Market Next Week : मिड और स्मॉल कैप्स में लगातार चौथे हफ्ते दिखी गिरावट, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Next Week: बाजार के एक बड़े हिस्से पर दबाव बना रहा और मिड कैप और स्मॉल कैप इंडेक्स लगातार चौथे हफ्ते भी गिरावट का शिकार रहे। इस हफ्ते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 3.5% और निफ़्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 3.3% की गिरावट आई, जिससे इनका प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा। बीते हफ्ते BSE सेंसेक्स 1,986.04 अंक या 2.68% गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ,जबकि निफ़्टी 50 में 3.10% या 718.55 अंकों की गिरावट आई और यह 22,421.95 पर बंद हुआ।

निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे ज्यादा टूटा

सेक्टोरल इंडेक्सों पर नजर डालें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा 6% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑटो में 5.8% की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मेटल, FMCG और PSU बैंक इंडेक्स में 4% से ज़्यादा की गिरावट हुई, जबकि निफ्टी रियल्टी, हेल्थकेयर, इंफ्रा और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 3% से ज़्यादा की गिरावट आई। हालांकि, निफ्टी IT में 0.5% की बढ़त हुई।

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 3.5% की गिरावट

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में इस हफ्ते 3.5% की गिरावट आई। इसमें लगातार चौथे हफ्ते भी इसमें गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में PB फिनटेक, पतंजलि फूड्स, वोडाफोन आइडिया, कोरोमंडल इंटरनेशनल, स्विगी, LIC हाउसिंग फाइनेंस, जुबिलेंट फूडवर्क्स, SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज़, यस बैंक, कल्याण ज्वैलर्स इंडिया, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और रैडिको खेतान शामिल रहे।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी लगातार चौथे हफ्ते गिरावट

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी लगातार चौथे हफ्ते गिरावट जारी रही। यह इस हफ्ते 3.3% गिर गया। इस गिरावट की वजह IFCI, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट, फ़िज़िक्सवाला, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, आइनॉक्स विंड, वॉकहार्ट और वेल्सपन कॉर्प के शेयरों में आई गिरावट रही।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ी

बीते हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी बिकवाली बढ़ा दी और लगातार छठे हफ़्ते निकासी की। उन्होंने कुल 34,966.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सपोर्ट करना जारी रखा और इस हफ़्ते 33,455.30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इस हफ्ते बाजार में आई गिरावट से BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

जानें आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले ने कहा कि छोटे ट्रेडिंग वीक में बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट आई। निफ्टी 3.10 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में लगभग 2000 अंकों की गिरावट आई। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। कंज्यूमर और ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। कंज्यूमर इंडेक्स 6.15 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स 5.85 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

इस हफ्ते मार्केट में ऊपरी लेवल पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। वीकली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी। इंट्राडे चार्ट पर ‘लोअर हाई’ और ‘लोअर लो’ बनने का सिलसिला जारी रहा,जो काफी हद तक नेगेटिव ट्रेंड का संकेत है।

अमोल अठावले का मानना ​​है कि शॉर्ट-टर्म में मार्केट का मिजाज कमज़ोर रहेगा, लेकिन यह ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में है। इसलिए, मौजूदा लेवल से ‘पुलबैक रैली’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नीचे की तरफ, 22,200/71,300 एक अहम सपोर्ट जोन है, जबकि 22,500/72,200 तत्काल रेजिस्टेंस लेवल है। अगर मार्केट 22,500/72,200 के ऊपर जाता है तो पुलबैक बढ़कर 22,700–22,800/73,000-73,200 तक जा सकता है। इसके विपरीत अगर यह 22,200/71,300 के नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और मार्केट 22,000–21,950/71,000-70,700 तक गिर सकता है।

बैंक निफ्टी पर अपनी राय साझा करते हुए अमोल अठावले ने कहा कि इसके लिए 54,000 एक अहम सपोर्ट ज़ोन है। अगर यह इस लेवल के ऊपर बना रहता है तो इंडेक्स वापस 55,000–55,500 तक जा सकता है। हालांकि, 54,000 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसके 53,500–53,200 तक गिरने की संभावना बढ़ सकती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के हेड ऑफ़ रिसर्च,वेल्थ मैनेजमेंट सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है,क्योंकि ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में भारी गिरावट,कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी और पिछले छह महीनों में विदेशी निवेशकों की सबसे ज्यादा बिकवाली का असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है। US 10-ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 2007 के अपने उच्चतम स्तर को पार करके 5.3% पर पहुंच गया है,जो अप्रैल 2002 के बाद सबसे ज्यादा है,जबकि 30-साल के बॉन्ड का यील्ड 5.6% पर है।

