Air India Flight: थाइलैंड से दिल्ली आ रही एयर इंडिया के विमान में लगा तेज झटका! अचानक नीचे आने लगी फ्लाइट, भयानक टर्बुलेंस से 12 यात्री घायल

Air India Flight turbulence: एयर इंडिया की फुकेत (थाईलैंड) से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में मंगलवार (4 अगस्त) को उड़ान के दौरान तेज टर्बुलेंस (हवा के तेज झटके) की वजह से अचानक हड़कंप मच गया। इस दौरान फ्लाइट करीब 300 फीट नीचे आ गया, जिससे विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर के बीच अफरा-तफरी मच गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस घटना में 12 यात्री हो गए हैं। न्यूज 18 के मुताबिक, 4 केबिन क्रू मेंबर भी घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि टर्बुलेंस इतना भयानक था कि किसी कान में तो किसी को गर्दन में चोटें आई हैं। घायलों का इलाज कराया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में कम से कम 12 यात्री घायल हुए हैं। यह घटना एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई, जो फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान विमान अचानक टर्बुलेंस यानी तेज हवा के दबाव (अपड्राफ्ट/डाउनड्राफ्ट) की चपेट में आ गया। इससे उसकी ऊंचाई कुछ समय के लिए करीब 300 फीट कम हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर मेडिकल टीम को पहले से ही अलर्ट कर दिया गया।

विमान के सुरक्षित उतरने के बाद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायल लोगों को तुरंत एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज और मेडिकल टेस्ट किया गया। एयर इंडिया ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उड़ान के दौरान कुछ समय के लिए टर्बुलेंस की वजह से विमान की ऊंचाई में बदलाव आया था।

हालांकि, विमान ने सुरक्षित तरीके से दिल्ली में लैंडिंग की और सभी यात्री व क्रू सुरक्षित बाहर निकल गए। टाटा ग्रुप की एयरलाइन के अनुसार, फिलहाल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी नहीं है। जिन यात्रियों और क्रू मेंबर को मामूली चोटें आई हैं, उन्हें एहतियात के तौर पर मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है।

एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कंपनी प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दे रही है और मामले की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, सभी घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है।

हालांकि कुछ लोगों को जरूरत पड़ने पर आगे की जांच और इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा जा सकता है। फिलहाल घायलों की चोटों की गंभीरता के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। विमान में सवाल यात्रियों ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग से कुछ देर पहले फ्लाइट नीचे अचानक नीचे आने लगा। इस दौरान हिचकोले खाने लगा। इससे यात्रियों में चीख पुकार मच गई। फिलहाल, मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

मुनाफा डबल और ₹14.40 का डिविडेंड, दोहरे सपोर्ट पर 14% चढ़ा शिपिंग शेयर

GE Shipping Share Price: शिपिंग और ऑयलफील्ड सर्विसेज प्रोवाइडर ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी (जीई शिपिंग कंपनी) के शेयरों में आज खरीदारी का जोरदार रुझान दिखा। जून तिमाही में मुनाफे में ढाई गुना से अधिक उछाल और शानदार डिविडेंड के ऐलान ने इसके शेयरों को ऐसा सपोर्ट किया कि यह 14% से अधिक उछल पड़ा। ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली के चलते भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते भाव अब भी मजबूत बने हुए हैं। फिलहाल BSE पर यह 3.27% की बढ़त के साथ ₹1,441.90 पर है। इंट्रा-डे में यह 14.57% चढ़कर ₹1,599.75 तक पहुंच गया था।

Great Eastern Shipping Company की कैसी रही जून तिमाही

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का शुद्ध मुनाफा कंसालिडेटेड लेवल पर 159.43% उछलकर ₹1308.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 66.91% चढ़कर ₹2005.36 हो गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी की सेहत तेजी से मजबूत हुई। सालाना आधार पर जून तिमाही में इसका ईबीआईटीडीए ₹642.8 करोड़ से ₹1,337.7 करोड़ पर पहुंच गया तो ईबीआईटीडीए मार्जिन 53.5% से बढ़कर 66.7% पर पहुंच गया। सेगमेंटवाइज बात करें तो कंपनी का शिपिंग रेवेन्यू सालाना आधार पर 90.20% बढ़कर ₹1890.97 करोड़ और ऑफशोर सर्विसेज से रेवेन्यू 18.87% बढ़कर ₹406.02 करोड़ पर पहुंच गया।

नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने डिविडेंड का भी ऐलान किया है। ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी हर शेयर पर ₹14.40 का अंतरिम डिविडेंड बांटने वाली है, जिसका रिकॉर्ड डेट 7 अगस्त फिक्स किया गया है जिसे 27 अगस्त या इसके बाद शेयरहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट किया जाएगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के शेयरों ने निवेशकों की कम समय में ही ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 6 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹914.65 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचले स्तर है। इस निचले स्तर से यह 9 महीने में यह 96.58% उछलकर 19 मई 2026 को ₹1,798.00 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च पहुंचा ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या लगातार खांसी फेफड़ों के कैंसर का संकेत है? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताए चेतावनी वाले ये लक्षण

भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण और बदलती जीवनशैली का असर हमारी सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर लोग रोजमर्रा की थकान या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खांसी भी ऐसी ही एक आम परेशानी है, जिसे लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं। लेकिन जब यही खांसी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कई शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग समय पर ध्यान नहीं दे पाते।

ऐसे में अपनी दिनचर्या, खानपान और शरीर में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। सही समय पर जांच और सावधानी से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लगातार रहने वाली खांसी हो सकती है शुरुआती चेतावनी

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ज्योति मेहता के अनुसार, लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। हालांकि हर पुरानी खांसी कैंसर नहीं होती, लेकिन कई हफ्तों तक इसे नजरअंदाज करने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है, जिससे इलाज के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्टर के मुताबिक, फेफड़ों में मौजूद कुछ कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बन सकता है और यही आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है।

सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता खतरा

आम धारणा है कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण जरूर है, लेकिन इसके अलावा कई दूसरी चीजें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में आना (सेकेंड हैंड स्मोक)
  • बढ़ता वायु प्रदूषण
  • रेडॉन गैस
  • एस्बेस्टस जैसे खतरनाक पदार्थ
  • कुछ हानिकारक केमिकल्स

इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है या कुछ जेनेटिक बदलाव हैं, उनमें भी खतरा हो सकता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी
  • खांसी के साथ खून आना
  • सीने में लगातार दर्द रहना
  • सांस लेने में परेशानी या घरघराहट
  • बार-बार छाती में संक्रमण होना
  • बिना वजह वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
  • आवाज में भारीपन या बदलाव लंबे समय तक रहना

इनमें से कोई भी लक्षण दिखने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

इलाज में देरी से बढ़ सकता है खतरा

अगर फेफड़ों के कैंसर का समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, हड्डियों, लीवर और एड्रिनल ग्लैंड तक फैल सकता है। इससे तेज दर्द, सांस लेने में ज्यादा परेशानी, हड्डियों में फ्रैक्चर और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

समय पर जांच से बच सकती है जिंदगी

मेडिकल क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण अब फेफड़ों के कैंसर के इलाज के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं
  • दूसरों के धुएं से बचें
  • प्रदूषण और खतरनाक केमिकल्स से बचाव करें
  • जरूरत पड़ने पर मास्क और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें
  • संतुलित भोजन लें
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें

एक सामान्य सी लगने वाली खांसी कभी-कभी शरीर का बड़ा संकेत हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करवाना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Weight Loss: वजन घटाने की शुरुआत करने जा रहे हैं? 116 से 60 किलो तक पहुंची कोच की ये 10 बातें जरूर पढ़ें

Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

SIP Daily vs Monthly Comparison: क्या आपको भी ऐसा लगता है कि महीने में एक बार निवेश करने के बजाय हर दिन SIP करने से ज्यादा मुनाफा मिलता है? अगर आपका जवाब हां है, तो आप ऐसा सोचने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। बहुत से निवेशकों का मानना है कि रोजाना निवेश करने से बाजार की गिरावट का फायदा बेहतर तरीके से मिलता है और औसत लागत सुधरती है।

लेकिन व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक हालिया और चौंकाने वाली स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। आइए जानते हैं कि लंबी अवधि में कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी वास्तव में सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएशन करती है।

30 साल का डेटा एनालिसिस, क्या कहते हैं आंकड़े?

