BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया

आज के दौर में जब ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट्स छुट्टियों में घूमने-फिरने या आराम करने की सोचते हैं। वहीं, बेंगलुरु के एक BBA सेकंड ईयर के स्टूडेंट ने कुछ अलग करने का फैसला किया। पहले सास की परीक्षाएं खत्म होने के बाद मिले लगभग 3 महीने के वेकेशन में उसने सड़कों पर उतर रैपिडो बाइक चलाने का फैसला किया। इसके बाद इस छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी इस 3 महीने की यात्रा की पूरी कहानी बताई। छात्र ने अपनी पोस्ट में रोज की कमाई, ऐप के एल्गोरिदम, रेस्टोरेंट के चक्करों और गिग वर्कर्स की जिंदगी की कठिनाई को विस्तार से बताया है।

सुबह 8 से शाम 4:30 बजे की ड्यूटी और ₹1200 की रोजाना कमाई

स्टूडेंट ने बताया कि वह सुबह लगभग 8 बजे ऐप पर ऑनलाइन होता था और शाम 4:30 बजे तक काम करके घर लौट आता था। यानी वह रोज करीब 8.5 घंटे सड़कों पर बिताता था। शुरुआत में उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रैपिडो का प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम कैसे काम करता है। लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि शहर के किस इलाके में और किस समय राइड्स की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। जैसे ही उसने एल्गोरिदम का को समझ लिया, उसकी कमाई आसान हो गई। एक दिन में वह रोजाना करीब ₹1200 तक कमा लेता था। छात्र के लिए पॉकेट मनी और साइड हसल के तौर पर यह कमाई काफी अच्छी थी।

पर क्या सबकुछ अच्छा ही था? गिग वर्कर्स की असली मजबूरी समझिए

इस तजुर्बे ने छात्र को उन लोगों की जिंदगी के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया जो पूरी तरह से डिलीवरी या राइड-शेयरिंग पर ही निर्भर हैं। उसने बताया कि 8.5 घंटे के दौरान वह कभी ब्रेक नहीं लेता था या तो वह बाइक चला रहा होता था या फिर अगली राइड का इंतजार कर रहा होता था। छात्र का कहना है कि वह छुट्टियों में सिर्फ एक्सपीरियंस और पॉकेट मनी के लिए यह काम कर रहा था, इसलिए उसके पास किसी भी वक्त काम बंद करके घर जाने का विकल्प था। लेकिन जो लोग अपने परिवार को पालने के लिए फुल-टाइम यह काम करते हैं, उनके पास घर लौटने का ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

छात्र ने ऐप के सिस्टम पर भी नाराजगी जताई। उसने लिखा कि कैप्टन (ड्राइवर) का अपनी राइड्स पर कोई कंट्रोल नहीं होता। अगर कोई ग्राहक राइड कैंसिल कर देता है, तो उसकी गलती न होने के बावजूद ड्राइवर की रेटिंग खराब हो जाती है। किसी भी समस्या के समय ऐप से सही कस्टमर सपोर्ट पाना किसी बुरे सपने जैसा है।

दोपहर में जब राइड कम तो आजमाई ये ट्रिक

स्टूडेंट की पोस्ट के मुताबिक दोपहर 12 से 3 बजे के बीच राइड्स काफी कम हो जाती थीं, इसलिए वह इस दौरान फूड ऑर्डर डिलीवर करने लगा। उसने बताया कि रेस्टोरेंट का अनुभव एकदम अलग होता था। कभी खाना तुरंत मिल जाता तो कभी 20-25 मिनट तक खड़े होकर इंतजार करना पड़ता। अपने इस सफर की एक सबसे हैरान कर देने वाली घटना का जिक्र करते हुए उसने बताया कि रैपिडो के जरिए स्विगी का एक फूड ऑर्डर लिया था क्योंकि उसकी ड्रॉप लोकेशन लड़के के घर के पास थी।

वो एक आइसक्रीम शॉप से जुड़ा ऑर्डर था। पर जब वो आइसक्रीम शॉप पहुंचा तो वहां बिजली नहीं थी। उनकी मशीनें और कंप्यूटर बंद थे। वे ऑर्डर तैयार नहीं कर सकते थे। दुकान वालों ने उससे कहा कि उसे स्विगी को कॉल करके ऑर्डर कैंसिल कराना होगा।