निफ्टी की अर्निंग यील्ड अब अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज से कम होने हो गई है। इसके कारण,ग्लोबल यील्ड के स्थिर होने, कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने और विदेशी निकासी में कमी आने तक बाजार में तेजी की संभावना नहीं है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च अजीत मिश्रा का कहना है कि टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ्टी अपने अहम लॉन्ग टर्म सपोर्ट लेवल यानी 22,600 और 22,400 के आसपास 200-हफ्ते के SMA और EMA से साफ तौर पर नीचे आ गया और 22,180 के लेवल (जो अप्रैल 2026 का निचला स्तर था) की ओर बढ़ गया है। इससे बाजार में मंदी का माहौल और मज़बूत हुआ है।

निफ्टी के लिए 22,000–22,200 का जोन अगले अहम सपोर्ट के तौर पर काम कर सकता है, जबकि 22,500–22,600 का लेवल सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस बन सकता है। इसके बाद 22,800 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस होगा। इंडेक्स में करेक्शन का दौर जारी रहने और उतार-चढ़ाव बढ़ने के कारण,निकट भविष्य में सतर्क रहने की जरूरत है और चुनिंदा शेयरों में ही मौके तलाशने की सलाह है।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि बाजार का मूड अभी भी कमजोर बना हुआ है क्योंकि कोविड के समय आई गिरावट के बाद पहली बार इंडेक्स अपने 200-हफ्ते के मूविंग एवरेज के नीचे बंद हुआ है। निचले स्तर पर,22,200 पर सपोर्ट है। अगर इंडेक्स इसके नीचे जाता है तो 22,060 तक और गिरावट आ सकती है।

ऊपर की तरफ 22,600 पर रेजिस्टेंस है। जब तक इंडेक्स 22,600 के नीचे रहेगा,तब तक उछाल पर बिकवाली का ट्रेंड बना रहेगा।

 

त्योहारी सीजन से पहले AC और TV की कीमतें 5-8% बढ़ीं, अप्लायंस बनाने वाली कंपनियों को बिक्री में डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: दिग्गज निवेशक विजय केडिया स्टॉक मार्केट की दुनिया में जाना-माना नाम हैं और उनके कही बात रिटेल इंवेस्टर्स के लिए गोल्डेन टिप्स की तरह है। समय-समय पर खुदरा निवेशकों को खास टिप्स देते रहते हैं और ऐसी ही उनकी एक स्माइल थ्योरी है, जिससे आम लोगों को किस स्टॉक में पैसे लगाएं, इससे चुनने में काफी मदद मिल सकती है। स्माइल थ्योरी के जरिए स्टॉक्स को मल्टीबैगर बनने से पहले पकड़ा जा सकता है, जिससे पोर्टफोलियो भी खिलखिला उठेंगे।

क्या है Vijay Kedia की SMILE थ्योरी

S: स्मॉल इन साइज यानी कि ऐसी कंपनियों में निवेश, जोकि अभी छोटी हो यानी स्मॉल-कैप या माइक्रो-कैप।

M: मीडियम इन एक्सपीरिएंस यानी कि मैनेजमेंट के पास अच्छा-खास अनुभव होना चाहिए।

I: इंक्रीजिंग अर्निंग्स/लॉर्ज इन एस्पिरेशन यानी कि सपने बड़े होने चाहिए, तभी तो कंपनी आगे बढ़ेगी और इसकी कमाई बढ़ती रहनी चाहिए।

L: लो डेट यानी कि कंपनी पर कर्ज का भारी-भरकम बोझ नहीं होना चाहिए।

E: एक्स्ट्रा-लॉर्ज मार्केट पोटेंशियल यानी कि कंपनी जिस सेगमेंट या कैटेगरी में है, वह काफी बड़ा होना चाहिए, तभी तो कंपनी को आगे बढ़ने का स्कोप मिलेगा।

एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कोई कंपनी आज ₹500 करोड़ की है मतलब कि S।

उसके मैनेजमेंट के पास 10-15 साल का अनुभव है यानी कि M।

प्रमोटर कंपनी का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है और कंपनी की कमाई भी बढ़ रही है यानी कि I।

कंपनी का कर्ज भी कंट्रोल में है यानी कि L।

कंपनी जिस सेक्टर में है, उसका पोटेंशियल ₹50 हजार करोड़ है यानी कि ₹500 करोड़ की कंपनी के सामने ₹50 हजार करोड़ का मार्केट है यानी कि E।

क्या है Vijay Kedia के पोर्टफोलियो में

विजय केडिया ने स्टॉक मार्केट में 19 साल की उम्र से निवेश शुरू किया था। वह निवेशकों को लंबे समय तक के लिए निवेश की सलाह देते हैं और अपने पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट के लिए स्माइल थ्योरी पर निर्भर रहते हैं। उनके पोर्टफोलियो की बात करें तो कंपनी की लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग के हिसाब से उनके पास ₹1,319.2 करोड़ के 23 स्टॉक्स हैं, जिनमें अतुल ऑटो, महिंद्रा रिजॉर्ट्स, सियाराम सिल्क मिल्स, सुदर्शन केमिकल, वैभव ग्लोबल, तेजस नेटवर्क्स और यथार्थ हॉस्पिटल हैं।

