में कल तेज बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना है।

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बादलों का जमघट रहेगा और बहुत भारी बारिश होगी। कोंकण और गोवा में तटीय इलाकों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। महाराष्ट्र के मध्य अंचलों में 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

राजस्थान, एमपी और झारखंड समेत 8 राज्यों में भारी बारिश

देश के 8 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। एमपी के पश्चिमी इलाकों में 21 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड और ओडिशा दोनों राज्यों में 21 जुलाई को भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

गुजरात के मैदानी अंचलों में 21 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आकाशीय बिजली और तूफानी हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहेगा। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है।

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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में दिन के समय काफी तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

Gold-Silver Price : MCX पर सोने-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Gold-Silver Price : सोमवार,20 जुलाई को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह हाजिर बाजार में मजबूत मांग और चांदी के लिए ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव रुझान के बीच ट्रेडर्स का नई पोजीशन बनाना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर,अगस्त डिलीवरी वाले फ्यूचर्स में ₹294 या 0.21% की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 720 लॉट का कारोबार हुआ। एनालिस्ट्स ने इस बढ़ोतरी की वजह मार्केट में नई खरीदारी को बताया है।

सिल्वर फ्यूचर्स में भी तेजी आई है। MCX पर सितंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट ₹1,618 या 0.75% बढ़कर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है, जिसमें 1,371 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहीं। Comex सिल्वर फ्यूचर्स 1.21% बढ़कर $56.59 प्रति औंस पर आ गया है। हालांकि,न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स में थोड़ी गिरावट देखी गई और ये 0.17% गिरकर $4,011 प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की क्या है वजह ?

भू-राजनीतिक तनाव,महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों से जुड़ी उम्मीदे जैसे ग्लोबल संकेतों के कारण हाल के दिनों में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर,इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि पिछले हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। इसमें भी चांदी में ज्यादा गिरावट आई।

उन्होंने आगे कहा कि एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है,जिसमें वेस्ट एशिया में तनाव ने कीमती धातुओं को पुश करने के बजाय उन पर दबाव बनाया है। US-ईरान के बीच टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर बन चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं,जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गईं और सितंबर में US फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना और मजबूत हो गई है।

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल

पृथ्वीराज कोठारी की राय है कि सेंट्रल बैंक की खरीदारी(खासकर चीन की तरफ से) सोने की कीमतों को सपोर्ट देती रही है,जबकि वेस्टर्न एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और भारतीय रिटेल निवेशकों की तरफ से मांग में कमी के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है। इस समय सोने की फेयर वैल्यू 4,100 डॉलर प्रति औंस के आस-पास है। अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसके भाव 3,900 डॉलर प्रति औंस की ओर गिर सकते हैं। वहीं,अगर यह 4,200 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना रहता है,तो इसके 4,500 डॉलर तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।