उसने स्विगी को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि वे इसे कैंसिल नहीं कर सकते और उसे रैपिडो से संपर्क करना होगा। फिर उसने रैपिडो को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि यह स्विगी का ऑर्डर है इसलिए स्विगी से बात करो। कुल मिलाकर वो स्विगी और रैपिडो के इस इन्फिनिट लूप में फंस गया और 45 मिनट तक परेशान होता रहा। आखिरकार उसने देखा कि डिलीवरी लोकेशन एक ट्यूशन सेंटर की थी। उसने गूगल मैप्स पर ट्यूशन सेंटर का नंबर ढूंढा और उन्हें सीधे कॉल करके पूरी बात बताई। इसके बाद ट्यूशन सेंटर वालों ने रेस्टोरेंट स्टाफ से बात की और तब जाकर ऑर्डर कैंसिल हुआ।

छात्र ने बताया कि सबसे अजीब बात यह है कि रैपिडो तब तक कस्टमर का कांटेक्ट नंबर नहीं दिखाता जब तक आप खाना पिक न कर लें (जिसके लिए रेस्टोरेंट के ओटीपी की जरूरत होती है)। अगर वह ड्रॉप लोकेशन कोई रैंडम घर होता तो वह शायद कुछ नहीं कर पाता।

ऑटो ड्राइवरों लड़ाई हो जाने का भी खतरा

बेंगलुरु में अक्सर बाइक टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। छात्र ने बताया कि 3 महीनों के दौरान वह मजेस्टिक, रेलवे स्टेशनों और दूसरे बिजी इलाकों में नियमित रूप से ऐप लॉगिन करता था। ऑटो वाले कई बार उसे घूर-घूरकर ऐसे देखते थे मानो उसे स्कैन कर रहे हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि पूरे 3 महीनों में किसी भी ऑटो वाले ने उसे कभी धमकी नहीं दी और न ही कोई विवाद हुआ।

ग्राहकों के साथ उसका अनुभव काफी अच्छा रहा। उसने रास्ते में कई अनजान यात्रियों के साथ दिलचस्प बातचीत की और किसी भी ग्राहक के साथ उसका कोई कड़वा अनुभव नहीं रहा। उसने यह काम आरटीओ और बैन वाले हालिया विवादों से पहले ही खत्म कर लिया था, इसलिए उसे उस तरह की किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

3 महीने के सफर से मिला जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

इस BBA छात्र का मानना है कि यह 3 महीने का सफर सिर्फ ₹1200 रोज कमाने के बारे में नहीं था। इसने उसे जमीनी हकीकत दिखाई। राइड के लिए लंबा इंतजार, पेट्रोल का खर्च, अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म के कड़े नियम, रेस्टोरेंट की परेशानियां और लगातार चलते रहने का मानसिक दबाव जैसी जमीनी हकीकतों से उसे रुबरू होना पड़ा।

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रेडिट पोस्ट के आखिर में उसने अपने इस अनुभव का सबसे बड़ा हासिल बताते हुए लिखा है कि ‘एक स्टूडेंट के तौर पर 3 महीने के लिए गिग वर्क करना और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे मजबूरी में करना, दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। मेरे लिए यह महज एक साइड हसल था, लेकिन किसी और के लिए वही ₹1,200 उसके घर के बिल भरने और भूखे रहने के बीच का इकलौता सहारा हो सकते हैं।’

गिरते बाजार में भी इन शेयरों ने दिखाया दम, बड़े ऑर्डर मिलने से आई 10% तक तेजी

शेयर बाजारों में गिरावट के बीच भी कई शेयरों ने धमाल मचाया। कुछ शेयरों की कीमतें 10 फीसदी तक उछल गईं। दरअसल, बड़े ऑर्डर मिलने से इन कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई। इनमें रेलटेल कॉर्पोरेशन, अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स, एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयर शामिल थे।

रेलटेल कॉर्पोरेशन का शेयर 10 फीसदी तक उछला

19 अगस्त को लगातार छठे दिन शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी और सेंसेक्स लाल निशान में थे। लेकिन, RailTel Corporation of India का शेयर 10 फीसदी तक चढ़ गया। हालांकि, बाद में शेयर में थोड़ी नरमी आई। 11:30 बजे यह 3.45 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर करीब 23 फीसदी गिरा है। रेलटेल कॉर्पोरेशन को एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) से 166.8 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।

बड़ा ऑर्डर मिलने का असर अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स के शेयर पर भी

