देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।

इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग

गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।

बदला खरीदारी का तरीका

ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।

बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।

बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।

गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।

सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

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बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को किया स्वतंत्रता दिवस का ऐलान, पाकिस्तान से आजादी और अब फहराएगा नया झंडा!

Republic of Balochistan: पाकिस्तान से आजादी का ऐलान करने के कुछ ही हफ्तों बाद खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान घोषित करने वाले समूह ने 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही बलूच समुदाय ने दुनिया के दूसरे देशों, ग्लोबल कम्युनिटी से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में बलूचिस्तान को औपचारिक मान्यता देने की अपील फिर से की है।

CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने एक बयान जारी कर ऐलान किया है कि 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। दुनिया भर में रहने वाले बलूच समुदाय से इस खास मौके पर राष्ट्रव्यापी और वैश्विक स्तर पर जश्न मनाने की अपील की गई है।

नया झंडा फहराने और जश्न मनाने का आह्वान

बलूच स्वतंत्रता संग्राम के नेता मीर यार बलूच ने लोगों से अपने घरों, मोहल्लों, बाजारों, दुकानों, शैक्षणिक संस्थानों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र बलूचिस्तान का नया राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य इस दिन के महत्व को बनाए रखना और इसके ऐतिहासिक संदर्भ को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान 11 अगस्त को ही अपना वास्तविक स्वतंत्रता दिवस मानता है और अब से यह दिन हर साल इसी तरह मनाया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए नए सिरे से अपील

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक संप्रभु राज्य के रूप में बलूचिस्तान को औपचारिक रूप से मान्यता देने और उनके रुख का समर्थन करने का नया आह्वान किया है। उनका मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने मौजूदा स्वरूप में कायम रहेगा तब तक इस क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और समृद्धि हासिल नहीं की जा सकती। बयान में यह दावा भी किया गया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान और उसके लगभग 6 करोड़ बलूच लोग खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानते हैं।

स्वतंत्रता दिवस के लिए 11 अगस्त की तारीख ही क्यों?

बयान के मुताबिक 11 अगस्त 1947 वह ऐतिहासिक दिन था जब भारतीय उपमहाद्वीप से अंग्रेजों की वापसी के दौरान बलूचिस्तान ने सबसे पहले अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। बयान में दावा किया गया है कि इस स्वतंत्रता की घोषणा को द न्यूयॉर्क टाइम्स सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कवर किया था और ऑल इंडिया रेडियो ने भी इसका प्रसारण किया था। इसी ऐतिहासिक आधार पर बलूच राष्ट्र लगातार 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मानता आया है और भविष्य में भी इसी तारीख को यह दिवस मनाता रहेगा।

पाकिस्तान के इतिहास और भूमिका की कड़ी आलोचना

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अपने बयान में भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन के बाद के घटनाक्रमों और पाकिस्तान के रिकॉर्ड की जमकर आलोचना की है। बयान में कहा गया है कि विभाजन के बाद पूरे क्षेत्र में दशकों तक संघर्ष, अशांति, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक संकट का दौर बना रहा। यह भी आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की नीतियों ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया है।

कई ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया गया है। इनमें कश्मीर विवाद, मार्च 1948 में बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई, 1971 का संघर्ष जिसके बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ, जॉर्डन में फिलिस्तीनियों से जुड़ी सैन्य कार्रवाइयां, सोवियत-अफगान युद्ध, चागाई जिले में 1998 में पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण और अमेरिका में 9/11 के हमलों के बाद के घटनाक्रम शामिल हैं। बयान के मुताबिक, इन सभी वजहों से पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता, संघर्ष और खून-खराबा बढ़ा है।

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गौरतलब है कि बलूचिस्तान की ओर से 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं भारत 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।

NEET UG 2026 Merit List: नीट यूजी चॉइस फिलिंग और रजिस्ट्रेशन कल, पुडुचेरी ने जारी की राज्यवार मेरिट लिस्ट

