शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन, एक्सपर्ट ने बताई इसकी तीन बड़ी वजहें

शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी

कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।

बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल 

सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।

क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट 

उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।

कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था

कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।

कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव 

बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में तेजी, चांदी सिर्फ दो दिन में 15000 रुपये चढ़ गई

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 21 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी आई। इससे सोने और चांदी का भाव तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया। 20 अगस्त को भी सोना तेजी के साथ बंद हुआ था। बुलियन में तेजी की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और तेजी में जोरदार तेजी को माना जा रहा है। साथ ही डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी कीमतों को सपोर्ट मिला।

सोने का भाव 19 मई के बाद पहली बार 1,63,500 रुपये पर

सोना 21 अगस्त को 1,200 रुपये चढ़कर 1,63,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले सोने की यह कीमत 19 मई को थी। तब सोने का भाव 1,63,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी तो आज रॉकेट बन गई। 5000 रुपये के उछाल के साथ इसकी कीमत 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। सिर्फ दो दिन में चांदी में 15,000 रुपये का उछाल आया है।

इन वजहों से देश और विदेश में सोने और चांदी को लगे पंख

लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने में शुक्रवार को भी तेजी जारी रही। यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब सोने में तेजी देखने को मिली है। चांदी भी सोने के पीछे-पीछे चलती दिख रही है। इसकी वजह डॉलर में कमजोरी और लंबी अवधि के अमेरिकी बॉऩ्ड की यील्ड में नरमी है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन महीने बाद सोना 4600 डॉलर के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में जोरदार तेजी दिखी। सोना 2 फीसदी यानी करीब 81 डॉलर के उछाल के साथ 4,600.91 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर में तो करीब 3 फीसदी का उछाल आया। इससे इसका भाव 69.87 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोना 18 मई के बाद पहली बार 4,600 डॉलर के लेवल पर पहुंचा है।

यह सोने की कीमतों में तेजी का लगातार तीसरा हफ्ता रहा

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि इस हफ्ते सोने में 4 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है। इसकी वजह अमेरिकी सरकार की तरफ से बॉन्ड पर्चेंज प्रोग्राम का ऐलान है। इससे डॉलर में नरमी आई है। बॉन्ड यील्ड में भी नरमी दिखी है। इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच डील की कोई संभावना नहीं दिख रही। दोनों देशों के बीच गतिरोध जारी रहने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नहीं खुलने से क्रूड की कीमतें 93 डॉलर के पार बनी हुई हैं।

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क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी काफी ऊंचे लेवल पर 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक क्रूड की कीमतों में नरमी नहीं आती है सोने और चांदी में तेजी जारी रहने की उम्मीद कम है। पिछले कई महीनों में काफी ज्यादा गिरावट के बाद सोने और चांदी में रिकवरी दिख रही है। इससे बुलियन के निवेशकों ने राहत की सांस ली है। उधर, कई देशों के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से भी सोने को सपोर्ट मिल रहा है।

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गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में 21 अगस्त को जोरदार तेजी दिखी। विदेश में सोने और चांदी में जबर्दस्त तेजी का असर भारत में गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर पड़ा। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स दोपहर बाद 1,771 रुपये चढ़कर 1,61,196 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सिल्वर फ्यूचर्स भी 3,128 रुपये की तेजी के साथ 2,46,371 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4600 डॉलर के करीब

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1.73 फीसदी चढ़कर 4,594 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 2.34 फीसदी के उछाल के साथ 69.67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है। यह सोने में तेजी का लगातार तीसरा हफ्ता है। इस तेजी ने सोने के निवेशकों की चिंता दूर कर दी है।

जनवरी में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर थीं

इस साल जनवरी में सोने का भाव ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। हालांकि, 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचने के बाद सोने में तेज गिरावट आई थी। सिल्वर भी 4.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पर पहुंच गया था। इसके बाद चांदी में भी तेज गिरावट आई थी। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन की कीमतों पर दबाव बढ़ गया।

इन वजहों से दिख रही सोने और चांदी में फिर से तेजी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड और सिल्वर में तेजी की वजह डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। हालांकि, क्रूड की कीमतें अब भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। महंगाई को रोकने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं, जिसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

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क्या यह निवेश करने का सही समय है?