व्हाइटओक कैपिटल ने अगस्त 1996 से जून 2026 के बीच BSE सेंसेक्स टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) का विश्लेषण किया। इस स्टडी में यह सुनिश्चित किया गया कि तीनों ही विकल्पों (डेली, वीकली और मंथली) में निवेश की कुल राशि बिल्कुल समान रखी जाए।

डेली और वीकली SIP रिटर्न: स्टडी के मुताबिक, डेली और वीकली SIP के जरिए कुल कॉर्पस बढ़कर ₹12.33 करोड़ तक पहुंचा।

मंथली SIP रिटर्न: वहीं, मंथली SIP के जरिए कुल फंड बढ़कर ₹12.45 करोड़ हो गया।

XIRR रिटर्न: हैरान करने वाली बात यह है कि तीनों ही तरीकों से लॉन्ग-टर्म एनुअलाइज्ड रिटर्न (XIRR) 13.47% ही रहा।

Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

इसका साफ मतलब है कि हर दिन पैसे लगाने से आपको कोई जादुई या बहुत बड़ा एक्स्ट्रा फायदा लॉन्ग-टर्म में नहीं मिलता।

डेली SIP मंथली से ज्यादा बेहतर क्यों नहीं साबित होती?

पहली बार में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, क्योंकि डेली SIP महीने के अलग-अलग दिनों और अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदती है।मंथली SIP महीने की किसी एक तारीख पर पूरा पैसा एक साथ लगाती है।

शॉर्ट टर्म में तो डेली इन्वेस्टिंग से थोड़ा फर्क पड़ सकता है, लेकिन दशकों के लंबे समय में बाजार समय के साथ ऊपर ही जाता है। ऐसे में महीने के किस दिन पैसा निवेश हुआ, इसका असर लंबे समय के चक्र में नगण्य हो जाता है। सबसे बड़ा असर इस बात का पड़ता है कि आपने बाजार में कुल कितने साल बिताए।

आपके लिए कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी सबसे सही है?

डेटा साफ है कि कैलेंडर को ऑप्टिमाइज करने या बार-बार तारीख बदलने से रिटर्न पर कोई खास असर नहीं पड़ता। इसलिए आपको अपनी सुविधा के हिसाब से चुनाव करना चाहिए:

सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए: मंथली SIP सबसे बेहतरीन है, जिसे आप अपनी सैलरी आने के अगले दिन सेट कर सकते हैं। इससे ऑटोमैटिक सेविंग की आदत बनती है।

फ्रीलांसर या बिजनेस ओनर्स के लिए: जिनकी इनकम फिक्स नहीं होती, वे अपनी सहूलियत के हिसाब से वीकली या डेली SIP का विकल्प चुन सकते हैं, ताकि वे रेगुलर निवेश कर सकें।

वेल्थ क्रिएशन के असली मंत्र: इन 4 बातों पर दें ध्यान

दैनिक या मासिक बहस में अपना समय बर्बाद करने के बजाय, आपको उन फैक्टर्स पर फोकस करना चाहिए जो सचमुच आपका बड़ा फंड तैयार करते हैं:

  1. जल्द से जल्द शुरुआत करें: जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग का उतना ही बड़ा फायदा मिलेगा।
  2. बाजार के उतार-चढ़ाव में टिके रहें: मार्केट करेक्शन या गिरावट के दौरान अपनी SIP बंद करने की गलती बिल्कुल न करें।
  3. टॉप-अप का नियम अपनाएं: जैसे-जैसे आपकी सैलरी या इनकम बढ़े, अपनी SIP की राशि में भी सालाना इजाफा करें।
  4. धैर्य रखें: शेयर बाजार में पैसा रातों-रात नहीं, बल्कि अनुशासन और लंबे समय के धैर्य से बनता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बॉयफ्रेंड से झगड़े के बाद 18वीं मंजिल से कूदी 20 साल की लड़की, चमत्कारिक तरीके से बची जान

चीन में एक 20 वर्षीय युवती से जुड़ी घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है। बॉयफ्रेंड के साथ हुए विवाद के बाद अपार्टमेंट से निकलने की कोशिश में वह 18वीं मंजिल की बालकनी से गिर गई। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसकी जान बच गई, जिसे डॉक्टरों ने बेहद असाधारण बताया। हालांकि, इस हादसे में युवती को कई गंभीर चोटें आईं और अब उसका इलाज अस्पताल में जारी है। घटना के बाद जहां उसकी जिंदगी बचाने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं परिवार के सामने इलाज का बढ़ता खर्च भी बड़ी चुनौती बन गया है। इस पूरे मामले ने रिश्तों में तनाव, भावनात्मक फैसलों और मुश्किल परिस्थितियों से निपटने को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।

रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थी युवती

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशिंग शहर में हुई। युवती को रिपोर्ट में शियाओयी नाम से पहचाना गया है। वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ किराए के अपार्टमेंट में रहती थी। परिवार का कहना है कि शियाओयी कुछ दिन पहले ही इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला कर चुकी थी। उसने 10 जुलाई को अपने गृह नगर युन्नान लौटने के लिए ट्रेन टिकट भी बुक कर लिया था।

विवाद के बाद बिगड़े हालात

परिवार के अनुसार, 11 जुलाई की रात दोनों के बीच फिर से विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान बॉयफ्रेंड ने युवती का मोबाइल फोन और पहचान पत्र अपने पास रख लिया और अपार्टमेंट का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे वह बाहर नहीं निकल सकी। युवती के चाचा ली ने बताया कि कई घंटे तक चले विवाद के बाद शियाओयी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही थी। उस समय उसकी प्राथमिकता सिर्फ वहां से बाहर निकलना थी।

गिरने के बाद भी बची जान

बताया गया कि युवती 18वीं मंजिल की बालकनी से गिर गई। हालांकि, गिरते समय एक पेड़ ने उसकी रफ्तार कम कर दी और नीचे मौजूद घनी झाड़ियों ने भी असर को कम किया। इसी वजह से वह गंभीर स्थिति में होने के बावजूद बच गई।

अस्पताल में चल रहा गंभीर इलाज

घटना के बाद युवती को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके बॉयफ्रेंड ने इलाज के लिए शुरुआती तौर पर 20 हजार युआन (करीब 3 हजार डॉलर) जमा किए। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवती के सिर, फेफड़ों, लीवर और तिल्ली में गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा उसकी पेल्विस, प्यूबिक बोन और दोनों पैरों में फ्रैक्चर भी हुआ है। युवती की अब तक दो बड़ी सर्जरी हो चुकी हैं और आगे भी इलाज जारी है।

होश आने के बाद जताया पछतावा

परिवार के मुताबिक, होश में आने के बाद शियाओयी ने अपने इस फैसले पर पछतावा जताया। उसने माना कि यह कदम भावनात्मक स्थिति में उठाया गया था।

इलाज का खर्च बना परिवार की बड़ी चिंता

अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज का खर्च है। युवती के चाचा ने बताया कि परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में था। साल 2022 में शियाओयी की मां को कैंसर का पता चला था, जिसके इलाज में परिवार की बचत खत्म हो गई और उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा। युवती के इलाज का खर्च 1 लाख युआन (करीब 15 हजार डॉलर) से अधिक पहुंच चुका है। परिवार पर अस्पताल का लगभग 60 हजार युआन बकाया है। इलाज जारी रखने के लिए परिवार ने ऑनलाइन क्राउडफंडिंग के जरिए करीब 90 हजार युआन जुटाए हैं, लेकिन आगे की सर्जरी और रिकवरी के खर्च को लेकर उनकी चिंता अभी भी बनी हुई है।

Share Market Crash: डे-हाई से 700 प्वाइंट्स टूटा Sensex, 5 वजहों से Nifty आया 24500 के नीचे

Share Market Crash: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के नए सिस्टम को लेकर मार्केट में काफी अनिश्चितता फैली है। ब्रोकरेजेज ने भी रिटेलर्स को सतर्क किया है। इसका असर आज मार्केट में दिखा और कच्चे तेल के भाव में उछाल ने इस दबाव को और बढ़ाया। इस दबाव में सेंसेक्स इंट्रा-डे हाई से 700 प्वाइंट्स से अधिक फिसल गया तो भी निफ्टी भी टूटकर 24500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का तेज दबाव दिखा और स्मॉलकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी फिसल गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 01:07 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 249.56 प्वाइंट्स यानी 0.32% की गिरावट के साथ 78,389.47 और निफ्टी (Nifty) 283.30 प्वाइंट्स यानी 1.14% की फिसलन के साथ 24,491.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 504.12 प्वाइंट्स उछलकर 79,143.15 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 781.36 प्वाइंट्स टूटकर 78,361.79 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी 291.10 प्वाइंट्स गिरकर 24,483.20 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

