एयरपोर्ट पर नहीं होगी चेकिंग में देरी! बस बदलें बैग पैक करने का तरीका और अपनाएं ये आदतें ट्रेवलिंग में

फ्लाइट में ट्रैवल करते समय केबिन बैग में क्या ले जा सकते हैं और क्या नहीं, इसे लेकर कई ट्रैवलर को कन्फ्यूजन रहता है। कुछ खाने-पीने की चीजें, फल, स्नैक्स और जरूरी सामान आसानी से ले जाए जा सकते हैं, लेकिन लिक्विड, बैटरी और कुछ खास चीजों पर एयरपोर्ट सिक्योरिटी के रूल होते हैं। यदि इन रेगुलेशन की जानकारी पहले से हो, तो चेकिंग के समय परेशानी, सामान निकलवाने या महंगी चीजें खोने से बचा जा सकता है। इसलिए फ्लाइट पकड़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि केबिन बैग में कौन-सी चीजें रखें और कौन-सी चीजें चेक-इन बैगेज में रखना बेहतर है।

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1. केबिन बैग की लिमिट

ज्यादातर भारतीय एयरलाइंस में इकॉनमी क्लास के पैसेंजर को एक केबिन बैग और एक छोटा पर्सनल बैग ले जाने की परमिशन होती है। केबिन बैग का वजन आम तौर पर 7 किलो तक होता है, जबकि कुछ एयरलाइंस और प्रीमियम क्लास में वेट की लिमिट अलग हो सकती है। बैग का साइज भी तय होता है, इसलिए सिर्फ वेट ही नहीं बल्कि बैग की लंबाई-चौड़ाई भी पहले से चेक कर लें। बड़ा बैग होने पर एयरपोर्ट पर उसे चेक-इन करने के लिए कहा जा सकता है।

2. पर्सनल बैग छोटा रखें

पर्सनल बैग ऐसा होना चाहिए जिसे सामने वाली सीट के नीचे आसानी से रखा जा सके। इसमें छोटा हैंडबैग, लैपटॉप बैग, मैसेंजर बैग या बच्चे का छोटा बैग रखा जा सकता है। इसे बड़े सूटकेस की तरह भरने से बचें, क्योंकि एयरलाइन स्टाफ आपसे इसे अलग से चेक करने के लिए कह सकता है। जरूरी सामान को छोटे और आसानी से रखने वाले बैग में रखना ट्रैवल में भी आसान रहता है।

3. लिक्विड बोतल का रूल

केबिन बैग में लिक्विड, जेल, क्रीम और एरोसोल की हर बोतल 100 ml या उससे कम की होनी चाहिए। यहां बोतल की कुल क्षमता देखी जाती है, उसमें बचा हुआ सामान नहीं। यानी 200 ml की बोतल में सिर्फ 20 ml प्रोडक्ट बचा हो, तब भी उसे 200 ml की बोतल ही माना जाएगा। सभी छोटे लिक्विड कंटेनर एक ट्रांसपेरेंट, दोबारा बंद होने वाले पाउच में रखें, ताकि सिक्योरिटी चेक के समय आसानी हो।

4. जरूरी और एक्सपेंसिव आइटम

पासपोर्ट, पैसे, गहने, महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान, कैमरा, पावर बैंक और एक्स्ट्रा लिथियम बैटरी जैसी चीजें अपने साथ केबिन बैग में रखना बेहतर होता है। पावर बैंक और अलग रखी लिथियम बैटरी को चेक-इन बैगेज में रखने की परमिशन नहीं होती। वहीं चाकू, ब्लेड, प्लायर, रिंच, मेटल नेल फाइल और दूसरे नुकीले या औजार जैसे सामान को केबिन बैग में न रखें, क्योंकि सिक्योरिटी चेकिंग में इन्हें रोका जा सकता है।

