एक दिन पहले तक जिस डील को अमेरिका और सऊदी अरब की “ऐतिहासिक साझेदारी” बताया जा रहा था, अगले ही दिन उसी डील की बुनियाद पर डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एक नई शर्त टांग दी। बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा मंत्री और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने सिविल न्यूक्लियर सहयोग समझौते
Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को जोरदार उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 7% चढ़कर 100.71 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। यह करीब दो महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 6% बढ़कर 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह तेजी यमन के हूती विद्रोहियों के दावे के बाद आई। हूतियों ने कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इससे दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
मिडिल ईस्ट पहले से ही तनाव में है। ऊपर से होर्मुज स्ट्रेट में तेल की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। अब लाल सागर में भी हमले शुरू हो गए हैं। ऐसे में बाजार को डर है कि दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई और कम हो सकती है।
मैटाडोर इकोनॉमिक्स के चीफ इकोनॉमिस्ट टिम स्नाइडर का कहना है कि सऊदी टैंकरों पर हमला तेल बाजार के लिए बड़ा झटका है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कीमतें ऊपर रह सकती हैं।
हूतियों ने क्या दावा किया?
हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी तेल ले जा रहे दो टैंकरों को निशाना बनाया। उनका कहना है कि वे सऊदी अरब के तेल निर्यात पर समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे।
बाद में सऊदी समाचार एजेंसी ने भी पुष्टि की कि दो टैंकरों में से एक पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई।
गोल्डमैन सैक्स की बड़ी चेतावनी
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा संकट 2027 तक जारी रहता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। अगले साल इसका औसत भी करीब 100 डॉलर रह सकता है।
अगर बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और स्वेज नहर में भी लंबे समय तक रुकावट बनी रही, तो तेल और महंगा हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में क्या हो रहा है?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि ओमान के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई। दो दूसरे टैंकर वापस लौट गए।
ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है। जब तक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक उसकी मंजूरी के बिना कोई टैंकर वहां से नहीं गुजर सकेगा।
सप्लाई पर कितना असर?
यूबीएस के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले गैर-ईरानी टैंकरों की संख्या तेजी से घटी है। वहीं, अमेरिकी नाकेबंदी के चलते ईरान का तेल निर्यात भी लगभग शून्य पर पहुंच गया है।
पिछले सात दिनों में खाड़ी क्षेत्र से तेल लोडिंग घटकर 25 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इससे पहले 30 दिनों का औसत 60 लाख बैरल प्रतिदिन था।
अमेरिका भी लगातार कर रहा हमला
अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान के ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज को निशाना बनाया, तो अमेरिका उसके अहम ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान समर्थित हूतियों के किसी भी भविष्य के हमले के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समूह फिर से जहाजों को निशाना बनाता है, तो उन्हें बड़ी सैन्य सजा दी जाए
Market Insight : खराब ओपनिंग के बाद बाजार में रिकवरी की कोशिश हो रही है। निफ्टी निचले स्तरों से 100 अंकों से ज्यादा सुधरकर 23980 के करीब आ गया है। बैंक निफ्टी भी नीचे से करीब 250 अंक सुधरा है। लेकिन मिड और स्मॉलकैप में दबाव देखने को मिल रहा है। उधर वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में भी गिरावट आई है। अब सवाल ये है कि क्या हम ब्रेकडाउन के करीब हैं? इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी पिछले 2 हफ्तों से एक रेंज में रहा है। 8 जुलाई की कैंडल को तोड़ने में 10 दिन से ज्यादा लगे। लेकिन पिछले शुक्रवार का वो ब्रेकआउट नकली निकला।
हमने बात की थी कि अब रेंज के निचले स्तरों पर जाने का रिस्क है। ये भी संभव है कि हम अब एक रेंज का ब्रेकडाउन दिखा दें। मगर जैसे ब्रेकआउट फेल हुआ था,क्या पता ब्रेकडाउन भी फेल हो। मगर इसमें कोई शक नहीं है कि बाजार में डर लौटा है। डर है कि US-ईरान लड़ाई फिर से लंबा न खींच जाए। यह भी डर है कि वापस कच्चे तेल की कीमत और सप्लाई पर असर न पड़े। कच्चा तेल अब वापस $100 पार करने की तैयारी कर रहा है। India VIX पर भी नजर रखें, 14.5 का मेक ऑर ब्रेक जोन है।
अच्छी बात यह है कि इस बार मार्च जैसी पेनिक सेलिंग नहीं है और कच्चे तेल से जुड़े शेयर भी टूट नहीं रहे हैं। उम्मीद होगी कि US चुनाव से पहले ये लड़ाई जल्दी खत्म हो, क्योंकि इस समय बाजार बाकी फैक्टर्स को नजरअंदाज कर रहा है।
बाजार: आखिर क्यों गिर रहे हैं हम?