CAS सिस्टम

कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि जब तक नए मैकेनिज्म CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3:00 PM और 3:05 PM के बीच बंद कर दें। इससे मार्केट में बेयरेश माहौल बना है क्योंकि एक तरह से शेयरों के लेन-देन का समय कम हुआ है।

आईटी और प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में दबाव

मार्केट पर आज आईटी और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स ने काफी दबाव बनाया जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी कमजोर हुए। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी में 1% से अधिक तो ऑटो और सरकारी बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी की गिरावट है।

कच्चे तेल में उछाल

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $85 के करीब पहुंचा तो मार्केट पर इसकी आंच महसूस हुई।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 2.41% के उछाल के साथ 12.21 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

Nifty की एक्सपायरी

आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है जिसके चलते मार्केट में तेज उठा-पटक दिख रही है।

3 बजे तक कर दें स्क्वेयर ऑफ, इस कारण ब्रोकर्स ने दी रिटेल क्लाइंट्स को सलाह

Nifty में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट तो Sensex में 500 अंकों का उछाल, क्या है वजह

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty 200 प्वाइंट्स ऊपर और Sensex 15 अंक नीचे, इनवेस्टर्स हैरान, एक्सपर्ट्स क्या बता रहे इसकी असली वजह?

शेयर बाजार में 4 अगस्त यानी आज एक बार फिर इनवेस्टर्स तब हैरान रह गए, जब निफ्टी 200 अंक ऊपर था, लेकिन सेंसेक्स लाल निशान में चल रहा था। आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा एक जैसी रहती है। लेकिन, आज बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों की अलग-अलग दिशा देखकर इनवेस्टर हैरान रह गए। सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?

3 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का पहला दिन था

इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें एक दिन पीछे जाना होगा। 3 अगस्त को Sensex और Nifty के क्लोजिंग प्राइस में काफी मिसमैच देखने को मिला था। इसकी वजह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) है, जिसकी शुरुआत सोमवार को हुई। 3 अगस्त को कंटिन्यूअस ट्रेडिंग (Continuous Trading) बंद होने पर निफ्टी 0.08 फीसदी चढ़कर 24,589 पर बंद हुआ। लेकिन, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद निफ्टी 1.6 फीसदी (390.70) चढ़कर 24,774.30 प्वाइंट्स पर बंद हुआ।

3 अगस्त को निफ्टी के दोनों क्लोजिंग लेवल में काफी फर्क था

इसका मतलब है कि निफ्टी के Continuous Trading के बाद के लेवल और CAS के बाद के लेवल के बीच करीब 200 प्वाइंट्स का अंतर था। लेकिन, Sensex के मामले में ऐसा नहीं था। 3 अगस्त को Sensex 3:15 बजे 78,677.13 पर बंद हुआ था। फिर CAS के बाद यह 78,639.03 पर बंद हुआ। दोनों के बीच फर्क मामूली रहा।

निफ्टी के क्लोजिंग लेवल में फर्क CAS शुरू होने के बाद आया

4 अगस्त को Nifty 50 प्वाइंट्स गिरा, जबकि 3 अगस्त को यह चढ़कर बंद हुआ था। 3 अगस्त को यह 1.6 फीसदी और 0.7 फीसदी चढ़कर बंद हुआ था। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स वाले स्टॉक्स के लिए नई व्यवस्था (CAS) शुरू होने के बाद ऐसा हुआ। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी के डायरेक्टर क्रांति बाथिनी ने कहा, “3 अगस्त को निफ्टी में अंत में आई तेजी की वजह नई व्यवस्था की शुरुआत थी। यह 4 अगस्त की सुबह सामान्य हो गया।”