NEET UG 2026 Merit List: चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्र अब नीट यूजी काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के जरिए स्नातक स्तरीय (UG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया 5 अगस्त से शुरू होने वाली है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों के लिए नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई है। पुडुचेरी के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर सर्विसेज विभाग ने भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट health.py.gov.in पर स्टेट मेरिट लिस्ट जारी कर दी है।

पुडुचेरी मेरिट लिस्ट में एक अनोखी बात सामने आई है जिसने कैंडिडेट्स का ध्यान खींचा है। सबसे ज़्यादा रैंक वाले कैंडिडेट को 670 मार्क्स मिले हैं, लेकिन लिस्ट में ऐसे कैंडिडेट्स भी शामिल हैं जिन्हें -1 से -23 मार्क्स मिले हैं। इन कैंडिडेट्स के शामिल होने से छात्रों में उत्सुकता बढ़ गई है, भले ही मेरिट लिस्ट में उनके नाम होने से एमबीबीएस सीट की गारंटी नहीं है।

कुल 10 छात्रों को नीट यूजी परीक्षा में नेगेटिव मार्क्स मिले हैं। नेगेटिव मार्क्स में -1, -3, -6, -7, -9, -11, -14, -15, -16 और -23 शामिल हैं। इन कैंडिडेट्स की रैंक 4707 और 4716 के बीच है। कृष्णाथ अभिनव एम 670 अंक और एआईआर 553 के साथ राज्य की मेरिट लिस्ट में टॉप पर हैं। दूसरे नंबर पर प्रवीण ए हैं, जिन्होंने 646 अंक और ओवरऑल रैंक 1721 हासिल की है, और लिस्ट में तीसरे नंबर पर रामानीश्वर ए हैं, जिन्होंने 646 मार्क्स और ओवरऑल रैंक 1756 हासिल की है।

जिन छात्रों को जारी मेरिट लिस्ट पर आपत्ति है, वे 5 अगस्त, 2026 तक ऑब्जेक्शन दर्ज करा सकते हैं। वे अपने ऑब्जेक्शन DMS@PY.GOV.IN पर ईमेल के जरिए भेज सकते हैं।

नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट: रैंक लिस्ट कैसे चेक करें

  • मेरिट लिस्ट चेक करने के लिए, कैंडिडेट्स नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं।
  • ऑफिशियल वेबसाइट health.py.gov.in पर जाएं।
  • होम पेज पर मौजूद NEET UG 2026 मेरिट लिस्ट लिंक पर क्लिक करें।
  • एक नया पेज खुलेगा जहां कैंडिडेट अपनी रैंक चेक कर सकते हैं।
  • आगे इस्तेमाल के लिए फाइल डाउनलोड करें।

नीट यूजी काउंसलिंग पंजीकरण कल, 5 अगस्त, 2026 से शुरू होगा। आवेदन करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त, 2026 है। चॉइस फिलिंग 6 अगस्त से शुरू होगी और 13 अगस्त, 2026 को बंद हो जाएगी। सीट आवंटन रिजल्ट 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा। जिन छात्रों को सीट आवंटित होगी, वे 18 अगस्त से 22 अगस्त, 2026 तक इंस्टीट्यूट में रिपोर्ट कर सकते हैं।

बता दें, नीट यूजी री-एग्जाम रिजल्ट 16 जुलाई, 2026 को अनाउंस किया गया था। एग्जाम 21 जून, 2026 को हुआ था। स्टेट मेरिट लिस्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए, कैंडिडेट डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सर्विसेज, पुडुचेरी की ऑफिशियल वेबसाइट देख सकते हैं।

CLAT 2027: देश की लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, 31 अक्टूबर तक दाखिले के लिए भरें फॉर्म

डाबर के प्रोडक्ट्स पर FSSAI का बड़ा एक्शन! कई प्रोडक्ट्स पर लगाई रोक, शेयरों में 2.4% की गिरावट

