Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे फिसला है। FIIs की कैश और वायदा दोनों में भी बिकवाली दिखी। इधर एशिया में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। US INDICES भी कल ऊपरी स्तरों से फिसले।

इस बीच ईरान पर लगातार 10वें दिन अमेरिकी अटैक जारी है। ईरान का भी पड़ोसी देशों पर जवाबी हमला जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा-अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी। इधर हॉर्मूस के बाद अब बाब-अल-मंदेब फ्रंट भी खुला। हूती विद्रोहियों ने RED SEA में सऊदी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई। वहीं क्रूड 88 डॉलर के पार निकला है।

FIFA World Cup Final में जबरन स्टेज पर खड़े रहे डोनाल्ड ट्रंप, हूटिंग का VIDEO हुआ वायरल

FIFA World Cup 2026 का फाइनल Spain की ऐतिहासिक जीत के साथ खत्म हुआ, लेकिन मैच के बाद Trophy Ceremony में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। Spain ने Extra Time में Argentina को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, लेकिन विजेता टीम के जश्न के बीच US President Donald Trump की मौजूदगी सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई। स्टेडियम में उनके लिए हूटिंग हुई और ट्रॉफी सौंपने के बाद उनका मंच पर रुकना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

 

New York New Jersey Stadium में खेले गए रोमांचक फाइनल में दोनों टीमें 90 मिनट तक गोल नहीं कर सकीं। मुकाबले का इकलौता गोल Ferran Torres ने Extra Time के 106वें मिनट में दागा, जिसने Spain को 1-0 की यादगार जीत दिलाई।

 

Argentina के लिए मैच और मुश्किल तब हो गया जब Enzo Fernandez को दूसरे येलो कार्ड के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। अंतिम क्षणों में तनाव इतना बढ़ गया कि खिलाड़ियों के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली। इसके साथ ही Lionel Messi का लगातार दूसरा World Cup जीतने का सपना भी टूट गया।

Donald Trump की एंट्री पर स्टेडियम में गूंजी हूटिंग

 

फाइनल देखने पहुंचे Donald Trump ने FIFA President Gianni Infantino के साथ मिलकर खिलाड़ियों को मेडल और विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपी। जैसे ही Trump मैदान पर पहुंचे, स्टेडियम के कई हिस्सों से तेज हूटिंग और सीटी की आवाजें सुनाई दीं।

 

हालांकि समारोह आगे बढ़ता रहा और Trump ने Spain के कप्तान Rodri को World Cup Trophy सौंपी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वही पूरी रात की सबसे चर्चित घटना बन गया।

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Trophy देने के बाद स्टेज पर ही खड़े रहे Trump

 

ट्रॉफी सौंपने के बाद जहां Gianni Infantino मंच से हट गए, वहीं Donald Trump विजेता खिलाड़ियों के बीच ही खड़े रहे। Spain के खिलाड़ी Trophy Lift की तैयारी कर रहे थे, लेकिन Trump कुछ देर तक वहीं मुस्कुराते हुए खिलाड़ियों से हाथ मिलाते और तालियां बजाते नजर आए।

 

बताया जाता है कि इसके बाद Gianni Infantino दोबारा उनके पास पहुंचे और उन्हें धीरे से मंच से हटने का इशारा किया। कुछ क्षण बाद Trump मंच के किनारे चले गए, जिसके बाद Rodri ने अपने साथियों के साथ World Cup Trophy उठाई और Spain का ऐतिहासिक जश्न शुरू हुआ।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

 

पूरी Trophy Ceremony के वीडियो कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में Trump की एंट्री के दौरान हुई हूटिंग चर्चा का विषय बनी, जबकि दूसरे वीडियो में उनके Trophy Lift के दौरान मंच पर खड़े रहने को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।

 

कई यूजर्स ने इसे पिछले साल हुए FIFA Club World Cup से भी जोड़कर देखा, जब Chelsea की जीत के बाद भी Donald Trump खिलाड़ियों के साथ मंच पर कुछ देर तक मौजूद रहे थे। इस बार हालांकि Trophy Lift से पहले उन्हें मंच से हटते हुए देखा गया।

 

पहले भी विवादों में रह चुके हैं Donald Trump

 

World Cup 2026 के दौरान Donald Trump पहले भी सुर्खियों में आ चुके हैं। उन्होंने एक बयान में दावा किया था कि उन्होंने Gianni Infantino से बात कर USA के खिलाड़ी Folarin Balogun का Red Card हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद भी काफी विवाद हुआ था।

 

