Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए क्या ₹1 करोड़ का फंड काफी है? एक्सपर्ट से समझें महंगाई और रिटर्न का पूरा गणित

Retirement Planning Calculation: भारतीय निवेशकों के बीच सालों से ₹1 करोड़ को रिटायरमेंट का एक मैजिक नंबर माना जाता रहा है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक बार बैंक खाते या म्यूचुअल फंड में ₹1 करोड़ आ गए, तो उनका बुढ़ापा आराम से कट जाएगा। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

किसी व्यक्ति के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस काफी हो सकता है, तो किसी के लिए ₹5 करोड़ भी कम पड़ सकते हैं। आपका रिटायरमेंट फंड कितना होना चाहिए, यह किसी राउंड फिगर पर नहीं बल्कि आपकी मासिक खर्चों, महंगाई दर, रिटायरमेंट की उम्र और लाइफ एक्सपेक्टेंसी पर निर्भर करता है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग का पूरा गणित।

क्यों फेल हो सकता है ₹1 करोड़ का ‘मैजिक नंबर’?

वाइज फिनसर्व के ग्रुप सीईओ और सीआईओ अजय कुमार यादव के अनुसार, ₹1 करोड़ की समस्या यह नहीं है कि यह छोटा अमाउंट है, बल्कि समस्या यह है कि यह नंबर आपके भविष्य की जीवनशैली के खर्चों को नहीं दर्शाता।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है और 90 साल की उम्र (30 साल का रिटायरमेंट) तक का प्लान बनाता है। अगर ₹1 करोड़ पर 7% सालाना रिटर्न मिले, तो व्यक्ति हर महीने ₹66,500 की फिक्स्ड पेंशन ले सकता है।

अगर महंगाई दर केवल 5% सालाना भी मान ली जाए, तो आज का ₹66,500 का खर्च 10 साल बाद बढ़कर ₹1.08 लाख और 20 साल बाद ₹1.76 लाख प्रति माह हो जाएगा। यानी आपके पैसे की क्रय शक्ति तेजी से घटेगी और कुछ ही सालों में ₹1 करोड़ का फंड खत्म हो जाएगा।

इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न का असली गणित

अगर आपका पोर्टफोलियो 7% का रिटर्न देता है और महंगाई दर 5% रहती है, तो आपका वास्तविक या इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न केवल 2% ही रह जाता है। इस 2% वास्तविक रिटर्न के हिसाब से देखें, तो ₹1 करोड़ का फंड 30 सालों के लिए केवल ₹37,000 प्रति माह की ही परचेजिंग पावर दे पाएगा।

अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹1 लाख निकालना चाहता है और वह महंगाई को अनदेखा करता है, तो उसका ₹1 करोड़ का कॉर्पस 12.5 साल में खत्म होगा। लेकिन अगर महंगाई जोड़ दी जाए, तो यह फंड मात्र 9.1 साल यानी करीब 69 साल की उम्र तक में ही पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

आपको रिटायरमेंट के लिए असल में कितने पैसों की जरूरत है?

रिटायरमेंट कॉर्पस की गणना हमेशा उल्टे क्रम से करनी चाहिए। मान लीजिए एक 40 वर्षीय व्यक्ति का आज का मासिक खर्च ₹1 लाख है और वह 60 साल में रिटायर होना चाहता है। 6% महंगाई दर पर 60 साल की उम्र में वही जीवनशैली बनाए रखने के लिए उसे प्रति माह ₹3.21 लाख यानी साल के करीब ₹38.49 लाख की आवश्यकता होगी।

कितना कॉर्पस चाहिए होगा?

बिना महंगाई एडजस्टमेंट (7% रिटर्न पर) 60 साल की उम्र में कम से कम ₹4.82 करोड़ का फंड चाहिए। 5% पोस्ट-रिटायरमेंट महंगाई जोड़ने पर यही फंड बढ़कर ₹8.68 करोड़ हो जाता है।

क्या है 30X रिटायरमेंट रूल?