Dabur India Share Price Fall: FMCG सेक्टर की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया के शेयरों में मंगलवार, 4 अगस्त को 2.42% की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी के शेयर टूटकर ₹415.50 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह खाद्य नियामक FSSAI द्वारा कंपनी के कई पॉपुलर फूड प्रोडक्ट्स पर भ्रामक ‘100%’ दावों के साथ बिक्री करने पर लगाया गया प्रतिबंध है।

खाद्य नियामक ने डाबर इंडिया को आदेश दिया है कि वह अपने उन सभी खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोके, जिन पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’ या ‘100% Organic’ जैसे भ्रामक और अस्पष्ट दावे लिखे गए हैं।

किन-किन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगा ब्रेक?

FSSAI ने डाबर के इन प्रोडक्ट्स पर रोक लगा दी हैं:

  • शहद और गाय का घी
  • एप्पल साइडर विनेगर
  • वर्जिन कोकोनट ऑयल व तिल का तेल
  • नारियल पानी और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क

FSSAI ने क्यों लिया इतना कड़ा फैसला?

खाद्य सुरक्षा नियामक ने स्पष्ट किया कि ‘100% शुद्धता’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे दावे नियमों के खिलाफ हैं। FSSAI के मुताबिक, FSS (Advertising & Claims) रेगुलेशन, 2018 के तहत ऐसे दावे अस्पष्ट, असत्यापित हैं और ये आम उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले हैं।

जांच में सामने आया कि ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध FSSAI ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट के ही ‘जैविक भारत’ का लोगो प्रदर्शित किया जा रहा था। ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ जैसे मिश्रित खाद्य पदार्थ पर ‘100% Purity’ लिखना नियमानुसार पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

नोटिस के बावजूद नहीं हुआ सुधार, अब 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट

FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर इंडिया को ऐसे ‘100%’ प्योर वाले दावों को हटाने और विज्ञापन बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक पॉजिटिव कदम नहीं उठाया गया। अब नियामक ने कड़ा रुख अपनाते हुए डाबर को 15 दिनों के भीतर ‘Action Taken Report (ATR)’ सौंपने का आदेश दिया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि उसे FSSAI का नोटिस मिल गया है और वह अपनी वेबसाइट व लेबलिंग की जांच कर आवश्यक कदम उठा रही है।

एफएमसीजी कंपनियों पर FSSAI का चौतरफा शिकंजा

यह कार्रवाई केवल डाबर तक सीमित नहीं है, बल्कि FSSAI पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स के क्षेत्र में विज्ञापन संबंधी नियमों को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। हाल ही में पेप्सिको India ने अपने मशहूर ड्रिंक ‘Sting’ की कैन और बोतलों से ‘Energy’ शब्द हटा दिया था, क्योंकि नियामक ने ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता देना बंद कर दिया है।इससे पहले जूस बनाने वाली कंपनियों को भी टेट्रा पैक्स से ‘100% फ्रूट जूस’ का दावा हटाने के निर्देश दिए गए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा को लेकर विवादित बयान पर विवादों में घिरे

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान एक्ट्रेस तृषा के बारे में विवादित टिप्पणी करने के आरोप में चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से विपक्षी DMK और सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब तंजावुर ईस्ट पुलिस ने एक विरोध सभा के दौरान DMK नेता की टिप्पणियों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। इसके बाद उनके घर के बाहर DMK कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। DMK ने सरकार पर उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें विधानसभा के चल रहे सत्र में हिस्सा लेने से रोकना था।

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को राष्ट्रीय महिला आयोग में DMK यूथ विंग के सेक्रेटरी और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 3 अगस्त को तंजावुर में DMK के एक प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। इसे फिल्म एक्ट्रेस पर निशाना साधकर कही गई बात माना जा रहा है।

विवादित बयान पर बवाल

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन सोमवार को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए। उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए।

