राम मंदिर को कल मिल सकता है पहला CEO! 5500 लोगों ने किया था आवेदन, सेलेक्शन कमेटी ने 3 नाम किए शॉर्टलिस्ट

Ayodhya Ram Temple CEO Update: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राम मंदिर को बुधवार को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल सकता है। चयन समिति ने मंगलवार को इस पद के लिए तीन शीर्ष उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल तैयार कर सिफारिश दी है। राम मंदिर के पहले सीईओ की दौड़ में रिटायर ब्यूरोक्रेट सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर के नए सीईओ का चयन बुधवार को मणिरामदास छावनी स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में किया जाएगा।

3 सदस्यीय सर्च कमेटी ने छांटे नाम, 5,500 आवेदनों की हुई स्क्रीनिंग

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अयोध्या पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि वह बैठक से पहले ट्रस्ट को अपनी अंतिम शॉर्टलिस्ट सौंप देगी। इस समिति में रिटायर जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। बुधवार को दोपहर 2 बजे से प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना है।

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर का श्रेष्ठ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए हम एक उत्कृष्ट सीईओ की तलाश में थे। इसके लिए हमने जस्टिस (प्रमोद) कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे से मार्गदर्शन मांगा था। इस तीन सदस्यीय चयन समिति ने सुबह से शाम तक अथक परिश्रम करते हुए साक्षात्कार लिए।

गोविंद देव गिरि ने बताया कि देश भर से लगभग 5500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एनजीओ से जुड़े प्रोफेशनल शामिल थे। चयन समिति ने चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत पहले 3500, फिर 1500 और अंत में 300 उम्मीदवारों को छांटा। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए गए। इसके बाद 3 अंतिम शॉर्टलिस्ट किए गए नामों का पैनल तैयार किया गया।

दान के पैसों की चोरी के आरोपों के बाद लिया गया फैसला

राम मंदिर में चंदे के प्रबंधन और दान की चोरी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की वित्तीय देखरेख पर सवाल खड़े हुए थे। ट्रस्ट ने खुद माना था कि दान की चोरी से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक कामकाज और दैनिक संचालन की देखरेख के लिए एक पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया था।

सेक्रेटरी और अन्य पदों का भी हो सकता है आधिकारिक ऐलान

बुधवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में सीईओ के अलावा दो सदस्यों और जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) के पदों के लिए भी नामों की घोषणा की जा सकती है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के सचिव के पद पर भी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। जगदीश आफले मंदिर ट्रस्ट के पहले सचिव होंगे। जब गोविंद देव गिरि से पूछा गया कि क्या बुधवार को नए सीईओ के नाम की घोषणा होगी तो उन्होंने कहा कि यह तय करना ट्रस्ट पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, लेकिन ट्रस्टी बोर्ड तय करेगा कि इसे अभी करना है या नहीं।

यह भी पढ़ें: सिर्फ 4.5 घंटे में ट्रेन से दिल्ली से पटना! बुलेट ट्रेन का ये रूट आगरा, कानपुर, वाराणसी का भी ट्रैवल टाइम कर देगा बेहद कम

Kashmiri Pandits: दशकों बाद कश्मीर में लौटी उम्मीद! शोपियां में कश्मीरी पंडितों ने रखी राम मंदिर की नींव, लोगों की यादों से जुड़ा है पूरा इतिहास

Kashmiri Pandits News: कश्मीर घाटी से विस्थापन के दशकों बाद कश्मीरी पंडित समुदाय ने शनिवार (29 अगस्त) को शोपियां के एक मोहल्ला में राम मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। यहां समुदाय के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवान राम मंदिर की आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम कश्मीरी पंडितों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी पुरानी जड़ों और विरासत से जुड़ने का बेहद भावुक क्षण रहा।

दशकों तक विस्थापन झेलने के बाद, कश्मीरी पंडितों ने पारंपरिक पूजा और हवन के साथ जम्मू-कश्मीर के शोपियां के टाक मोहल्ले में ऐतिहासिक राम मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखी। 1989 में आगजनी से क्षतिग्रस्त और बाद में अतिक्रमण का शिकार हुई इस जगह को स्थानीय प्रशासन की कोशिशों से समुदाय को वापस सौंपा गया। जबकि पुरातत्व और विरासत विभाग ने पुनर्निर्माण के लिए फंड मंजूर किया।