10 साल बाद, Nifty लाल होने की कगार पर, इस साल टूट चुका है 14%, अब चार्ट पर ये लेवल करें मार्क

SIP संभाल सकता है FIIs की बिकवाली? विदेशी निवेशकों की 11% निकासी सिर्फ एक महीने सितंबर में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

10 साल बाद, Nifty लाल होने की कगार पर, इस साल टूट चुका है 14%, अब चार्ट पर ये लेवल करें मार्क

Nifty Outlook: देश की 50 दिग्गज लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को ट्रैक करने वाला एनएसई का इंडेक्स Nifty 50 इस साल लाल होने की कगार पर है। पिछले 10 साल से यह लगातार बढ़त के साथ ग्रीन जोन में बंद हो रहा है लेकिन इस बार इसकी रैली थमती दिख रही है। इस साल अभी तीन महीने बचे हैं और अभी तक की स्थिति के हिसाब से यानी 1 अक्टूबर तक निफ्टी 14.97% कमजोर हो चुका है यानी कि निफ्टी को अपनी ग्रीन रैली बनाए रखने के लिए जोरदार रिकवरी दिखानी होगी।

एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 1 अक्टूबर को यह 0.88% की गिरावट के साथ 22421.95 पर बंद हुआ था। इस साल की शुरुआत में 5 जनवरी 2026 को यह इंट्रा-डे में 26,373.20 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था तो क्लोजिंग बेसिस पर 2 जनवरी 2026 को यह 26,328.55 के रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ था।

10 साल में कब कितनी बढ़त के साथ बंद हुआ Nifty

निफ्टी के लिए पिछले 10 साल के सालाना सफर की बात करें तो सबसे अधिक बढ़त 2016 में दिखी थी। यहां तक कि कोरोना महामारी से प्रभावित वर्ष 2020 में भी निफ्टी ने दमदार मजबूती हासिल की थी। यहां पिछले 10 साल की रैली का ट्रैक रिकॉर्ड दिया जा रहा है-

वर्ष निफ्टी उठा-पटक
2015(-)4.06%
20163.01%
201728.65%
20183.15%
201912.02%
202014.90%
202124.12%
20224.33%
202320.03%
20248.80%
202510.51%
2027(-)14.97% (1 अक्टूबर तक)

आखिर क्यों टूट रहा निफ्टी

इस साल निफ्टी जनवरी से सितंबर तक सिर्फ अप्रैल, जून और जुलाई महीने में मजबूत हुआ और अक्टूबर भी शुरुआत कमजोर हुई। इस साल अब तक यह 14.97% कमजोर हुआ है जिसमें से 11.31% की कमजोरी तो मार्च महीने में आई थी। निफ्टी को इस साल कई आंधियों से जूझना पड़ा जैसे कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, कच्चे तेल में उबाल, टैरिफ वार, महंगाई की तेज रफ्तार, सख्त मौद्रिक नीतियां, बॉन्ड यील्ड में उछाल, विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली और सेल ऑन राइज स्ट्रैटेजी।

अहम लेवल्स

लेवल टाइप इसलिए है अहम
22,217तात्कालिक सपोर्ट1 अक्टूबर का इंट्रा-डे लो
22,182मजबूत सपोर्टअप्रैल 2026 का निचला स्तर/ 52-हफ्ते के निचले स्तर के आस-पास
22,000अगला सपोर्टमनोवैज्ञानिक स्तर
21,750अगला सपोर्टअप्रैल 2025 का निचला स्तर
22,600–22,800तात्कालिक रेजिस्टेंसहाल-फिलहाल की टेक एनालिसिस में रेजिस्टेंस जोन
23,000अहम रेजिस्टेंस22,800–23,000 जोन का अपर एंड

SIP संभाल सकता है FIIs की बिकवाली? विदेशी निवेशकों की 11% निकासी सिर्फ एक महीने सितंबर में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dr Reddy’s Share Price: वित्त वर्ष बताने में गलती अमेरिकी इकाई पर पड़ी भारी, अब 5 अक्टूबर को शेयर फोकस में

Dr Reddy’s Share Price: डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज की पूर्ण मालिकाना हक वाली स्टेप-डाउन सब्सिडियरी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज इंक (DRL Inc) पर अमेरिका में लाखों का जुर्माना लगा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 3 अक्टूबर की शाम एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे लेकर कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इंटर्नल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने टैक्स पेमेंट के समय वित्त वर्ष के गलत तरीके से रेफरेंस पर $32,350.20 यानी करीब ₹31 लाख का जुर्माना लगाया है। अब इसका असर सोमवार 5 अक्टूबर को इसके शेयरों की चाल पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 1 अक्टूबर को बीएसई पर इसका शेयर 2.90% की गिरावट के साथ ₹1200.10 पर बंद हुआ था।