पीटीआई के मुताबिक, उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

BJP ने बताया शर्मनाक बयान

तमिलनाडु की BJP इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने X पर कहा कि उदयनिधि की कथित द्विअर्थी टिप्पणी घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक है। BJP नेता ने कहा, “सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।”

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उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। तिरुपति ने कहा, “इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (DMK विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।”

Silver Price Today: फिर महंगी हुई चांदी, सावन के दूसरे दिन चढ़ा भाव, खरीदारी से पहले जान लें आपके अपने शहर के लेटेस्ट रेट

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। आज दिल्ली में चांदी का भाव ₹235 प्रति ग्राम और ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 2630 रुपये चढ़कर 219477 पर ट्रेड कर रहा है जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,16,746 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार दिल्ली में चांदी की कीमत बढ़कर 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। उधर गुडरिटर्न्स के मुताबिक 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर है।

इंटरनेशनल मार्केट में कैसी है चाल

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त बनी हुई है। कॉमैक्स पर चांदी भी 1.80 फीसदी चढ़कर 58.895 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है। सोने का भाव 0.53 फीसदी चढ़कर 4112 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

चांदी के भाव में किस वजह से आई तेजी?

सोमवार के कारोबार में चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद निवेशकों ने इन मेटल्स में खरीदारी बढ़ाई, जिससे चांदी को भी सहारा मिला है। अमेरिकी डॉलर मिड जून के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। साथ ही, जापानी येन को मजबूत करने के लिए अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद डॉलर पर दबाव बढ़ा, जिससे सोना और चांदी जैसी मेटल्स की मांग में इजाफा देखने को मिला।

अगर आप चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो यहां जान लीजिए आपके अपने शहर का ताजा भाव

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,350₹23,500₹2,35,000
कोलकाता₹2,350₹23,500₹2,35,000
मुंबई₹2,350₹23,500₹2,35,000
चेन्नई₹2,350₹23,500₹2,35,000
पटना₹2,350₹23,500₹2,35,000
लखनऊ₹2,350₹23,500₹2,35,000
मेरठ₹2,350₹23,500₹2,35,000
अयोध्या₹2,350₹23,500₹2,35,000
कानपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
गाजियाबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000
नोएडा₹2,350₹23,500₹2,35,000
गुरुग्राम₹2,350₹23,500₹2,35,000
चंडीगढ़₹2,350₹23,500₹2,35,000
जयपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
लुधियाना₹2,350₹23,500₹2,35,000
गुवाहाटी₹2,350₹23,500₹2,35,000
इंदौर₹2,350₹23,500₹2,35,000
अहमदाबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000
सूरत₹2,350₹23,500₹2,35,000
वडोदरा₹2,350₹23,500₹2,35,000
पुणे₹2,350₹23,500₹2,35,000
नागपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
नासिक₹2,350₹23,500₹2,35,000
बैंगलोर₹2,350₹23,500₹2,35,000
भुवनेश्वर₹2,350₹23,500₹2,35,000
रायपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
हैदराबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000

 

पिछले दिन क्या रहा भाव

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार दिल्ली में सोमवार को चांदी की कीमत शुक्रवार के 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम के क्लोजिंग लेवल से 1,800 रुपये बढ़कर 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्पॉट चांदी की कीमत मामूली रूप से बढ़कर 57.97 डॉलर प्रति औंस हो गई।

क्या कहते है बाजार जानकार

बाजार जानकारों का कहना है कि आगे चलकर, मार्केट का ध्यान फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर रहेगा, जो बुलियन की कीमतों के लिए मुख्य कारक बनी हुई है। निवेशक फेड की ब्याज दरों की दिशा के बारे में नए संकेत पाने के लिए इस हफ्ते के US रोजगार डेटा – (जिसमें ADP रोजगार में बदलाव, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी दर शामिल हैं ) पर भी बारीकी से नज़र रखेंगे। तकनीकी रूप से, MCX गोल्ड के निकट भविष्य में ₹1,42,000 से ₹1,45,000 की रेंज में ट्रेड करने की उम्मीद है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CLAT 2027: देश की लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, 31 अक्टूबर तक दाखिले के लिए भरें फॉर्म