समुदाय और स्थानीय निवासियों ने इस पहल को सिर्फ एक मंदिर के निर्माण के तौर पर नहीं। बल्कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के पुनरुद्धार और कश्मीर की साझा सांस्कृतिक पहचान की बहाली की उम्मीद के प्रतीक के तौर पर देखा।

1989 में जला दिया गया था राम मंदिर

इस मंदिर का इतिहास कश्मीर के बेहद संवेदनशील दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1989 में घाटी में उग्रवाद के दौर के बीच शोपियां में मौजूद राम मंदिर को जला दिया गया था। इसके बाद मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण भी किया गया। समय बीतने के साथ कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर घाटी से विस्थापन हुआ। इसके बाद यह धार्मिक स्थल भी समुदाय की स्मृतियों का हिस्सा बनकर रह गया। लेकिन अब करीब साढ़े तीन दशक बाद अब उसी जमीन पर मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है।

सैकड़ों लोग हुए धार्मिक कार्यक्रम में शामिल

राम मंदिर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में कश्मीरी पंडित समुदाय के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किया गया। राम मंदिर के पुनर्निर्माण की औपचारिक शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था। बल्कि उन पुरानी यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर था, जो विस्थापन के कारण उनसे दूर हो गई थीं।

प्रशासन की पहल से पुनर्निर्माण का रास्ता साफ

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडिया टुडे के मुताबिक, पुरातत्व एवं विरासत विभाग ने अपनी विरासत संरक्षण पहल के तहत इस परियोजना के लिए धनराशि स्वीकृत की है। इस कदम से शोपियां के इस पुराने धार्मिक स्थल को दोबारा विकसित करने और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘यह सिर्फ मंदिर का निर्माण नहीं, हमारी जड़ों से जुड़ने का प्रयास’

कार्यक्रम में शामिल कुछ कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यह मंदिर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर से बनने वाली कोई इमारत नहीं है। यह शोपियां के साथ उनके पैतृक संबंध, उनकी धार्मिक आस्था और कश्मीर की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में समुदाय की मौजूदगी की याद है। उनका कहना था कि मंदिर का दोबारा निर्माण उस विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। इससे कश्मीरी पंडित विस्थापन के कारण लंबे समय से दूर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने भी किया स्वागत

मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और साझा विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समुदाय से जुड़े पुराने धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार घाटी की साझी और समावेशी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “दशकों पहले यहां एक मंदिर हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे वह जर्जर हो गया। फिर उसका अस्तित्व खत्म हो गया। लेकिन अब हालात बेहतर हुए हैं। सरकार ने इसे फिर से बनाने की पहल की है। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इसके लिए बहुत मेहनत की है। आज यहां मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है। हम इस प्रयास की सराहना करते हैं।”

अन्य लोगों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब 35 साल से अधिक समय बाद शोपियां में राम मंदिर की आधारशिला रखा जाना कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं। बल्कि विस्थापन, पीड़ा और पुरानी यादों के बीच अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

ये भी पढ़ें- Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Ghaziabad-Sitapur Rail Project: पश्चिमी यूपी को बड़ी सौगात! गाजियाबाद से सीतापुर के बीच 403 KM की बिछेगी नई रेल लाइन, हापुड़ को भी होगा बड़ा फायदा

Ghaziabad–Sitapur Rail Project: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा बल मिला है। गाजियाबाद से हापुड़ होते हुए सीतापुर तक करीब 406 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की प्रस्तावित योजना अब सर्वे के चरण में पहुंच गई है। इस महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट का फाइनल सर्वे फिलहाल जारी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये बताई गई है। रेलवे की ओर से एक RTI के जवाब में दी गई जानकारी सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में नई रेल कनेक्टिविटी की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

इसी साल 18 अप्रैल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गाजियाबाद और सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दी थी। उम्मीद है कि इससे रेलवे की क्षमता काफी बढ़ेगी, सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होगा और देश के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर भीड़ कम होगी। यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद-सीतापुर सेक्शन दिल्ली-गुवाहाटी हाई-डेंसिटी नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है।

