गांधी जयंती 2026: भारत और दुनिया के लिए क्यों खास है यह दिन? जानें इस दिन का विशेष महत्व

गांधी जयंती 2026: भारत और दुनिया के लिए क्यों खास है यह दिन? जानें इस दिन का विशेष महत्व

Why Gandhi Jayanti is significant for India and the world

Gandhi Jayanti 2026: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे भारत और दुनियाभर में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है गांधी जयंती। यह दिन भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) की जयंती का प्रतीक है। राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान और उनकी अहिंसावादी विचारधारा के सम्मान में इस दिन को भारत में राष्ट्रीय अवकाश (National Holiday) के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। आइए जानते हैं भारत समेत दुनियाभर के लिए क्यों खास है यह दिन और क्‍या है इस दिन का विशेष महत्व…

 

इतिहास और पृष्ठभूमि

अंतरराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस

15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) के रूप में घोषित किया। तब से यह दिन वैश्विक स्तर पर अहिंसा के संदेश को फैलाने के लिए मनाया जाता है।

 

गांधी जी के मुख्य सिद्धांत

गांधी जी का जीवन और उनके विचार पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत हैं। किसी भी परिस्थिति में हिंसा का सहारा न लेना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना। सत्य के मार्ग पर अडिग रहकर अन्याय और अत्याचार का विरोध करना।

 

साधारण जीवन व्यतीत करना, स्वदेशी (देश में बनी वस्तुओं) को अपनाना और आत्मनिर्भरता (खादी) को बढ़ावा देना। समाज में समानता लाना और दलितों व वंचितों (जिन्हें वे ‘हरिजन’ कहते थे) के अधिकारों के लिए लड़ना।

 

कैसे मनाई जाती है गांधी जयंती?

नई दिल्ली स्थित गांधी जी की समाधि ‘राजघाट’ पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेता प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं और श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इस दिन गांधी जी के प्रिय भजन जैसे ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गायन किया जाता है।

 

भारत सरकार गांधी जयंती के अवसर पर विशेष स्वच्छता अभियानों (जैसे ‘स्वच्छ भारत अभियान’) का आयोजन करती है, क्योंकि गांधी जी स्वच्छता को ईश्वर की भक्ति के समान मानते थे। शैक्षणिक संस्थानों में निबंध प्रतियोगिताएं, वाद-विवाद, नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

गांधी जयंती का महत्व

गांधी जयंती केवल एक महापुरुष का जन्मदिन मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें उनके बताए रास्ते (शांति, सत्य, अहिंसा और सौहार्द) पर चलने का संकल्प लेने की याद दिलाता है। आज के दौर में जब दुनिया विभिन्न तरह के तनावों से जूझ रही है, गांधी जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।

आज दुनियाभर में मनाया जा रहा है वृद्ध दिवस? जानिए इसका इतिहास और उद्देश्‍य

आज दुनियाभर में मनाया जा रहा है वृद्ध दिवस? जानिए इसका इतिहास और उद्देश्‍य

When is International Day of Older Persons observed, Learn about its history and purpose

International Day of Older Persons : विश्व वृद्ध दिवस (International Day of Older Persons) हर साल 1 अक्टूबर को दुनियाभर में मनाया जाता है। यह दिन बुजुर्गों के योगदान का सम्मान करने और बढ़ती उम्र के साथ उनके सामने आने वाली सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। विश्व वृद्ध दिवस का उद्देश्य वृद्धजनों के अधिकारों, गरिमा, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

 

इतिहास और पृष्ठभूमि

वृद्ध आबादी के मुद्दों पर पहली बार वैश्विक स्तर पर ध्यान केंद्रित किया गया। 14 दिसंबर 1990 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने प्रस्ताव 45/106 पारित करके 1 अक्टूबर को इस दिवस के रूप में नामित किया। यह दिवस पहली बार 1 अक्टूबर 1991 को मनाया गया था।

 

हालांकि इसके पहले भी बुजुर्गों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उनके लिए इस तरह की पहल की जा चुकी थी। सन् 1982 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा, ‘वृद्धावस्था को सुखी बनाइए’ का नारा देकर ‘सबके लिए स्वास्थ्य’ अभियान शुरू किया।

 

विश्व वृद्ध दिवस का उद्देश्य और महत्व

बुजुर्गों के अनुभव, ज्ञान और समाज के निर्माण में उनके बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करना। वृद्धजनों के अधिकारों, गरिमा, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा को बढ़ावा देना। सामाजिक अकेलापन, स्वास्थ्य समस्याएं, आर्थिक असुरक्षा और डिजिटल विभाजन जैसे मुद्दों के प्रति समाज का ध्यान आकर्षित करना।

 