Dr Reddy’s पर जुर्माने का क्या है पूरा मामला

डॉ रेड्डीज के मुताबिक उसकी अमेरिकी सब्सिडयरी पर इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने $32,350.20 का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना टैक्स पेमेंट के समय फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) के रेफरेंस को गलत तरीके से बताने की वजह से लगाया गया है। DRL Inc को US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस, सिनसिनाटी, ओहियो से 25 सितंबर, 2026 की तारीख वाला फाइनल ट्रांसक्रिप्ट 2 अक्टूबर, 2026 को मिला। हालांकि डॉ रेड्डीज का कहना है कि एवैल्युएशन के आधार पर इसका कंपनी के फाइनेंशियल, ऑपरेशंस और अन्य एक्टिविटीज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

इससे पहले 11 सितंबर को एक डॉ रेड्डीज ने बताया था कि अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने मेक्सिको में इसकी API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) बनाने वाली फैसिलिटी में रिकॉर्ड्स की जांच पूरी कर ली है और जांच के आखिर में दो ऑब्जर्वेशन जारी किया। यह एसेसमेंट 17 जुलाई से 8 सितंबर के बीच हुआ था।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

डॉ रेड्डीज के शेयरों ने बहुत ही शॉर्ट पीरियड में एक साल के हाई लेवल से एक साल के निचले स्तर का सफर तय किया। बीएसई पर 29 जून 2026 को इसके शेयर ₹1,414.40 पर थे, जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से महज 1 ही महीने में यह 23.64% टूटकर 23 जुलाई 2026 को ₹1,080.05 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

SIP संभाल सकता है FIIs की बिकवाली? विदेशी निवेशकों की 11% निकासी सिर्फ एक महीने सितंबर में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सरकार को शेयर बाजार की परवाह नहीं

एक समय था, जब भाजपा की सरकार शेयर बाजार को भारत की अर्थव्यवस्था का आईना बताती थी। दावा किया जाता था कि दुनिया भर में शेयर बाजार कमजोर हो रहे हैं पर भारत में बाजार के तेजी बनी हुई है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी और कोराना महामारी के बाद भी शेयर बाजार में तेजी बनी रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सितंबर 2024 में 85 हजार से ऊपर चला गया था और दावा किया जा रहा था कि यह दो साल में एक लाख की सीमा पार कर जाएगा। इस प्रचार के कारण करोड़ों लोगों ने सीधे शेयर बाजार में निवेश शुरू किया। करोड़ों लोगों ने म्युचुअल फंड और एसआईपी के जरिए निवेश शुरू किया।

इसकी वजह से आज स्थिति यह है कि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य अगर चार सौ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है तो उसमें बड़ी हिस्सेदारी यानी बड़ा निवेश आम मध्य वर्गीय लोगों और निम्न मध्यवर्ग के लोगों का है। लेकिन अब सरकार ने शेयर बाजार की परवाह छोड़ दी है। दो साल में शेयर बाजार 85 हजार से गिर कर 72 हजार पर आ गया है। पिछले एक साल में निवेशकों के 17 लाख करोड़ रुपए शेयर बाजार में डूबे हैं। विदेशी निवेशकों ने एक साल में ढाई लाख करोड़ रुपए निकाले हैं। भारत में महंगाई और ब्याज दर बढ़ने के डर से तो ईरान व अमेरिका युद्ध के खतरे के कारण या भारत में शेयर बाजार में होने मैनिपुलेशन के जरिए कीमत बढ़ाने के कारण विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं और बाजार गिर रहा है। लेकिन इतने बड़ा घटनाक्रम पर सरकार की ओर से किसी ने एक लाइन का बयान नहीं दिया है। लगातार आठ हफ्ते से बाजार गिर रहा है।

Maxivision Super Specialty Eye Hospitals ला रही है IPO, ड्राफ्ट किया जमा; क्वाड्रिआ कैपिटल का भी लगा है पैसा

मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स (Maxivision Super Specialty Eye Hospitals) ने अपने IPO के लिए कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट जमा किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बात एक अखबार के विज्ञापन से सामने आई है। इस IPO में नए शेयर तो जारी होंगे ही, साथ ही कंपनी के मौजूदा निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल भी रहेगा। कंपनी में क्वाड्रिआ कैपिटल का भी पैसा लगा हुआ है।

कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल हैं मर्चेंट बैंकर

रॉयटर्स ने जुलाई में रिपोर्ट दी थी कि मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स ने IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल को बैंकर के तौर पर नियुक्त किया है। 1996 में शुरू हुई यह हॉस्पिटल चेन 6 राज्यों में 90 से ज्यादा सेंटर चलाती है। ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, भारत का आई-केयर मार्केट 2033 तक 31.2 अरब डॉलर का बन जाने का अनुमान है।

SRIT India IPO: 40% गेन के साथ हो सकती है लिस्टिंग! ग्रे मार्केट से बेहद अच्छे संकेत; सब्सक्रिप्शन भी रहा शानदार