5. खाने-पीने की चीजों में सावधानी

बिरयानी, फल और सूखे स्नैक्स जैसी कई खाने की चीजें जर्नी में साथ ले जाई जा सकती हैं, लेकिन एयरपोर्ट और एयरलाइन के रूल अलग हो सकते हैं। मसाले या पाउडर जैसी चीजों की ज्यादा चेकिंग हो सकती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में ऐसी चीजें ले जाने पर उन्हें चेक-इन बैगेज में रखना बेहतर हो सकता है। शराब को भी चेक-इन बैगेज में रखना सेफ रहता है, जबकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से खरीदा गया सील ड्यूटी-फ्री सामान अलग नियमों के तहत ले जाया जा सकता है।

फ्लाइट से पहले अपने सामान और जरूरी चीजों को अच्छी तरह जांच लेना समझदारी है। एयरपोर्ट के रेगुलेशन की थोड़ी जानकारी और सही तरीके से पैकिंग करने से सिक्योरिटी चेक के समय परेशानी नहीं होगी। साथ ही आपका समय बचेगा और सफर भी ज्यादा कम्फर्टेबल और स्ट्रेस फ्री रहेगा।

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tukaram Munde: 24 घंटे के भीतर IAS तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने मारे ताबड़तोड़ छापे, होटल के किचन में खुले नाले से घुसते चूहे देखते ही ऐक्शन!

Tukaram Munde: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने राज्य भर में मिलावटी खाने की सामग्रियों, अनसेफ फूड और बैन गुटखा व पान मसाले के खिलाफ एक बड़ा और आक्रामक अभियान चला रखा है। एफडीए आयुक्त और कड़क मिजाज के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र अभियान के तहत पिछले 24 घंटे के दौरान हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे राज्य के होटल संचालकों, डेयरी कारोबारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।

इस राज्यव्यापी छापेमारी के दौरान एफडीए की टीमों ने कुल 25.30 लाख रुपये मूल्य के फूड प्रोडक्ट जब्त किए हैं। इसमें 11.40 लाख रुपये के बैन प्रोडक्ट हैं और करीब 14,552 किलोग्राम दूसरी खाद्य सामग्रियां शामिल हैं।

मालाड के होटल राधा का लाइसेंस निलंबित, किचन में दिखे चूहे और कॉकरोच

जांच टीम जब मुंबई के मालाड स्थित होटल राधा के किचन में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। किचन में खुले नाले से चूहे सीधे अंदर घुस रहे थे। इतना ही नहीं आटा गूंदने की मशीन पर कॉकरोच रेंगते हुए पाए गए। रसोई में चारों तरफ गंदा और ठहरा हुआ पानी, ग्रीस जमा हुआ था और बेहद अनहेल्दी स्थितियां मौजूद थीं। इन गंभीर कमियों को देख एफडीए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए होटल राधा का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

कुर्ला के ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ और इंजीनियरिंग कॉलेज के मेस पर गाज

एफडीए की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। कुर्ला स्थित प्रसिद्ध ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ में खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर उल्लंघन पाए गए। यहां कच्चे मांस का स्टोरेज ठीक नहीं था। टेंप्रेचर रिकॉर्ड नहीं मिला और पके और कच्चे भोजन को ठीक तरीके से रखा नहीं गया था। बतर्न और मशीनें बेहद गंदी मिलीं तो एफडीए ने इसका FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

इसके अलावा नवी मुंबई के खारघर स्थित सरस्वती कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के फूड बिजनेस पर भी गाज गिरी है। जांच में कॉलेज के फूड वेंचर में पेस्ट-कंट्रोल के अपर्याप्त इंतजाम, वेंटिलेशन की कमी, जरूरी प्रयोगशाला जांच का न होना और स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बाद इसके संचालन को सस्पेंड कर दिया गया।

कुल 31 होटलों की जांच, वैजापुर से उदगीर तक बैकफुट पर कारोबारी

इस विशेष अभियान के दौरान एफडीए ने कुल 31 होटलों, रेस्तरां और ढाबों का निरीक्षण किया। इनमें से 22 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए जबकि 5 खाद्य व्यवसाय लाइसेंसों को सीधे निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा राज्य के कई इलाकों में ऐक्शन हुआ। वैजापुर के परमेष्ठी सुपर शॉपी के खिलाफ बिक्री के लिए एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद रखने और दुकान में गंदगी पाए जाने पर कार्रवाई की गई।