CLAT 2027: कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक देश के युवाओं के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) के कंसोर्टियम ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन लिंक एक्टिवेट कर दिया है। क्लैट 2026 के जरिए छात्र देशभर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लॉ पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। प्रवेश के इच्छुक छात्र अब आधिकारिक प्रवेश पोर्टल के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

पंजीकरण विंडो 31 अक्टूबर, 2026 तक खुली रहेगी। क्लैट 2027 परीक्षा 6 दिसंबर, 2026 को दोपहर 2.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक होनी है। कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया है कि आने वाले प्रवेश चक्र के लिए परीक्षा के सिलेबस या स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्लैट 2027: जरूरी तारीखें

इवेंट तारीख

रजिस्ट्रेशन शुरू : 3 अगस्त, 2026 (सुबह 10.00 बजे IST)

अप्लाई करने की आखिरी तारीख : 31 अक्टूबर, 2026

क्लैट 2027 परीक्षा : 6 दिसंबर, 2026 (दोपहर 2.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक)

क्लैट 2027 के लिए कैसे करने आवेदन

रजिस्टर करें : एक वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस का इस्तेमाल करके अकाउंट बनाएं।

एप्लीकेशन फॉर्म भरें : पर्सनल, एकेडमिक और कॉन्टैक्ट डिटेल्स डालें।

प्राथमिकता चुनें : पसंदीदा परीक्षा शहर चुनें और एनएलयू प्राथमिकता बताएं।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें : पासपोर्ट साइज का फोटो, सिग्नेचर और कैटेगरी सर्टिफिकेट, अगर लागू हो, अपलोड करें।

आवेदन शुल्क का भुगतान करें : ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें और एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें।

योग्यता और परीक्षा पैटर्न

अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम के लिए आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों को कम से कम 45% अंकों के साथ कक्षा 12 या उसके बराबर की परीक्षा पास करनी होगी। एससी और एसटी परीक्षार्थियों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक 40% हैं। फरवरी 2027 में अपना क्वालिफाइंग एग्जाम देने वाले छात्र भी आवेदन करने के योग्य हैं।

पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम के लिए, आवेदकों के पास कम से कम 50% अंकों के साथ एलएलबी डिग्री या उसके बराबर की योग्यता होनी चाहिए। एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग रिक्वायरमेंट 45% है।

क्लैट परीक्षा इस साल भी मौजूदा ऑफलाइन फॉर्मेट में जारी रहेगी। इसमें कॉम्प्रिहेंशन-बेस्ड मल्टीपल-चॉइस सवाल होंगे। अंडरग्रेजुएट पेपर में इंग्लिश लैंग्वेज, जनरल नॉलेज सहित करंट अफेयर्स, लीगल रीजनिंग, लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव टेक्नीक शामिल होंगे।

क्लैट 2027 में हिस्सा लेंगी 27 एनएलयू

क्लैट 2027 में देश की 27 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हिस्सा लेंगी। अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में लगभग 3,952 से 4,100 सीटें हैं, जबकि पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए लगभग 1,590 सीटें हैं। आवेदक पूल में 57% महिला परीक्षार्थी हैं, जबकि अंडरग्रेजुएट कैंडिडेट कुल रजिस्ट्रेशन में 80% से ज्यादा हिस्सा लेते हैं। कुल चयन दर 6% से कम रहने के कारण, सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा रहने की उम्मीद है।

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सुहागिनों के सोलह शृंगार को बनाएं और भी खास, आलता के ये नए और आसान पैटर्न्स!