इसी महीने आ सकता है Jio IPO

Jio Platforms के IPO को लेकर कंपनी की अंदरूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मनीकंट्रोल को मामले से जुड़े लोगों से पता चला है कि विदेशी निवेशकों से भी कंपनी को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। IPO 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकता है। एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। वहीं, शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, बाजार की स्थिति को देखते हुए तारीखों में बदलाव भी हो सकता है। Jio Platforms ने इस साल जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किया था। इसके बाद SEBI ने अगस्त में IPO को मंजूरी दी। यह पब्लिक इश्यू लगभग 37,700 करोड़ रुपये का रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IPOs This Week: 5 अक्टूबर से शुरू हफ्ते में केवल एक नया इश्यू, पर लिस्टिंग्स की भरमार; 29 कंपनियों के शेयर करेंगे शुरुआत

5 अक्टूबर से शुरू हो रहा हफ्ता IPO के लिहाज से काफी ठंडा रहेगा। नए हफ्ते में केवल एक नया पब्लिक इश्यू खुलने जा रहा है। वह भी SME। हालांकि नए सप्ताह में पहले से खुले 12 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से 2 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं। जहां तक स्टॉक मार्केट में नई लिस्ट होने वाली कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे हफ्ते में बाढ़ आने वाली है। बाजार में 29 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इनमें से 8 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नया खुल रहा IPO

R.K.Fashion Accessories IPO: ₹34.99 करोड़ का इश्यू 5 अक्टूबर को खुलेगा और 7 अक्टूबर को बंद होगा। बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹77-₹82 प्रति शेयर है। लॉट साइज 1,600 शेयर है। इश्यू बंद होने के बाद कंपनी के शेयर NSE SME पर 12 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

पहले से खुले IPO

Shree TNB Polymers IPO: कंपनी ₹31.80 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। इश्यू 28 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹50-₹53 प्रति शेयर और लॉट साइज 2,000 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग BSE SME पर 8 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।

EverestIMS Technologies IPO: ₹48.46 करोड़ का इश्यू 29 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹80-₹85 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,600 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होगी।

Vishal Nirmiti IPO: ₹178 करोड़ का यह पब्लिक इश्यू 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹208-₹220 प्रति शेयर और लॉट साइज 68 शेयर है। कंपनी के NSE और BSE पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Nityas Gems & Jewellery IPO: ₹108.35 करोड़ का इश्यू 30 सितंबर को खुला और 5 अक्टूबर को बंद होगा। बोली ₹70-₹75 प्रति शेयर के भाव पर और 200 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी NSE और BSE पर 8 अक्टूबर को लिस्ट हो सकती है।

Eventions IPO: यह ₹38.12 करोड़ का है। इसकी भी ओपनिंग 30 सितंबर को हुई और क्लोजिंग 5 अक्टूबर को होगी। प्राइस बैंड ₹112-₹118 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE SME पर 8 अक्टूबर को शुरुआत करने वाले हैं।

Dove Soft IPO: यह 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। बोली ₹104-₹111 प्रति शेयर के भाव पर और 1,200 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी का इरादा ₹73.26 करोड़ जुटाने का है। शेयरों की लिस्टिंग BSE SME पर 8 अक्टूबर को हो सकती है।

SJP Ultrasonics IPO: यह ₹23.45 करोड़ का है। इसकी भी ओपनिंग 30 सितंबर को हुई थी और क्लोजिंग 5 अक्टूबर को होगी। फाइनल इश्यू प्राइस ₹67 प्रति शेयर और लॉट साइज 2000 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने वाली है।

Jio IPO: इसी महीने आ सकता है जियो का आईपीओ, विदेशी निवेशकों से मिला मजबूत रिस्पॉन्स

Sollfege Smart Electronics IPO: यह 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी ₹21.78 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹55 प्रति शेयर और लॉट साइज 2000 शेयर है। कंपनी के BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Omara Ventures India IPO: ₹41.99 करोड़ का पब्लिक इश्यू 30 सितंबर को खुला। निवेश ₹296-₹311 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में और 400 शेयरों के लॉट में कर सकते हैं। 5 अक्टूबर को इश्यू बंद होने के बाद कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट हो सकती है।

Paramount Syntex IPO: ₹81.79 करोड़ का इश्यू 30 सितंबर को खुला था और 6 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹119-₹127 प्रति शेयर है। लॉट साइज 1,000 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग BSE SME पर 9 अक्टूबर को हो सकती है।

Acme India Industries IPO: यह भी 30 सितंबर को खुला। कंपनी ₹121.69 करोड़ जुटाना चाहती है। बोली 6 अक्टूबर तक ₹186-₹196 प्रति शेयर के भाव पर और 600 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी के शेयर BSE SME पर 9 अक्टूबर को शुरुआत कर सकते हैं।