ट्रेडिंग की नई व्यवस्था शुरू होने पर कीमतों में फर्क आता है

उन्होंने यह भी कहा कि जब ट्रेडिंग की नई व्यवस्था (Mechanism) शुरू होती है तो कीमतों में इस तरह का फर्क होना सामान्य है। NSE का मानना है कि Closing Actions Session (CAS) में ट्रे़डर्स का पार्टिसिपेशन आगे बढ़ेगा। 3 अगस्त को नई व्यवस्था (CAS) के पहले सेशन में करीब 515 ट्रेडर्स ने पार्टिसिपेट किया। 56,773 यूनिक क्लाइंट्स के लिए ऑर्डर प्लेस किए गए। 3 अगस्त नई व्यवस्था का पहला दिन था, उस हिसाब से पार्टिसिपेशन अच्छा था।

3:15 और 3:30 के बीच कंटिन्यूअस ऑर्डर मैचिंग नहीं हुआ

NSE ने कहा है कि 3 अगस्त को 3:15 और 3:30 के बीच कंटिन्यूअस ऑर्डर मैचिंग नहीं हुआ, जिससे इंडेक्स (Nifty) की वैल्यू स्थिर रही, क्योंकि यह ट्रेडेड वैल्यू पर आधारित थी। हालांकि, इंडिकेटिव वैल्यूज एक्सचेंज की वेबसाइट पर डिस्प्ले हुआ। यह 3:15 और 3:30 के दौरान कंटिन्यूअसली कैलकुलेटेड प्राइसेज इक्विलिबेरियम पर आधारित था।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन 3:28 से 3:30 के बीच चलता है

नए नियम के मुताबिक, कैश सेगमेंट के शेयरों के लिए कंटिन्यूअल ट्रेडिंग सेशन 3:15 पर खत्म हो जाता है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन 3:28 से 3:30 के बीच चलता है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में प्राइस बैंड स्टॉक के रेफरेंस प्राइस से 3 फीसदी ऊपर या नीचे हो सकता है। NSE ने कहा है, “दोनों एक्सचेंजों (NSE और BSE) के CAS के लिए अलग ऑर्डर बुक्स है, जो कंटिन्यूअस ट्रेडिंग सेशन जैसा है। इसलिए हर स्टॉक का प्राइस भी अलग है।”

CAS में एलिजिबल शेयरों में कंटिन्यूअल ट्रेडिंग 3:15 पर बंद हो जाती है

NSE ने कहा है कि चूंकि इंडेक्स का कैलकुलेशन इंडिविजुअल स्टॉक्स के आधार पर होता है, जिससे इंडेक्स की वैल्यू भी अलग हो सकती है। CAS के तहत एलिजिबल शेयरों में कंटिन्यूअल ट्रेडिंग 3:15 पर बंद हो जाती है। इसके बाद मार्केट 20 मिनट के ऑक्शन में चला जाता है, जिसके आधार पर ऑफिशियल क्लोजिंग होती है। ऑक्शन प्राइस वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के 3 फीसदी ऊपर या नीचे के आधार पर तय होता है। नई व्यवस्था में क्लोजिंग से पहले उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

Restaurant Brands का शेयर बना रॉकेट, 18% दौड़ा, क्या यह है खरीदारी का सही समय?

Restaurant Brands Asia Share Price: बर्गर किंग इंडिया की पैरेंट कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया (Restaurant Brands Asia) के शेयरों में मंगलवार 4 अगस्त को तेज छलांग लगाते नजर आए। शेयर इंट्राडे में 19 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के शेयर की कीमत ₹84 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस ₹70.76 से 18.56% ज़्यादा है। इस क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) स्टॉक में इस साल अब तक 28% की बढ़त हुई है।

शेयर में आज की तेज़ी इस स्मॉल-कैप स्टॉक को उसके 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर ₹87.65 के करीब ले आई है, जो पिछले साल सितंबर में बना था। वहीं, इसका 52-हफ़्ते का निचला स्तर ₹57.15 है।

कैसे रहे Q1 नतीजे

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, कंपनी ने ₹28.3 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह नुकसान ₹48 करोड़ था। मैनेजमेंट ने कहा कि वे प्राइसिंग ऑप्टिमाइज़ेशन, मेन्यू में नए बदलाव और फिक्स्ड कॉस्ट (जिसमें यूटिलिटीज़ भी शामिल हैं) पर बेहतर नियंत्रण के ज़रिए मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस बीच, समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में साल-दर-साल (Y-o-Y) 18% की बढ़त हुई और यह ₹822.6 करोड़ हो गया। इसकी मुख्य वजह भारत के कारोबार में मज़बूत प्रदर्शन था, जबकि इंडोनेशिया का कारोबार कुल ग्रोथ पर दबाव डालता रहा।

