Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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अब नहीं मिलेगा LPG गैस सिलेंडर! सरकार का बड़ा आदेश- PNG कनेक्शन लेना जरूरी, वरना कट जाएगा कनेक्शन

LPG Control Order 2026 Rules: भारत सरकार ने देश में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी कर एलपीजी सिलेंडरों की जगह पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा देने को कहा है। इसके पीछे कई वजह आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है।

नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत अब उन इलाकों में जहां पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां एक साथ एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यानी आप अब LPG सिलेंडर नहीं यूज कार पाएंगे।

PNG लेना अनिवार्य, वरना कट जाएगा LPG सिलेंडर कनेक्शन

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, सरकार ने एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होने के नियमों को सख्त कर दिया है। जिन सोसायटियों या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां के उपभोक्ताओं को नोटिस दिया जाएगा। अगर तय नोटिस मिलने के बावजूद कोई उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसका LPG सिलेंडर कनेक्शन अपने आप रद्द कर दिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट संकट और भारत का बड़ा सबक

सरकार द्वारा पीएनजी पर अचानक इतना जोर देने की सबसे बड़ी वजह हालिया पश्चिम एशिया संकट और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में हुआ व्यवधान है। भारत अपनी घरेलू रसोई गैस (LPG) की जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट जंग के कारण एलपीजी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

आयातित एलपीजी की तुलना में घरेलू पीएनजी सप्लाई ज्यादा सुरक्षित और मजबूत साबित हुई क्योंकि इसे घरेलू प्राकृतिक गैस का प्राथमिकता आवंटन मिलता है। पीएनजी से अंतरराष्ट्रीय युद्ध और लॉजिस्टिक्स रुकावटों का असर नहीं पड़ता।

हर जिले में बनेगी ‘PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी’

पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने विशेष प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को हर क्षेत्र में ‘पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी’ (PCC) गठित करने का निर्देश दिया गया है।

राज्यों से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं जो आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटियों से परमिशन और राइट ऑफ वे दिलाने में मदद करेंगे।

पीएनजी अपनाने के 4 बड़े फायदे

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पीएनजी में शिफ्ट होने से आम जनता और देश दोनों को सीधा फायदा होगा:

सस्ता और सुविधाजनक: पीएनजी सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सस्ती, सुरक्षित और बिना रिफिलिंग के 24×7 मिलने वाली रसोई गैस है।

सिलेंडर बुकिंग का झंझट खत्म: उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने या डिलीवरी का इंतजार करने से मुक्ति मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स का बोझ कम: सड़कों पर सिलेंडरों के परिवहन और भारी-भरकम गाड़ियों का बोझ कम होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल: सरकारी और प्राइवेट कंपनियों द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने में किए गए अरबों रुपये के निवेश का सही उपयोग हो सकेगा।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 61% रिटर्न दे सकते हैं, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां चुनिंदा शेयरों पर बुलिश बनी हुई हैं। Jefferies और Macquarie समेत कई फर्मों ने इन स्टॉक्स पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इनमें सबसे ज्यादा अपसाइड Patanjali Foods में दिख रहा है, जहां करीब 61% तक रिटर्न की उम्मीद जताई गई है।

Divi’s Laboratories

ब्रोकरेज Macquarie ने फार्मा कंपनी Divi’s Laboratories पर 10,200 रुपये का टारगेट दिया है। इसमें मौजूदा स्तर से करीब 19% तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि कैपेक्स से कमाई बढ़ने और ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार से ग्रोथ तेज हो सकती है।

Larsen & Toubro

ब्रोकरेज Jefferies ने इंजीनियरिंग कंपनी Larsen & Toubro पर Buy रेटिंग के साथ 5,000 रुपये का टारगेट दिया है। यह करीब 23% का संभावित उछाल दिखाता है। मजबूत ऑर्डर बुक और भारत के कैपेक्स साइकल से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