अभी यह अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है। इसका इस्तेमाल 168% तक पहुंच गया है। अगर विस्तार नहीं किया गया, तो इसके 207% तक बढ़ने का अनुमान है। दो नई अतिरिक्त लाइनों का मकसद इस रुकावट को दूर करना और यात्री एवं मालगाड़ियों की आवाजाही को आसान बनाना है।

फाइनल सर्वे का काम जारी

प्रस्तावित रेल लाइन गाजियाबाद को हापुड़ के रास्ते सीतापुर से जोड़ेगी। फिलहाल रेलवे इस रूट से जुड़े अंतिम सर्वे का काम कर रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना के तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जाएगा। करीब 406 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को बेहतर रेल नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है।

हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों को बड़ा फायदा

इस परियोजना से सबसे अधिक उम्मीद हापुड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रही है। नई रेल लाइन बनने से इन इलाकों के लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त रेल संपर्क मिल सकता है।बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।

₹14,926 करोड़ की है प्रस्तावित परियोजना

प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये है। हालांकि, अभी यह योजना सर्वे के चरण में है। इसलिए निर्माण कार्य शुरू होने से पहले आगे की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। रेलवे के RTI जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि परियोजना को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। वर्तमान में फाइनल सर्वे किया जा रहा है।

पश्चिमी यूपी की रेल कनेक्टिविटी को मिल सकता है नया विकल्प

गाजियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण शहर है। जबकि हापुड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख जिला है। ऐसे में गाजियाबाद-हापुड़-सीतापुर के बीच नया रेल संपर्क तैयार होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिल सकती है। नई रेल लाइन भविष्य में यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

ये भी पढ़ें- Ram temple CEO job: क्या आप जनेऊ पहनते हैं, नॉन-वेज खाते हैं? राम मंदिर CEO के इंटरव्यू में पूछे गए ये सवाल, 18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट

साथ ही, मौजूदा रेल रूट्स पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस परियोजना को लेकर सबसे अहम पड़ाव फाइनल सर्वे का पूरा होना है। इसके बाद परियोजना के निर्माण और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

Ayodhya Ram Temple: धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित, प्रवक्ता की भी होगी नियुक्ति

Ayodhya Ram Temple: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के धार्मिक कामकाज की देखरेख के लिए संतों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों वाली नौ सदस्यों सदस्यीय समिति का गठन किया है। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला बुधवार को ट्रस्ट की दो घंटे चली बैठक में लिया गया, जो मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक ढांचे को बड़े पैमाने पर फिर से व्यवस्थित करेंगे।

नई बनी कमेटी के प्रमुख ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे। इसके अलावा, इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत शामिल हैं: मणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, रामवल्लभ कुंज के स्वामी राजकुमार दास, हनुमत निवास मंदिर के स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास। बाकी चार सदस्य ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह 9 सदस्यीय समिति मंदिर में धार्मिक मामलों की देखरेख करेगी, जिसमें अनुष्ठान, त्योहार, पूजा व्यवस्था और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय शामिल है।

बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए ट्रस्ट ने मीडिया और जनता के साथ औपचारिक संचार चैनल स्थापित करने के लिए एक आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति को मंजूरी दी है। बता दें कि यह कदम राम मंदिर प्रबंधन पर बढ़ते सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बीच उठाया गया है।

हालांकि, ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों को स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति एक महीने के लिए टाल दी गई।

CEO पद के लिए मिले हजारों आवेदन

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट को CEO के पद के लिए हजारों आवेदन मिले हैं, जिनमें रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और सीनियर प्रोफेशनल भी शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्ट अंतिम फैसला लेने से पहले सिलेक्शन प्रोसेस जारी रहेगा।

फिलहाल, अंतरिम महासचिव (Interim General Secretary) के तौर पर काम कर रहे कृष्ण मोहन अपने पद पर बने रहेंगे।

यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब राम मंदिर निर्माण के चरण से निकलकर पूरी तरह से संचालन (ऑपरेशन) के दौर में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट मंदिर में आने वाले बढ़ते श्रद्धालुओं और तेजी से बढ़ते मंदिर परिसर को बेहतर तरीके से संभालने के लिए अपनी धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