ट्रैक (Trackk) के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते और अजय कुमार यादव के अनुसार, 30X रूल एक अच्छा शुरुआती अनुमान हो सकता है:

नियम: अपने रिटायरमेंट के पहले साल के कुल अनुमानित खर्च को 30 से गुणा कर दें।

उदाहरण: अगर रिटायरमेंट के पहले साल का खर्च ₹38.49 लाख है, तो ₹38.49 लाख × 30 = लगभग ₹11.55 करोड़ का कॉर्पस चाहिए।

यह बड़ा फंड आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, मेडिकल इमरजेंसी और लंबी उम्र जीने के जोखिम से सुरक्षा का बड़ा कवर देता है।

महंगाई के अलावा इन 3 बातों का रखें खास ध्यान

लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अब औसतन लोग लंबा जीवन जी रहे हैं। अपनी वित्तीय योजना 75 या 80 साल के बजाय कम से कम 90 साल की उम्र मानकर बनाएं।

हेल्थकेयर कॉस्ट: इलाज का खर्च आम महंगाई की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ता है। इसके लिए रिटायरमेंट फंड से अलग एक समर्पित मेडिकल एंड इमरजेंसी रिजर्व बनाएं।

कैश फ्लो पर ध्यान दें, गोल नंबर पर नहीं: ₹1 करोड़ या ₹5 करोड़ जैसे गोल नंबरों के पीछे भागने के बजाय यह तय करें कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितना कैश फ्लो चाहिए और आपका घर कहां मेट्रो शहर या टियर-2 शहर है।

आपके लिए क्या है सही रिटायरमेंट नंबर?

भारतीय निवेशकों के लिए कोई एक फिक्स्ड रिटायरमेंट नंबर नहीं हो सकता। ₹1 करोड़ एक शुरुआत का पड़ाव तो हो सकता है, लेकिन यह पूरा रिटायरमेंट प्लान नहीं है। आपका सही नंबर वह है जो आपकी जीवनशैली, स्वास्थ्य जरूरतों, पेंशन/रेंटल इनकम और महंगाई को जोड़कर तैयार होता है ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके पैसे कभी खत्म न हों।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Industries Q1 Results: डिफेंस कंपनी का मुनाफा 93% बढ़ा, रेवेन्यू भी तगड़ा उछाल

Solar Industries Q1 Results: डिफेंस और विस्फोटक बनाने वाली कंपनी Solar Industries India ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 92.7% बढ़कर ₹652.6 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹338.7 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 71.2% बढ़कर ₹3,688.2 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹2,154.5 करोड़ था।

EBITDA 94% बढ़ा

सोलर इंडस्ट्रीज का EBITDA 93.6% बढ़कर ₹1,035.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹534.9 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 24.8% से बढ़कर 28.1% हो गया।

मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनीष नुवाल ने कहा कि यह कंपनी का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही रेवेन्यू, EBITDA, प्री-टैक्स प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट है।

डिफेंस कारोबार में 123% की छलांग

सोलर इंडस्ट्रीज का डिफेंस कारोबार 123% बढ़ा। यही पहली तिमाही की सबसे बड़ी ग्रोथ का कारण रहा।

कंपनी ने कहा कि स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्ट्स की बढ़ती रेंज और भारत के साथ विदेशी ग्राहकों से बढ़ते ऑर्डर का फायदा मिल रहा है। नुवाल ने कहा कि कंपनी को भारत और वैश्विक स्तर पर डिफेंस पार्टनर बनाने की रणनीति अब नतीजों में दिखने लगी है।

₹21,350 करोड़ का ऑर्डर बुक

सोलर इंडस्ट्रीज की कुल ऑर्डर बुक ₹21,350 करोड़ तक पहुंच गई है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में और बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं।