TVS Motor Company

ब्रोकरेज Jefferies ने ऑटो कंपनी TVS Motor Company पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके लिए 5,425 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 24% रिटर्न दे सकता है। ब्रोकरेज को वॉल्यूम ग्रोथ और कमाई में मजबूत बढ़त की उम्मीद है।

Emmvee Photovoltaic Power

ब्रोकरेज Jefferies ने सोलर कंपनी Emmvee Photovoltaic Power पर Buy रेटिंग कायम रखी है। 440 रुपये का टारगेट मौजूदा स्तर से करीब 31% ऊपर है। मजबूत ऑर्डर बुक, TOPCon टेक्नोलॉजी और विस्तार योजनाओं को इसकी बड़ी ताकत माना गया है।

Patanjali Foods

ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG कंपनी Patanjali Foods पर Buy कॉल देते हुए 560 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 61% की तेजी का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई और पूंजी पर रिटर्न में मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है।

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NEW US Territory, होर्मुज पर ट्रंप का दावा, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

NEW US Territory, होर्मुज पर ट्रंप का दावा, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर होर्मुज जलडमरूमध्य की एक तस्वीर साझा की, जिसमें इसे “NEW US Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप के इस कदम से ईरान के साथ बढ़े तनाव के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिकी बयानबाजी और तीखी हो गई है।

 

ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। ट्रंप ने इससे पहले 18 अगस्त को भी यही तस्वीर साझा की थी। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में एक पुलिस अकादमी में भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।

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ईरान ने ट्रंप के दावे पर किया पलटवार

 

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने होर्मुज पर ट्रंप के दावे का जवाब देते हुए कहा कि जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में अमेरिका की असमर्थता और उस पर अपना अधिकार जताने के दावे के बीच बड़ा विरोधाभास है। रेजाई ने कहा कि फारस की खाड़ी में एक नए ‘पोस्ट-अमेरिकन ऑर्डर’ का स्वागत है। उन्होंने अमेरिकी दबाव के खिलाफ पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी है।

 

ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंधों की तैयारी

 

ट्रंप की ताजा पोस्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक टकराव के और गहराने की आशंका है। ईरान ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की निंदा की है। उसका कहना है कि नए प्रतिबंध उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकते हैं और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें चीन सबसे अहम है, जो ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है।

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अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने इन प्रतिबंधों को “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” बताया है। बेसेंट ने चीन से भी ईरान के तेल निर्यात को लेकर अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है।

 

ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज किया

 

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी अधिकार क्षेत्र को उसकी सीमाओं से बाहर लागू करने की कोशिश है। बघाई ने कहा कि इस तरह के द्वितीयक प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। वहीं, मोहन रेजाई ने पड़ोसी देशों को अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका के आर्थिक युद्ध का हिस्सा बनेंगे, उन्हें ईरान दुश्मन के रूप में देखेगा।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव का केंद्र

 

होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। ईरान का कहना है कि यह समुद्री मार्ग बंद है और उसने बिना अनुमति तेल टैंकरों के प्रवेश को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दी है। होर्मुज में आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। फिलहाल केवल कुछ ही कमोडिटी जहाज इस जलमार्ग से गुजर पाए हैं, जबकि बड़े कच्चे तेल के टैंकर और LNG जहाज काफी हद तक यहां से दूर हैं।

बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा

बांग्लादेश के उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में देश के 7 प्रमुख औद्योगिक इलाकों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 गारमेंट उद्योग से जुड़ी यूनिट्स शामिल हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं और 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। बंद फैक्ट्रियों का संकट सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं पिछले दो साल में बंद हुई 457 फैक्ट्रियों में कपड़ा और गारमेंट से जुड़ी फैक्ट्रियों के साथ दूसरे उद्योगों की इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं। यानी बांग्लादेश में उद्योगों की मुश्किल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है। गैस की कमी ने संकट और बढ़ाया सबसे बड़ी परेशानी ऊर्जा की कमी को लेकर है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर में गैस का दबाव इतना कम हो गया कि 700 से 800 फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा या कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा। गैस की कमी से बॉयलर और दूसरी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घटता है और फैक्ट्रियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं विदेशी खरीदार गैस की कमी से अभी जो फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके लिए ज्यादा दिन तक काम रोकना मुश्किल हो सकता है। फैक्ट्री बंद होने के बाद भी कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक का कर्ज और बाकी खर्च देने पड़ते हैं। गैस की जगह डीजल या एलपीजी से काम चलाने पर खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर संकट लंबा चला तो कई फैक्ट्रियों के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों में कामकाज पर नहीं पड़ रहा है। इससे बांग्लादेश के लिए विदेशी कंपनियों से कारोबार हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है। अगर फैक्ट्रियां समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर पाईं तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की कमाई घटेगी और कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और बाकी खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा। गैस नहीं मिली तो कपड़ा उद्योग पर और संकट बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार कपड़ों का बड़ा हिस्सा है। इनके लिए धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और दूसरे शुरुआती काम करने वाली फैक्ट्रियां जरूरी हैं। अगर इन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिली तो आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होगा। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने इन इकाइयों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने की मांग की है। उद्योग संगठनों ने सरकार से यह भी कहा है कि फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी दी जाए, ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन की तैयारी कर सकें। इसके अलावा गैस संकट से परेशान छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में कुछ समय की राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवाद जल्द सुलझाने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस और बिजली का संकट कब तक बना रहता है। अभी कई फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर रहे, तो आर्थिक दबाव झेल रही कई और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसका असर सिर्फ रोजगार पर नहीं पड़ेगा। स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

Hyderabad Building Collapse: 7 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 2 की मौत; नाले के पास हो रहा था निर्माण

Hyderabad Building Collapse: हैदराबाद के अंजैया नगर में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। हादसे में कम से कम दो लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। बता दें कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह माधापुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी है।

हैदराबाद में गिरी इमारत: वीडियो में दिखा नुकसान का मंजर

खबरों के मुताबिक, गिरी हुई इमारत लगभग 50 वर्ग गज के प्लॉट पर बन रही थी और एक नाले के पास स्थित थी। निर्माण से जुड़ी परिस्थितियों ने बिल्डिंग और सुरक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब अधिकारी यह जांच करेंगे कि इमारत के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी या नहीं और निर्माण के दौरान नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

हैदराबाद में गिरी इमारत: नाले के पास बनी थी गिरी हुई इमारत

इस घटना में आस-पास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि व्हाइटफील्ड में पास के एक अपार्टमेंट पर गिरे इमारत के मलबे से उसे काफी नुकसान हुआ। एहतियात के तौर पर पास के एक हॉस्टल को भी खाली कराया गया।

फिलहाल, अधिकारी अभी तक इमारत गिरने की सही वजह का पता नहीं लगा पाए हैं। वहीं, हादसे में नुकसान कितना हुआ है और घटना के समय इमारत के अंदर कितने लोग हो सकते थे, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

एक विस्तृत जांच से यह भी पता चलने की उम्मीद है कि क्या इमारत के ढांचे में कमी, निर्माण से जुड़े नियमों का उल्लंघन या अन्य कारणों से यह हादसा हुआ।

बता दें कि हैदराबाद में निर्माण से जुड़ा यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। मार्च 2026 में टोलिचौकी इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत की स्कैफोल्डिंग (बांस-बल्लियों/लोहे के सहारे की संरचना) गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने पाया था कि इमारत को सिर्फ दो मंजिल बनाने की अनुमति मिली थी, लेकिन कथित तौर पर चार अतिरिक्त मंजिल और एक पेंटहाउस अवैध तरीके से बना दिया गया था। हादसे के वक्त मजदूर छठी मंजिल पर काम कर रहे थे।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 की एक और घटना में तेलंगाना के भद्राचलम में बन रही छह मंजिला इमारत की ऊपरी चार मंजिला ढह गईं। पुलिस ने बताया कि ये मंजिले गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई थीं और इमारत ढहने के बाद कम से कम दो मजदूरों की मौत की आशंका जताई गई।

