Market cues : निफ्टी में एक छोटे दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद, 24700–24800 की दीवार पार होने पर आएगी तेजी

Trade setup for today : 5 अगस्त को कंसोलिडेशन के बीच बाजार सीमित दायरे में ट्रेडिंग करता दिखा। ट्रेंडिंग सेशन के अंत में निफ्टी मामूली बढ़त के साथ सपाट बंद हुआ। यह क्लोजिंग बेसिस पर 24600 के लेवल को बचाए रखने में कामयाब रहा। कच्चे तेल में स्थिरता और वोलैटिलटी इंडेक्स इंडिया VIX में आई कमी की मदद से कंसोलिडेशन के बावजूद टेक्निकल इंडिकेटर्स ने बाजार को सपोर्ट किया। बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,700–24,800 के रेजिस्टेंस जोन के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक इसमें एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निफ्टी के लिए 24,500–24,400 के जोन में तत्काल सपोर्ट दिख रहा। अगर यह इस सपोर्ट के नीचे टूटता है,तो बाजार पर मंदड़िए हावी हो सकते हैं। हालांकि,अगर यह 24,700–24,800 की दीवार को पार कर जाता है तो फिर ऊपर की तरफ 25,000 के स्तर की ओर जाने का रास्ता साफ हो सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,531, 24,489 और 24,420

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,669, 24,711 और 24,780

निफ्टी कल पिछले दिन की रेंज के अंदर ही ट्रेड करता रहा और डेली टाइमफ्रेम पर एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें नीचे की तरफ लंबी शैडो थी। इससे पता चलता है कि रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के बीच निचले लेवल पर खरीदारी आ रही है। लगातार कंसोलिडेशन के बावजूद मार्केट का स्ट्रक्चर मजबूत बना हुआ है,क्योंकि इंडेक्स अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है और 10 , 20 और 50 डे EMA ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं।

हाल की तेज बढ़त के बाद भी निफ्टी 23.6 प्रतिशत के फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से ऊपर बना रहा। RSI 61.96 पर पॉजिटिव क्रॉसओवर में रहा,जबकि MACD सिग्नल और जीरो लाइन,दोनों से ऊपर अपनी ऊपर की ओर बढ़ने की चाल बनाए हुए था। MACD हिस्टोग्राम ने भी लगातार चौथे सेशन में अपनी हरी बार्स को बढ़ाया,जो लगातार बने पॉजिटिव मोमेंटम का संकेत है।

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बैंक निफ्टी

पिवट प्वाइंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,891, 58,003 और 58,185

पिवट प्वाइंट के आधार पर सपोर्ट: 57,528, 57,416 और 57,234

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,247, 61,787

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,305, 56,441

बैंक निफ्टी भी मंगलवार की रेंज में ही ट्रेड करता रहा और एक छोटी बॉडी वाली’बेयरिश कैंडल’बनाई। इसमें ऊपर की तरफ छोटी विक (wick) और नीचे की तरफ काफी लंबी विक थी। इससे पता चलता है कि बुल्स और बेयर्स के बीच कोई साफ फैसला नहीं हो पा रहा था,हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी आती दिखी। इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा,जिससे संकेत मिलता है कि शॉर्ट-टर्म मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना हुआ है। यह लगातार तीसरे सेशन में भी हाल की तेज बढ़त के 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के ऊपर बना रहा। RSI 53.62 पर ज्यादातर एक ही दायरे में रहा,लेकिन अपनी सिग्नल लाइन के ऊपर बना रहा। MACD में मामूली बुलिश क्रॉसओवर दिखा और हिस्टोग्राम लगभग एक महीने में पहली बार हरे रंग का हो गया। कुल मिलाकर,ये टेक्निकल इंडिकेटर बताते हैं कि लगातार कंसोलिडेशन के बावजूद बैंक निफ्टी में पॉजिटिव रुख बना हुआ है। निचले स्तरों पर खरीदारी आ रही है और बेहतर होता मोमेंटम इसके तेजी के ट्रेंड को सपोर्ट कर रहे हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5 अगस्त को लगातार छह सत्रों से जारी अपनी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और 943 करोड़ रुपये के शेयर बेचे (नेट सेलर बन गए)। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और वे नेट बॉयर रहे।

इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाले India VIX में कल 1.07% की गिरावट आई और यह 12.06 पर आ गया। यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है,जो तेजड़ियों के लिए लगातार सपोर्ट बने रहने का संकेत है। जब तक यह 14–15 की रेंज से नीचे रहता है,तब तक तेजड़ियों के लिए किसी बड़े जोखिम का सामना करने की संभावना कम है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 5 अगस्त को पिछले सेशन के 0.99 से घटकर 0.91 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT निफ्टी से मिल रहे संकेतों को देखते हुए,6 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत सुस्त रहने की उम्मीद दिख रही है। GIFT निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,643.50 के आसपास हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद निफ्टी 24600 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। कारोबारी सेशन के अंत में सेंसेक्स 152.05 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 78,581.00 पर और निफ्टी 9.75 अंक या 0.04 प्रतिशत बढ़कर 24,624.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:55 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 63.50 अंक यानी 0.26 फीसदी की बढ़त के साथ 24,696.50 के स्तर पर दिख रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 1.47 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि,स्ट्रेट टाइम्स में 0.88 फीसदी की तेजी दिख रही है। हैंग सेंग में 1.70 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। ताइवानी बाजार में 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। कोस्पी में 4.28 फीसदी की कमजोरी दिख रही है। हालांकि, शांघाई कंपोजिट में 0.41 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