सोलर इंडस्ट्रीज का अंतरराष्ट्रीय विस्फोटक कारोबार भी 65% बढ़ा। कंपनी का कहना है कि बढ़ते ऑर्डर, नए बाजार और लगातार निवेश उसकी वैश्विक मौजूदगी को और मजबूत करेंगे।

FY27 का लक्ष्य बरकरार

सोलर इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ₹14,000 करोड़ के रेवेन्यू लक्ष्य को बरकरार रखा है। मजबूत शुरुआत, बड़ा ऑर्डर बुक और निवेश योजनाओं के दम पर कंपनी को इस लक्ष्य पर भरोसा है।

कंपनी ने FY27 में ₹2,050 करोड़ के कैपेक्स की योजना बनाई है। इसमें से पहली तिमाही में करीब ₹450 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

Solar Industries के शेयर

सोलर इंडस्ट्रीज का शेयर गुरुवार को 8.52% उछलकर ₹20,325 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 55.83% बढ़ा है। वहीं बीते 5 साल में इसने 1,054% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.84 लाख करोड़ रुपये है।

Tata Motors PV Q1 Results: टाटा की कंपनी का मुनाफा 80% गिरा, JLR के कमजोर आंकड़ों ने मुश्किल बढ़ाई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Lakhpati Scheme: एसबीआई की सुपरहिट स्कीम! सिर्फ ₹600 महीना जमा करके पाएं ₹1 लाख से ज्यादा का फंड

SBI Har Ghar Lakhpati Scheme: अगर आप अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या किसी बड़े लक्ष्य के लिए बिना जोखिम के फंड तैयार करना चाहते हैं, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की खास योजना ‘हर घर लखपति स्कीम’ आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

यह एसबीआई की एक फ्लैगशिप रिकरिंग डिपॉजिट (RD) योजना है, जिसके तहत आप छोटी-छोटी मासिक बचत के जरिए ₹1 लाख या उससे ज्यादा का बड़ा फंड आसानी से बना सकते हैं। आइए इस योजना की पात्रता, ब्याज दरों, मैच्योरिटी नियमों और कैलकुलेशन को आसान भाषा में बताते हैं।

क्या है एसबीआई की ‘हर घर लखपति’ योजना?

यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पेश की गई एक स्पेशल रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम है। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों और मध्यम वर्ग में नियमित बचत की आदत को बढ़ावा देना है। ग्राहक अपनी सुविधा और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से 3 साल से लेकर 10 साल तक की अवधि चुन सकते हैं। इस योजना में हर महीने एक निश्चित राशि जमा करके मैच्योरिटी पर ₹1 लाख या उससे अधिक का गारंटीड कॉर्पस प्राप्त किया जा सकता है।

कौन खोल सकता है यह खाता?

एसबीआई ने इस योजना को हर वर्ग के लिए बेहद सुलभ बनाया है। इस खाते को कोई भी नागरिक अकेले या किसी के साथ मिलकर सिंगल या जॉइंट अकाउंट खोल सकता है। 10 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे जो स्वतंत्र रूप से हस्ताक्षर कर सकते हैं, वे अपने नाम पर यह खाता खोल सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं।

कैसे ₹600 महीना जमा करके बनेंगे ₹1.10 लाख?

एसबीआई के उदाहरण के अनुसार, लंबी अवधि के लिए छोटी-सी मासिक बचत कैसे बड़ा फंड बनाती है, इसे इस कैलकुलेशन से समझें:

  • मासिक किस्त: ₹600 प्रति माह
  • समय अवधि: 10 साल (120 महीने)
  • कुल निवेश: ₹72,000 (10 सालों में)
  • अनुमानित रिटर्न: लगभग 8% (कर्मचारी/वरिष्ठ नागरिक/विशेष दरों के तहत)
  • कुल ब्याज: करीब ₹38,000
  • मैच्योरिटी पर कुल रकम: लगभग ₹1.10 लाख

₹1 लाख का फंड बनाने के लिए हर महीने कितना करना होगा निवेश?