सोलह शृंगार में पैरों पर लगा लाल आलता पारंपरिक सुंदरता को निखार देता है। आज भी कई महिलाएं तीज, करवा चौथ, शादी और दूसरे शुभ अवसरों पर आलता लगाना पसंद करती हैं। अपने पैरों को खूबसूरत और अलग लुक देने के लिए यहां दिए गए लेटेस्ट और ट्रेडिशनल आलता डिजाइन से आइडिया ले सकती हैं।

सिंपल आलता डिजाइन (Simple Alta Design)

"Red Alta Foot Design Using Wooden Spoon | Simple & Beautiful Bridal Foot Mehndi Style#AltaDesign

सिंपल आलता डिजाइन हमेशा ट्रेंड में रहता है। इसमें पैरों की सभी उंगलियों पर साफ-सुथरे तरीके से आलता लगाया जाता है और पैर के बीच में एक छोटा-सा गोल बनाया जाता है। यह डिजाइन बनाने में आसान है और साड़ी, सलवार सूट या किसी भी पारंपरिक आउटफिट के साथ बेहद खूबसूरत लगता है।

गोल बिंदी आलता डिजाइन (Round Bindi Alta Design)

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गोल बिंदी वाला आलता डिजाइन देखने में खूबसूरत लगता है। इसमें पैर पर गोल शेप बनाकर उसके चारों ओर छोटी-छोटी बिंदियां बनाई जाती हैं। इसे ब्रश या ईयरबड की मदद से आसानी से बनाया जा सकता है। तीज, सावन और दूसरे त्योहारों पर यह डिजाइन पैरों की खूबसूरती बढ़ा देता है।

 

 

कमल फूल आलता डिजाइन (Lotus Motif Alta Design)

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कमल फूल वाला आलता डिजाइन ट्रेडिशनल लुक को खास बनाते है। इसमें पैरों पर आलता लगाकर बीच में कमल का फूल बनाया जाता है और उसके चारों ओर पत्तियों जैसी आकृति बनाई जाती है। साड़ी, पायल और कांच की चूड़ियों के साथ यह डिजाइन बेहद सुंदर दिखाई देता है।

 

बेल आलता डिजाइन (Vine Pattern Alta Design)

Beautiful Traditional Feet Alta Design | Wedding & Festive Foot Mehndi Look#altadesign

बेल वाला आलता डिजाइन पारंपरिक और स्टाइलिश लुक का शानदार मेल है। इसमें पैर पर आलता लगाने के बाद बेल जैसी आकृति बनाई जाती है। यह डिजाइन पैरों को अट्रैक्टिव लुक देता है और साड़ी, सिल्वर पायल व हल्के गहनों के साथ खूब जंचता है।

 

 

पायल स्टाइल आलता डिजाइन (Payal Style Alta Design)

पायल स्टाइल आलता डिजाइन पैरों को अलग और खूबसूरत लुक देता है। इसमें टखने के चारों ओर पायल जैसा पैटर्न बनाया जाता है और छोटे-छोटे डॉट्स या पतली लाइनों से सजाया जाता है। साड़ी और एथनिक आउटफिट के साथ यह डिजाइन अच्छा लगता है।

 

 

मिनिमल सर्कल आलता डिजाइन (Minimal Circle Alta Design)

मिनिमल सर्कल आलता डिजाइन ट्रेडिशनल और मॉडर्न लुक का खूबसूरत मेल है। इसमें गोल आकार के साथ लाल और सफेद रंग की छोटी-छोटी बिंदियों से सजावट की जाती है। यह डिजाइन साफ-सुथरा, सुंदर और बेहद स्टाइलिश दिखाई देता है। छोटे पारिवारिक कार्यक्रमों से लेकर त्योहारों तक, हर मौके पर यह अच्छा लगता है।

बॉर्डर वाला आलता डिजाइन (Border Alta Design)

बॉर्डर वाला आलता डिजाइन हल्का लेकिन एलिगेंट लुक देता है। इसमें पैरों के किनारों पर लहरदार (वेव) बॉर्डर बनाया जाता है, जिससे पैर और भी सुंदर दिखते हैं। शादी, तीज, करवा चौथ या किसी भी मौके पर यह डिजाइन ट्रेडिशनल लुक की खूबसूरती को बढ़ा देता है।