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अमेरिकी बाजार

बुधवार को ईरान के साथ शांति समझौते की दिशा में प्रगति के संकेतों के बीच डाओ जोन्स रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ,जबकि तिमाही नतीजों के बाद SpaceX और AMD के शेयरों में गिरावट के कारण नैस्डैक (Nasdaq) में पिछले पांच सत्रों में पहली बार गिरावट नजर आई। कारोबार के अंत में डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 263.18 अंक या 0.49% बढ़कर 54,349.06 पर बंद हुआ। S&P 500 में 13.00 अंक या 0.17% की गिरावट आई और यह 7,723.52 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक कम्पोजिट 221.55 अंक या 0.83% गिरकर 26,363.44 पर सेटल हुआ।

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार के शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स दूसरी बड़ी मुद्राओं के मुकाबले सपाट दिख रहा था। फिलहाल ये 99.67 के लेवल पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.61% पर सपाट दिख रही है। वहीं, 2 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड मामूली बढ़त के साथ 4.18% पर आ गई है।

एशियाई करेंसी

ज्यादातर एशियाई करेंसीज में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़त देखने को मिल रही है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.524% की बढ़त के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन (+0.313%) और थाई बाहत (+0.203%) का नंबर है। ताइवान डॉलर,मलेशियाई रिंगित,फिलीपीन पेसो,सिंगापुर डॉलर और जापानी येन में भी थोड़ी बढ़त दिख रही है। दूसरी तरफ चीनी रेनमिनबी एकमात्र ऐसी करेंसी है जिसमें गिरावट आई है। यह अपने पिछले क्लोजिंग भाव से 0.018% नीचे दिख रहा है।

FII और DII फंड फ्लो

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5 अगस्त को लगातार छह सत्रों से जारी अपनी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और 943 करोड़ रुपये के शेयर बेचे (नेट सेलर बन गए)। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और वे नेट बॉयर रहे।

 

गुलामी की जंजीरों से निकला आइसक्रीम को स्वाद देने वाला वनीला

how 12 year old boy changed world vanilla farming

आज जिसे हम साधारण स्वाद समझते हैं, कभी वह वनीला राजाओं की पसंद था। मेसोअमेरिका के शासकों से लेकर यूरोप के आलीशान दरबारों तक इसकी मांग थी। दुनिया भर में इसकी खुशबू फैलाने का श्रेय एक 12 साल के गुलाम लड़के को जाता है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

आज आइसक्रीम से लेकर खांसी की दवाओं तक में वनीला हर जगह मौजूद है। सिंथेटिक वैनिलिन के आने के बाद से यह स्वाद दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच गया है। अब वनीला इतना आम हो चुका है कि अंग्रेजी भाषा में इसे सादे के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है।

 

असल वनीला दुनिया की सबसे मुश्किल फसलों में से एक है। रासायनिक रूप से भी इसे बनाना काफी जटिल है। इसमें 200 से भी ज्यादा तरह के खुशबूदार कम्पाउंड्स होते हैं, जो इसकी अनोखी खुशबू और स्वाद का राज हैं। केसर के बाद वनीला दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला माना जाता है। इसकी कीमत लगभग 100 से 600 डॉलर प्रति किलोग्राम तक हो सकती है।

 

वनीला की इस कहानी में एक बिना डंक वाली मधुमक्खी, औपनिवेशिक सत्ता और एक 12 वर्षीय गुलाम बनाए गए लड़के एडमंड अल्बियस की अहम भूमिका है। जिसकी खोज ने वनीला की खेती का तरीका बदल दिया। अगर यह खोज नहीं हुई तो आज दुनिया इस स्वाद से अनजान होती। ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

सालों के कब्जे से पनपा वनीला का बीज

वनीला की कहानी शुरू होती है, प्राचीन मेसो अमेरिका से। वहां के गर्म और नम जंगलों में ‘वनीला प्लैनिफोलिया' नाम की एक खास जंगली ऑर्किड बेल उग आती है।

 

इतिहास के पन्नों में दर्ज लेखों से पता चलता है कि उस समय अलग-अलग समुदायों ने वनीला के लिए अपने-अपने नाम रखे थे। मेक्सिको के लोग इसे ‘त्लिलशाचितल', टोटोनाक लोग ‘शानात' और माया लोग ‘सिस्बिक' कहते थे। हालांकि, सभी सभ्यताओं में वनीला काफी कीमती थी। दवा बनाने से लेकर, धार्मिक अनुष्ठानों तक कई जगह इसका इस्तेमाल किया जाता था।

 

टोटोनाक लोग, आज के मेक्सिको के वेराक्रूज इलाके में वनीला की खेती करने वाला पहला समुदाय था। इसकी खुशबू के लिए वे इसे बेहद पसंद करते थे। बाद में जब एजटेक लोगों ने टोटोनाक इलाके पर कब्जा किया, तो टैक्स के तौर पर वनीला वसूलने लगे। एजटेक वनीला का इस्तेमाल ‘शोकोलात्ल' नामक के काकाओ ड्रिंक में स्वाद और सुगंध जोड़ने के लिए करते थे। ये ड्रिंक केवल ऊंचे पदों पर बैठे लोगों और योद्धाओं के लिए थी।

 

साल 1519 में एजटेक के सम्राट, मोक्तेजुमा द्वितीय ने यह खास ड्रिंक स्पेनिश सैनिकों को परोसा। यह घटना तब की है, जब स्पेन सेंट्रल मेक्सिको में अपना औपनिवेशिक शासन स्थापित कर रहा था।

 