अब World Cup Final की Trophy Ceremony ने Donald Trump को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। Spain की ऐतिहासिक जीत के साथ-साथ Trophy Presentation का यह पल भी लंबे समय तक फुटबॉल प्रशंसकों के बीच याद किया जाएगा। 

 

US Iran War News: क्या ईरान ने अमेरिका के सामने किया सरेंडर? ट्रंप के मंत्री ने तेहरान से बातचीत के दिए संकेत

US Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कई माध्यमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। CNN से बातचीत में रुबियो ने कहा, “हमें कई चैनलों के जरिए ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वहां की सत्ता और नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे को लेकर विभाजन भी बढ़ रहा है।”

सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीति के संकेत

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

इससे पहले भी रुबियो ने आरोप लगाया था कि ईरान क्षेत्रीय संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से भी वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजरानी की सुरक्षा के लिए अधिक सहयोग देने की अपील की।

दुनिया के देशों से सहयोग की अपील

फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अमेरिका समुद्री रूट्स की सुरक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। लेकिन अन्य देशों को भी उपकरण, संसाधन और आर्थिक सहयोग देकर इस जिम्मेदारी में भागीदारी करनी चाहिए।

लगातार नौवीं रात अमेरिकी हमले

ईरान पर अमेरिकी हमलों का सिलसिला लगातार नौवीं रात भी जारी रहा। ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई धमाके हुए। इसके अलावा मौजूदा अभियान के दौरान पहली बार उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज (Tabriz) में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सैन्य अभियान का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है।

ट्रंप बोले- फिर किया जोरदार हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा हमलों के बाद कहा कि यह कार्रवाई उन तीन महान देशभक्तों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ‘फीफा क्लब विश्व कप’ फाइनल से वॉशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर बहुत जोरदार हमला किया।”

बातचीत का रास्ता अब भी खुला

हालांकि, सैन्य संघर्ष लगातार तेज हो रहा है, लेकिन मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं, और यदि ईरान वार्ता के लिए आगे आता है तो अमेरिका उस विकल्प पर भी विचार करने को तैयार है।

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Iran Kuwait Conflict: ईरान के हमले से कुवैत के पावर प्लांट में लगी भीषण आग, अमेरिका ने भी तेज किए वार। देखें वीडियो

Iran Kuwait Conflict: कुवैत में रविवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब ईरान ने अल-सुबिया पावर जनरेशन और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। बता दें कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका ने लगातार नौवीं बार रात को ईरान के ठिकानों पर हमले किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अल-सुबिया प्लांट से उठता हुआ काला धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। ये वीडियो ओपन सोर्स इंटेल समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा शेयर किए गए हैं।

वहीं, ईरान के इस हमले पर कुवैत की सेना ने कहा कि उन्होंने दिन भर देश के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोनों को रोका।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा, “आज सुबह से ही सशस्त्र बलों ने कुवैत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाया है, जिन्हें रोककर बेअसर कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि “ईरान की निंदनीय आक्रामकता देश में आम नागरिकों और जरूरी सुविधाओं को निशाना बना रही है।” उन्होंने बताया कि बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े कुछ ठिकानों पर हमले किए गए, जिससे वहां आग लग गई और भारी नुकसान हुआ।

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ नए दौर के हमलों की घोषणा की। CENTCOM ने X पर कहा, “उसने आज शाम 7 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात नए हमले शुरू किए। ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना जारी रखेंगे जिनका इस्तेमाल होर्मुज (Strait Of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।”

मरीन वन से रवाना होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले उस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में किए गए थे।

ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर जोरदार हमला किया।” उन्होंने बताया कि ये हमले हाल के दिनों में मध्य पूर्व में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों के “सम्मान में” किए गए थे।

बता दें कि यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है, जब इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी कुवैत के बिजली और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमलों की खबर सामने आई थी।

कुवैत, जो अपनी पानी की सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) पर निर्भर है, तेहरान द्वारा खाड़ी देश में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से जुड़ी सुविधाओं को संभावित टारगेट के तौर पर पहचाने जाने के कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव में फंसता जा रहा है।

यह तनाव ऐसे समय और गहरा गया है, जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों ने क्षेत्र में ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

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Top News 20 July: संसद का मानसून सत्र, CJP का संसद मार्च, स्पेन बना फीफा वर्ल्ड चैंपियन

top news 20 july

Top News 20 July : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च आज, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति। ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता। इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत और 27 रनों से हराया। 20 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