TNA Solutions IPO: यह ₹37.86 करोड़ का है। ओपनिंग 30 सितंबर को हुई और क्लोजिंग 6 अक्टूबर को होने वाली है। प्राइस बैंड ₹66-₹70 प्रति शेयर और लॉट साइज 2,000 शेयर है। कंपनी के शेयर BSE SME पर 9 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 5 अक्टूबर को NSE और BSE पर स्नैपडील की पेरेंट कंपनी Acevector, Runwal Enterprises, Orient Cables और German Green Steel & Power की लिस्टिंग होने की उम्मीद है। इसी दिन NSE SME पर Bench Mark Infotech Services, Himalayan Solar के शेयर लिस्ट होंगे। वहीं BSE SME पर Dudani Retail, Sai Urja Indo की लिस्टिंग हो सकती है। 6 अक्टूबर को NSE और BSE पर SRIT India, Shah Investor’s Home के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इसी दिन BSE SME पर Acme Universal Safezone 9, Shivchem Agro, Pind Hospitality के शेयर लिस्ट हो सकते हैं।

इसके बाद 7 अक्टूबर को NSE SME पर Green Asia Impex, Papadmalji Agro Foods की लिस्टिंग होने वाली है। इसी दिन BSE SME पर Vans Electroengineerings, Black Opal Consultants की लिस्टिंग होने की उम्मीद है। 8 अक्टूबर को NSE और BSE पर Vishal Nirmiti, Nityas Gems & Jewellery के शेयर शुरुआत कर सकते हैं।

इसी दिन BSE SME पर Shree TNB Polymers, EverestIMS Technologies, Dove Soft, SJP Ultrasonics, Sollfege Smart Electronics, Omara Ventures India लिस्ट हो सकती हैं। साथ ही NSE SME पर Eventions के शेयर लिस्ट हो सकते हैं। 9 अक्टूबर को BSE SME पर Paramount Syntex, Acme India Industries और TNA Solutions ​की लिस्टिंग होगी।

अप्रैल-सितंबर में मेनबोर्ड सेगमेंट में आए 78 IPO, जुटाए गए रिकॉर्ड ₹94205 करोड़

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रात में भी खुले रहेंगे अमेरिकी शेयर बाजार! दिसंबर से शुरू हो सकता है ओवरनाइट सेशन

अमेरिकी शेयर बाजारों में जल्द ही दिन के साथ-साथ रात में भी ट्रेडिंग हो सकेगी। जी हां, दिसंबर से इन्हें रात में भी खुले रखने का प्लान है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नैस्डेक, NYSE Arca, 24X नेशनल एक्सचेंज और Cboe EDGX ने न्यूयॉर्क में रात 9 बजे से सुबह 4 बजे तक एक ‘ओवरनाइट सेशन’ एड करने की योजना बनाई है। यह इनके मौजूदा रेगुलर ट्रेडिंग घंटों और प्री व पोस्ट-मार्केट पीरियड्स के अलावा होगा। 6 दिसंबर से शुरू होने वाले इस बदलाव का मकसद विदेशी निवेशकों से बढ़ती मांग को पूरा करना और क्रिप्टो व प्रेडिक्शन मार्केट से मुकाबला करना है।

अभी नैस्डैक और NYSE हफ्ते में 5 दिन सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे (ET) तक मुख्य सेशन ऑपरेट करते हैं। इन घंटों के अलावा, सीमित तरह की ट्रेडिंग के लिए ‘बिफोर-आवर’ और ‘आफ्टर-आवर’ सेशन भी होते हैं। बिफोर-आवर सेशन सुबह 4 बजे से शुरू हो जाता है। साथ ही शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक ‘पोस्ट-मार्केट’ सेशन भी होता है। दिसंबर से लागू हो सकने वाले बदलाव के बाद भी, एक्सचेंज में मेंटेनेंस और ट्रेड प्रोसेसिंग के लिए रात 8 बजे से 9 बजे तक एक घंटे का ब्रेक रहेगा।

एक साल में 358% बढ़ी ओवरनाइट ट्रेडिंग

वैसे तो ओवरनाइट ट्रेडिंग कई सालों से हो रही है, खासकर ‘अल्टरनेटिव ट्रेडिंग सिस्टम्स’ के जरिए, लेकिन कुल ट्रेडिंग में इसकी हिस्सेदारी बहुत कम रही है। पिछले हफ्ते सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की एक राउंडटेबल मीटिंग में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में इक्विटी ट्रेडिंग वॉल्यूम में ओवरनाइट ट्रेडिंग की हिस्सेदारी सिर्फ 1% की थी। दिन के समय होने वाली ट्रेडिंग के मुकाबले यह बहुत कम है, लेकिन ओवरनाइट ट्रेडिंग तेजी से बढ़ रही है और एक साल पहले के मुकाबले इसमें 358% की बढ़ोतरी हुई है।