कंपनी ने 13% की इंडस्ट्री-लीडिंग सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ (SSSG) बनाए रखी। इसे डाइन-इन और डिलीवरी दोनों चैनलों पर अच्छी मांग और वैल्यू ऑफरिंग से मदद मिली।

इसने Q1 में नौ स्टोर जोड़े और FY27 में 80 स्टोर खोलने की अपनी योजना को दोहराया। इंडोनेशिया में, इसकी टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी पर काम चल रहा है और RBA लागत पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों के ज़रिए नुकसान कम करने पर ध्यान दे रही है।

क्या यह है खरीदारी की सही समय

घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) इस शेयर को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है। कंपनी ने बेहतर मार्जिन को देखते हुए FY27 के लिए EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के अनुमान को 5% और FY28 के लिए 8% बढ़ा दिया है।

MOFSL का कहना है कि जैसे-जैसे और स्टोर मैच्योर होंगे और नेटवर्क में नए आउटलेट्स का योगदान बेहतर होगा, उनसे मार्जिन रिकवरी में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी को उम्मीद है कि इंडोनेशियाई बिजनेस में धीरे-धीरे सुधार होगा क्योंकि कंपनी ने खराब प्रदर्शन करने वाले स्टोर बंद करके अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाया है। हालांकि, उसे उम्मीद है कि इंडोनेशिया में निकट भविष्य में चुनौतियां बनी रहेंगी।

ब्रोकरेज ने 125 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘BUY’ रेटिंग को दोहराया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से 75% की बढ़त का संकेत है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 160 अंक टूटा, निफ्टी 24500 के नीचे, स्मॉलकैप शेयरों में तेजी

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

10 अगस्त को आ रहा है एक और धमाकेदार IPO! टेमासेक-मोतीलाल ओसवाल का सपोर्ट, जानें पूरी डिटेल्स

Molbio Diagnostics IPO: मेडिकल डायग्नोस्टिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मोल्बियो आईपीओ बाजार में दांव लगाने का बड़ा मौका लेकर आ रही है। दिग्गज ग्लोबल निवेशक टेमासेक और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के समर्थन वाली इस कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है।

कंपनी का आईपीओ आम जनता के लिए 10 अगस्त 2026 को खुलेगा। इसी दिन धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ भी दस्तक दे रहा है, जिससे 10 अगस्त को प्राइमरी मार्केट में दो बड़े मेनबोर्ड इश्यू के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

Molbio Diagnostics IPO: टाइमलाइन और महत्वपूर्ण तारीखें

एंकर बुक ओपनिंग: 7 अगस्त 2026

पब्लिक इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 10- 12 अगस्त 2026

शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 13 अगस्त 2026

लिस्टिंग की तारीख: 17 अगस्त 2026

इश्यू का साइज और OFS की डिटेल्स

फ्रेश इश्यू: ₹200 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी किए जाएंगे।

ऑफर फॉर सेल (OFS): मौजूदा शेयरधारक और प्रमोटर्स 91.66 लाख शेयरों की बिक्री करेंगे।

OFS साइज में कटौती: इससे पहले अगस्त 2025 में दाखिल DRHP में 1.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी, जिसे अब घटाया गया है। सेबी ने दिसंबर 2025 में इसके आईपीओ पेपर्स को मंजूरी दी थी।

शेयरहोल्डिंग पैटर्न: प्रमोटर्स एक्सोरा ट्रेडिंग और डॉ. चंद्रशेखर भास्करन नायर के पास 46.65% हिस्सेदारी है। बाकी 53.35% हिस्सेदारी टेमासेक की सहायक कंपनी ‘V Sciences Investments’ और मोतीलाल ओसवाल के ‘India Business Excellence Fund’ जैसे निवेशकों के पास है।

जुटाए गए फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रोसीड्स का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

  • R&D और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (₹105.5 करोड़): पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘Bigtec’ द्वारा संचालित रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में।
  • प्लांट व मशीनरी (₹72.2 करोड़): गोवा यूनिट I, गोवा यूनिट II और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए नए प्लांट, उपकरण और मशीनरी की खरीद में।
  • कॉर्पोरेट उद्देश्य: शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