उदगीर में FDA की टीम ने लैब में जांच के लिए देसी घी के 6 सैंपल लिए, जिनकी कुल मात्रा प्रेस नोट के अनुसार 2,400 यूनिट दर्ज की गई। पुणे और सांगली की कंपनियों से संदिग्ध गुणवत्ता वाले और मिसब्रांडेड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें खिचड़ी मसाला, डिफैटेड टोस्टेड सोया ग्रिट्स और गुड़ पाउडर शामिल हैं। इन सभी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं।

प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाले पर क्रैकडाउन: 8 एफआईआर और 10 गिरफ्तारियां

सुरक्षित खाद्य, सुरक्षित महाराष्ट्र अभियान के तहत गुटखा और पान मसाला जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की अवैध बिक्री पर भी भारी शिकंजा कसा गया है। एफडीए ने इस क्रैकडाउन में 11.40 लाख रुपये के प्रतिबंधित उत्पाद जब्त किए हैं। इस दौरान पुलिस और एफडीए की संयुक्त कार्रवाई के तहत कुल 8 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। इसमें 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 6 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया और माल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले 2 वाहनों को जब्त कर लिया गया।

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अंग्रेजों ने भारत से लूटे 200 ट्रिलियन डॉलर! कभी दुनिया की 27% GDP था भारत, जानिए यहां से कितना लेकर गए

भारत और 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल अपने लिए किया। वहीं करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के संसाधनों और संपदा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ब्रिटेन के हितों के लिए किया गया।

न्यूज 18 के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों के पुराने आकलनों के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच ब्रिटिश क्राउन और ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति बाहर ले गई। लंबे समय तक चले इस आर्थिक शोषण का असर भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और आजादी के समय देश को कई बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

नेहरू के सामने बड़ी समस्या

1947 के बाद पीएम जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालना, उद्योगों को बढ़ावा देना और देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को लंबे समय तक बड़े स्तर पर काम करना पड़ा।

करीब 200 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति गई बाहर

पुराने अनुमानों को अगर आज की आर्थिक स्थिति के हिसाब से देखा जाए और उनमें महंगाई, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और मौजूदा बाजार मूल्य को शामिल किया जाए, तो भारत से बाहर गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 2026 में करीब 200 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ये आंकड़ा बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में भारत की संपदा बाहर जाती रही, जिससे आजादी के समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

‘काउंसिल बिल्स’ बड़ा तरीका

भारत से पैसा बाहर ले जाने का एक बड़ा तरीका ‘काउंसिल बिल्स’ व्यवस्था थी। 1765 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से कपड़ा, मसाले और शोरा खरीदने के लिए ब्रिटेन से लाया गया सोना-चांदी इस्तेमाल करती थी। लेकिन बंगाल में टैक्स वसूलने का अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने तरीका बदल दिया। इसके बाद भारत से मिले टैक्स के पैसे से ही भारतीय सामान खरीदा जाने लगा और इस तरह भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन पहुंचने लगा।

  1. टैक्स वसूली: भारतीय किसानों और व्यापारियों से सीधे टैक्स लिया जाता था।
  2. टैक्स से खरीदारी: ब्रिटिश सरकार टैक्स से जुटाए गए राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने में इस्तेमाल करती थी, जिसे बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाता था।
  3. बिना असली भुगतान: भारतीयों को उनके ही टैक्स के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे ब्रिटेन को भारत का कीमती सामान लगभग मुफ्त में मिलता था।

GDP में आई गिरावट

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 1700 के आसपास भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा करीब 27% बताया जाता है, लेकिन 1947 तक यह घटकर 3% से भी कम रह गया। ब्रिटिश नीतियों का असर भारत के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा। भारतीय कपड़ों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगाया गया, जबकि ब्रिटिश सामान भारत में आसानी से बिकने लगा। इससे ढाका, मुर्शिदाबाद और सूरत जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों को बड़ा नुकसान हुआ। काम कम होने के बाद कई कारीगर और बुनकर खेती पर निर्भर हो गए और भारत धीरे-धीरे तैयार सामान के बजाय कपास, अफीम और नील जैसी कच्ची उपज के निर्यातक देश के रूप में बदल गया।