आज से संसद का मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। चढ़ावा चोरी, नीट परीक्षा आदि मामलों पर संसद में हंगामा हो सकता है। राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला 'वंदे मातरम बिल' समेत पांच नए विधेयक भी इस सत्र में पेश होने जा रहे हैं। DMK ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए।

 

CJP का संसद मार्च

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारी आज संसद मार्च करेंगे। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी है। राष्‍ट्रीय राजधानी में धारा 163 लागू। लिहाजा, जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है।  

 

रूस पर शिकंजे वाले बिल में ईरान भी!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। यह विधेयक रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान करता है। इनमें भारत भी शामिल है।

 

स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता

स्पेन ने अर्जेंटीना के 1-0  से हराकर दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। स्पेन ने इससे पहले 2010 में फीफा विश्‍व कप जीता था। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा गोल फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 10 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट अपने नाम किया। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल

 

27 रनों से जीता इंग्लैंड

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर भारत के खिलाफ 27 रनों से जीत पाकर 3 मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। इसके जवाब में भारत की टीम रोहित शर्मा के शतक के बावजूद 360 रन ही बना सकी। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल

Iran-US War: जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला, 2 की मौत, बौखलाए ट्रंप ने ईरान को तबाह करने के दिए आदेश; कई शहरों पर भीषण बमबारी से हड़कंप

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने अब बेहद खतरनाक रूप ले लिया है। दोनों और भीषण हमले जारी है। ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। ईरान की इस कार्रवाई से अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप गुस्से में लाल हो गए

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ईरान पर अमेरिका का चौतरफा अटैक! 6 घंटे तक आसमान और समंदर से बरसे बम, बिजली और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पूरी तरह तबाह

US strikes Iran port and bridge: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है। शुक्रवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर भीषण हमले किए। अमेरिका ने जहां ईरान के मुख्य बंदरगाहों और आंतरिक परिवहन संपर्कों (पुलों) को तबाह करने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें दागी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ यह युद्ध अब पांचवें महीने में प्रवेश कर चुका है। दोनों ओर से लगातार हो रही बमबारी के कारण वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। आइए आपको बताते हैं कि पिछले 24 घंटों में युद्ध के मैदान में क्या-क्या हुआ है.

अमेरिकी सेना का ‘नावल ब्लॉकेड’ और 6 घंटे की भीषण बमबारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9:30 बजे (ET) तक ईरान पर चौतरफा हमले किए गए. अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और युद्धपोतों ने ईरान के सर्विलांस ठिकानों, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, भूमिगत हथियार डिपो और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया।

राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से ‘नावल नाकेबंदी’ कर रही है। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई और समुद्री ऑपरेशन चलाया।

जवाब में ईरान का मिसाइल हमला, कुवैत और कतर निशाने पर

अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने खाड़ी के उन देशों पर मिसाइलें दागीं जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। तेहरान ने कतर जो इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है और कुवैत पर मिसाइलें बरसाईं। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस मिसाइल हमले में उनके देश के एक बड़े ‘डिटेसिनेशन प्लांट’ यानी खारे पानी को पीने लायक बनाने वाली फैसिलिटी को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

चाबहार पोर्ट और बंदर खमीर के रणनीतिक पुलों को किया तबाह

इस ताजा हमले में अमेरिका ने ईरान की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को निशाना बनाया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में चाबहार बंदरगाह पर स्थित एक बड़ा टावर मलबे में तब्दील हो गया।

बता दें कि चाबहार पोर्ट को भारत की मदद से विकसित किया गया था और यह अफगानिस्तान के लिए एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। अमेरिका का दावा है कि इस टावर का इस्तेमाल ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) जहाजों की जासूसी के लिए कर रही थी।

दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में तटीय शहर बंदर खमीर के पास बने प्रमुख पुलों को अमेरिकी हवाई हमलों में उड़ा दिया गया। इसका मकसद ईरान के सबसे बड़े वाणिज्यिक बंदरगाह ‘बंदर अब्बास’ का संपर्क राजधानी तेहरान और देश के अंदरूनी हिस्सों से पूरी तरह काटना है।

युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार ईरान ने स्वीकार किया है कि उसके पावर ग्रिड (बिजली नेटवर्क) को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण दक्षिणी प्रांतों में ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है।

दोनों तरफ भारी तबाही, अब तक सैकड़ों मौतें

शुक्रवार को हुए इन ताजा हमलों में दोनों पक्षों के सैन्य और नागरिक हताहत हुए हैं:

ईरान में नुकसान: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ताजा हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक घायल हुए हैं. केवल पुल पर हुए हमले में 8 लोगों की जान गई।