कल भी हमने समझाया था कि बाजार क्यों गिरेगा। बाजार के सभी बड़े सेक्टर्स ने थकान दिखाई थी। एक-एक कर आज बड़े सेक्टर्स की दिक्कत दिखती है। बैंक सबसे बड़ा फैक्टर है। यह सबसे बड़ा सेक्टर है और सबसे ज्यादा दिक्कत भी यहीं है। HDFC बैंक खराब नतीजों के बाद 52-हफ्ते के निचले स्तर पर जाने को तैयार दिख रहा है। ICICI बैंक में अच्छे नतीजों पर भी बड़ा पॉजिटिव रिएक्शन नहीं देखने को मिला है। SBI में नतीजों से पहले का डर और SBI फंड्स की फीकी लिस्टिंग का असर दिख रहा है। इसके अलावा डॉलर-रुपया,बॉन्ड यील्ड और कच्चा तेल सब मैक्रो निगेटिव हैं।
IT की रैली फिर हुई फेल
IT की रैली फिर फेल हो गई है। यह दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है जहां रैली फिर फेल होती दिख रही है। IT में रैली कोस्पी और चिप शेयरों में गिरावट से हुई थी। 2-3 दिनों से फिर AI रैली शुरू हुई है। मंगलवार को गैपअप पर हमने IT में मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। फार्मा पर ट्रंप की नजर लग गई है।
यह बड़ा सेक्टर नहीं है लेकिन कम से कम चल तो रहा था। यहां डॉनल्ड ट्रंप की नजर लग गई और कल एक्सीडेंट हो गया। कल बहुत लोगों ने कहा ये न्यूट्रल है,इसका कोई असर नहीं होगा। सिर्फ CNBC-आवाज़ ने नजरिया लिया कि एक बार तो शेयर गिरेंगे। आज डॉ रेड्डीज के खराब नतीजों का भी असर दिखेगा। अब सिर्फ ऑटो,FMCG जैसे कुछ सेक्टर्स हैं जहां लोग चुप रहे हैं।
बाजार: आज के घरेलू संकेत
आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का दिन है। आमतौर पर वीकली एक्सपायरी ऑप्शन राइटर्स की रेंज में होती हैं। इसके अलावा आज नतीजों के लिहाज से काफी बड़ा दिन है। इनमें से इंफोसिस के नतीजे सबसे अहम होंगे। अगर इंफोसिस की कमेंट्री खराब हुई तो IT फिर टूटेगा। लेकिन अगर इंफोसिस ने पॉजिटिव बोला तो शायद रैली फिर शुरू हो जाए।
बाजार: क्या हो रणनीति?