दूसरे विश्व युद्ध में हुआ नुकसान

1858 के बाद भी भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश सरकार से जुड़े खर्चों पर ही लगाया जाता रहा। ‘होम चार्ज’ के तहत भारतीय करदाताओं के पैसों से ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, रेलवे निवेश पर ब्याज और विदेशों में ब्रिटिश सेना के अभियानों का खर्च उठाया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह आर्थिक दबाव और बढ़ गया। युद्ध के खर्च और कर्ज का असर भारत में महंगाई और खाद्य संकट के रूप में दिखाई दिया। लंबे समय तक चले इस आर्थिक बोझ के कारण 1947 में आजादी मिलने तक भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी थी।

आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत

आजादी के समय भारत की नई सरकार के सामने पैसों और संसाधनों की बड़ी कमी थी। देश में गरीबी और खाद्य संकट गंभीर था, उद्योग कमजोर हो चुके थे और विभाजन के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर थी। सीमित सरकारी खजाने के बावजूद सड़कों, बिजली, सिंचाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम शुरू करना पड़ा। लेकिन, आजादी के बाद के दशकों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रगति की और आज वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश अब लंबे समय के विकास लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपनी आर्थिक ताकत को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

किचन से निकला ये देसी जुगाड़ आएगा काम, घर की हरियाली को हरा-भरा बनाने में!

चावल बनाने या धोने के बाद बचा हुआ पानी हम बिना सोचे सिंक में बहा देते हैं। लेकिन इसे फेंकने के बजाय आप अपने घर के पौधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सादे चावल के पानी में थोड़ा स्टार्च और कुछ मिनरल्स होते हैं, जो मिट्टी के लिए काम आ सकते हैं और पौधों की अच्छी ग्रोथ में मदद कर सकते हैं।

पौधों में डालने से पहले चावल के पानी को पूरी तरह ठंडा कर लें और जरूरत हो तो इसमें थोड़ा सादा पानी मिला लें। इसमें नमक, तेल या मसाले नहीं होने चाहिए। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी में डालना बेहतर है। अगर आप भी किचन की चीजों का सही इस्तेमाल करके पौधों की देखभाल करना चाहते हैं, तो आगे जानिए कौन-से पौधों में चावल का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पाइडर प्लांट और पीस लिली

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स्पाइडर प्लांट को हल्की नमी वाली मिट्टी पसंद होती है। आप कुछ हफ्तों में एक बार इसमें सादा चावल का पानी डाल सकते हैं। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे मिट्टी और जड़ों के पास डालें। साथ ही, जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें।

पीस लिली को बढ़ने के समय हल्का पोषण पसंद होता है। ऐसे में कभी-कभी सादा चावल का पानी मिट्टी में डाला जा सकता है। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास डालें। बहुत ज्यादा चावल का पानी इस्तेमाल न करें।

टमाटर के पौधे और पोथोस

टमाटर के पौधों को अच्छी ग्रोथ, फूल और फल के लिए पर्याप्त पोषण चाहिए। कभी-कभी चावल का पानी जड़ों के पास डाला जा सकता है, लेकिन यह फर्टिलाइजर का ऑप्शन नहीं है। टमाटर के लिए कम्पोस्ट और सही फर्टिलाइजर देना ज्यादा जरूरी है।

पोथोस घर के अंदर आसानी से उगने वाला पौधा है। इसमें कभी-कभी सादा चावल का पानी डाला जा सकता है। इससे मिट्टी को कुछ पोषण मिल सकता है और पौधे की ग्रोथ में मदद मिल सकती है। लेकिन मिट्टी को हमेशा गीला न रखें, क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ों को नुकसान हो सकता है।