US New Tariffs Row: भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का भारी विरोध, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा

US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।

सियासत ही नहीं, इन्वेस्टमेंट की पिच पर भी ‘ऑलराउंडर’ निकले प्रशांत किशोर! जानिए कहां-कहां लगाया है करोड़ों का दांव

Prashant Kishor Investment Portfolio: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बंपर जीत हासिल की है। बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाते हुए उन्होंने नीरज कुमार को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। इस सियासी जीत के साथ ही प्रशांत किशोर की संपत्ति और उनके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की चर्चा तेज हो गई है।

चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत संपत्ति ₹96.06 करोड़ है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास ₹101.93 करोड़ की संपत्ति है। यानी परिवार की कुल कुल संपत्ति करीब ₹198 करोड़ रुपये से अधिक है।

अनलिस्टेड इक्विटी में बड़ा दांव: वेधास वेंचर्स में 100% हिस्सेदारी

प्रशांत किशोर के पर्सनल वेल्थ मॉडल का सबसे बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट शेयरहोल्डिंग से आता है। प्रशांत किशोर की कुल संपत्ति में सबसे बड़ा योगदान उनकी अनलिस्टेड कंपनी ‘वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Vedhas Ventures Pvt Ltd) का है। इस कंपनी में उनकी 100% कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है, जिसकी बुक वैल्यू लगभग ₹95.26 करोड़ आंकी गई है। यह उनके कुल मूवेबल पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा एसेट क्लास है।

₹7.36 करोड़ की कराई हुई है FD

शेयर बाजार की अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव से बचने के लिए प्रशांत किशोर ने सेफ और फिक्स्ड-रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स में भारी निवेश कर रखा है:

HDFC बैंक में एफडी: प्रशांत किशोर के नाम पर एचडीएफसी बैंक में 5 मुख्य फिक्स्ड डिपॉजिट हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹7.36 करोड़ के करीब है।

पारिवारिक होल्डिंग: उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास 4 एफडी हैं और उनके बेटे दैविक्ष भारद्वाज के नाम पर भी एचडीएफसी बैंक में 2 फिक्स्ड डिपॉजिट मौजूद हैं।

बाजार के जोखिम और भू-राजनीतिक तनावों के बीच एफडी जैसे सुरक्षित विकल्पों में फंड रखना पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करता है।

डायरेक्ट इक्विटी, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड्स

अनलिस्टेड शेयर्स और एफडी के अलावा प्रशांत किशोर और उनके परिवार ने डाइवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन अपनाया है। स्टॉक मार्केट व म्यूचुअल फंड: प्रशांत किशोर का मार्केट इन्वेस्टमेंट्स और बैंक एफडी मिलाकर कुल निवेश ₹8 करोड़ से अधिक का है। उनके हलफनामे में लिस्टेड कंपनियों के शेयर, डेट बॉन्ड्स और म्यूचुअल फंड स्कीम्स में भी बैलेंस्ड एक्सपोजर दर्ज किया गया है।

पटना से दिल्ली तक अचल संपत्ति

प्रशांत किशोर के पोर्टफोलियो में अचल संपत्तियों का भी बड़ा योगदान है। प्रशांत किशोर के पास कुल ₹73.87 करोड़ की अचल संपत्ति है। इसमें पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी का आवासीय मकान, गाजियाबाद और नई दिल्ली के वसंत विहार स्थित प्राइम प्रॉपर्टीज शामिल हैं। इसके अलावा रोहतास और बक्सर में पैतृक व कृषि भूमि भी दर्ज है। उनकी पत्नी के पास ₹12.42 करोड़ की अचल संपत्ति है, जिसमें असम (गुवाहाटी) और नोएडा (जेपी ग्रींस) में प्रॉपर्टीज शामिल हैं।