निवेशक सोने में हर गिरावट के मौके का इस्तेमाल खरीदारी के लिए कर सकते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा लेवल पर एकमुश्त खरीदारी करने से बचना ठीक रहेगा। जो लोग पहले से सिप के जरिए गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर रहे हैं, उन्हें अपना सिप जारी रखने की सलाह है। क्रूड की कीमतें जब तक नीचे नहीं आ जाती हैं, सोने में तेजी जारी रहने की उम्मीद कम है। हालांकि, मौजूदा लेवल से कीमतें ज्यादा नीचे जाने की उम्मीद नहीं है। नए निवेशक गोल्ड ईटीएफ में थोड़ा-थोड़ा निवेश शुरू कर सकते हैं।

Sugar Stocks Crash: ड्यूटी-फ्री चीनी इंपोर्ट की इजाजत से शुगर कंपनियों के शेयर धड़ाम, बलरामपुर चीनी सबसे ज्यादा गिरा

Sugar Stocks Crash: चीनी बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 21 अगस्त को बड़ी गिरावट दिखी। इसकी वजह सरकार का एक फैसला है। सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर आयात करने की इजाजत दे दी है। इस पर इंपोर्टर्स को कोई ड्यूटी नहीं चुकानी होगी। सरकार ने देश में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया है। बीते कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है।

रॉ शुगर के इंपोर्ट से देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी

सरकार का मानना है कि रॉ शुगर के इंपोर्ट से देश में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी। इससे त्योहारों के सीजन में चीनी की कीमतें कंट्रोल में रहेंगी। देश में अक्तूबर से त्योहारों का मौसम शुरू होता है। 20 अगस्त को सरकार ने चीनी की जमाखारी पर अंकुश लगाने के लिए डीलर्स के लिए नई स्टॉक लिमिट तय करने का आदेश दिया था।

बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 

21 अगस्त को सबसे ज्यादा गिरावट Balrampur Chini Mills के शेयरों में दिखी। 11 बजे यह शेयर 4.56 फीसदी गिरकर 732 रुपये पर चल रहा था। Shri Renuka Sugars 4.13 फीसदी की कमजोरी के साथ 25 रुपये पर चल रहा था। बजाज हिंदुस्तान शुगर का शेयर 3.26 फीसदी की कमजोरी के साथ 22 रुपये पर च लरहा था। Bannari Amman Sugars का शेयर 4.46 फीसदी गिरकर 4,051 रुपये पर चल रहा था। चीनी बनाने वाली बाकी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला।

एक दशक में पहली बार रॉ शुगर इंपोर्ट को इजाजत

सरकार ने बीते एक दशक में पहली बार रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की इजाजत दी है। अनुमान है कि इसका असर देश में चीनी बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। दरअसल, बीते दो महीनों में चीनी की कीमतों में 40 फीसदी उछाल आया है। इसकी वजह देश में चीनी का कम उत्पादन है। अगर देश में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के उपाय नहीं किए जाते हैं तो त्योहारों के दौरान कीमतें आसमान में पहुंच सकती हैं।

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लगातार दो सत्रों में शुगर स्टॉक्स में आई थी जोरदार तेजी

इससे पहले दो सत्रों में चीनी कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह कम सप्लाई और चीनी की ऊंची कीमतें थीं। माना जा रहा था कि इससे चीनी कंपनियों के रेवेन्यू पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। 20 अगस्त को बलरामपुर चीना मिल्स का शेयर 18 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। द्वारिकेशन शुगर इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 14 फीसदी तेजी आई थी। बाकी चीनी कंपनियों के शेयर भी 7-10 फीसदी चढ़े थे। 21 अगस्त को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में चल रहे थे।

Trading Ideas : आज की दिन काफी अहम, शॉर्ट टर्म में करना चाहते हैं बंपर कमाई तो इन दो शेयरों पर रहे नजर

Trading Ideas : बाजार में आज हल्की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। मार्केट के टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी अभी अपने 50 डे और 100 डे EMA के आस-पास घूम रहा है। हालांकि,दोनों एवरेज मोटे तौर पर स्थिर हैं,जो किसी खास दिशा में तेजी की कमी और कंसोलिडेशन के दौर का संकेत दे रहे हैं। मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर भी नियर टर्म में न्यूट्रल से साइडवेज रुझान का संकेत दे रहे हैं।

एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी के लिए 24290-24320 पर स्थित 20-डे EMA जोन एक अहम रुकावट का काम कर सकता है। अगर यह लगातार 24320 के स्तर के ऊपर बना रहता है तो एक तेज पुलबैक रैली शुरू हो सकती है,जिससे 24450 के स्तर तक ऊपर जाने का रास्ता खुल सकता है।

नीचे की तरफ,24130-24100 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। अगर निफ्टी 24100 के नीचे टूटता है तो टेक्निकल स्ट्रक्चर और कमजोर हो सकता है और मौजूदा करेक्शन वाला ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है,जिससे इंडेक्स 23950 के स्तर की ओर जा सकता है।

मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए त्रिशक्ति एसोसिएट्स के को-फाउंडर पवन माहेश्वरी ने कहा कि कल बाजार में अच्छी गैपअप ओपनिंग रही उसके बाद में एक डोजी फॉर्मेशन देखने को मिला। अगर मैं पिछले तीन दिन के पैटर्न देखें तो इसको हम एक आइलैंड रिवर्सल पैटर्न कह सकते हैं। हालांकि आज हमें वेट करना होगा। अगर आज निफ्टी क्लोजिंग तक 24,280 के ऊपर टिकता है तो यहां से एक नई तेजी बननी चालू हो जाएगी। इस स्थिति में हम 24,000 के स्टॉप लॉस के साथ लॉन्ग जा सकते है। वहीं, अगर आज मार्केट 24,300 के नीचे बंद होता है तो हमें एक दिन और वेट करना होगा। आज का दिन बाजार के लिए काफी अहम है। आज हमें निफ्टी पर नजर रखना होगा और 2 2:30 बजे के आसपास डिसीजन लेना होगा।

पवन माहेश्वरी की टॉप पिक्स

पवन माहेश्वरी ने कहा कि उनकी आज के लिए पहली पसंद है सीजी पावर। इसके चार्ट पैटर्न काफी अच्छे दिख रहे हैं। इस स्टॉक में 850 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 930 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। इनकी दूसरी पसंद डिफेंस सेक्टर से है। डिफेंस काफी प्रॉमिसिंग थीम है। ऐसे में कोचीन शिपयार्ड में 1460 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 1600 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Market View : जब तक क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी बाजार के रेंज-बाउंड रहने की उम्मीद, इन शेयरों पर रहे नजर

 

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news :अमेरिका और एशिया से खराब संकेतों के बावजूद गिफ्ट निफ्टी में मजबूती है। यह करीब 70 अंक ऊपर दिख रहा है। इधर FIIs की कैश में हल्की बिकवाली देखने को मिली है लेकिन वायदा में खरीदारी हुई है। हालांकि FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट दो लाख 12 हजार के पार चले गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

20 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त वापसी देखने को मिली। US ट्रेज़री यील्ड में कमी और ग्लोबल स्तर पर अच्छे संकेतों के बीच प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी हुई,जिससे निफ्टी की लगातार सात सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। बाजार की शुरुआत मजबूत रही,लेकिन शुरुआती घंटों में कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। हालांकि,जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा बाज़ार ने फिर से तेजी पकड़ी और मीडिया,फाइनेंशियल व रियल्टी शेयरों की अगुवाई में निफ्टी ने 24,265.15 का दिन का हाई छुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत बढ़कर 77,537.72 पर और निफ्टी 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत बढ़कर 24,231.85 पर बंद हुआ।

US की ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध की तैयारी

अमेरिका की ईरान पर अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंधो की तैयारी है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है कि इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंधों का सोमवार को एलान होगा। ईरान ने कहा कि यह आर्थिक आतंकवाद है। चीन ने भी इसका विरोध किया है। क्रूड 93 डॉलर के पार निकल गया है। सोना-चांदी भी चमके हैं। सोना 4500 डॉलर के पार दिख रहा है।

अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट, बॉन्ड यील्ड फिर 4.7% पर पहुंची

अमेरिका-ईरान के बीच गहराते विवाद से US बॉन्ड यील्ड में फिर उछाल आया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.7% पर पहुंचने से अमेरिकी बाजार नर्वस हो गया है। डाओ जोंस कल 700 प्वाइंट से ज्यादा फिसला। S&P और नैस्डैक भी एक परसेंट फिसले। उधर एशियाई बाजारों में भी नरमी है। निक्केई और कॉस्पी में करीब एक परसेंट का दबाव दिख रहा है।

HDFC बैंक ने बॉन्ड से जुटाए रिकॉर्ड 1.8 बिलियन डॉलर

HDFC बैंक ने तीन और पांच साल के डॉलर बॉन्ड के जरिये रिकॉर्ड पौने दो बिलियन डॉलर्स जुटाए हैं। किसी भारतीय वित्तीय कंपनी का ये सबसे बड़ा डेट इश्यू रहा। HDFC बैंक के बॉन्ड्स के लिए सात बिलियन डॉलर से ज्यादा की बोलियां मिलीं।

Market cues : 24300-24400 के ऊपर टिकने पर ही निफ्टी में आएगी तेजी, 24150 पर दिख रहा तत्काल सपोर्ट