मनी प्लांट और फर्न

मनी प्लांट मिट्टी पानी दोनों में आसानी से बढ़ता है। मिट्टी में लगे मनी प्लांट को कभी-कभी ठंडा और सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद अच्छे माइक्रोब्स को मदद मिल सकती है। इसे नार्मल पानी की जगह नहीं, बल्कि कभी-कभी ही इस्तेमाल करें।

फर्न को हल्की नम मिट्टी पसंद होती है, इसलिए कभी-कभी इसमें सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। लेकिन पानी बहुत ज्यादा न डालें, क्योंकि फर्न की जड़ों के पास पानी जमा होने से समस्या हो सकती है। गमले में अच्छी ड्रेनेज होना भी जरूरी है।

चावल का पानी इस्तेमाल करने टिप्स

घर के बगीचे में लगे पौधों के लिए कभी-कभी सादे चावल के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों की बढ़त के समय थोड़ी मात्रा में चावल का पानी दिया जा सकता है, लेकिन इसे नार्मल पानी की जगह इस्तेमाल न करें। पौधों में चावल का पानी डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा सादा चावल का पानी इस्तेमाल करें, जिसमें नमक, तेल, मक्खन या मसाले न मिले हों। चावल का पानी पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास मिट्टी में डालें। पानी देने के रूटीन के साथ हर 2 से 4 हफ्ते में एक बार चावल का पानी देना फायदेमंद है।

खूब खाइए कि आप लखनऊ में हैं…

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लखनऊ हम पर फ़िदा, हम फ़िदा-ए-लखनऊ…”
यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि उस शहर की रूह है जहाँ तहज़ीब भी दस्तरख़्वान पर परोसी जाती है और मोहब्बत भी मसालों में घुली मिलती है।

लखनऊ पहुंचते ही मैंने तय कर लिया था कि इस शहर की पहली सलाम उसकी इमारतों को नहीं, उसके खाने को होगी। एयरपोर्ट से होटल पहुँचा, सामान रखा और रात के साढ़े दस बजे बिना एक पल गंवाए साइकल रिक्शा पकड़ा। मंज़िल थी—अमीनाबाद का मशहूर टुंडे कबाबी।

कहते हैं, जो लखनऊ आया और टुंडे के कबाब नहीं खाए, उसने शहर को बस देखा है, जिया नहीं।”
रिक्शा पुराने लखनऊ की गलियों से गुज़र रहा था। इत्र की खुशबू, पान की दुकानें, रात में भी जागते बाज़ार, चिकनकारी के शो-रूम और हर नुक्कड़ पर खाने की महक। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर कह रहा हो—

खूब खाइए कि आप लखनऊ में हैं।”
पहला निवाला… और फिर गिनती भूल जाइए

गरमा-गरम गलावटी कबाब प्लेट में आए। साथ में हरी चटनी, पतले कटे प्याज़ और लखनऊ का मशहूर पराठा। पहला कबाब जैसे ही ज़ुबान पर रखा, समझ आया कि इन्हें गलावटी” क्यों कहते हैं। चबाने की ज़रूरत ही नहीं। कबाब खुद-ब-खुद घुलते चले जाते हैं।

मसालों का ऐसा संतुलन कि कोई मसाला दूसरे पर हावी नहीं। गोश्त की ऐसी नर्मी कि लगता है जैसे रसोइए ने पकवान नहीं, कोई नज़्म लिखी हो। दो प्लेट कब खत्म हुईं, पता ही नहीं चला।
किसी ने ठीक ही कहा है—

ज़ुबां पे रखो तो लफ़्ज़ बन जाए,
लखनऊ का कबाब है जनाब, मज़ाक नहीं।”
टुंडे कबाबी सिर्फ़ खाना नहीं, विरासत है

कहानी मशहूर है कि नवाब आसफ़-उद-दौला के लिए ऐसा कबाब बनाया गया जो बिना दाँतों के भी खाया जा सके। फिर एक बावर्ची ने सैकड़ों मसालों का ऐसा मिश्रण तैयार किया कि स्वाद इतिहास बन गया।