वैसे तो वरिष्ठजनों का सम्मान हर दिन, हर पल हमारे मन में होना चाहिए, लेकिन उनके प्रति मन में छुपे इस सम्मान को व्यक्‍त करने के लिए एवं बुजुर्गों के प्रति चिंतन की आवश्यकता के लिए औपचारिक तौर पर भी एक दिन निश्चित किया गया है।

 

भारत में प्रमुख पहल और योजनाएं

इस अवसर पर भारत सरकार का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय उत्कृष्ट सेवा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों और संस्थानों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर जो जानकारी और सहायता प्रदान करता है।

ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी जनता से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को खारिज करने की अपील की गई है। यह भी कहा गया है कि ट्रम्प भरोसे लायक नहीं हैं। IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। IRGC ने यह भी कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ट्रम्प पर झूठ बोलने और अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान की अमेरिकी वोटरों से सीधी अपील अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इसी चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले अमेरिकी जनता के नाम 25 पेज की चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी वोटरों से ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने को कहा गया है। पत्र में IRGC ने यह भी कहा अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें ‘हैनोई हन्ना’ कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।

ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं हैं। अमेरिका की जनता को सोचसमझकर फैसला करना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ईरान ने UNGA में कहा था कि वह परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं छोड़ेगा। IRGC की चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की सीटों के लिए चुनाव होता है। इससे राष्ट्रपति नहीं बदलता लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत और नीतियां लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र की बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रम्प झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। IRGC के पत्र की 3 प्रमुख बात अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ईरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल के बराबर पहुंची! युद्ध के असर के बाद ये हाल आया सामने

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का सबसे गंभीर और विनाशकारी असर ईरान की इकॉनमी पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। तेहरान के मुद्रा बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख (2.5 मिलियन) रियाल के आंकड़े को पार कर गई। यह अब तक के इतिहास में ईरानी रियाल का सबसे निचला स्तर है। यह साफ इशारा कर रहा है कि युद्ध ने ईरान के आर्थिक संतुलन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मुद्रा में यह बड़ी गिरावट सिर्फ 27 दिनों के भीतर आई है। इससे पहले 2 सितंबर को रियाल ने 22 लाख (2.2 मिलियन) प्रति डॉलर का निचला स्तर छुआ था। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरानी मुद्रा लगातार नए निचले रिकॉर्ड बना रही है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए मध्यस्थता वार्ता में तेजी

एक तरफ जहां ईरान की इकॉनमी चरमरा रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत अब और अधिक गंभीर मोड़ में पहुंच गई है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद और पाकिस्तानी व कतर के मध्यस्थों से मुलाकात के बाद ईरानी मीडिया को बताया कि मौजूदा समय में पूरा ध्यान सिर्फ युद्ध के मुख्य केंद्र यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर फोकस्ड है। कतर के मध्यस्थ जल्द ही अमेरिकी पक्ष से इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे। अमेरिका का अंतिम रुख सामने आने के बाद तेहरान में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अमेरिकी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई रोकने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुजे को खोलने के लिए एक समझौते पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, यह मध्यस्थता प्रयास ऐसे समय में जारी हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें ईरान ने अमेरिकी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, ईरानी संपत्ति को बहाल करने और तेल बिक्री पर प्रतिबंध हटाने की शर्त पर 7 दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने की बात कही थी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी जनता को दिया सीधा संदेश

ईरान की इकॉनमी पर बढ़ते दबाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे अमेरिकी नागरिकों से अपील की। उन्होंने एक पत्र पढ़कर सुनाया और अमेरिकी जनता से आह्वान किया कि वे अपनी सरकार पर दबाव बनाएं ताकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध को समाप्त करे। जनरल मोहेबी ने कहा कि इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि वाशिंगटन अपनी हार स्वीकार करे और ये इलाका छोड़कर चला जाए। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर देश की संपत्ति को लूटने और उसे फिर से एक उपनिवेश बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन और आर्थिक संकट

ईरान का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 3 नवंबर को महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं। युद्ध की वजह से अमेरिका में भी ईंधन और गैसोलीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर वहां की राजनीति और लोगों पर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि ईरान की इकॉनमी अब इस लंबे संघर्ष को झेलने में सक्षम नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि नई पाबंदियों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल व्यापार रुक गया है जिससे तेहरान एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि तेल की कमाई रोकने से ईरान को उन संसाधनों के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, जिनका प्रयोग वह सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।

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Gold Silver Prices Today: चांदी एक ही दिन में ₹5000 सस्ती हुई, सोने के भाव में भी बड़ी गिरावट

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना ₹2,600 टूटकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2.32 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।