बाद में स्पेनिश लोग वनीला यूरोप लेकर आ गए। शुरुआत में यह मेक्सिको से लाए गए चॉकलेट ड्रिंक के रूप में स्पेन के शाही दरबार तक पहुंचा। फिर धीरे-धीरे वनीला फ्रांस और इंग्लैंड के राजदरबारों की रसोइयों तक पहुंच गया, जहां इसका इस्तेमाल कर खास मिठाइयां और पेस्ट्रियां बनाई जाने लगी।

 

एक मधुमक्खी ने यूरोप को किया दंग 

इस जंगली ऑर्किड की बेल को फ्रांस और इंग्लैंड के बागानों में उगाने की बहुत कोशिश की गई। लेकिन हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ आई, लाख कोशिशों के बावजूद उसके फूलों में फल नहीं लगे।

 

औपनिवेशिक शासकों ने वनीला की बेलों को अपने दूसरे उपनिवेशों जैसे भारत, जावा, फिलीपींस और फ्रांस के कब्जे वले रीयूनियन द्वीप में भी उगाने की कोशिश की। वहां बेलें तो अच्छी तरह बढ़ीं, फूल भी खिले, लेकिन उन पर वनीला की फलियां नहीं आईं। यह परेशानी लगभग 300 सालों तक ऐसी ही बनी रही।

 

साल 1836 में बेल्जियम के बागवानी विशेषज्ञ, चार्ल्स मोरेन ने पता लगाया कि वनीला के फूलों का प्राकृतिक परागण एक बिना डंक वाली मेलिपोना मधुमक्खी करती है, जो केवल मेक्सिको में ही पाई जाती है। मोरेन ने अपनी प्रयोगशाला में हाथ से वनीला का परागण करने में सफलता तो हासिल की, लेकिन यह तरीका काफी धीमा और खेती के लिहाज से कारगर नहीं था।

 

तभी रीयूनियन द्वीप पर रहने वाले 12 साल के गुलाम बनाए गए एक लड़के एडमंड अल्बियस ने इस समस्या का समाधान खोज निकाला। ALSO READ: मुसीबत में ट्रंप के दोस्त FIFA अध्यक्ष इनफैनटिनो! निजी निवेशकों की योजना पर लगा ब्रेक, बड़े फुटबॉल परिसंघों के विरोध में झुकी संस्था

 

अल्बियस और उसका आसान सा हल

साल 1841 में अल्बियस ने हाथ से वनीला के फूलों का पॉलिनेशन करने का तरीका खोज निकाला। एडमंड अल्बियस ने अपने अंगूठे और लकड़ी के एक छोटे-से टुकड़े की मदद से वनीला के फूल के भीतर मौजूद एक पतली झिल्ली को उठाया, जो नर प्रजनन भाग, पोलेन और मादा प्रजनन भाग, स्टिग्मा को अलग रखती है। फिर उसने दोनों को आपस में मिला दिया। इसके कुछ ही समय बाद ऑर्किड के फूलों पर वनीला की फलियां बनने लगीं।

 

इतिहासकार और ‘वनीला: द हिस्ट्री ऑफ ऐन एक्स्ट्राऑर्डिनरी बीन' (2025) के लेखक एरिक टी। जेनिंग्स ने खुद इस तकनीक को आजमाया है। उनके अनुसार, “कई महान आविष्कारों की तरह यह तरीका सुनने में बेहद आसान जरूर लग सकता है, लेकिन वनीला के फूलों के नर और मादा भागों को सही ढंग से मिलाना उतना आसान नहीं है, जितना दिखाई देता है।”

 

अल्बियस की खोज के बाद कुछ समय के लिए रीयूनियन द्वीप दुनिया का सबसे बड़ा वनीला उत्पादक बन गया था। लेकिन 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसीसी औपनिवेशिक प्रशासन ने हाथ से परागण की तकनीक अपने दूसरे उपनिवेश मेडागास्कर तक भी पहुंचा दी। आज मेडागास्कर दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक वनीला उत्पादक है। फ्रांसीसी उपनिवेशों में उगाई गई इस वनीला को ‘बॉर्बन वनीला' कहा जाने लगा। इसका नाम रीयूनियन द्वीप के पुराने औपनिवेशिक नाम ‘आइल बॉर्बन' पर रखा गया था।

 

वनीला का हीरो या कहानी का बस कोई किरादार?

अल्बियस की तकनीक आज भी पूरी दुनिया में वनीला की खेती के लिए इस्तेमाल की जाती है। वनीला का यह कारोबार आज अरबों डॉलर का उद्योग बन चुका है। यह बेहद मेहनत और सावधानी वाला काम है, क्योंकि वनीला का हर फूल केवल एक दिन के लिए ही खिलता है और उसी दौरान उसका हाथ से परागण करना पड़ता है।

 

इतनी बड़ी खोज के बावजूद अल्बियस को इससे कभी कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला। 12 वर्ष की उम्र में विकसित की गई उनकी तकनीक से फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन ने भारी मुनाफा कमाया, लेकिन स्वयं अल्बियस का 1880 में गरीबी के चलते निधन हो गया।

 

जेनिंग्स ने अपने शोध के लिए रीयूनियन द्वीप का दौरा किया। वह बताते हैं कि अल्बियस की याद में उनके जन्मस्थान सैंट-सुजान में एक मूर्ति बनाई गई है। उनके नाम पर कुछ स्कूल भी हैं। फिर भी, जेनिंग्स के अनुसार, उनकी कहानी आज भी बहुत कम लोगों को पता है, जबकि उनकी खोज ने रीयूनियन द्वीप को पूरी तरह बदल दिया था।

 

जेनिंग्स के अनुसार, अल्बियस की खोज के 30 सालों के भीतर ही रीयूनियन दुनिया का सबसे बड़ा वनीला उत्पादक बन गया था। इतना ही नहीं, बल्कि इस खोज ने द्वीप की खेती को केवल गन्ने पर निर्भर रहने से बचाया। उस समय लगातार गन्ने की खेती से वहां की उपजाऊ मिट्टी भी कमजोर होती जा रही थी।