अगर शॉर्ट नहीं कर सकते तो ये बाजार आपके लिए नहीं है। इस बाजार में परमा बुल (Perma Bull)पैसा नहीं बना पाएगा। बाजार में दोनों तरफ के मौके हैं। लेकिन रेंज के सिरे में जब खड़े हों तो सावधान होना होगा, जैसे अब आज शायद शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की हो। मोटा-मोटी हम 23,800-24,300 की रेंज में रहे हैं। अभी कुछ समय हमें शायद इसी रेंज में ऑपरेट करना हो। लेकिन स्टॉक स्पेसिफिक मौके अभी भी हैं और ये बाजार अच्छे नतीजों को रिवॉर्ड कर रहा है। सबसे बड़ा उदाहरण था बजाज ऑटो। अगर आपने मंगलवार को टॉप पर भी लिया,तब भी कल बड़ा पैसा बना। मगर बाजार में निराश करने की जगह नहीं है। कल इसका सबसे बड़ा उदाहरण था बंधन बैंक। बाजार में नतीजों पर रिएक्शन बड़े खतरनाक आ रहे हैं। आज का सबसे मजेदार शेयर होगा OFSS। कल शेयर औंधे मुंह गिरा लेकिन नतीजे शानदार हैं। मगर साथ ही OFSS के MD & CEO का इस्तीफा निगेटिव भी है।
निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए सबसे अहम सपोर्ट जोन 23,800-23,850 है। स्क्रीन बता रही है कि एक ना एक बार तो ये सपोर्ट जोन टेस्ट होगा। अगर ये लेवल बचा तो रिकवरी आ सकती है। मगर ये टूटा तो 23,600-23,700 का रिस्क होगा। पहला रजिस्टेंस 24,000-24,050 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,150-24,250 पर है।
बैंक निफ्टी पर रणनीति
बैंक निफ्टी के लिए अब 56,600-56,800 मेक ऑर ब्रेक जोन है। 56,800 पर 50 DEMA और 56,600 पर 100 DEMA है। अगर ये लेवल्स टूटे तो 56,000 भी टूटने का रिस्क रहेगा। बैंक निफ्टी में किसी भी रैली में भरोसा नहीं है क्योंकि सबसे बड़े शेयर चलने को तैयार नहीं हैं। ICICI बैंक,HDFC बैंक या SBI में से किसी को बड़ी लीडरशिप लेनी पड़ेगी। बैंक निफ्टी में जहां रिकवरी फेल हो,वहां बेचने पर पैसा बन रहा है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market Trend : ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच 23 जुलाई को भारतीय इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। मेटल शेयरों को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर में बिकवाली के कारण निफ्टी 23900 के करीब ट्रेड कर रहा है। निफ्टी पर एटरनल,टाटा कंज्यूमर,ONGC,बजाज ऑटो और कोल इंडिया में बढ़त दिख रही है। जबकि डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,इंटरग्लोब एविएशन,इंफोसिस,टाटा स्टील और सिप्ला में गिरावट नजर आ रही है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं।
निफ्टी ट्रेंड
ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि कल का सेशन काफी खराब रहा। लेकिन यह बात ध्यान रखने की है कि पिछले दो दिनों की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप का पार्टिसिपेशन नहीं था। छोटे-मझोले शेयरों में काफी अच्छा मोमेटम देखने को मिला था। लेकिन कल की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप में भी प्रेशर देखने को मिला। क्रूड का दाम बढ़ने से बाजार का मूड खराब हुआ है। साथ ही ट्रंप टैरिफ का वापस आना भी मार्केट का सेंटीमेंट खराब कर रहा है। ऐसे में अगर निफ्टी 23,800 के नीचे जाता है तो पोजीशन से निकल जाना चाहिए। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर है एग्जिट की सलाह नहीं होगी। निफ्टी में 23,800 का स्टॉप लॉस होना चाहिए। उसके नीचे जाने पर ही ट्रेंड क्लियरली नेगेटिव होगा। इसके बाद निफ्टी 23,400 तक फिसल सकता है। अपसाइड में निफ्टी के लिए 24,300-24,250 पर रेजिस्टेंस है। ऐसे में लगता है कि अगले कुछ दिन निफ्टी 23,800-24,300 के दायरे में ट्रेड करता दिख सकता है।
बैंक निफ्टी ट्रेंड
जहां तक बैंक निफ्टी की बात है तो यह थोड़ा ज्यादा वीक है। HDFC बैंक इस कमजोरी को लीड कर रहा है। क्रूड का बढ़ना भी बैंक निफ्टी को काफी परेशान करता दिख रहा है। बैंक निफ्टी के लिए 56,700 के आसपास एक माइनर सपोर्ट है। अगर 56,700 का लेवल टूटता है तो बैंक निफ्टी मार्केट को और नीचे लो जा सकता है। ऐसे में आपको बैंक निफ्टी 56,700 पर स्टॉप लॉस लगाना है। अगर दोनों में से किसी में लॉन्ग पोजीशंस बनानी है तो निफ्टी ज्यादा बेहतर रहेगा।