आप जितने कम समय की अवधि चुनेंगे, आपकी मासिक किस्त उतनी ज्यादा होगी। ₹1 लाख का फंड पाने के लिए विभिन्न अवधियों का अनुमानित गणित इस प्रकार है:

₹1 लाख का फंड बनाने के लिए हर महीने कितना करना होगा निवेश?

किस श्रेणी के ग्राहक को कितना मिलेगा ब्याज?

हर घर लखपति योजना में ब्याज दरें आपकी चुनी गई अवधि और आपकी श्रेणी पर निर्भर करती हैं:

सामान्य नागरिक: 3 से 4 साल की अवधि के लिए 6.55% और 5 से 10 साल की अवधि के लिए 6.30% तक ब्याज दर।

वरिष्ठ नागरिक: सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50% अधिक यानी 6.80% से 7.05% तक ब्याज दर।

एसबीआई स्टाफ और रिटायर्ड कर्मचारी: इन्हें आम नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों से भी अधिक विशेष प्रीमियम ब्याज दरें प्रदान की जाती हैं।

प्री-मैच्योर विड्रॉल और जुर्माना

अगर आपको इमरजेंसी में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना पड़ता है, तो उसके लिए एसबीआई के कुछ नियम लागू होते हैं:

  • 7 दिनों के भीतर: खाता खोलने के 7 दिनों के भीतर पैसा निकालने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
  • ₹5 लाख तक के डिपॉजिट पर: मैच्योरिटी से पहले खाता बंद करने पर 0.50% की पेनाल्टी लगेगी।
  • ₹5 लाख से अधिक के डिपॉजिट पर: समय से पहले निकासी पर 1% की पेनाल्टी काटी जाएगी।
  • टैक्स नियम: इस योजना पर मिलने वाले ब्याज पर आयकर नियमों के तहत टीडीएस और टैक्स लागू होगा।

क्या आपको इस स्कीम में निवेश करना चाहिए?

अगर आप बिना किसी मार्केट रिस्क के, निश्चित ब्याज दर के साथ अपने बच्चों या खुद के लिए ₹1 लाख या उससे बड़ा फंड जमा करना चाहते हैं, तो एसबीआई की यह ‘हर घर लखपति’ योजना एक अनुशासित और सुरक्षित रास्ता है। अपनी आय और क्षमता के अनुसार मासिक किस्त तय करके आज ही इसकी शुरुआत की जा सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Motors PV Q1 Results: पैसेंजर व्हीकल मेकर के तिमाही नतीजे आज, 13 अगस्त को; शेयर 3% तक चढ़ा

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड आज, 13 अगस्त को अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। रिजल्ट सामने आने से पहले कंपनी के शेयर में तेजी है। BSE पर शेयर दिन में पिछले बंद भाव से करीब 3 प्रतिशत तक उछलकर 351.60 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 1.28 लाख करोड़ रुपये है। बता दें कि पहले कंपनी के बोर्ड की मीटिंग होगी, जिसमें नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। मीटिंग खत्म होने के बाद इन्हें रिलीज किया जाएगा।

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 18,598 करोड़ रुपये रहा था। शुद्ध मुनाफा 455 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 57,859 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 87,569 करोड़ रुपये रहा था।

टाटा मोटर्स में अब अलग-अलग हैं PV और CV बिजनेस

टाटा मोटर्स 1 अक्टूबर 2025 से दो हिस्सों में बंट चुकी है। पैसेंजर व्हीकल बिजनेस अब टाटा मोटर्स PV के नाम से शेयर बाजार में लिस्ट है। वहीं कमर्शियल व्हीकल बिजनेस का नाम टाटा मोटर्स लिमिटेड है। कमर्शियल व्हीकल बिजनेस 12 नवंबर 2025 को BSE पर 330.25 रुपये और NSE पर 335 रुपये पर लिस्ट हुआ था। वहीं टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड के शेयरों का कारोबार 14 अक्टूबर 2025 को 400 रुपये प्रति शेयर पर शुरू हुआ था।