Atlanta Electricals के शेयरों को भी आज पंख लग गए। इसकी वजह कंपनी को मिला 193.92 करोड़ रुपये का एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) है। यह ऑर्डर कंपनी को आंध्र प्रदेश के ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन से मिला है। इसके तहत कंपनी 160 एमवीए, 220/132 केवी ऑटो ट्रांसफॉर्म्स की 12 यूनिट की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और सप्लाई करेगी। अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स का शेयर बाजार खुलते ही रॉकेट बन गया था। हालांकि, बाद में यह लाल निशान में आ गया।

इंटरआर्क बिल्डिंग के शेयरों को भी बड़ा ऑर्डर मिलने से लगे पंख

Interarch Building Solutions के शेयर में भी सुबह में जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह कंपनी को मिला 128 करोड़ रुपये का एक ऑर्डर है। यह ऑर्डर एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी से मिला है। इसके तहत इंटरआर्क प्री-इंजीनियर्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाएगी। यह प्रोजेक्ट 10 महीने में पूरा होगा। कंपनी का शेयर सुबह में 1,771 रुपये पर पहुंच गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ गई।

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एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग को REC से मिला बड़ा ऑर्डर

एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयरों को भी 19 अगस्त की सुबह पंख लग गए। इसकी वजह कंपनी को मिला एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) है। यह REC Power Development and consultancy से मिला है। इसके तहत कंपनी यूपी के मऊ और मिर्जापुर में दो सबस्टेशंस बनाएगी। 19 अगस्त की सुबह कंपनी का शेयर एक समय 559 रुपये पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी कम हुई। यह 5.32 फीसदी चढ़कर 534.70 रुपये पर चल रहा था।

Shiprocket IPO Listing: ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

Shiprocket IPO Listing: ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी शिपरॉकेट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 102 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹97 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹129.50 और NSE पर ₹131.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 11% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹135.08 (Shiprocket Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 39.26% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹9 के डिस्काउंट पर मिला है।

Shiprocket IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

शिपरॉकेट का ₹1,617 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 102.28 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 125.20 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 92.58 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 48.38 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 58.85 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹885 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 7,54,62,363 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹365.60 करोड़ उभरते हुए और कोर बिजनेस के शिपरॉकेट प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ में निवेश, ₹205.80 करोड़ मार्केटिंग, ₹159.80 करोड़ टेक इंफ्रा और कैपेबिलिटीज में निवेश, ₹210.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, और बाकी पैसे इनऑर्गेनिक ग्रोथ और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Shiprocket के बारे में

शिपरॉकेट एक भारतीय ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी है जो कंपनियों को टेक सॉल्यूशंस देती है। यह MSMEs (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज), D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को उनके ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजनेस को मैनेज करने और बढ़ाने में मदद करती है। रेडशियर रिपोर्ट (Redseer Report) के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू के हिसाब से यह देश की सबसे न्यू-एज एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म थी।

कंपनी ने शुरुआत में एक शिपिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करना शुरू किया था। इसकी मुख्य सर्विसेज में घरेलू शिपिंग और शिपिंग सॉफ्टवेयर शामिल हैं, जो इंस्टेंट पिकअप, ऑर्डर ट्रैकिंग, सुरक्षित डिलीवरी, वजन की जांच और फास्ट COD (कैश-ऑन-डिलीवरी) पेमेंट सेटलमेंट जैसी सर्विसेज देती है। समय के साथ इसका कारोबार बढ़ता गया और यह कार्गो और फुलफिलमेंट सर्विसेज, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग सॉल्यूशंस, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग सॉल्यूशंस, और मर्चेंट सॉल्यूशंस देती है। वित्त वर्ष 2026 में इसने 146 देशों में क्लाइंट्स को सर्विसेज दी। शिपरॉकेट को मुख्य रूप से यूजेज-बेस्ड प्राइसिंग मॉडल से रेवेन्यू मिलता है जिसमें मर्चेंट्स इस आधार पर पेमेंट करते हैं कि वे प्लेटफॉर्म का कितना इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि शिपमेंट की संख्या, ट्रांज़ैक्शन या प्रोसेस किए गए ऑर्डर की वैल्यू।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है लेकिन कंपनी तीन वित्त वर्षों से लगातार घाटे में बनी हुई है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ₹595.18 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था जोकि वित्त वर्। 2025 में घटकर ₹74.45 करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹79.25 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना करीब 24% की रफ्तार यानी सीएजीआर से ₹2,077.42 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹242.01 करोड़ का टोटल कर्ज था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 19 अगस्त को इन 12 शेयरों पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 19 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों ने बड़े फैसलों और ऑर्डर की जानकारी दी है। इनमें फंड जुटाने, नए कॉन्ट्रैक्ट, ग्रीन एनर्जी निवेश और रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने जैसे अपडेट शामिल हैं। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Bharat Petroleum