 

जेनिंग्स मानते हैं कि अल्बियस को उनकी खोज का उचित श्रेय और आर्थिक लाभ नहीं मिलने का एक बड़ा कारण यह भी था कि वह गुलाम थे। हालांकि, उन्हें इस तकनीक का असल आविष्कारक माना गया। जब रीयूनियन के प्रमुख वनस्पति उद्यान के एक श्वेत वनस्पतिशास्त्री ने इस खोज का श्रेय लेने की कोशिश की, तो वह सफल नहीं हो सका।

 

जेनिंग्स बताते हैं, “आज एडमंड अल्बियस के बारे में जो जानकारी हमारे पास है, वह इसलिए है क्योंकि उनके पूर्व मालिक और उन्हें जानने वाले लोगों ने उस झूठे दावे का विरोध किया और साबित किया कि इस तकनीक के असली आविष्कारक अल्बियस ही थे।”

 

सादी दिखने वाली हर चीज सादी नहीं होती

एडमंड अल्बियस की खोज के बाद भी वनीला की कहानी लगातार बदलती रही। 1858 में रसायनज्ञों ने वनीला की खुशबू के लिए जिम्मेदार मुख्य तत्व वैनिलिन को अलग किया और 1874 में इसे कृत्रिम रूप से बनाना मुमकिन हो गया।

 

सस्ता और बड़े पैमाने पर आसानी से बनाया जा सकने वाला सिंथेटिक वैनिलिन जल्द ही आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, परफ्यूम, बेकरी उत्पादों और पैकेज्ड फूड में इस्तेमाल होने लगा। इससे कभी बेहद कीमती माने जाने वाला वनीला एक आम स्वाद बन गया।

 

जेनिंग्स के अनुसार, कृत्रिम वैनिलिन के आने से वनीला के प्रति लोगों की धारणा बदल गई है। 1880 से 1960 के बीच सिंथेटिक वैनिलिन ने वनीला को अधिक लोगों तक पहुंचाया। लेकिन इसके साथ ही यह कुछ खास लगना भी बंद हो गया। उनके शब्दों में कहें तो, सिंथेटिक वैनिलिन की सपाट खुशबू ने वनीला के लिए ‘साधारण' या ‘फीकी' धारणा को बढ़ावा दिया। इसमें असली वनीला जैसी गहराई और विविधता महसूस नहीं होती।

 

जबकि असली वनीला की फली में 200 से भी ज्यादा तरह के प्राकृतिक कंपाउंड होते हैं, जिसका ना कभी स्वाद फीका था और ना ही इतिहास की कहानी।

भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले पहले कश्मीरी खिलाड़ी बने आकिब नबी

रणजी ट्रॉफी भारतीय टेस्ट टीम के चयन का पैमाना होती तो शायद आकिब नबी को टेस्ट टीम में चयन के लिए जसप्रीत बुमराह की चोट का इंतजार नहीं करना पड़ता। जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत में 60 विकेट लेने के शानदार प्रदर्शन के बावजूद अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए नबी को नहीं चुने जाने पर उनके समर्थकों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।

हालांकि अब उनको बाहर हुए जसप्रीत बुमराह की जगह श्रीलंका दौरे पर जगह मिल गई है जहां वह निश्चित ही टेस्ट कैप पहनते हुए दिखाई देंगे। इस तरह से वह भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले कश्मीर घाटी के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

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वह इससे पहले जून के महीने में श्रीलंका ए के खिलाफ लाल गेंद की दो मैचों की श्रृंखला में भारत ए के लिए मैदान पर उतरे थे। इस कारण बुमराह के बाद सीधे नबी का नंबर लगा।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने एक बयान में कहा, ‘‘पुरुष चयन समिति ने बुमराह के स्थान पर औकिब नबी को टीम में शामिल किया है। जम्मू और कश्मीर के इस तेज गेंदबाज को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है।’

श्रीलंका की सपाट पिचों पर उनका प्रदर्शन अगर अच्छा रहा, तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें राष्ट्रीय टीम से लंबे समय तक दूर रखना मुश्किल हो सकता है। भारतीय टीम को भी इस वर्ष श्रीलंका के बाद न्यूजीलैंड में टेस्ट श्रृंखला खेलनी है, जहां की परिस्थितियां नबी की गेंदबाजी के अनुकूल होगी।

आकिब बने थे रणजी के मैन ऑफ द मैच

अबूधाबी में हुए IPL नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स से 8.40 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम मिली। हालांकि सफेद गेंद से उनका प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा लेकिन वह लाल गेंद के सिद्धहस्त गेंदबाज माने जाते हैं।

नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में कुल 104 विकेट लिए थे, जिनमें 2025-26 सत्र में लिए गए 60 विकेट भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। वह बल्लेबाजी में भी उपयोगी योगदान देने में सक्षम हैं।

Market Outlook : बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ हुए बंद, जानिए 3 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 31 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए है। फाइनेंशियल,ऑटो और कुछ दिग्गज शेयरों में तेजी की वजह से निफ्टी 24,350 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 166.49 अंक या 0.21 प्रतिशत बढ़कर 78,094.64 पर और निफ्टी 66.45 अंक या 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। आज लगभग 2444 शेयरों में बढ़त हुई,1607 शेयरों में गिरावट आई और 185 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी पर बजाज फाइनेंस,बजाज फिनसर्व,जियो फाइनेंशियल,M&M और अदाणी पोर्ट्स सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। जबकि TCS,एटरनल,मैक्स हेल्थकेयर, इंफोसिस और विप्रो सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