दोनों कीमती धातुओं पर ग्लोबल मार्केट की बिकवाली का असर दिखा। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों ने भी दबाव बढ़ाया। ग्लोबल मार्केट में भी सोने की कीमत में करीब 3% की गिरावट आई।

डॉलर मजबूत होने से दबाव

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है।

आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर असर पड़ सकता है।

कच्चा तेल 108 डॉलर के पार

गौरव गर्ग के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 4% चढ़कर 108.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा।

ग्लोबल मार्केट में भी सोना-चांदी टूटा

विदेशी बाजार में स्पॉट गोल्ड 128.93 डॉलर यानी 3.01% गिरकर 4,156.44 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी 2.96 डॉलर यानी 4.6% टूटकर 61.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। चांदी भी करीब 61 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी।

ईरान ने भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में उसका प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ बातचीत की योजना नहीं बना रहा है। इस घटनाक्रम से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।

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शहबाज को ट्रंप ने बड़ा बना दिया

संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की सालाना बैठक में आमतौर पर कुछ सब्सटेंटिव नहीं होता है। वहां से कोई देश कुछ हासिल करके नहीं लौटता है। यूएनजीए में कुल जमा हासिल नेताओं का भाषण होता है। इसी की चर्चा होती है और उसी में सूत्र खोजे जाते हैं। भारत की ओर से इस बार प्रधानमंत्री नहीं गए थे। भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था। इसलिए पहले से ही तय लग रहा था कि भारत का प्रतिनिधित्व बहुत हाईलाइट नहीं होगा। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाईलाइट चुरा ली। ऊपर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दोपक्षीय वार्ता के लिए अमेरिका में थे। इसलिए लाइमलाइट शी पर था। बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने शहबाज का भाव भी बढ़ा दिया।

असल में शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत को लेकर जो अनाप शनाप बोला वह अपनी जगह है। लेकिन उन्होंने पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए खुले दिल से राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ की और उन्होंने कहा कि समय से दखल देकर राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध रूकवाया और दक्षिण एशिया के करोड़ों लोगों की जान बचाई। ध्यान रहे भारत इस बात से इनकार करता है कि अमेरिका ने युद्ध रुकवाया लेकिन शहबाज बार बार दोहराते हैं। पहले तो ट्रंप भी कहते थे। इस बार भी ट्रंप ने शहबाज शरीफ के भाषण का यह वाला हिस्सा निकाल कर उसे अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किया। इससे शहबाज की हैसियत बढ़। ट्रंप ने राष्ट्रपति शी को भी गले लगाया और उनके हिसाब से समझौते किए। यह दोनों घटनाक्रम भारत के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।

इजराइल ने हमास आतंकी को मार गिराया:7 अक्टूबर के हमले में इजराइली महिला को किडनैप कर जबरदस्ती गाजा ले गया था