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी Bharat Petroleum (BPCL) ने ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कंपनी अपनी फंडिंग जरूरतें पूरी करेगी।

RailTel

सरकारी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RailTel को EPFO से ₹166.8 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर टैक्स समेत है। इससे कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिल सकती है।

Aster DM Quality Care

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM Quality Care में 7.2% हिस्सेदारी करीब ₹4,780 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए बिक सकती है। यह हिस्सेदारी TPG Inc. से जुड़ी Centella Mauritius Holdings बेच सकती है। डील का फ्लोर प्राइस ₹766.10 प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछले NSE क्लोजिंग प्राइस से करीब 6.3% कम है।

Krystal Integrated Services

फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी Krystal Integrated Services को MSRTC से करीब ₹134 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के तय क्षेत्रों में तीन साल तक इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देगी। यह ऑर्डर 18 अगस्त को सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया।

Atlanta Electricals

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी Atlanta Electricals को आंध्र प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (APTRANSCO) से ₹193.92 करोड़ का LOI मिला है। कंपनी 160 MVA क्षमता वाले 12 ऑटो ट्रांसफॉर्मर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई करेगी।

Exide Industries

बैटरी बनाने वाली कंपनी Exide Industries ने अपनी सहायक कंपनी Exide Energy Solutions में ₹200 करोड़ का निवेश किया है। यह रकम भारत में बन रहे मल्टी-गीगावॉट लिथियम-आयन सेल प्लांट के लिए लगाई गई है। निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया गया।

Highway Infrastructure

इंफ्रा कंपनी Highway Infrastructure को NHAI से ₹80.17 करोड़ का टोल ऑपरेशन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza के लिए है। इसकी अवधि 90 दिन होगी।

Jubilant Ingrevia

स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी Jubilant Ingrevia ने Zettaone Technologies India में 40% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा ₹189.2 करोड़ में होगा। इससे कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कदम बढ़ाएगी।

Hindustan Zinc

माइनिंग और मेटल कंपनी Hindustan Zinc ने बताया कि उसकी बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 22% हो गई है। FY26 में यह करीब 18% थी। कंपनी FY28 तक इसे 70% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

ONGC

सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC ने असम के गोलाघाट जिले में Khoraghat GGS-1 गैस इवैक्युएशन फैसिलिटी शुरू कर दी है। इससे अपर असम शेल्फ की अतिरिक्त गैस को North East Gas Grid के जरिए प्रोसेस और सप्लाई किया जा सकेगा।

Balkrishna Industries

ऑफ-हाईवे टायर बनाने वाली कंपनी Balkrishna Industries ने ₹550 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए NCD जारी करके जुटाएगी।

Shilpa Medicare

फार्मा कंपनी Shilpa Medicare ने अमेरिका में Pemetrexed Injection की 27,923 वायल्स को स्वेच्छा से वापस मंगाने का फैसला किया है। कंपनी ने दवा के रंग में असामान्य बदलाव के कारण यह रिकॉल शुरू किया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: क्रिस्टल इंटीग्रेटेड को MSRTC से ₹134 करोड़ का ऑर्डर, शेयर पर रहेगी नजर

Stock in Focus: इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देने वाली Krystal Integrated Services को महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (MSRTC) से करीब ₹134 करोड़ का नया वर्क ऑर्डर मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के तय क्षेत्रों में फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देने के लिए है।

कंपनी ने बताया कि यह ऑर्डर 18 अगस्त 2026 को जारी हुआ और इसे सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की अवधि तीन साल होगी।

कंपनी क्या काम करेगी?