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तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, 1.28 लाख रिंग का वर्क ऑर्डर जारी

तमिलनाडु सरकार ने नवजात बच्चों के लिए शुरू की जाने वाली ‘मामा गोल्ड रिंग योजना’ के तहत करीब 1.28 लाख सोने की अंगूठियां बनवाने का ऑर्डर दिया है। इन अंगूठियों पर करीब 220 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार ने इसके लिए दो बड़ी ज्वेलरी रिटेल चेन को काम सौंपा है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

इस योजना के तहत चार महीने के दौरान एक लाख से ज्यादा नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी दी जाएगी। सरकार इस कल्याणकारी योजना की शुरुआत 15 सितंबर से करने जा रही है। इसी दिन द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता सीएन अन्नादुरई की जयंती भी है।

बता दें कि नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का यह वादा टीवीके (TVK) के चुनावी घोषणापत्र में शामिल था।

22 जून से अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ

इस स्कीम का फायदा उन नवजात बच्चों को मिलेगा जो 22 जून को सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का जन्मदिन भी है।

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, लगभग 128.5 किलोग्राम वजन वाली 1,28,499 अंगूठियों (22-कैरेट) की लागत 220 करोड़ रुपये होगी और तमिलनाडु सरकार ने कुल 4,41,667 अंगूठियों (एक साल के लिए) की सप्लाई के लिए 755.83 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

हालांकि, अंगूठियों के शुरुआती बैच की अंतिम लागत में बदलाव हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने मौजूदा बाजार दरों पर सोने का भुगतान करने का जिम्मा लिया है।

गोल्ड रिंग सप्लाई का जिम्मा दो कंपनियों को मिला

अंगूठियां बनाने और सप्लाई करने में जॉयअलुक्कास (Joyalukkas) को 70 फीसदी और कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers) को 30 फीसदी हिस्सा मिला है। इसके तहत जॉयअलुक्कास करीब 89,949 अंगूठियां, जबकि कल्याण ज्वेलर्स 38,550 अंगूठियां तैयार करेगा।

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में आज की बाजार दर के हिसाब से, इस स्कीम के तहत एक सोने की अंगूठी की लागत सरकार को लगभग 14,850 रुपये प्रति ग्राम पड़ेगी।

सरकार ने शुक्रवार देर रात बताया कि तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (TNMSC) ने जून से सितंबर तक लाभार्थियों के लिए जरूरी 1,28,499 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के लिए जोयालुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में वर्क ऑर्डर जारी किए हैं।

सीएम विजय ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का किया था ऐलान

बता दें कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का ऐलान किया था, जिसका लाभ सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा। इस योजना का मकसद सरकारी अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देना है।

सरकार की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, “एक-एक ग्राम वजन वाली 4,41,667 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के सरकारी आदेश के बाद, 11 कंपनियों ने 14 जुलाई को तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के टेंडर में हिस्सा लिया और TN टेंडर्स पोर्टल के जरिए अपनी कीमत की जानकारी जमा की।”

जॉयअलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर सिर्फ 0.01 रुपये की सबसे कम बोली लगाई। इसमें प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्टेशन और BIS हॉलमार्किंग जैसे सभी अतिरिक्त खर्च शामिल थे।

सरकार ने बताया कि जब संबंधित कानूनों के तहत 10 अन्य बोलीदाताओं को जीतने वाली कीमत के बारे में बताया गया, तो कल्याण ज्वैलर्स ने भी उसी कीमत की बोली लगाई।

सरकार ने कहा, “थाईमामन गोल्ड रिंग स्कीम को तमिलनाडु सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा बढ़ाने, सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चे के जन्म को यादगार बनाने और मातृत्व की खुशी व महत्व का जश्न मनाने के लिए लागू किया जा रहा है।”