अरुण कुमार मंत्री के पसंदीदा शेयर
अरुण कुमार मंत्री का कहना है कि इस समय उनको दो स्टॉक काफी अच्छे लग रहे हैं। दोनों ही काफी अच्छे मोमेंटम है। इनमें से पहला है नेस्ले इंडिया। कल इसका रिजल्ट आया था। रिजल्ट के बाद एक क्लियर ब्रेकआउट है। इसमें डेली चार्ट पर कप एंड हैंडल का ब्रेकआउट देखने को मिला है। इस स्टॉक को 1497 के आसपास खरीदना है। 1472 रुपए का स्टॉप लॉस लगाएं। शॉर्ट टर्म में 1555 रुपए तक के टारगेट मिल सकते हैं। दूसरा स्टॉक थोड़े बड़े टिकट साइज का है। लेकिन इसमें मोमेंटम नजर आ रहा है। यह शेयर है BOSCH जिसमें 41550 रुपए के आसपास, 41020 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 42300 रुपए तक के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। दोनों ही स्टॉक्स आप दो से तीन दिन के लिए बाय करके चल सकते हैं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Asian Markets Today: एशियाई बाजारों में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है । निक्केई 1 फीसदी तो कोस्पी में 4% का उछाल आया। वहीं अमेरिकी INDICES में ऊपरी स्तरों से दबाव दिखा। नैस्डैक में करीब आधे परसेंट की गिरावट रही। डाओ जोंस और S&P फ्लैट बंद हुए ।
सुबह 8.10 बजे के आसपास निक्केई करीब 0.42 फीसदी की बढ़त के साथ 66,395.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.51 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 0.14 फीसदी गिरकर 44,794.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.20 फीसदी की बढ़त के साथ 25,192.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 1.62 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट फ्लैट कारोबार कर रहा।
वॉल स्ट्रीट
US स्टॉक मार्केट बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ, क्योंकि इन्वेस्टर्स ज़रूरी अर्निंग्स रिपोर्ट्स का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि मिडिल ईस्ट में हाल की दुश्मनी ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी थी।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 6.06 पॉइंट्स या 0.01% गिरकर 52,218.58 पर आ गया, जबकि S&P 500 10.24 पॉइंट्स या 0.14% गिरकर 7,498.96 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 146.30 पॉइंट्स या 0.57% गिरकर 25,690.90 पर बंद हुआ।
एनवीडिया के स्टॉक प्राइस में 2.30% की बढ़ोतरी हुई, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.86% गिरे, अल्फाबेट के शेयर 1.24% गिरे, मेटा प्लेटफॉर्म्स 2.58% गिरा, एप्पल के स्टॉक प्राइस में 0.56% की कमी आई, सुपर माइक्रो कंप्यूटर के स्टॉक प्राइस में 19.84% की बढ़ोतरी हुई, डेल टेक्नोलॉजीज के शेयर प्राइस में 9.3% की बढ़ोतरी हुई, टेस्ला के स्टॉक प्राइस में 1.30% की गिरावट आई और स्पेसएक्स के शेयर प्राइस में 6.70% की गिरावट आई।
US-ईरान युद्ध
US मिलिट्री ने ईरान की मिलिट्री सरकार और इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स को निशाना बनाकर एक और रात हमले किए, जबकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान युद्ध खत्म करने के लिए एक डील करना चाहता है, लेकिन उन्हें लगता है कि इस्लामिक रिपब्लिक अभी इसके लिए ‘तैयार’ नहीं है। इस बीच, ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ब्लॉक करना और उन्हें टारगेट करना जारी रखे हुए है।
टेस्ला Q1 अर्निंग्स
टेस्ला इंक. ऑटो सेल्स के अच्छे क्वार्टर के बावजूद वॉल स्ट्रीट के प्रॉफिट एस्टीमेट से चूक गई। एलन मस्क की इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनी ने दूसरी तिमाही में $1.1 बिलियन का प्रॉफिट बताया, जो पिछले साल के लेवल से लगभग 5% कम है। यह एनालिस्ट के 53 सेंट प्रति शेयर के एस्टीमेट की तुलना में 33 सेंट प्रति शेयर रहा। कंपनी का रेवेन्यू YoY 26% बढ़कर $28.2 बिलियन हो गया।