सेक्टोरल परफॉर्मेंस काफी हद तक पॉजिटिव रही। निफ्टी मीडिया सबसे अधिक बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी ऑटो (1.6%),निफ्टी ऑयल एंड गैस (1%),निफ्टी एनर्जी (1%),निफ्टी फार्मा (0.7%),निफ्टी इंफ्रा (0.7%)और निफ्टी PSU बैंक (0.5%) रहे। दूसरी ओर,निफ्टी IT में 1.5% की गिरावट आई,जिससे यह सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर बन गया,जबकि निफ्टी FMCG में 1% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में 0.4% की बढ़त हुई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि आज भी बाजार में तेजी का रुख बना रहा,हालांकि ऊपरी स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली। हाई बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं के बीच निवेशक सतर्क नजर आए रहे। बाजार की यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियों के नतीजों के दौर कैसा रहता है। हालांकि,अभी तक अनुमान से बेहतक नतीजे आ रहे हैं। इसके साथ साथ ही ग्लोबल रिस्क फैक्टर भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मज़बूत ग्लोबल सेंटीमेंट के कारण बाजार का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। आगे बाजार की दिशा तय करने में पहली तिमाही के नतीजे और पश्चिम एशिया एशिया की स्थितियां अहम भूमिका निभाएंगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड, टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24450-24500 जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह शॉर्ट टर्म में 24650 और उसके बाद 24800 तक बढ़ सकता है। दूसरी ओर,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24150-24100 जोन में है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे की राय है कि आज निफ्टी दिन भर ज्यादातर हरे निशान में ही रहा। इसने ऑवरली टाइमफ़्रेम पर अहम मूविंग एवरेज से ऊपर अपनी मजबूती बनाए रखी,जिससे शॉर्ट टर्म के लिए पॉज़िटिव ट्रेंड की पुष्टि होती है। हालांकि,मोमेंटम की कमी दिख रही है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट में अनिश्चित हालात के कारण ट्रेडर्स सतर्क हैं।

इसके बावजूद,कुल मिलाकर ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है,क्योंकि इंडेक्स डेली चार्ट पर 50 EMA से ऊपर बना हुआ है। नीचे की तरफ़,शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,500 पर दिख रहा है।

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का कहना है कि शुक्रवार को निफ्टी में लगातार तीसरे सेशन में भी तेजी कायम रही और यह 66 अंक ऊपर बंद हुआ। डेली चार्ट पर अपर और लोअर शैडो (shadow)वाली एक स्मॉल पॉजिटिव कैंडल बनी। टेक्निकल नज़रिए से मार्केट की यह चाल ऊपरी स्तरों पर ‘हाई वेव’ या ‘डोजि’जैसे कैंडल पैटर्न के बनने का संकेत देती है,जो रेजिस्टेंस वाले स्तरों पर मार्केट में थोड़ी अस्थिरता (volatility) का संकेत है।

निफ्टी अभी 24350-24400 के अहम रेजिस्टेंस जोन (8 जुलाई का पिछला ओपनिंग डाउन गैप,17 जुलाई का पिछला स्विंग हाई और 200-डे EMA) के आसपास है। इसलिए,किसी बड़े ब्रेकआउट से पहले रेजिस्टेंस के आसपास कंसोलिडेशन या थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

निफ्टी का मेन ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। अगर यह 24400 के ऊपर टिकता है,तो जल्द ही इसमें 24600-24700 के स्तर देखने को मिल सकते है। वहीं, नीचे की तरफ सपोर्ट 24200 पर है।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी गैप-डाउन के साथ खुला और सेशन के पहले हिस्से में इसमें गिरावट जारी रही,जिससे यह 56,769 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि,निचले स्तरों से अच्छी-खासी खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते इंडेक्स अपने ज्यादातर नुकसान की भरपाई करने में कामयाब रहा। आखिर में यह 0.10% की गिरावट के साथ 57,148 पर बंद हुआ।

पिछले चार ट्रेडिंग सेशन के दौरान बैंक निफ्टी 57,330–56,672 की रेंज में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि इंडेक्स सीमित दायरे में बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपने 20-डे और 50-डे EMA के बीच ऊपर-नीचे हो रहा है,जो किसी साफ दिशा वाले ट्रेंड का अभाव दिखाता है। RSI भी सपाट हो गया है,जिससे पता चलता है कि तेजी या मंदी का कोई मजबूत मोमेंटम नहीं है। वहीं,ADX भी सपाट बना हुआ है,जो कमजोर ट्रेंड और कम उतार-चढ़ाव (volatility) का संकेत है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है,तो इसमें में 58000 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58400 तक की बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं,नीचे की तरफ बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 के जोन में है।

 

Trading Strategy : निचले स्तरों से तेजड़ियों ने की जोरदार वापसी, जानिए अब सोमवार के लिए क्या हो ट्रेंडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Top News 30 July: सुप्रीम कोर्ट में पैलेट गन पर सुनवाई, 3 राज्यों में उपचुनाव की वोटिंग, कांवड़ यात्रा शुरू

top news 30 july

Top News 30 July : पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं। पल पल की जानकारी…

 

पैलेट गन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल 3 लोगों ने याचिका लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना वजह जवानों ने फायरिंग की।

 

बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में मतदान

बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। तीनों ही सीटों पर शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे। 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। तीनों ही सीटों पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

 

सावन मास और कांवड़ यात्रा की शुरुआत

सावन (श्रावण) मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। शिव जी की पूजा और उपासना के लिए शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में कांवड़ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ALSO READ: सावन का पहला सोमवार कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और 5 खास उपाय