23/5 ट्रेडिंग (हफ्ते में 5 दिन, रोज 23 घंटे ट्रेडिंग) के लागू हो सकने से इस बात पर बहस छिड़ गई है कि लंबे समय तक ट्रेडिंग का दुनिया भर के मार्केट पार्टिसिपेंट्स पर क्या असर पड़ेगा। इसके सपोर्टर्स का कहना है कि इस विस्तार से टाइम-जोन की बाधाएं खत्म होंगी और विदेशी ट्रेडर्स को अमेरिकी बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं, आलोचकों का मानना ​​है कि कम लिक्विडिटी और ज्यादा ‘बिड-आस्क स्प्रेड्स’ (खरीद और बिक्री की कीमतों में अंतर) से ट्रेडिंग जोखिम बढ़ सकते हैं।

LG Electronics India Share Price: आगे 21% तक की दिख सकती है तेजी, ब्रोकरेज ने दी ‘बाय’ रेटिंग

मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स ने शुरू कर दी तैयारी

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर के मुख्य प्रोवाइडर भी इस बदलाव के लिए तैयारी कर रहे हैं। US स्टॉक ट्रेड्स की क्लियरिंग के लिए जिम्मेदार मुख्य कंपनी ‘डिपॉजिटरी ट्रस्ट एंड क्लियरिंग कॉर्प.’ ने जून में 24×5 मॉडल अपनाया, जो रविवार को न्यूयॉर्क समय के अनुसार रात 8 बजे से शुक्रवार को न्यूयॉर्क समय के अनुसार रात 8 बजे तक चलता है। सिक्योरिटीज इनफॉर्मेशन प्रोसेसर्स (SIPs), जो कोट्स और ट्रेड डेटा इकट्ठा और डिस्ट्रीब्यूट करते हैं, उन्हें भी ओवरनाइट ट्रेडिंग को सपोर्ट करने के लिए अपने ऑपरेटिंग आवर्स बढ़ाने की रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: इसी महीने आ सकता है जियो का आईपीओ, विदेशी निवेशकों से मिला मजबूत रिस्पॉन्स

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल होल्डिंग कंपनी Jio Platforms अपने बहुप्रतीक्षित IPO की तैयारी कर रही है। कंपनी की अंदरूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों से भी कंपनी को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

IPO 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकता है। एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। वहीं, शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, बाजार की स्थिति को देखते हुए तारीखों में बदलाव भी हो सकता है।

IPO लॉन्च के काफी करीब Jio

मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, Jio IPO लॉन्च करने के काफी करीब है। हालांकि, बाजार की स्थिति और दुनियाभर में होने वाले घटनाक्रम पर भी नजर रखी जा रही है। सूत्र ने बताया कि SEBI से जुड़ी रेग्युलेटरी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जरूरी मंजूरियां भी मिल गई हैं।

Jio ने विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs के साथ इन्वेस्टर मीटिंग की है। इन बैठकों में निवेशकों का रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा। घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी भी उम्मीद से ज्यादा बताई जा रही है।

बाजार की स्थिति पर रोज नजर

हाल में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में Jio की टीम बाजार की स्थिति पर रोज नजर रख रही है।

एक अन्य सूत्र ने कहा कि बाजार अभी कुछ अस्थिर है। इसके बावजूद निवेशकों ने संकेत दिया है कि इससे IPO में उनकी दिलचस्पी पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यानी बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद IPO में भाग लेने की उनकी इच्छा बनी हुई है।

SEBI से मिल चुकी है मंजूरी

Jio Platforms ने जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद SEBI ने 28 अगस्त को अपने फाइनल ऑब्जर्वेशन जारी किए।

इसके साथ ही IPO के लिए जरूरी रेग्युलेटरी प्रक्रिया काफी हद तक पूरी हो गई। अब कंपनी लॉन्च की तैयारी में है।

IPO से कर्ज चुकाएगी कंपनी

Jio Platforms का IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा। यानी इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे। IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा Reliance Jio Infocomm के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल होगा।

कंपनी करीब ₹27,500 करोड़ के बकाया कर्ज को पूरी तरह या कुछ हिस्से में चुकाने या पहले से भुगतान करने की योजना बना रही है। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

IPO की कीमत और वैल्यूएशन अभी तय नहीं

Jio IPO का फाइनल प्राइस और कंपनी का वैल्यूएशन अभी तय नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशकों की प्रतिक्रिया और बाजार की स्थिति को देखकर अगले हफ्ते प्राइसिंग पर फैसला हो सकता है।

सूत्र ने बताया कि कंपनी का मकसद यह है कि IPO में आने वाले शेयरधारकों के लिए शुरुआत से ही वैल्यू बने। साथ ही, लंबे समय में भी उन्हें कंपनी की ग्रोथ का फायदा मिले।

रिटेल और HNI के लिए 50% हिस्सा

प्रस्तावित इश्यू स्ट्रक्चर के मुताबिक, IPO का 50% हिस्सा रिटेल और HNI निवेशकों के लिए रखा जाएगा। बाकी 50% हिस्सा संस्थागत निवेशकों के लिए होगा।