टाटा मोटर्स PV में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 42.51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 457.04 रुपये और एडजस्टेड लो 294.15 रुपये है।

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एक दिन पहले Tata Motors ने जारी किए थे नतीजे

एक दिन पहले टाटा ग्रुप के कमर्शियल व्हीकल बिजनेस टाटा मोटर्स ने तिमाही नतीजे जारी किए थे। जून 2026 तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 83 प्रतिशत बढ़कर 2,556 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 1,397 करोड़ रुपये रहा था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 20,667 करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2025 तिमाही में 17,324 करोड़ रुपये था। कुल खर्च भी बढ़कर 18,038 करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2025 तिमाही में 15,982 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Muthoot FinCorp IPO: ₹3000 करोड़ के इश्यू का ड्राफ्ट जमा, रहेंगे केवल नए शेयर

नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) मुथूट फिनकॉर्प ने अपने 30 अरब रुपये (3000 करोड़ रुपये) के IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मुताबिक, ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कहा गया है कि IPO में केवल नए शेयर जारी किए जाएंगे। कंपनी 6 अरब रुपये तक का प्री-IPO प्लेसमेंट ला सकती है। अगर ऐसा हुआ तो IPO में नए शेयरों के इश्यू का साइज घट जाएगा।

मुथूट फिनकॉर्प के IPO में 50 प्रतिशत तक हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, जेएम फाइनेंशियल और SBI कैपिटल मार्केट्स बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं।

मुथूट फिनकॉर्प, मुथूट पप्पाचन ग्रुप की कंपनी है। यह मुख्य रूप से गोल्ड लोन देने का काम करती है। साथ ही यह बिजनेस, हाउसिंग, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग और प्रॉपर्टी के बदले लोन जैसी सुविधाएं भी देती है। कंपनी की पूरे भारत में 3,800 से ज्यादा ब्रांच हैं।

कैसे इस्तेमाल होंगे IPO के पैसे

कंपनी अपने IPO से हासिल फंड का इस्तेमाल भविष्य में लोन देने की जरूरतों के लिए टियर-1 कैपिटल बेस को मजबूत करने, बिजनेस बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार करने में करेगी। एक छोटा हिस्सा इश्यू से जुड़े खर्चों के लिए रखा जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में मुथूट फिनकॉर्प ने शुद्ध मुनाफे में 3 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी। ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 31.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कंपनी के कंसोलिडेटेड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का आंकड़ा 73,448.82 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Gaja Capital IPO के लिए ₹152-₹160 प्रति शेयर रहेगा प्राइस बैंड, 19 अगस्त को खुलेगा ₹550 करोड़ का इश्यू

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GMR Airports घाटे से आई मुनाफे में, फिर क्यों हुए शेयर धड़ाम, इस कारण लगा झटका

GMR Airports Share Price: जीएमआर एयरपोर्ट्स के धमाकेदार कारोबारी नतीजे के बावजूद आज शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही में कंपनी सालाना आधार पर घाटे से मुनाफे में आई तो रेवेन्य 24% बढ़ गया और साथ ही कंपनी ने ₹5000 करोड़ तक जुटाने की बात कही है। इसके बावजूद जीएमआर एयरपोर्ट्स के शेयर फिसल गए। फिलहाल बीएसई पर यह 1.01% की गिरावट के साथ ₹103.15 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.44% गिरकर ₹102.70 तक आ गया था। पिछले एक साल में इसके शेयरों के चाल की बात करें तो पिछले साल 22 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹84.02 के भाव पर था जिससे 10 महीने में यह 37.59% उछलकर पिछले महीने 7 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹115.60 पर पहुंच गया था।