1 पैसे की बोली पर विधानसभा में हंगामा

इस हफ्ते विधानसभा में इस स्कीम के टेंडर को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्षी पार्टियों DMK और AIADMK ने खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और “टेंडर के बहुत ही अजीब नतीजे” के बारे में पूछा, क्योंकि सफल बोली लगाने वाले ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹0.01 (एक पैसा) की बोली लगाई थी।

विपक्षी पार्टियों के अनुसार, दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹410.97 से लेकर ₹15,000 से ज्यादा तक की बोली लगाई थी।

जॉयलुक्कास ने एक बयान में कहा: “इस टेंडर की कीमत लगभग 755 करोड़ रुपये है, जिसमें सोने की कीमत कुल खरीद मूल्य का मुख्य हिस्सा है।” कंपनी ने कहा कि उसने “मौजूदा सोने की कीमत से सिर्फ 1 पैसा ज्यादा का सांकेतिक सर्विस चार्ज” कोट किया था।

वहीं, विपक्ष ने सवाल उठाया कि यह खरीद तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के जरिए क्यों की गई और तर्क दिया कि TNMSC को सिर्फ दवाइयां, मेडिकल उपकरण खरीदने और हेल्थकेयर बिल्डिंग बनाने के लिए बनाया गया था।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह योजना राज्य की हेल्थकेयर सेवाओं में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है।

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iPhone 18 Pro Max में Apple करने वाला है बड़ा खेल! कैमरे से लेकर डिस्प्ले तक में होंगे ये बदलाव

उम्मीद है कि Apple अपने सालाना सितंबर लॉन्च इवेंट में iPhone 18 Pro Max को पेश करेगा। इस इवेंट में कंपनी iPhone 18 Pro और एक नया iPhone Ultra भी लॉन्च कर सकती है। हालांकि Apple ने अभी तक इस इवेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह इवेंट 9 सितंबर को हो सकता है। इसके बाद उसी हफ्ते प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और महीने के आखिर तक बिक्री भी शुरू होने की उम्मीद है।

मौजूदा लीक और रिपोर्ट्स के आधार पर iPhone 18 Pro Max से क्या-क्या उम्मीदें हैं, आइए उन पर एक नजर डालते हैं।

अनुमानित लॉन्च डेट

Apple हर साल सितंबर में अपने नए फ्लैगशिप iPhone लॉन्च करता है। इस साल भी कंपनी इसी परंपरा को जारी रख सकती है। अगर सामने आ रही रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो iPhone 18 Pro Max को 9 सितंबर को कैलिफोर्निया के क्यूपर्टिनो स्थित Steve Jobs Theatre में लॉन्च किया जा सकता है।

यह इवेंट Apple के CEO John Ternus के कार्यकाल में होने वाला कंपनी का पहला iPhone लॉन्च भी हो सकता है।

डिजाइन और डिस्प्ले

iPhone 18 Pro Max के डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। इसके बजाय, Apple पिछली जेनरेशन के डिजाइन को ही बरकरार रख सकता है और इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव कर सकता है।

लीक से पता चलता है कि फोन में 6.9-इंच का LTPO OLED डिस्प्ले हो सकता है, जिसमें ProMotion टेक्नोलॉजी और 120Hz तक का अडैप्टिव रिफ्रेश रेट होगा। Apple के आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए पीक ब्राइटनेस को भी बेहतर बनाने की उम्मीद है। जहां कुछ रिपोर्ट में छोटे Dynamic Island का संकेत मिलता है, वहीं दूसरी रिपोर्ट बताती हैं कि यह बदलाव आने वाली किसी दूसरी जेनरेशन में देखने को मिल सकता है।

नया A20 Pro प्रोसेसर

iPhone 18 Pro Max में Apple का A20 Pro चिपसेट होने की उम्मीद है, जो खबरों के अनुसार 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर बेस्ड है।