बिजनेस मॉडल और पेटेंट टेक्नोलॉजी

अक्टूबर 2000 में शुरू हुई मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। कंपनी ने ‘Truenat’ नामक पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के माध्यम से यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है।

कंपनी का फाइनेंशियल प्रदर्शन

मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स का वित्तीय प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में मजबूत रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 14.8% बढ़कर ₹166.6 करोड़ पर पहुंच गया। राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कुल राजस्व 41.7% की जोरदार बढ़त के साथ ₹1,445.7 करोड़ रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

देशभर में मिले 1.19 करोड़ पांडुलिपियों के रिकॉर्ड! जानिए क्या है ज्ञान भारतम मिशन, क्यों इसपर हो रहा करोड़ों रुपये का खर्च?

Gyan Bharatam Mission: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से भी अधिक पांडुलिपियों (Manuscripts) के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। संस्कृति और पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए इस स्कीम से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर की हैं। आपको बता दें कि संस्कृति मंत्रालय की यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण, इनके डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के लिए इसे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

क्या है ज्ञान भारतम मिशन और बजट 2025-26 में क्यों हुई थी घोषणा?

ज्ञान भारतम मिशन (GBM) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक विशेष कार्यक्रम है। इसका ऐलान केंद्रीय बजट 2025-26 के दौरान पांडुलिपियों से जुड़ी गतिविधियों को गति देने के लिए की गई थी। इस पैन-इंडिया पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी लिपि, भाषा, ज्ञान परंपरा, क्षेत्र या समुदाय की संरक्षक परंपराओं से परे हटकर संपूर्ण भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण करना है। पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, डिजिटलाइजेशन और प्रिजर्वेशन को फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मजबूती देने के लिए स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने साल 2025 से 2031 के लिए 491।66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है। इसी फंड का इस्तेमाल देश की बहुमूल्य प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में किया जा रहा है।

क्या हैं ज्ञान भारतम मिशन के मुख्य उद्देश्य?

ज्ञान भारतम मिशन के तहत कई लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन और उनके डॉक्युमेंटशन की स्पीड को बढ़ाना है। देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करने के साथ इसमें उनका ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। भारतीय पांडुलिपियों की सटीक कैटलॉगिंग करने से लेकर उन्हें अप टू डेट बनाने का टास्क भी है। पांडुलिपियों सभी तक पहुंचें और ये किताब के साथ-साथ मशीन रीडेबल यानी डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं, ये भी इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य है।

पांडुलिपियों को बचाने के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता अभियानों और फाइनेंशियल मदद देने की तैयारी है। इसके अलावा भारतीय भाषाओं और पांडुलिपिविज्ञान की स्डडी, स्कॉलपशिप और रिसर्च को बढ़ावा देने की भी तैयारी की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पांडुलिपियों की एक विशाल नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जाए।

मार्च 2026 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वेक्षण: 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियां रिपोर्ट की गईं

पांडुलिपियों के धारकों, संग्रहकर्ताओं और अलग अलग भाषाओं व लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की पहचान करने के लिए मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस सर्वे के दौरान देशभर से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की मौजूदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। अभी देशभर में 8 लाख से अधिक डिजिटल पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, जिन्हें राज्यवार आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।

क्लस्टर सेंटर्स और राज्यों के साथ संस्थागत ढांचा

मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर सेंटर्स और इंडिपेंडेंट सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुस्तकालय, अभिलेखागार, निजी संरक्षक, धार्मिक संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स शामिल हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान भारतम के कार्यान्वयन के लिए नोडल कोआर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं इस मिशन से जुड़ चुकी हैं, जिनमें नवा नालंदा महाविहार (नालंदा), खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना) और श्री बोधगया मठ (बोधगया) शामिल हैं।

कॉपीराइट और सुरक्षा का रखा जा रहा पूरा ध्यान

डिजिटल पांडुलिपियों तक एक्सेस देते समय इनके कस्टोडियनों और अधिकार धारकों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी या तकनीकी रोक नहीं है उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक और विद्वानों के शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच के लिए उचित शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें: प्रशांत किशोर ने BJP के 30 साल पुराने किले में लगाई सेंध, जीत को PM मोदी के लिए बताया “वेक-अप कॉल”