GMR Airports Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीएमआर एयरपोर्ट्स कंसालिडेटेड लेवल पर सालाना आधार पर ₹212 करोड़ के घाटे से ₹91 करोड़ के मुनाफे में आ गई। इसे हाई रेवेन्यू और ऑपरेटिंग अर्निंग्स से सपोर्ट मिला। कंपनी का कंसालिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 24% बढ़कर जून तिमाही में ₹3,205 करोड़ से ₹3,964 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 24% बढ़कर ₹1,165 करोड़ ₹1,447 करोड़ और EBITDA मार्जिन 36.3% से 36.5% पर पहुंच गया।

धमाकेदार नतीजे के बावजूद क्यों टूटा शेयर

जीएमआर एयरपोर्ट्स के शेयरों पर एक दबाव तो कमजोर मार्केट सेंटिमेंट से आया तो दूसरी वजह इसकी कारोबारी रिपोर्ट में ही है। इसकी निगेटिव इक्विटी ने इस पर दबाव डाला है तो EBITDA में डेप्रिसिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन और फाइनेंस कॉस्ट की अधिक लागत ने भी झटका दिया है। निगेटिव इक्विटी को लेकर कंपनी ने बताया कि ऑपरेशंस से कैश फ्लो और ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में सुधार के बावजूद जून के आखिरी में इसकी कुल इक्विटी नेगेटिव ₹1,428.65 करोड़ थी क्योंकि इसे मुख्य रूप से अनरियलाइज्ड फॉरेन-एक्सचेंज में उतार-चढ़ाव से नुकसान और पिछले वर्षों में कई प्रोजेक्ट्स के कैपिटलाइजेशन के बाद हाई डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट से झटका लगा।

हालांकि कंपनी ने उम्मीद जताई है कि आने वाले कंसेशन पीरियड के लिए दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट और GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टैरिफ ऑर्डर के बाद रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार होगा। कंपनी ने यह उम्मीद जताई कि अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए वह पर्याप्त फंड जुटा लेगी। बोर्ड ने इसे शेयर, बॉन्ड्स और वारंट्स इत्यादि के जरिए एक या अधिक किश्तों में ₹5 हजार करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। डेप्रिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन से झटके की बात करें तो EBITDA में इसकी हिस्सेदारी जून 2026 तिमाही में ₹455.60 करोड़ थी तो फाइनेंस कॉस्ट ₹937.93 करोड़ थी।

LAPL Automotive IPO Listing: ₹135 पर लिस्ट ₹94 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 344 गुना बोली

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IPO News: आशीष कचोलिया और सुनील सिंघानिया के निवेश वाली कंपनी का आईपीओ आज से खुला, जानें सभी डिटेल्स

Credent Connect N Care IPO Details: नई दिल्ली बेस्ड हेल्थकेयर और मेडिकल लॉजिस्टिक्स सेवाएं देने वाली कंपनी क्रेडेंट कनेक्ट एन केयर का आईपीओ आम निवेशकों के लिए खुल चुका है। पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने से एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹26.53 करोड़ जुटा लिए हैं।

इस आईपीओ में दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के अबाकस (Abakkus), मोतीलाल ओसवाल और 360 वन जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया है। वहीं दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया की भी कंपनी में पहले से हिस्सेदारी है।

एंकर बुक में किन-किन बड़े नामों ने लगाया पैसा?

कंपनी ने एंकर निवेशकों को ₹189 प्रति शेयर के अपर प्राइस बैंड पर 14.04 लाख शेयर अलॉट किए हैं।

अबाकस एसेट मैनेजर: सुनील सिंघानिया के स्वामित्व वाले अबाकस वेंचर अपॉर्चुनिटीज फंड और मिंट फोकस्ड ग्रोथ फंड ने ₹5-₹5 करोड़ लगाकर कुल 5.28 लाख शेयर खरीदे।

मोतीलाल ओसवाल: मोतीलाल ओसवाल फिनवेस्ट के जरिए ₹4 करोड़ (2.11 लाख शेयर) का निवेश किया।