रिटेल और HNI वाले हिस्से में 35% हिस्सा उन रिटेल निवेशकों के लिए होगा, जो ₹2 लाख तक के शेयरों के लिए आवेदन करेंगे। बाकी 15% हिस्सा दो कैटेगरी में बांटा जाएगा।

इसमें ₹10 लाख से ज्यादा निवेश करने वाले निवेशक और ₹2 लाख से ₹10 लाख के बीच निवेश करने वाले निवेशक शामिल होंगे। संस्थागत निवेशकों के हिस्से में एंकर बुक और मुख्य इंस्टीट्यूशनल बुक शामिल होगी।

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, Jio Platforms का मैनेजमेंट चाहता है कि रिटेल निवेशक IPO में अच्छी भागीदारी करें। कंपनी चाहती है कि रिटेल निवेशकों को लंबे समय में बनने वाली वैल्यू का भी फायदा मिले।

Jio को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं मान रहे निवेशक

निवेशक अब Jio को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी के तौर पर नहीं देख रहे हैं। कंपनी का डिजिटल बिजनेस काफी बड़ा है। इसमें मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल सर्विसेज भी शामिल हैं।

Jio Platforms की टेलीकॉम यूनिट Reliance Jio Infocomm के पास 31 मार्च तक 52.44 करोड़ ग्राहक थे। सब्सक्राइबर की संख्या के हिसाब से यह भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इनमें 26.85 करोड़ 5G ग्राहक थे। कंपनी के मुताबिक, चीन को छोड़कर दुनिया में Jio सबसे बड़ा 5G स्टैंडअलोन ऑपरेटर था।

FWA में भी बड़ा कारोबार

Jio फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA में भी बड़ा खिलाड़ी है। मार्च तक कंपनी के पास करीब 1.5 करोड़ FWA ग्राहक थे। कंपनी के मुताबिक, चीन को छोड़कर दुनिया में Jio सबसे बड़ा FWA प्रोवाइडर था। इसके ग्राहकों की संख्या अमेरिका की T-Mobile की FWA ग्राहक संख्या से करीब 1.5 गुना थी।

Jio Platforms ने शुक्रवार शाम भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया।

Bajaj Finance: ₹17500 करोड़ जुटाएगी कंपनी, QIP और वारंट इश्यू के लिए बोर्ड की मंजूरी मिली

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

FII Selling: विदेशी निवेशकों ने चार दिन में ₹35000 करोड़ के शेयर बेचे, चारों दिन गिरा बाजार

FII Selling: फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली जारी है। गुरुवार को भी FII ने करीब ₹9,484 करोड़ के शेयर बेच दिए। दूसरी ओर, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DII) ने ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

बाजार में लगातार गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता बढ़ा रही है। इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरकर बंद हुए।

चार दिन में ₹35,000 करोड़ की बिकवाली

FIIs ने पिछले चारों कारोबारी सत्र में लगातार बिकवाली की है। हर दिन उनकी बिकवाली ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रही।

28 सितंबर को FIIs ने ₹5,353.22 करोड़ के शेयर बेचे। 29 सितंबर को यह आंकड़ा ₹9,980.22 करोड़ रहा। 30 सितंबर को उन्होंने ₹10,148.41 करोड़ की बिकवाली की। 1 अक्टूबर को भी ₹9,484.22 करोड़ के शेयर बेचे गए। इस तरह चार कारोबारी सत्र में FIIs की कुल बिकवाली करीब ₹34,966 करोड़ पहुंच गई है।

DII ने संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। 28 सितंबर को DIIs ने ₹5,189.02 करोड़ के शेयर खरीदे थे। 29 सितंबर को खरीदारी ₹6,952.71 करोड़ रही। 30 सितंबर को DIIs ने ₹11,271.73 करोड़ और 1 अक्टूबर को ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

चार दिनों में DIIs की कुल खरीदारी करीब ₹33,455 करोड़ हो गई है। यानी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों ने सोख लिया।

लगातार चार दिन बाजार गिरा

FIIs की बिकवाली ऐसे समय बढ़ी है, जब शेयर बाजार पहले से दबाव में है। इस हफ्ते अब तक चारों कारोबारी सत्र में बाजार गिरकर बंद हुआ है। निफ्टी इस हफ्ते 3% से ज्यादा टूट चुका है। सेंसेक्स में भी करीब 3% की गिरावट आई है। निफ्टी बैंक करीब 2% नीचे है।

ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स इस हफ्ते करीब 4% गिर चुका है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया है।

रुपया 96 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। गुरुवार को रुपया 48 पैसे गिरकर फिर 96 प्रति डॉलर के पार चला गया। दो महीने में यह रुपये की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।

Stocks to Buy: तीन सरकारी कंपनियों के स्टॉक्स में 48% तक तेजी की उम्मीद, जेफरीज ने खरीदने की सलाह