अमेरिका को नुकसान: पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस हफ्ते सोमवार से अब तक 13 और अमेरिकी सैनिक (10 थल सेना और 3 नौसेना कर्मी) घायल हुए है। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 14 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 427 घायल हुए हैं।

Silver outlook: ₹5000 सस्ती हुई चांदी, क्या कीमतों में आने वाली है और बड़ी गिरावट, जानें क्या कहते है बाजार जानकार

Silver Outlook: घरेलू और इंटरनेशनल दोनों ही बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में सोना जहां 4 महीनें के निचले स्तरों पर पहुंचा है। वहीं चांदी $56 के नीचे फिसली है। शुक्रवार को फ्यूचर ट्रेड में चांदी की कीमतें 1,258 रुपये गिरकर 2,14,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट 1,258 रुपये या 0.58 प्रतिशत गिरकर 2,14,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,563 लॉट का कारोबार हुआ।

वहीं COMEX पर चांदी की कीमतें 0.63% गिरकर $55.83 प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही हैं। चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल है और ग्लोबल टेक शेयरों में आई गिरावट का इस पर असर देखा जा रहा है। भारत में चांदी की कीमत में आज 2.3% की बड़ी गिरावट आई है और यह 2,15,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। कल चांदी की कीमत प्रति किलो 2.20 लाख रुपये थी। यानी कि कल के मुकाबले आज चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई है।

मजबूत डॉलर कर रहा परेशान

इस बीच, शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.78 हो गया, जिससे विदेशी करेंसी में खरीदारों के लिए बुलियन महंगा हो गया। कच्चे तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल के करीब ट्रेड करती रहीं।

यूएस- ईरान तनाव और क्रूड बढ़ा रही चिंता

सोने और चांदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती US-ईरान तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और महंगाई का डर फिर से बढ़ गया है, जिससे आने वाले समय में US फेडरल रिजर्व द्वारा रेट बढ़ाने का डर बढ़ गया है।

US फेडरल रिजर्व के चेयर वार्श ने 14 जुलाई और 15 जुलाई को US हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी और सीनेट बैंकिंग कमेटी के सामने अपनी पहली गवाही में दोहराया कि कीमतों में स्थिरता सेंट्रल बैंक का मुख्य मकसद है। उन्होंने जून की उम्मीद से कम रीडिंग को सिर्फ़ एक डेटा पॉइंट बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 63 महीनों से महंगाई फेडरल रिजर्व के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर रही है।

फेड गवर्नर वॉलर ने बढ़े हुए कोर CPI का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा था कि सेंट्रल बैंक को रेट बढ़ाने की ज़रूरत है क्योंकि महंगाई अभी भी ज़्यादा है। वहीं न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने बुधवार को कहा कि महंगाई अभी भी ज़्यादा है, लेकिन उनका मानना ​​है कि यह अपने पीक पर पहुच गई है और 2028 तक बैंक के टारगेट को पूरा कर लेगी। उन्होंने आगे कहा कि अभी के रेट सही जगह पर हैं।

क्या आगे कीमतों में दिखेगा दबाव

Kedia Advisory के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि आनेवाले 10-12 दिन सोने -चांदी की कीमतों के लिए काफी अहम होंगे। क्योंकि बाजार उम्मीद लगा रहा है कि सितंबर होने वाली फेड मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। चांदी  में टेक्निकली $50 प्रति औंस का सपोर्ट दिख रहा है। मेरा मानना है कि $53- 54 प्रति औंस एक सेफ जोन है। जिसके चलते एग्रेसिव होकर बिकवाली की राय नहीं होगी। हमारी सलाह है कि अगस्त में चांदी में एक्यूमुलेशन के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए।हालांकि कच्चा तेल, जियोपॉलिटिकल टेंशन और महंगाई की चिंता चांदी के लिए थोड़ी क्रिटिकल हो सकती है।

इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, “मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे महंगाई का दबाव और ब्याज दरों की चिंताएं सबसे ऊपर हैं, इसलिए सोना गिर रहा है।”

त्रिवेदी ने बताया, “US ने इस हफ़्ते ईरान पर कई हमले किए, जबकि ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि US देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। ईरान ने पड़ोसी देशों में US के ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया, जिससे तनाव और बढ़ने और इलाके से एनर्जी सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की आशंका बढ़ गई।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन को उम्मीद है कि आज सोने और चांदी की कीमतें ऊपर-नीचे रहेंगी। उनका कहना है कि आज के MCX पर सोने को $3,955 और $3,910 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,034 और $4,080 प्रति ट्रॉय औंस पर है, और चांदी को $55.50 और $54.40 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $57.50 और $58.80 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