आज भी उस रेसिपी को लेकर कई किस्से हैं। कोई कहता है 100 मसाले, कोई 160, कोई उससे भी ज़्यादा। लेकिन सच यह है कि उसकी असली रेसिपी शायद स्वाद से ज़्यादा, सदियों की परंपरा में छिपी है।

लखनऊ सिर्फ़ कबाब नहीं है
अगर आपने सोचा कि लखनऊ की पहचान सिर्फ़ गलावटी कबाब हैं, तो अभी आपकी प्लेट अधूरी है।

सुबह की शुरुआत निहारी-कुलचा से कीजिए। घंटों धीमी आँच पर पका गोश्त और मुलायम कुलचा।

दोपहर में अवधी बिरयानी। हैदराबादी बिरयानी की तरह मसालों का शोर नहीं, बल्कि हर दाने में नफ़ासत।
शाम को शीरमाल और रूमाली रोटी के साथ कोरमा

और अगर मीठा नहीं खाया तो लखनऊ आपसे थोड़ा नाराज़ हो जाएगा। मक्खन मलाई (निमिष), मलाई गिलौरी, कुल्फी और रबड़ी… हर मिठाई में ऐसा सुकून जैसे सर्दियों की धूप। ये सब अगली बार के लिए बचाए गए हैं।

lucknow biryani

नवाबी सिर्फ़ खाने में नहीं, खिलाने में भी है

लखनऊ का सबसे बड़ा स्वाद उसके लोग हैं।
यहाँ वेटर भी प्लेट रखते हुए “हुज़ूर” कहता है। दुकानदार भी मुस्कुराकर पूछता है—”और कुछ पेश करूँ?”

यही वजह है कि यहाँ खाना सिर्फ़ पेट भरने का ज़रिया नहीं, मेहमाननवाज़ी का तरीका है।
शायर ने शायद ऐसे ही शहर के लिए कहा होगा—

गुल से रंगीतर है ख़ारे-लखनऊ,
नशे से बेहतर है नज़ारे-लखनऊ।”
मेरे हिस्से का लखनऊ

हर शहर अपनी कोई याद साथ भेजता है। कहीं तस्वीरें, कहीं स्मारक, कहीं बाज़ार। लेकिन लखनऊ ने मुझे जो दिया, वह स्वाद था। ऐसा स्वाद जो लौटकर भी ज़ुबान पर रहता है।

ऐसा स्वाद जो याद दिलाता है कि हिंदुस्तान सिर्फ़ भाषाओं और संस्कृतियों का नहीं, बल्कि पकवानों का भी देश है।

लखनऊ से लौटते समय मेरे साथ गलावटी कबाब और बिरयानी के अलावा लेकिन यादों में पुरानी गलियाँ थीं, रिक्शे की घंटी थी और वह एहसास था जिसे सिर्फ़ एक ही वाक्य में समेटा जा सकता है— खूब खाइए… कि आप लखनऊ में हैं।”

Taapsee Pannu Birthday: तापसी पन्नू के 7 ऐसे दमदार किरदार, जिन्होंने एक्ट्रेस के करियर में लगाए चार चांद

Taapsee Pannu Birthday: जब कंटेंट-आधारित सिनेमा आज की तरह इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ट्रेंड नहीं बना था, तब भी तापसी पन्नू अपनी फिल्मों का चुनाव ऐसी कहानियों के आधार पर कर रही थीं जो अलग सोच रखती थीं। उन्होंने आसान फॉर्मूले वाली फिल्मों के बजाय ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जो समाज से जुड़े सवाल उठाती थीं और मजबूत महिला किरदारों को कहानी के केंद्र में रखती थीं। उनके जन्मदिन पर आइए याद करें वे सात फिल्में, जिन्होंने साबित किया कि अच्छी कहानियां हमेशा ट्रेंड से आगे होती हैं।

1. पिंक (2016): सहमति को कहानी का सबसे बड़ा मुद्दा बनाया

उस समय कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में ज्यादातर पुरुष किरदार मुख्य भूमिका में होते थे, लेकिन पिंक ने तीन आम महिलाओं को कहानी के केंद्र में रखा। तापसी ने मीनल के किरदार को बहुत सादगी और मजबूती के साथ निभाया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक फिल्मों में गिनी जाती है।

