IRCON Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 44% घटा, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़ा

IRCON Q1 Results: रेलवे सेक्टर की सरकारी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी IRCON International Ltd ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 43.6% घटकर ₹92.74 करोड़ रह गया।

पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹164.5 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में बढ़ोतरी हुई।

IRCON का रेवेन्यू 9.5% बढ़ा

IRCON का कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹1,955.8 करोड़ हो गया। पिछले साल की जून तिमाही में यह ₹1,786.3 करोड़ था। EBITDA भी 2.6% बढ़कर ₹205.17 करोड़ रहा। एक साल पहले यह करीब ₹200 करोड़ था।

हालांकि, EBITDA मार्जिन में गिरावट आई। यह पिछले साल के 11.19% से घटकर 10.49% रह गया।

ISTPL का टोल कलेक्शन अधिकार खत्म

IRCON ने बताया कि उसकी ज्वाइंट वेंचर कंपनी Ircon-Soma Tollway Pvt. Ltd. (ISTPL) का टोल कलेक्शन अधिकार 14 मई को खत्म हो गया। यह अधिकार बढ़ाई गई कंसेशन अवधि पूरी होने के बाद खत्म हुआ। ISTPL में IRCON की 50% हिस्सेदारी है। अब हाईवे से जुड़े एसेट्स नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को सौंपे जा रहे हैं।

30 जून तक ISTPL की नेटवर्थ करीब ₹216.17 करोड़ थी। इसमें IRCON का हिस्सा करीब ₹108.09 करोड़ है। कंपनी ने कहा कि उसे ज्वाइंट वेंचर में अपने निवेश की वैल्यू में किसी तरह की कमी यानी इम्पेयरमेंट की उम्मीद नहीं है।

दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी अपडेट

रेल मंत्रालय ने Bastar Railway Pvt. Ltd. को बंद करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कंपनी के मुताबिक, इससे जुड़ी कानूनी और दूसरी प्रक्रियाएं चल रही हैं। IRCON ने यह भी बताया कि उसने MCL प्रोजेक्ट के फेज I और फेज II को रेल मंत्रालय को सौंपने का फैसला किया है।

इसके अलावा, 23 जून को IRCON ने बताया था कि Badri Rai & Company के साथ उसके ज्वाइंट वेंचर को ₹763.1 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन ने अगरतला में स्मार्ट-ग्रिड प्रोजेक्ट के लिए दिया है।

शेयर में 1.32% की गिरावट

पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.14% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 24.34% नीचे आया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.87 हजार करोड़ रुपये है।

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Jupiter Wagons Share: रेल कंपनी को मिले ₹264 करोड़ के ऑर्डर, शेयरों पर रहेगी नजर

Jupiter Wagons Share: रेल फ्रेट वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons Ltd को ₹264.32 करोड़ के दो बड़े ऑर्डर मिले हैं। इनमें एक ऑर्डर JSW (South) Rail Logistics से और दूसरा Central Warehousing Corporation (CWC) से मिला है। इन नए ऑर्डर्स से कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलेगी और आने वाले महीनों में रेवेन्यू की बेहतर विजिबिलिटी रहेगी।

JSW से मिला ₹122.88 करोड़ का ऑर्डर

जुपिटर वैगंस ने बताया कि JSW (South) Rail Logistics के साथ ₹122.88 करोड़ का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) साइन किया गया है। इसके तहत कंपनी पांच BFNSM1 रेक और BVCM वैगन तैयार कर सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर सात महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी JSW को दो BFNV वैगन भी सप्लाई करेगी।

CWC ने दिया ₹141.44 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट

सरकारी कंपनी Central Warehousing Corporation (CWC) ने जुपिटर वैगंस को ₹141.44 करोड़ का ऑर्डर दिया है। इसके तहत कंपनी आठ BLSS रेक तैयार करेगी। इनमें 32 BLSS-A वैगन, 352 BLSS-B वैगन और आठ ब्रेक वैन शामिल होंगे। इस ऑर्डर को एक साल के भीतर पूरा करना है।