 

US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला लिया है। बैठक के दौरान मौजूदा मुद्रास्फीति पर चिंता भी जताई गई। फेड अध्यक्ष नियुक्त किए गए केविन वॉर्श ट्रंप के विश्वासपात्र माने जाते हैं। 

 

नितेश तिवारी की रामायण का ट्रेलर रिलीज

30 जुलाई की सुबह ‘रामायण’ का ट्रेलर लॉन्च कर दिया। लगभग 4 मिनट के इस ट्रेलर में यश, रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे, अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय समेत अधिकतर कलाकार नजर आए।

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

fire cloud

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है। आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है। फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है। ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध

 

फ्रांस जंगल की अभूतपूर्व आग से जूझ रहा है। लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और सैर सपाटे के मौसम में अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। जंगल की आग ना सिर्फ अपने विस्तार में भयानक है बल्कि यह जिस रूप में नजर आ रही है वह इससे पहले फ्रांस में कभी नहीं देखी गई। यहां फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनने की भी खबरें आ रही हैं जो फ्रांस के लिए दुर्लभ रहा है।

 

फायर क्लाउड क्या है?

पाइरक्यूम्यूलोनिंबस एक तरह का बादल है जो जंगल की बड़ी आग के ऊपर बनता है। तेज गर्मी जब धुएं, राख और भाप को वातावरण में धकेलती है तो पाइरोक्यूम्यूलोनिंबस बनता है जिसे फायर क्लाउड यानी आग के बादल भी कहा जाता है।

 

तस्मानिया यूनिवर्सिटी में पायरोजियोग्राफी के प्रोफेसर डेविड बोमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “आप किसी चिमनी के रूप में इसकी कल्पना कर सकते हैं, जिसमें नीचे आग होती है, धुआं चिमनी के रास्ते से होता हुआ वायुमंडल में जाता है।”

 

मौसमविज्ञानी उन परिस्थितियों की पहचान कर सकते हैं जो फायर क्लाउड बनाने के लिए आदर्श होते हैं, हालांकि वे बारीकी से यह नहीं बता सकते कि वे कब बनेंगे। ऐसे में वे चेतावनी तो दे सकते हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते। ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

 

जंगल की आग पर बुरा असर

फायर क्लाउड जंगल की आग को ज्यादा खतरनाक और अप्रत्याशित बना सकते हैं। तेज हवाएं पैदा करके वे आग की दिशा बदल सकते हैं और बिजली पैदा करके वह आग की नई लपटों को जन्म दे सकते हैं।

 

उनके अंदर की ऊर्जा खत्म होने के बाद भी “प्लूम कोलैप्स” की स्थिति पैदा कर के नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्लूम जब बादलों के अंदर पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती तो वे ढह जाते हैं, इसके साथ राख और कचरा जमीन पर गिर कर नुकसान पहुंचाता है। इसे ही प्लूम कोलैप्स कहते हैं। बोमन का कहना है, “प्लूम कोलैप्स होता है तो वहां जलते कचरे की बारिश होती है।” ALSO READ: जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन

 

यूरोप पर क्या असर होगा?

फ्रेंच अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बोर्दो के पास पाइरोक्यूमूलोनिंबस देखा गया है जो फ्रांस में पहली बार है। फ्रांस में बोर्दो के पास बीते कई दिनों से जंगल की आग धधक रही है।आग के बादल बनने की खबर आने के बाद आपातकालीन सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है। आग की अप्रत्याशित प्रवृत्ति की वजह से अधिकारी इलाकों को खाली कराने का दायरा बढ़ा सकते हैं।

 

बोमन का कहना है कि पूर्वी यूरोप में आग के बादल पैदा होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अब तक इन्हें ज्यादातर कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में ही देखा जाता रहा है। बोमन के मुताबिक, “यह बहुत गंभीर स्थिति है। यह हैरान करने वाला है लेकिन यह विनाशकारी और भयानक है, हम ऐसी चीजें और नहीं चाहते।”

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उबाल से क्या लाल होगा बाजार या बुल्स भरेगा आज नई उड़ान, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशियाई बाज़ार मंगलवार की भारी बिकवाली से उबर गए हैं। US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट से पहले आई उम्मीद ने ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाया है।

सुबह 8:15 बजे GIFT निफ्टी 245 अंक या 1.02 फीसदी बढ़कर 24,230 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार की क्लोजिंग 23,985.35 से काफी ऊपर खुल सकता है। यह सकारात्मक संकेत तब आया है जब मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़्यादातर सपाट कारोबार हुआ था। सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। IT, ऑटो और रियल्टी शेयरों में बढ़त के बावजूद एनर्जी, FMCG, मेटल और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के कारण बाज़ार में गिरावट रही।

भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में रिकवरी

पिछले सेशन में भारी नुकसान के बाद बुधवार को एशियाई शेयरों में रिकवरी हुई, क्योंकि निवेशक US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई का इंतज़ार कर रहे थे।

मंगलवार को 3.6 प्रतिशत गिरने के बाद MSCI का एशिया-पैसिफिक शेयरों (जापान को छोड़कर) का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.8 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि जापान के निक्केई में लगभग 1 प्रतिशत की तेज़ी आई। नैस्डैक फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत बढ़े और यूरोपीय फ्यूचर्स ने भी मज़बूत शुरुआत का संकेत दिया।

यह रिकवरी AI से जुड़े खर्च, चिप-सेक्टर के वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बनी चिंताओं के बावजूद हुई, जिनकी वजह से इस हफ़्ते की शुरुआत में टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी।