2. नाम शबाना (2017): जब महिला एक्शन हीरोइन अभी आम बात नहीं थी

महिला-प्रधान एक्शन फिल्मों का दौर शुरू होने से पहले ही तापसी ने नाम शबाना जैसी फिल्म की। उन्होंने साबित किया कि एक एक्शन थ्रिलर को भी एक महिला अपने दम पर आगे बढ़ा सकती है। फिल्म में ताकत, समझदारी और भावनात्मक गहराई, तीनों नजर आए।

3. बदला (2019): जब उन्होंने बड़े मसाले के बजाय मजबूत कहानी चुनी

जब मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्मों को सुरक्षित व्यावसायिक विकल्प नहीं माना जाता था, तब तापसी ने बदला जैसी फिल्म चुनी। यह फिल्म पूरी तरह कहानी और अभिनय पर टिकी थी, और उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को आखिर तक बांधे रखा।

4. थप्पड़ (2020): एक थप्पड़ को पूरे देश की बहस बना दिया

कई लोगों को लगा कि सिर्फ एक थप्पड़ पर बनी फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन थप्पड़ ने सबको गलत साबित कर दिया। तापसी के शांत और सच्चे अभिनय ने सम्मान, बराबरी और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर देशभर में चर्चा शुरू कर दी।

5. रश्मि रॉकेट (2021): एक अनदेखे मुद्दे को मुख्यधारा तक पहुंचाया

रश्मि रॉकेट में तापसी ने खेलों में होने वाले जेंडर टेस्टिंग जैसे कम चर्चित विषय पर काम किया। कड़ी शारीरिक तैयारी और भावनात्मक अभिनय के साथ उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को लोगों तक पहुंचाया जिस पर पहले बहुत कम बात होती थी।

6. हसीन दिलरुबा (2021): एक ऐसी नायिका जो पूरी तरह परफेक्ट नहीं थी

जब फिल्मों में महिला किरदारों से अक्सर आदर्श होने की उम्मीद की जाती थी, तब तापसी ने रानी जैसा किरदार निभाया। वह भावुक, जिद्दी, अप्रत्याशित और पूरी तरह इंसानी थी। फिल्म की सफलता ने दिखाया कि दर्शक ऐसे जटिल महिला किरदारों को भी पसंद करते हैं।

7. सांड की आंख (2019): उम्र और समाज की सीमाओं को चुनौती देने वाली कहानी

सांड की आंख में तापसी ने भारत की सबसे उम्रदराज निशानेबाजों में से एक, प्रकाशी तोमर का किरदार निभाया। यह फिल्म हिम्मत, मेहनत और जीवन के किसी भी पड़ाव पर सपने पूरे करने की प्रेरणा देने वाली कहानी थी। इसने दिखाया कि असाधारण कहानियां कहीं से भी आ सकती हैं।

सिनेमा के ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी कहानियों का असर लंबे समय तक रहता है। तापसी पन्नू का करियर इसी बात का सबूत है। जब कंटेंट-आधारित फिल्में आज की तरह आम नहीं थीं, तब भी उन्होंने ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जिनमें गहराई थी, मजबूत किरदार थे और समाज से जुड़ी बात थी। अब जब गांधारी के साथ वह एक और अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने जा रही हैं, तापसी एक बार फिर साबित करती हैं कि ट्रेंड के पीछे चलने से नहीं, बल्कि नया रास्ता बनाने से पहचान बनती है।

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

The image caption features a message about monsoon special snack recipes, accompanied by a photo of plates arranged with Palak Patta Chaat, Dal Vada, Samosas, and Potato Tacos

