
Gandhi Jayanti 2026: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे भारत और दुनियाभर में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है गांधी जयंती। यह दिन भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) की जयंती का प्रतीक है। राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान और उनकी अहिंसावादी विचारधारा के सम्मान में इस दिन को भारत में राष्ट्रीय अवकाश (National Holiday) के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। आइए जानते हैं भारत समेत दुनियाभर के लिए क्यों खास है यह दिन और क्या है इस दिन का विशेष महत्व…
इतिहास और पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) के रूप में घोषित किया। तब से यह दिन वैश्विक स्तर पर अहिंसा के संदेश को फैलाने के लिए मनाया जाता है।
गांधी जी के मुख्य सिद्धांत
गांधी जी का जीवन और उनके विचार पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत हैं। किसी भी परिस्थिति में हिंसा का सहारा न लेना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना। सत्य के मार्ग पर अडिग रहकर अन्याय और अत्याचार का विरोध करना।
साधारण जीवन व्यतीत करना, स्वदेशी (देश में बनी वस्तुओं) को अपनाना और आत्मनिर्भरता (खादी) को बढ़ावा देना। समाज में समानता लाना और दलितों व वंचितों (जिन्हें वे ‘हरिजन’ कहते थे) के अधिकारों के लिए लड़ना।
कैसे मनाई जाती है गांधी जयंती?
नई दिल्ली स्थित गांधी जी की समाधि ‘राजघाट’ पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेता प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं और श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इस दिन गांधी जी के प्रिय भजन जैसे ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गायन किया जाता है।
भारत सरकार गांधी जयंती के अवसर पर विशेष स्वच्छता अभियानों (जैसे ‘स्वच्छ भारत अभियान’) का आयोजन करती है, क्योंकि गांधी जी स्वच्छता को ईश्वर की भक्ति के समान मानते थे। शैक्षणिक संस्थानों में निबंध प्रतियोगिताएं, वाद-विवाद, नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गांधी जयंती का महत्व
गांधी जयंती केवल एक महापुरुष का जन्मदिन मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें उनके बताए रास्ते (शांति, सत्य, अहिंसा और सौहार्द) पर चलने का संकल्प लेने की याद दिलाता है। आज के दौर में जब दुनिया विभिन्न तरह के तनावों से जूझ रही है, गांधी जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।