Krystal Integrated Services को MSRTC की ओर से इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज का काम सौंपा गया है। कंपनी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के बस डिपो और अन्य आवंटित परिसरों में सेवाएं देगी। यह पूरा प्रोजेक्ट अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा।

लगातार मिल रहे हैं बड़े ऑर्डर

Krystal Integrated Services को 2026 में लगातार बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिल रहे हैं। जून में कंपनी को नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज के लिए ₹24.38 करोड़ का चार साल का ऑर्डर मिला था। इसमें मैकेनाइज्ड हाउसकीपिंग, रिसेप्शन और इंजीनियरिंग सर्विसेज के रखरखाव का काम शामिल है।

इसके अलावा कंपनी इससे पहले महाराष्ट्र के वसई-विरार क्षेत्र में करीब ₹275 करोड़ का सैनिटेशन कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल कर चुकी है। वहीं हाल ही में उसे तमिलनाडु में ₹364 करोड़ का हेल्थकेयर फैसिलिटी मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट भी मिला था।

Krystal के शेयरों का हाल

कंपनी के शेयर मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ 620 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने से भी स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल में इसने 1.41% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 866.82 हजार करोड़ रुपये है।

कंपनी क्या करती है?

Krystal Integrated Services इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सेक्टर की कंपनी है। यह हाउसकीपिंग, सैनिटेशन, इंजीनियरिंग मेंटेनेंस और अन्य ऑपरेशनल सर्विसेज देती है। हाल के महीनों में लगातार मिल रहे सरकारी ऑर्डर कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूत कर रहे हैं, जिस वजह से आने वाले कारोबारी सत्र में इस शेयर पर निवेशकों की नजर रह सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को ₹80 करोड़ का टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Highway Infrastructure को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ₹80.17 करोड़ का नया टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी को तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza पर यूजर फीस कलेक्शन के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) जारी हुआ है।

कॉन्ट्रैक्ट 90 दिन का है

यह कॉन्ट्रैक्ट NH-44 पर कृष्णागिरि से थुंबीपाड़ी (Km 94 से Km 180) सेक्शन के लिए मिला है। Palayam Fee Plaza Km 154+500 पर स्थित है। यह प्रोजेक्ट Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल के तहत 90 दिनों के लिए चलेगा।

कंपनी के मुताबिक, यह हाईवे बेंगलुरु, होसुर और धर्मपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक इलाकों को जोड़ता है। इस वजह से इस रूट पर यात्री यातायात, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। इससे टोल कलेक्शन की अच्छी संभावना बनती है।

इस साल लगातार मिल रहे हैं बड़े ऑर्डर

Highway Infrastructure को इस साल NHAI से कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल चुके हैं। फरवरी में कंपनी को गुजरात के Moti Naroli Fee Plaza समेत वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के कई टोल प्लाजा के संचालन के लिए ₹154.6 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके अलावा हाल ही में कंपनी ने आंध्र प्रदेश में ₹329 करोड़ का टोलिंग कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया था।

मंगलवार को Highway Infrastructure का शेयर 4.06% चढ़कर ₹46.40 पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.01% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह लगभग 60% टूट चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 331.71 हजार करोड़ रुपये है।

Tube Investments Share Price: कमजोर बाजार में सरपट दौड़ा शेयर, 9% उछला, मैनजमेंट कमेंट्री से ब्रोकरेज बुलिश

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म ने रेटिंग की अपग्रेड, 18% ऊपर का दिया टारगेट, क्या आप करेंगे निवेश

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म HSBC से AC बनाने वाली कंपनी ब्लू स्टार (Blue Star) के शेयर की रेटिंग अपग्रेड कर दी। HSBC ने अब ब्लू स्टार के लिए अपनी पिछली “hold” रेटिंग को बदलकर “buy” (खरीदने) की सलाह दी है और प्रति शेयर ₹1,780 का प्राइस टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 18% की बढ़ोतरी हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जून तिमाही में रूम एयर कंडीशनर (RAC) इंडस्ट्री में 25% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें वॉल्यूम में अनुमानित बढ़ोतरी 20% – 22% रही। उसने यह भी कहा कि पहली तिमाही में ब्लू स्टार के मुकाबले वोल्टास का प्रदर्शन बेहतर रहा।

HSBC ने कहा कि गर्मियों की बिक्री (जनवरी से जून) को देखें तो, ऊंचे बेस (high base) के बावजूद धीमी ग्रोथ के बावजूद ब्लू स्टार के मार्जिन स्थिर रहेकम मार्जिन गाइडेंस के कारण ब्रोकरेज ने अपने अनुमानों में कटौती की है।

उसने कहा कि मजबूत ऑर्डर बुक, डेटा सेंटर बिजनेस में मौजूदगी, मार्जिन बढ़ने की गुंजाइश और अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस को देखते हुए उसने ब्लू स्टार की रेटिंग बढ़ाई है।