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण क्रूड में उछाल

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण हाल के दिनों में देखी गई शांति खत्म हो गई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 3 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़कर $81.95 पर पहुंच गया। यह बढ़त तब हुई जब US सेना ने कहा कि ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें सफलतापूर्वक रोक दिया गया। मंगलवार को अमेरिकी बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। एप्पल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजे आने से पहले, सेमीकंडक्टर शेयरों में आई गिरावट की भरपाई डिफेंसिव हैवीवेट शेयरों में हुई बढ़त से हो गई।

S&P 500 में 0.21 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.03 प्रतिशत चढ़ा। नैस्डैक कंपोजिट 0.22 प्रतिशत गिरा क्योंकि निवेशक टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर सतर्क रहे।

उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व बुधवार को बाद में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा; बाज़ार में दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना 71 प्रतिशत और 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 29 प्रतिशत मानी जा रही है।

निफ्टी- बैंक निफ्टी पर क्या बनाए रणनीति

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि सोमवार को आई ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कमज़ोर ग्लोबल मार्केट संकेतों के बीच मंगलवार को निफ्टी 50 कंसोलिडेशन के दौर में चला गया। उन्होंने बताया कि डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक छोटी बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है, जिसमें ऊपर की तरफ़ एक छोटी शैडो (upper shadow) है। यह 24,000–24,100 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास उतार-चढ़ाव वाली चाल (choppy price action) का संकेत देता है, जो ‘पोलैरिटी में बदलाव’ (change in polarity) के कॉन्सेप्ट के अनुरूप है।

शेट्टी के अनुसार, जारी कंसोलिडेशन के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है। हालांकि, इंडेक्स के एक अहम ओवरहेड रेजिस्टेंस के पास होने की वजह से, उन्हें उम्मीद है कि 24,100 के लेवल के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट की कोशिश करने से पहले, मार्केट में निकट भविष्य में और कंसोलिडेशन या मामूली पुलबैक देखने को मिल सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी, एशिया बाजारों में गिरावट, कोस्पी 5% से ज्यादा टूटा

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी है। Sandisk 14 परसेंट लुढ़का है। Micron, SK Hynix ADR, Seagate, Intel जैसे दिग्गज भी 10 परसेंट तक नीचे फिसले। कल की बड़ी गिरावट के बाद कोरिया का बाजार आज भी दबाव में नजर आ रहा है। US में नैस्डैक में भी प्रेशर दिखा। हालांकि OLD ECONOMY को Reflect करने वाला डाओ जोंस 500 प्वाइंट ऊपर बंद हुआ।

निक्केई करीब 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ 61,555.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.27 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.81 फीसदी गिरकर 40,865.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.49 फीसदी की बढ़त के साथ 25,688.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 5.11 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 3,784.70 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार रात अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में सुस्ती रही, जबकि ईरान के हमले को अमेरिकी सेना द्वारा रोके जाने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।S&P 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स सपाट स्तर के आसपास रहे और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 38 अंक या लगभग 0.1% नीचे आए।

मंगलवार के रेगुलर सेशन के दौरान, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 500 अंकों से ज़्यादा की रैली देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने आने वाले फैसले से पहले अपनी स्थिति मज़बूत की। तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के कारण इस ब्लू-चिप इंडेक्स में लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज की गई। वहीं, सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक कम्पोजिट लगातार पांचवें सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ।

क्रूड में तेजी

बुधवार, 29 जुलाई को तेल की कीमतों में 3% से ज़्यादा की रिकवरी हुई। पिछले सेशन में हुई भारी गिरावट के बाद यह सुधार हुआ, जब अमेरिका और ईरान ने तनावपूर्ण गतिविधियों को रोक दिया था। अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से ज़्यादा कमी आने से भी इस रिकवरी को बल मिला।

पिछले तीन सेशन में 14% से ज़्यादा गिरने के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $2.71 या 3.2% बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $2.26 या 3.4% बढ़कर $81.95 प्रति बैरल पर पहुंच गया। US-Iran युद्ध

X पर एक पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए ईरान द्वारा किए गए “अचानक हमले की कोशिश” को सफलतापूर्वक रोक दिया।

इस बीच, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने लगातार दूसरे दिन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में तेल सुविधाओं पर ड्रोन से हमला किया, जिससे देश पर दबाव बढ़ गया। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने मंगलवार को हमले को रोक दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या किसी सुविधा को नुकसान पहुंचा है। सरकारी IRIB न्यूज़ के अनुसार, ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया।

US Fed की बैठक

निवेशकों की नजर US फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों पर आने वाले फ़ैसले और बुधवार, 29 जुलाई को होने वाली चेयरमैन केविन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी है।CME के ​​FedWatch टूल के अनुसार, Fed फंड्स फ़्यूचर्स से संकेत मिलता है कि लगभग 70% संभावना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को मौजूदा 3.5% से 3.75% की टारगेट रेंज में ही बनाए रखेगा।

आज सोने की कीमत

दिन में बाद में आने वाले फ़ेडरल रिज़र्व के ब्याज दर के फ़ैसले से पहले बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई।

पिछले सेशन में 1.1% की गिरावट के बाद शुरुआती कारोबार में सोना $4,020 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इंटरेस्ट-रेट स्वैप से संकेत मिलता है कि Fed द्वारा 25-बेसिस-पॉइंट की दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग तीन में से एक है, जो पॉलिसी की घोषणा से पहले अनिश्चितता के असामान्य रूप से उच्च स्तर को उजागर करता है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं, क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती।