इस प्रोसेसर के साथ 12GB RAM मिल सकती है, जिससे मल्टीटास्किंग बेहतर होने के साथ फोन में AI से जुड़े काम भी तेजी से किए जा सकेंगे। नया चिपसेट ग्राफिक्स परफॉर्मेंस, पावर एफिशिएंसी और फोन की ओवरऑल स्पीड को भी बेहतर बना सकता है।

कैमरा अपग्रेड

उम्मीद है कि Apple कैमरे में सुधार पर ध्यान देगा, खासकर Pro Max मॉडल के लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्मार्टफोन में वेरिएबल अपर्चर वाला कैमरा हो सकता है, जिससे यूजर्स सेंसर में आने वाली रोशनी की मात्रा को एडजस्ट कर सकेंगे। इससे डेप्थ ऑफ फील्ड और कम रोशनी में फोटोग्राफी पर बेहतर कंट्रोल मिलेगा।

इसके अलावा, इस फोन में ट्रिपल-कैमरा सेटअप बरकरार रहने की उम्मीद है, साथ ही A20 Pro चिप की वजह से बेहतर इमेज प्रोसेसिंग का फायदा भी मिलेगा, जिससे फोटो और वीडियो दोनों की क्वालिटी बेहतर होगी।

बैटरी और चार्जिंग

बैटरी की क्षमता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि Apple बैटरी का साइज बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान देगा।

A20 Pro प्रोसेसर और iOS में सुधार के कॉम्बिनेशन से बैटरी लाइफ बेहतर होने की उम्मीद है।

भारत में अनुमानित कीमत

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro Max अपने पिछले मॉडल से महंगा होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple दुनिया भर में इसकी कीमत में लगभग $200 की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे भारत में भी इसकी लॉन्च कीमत 20,000 रुपये तक बढ़ सकती है।

लॉन्च से पहले की सभी जानकारियों की तरह, ये डिटेल्स भी लीक और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। उम्मीद है कि Apple सितंबर में होने वाले लॉन्च इवेंट के दौरान इसके स्पेसिफिकेशन्स, कीमत और उपलब्धता की पुष्टि करेगा।

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10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा भेजना पड़ा भारी, ग्राहक की शिकायत पर मिला 10,520 रुपये का मुआवजा

सोचिए, आपने अपनी पसंद का पिज्जा ऑर्डर किया हो, उसकी पूरी कीमत चुकाई हो और डिलीवरी का इंतजार भी किया हो। लेकिन जब डिब्बा खुले तो सामने आया पिज्जा उम्मीद से काफी छोटा हो। उत्तराखंड के एक ग्राहक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब उसने 10 इंच का पिज्जा मंगाया, लेकिन उसे कथित तौर पर 7 इंच का पिज्जा मिला। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग शिकायत करके या रिफंड मांगकर मामला खत्म कर देते हैं। लेकिन इस ग्राहक ने इसे सिर्फ छोटी सी गलती मानकर छोड़ने के बजाय अपनी शिकायत को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

उसने पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर मामला उठाया और जब बात नहीं बनी तो उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामला वहां पहुंचने के बाद सिर्फ पिज्जा के साइज का विवाद नहीं रहा, बल्कि ग्राहक के अधिकार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी गई जानकारी के मुताबिक सामान मिलने की जिम्मेदारी का सवाल भी बन गया। अब इस मामले में आयोग का फैसला चर्चा में है।

रिफंड नहीं मिला तो बढ़ाया मामला

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। इनकी कुल कीमत ₹505 थी और ऐप पर पिज्जा का साइज 10 इंच बताया गया था। डिलीवरी मिलने के बाद ग्राहक ने पिज्जा का साइज देखा तो उसे वह काफी छोटा लगा। उसका आरोप था कि पिज्जा सिर्फ 7 इंच का था। उसने तुरंत ऐप के ग्राहक सहायता केंद्र पर शिकायत की और रिफंड की मांग की। शिकायत के बावजूद जब मामला हल नहीं हुआ, तो उसने आगे शिकायत करने का फैसला किया।