नई कमिटी से धार्मिक नेताओं की भूमिका होगी तय

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संतों की नई बनी कमिटी से मंदिर के कामकाज में अयोध्या के धार्मिक नेताओं की भूमिका तय होने की उम्मीद है, जबकि प्रस्तावित CEO से संस्थान के मैनेजमेंट में ज्यादा प्रोफेशनल देखरेख आने की उम्मीद है।

ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और फंड व रिकॉर्ड के प्रबंधन में ज्यादा पारदर्शिता की मांग उठ रही है।

बता दें कि ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को होनी है, जिसमें CEO और ट्रस्टी के तीन खाली पदों समेत रुकी हुई नियुक्तियों पर समीक्षा होने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: Greater Noida West Metro Extension: PIB ने दी 8.4 किमी मेट्रो लाइन को मंजूरी, गौर चौक समेत 5 स्टेशनों से बदलेगी कनेक्टिविटी

Ram Temple Donation Theft: चंपत राय के इस्तीफे के अलावा राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में ट्रस्ट की पहली बैठक से निकलीं ये 5 बड़ी बातें

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी गई। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने माना कि इस मामले में ट्रस्ट के साथ विश्वासघात हुआ है और जिम्मेदार लोगों ने भरोसा तोड़ा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। ट्रस्ट ने साफ कहा कि उसे राज्य सरकार की SIT और उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक से निकलीं 5 बड़ी बातें

  • 1. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की गई

बैठक में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की जांच रिपोर्ट रखी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की और जांच पर भरोसा जताया।

  • 2. ट्रस्ट ने माना कि भरोसा तोड़ा गया

बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने स्वीकार किया कि इस मामले में ट्रस्ट के विश्वास के साथ धोखा हुआ। आरोप है कि जिम्मेदार लोगों ने अधिकारियों को गुमराह किया और ट्रस्ट का भरोसा तोड़ा।

  • 3. दोबारा ऐसी घटना न हो, इसकी होगी समीक्षा

ट्रस्ट ने फैसला किया कि दान की राशि के संग्रह और निगरानी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की दोबारा गुंजाइश न रहे।

  • 4. चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा पक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा। स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी बुलाने का फैसला किया गया। दोनों इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।

  • 5. CEO का पद बनाने का प्रस्ताव खारिज

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का नया पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन ट्रस्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर कुछ और अहम फैसले सामने आ सकते हैं। वहीं, दान की कथित गड़बड़ी की जांच SIT लगातार कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Ram Mandir Donation Scam: कुंभ में लूटा गया सबसे ज्यादा राम मंदिर का चढ़ावा! जीजा-साले की जोड़ी ने उड़ाई बड़ी रकम

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अयोध्या पुलिस की जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी 2025 की शुरुआत में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ कुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरियों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसका फायदा उठाया और मिलीभगत करके एक बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

फिलहाल इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (जिन्हें टिन्नू यादव भी कहा जाता है) शामिल हैं। इन सभी से मंगलवार को कई घंटों तक पूछताछ की गई।

वहीं, पुलिस का दावा है कि पूरी साजिश सभी आठों आरोपियों ने मिलकर रची थी।

जीजा-साले की जोड़ी ने सबसे ज्यादा कैश चुराया

जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस जोड़ी ने चोरी के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। अब तक पुलिस ने इन दोनों से जुड़ी आधी दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी का पता लगाया है।

पैसे के लेन-देन की जांच के लिए, अयोध्या पुलिस अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर आरोपी की संपत्ति और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की विस्तृत जांच के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती SBI की देखरेख में होती है, जो इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को नियुक्त करता है। मंदिर में आने वाले दान को चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और इसकी गिनती 14 लोगों की एक टीम करती है, जिसमें बैंक के 11 कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन सदस्य शामिल होते हैं।

इस बीच, पुलिस ने बताया कि इस मामले में सबसे ज्यादा नकद राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी कौशालपुरी की एक जगह से बरामद की गई थी। यह जगह उसके भाई अभिषेक से जुड़े एक योग केंद्र की है।

योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को सेंटर की तलाशी ली और भारी मात्रा में कैश बरामद किया। उन्होंने कहा कि वहां अभिषेक के चार बक्से रखे हुए थे, जिनमें कंबल के अंदर पैसे छिपाकर रखे गए थे। एक बक्से पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

सीमा तिवारी के मुताबिक, जब अभिषेक से छापेमारी और कैश के बारे में पूछताछ की गई, तो उसने दावा किया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला ड्रग्स के धंधे में शामिल है और इसी वजह से छापेमारी हुई।

आरोपियों के घरों से कैश बरामद

वहीं, जांच अब सभी आरोपियों के घरों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने तीन दिन पहले तलाशी ली और टिन्नू यादव के घर से कैश बरामद किया, जो पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है।

सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर में मिले दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक स्टाफ के पास रहती थी। सूत्रों ने आगे बताया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फंड का कथित तौर पर गबन किया गया और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे आपस में बांट लिए गए।

इसके साथ ही, पुलिस ने सभी आरोपियों की चल और अचल संपत्ति से जुड़े बैंक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी इकट्ठा किए हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले एक साल के उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से कथित तौर पर ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी ज्ञात आय से कहीं ज़्यादा थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि, इस मामले में सबसे ज्यादा कैश की बरामदगी 89 लाख रुपये की हुई, जो आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा कथित तौर पर जगह बताने के बाद की गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने यह रकम बरामद कर ली थी।

यह भी पढ़ें: कानपुर से कबरई जाने में 3.5 की बजाय लगेंगे डेढ़ घंटे, यूपी में BOT मोड में NH-34 पर 4/6 लेन का एक्सेस सेक्शन पास, जानिए डिटेल

Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

ये भी पढ़ें- Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे से ज्यादा पूछताछ, गबन के आरोपों में अपनी भूमिका से किया इनकार

यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे से ज्यादा पूछताछ, गबन के आरोपों में अपनी भूमिका से किया इनकार

Ram Temple Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने सोमवार (29 जून) को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान तीन घंटे से ज्यादा समय तक दर्ज किया। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक पूछताछ के दौरान राय ने कथित घोटाले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मंदिर का चंदा संभालने वाले कर्मचारी ऐसा अपराध कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने मंदिर के चंदे के मैनेजमेंट में कथित अनियमितताओं को लेकर राय से विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने कहा कि कथित गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने हैरानी जताई कि ट्रस्ट के साथ काम करने वाले लोग ऐसे घोटाले में शामिल हो सकते हैं।

अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस

पुलिस ने चल रही जांच के तहत ट्रस्ट के सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी सवाल-जवाब के लिए नोटिस जारी किए हैं। इस बीच, ट्रस्ट ने अपनी बैठक 6 जुलाई को करने का फैसला किया है। इस बैठक में राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है।

यह मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में मिले चंदे में बड़े पैमाने पर गबन के आरोप लगे। इसके बाद FIR दर्ज की गई। राम भक्तों द्वारा दान किए गए कैश और कीमती सामान की गिनती में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव के तौर पर हुई है।

आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट के विशेष जज रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी।

आरोपियों को नहीं मिल रहे हैं वकील

अयोध्या में वकीलों ने सोमवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक में लिया गया।

सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

ये भी पढ़ें- राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

बैठक के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका शरण मिश्र ने पत्रकारों को बताया कि सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि एसोसिएशन का कोई भी वकील आरोपियों की ओर से पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई वकील फिर भी आरोपियों का मुकदमा लड़ना चाहता है, तो उसे पहले एक आवेदन देना होगा और प्रति आरोपी पांच लाख रुपये बार एसोसिएशन में योगदान के तौर पर जमा करने होंगे। इस राशि का इस्तेमाल एसोसिएशन मामले में मुकदमा चलाने के लिए करेगी।”

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

ये भी पढ़ें- राम मंदिर दान चोरी केस में SBI स्टाफ से क्यों हो रही पूछताछ, बैंक अधिकारी कैसे आए निशाने पर? पढ़ें- इनसाइड स्टोरी

वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।