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Tariff on Russia Oil: भारत-चीन को ट्रंप दे सकते हैं बड़ा झटका, रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ वाले बिल को अमेरिका के 60 सीनेटर्स ने किया समर्थन

US Tariff on India-China: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अब अमेरिका बड़ा एक्शन लेने जा रहा है। अमेरिकी संसद (सीनेट) में पेश किए गए 100 फीसदी तक का भारी टैरिफ वाले बिल को भारी समर्थन मिल रहा है। अमेरिका के 60 से ज्यादा सांसदों ने इस बिल को सपोर्ट किया है। अमेरिकी राष

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US Visa Rules Tightened: अमेरिकी वीजा नियमों में भारी बदलाव, विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए क्या बदलेगा यहां जानिए

US Visa Rules: ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, कल्चरल एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए वीजा की अवधि को कड़ा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के एक नए फाइनल रूल के तहत अब अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए F वीजा, कल्चरल एक्सचेंज विजिटर्स के तहत अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले J वीजा और मीडिया कर्मियों के लिए I वीजा के लिए एक निश्चित समय अवधि तय कर दी गई है।

फिलहाल ये वीजा अमेरिका में कार्यक्रम या रोजगार की अवधि तक के लिए उपलब्ध रहते हैं। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद विदेशी छात्रों और मीडिया कर्मियों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए वीजा नियम से विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए क्या-क्या बदलने जा रहा है।

वीजा की अवधि में क्या हुआ बदलाव?

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के तहत वीजा की समय सीमा को पूरी तरह से सीमित कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय छात्रों (Student Visa) और एक्सचेंज वीजा की अवधि अब अधिकतम 4 वर्ष से ज्यादा नहीं होगी। विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा मौजूदा समय में सालों तक चल सकता है पर अब अधिकतम 240 दिनों तक का होगा।

चीनी नागरिकों, पत्रकारों के मामले में इस वीजा की अवधि को और भी कम करके केवल 90 दिन कर दिया गया है। यह नया नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिनों के बाद प्रभावी होगा। ये फेडरल रजिस्टर कांग्रेस की समीक्षा के अंतर्गत आता है।

विदेशी छात्रों के लिए कड़े हुए नियम

नए वीजा नियमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के सामने कई नई पाबंदियां और चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। नए नियम स्पष्ट रूप से स्नातक छात्रों को किसी भी समय अपने शैक्षणिक उद्देश्यों को बदलने या बिना आधिकारिक अनुमति के दूसरे स्कूल में ट्रांसफर लेने से प्रतिबंधित करते हैं।

अपनी डिग्री या ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाले समय को 60 दिनों से घटाकर आधा यानी 30 दिन कर दिया गया है। हालांकि गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक अगर वीजा धारक निर्धारित अवधि के बाद भी अमेरिका में रुकना चाहते हैं तो उन्हें एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा या फिर विदेश यात्रा कर दोबारा अमेरिका में प्रवेश हासिल करना होगा।

भड़का चीन, दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिकी सरकार के इस कदम पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका के इस कदम को भेदभावपूर्ण कहा है और वाशिंगटन से चीनी पत्रकारों के लिए इस नई वीजा नीति को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह कार्रवाई 2021 में मीडिया मुद्दों पर चीन और अमेरिका के बीच बनी तीन-बिंदु सहमति का गंभीर उल्लंघन करती है और अमेरिका में चीनी मीडिया के सामान्य कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इसके साथ ही लिन जियान ने चेतावनी दी कि चीन इसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

अमेरिका ने क्यों उठाया यह कदम?

गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इन नियमों को लागू करने के पीछे वीजा आवेदकों की संख्या में आई भारी उछाल को मुख्य कारण बताया है। विभाग के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024 में 18 लाख से अधिक छात्र वीजा दाखिले हुए जो पिछले वर्ष की तुलना में 11% से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। इसके अलावा अमेरिका ने वित्तीय वर्ष 2024 में 5,00,000 से अधिक एक्सचेंज विजिटर्स और 37,300 मीडिया कर्मियों को वीजा जारी किए थे।

DHS का कहना है कि इन आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि की वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने के दौरान इन गैर-प्रवासियों की निगरानी और ओवरसाइट करने की विभाग की क्षमता के सामने एक चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग ने ऐसे कई उदाहरण भी दिए जहां छात्र और एक्सचेंज विजिटर अपने वीजा पर दशकों तक अमेरिका में रुके रहे।