हेल्पलाइन से लेकर उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा

ग्राहक ने पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने सीपीजीआरएएमएस के जरिए भी शिकायत की और संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस भेजा।

जब इन कोशिशों के बाद भी रिफंड नहीं मिला, तो उसने हरिद्वार जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामला दर्ज करा दिया।

डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने दी ये दलील

सुनवाई के दौरान ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ने कहा कि वह सिर्फ ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच एक माध्यम है। कंपनी के मुताबिक, पिज्जा बनाने, पैक करने और बेचने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है।वहीं, संबंधित रेस्टोरेंट ने मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद आयोग ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की।

आयोग ने कंपनी की दलील नहीं मानी

आयोग ने शिकायतकर्ता और डिलीवरी प्लेटफॉर्म की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और हलफनामों की जांच की। इसमें पाया गया कि ग्राहक को मिला पिज्जा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बताए गए साइज से अलग था। आयोग ने यह भी माना कि शिकायत करने के बाद ग्राहक को रिफंड नहीं दिया गया। डिलीवरी प्लेटफॉर्म का यह कहना कि वह सिर्फ एक माध्यम है, आयोग को स्वीकार नहीं हुआ।

आयोग के अनुसार, ग्राहक का ऑर्डर स्वीकार करने, रेस्टोरेंट से तालमेल करने और उसे ग्राहक तक पहुंचाने में प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए वह पूरी सेवा प्रक्रिया का हिस्सा है।

3 इंच छोटे पिज्जा को माना सेवा में कमी

आयोग ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जिस साइज का पिज्जा दिखाया गया था, ग्राहक को उसके मुताबिक पिज्जा नहीं मिला। 10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य डॉ. अमरेश रावत व रंजना गोयल ने की।

₹505 के ऑर्डर पर मिलेंगे ₹10,520

ग्राहक ने पिज्जा के लिए ₹505 और ₹15 डिलीवरी शुल्क का भुगतान किया था। लेकिन आयोग के आदेश के बाद उसे सिर्फ पिज्जा की रकम वापस नहीं मिलेगी। आयोग ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट को संयुक्त रूप से ₹10,520 देने का आदेश दिया है। यह रकम 45 दिनों के भीतर देनी होगी।

इसमें ₹520 पिज्जा और डिलीवरी शुल्क के लिए, ₹5,000 मानसिक और शारीरिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर और ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में शामिल हैं।

यानी 10 इंच के पिज्जा की जगह 7 इंच का पिज्जा मिलने से शुरू हुआ विवाद आखिरकार ग्राहक को मूल ऑर्डर की कीमत से 20 गुना से भी ज्यादा रकम मिलने के आदेश तक पहुंच गया।

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iPhone 18 Pro की लॉन्च डेट से कीमत तक लीक हुए बड़े डिटेल, जानें क्या-क्या मिलेगा नया

Apple अगले महीने iPhone 18 Pro से पर्दा उठा सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी के हर साल होने वाले सितंबर इवेंट में नई प्रीमियम iPhone सीरीज पेश की जाएगी। हालांकि, Apple ने अभी तक इस इवेंट या नए iPhone को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

कई रिपोर्ट्स और लीक्स की मानें तो इस बार नई सीरीज में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और एक नया iPhone Ultra देखने को मिल सकता है। वहीं, सामान्य iPhone 18 को बाद में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि iPhone 18 Pro में क्या खास मिल सकता है, तो मौजूदा लीक्स और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के आधार पर फोन से जुड़ी अब तक सामने आई सभी संभावित जानकारियां यहां दी गई हैं।

संभावित लॉन्च डेट

Apple आम तौर पर सितंबर में नए iPhone लॉन्च करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल का इवेंट 9 सितंबर को कैलिफ़ोर्निया के क्यूपर्टिनो में स्टीव जॉब्स थिएटर में हो सकता है। अब अगर Apple अपने तय शेड्यूल के हिसाब से चलता है, तो घोषणा के कुछ दिन बाद ही प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और महीने के आखिर में ये फोन रिटेल में उपलब्ध हो सकते हैं।