हेम ग्रोथ अपॉर्चुनिटीज फंड: ₹4.48 करोड़ (2.37 लाख शेयर) का अलॉटमेंट मिला।

360 वन: अपने ट्रेजरी सॉल्यूशंस फंड के जरिए ₹1 करोड़ से अधिक (53,400 शेयर) का निवेश किया।

अन्य निवेशक: LRSD सिक्योरिटीज, फिनएवेन्यू कैपिटल ट्रस्ट, मेरु इन्वेस्टमेंट फंड, रेलिगो कमोडिटीज और शाइन स्टार बिल्ड कैप ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

RHP दाखिल करने के समय तक अबाकस के पास कंपनी में 1.21% और आशीष कचोलिया के पास 2.02% हिस्सेदारी थी। दोनों ने यह हिस्सेदारी जुलाई 2026 में ₹187 प्रति शेयर के भाव पर खरीदी थी।

IPO साइज, प्राइस बैंड और महत्वपूर्ण तारीखें

  • कुल आईपीओ साइज: ₹93.89 करोड़ (पूरा फ्रेश इश्यू – 49.68 लाख शेयर)
  • प्राइस बैंड: ₹179 से ₹189 प्रति शेयर
  • ओपन और क्लोज डेट: 13 अगस्त से 17 अगस्त 2026
  • लॉट साइज: 600 शेयर (रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 2 लॉट यानी 1,200 शेयर – ₹2,26,800 का निवेश)
  • अलॉटमेंट और लिस्टिंग: 18 अगस्त को और लिस्टिंग 20 अगस्त को

कंपनी आईपीओ फंड्स का इस्तेमाल कहां करेगी?

  • आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग इन कार्यों के लिए किया जाएगा:
  • ₹26.8 करोड़: पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘क्रेडेंट हेल्थकेयर’ की वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए।
  • ₹3 करोड़: मशीनरी और कैपिटल एक्सपेंडिचर जरूरतों के लिए।
  • ₹37 करोड़: कंपनी की अपनी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं के लिए।
  • ₹6 करोड़: मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए।

बाकी बचे हुए पैसों का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

क्या करती है क्रेडेंट कनेक्ट एन केयर?

यह कंपनी बी2बी (B2B) हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में काम करती है। कलेक्शन सेंटर्स से लैब तक और अलग-अलग स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच डायग्नोस्टिक सैंपल्स का सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन करती है। इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) कंपनियों के लिए सी एंड एफ (C&F) लोकेशंस से पैथोलॉजी लैब्स तक रीएजेंट्स पहुंचाती है। मुंबई, पुणे, चेन्नई और वाराणसी में कंपनी के 2 वेयरहाउस और 4 ब्रांच ऑफिस मौजूद हैं।

कैसी है वित्तीय सेहत?

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा है, जहां कुल रेवेन्यू FY25 के ₹77.9 करोड़ से 175% से अधिक बढ़कर ₹214.2 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं शुद्ध मुनाफे (PAT) में 730% से अधिक का ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया गया और यह ₹2.2 करोड़ से बढ़कर ₹18.4 करोड़ हो गया; कंपनी के इस तेजी से बढ़ते मुनाफे और दिग्गज निवेशकों की मौजूदगी ने इस आईपीओ को मार्केट में चर्चा का केंद्र बना दिया है।

कितना चल रहा ग्रे मार्केट प्रीमियम?

अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में कंपनी के आईपीओ को लेकर काफी मजबूत रुझान देखने को मिल रहा है। बाजार जानकारों के मुताबिक, क्रेडेंट कनेक्ट एन केयर का शेयर अपर प्राइस बैंड से 25% से अधिक के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जिससे लिस्टिंग पर अच्छे रिटर्न के संकेत मिल रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LAPL Automotive IPO Listing: ₹135 पर लिस्ट ₹94 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 344 गुना बोली

LAPL Automotive IPO Listing: दोपहिया से लेकर बस तक के लिए ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज बनाने वाली एलएपीएल ऑटोमोटिव के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 344 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹94 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹135.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 43.62% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में थोड़ी फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹130.00 (LAPL Automotive Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 38.30% मुनाफे में हैं।

LAPL Automotive IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एलएपीएल ऑटोमोटिव का ₹32 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 6-10 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 344.31 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 200.23 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 433.26 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 387.78 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 34,46,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹19.56 करोड़ औरंगाबाद के औरिक सिटी में एक अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने, ₹4.79 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹3.24 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹4.81 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

LAPL Automotive के बारे में

एलएपीएल ऑटोमोटिव कई प्रकार के ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज की डिजाइनिंग कर उन्हें बनाती है और सप्लाई करती है। इसे ऑटोमोटिव लाइटिंग और सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स बनाने में महारत हासिल है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लाइटिंग डिविजन के तहत टेल लैम्प्स, ब्लिंकर लैम्प्स और हेडलैम्प्स हैं तो मोटर डिविजन के तहक स्टार्टर मोटर्स, वाइपर मोटर्स और रोटर्स हैं। इसके अलावा कंपनी के प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो में मिरर डिविजन के तहत दोपहिया और तिपहिया गाड़ियों के लिए रियर-व्यू मिरर्स हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 99% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹8.63 करोड़ और टोटल इनकम 24% से अधिक के सीएजीआर से ₹94.32 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹7.84 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹16.45 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: मजबूत एशियाई संकेतों के बावजूद Sensex लाल, 4 वजहों से आया Nifty आया 24300 के करीब

Share Market Crash: विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली और लगातार दूसरे महीने आरबीआई के टारगेट रेंज से अधिक महंगाई की रफ्तार ने आज मार्केट पर तेज दबाव बनाया। वैश्विक मार्केट से मिले-जुले रुझानों के बीच सेंसेक्स 250 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24300 के करीब आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर भी रुझान मिला-जुला है। निफ्टी मिडकैप 100 पर फिलहाल बिकवाली का दबाव है लेकिन निफ्टी स्मॉलकैप 100 ग्रीन है। अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:45 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 159.82 प्वाइंट्स यानी 0.20% की गिरावट के साथ 77,806.53 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 90.25 प्वाइंट्स यानी 0.37% की फिसलन के साथ 24,345.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 256.72 प्वाइंट्स टूटकर 77,709.63 और निफ्टी 119.65 प्वाइंट्स गिरकर 24,316.30 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

महंगाई की तेज रफ्तार

जुलाई में महंगाई 19 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। लगातार चौथे महीने इसमें इजाफा हुआ है और लगातार दूसरे महीने यह आरबीआई के 2-4% के टारगेट रेंज से ऊपर रहा। जुलाई में रिटेल महंगाई दर मासिक आधार पर 4.38% से बढ़कर 4.45% पर रही है। खाने-पीने की चीजों ने महंगाई बढ़ाई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

एक कारोबारी दिन पहले 12 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने इक्विटी मार्केट में खरीदारी से अधिक बिकवाली की जिसका दबाव आज मार्केट में दिख रहा है। विदेशी निवेशकों ने ₹1002.50 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की।

बैंकिंग स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव

मार्केट को आज बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव झेलना पड़ा है। सरकारी और प्राइवेट, दोनों सेक्टर्स के बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है तो निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा में भी आधे फीसदी की गिरावट है। निफ्टी ऑटो फिलहाल ग्रीन है लेकिन इसमें बढ़त आधे फीसदी से कम ही है।

Sensex की वीकली एक्सपायरी

सेंसेक्स के इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की आज वीकली एक्सपायरी है तो इसका मार्केट पर दबाव दिख रहा है।

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Retail Inflation : लगातार चौथे महीने महंगाई बढ़ी, रिटेल इंफ्लेशन जुलाई में 4.45% हुई; RBI के लिए बढ़ेगी मुश्किल

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।