रेल लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ रही मांग

BLSS वैगन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंटेनर ट्रांसपोर्ट में होता है। ये बंदरगाहों, वेयरहाउस और औद्योगिक केंद्रों के बीच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जुपिटर वैगंस के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि ये ऑर्डर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और समय पर डिलीवरी पर ग्राहकों के भरोसे को दिखाते हैं। उनका कहना है कि रेल लॉजिस्टिक्स और फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से आगे भी ऐसे ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना है।

जुपिटर वैगंस के शेयरों का हाल

जुपिटर वैगंस  का शेयर गुरुवार को 1.68% गिरकर ₹263.10 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में इसने 31% से ज्यादा का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 395.95% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.77 हजार करोड़ रुपये है।

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Railway Stocks: रेलवे का ₹50000 करोड़ का कवच प्रोजेक्ट, इन 3 कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

Railway Stocks: भारतीय रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कवच (Kavach) सिस्टम को तेजी से लागू कर रहा है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो सिग्नल तोड़ने या तय रफ्तार से ज्यादा गति होने पर ट्रेन को खुद रोक सकता है। मार्च 2026 तक यह 3,103 रूट किलोमीटर पर शुरू हो चुका है। 24,427 रूट किलोमीटर पर काम जारी है। सरकार अगले दो वर्षों में 9,000 रूट किलोमीटर और जोड़ने की तैयारी में है।

Concord Control Systems के मुताबिक, कवच से जुड़ा कुल बाजार अवसर करीब ₹50,000 करोड़ का हो सकता है। यही वजह है कि रेलवे सेक्टर की कई कंपनियां इस अवसर का फायदा उठाने की दौड़ में हैं।

Kernex Microsystems

Kernex रेलवे सुरक्षा और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कवच 4.0 इसका प्रमुख प्रोडक्ट है। कंपनी हर महीने 450 कवच यूनिट बनाने की क्षमता रखती है और मार्च 2026 में BHEL के साथ एक जॉइंट वेंचर भी बना चुकी है।

29 मई 2026 तक कंपनी के पास ₹4,150 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जो FY26 के रेवेन्यू के आधार पर करीब 10 साल की कमाई का नजरिया देता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 127% बढ़कर ₹430 करोड़ पहुंच गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹149 करोड़ रहा। हालांकि, तेजी से बढ़ते ऑर्डर के साथ वर्किंग कैपिटल पर दबाव भी बढ़ा है।

Concord Control Systems

Concord Control Systems कवच 4.0 के लिए जरूरी तकनीक और कई अहम कंपोनेंट बनाती है। कंपनी को RDSO की प्रोटोटाइप मंजूरी मिल चुकी है और फील्ड ट्रायल शुरू हो चुके हैं।

31 मार्च 2026 तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹697 करोड़ था। इसके बाद मई 2026 में उसे ₹279.9 करोड़ का नया कवच ऑर्डर मिला। कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स के साथ 15 साल तक मेंटेनेंस से भी कमाई होगी। इससे लंबी अवधि की कमाई का रास्ता बनता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 69% बढ़कर ₹210.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट 88% बढ़कर ₹42.7 करोड़ रहा।

HBL Engineering

HBL Engineering को कवच का शुरुआती खिलाड़ी माना जाता है। कंपनी 2005 से इस तकनीक पर काम कर रही है। यह Kavach 4.0 का सर्टिफिकेशन हासिल करने वाली पहली कंपनी रही है।

22 जून 2026 तक HBL का ऑर्डर बुक ₹5,748 करोड़ था। कंपनी का अनुमान है कि FY26 से FY28 तक कवच से हर साल ₹1,300-1,500 करोड़ की बिक्री हो सकती है। साथ ही कंपनी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य रेल सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ा रही है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

कवच भारत के रेलवे सेक्टर में लंबे समय तक चलने वाली बड़ी थीम बन चुका है। इन तीनों कंपनियों ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है। लेकिन सिर्फ बड़े ऑर्डर मिलना ही काफी नहीं होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां समय पर प्रोजेक्ट पूरे कर पाती हैं या नहीं, वर्किंग कैपिटल को कैसे संभालती हैं और कवच के अलावा नए रेलवे सॉल्यूशंस में कितनी तेजी से विस्तार करती हैं।

फिलहाल, रेलवे सुरक्षा सेक्टर में दिलचस्पी रखने वाले निवेशको इन तीनों कंपनियों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। इससे सही समय पर एंट्री लेने में मदद मिल सकती है।

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