यह इवेंट इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि Tim Cook के कार्यकाल के बाद Apple के नए CEO John Ternus के नेतृत्व में यह कंपनी का पहला बड़ा iPhone लॉन्च हो सकता है।

डिजाइन और डिस्प्ले

iPhone 18 Pro के डिजाइन में इस बार कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलने की उम्मीद नहीं है। लीक्स के मुताबिक, Apple iPhone 17 Pro के डिजाइन को ही आगे बढ़ा सकती है, हालांकि फोन के लुक में कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर किए जा सकते हैं।

अटकलें हैं कि इस स्मार्टफोन में ProMotion टेक्नोलॉजी वाला 6.3-इंच का LTPO OLED डिस्प्ले होगा, जो 120Hz तक का अडैप्टिव रिफ्रेश रेट देगा। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि Apple आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए पीक ब्राइटनेस लेवल को बेहतर बना सकता है।

कुछ अफवाहों का दावा है कि Dynamic Island छोटा हो सकता है, हालांकि इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना ​​है कि ऐसा बदलाव शायद iPhone की किसी आने वाली जेनरेशन में ही देखने को मिले।

परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro में Apple का अगली पीढ़ी का A20 Pro प्रोसेसर होगा, जिसे खबरों के अनुसार 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से बनाया जाएगा।

इस चिपसेट के साथ 12GB RAM होने की उम्मीद है, जिससे ऑन-डिवाइस AI फीचर्स और मल्टीटास्किंग के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। नए प्रोसेसर से पिछली पीढ़ी की तुलना में पावर एफिशिएंसी, ग्राफिक्स परफॉर्मेंस और कनेक्टिविटी में भी सुधार होने की उम्मीद है।

Apple iOS में AI क्षमताओं का विस्तार जारी रख सकता है। इसके अलावा, अपग्रेडेड हार्डवेयर से ज्यादा एडवांस्ड ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

कैमरा अपग्रेड

उम्मीद है कि कैमरे में होने वाले सुधार पूरी तरह से हार्डवेयर को फिर से डिजाइन करने के बजाय इमेज क्वालिटी पर फोकस्ड होंगे।

iPhone 18 Pro में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप बरकरार रहने की संभावना है, और रिपोर्ट्स में बेहतर सेंसर, खासकर टेलीफोटो कैमरे के लिए, होने का संकेत दिया गया है। कुछ लीक से पता चलता है कि Apple बड़े Pro Max मॉडल के लिए वेरिएबल अपर्चर कैमरा सिस्टम रख सकता है, जबकि स्टैंडर्ड Pro मॉडल में यह फीचर नहीं होगा।

Apple से ऐसे सॉफ्टवेयर सुधार लाने की भी उम्मीद है जो फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग को बेहतर बनाएंगे। इसमें A20 Pro चिप की नई इमेज प्रोसेसिंग क्षमताएं मदद करेंगी।

बैटरी और चार्जिंग

हालांकि, बैटरी की क्षमता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 18 Pro में 5,000mAh की बैटरी होने की संभावना कम है। इसके बजाय, उम्मीद है कि Apple A20 Pro प्रोसेसर और iOS ऑप्टिमाइजेशन के कॉम्बिनेशन से परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान देगा।

इन बदलावों से बैटरी का साइज ज्यादा बढ़ाए बिना ही बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

अनुमानित कीमत

इस साल कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि Apple, iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत को पिछले मॉडल के मुकाबले लगभग $100 तक बढ़ा सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो भारत में भी इसकी कीमत बढ़ सकती है और शुरुआती कीमत 1.5 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, Apple ने कीमत के बारे में अभी कोई जानकारी कन्फर्म नहीं की है।

ध्यान रखें कि लॉन्च से पहले सामने आई ये सभी जानकारियां लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसलिए फोन के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत को लेकर अंतिम जानकारी Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

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