इजराइल ने शनिवार को हवाई हमले में हमास आतंकी को मार गिराया है। इजराइली सेना (IDF) ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि आतंकी की पहचान साहेर निदाल लत्फी साकर के रूप में हुई है। IDF के मुताबिक, साकर ने 7 अक्टूबर 2023 को नोआ अर्गमानी और उनके साथी अविनातन ओर को नोवा म्यूजिक फेस्टिवल से किडनैप किया था। उसने दोनों को मोटरसाइकिल पर बैठाया और जबरदस्ती गाजा ले गया था। IDF ने बताया कि साकर गाजा में दुनियाभर में सक्रिय जिहादी संगठनों से जुड़ा था। युद्ध के दौरान वह हमास को हथियार पहुंचाता था। इसके अलावा इजराइली सैनिकों और आम नागरिकों पर हमलों की तैयारी में भी उसकी अहम भूमिका थी। म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान हमास ने हमला किया था 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में बॉर्डर एरिया पर एक म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान हमला किया था। इस हमले में करीब 1200 लोग मारे गए थे, जबकि 251 को बंधक बना लिया गया था। यह हमला इजराइल के लिए दशकों में सबसे गंभीर सुरक्षा घटनाओं में से एक था। इसके बाद इजराइल ने गाजा में हमास के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। देखते ही देखते यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया के लिए बड़े संकट में बदल गया। हमास ने इसे ‘अल-अक्सा फ्लड’ ऑपरेशन नाम दिया था। इसके जवाब में इजराइल ने कुछ घंटे बाद हमास के खिलाफ ‘सोर्ड्स ऑफ आयरन’ ऑपरेशन शुरू किया था। 2023 के हमास हमले की तस्वीरें… इजराइली सेना ने 2024 में नोआ का रेस्क्यू किया 25 साल की नोआ अर्गमानी को 8 जून 2024 को इजराइली सेना ने ‘ऑपरेशन अर्नोन’ के तहत गाजा से रेस्क्यू किया था। इस ऑपरेशन में नोआ के अलावा 7 अक्टूबर को किडनैप हुए इजराइली नागरिक आंद्रेई कोज्लोव, अल्मोग मीर जान और श्लोमी जिव को भी छुड़ाया गया था। वहीं, नोआ के साथी अविनातन ओर को अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की गाजा डील के तहत रिहा किया गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन का नाम शहीद सैनिक के नाम पर रखा गया ‘ऑपरेशन अर्नोन’ 8 जून 2024 को इजराइली सेना ने गाजा के नुसीरात इलाके में चलाया था। इस ऑपरेशन का मकसद हमास के कब्जे से इजराइली बंधकों को छुड़ाना था। इस बचाव अभियान को अंजाम देने के लिए इजराइली सेना, सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और इजराइली पुलिस की स्पेशल फोर्स यमम ने मिलकर काम किया था। इस ऑपरेशन का नाम यमम के कमांडर अर्नोन जमोरा के नाम पर रखा गया। गाजा में बंधकों को छुड़ाने के दौरान वह हमास की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें हेलिकॉप्टर से इजराइल के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद उनकी मौत हो गई। नोआ के अपहरण में शामिल एक आतंकी पहले भी मारा जा चुका इजराइली सेना के मुताबिक, इससे पहले जुलाई 2026 में भी नोआ और अन्य बंधकों के अपहरण से जुड़े आतंकियों को हवाई हमलों में मार गिराया गया था। इनमें अहमद हुसैन मोहम्मद काफिना भी शामिल था। वह मुजाहिदीन ब्रिगेड का कमांडर था और 7 अक्टूबर के हमले में इजराइल में घुसा था। IDF ने बताया कि काफिना ने नोआ अर्गमानी और अविनातन ओर के अपहरण में भी हिस्सा लिया था। ——————— यह खबर भी पढ़ें… गाजा में 2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी:UN रिपोर्ट- रेप पीड़िताओं की आरोपियों से शादी, बाल विवाह 123% बढ़े संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी 2 बोरी आटे के बदले कर दी। पूरी खबर पढ़ें…

Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

ये भी पढ़ें- ‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर है पाकिस्तान’; UNGA में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शहबाज शरीफ को जमकर धोया

ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।

‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर है पाकिस्तान’; UNGA में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शहबाज शरीफ को जमकर धोया

India-Pakistan Dispute: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (26 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर जमकर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे ‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर’ करार दिया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके लिए किसी तरह की छूट मांगने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से राज्य प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बताया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में विश्व नेताओं से कहा, “ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति में किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर आतंकवाद के वित्तीय पहलुओं को उजागर किया जाना चाहिए और उनका मुकाबला किया जाना चाहिए।”

शहबाज पर जयशंकर का सीधा निशाना

पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा, “कल आतंकवाद का एक सीरियल प्रैक्टिशनर इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा था। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए। ऐसा नहीं चल सकता।”

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। वह इसका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद को अंजाम देने वाले को ही अपना रास्ता सुधारना होगा।”

पाक PM के नापाक बयान के बाद आया पलटवार

जयशंकर की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के शुक्रवार को UNGA में दिए भाषण के एक दिन बाद आई। शरीफ ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। शहबाज शरीफ ने UNGA में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

भारत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ में भी दिया जवाब

भारत की ओर से राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने शरीफ के बयानों को अजीब करार दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा का ध्यान पाकिस्तान पर लगे उन आरोपों की ओर दिलाया, जिनमें उस पर हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया जाता रहा है।

गहलोत ने विशेष रूप से 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया और कहा कि वह पाकिस्तान में रह रहा था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच केंद्रीय मुद्दा पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति है। गहलोत ने कहा कि भारत ने पिछले वर्ष यह स्पष्ट कर दिया था कि आतंकवादियों के लिए न तो कोई सुरक्षित ठिकाना होगा और न ही छिपने की कोई जगह।

‘अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए’

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में अशांति पर चिंता जताने के साथ यूक्रेन में संघर्ष को भी समान रूप से चिंताजनक बताते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र की आम चर्चा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जिससे पहले से ही मुश्किल हालात और बिगड़ रहे हैं। जारी तनाव को लेकर हम बेहद चिंतित हैं।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

जयशंकर ने कहा, “भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने का आह्वान करता है।” उन्होंने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष समान रूप से चिंताजनक है। जयशंकर ने अगस्त में बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा, “अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए।”

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उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई। जयशंकर ने इजराइल-फलस्तीन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा, “पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व में भी तनाव और हिंसा दुर्भाग्य से जारी है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि स्थायी और दीर्घकालिक शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।” जयशंकर ने कहा, “इस बीच, भारत फलस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है।”