इस साल अब तक ब्लू स्टार के शेयर की कीमत में 23% की गिरावट आई है, जबकि वोल्टास के शेयरों में 8% की गिरावट देखी गई है। HSBC का कहना है कि इससे कंपनी का वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गया है।

इस महीने की शुरुआत में, कंपनी ने अपनी पहली तिमाही की कमाई की रिपोर्ट दी थी, जिसमें उसका रेवेन्यू 13.3% बढ़कर ₹3,378 करोड़ हो गया, लेकिन यह CNBC-TV18 के ₹3,547 करोड़ के अनुमान से कम था। इसका EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पिछले साल के मुकाबले 12% घटकर ₹175 करोड़ रह गया और यह बाजार के ₹247 करोड़ के अनुमान से भी काफी कम था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान अवधि के 6.7% से घटकर 5.2% हो गया और यह बाजार के 7% के अनुमान से भी कम था।

हालांकि, कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर MEP प्रोजेक्ट ऑर्डर का आना इस हाई-ग्रोथ सेगमेंट में लगातार बनी हुई तेजी को दिखाता है।

ब्लू स्टार पर नज़र रखने वाले 27 एनालिस्ट में से 13 ने “buy” रेटिंग, 9 ने “hold” रेटिंग और 5 ने “Sell” रेटिंग दी है। ब्लू स्टार के शेयर बढ़त के साथ खुले, लेकिन बाद में वह बढ़त खत्म हो गई और मंगलवार को शेयर 0.3% गिरकर ₹1,503.2 पर ट्रेड कर रहे थे। इस साल अब तक शेयर में 15% की गिरावट आई है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी में चॉइस फिलिंग की आखिरी तारीख बढ़ी, अब आज रात 11.59 बजे तक बता सकते हैं अपनी पसंद

NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 में सफल छात्र अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की ओर से आयोजित की जा रही काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। इसके तहत पहले राउंड में अपनी पसंद की मेडिकल सीट भरने और लॉक करने की सुविधा छात्रों को दी जाती है। एमसीसी ने काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे छात्रों को सहूलियत देते हुए नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस भरने और लॉक करने की डेडलाइन बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत चॉइस लॉक करने की सुविधा भी बढ़ा दी गई है। कैंडिडेट 18 अगस्त, 2026 को रात 11:59 बजे तक यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

काउंसलिंग प्रक्रिया 15% ऑल इंडिया कोटा (AQI) के तहत अंडरग्रेजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स के लिए तय है। बदले हुए शेड्यूल के मुताबिक, नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस फिलिंग विंडो, जो 7 अगस्त को खुली थी, 18 अगस्त रात 11:59 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस फिलिंग : बदली हुई तारीखें

कैंडिडेट 17 अगस्त शाम 5:30 बजे से 18 अगस्त, 2026 रात 11:59 बजे तक अपनी पसंद अंतिम रूप से लॉक कर सकते हैं। नीचे दी गई जरूरी डिटेल्स देखें :

राउंड 1 चॉइस फिलिंग : 7 अगस्त से 18 अगस्त, 2026

राउंड 1 चॉइस लॉकिंग : 17 अगस्त, शाम 5:30 बजे से 18 अगस्त, रात 11:59 बजे तक

नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के लिए चॉइस कैसे भरें?

प्रेफरेंस पूरी करने के लिए ये स्टेप्स हैं:

  • ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर जाएं।
  • नीट यूजी काउंसलिंग पंजीकरण या कैंडिडेट लॉगिन लिंक पर क्लिक करें। जरूरी क्रेडेंशियल्स के साथ साइन इन करें।
  • चॉइस फिलिंग सेक्शन खोलें।
  • अपनी पसंद के क्रम में कॉलेज और कोर्स चुनें।
  • पूरी प्रेफरेंस लिस्ट देखें।
  • अगर जरूरत हो, तो बदलाव करें या चॉइस बदलें।
  • चॉइस लॉक करें और फाइनल लिस्ट सबमिट करें।

कैंडिडेट्स को याद रखना चाहिए कि सिर्फ पंजीकृत छात्र ही चॉइस फिलिंग की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। लॉक करने से पहले प्रेफरेंस ऑर्डर को ध्यान से देखना जरूरी है, क्योंकि सबमिट की गई चॉइस राउंड 1 सीट अलॉटमेंट में अहम भूमिका निभाएंगी।

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