टेस्ला ने दो साल से ज़्यादा समय में अपने पहले नेगेटिव फ्री कैश फ्लो की भी रिपोर्ट दी, जिसमें $1.09 बिलियन खर्च हुए।
क्रूड ऑयल प्राइसेस
क्रूड ऑयल प्राइसेस छह हफ़्तों से ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.58% बढ़कर $95.56 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड बुधवार को लगभग 3% बढ़ने के बाद 1.30% बढ़कर $87.96 प्रति बैरल हो गया।
आज का सोने का रेट
गिरावट में खरीदारी के कारण सोने की कीमतों में बढ़त बनी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.1% बढ़कर $4,133.82 प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमतें $59.75 प्रति औंस पर स्थिर रहीं।
डॉलर
सेफ-हेवन डिमांड के कारण डॉलर काफी हद तक स्थिर रहा, जबकि येन 40 साल के निचले स्तर के पास रहा। डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो सहित कई करेंसी के मुकाबले ग्रीनबैक को मापता है, 101.11 पर फ्लैट रहा। यूरो 0.02% बढ़कर $1.1412 पर था। ब्रिटिश स्टर्लिंग का आखिरी ट्रेड $1.3373 पर हुआ।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
US-Iran war: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार 23 जुलाई को 1.5 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया। भाव 95 डॉलर के पार निकलकर 6 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है। तेल में यह तेजी अमेरिका के ईरान पर नए हमले किए जाने और यमन के हूथी विद्रोहियों के लाल सागर में तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद देखा गया है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.93, यानी 2% बढ़कर $96 प्रति बैरल हो गया, जो 8 जून के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। पिछले सेशन में बेंचमार्क $94.07 पर बंद हुआ था, जो $3 से ज़्यादा और छह हफ़्ते के सबसे ऊंचे लेवल से थोड़ा नीचे था।
इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $1.44, या 1.7% बढ़कर $88.27 प्रति बैरल हो गया, जिससे बुधवार की लगभग 3% की तेज़ी और बढ़ गई।
अमेरिका की सेना ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 12वीं रात हमला किया। यह तब हुआ जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कसम खाई थी कि जब भी तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ पर हमला करेगा, तो वे ईरानी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएंगे, जिससे लड़ाई और बढ़ गई।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में एक माइन वाले रास्ते से गुज़रने की कोशिश करते समय एक तेल टैंकर में धमाका होने के बाद आग लग गई। उन्होंने यह भी कहा कि दो और टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। गार्ड्स ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उनके कंट्रोल में है और जब तक इस इलाके में US मिलिट्री ऑपरेशन जारी रहेंगे, यह “पूरी तरह से बंद” है, उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोऑर्डिनेशन के बिना किसी भी जहाज़ को अंदर आने या बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
यह लड़ाई होर्मुज स्ट्रेट से भी आगे बढ़ गई है, ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के ज़रिए सऊदी तेल ले जाने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी है और सऊदी अरब की नेवल नाकाबंदी की घोषणा की है।
हूतियों ने कहा कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए हैं, जबकि समुद्री सुरक्षा रिपोर्टों से पता चला है कि ग्रुप द्वारा पहचाने गए जहाजों में से एक, सऊदी झंडे वाला टैंकर एनसेलिया, लाल सागर में टकरा गया था।