Rainy Day Snacks: रिमझिम फुहारें और ठंडी हवाएं… मानसून का मौसम आते ही दिल कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने के लिए मचलने लगता है। इस मौसम में बालकनी में बैठकर बारिश को निहारते हुए अगर हाथ में स्नैक्स की प्लेट हो, तो मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप भी इस बार पारंपरिक पकौड़ों से हटकर कुछ नया और बेहद लाजवाब ट्राई करना चाहते हैं, तो यहाँ 5 मानसून स्पेशल स्नैक्स रेसिपीज दी गई हैं:ALSO READ: बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

 

1. चटपटा 'पालक पत्ता चाट' 

बारिश में चाट खाने का अपना ही मजा है। यह स्नैक दिखने में जितना फैंसी है, बनाने में उतना ही आसान।

 

कैसे बनाएं: पालक के बड़े और साफ पत्तों को बेसन, अजवाइन और नमक के गाढ़े घोल में डुबोकर एकदम क्रिस्पी होने तक तल लें। अब इन कुरकुरे पत्तों को एक प्लेट में सजाएं। ऊपर से फेंटा हुआ मीठा दही, हरी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी, चाट मसाला और नायलॉन सेव डालकर तुरंत सर्व करें।

 

2. गरमा-गरम 'दाल वड़ा' 

दक्षिण भारत का यह मशहूर स्नैक मानसून में कमाल का लगता है। यह ऊपर से बेहद कुरकुरा और अंदर से सॉफ्ट होता है।

 

कैसे तैयार करें: चना दाल को 3-4 घंटे भिगोकर बिना पानी के दरदरा पीस लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, ढेर सारा कढ़ी पत्ता, अदरक और हींग मिलाएं। इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर गरम तेल में सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। इसे नारियल की चटनी के साथ परोसें। चाय के साथ गरमा-गरम 'दाल वड़ा' का आनंद लें।

 

3. अचारी पनीर टिक्का समोसा

आलू समोसा तो हमेशा खाते हैं, इस बार बारिश में कुछ रॉयल ट्राई करें। समोसे के अंदर पनीर टिक्का की स्टफिंग हर बाइट में मजा ला देगी।

 

कैसे तैयार करें: पनीर के छोटे टुकड़ों को दही, तंदूरी मसाला, कसूरी मेथी और थोड़े से अचार के मसाले के साथ मैरीनेट करें और तवे पर हल्का सा टॉस कर लें। अब समोसे की पट्टी (शीट्स) में इस अचारी पनीर को भरकर समोसे का आकार दें और फ्राई करें। पुदीने की तीखी चटनी के साथ यह लाजवाब लगता है।

 

4. क्रिस्पी पोटैटो टाकोस

अगर बच्चों और बड़ों दोनों को खुश करना है, तो यह इंडो-मैक्सिकन फ्यूजन स्नैक बेस्ट है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए आलुओं में चाट मसाला, चिली फ्लेक्स, प्याज और हरा धनिया मिलाकर एक स्टफिंग तैयार करें। अब बची हुई रोटियों या मैदा की शीट पर इस स्टफिंग को फैलाएं, ऊपर से ढेर सारा चीज डालें और इसे आधे चांद के आकार में मोड़ लें। तवे पर मक्खन या तेल लगाकर इसे दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी होने तक सेकें।

 

5. मॉनसून स्पेशल 'चीज़ कॉर्न बॉल्स' 

बारिश और भुट्टे का रिश्ता बहुत पुराना है। इस बार भुट्टे को एक चीजी और क्रिस्पी ट्विस्ट दें।

 

कैसे तैयार करें: उबले हुए कॉर्न को थोड़ा दरदरा क्रश कर लें। इसमें उबला आलू, कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज, काली मिर्च और नमक मिलाएं। इसके छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं, उन्हें कॉर्नफ्लोर के घोल में डुबोएं और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में लपेटकर कुरकुरा होने तक तल लें।

 

स्मार्ट कुकिंग टिप: बारिश के मौसम में स्नैक्स को और भी क्रिस्पी बनाने के लिए बेसन या मैदे के घोल में 1 से 2 चम्मच चावल का आटा या गरम तेल जरूर मिलाएं। इससे स्नैक्स लंबे समय तक कुरकुरे रहते हैं।

 

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