पांच महीने पहले US-Iran संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने में लगभग 25% की गिरावट आई है, क्योंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारी गिरावट के बावजूद, निवेशकों की ओर से मज़बूत ‘डिप-बाइंग’ (कीमत गिरने पर खरीदारी) के कारण यह धातु जून के आखिर से $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Delhi protest: NEET आंदोलन से फिर करीब आए राहुल-अखिलेश? यूपी चुनाव से पहले युवाओं के मुद्दों पर BJP को घेरने की तैयारी

NEET protest: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग छह महीने का समय बचा है। ऐसे में NEET परीक्षा विवाद ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक नया और मजबूत राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े विपक्षी अभियान का रूप ले चुका है। इसमें पेपर लीक, बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

दोनों दलों का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर उत्तर प्रदेश के करोड़ों युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है। आगामी चुनाव में यह बड़ा चुनावी हथियार साबित हो सकता है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच फिर दिखा तालमेल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बढ़ता तालमेल ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति निर्णायक दौर में एंट्री  कर रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों का चर्चित ‘दो लड़के’ अभियान मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा था। गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका दिया। इससे दोनों दलों का आत्मविश्वास बढ़ा और गठबंधन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।

डिंपल यादव ने आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव जंतर-मंतर पहुंचीं। अपनी पहचान बन चुकी गुलाबी साड़ी में पहुंचीं डिंपल कई घंटों तक घायल छात्रों के बीच रहीं। उन्होंने घायल छात्रों का हौसला बढ़ाया। बेहोश हुए एक छात्र की मदद की की। योगत्यता उपलब्ध कराने में सहयोग किया और प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर उनके पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने, घायल छात्रों की मदद करने और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहने के वीडियो तेजी से वायरल हुए। सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा, “यह NEET नहीं, CHEAT है।” उनकी लगातार मौजूदगी ने समाजवादी पार्टी को युवाओं और छात्रों के प्रति संवेदनशील दल के रूप में पेश करने में मदद की।

युवाओं के जरिए बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार पहलों और राष्ट्रवादी राजनीति के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। विपक्ष का मानना है कि NEET विवाद बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के आरोप और बढ़ती बेरोजगारी युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा इसी नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती हैं। दोनों दल खुद को छात्रों और युवाओं की आवाज के रूप में स्थापित कर इस आंदोलन को चुनावी मुद्दे में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ जॉइंट आंदोलन

NEET आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश में भी तेजी से दिखाई दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ सहित कई जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन किए। दोनों दलों के छात्र संगठनों ने आंदोलन का नेतृत्व किया। कई जगह पुलिस के साथ झड़पें हुईं। विपक्षी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई, जिससे यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना रहा। अब दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी संयुक्त विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बनाई है।

सिर्फ NEET नहीं, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

दोनों दलों के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अब अपने अभियान को केवल NEET तक सीमित नहीं रखेंगी।

गठबंधन की योजना में शामिल प्रमुख मुद्दे हैं:-

कथित पेपर लीक

बेरोजगारी

सरकारी भर्तियों में देरी

राम मंदिर दान चोरी विवाद

किसानों के लिए खाद की कमी

नकली दवाओं का मुद्दा

बढ़ते बिजली बिल और बिजली दरें

विपक्ष की रणनीति है कि चुनाव तक जनता का ध्यान इन मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए, ताकि बीजेपी पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए चुनावी एजेंडा तय न कर सके।

फिलहाल सीट बंटवारे का विवाद भी पड़ा ठंडा

कुछ समय पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बराबर सीटों की हिस्सेदारी चाहेगी। गौतम ने कांग्रेस को गठबंधन का ‘बड़ा भाई’ तक बताया था।

इन बयानों से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। हालांकि, छात्र आंदोलन के बाद फिलहाल बातचीत का केंद्र सीटों की बजाय संयुक्त राजनीतिक अभियान बन गया है। इससे दोनों दल एकजुटता का संदेश देने में सफल रहे हैं।

युवा वोट बना सबसे बड़ा चुनावी रणक्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं को सबसे बड़ा चुनावी मैदान मान रही हैं। सपा का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक अभी भी उसके साथ माना जाता है। जबकि कांग्रेस ऊंची जातियों, दलितों, शहरी मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे जाति और धर्म से ऊपर उठकर लगभग हर वर्ग के छात्रों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन्हें राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावी माना जा रहा है।

बीजेपी भी करेगी कड़ा मुकाबला

हालांकि बीजेपी इस चुनौती को आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बावजूद भगवा पार्टी ने बाद के विधानसभा उपचुनावों में अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया है। बीजेपी आगामी चुनाव में अपनी कल्याणकारी योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी भर्ती अभियानों और सुशासन के रिकॉर्ड को प्रमुखता से जनता के सामने रखेगी। पार्टी को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में उसका बूथ स्तर तक फैला मजबूत संगठन विपक्ष पर बढ़त बनाए रखेगा।

क्या NEET आंदोलन बनेगा चुनावी गेम चेंजर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NEET आंदोलन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा बदल पाएगा। यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव युवाओं के गुस्से को चुनाव तक बनाए रखने और पेपर लीक, बेरोजगारी तथा छात्रों की आकांक्षाओं को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रहते हैं, तो कांग्रेस-सपा गठबंधन 2024 के बाद बीजेपी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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वहीं यदि बीजेपी बहस का केंद्र फिर से विकास, सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और नेतृत्व पर ले जाने में सफल हो जाती है, तो जंतर-मंतर से उठी यह भावनात्मक लहर चुनाव तक पहुंचने से पहले कमजोर भी पड़ सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य के करोड़ों युवा मतदाता आखिर किस राजनीतिक दल पर सबसे अधिक भरोसा जताते हैं।