ग्रुप ने यह भी दावा किया कि उसने जहाजों को सऊदी पोर्ट्स पर जाने से रोकने की चेतावनी देने के बाद लगभग 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया था। हालांकि, रॉयटर्स इस दावे को अलग से वेरिफ़ाई नहीं कर सका।
लाल सागर में हूथी ब्लॉकेड और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते में माइनिंग की गई है, ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच, एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, पिछले हफ़्ते अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 2 मिलियन बैरल बढ़ गया। यह बढ़ोतरी तब हुई जब रिफाइनरी एक्टिविटी धीमी हो गई, कच्चे तेल का एक्सपोर्ट कम हो गया और इंपोर्ट बढ़ गया, जो रॉयटर्स पोल में एनालिस्ट्स की 1.1 मिलियन बैरल की कमी की उम्मीदों के उलट था।
आगे कहां तक जाएगी कीमतें
कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च, कायनात चैनवाला के अनुसार, बैकवर्डेशन भी गहरा गया है, जिसमें प्रॉम्प्ट-टू-सेकंड-महीने का स्प्रेड $3 तक बढ़ गया है, जो दिखाता है कि शॉर्ट-टर्म अवेलेबिलिटी की चिंताएं लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स से ज़्यादा हैं।
चैनवाला ने कहा, “होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी सभी एक साथ रुकावट के सिग्नल दे रहे हैं, फिजिकल सप्लाई में अभी तक कोई खास कमी नहीं आई है, लेकिन रिस्क प्रीमियम तेज़ी से बढ़ रहा है। इन चोकपॉइंट्स पर कोई भी नई बढ़ोतरी आने वाले सेशन में $100 ब्रेंट का रास्ता बना सकती है।”
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ऑयल $85 के निशान से ऊपर पॉजिटिव बायस के साथ ट्रेड कर रहा है, जिसे चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन का सपोर्ट है।
पोनमुडी ने कहा, “तुरंत रेजिस्टेंस $86.5–$87 पर है, उसके बाद $88–$88.5 ज़ोन है। नीचे की तरफ, तुरंत सपोर्ट $84.5–$84 पर दिख रहा है, और इस लेवल से नीचे जाने पर कीमतें $82 के निशान तक जा सकती हैं। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से अगला डायरेक्शनल मूव तय होने की संभावना है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।
ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) July 22, 2026
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।
इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।
CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।
फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।
रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”
रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”
बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।
उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”
अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।
यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।
तेल की कीमतों में उछाल
बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।
ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।
ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”
Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार में बढ़ी खरीदारी की वजह से सोना ₹1,900 चढ़कर ₹1,49,600 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह करीब दो हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर है।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, मंगलवार को सोना ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इससे पहले 7 जुलाई को इसकी कीमत ₹1,49,250 प्रति 10 ग्राम थी।
चांदी ने भी लगाई लंबी छलांग
चांदी ने लगातार छह दिन की गिरावट पर ब्रेक लगा दिया। इसकी कीमत ₹8,500 बढ़कर ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई। एक दिन पहले यह ₹2,21,500 प्रति किलो पर बंद हुई थी।
सोना-चांदी में तेजी क्यों आई?
बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में लगातार तीसरे दिन तेजी आई है। इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है। विदेशी बाजार में मजबूती रही। घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ी। हाल की गिरावट के बाद निवेशकों ने भी खरीदारी का मौका देखा।
HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेत और फिजिकल डिमांड बढ़ने से सोना दो हफ्ते के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि गोल्ड ETF में दोबारा निवेश बढ़ने से भी बाजार को सहारा मिला है।
ग्लोबल मार्केट में क्या हो रहा है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.16% बढ़कर 4,125.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 1% चढ़कर 59.32 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।
Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला ने बताया कि कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 4,140 डॉलर प्रति औंस के दो हफ्ते के उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं, चांदी भी 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद दोनों कीमती धातुओं में मजबूती बनी हुई है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत की गुंजाइश तो है, लेकिन फिलहाल ईरान गंभीर नहीं दिख रहा। इसलिए निवेशक इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं।
वहीं, Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि सोने को तीन चीजों से सहारा मिल रहा है। पहली, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद। दूसरी, ट्रंप प्रशासन की ओर से फिर टैरिफ लगाने की शुरुआत। तीसरी, सोने का 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहना।
अब बाजार की नजर अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी। ब्याज दरों को लेकर जो संकेत मिलेंगे, वही आगे सोना और चांदी की चाल तय करेंगे।
*एजेंसी इनपुट के साथ
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Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय दवा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगर यह योजना लागू होती है तो 2029 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लग सकता है। हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अभी सरकार का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
ट्रंप का पूरा प्लान क्या है?
21 जुलाई को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
इसके बाद अगस्त 2028 से 100% टैरिफ लागू होगा। फिर अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। ट्रंप चाहते हैं कि दवा कंपनियां अपनी फैक्टरी अमेरिका में लगाएं। इसी मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है।
ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?
यह फैसला अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत दवा उत्पादन को दोबारा अपने देश में लाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
इसी वजह से अमेरिका अब दवा कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।
भारत की कंपनियों पर कितना असर पड़ेगा?
भारत हर साल अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं भेजता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का होता है। अमेरिका में बिकने वाली करीब 40% से 50% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां सप्लाई करती हैं।
फिलहाल भारतीय कंपनियों की कमाई पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। उनके पास करीब दो साल का समय है। इस दौरान वे अमेरिका में निवेश बढ़ा सकती हैं, सप्लाई चेन बदल सकती हैं या किसी राहत के लिए बातचीत कर सकती हैं। वैसे भी भारत की कई बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से प्लांट हैं।
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अभी यह साफ नहीं है कि टैरिफ सिर्फ तैयार दवाओं पर लगेगा या फिर API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) पर भी लागू होगा। अगर API भी दायरे में आया तो कंपनियों की लागत और मुनाफे पर ज्यादा असर पड़ सकता है। इसलिए इंडस्ट्री अंतिम नियमों का इंतजार कर रही है।
एक्सपर्ट क्या मानते हैं?
Mirae Asset Sharekhan के रिसर्च एनालिस्ट थॉमस वी. अब्राहम का कहना है कि बाजार अभी अंतिम नियमों का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत की ज्यादातर बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। ऐसे में दो साल का समय नई शर्तों के हिसाब से खुद को तैयार करने के लिए काफी हो सकता है।
वहीं, Indian Pharmaceutical Alliance के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चला रही हैं। इससे वहां रोजगार भी मिलता है और दवाओं की सप्लाई चेन मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री दोनों देशों की सरकारों के साथ बातचीत जारी रखेगी।
दूसरी ओर, Entod Pharmaceuticals के CEO निखिल मसूरकर का मानना है कि भारतीय दवा कंपनियों को अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें मध्य पूर्व, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों में भी तेजी से विस्तार करना चाहिए।
दबाव बनाने की रणनीति?
कुछ एनालिस्टों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह ऐलान भारत के साथ बेहतर ट्रेड डील कराने के लिए दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका में 90% से ज्यादा प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं। अगर इन पर 200% टैरिफ लगा तो दवाएं महंगी हो जाएंगी। इसका बोझ अमेरिकी मरीजों पर पड़ेगा। चुनावी माहौल में यह फैसला ट्रंप के लिए भी आसान नहीं होगा।
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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