सरकार ने 10 लाख टन चीनी इंपोर्ट को मंजूरी दी

चीनी के दाम काबू में करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 10 लाख टन चीनी आयात को मंजूरी दी गई है। 31 अक्टूबर तक बिना किसी ड्यूटी के इंपोर्ट हो सकेगा।

सेबी की नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा, F&O में करीब 88% ट्रेडर्स को हुआ घाटा

F&O में रिटेल ट्रेडर्स को अब भी जमकर घाटा हो रहा है। सेबी की नई रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में वायदा में करीब 88% ट्रेडर्स को घाटा हुआ। हालांकि F&O में ट्रेडिंग करने वाले भी घटे हैं। इनमें पिछले साल के मुकाबले 18% की कमी आई है। ऑप्शन बॉयर्स के मुकाबले ऑप्शन सेलर्स ने कम नुकसान झेला है।

सचिवों के साथ PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग, इंफ्रा, डिफेंस, पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर चर्चा

सचिवों के साथ PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग में इंफ्रा,डिफेंस और कनेक्टिविटी पर मंथन हुआ है। पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को स्पीड देने के निर्देश दिए गए हैं। पीएम ने कहा कि डिफेंस को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत है। AI के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

20 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों(FIIs)ने ₹583 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,537 करोड़ की नेट खरीदारी करके बाजार को सहारा देना जारी रखा।

बाजार के लिए क्या होगा आज गुड फ्राइडे या लगेगी निराशा हाथ, ग्लोबल बाजार से लेकर गिफ्ट निफ्टी तक जानें कैसे मिल रहे है संकेत

शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के सपाट खुलने की संभावना है। GIFT Nifty मामूली बढ़त का संकेत दे रहा है, जबकि पिछले सेशन में Nifty ने लगातार सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में फिर से दबाव और कच्चे तेल की कीमतों के एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने से सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है, भले ही एशियाई इक्विटी में मिला-जुला कारोबार हुआ और US स्टॉक फ्यूचर्स में थोड़ी बढ़त दिखी।

सुबह 8:05 बजे GIFT Nifty 25 अंक या 30. प्रतिशत बढ़कर 24,333.5 पर कारोबार कर रहा था। कल भारतीय इक्विटी में जोरदार वापसी हुई थी क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड में कमी से ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता में कुछ सुधार हुआ था। Sensex 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत बढ़कर 77,537.72 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत बढ़कर 24,231.85 पर बंद हुआ।

हालांकि, रात भर में ग्लोबल माहौल कम सपोर्टिव हो गया क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड फिर से बढ़ने लगीं और US-ईरान तनाव के समाधान की उम्मीदें कम होने के बीच कच्चा तेल एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

US बॉन्ड यील्ड में फिर से बढ़ोतरी, वॉल स्ट्रीट पर दबाव

इस हफ्ते की शुरुआत में US ट्रेजरी के दखल से मिली राहत कम समय के लिए ही रही, इसलिए शुक्रवार को भी ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में तनाव इक्विटी के लिए एक मुख्य जोखिम बना रहा। US 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड वापस लगभग 5.25 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि 10-वर्षीय यील्ड 4.71 प्रतिशत को छू गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव पड़ता है और इससे विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की संपत्ति कम आकर्षक हो सकती है।

यील्ड में फिर से बढ़ोतरी का असर रात भर वॉल स्ट्रीट पर दिखा। Dow Jones Industrial Average 703.84 अंक या 1.32 प्रतिशत गिरकर 52,759.21 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,641.16 और Nasdaq Composite में 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,067.17 पर कारोबार हुआ। रिटेल सेक्टर की बड़ी कंपनी वॉलमार्ट के निराशाजनक नतीजों ने भी सेंटीमेंट को खराब किया, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं।

शुक्रवार सुबह US इक्विटी फ्यूचर्स से थोड़े सकारात्मक संकेत मिले; S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत ऊपर रहे।

बॉन्ड मार्केट की चिंताओं के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। कई प्रमुख इंडेक्स साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहे थे क्योंकि निवेशक ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी से जूझ रहे थे। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरियाई और ताइवानी शेयरों में थोड़ी बढ़त देखी गई। हालांकि, जापान का निक्केई 0.8 प्रतिशत गिर गया और इसमें 4 प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट की संभावना थी।

US-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट $93 के करीब

घरेलू निवेशकों के लिए कच्चा तेल एक और बड़ी चिंता का विषय बना रहा, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिरोध के कारण कीमतें लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड पहले $94.71 प्रति बैरल तक पहुंचा, लेकिन बाद में प्रॉफिट बुकिंग के कारण इसमें थोड़ी नरमी आई। फ्यूचर्स अंत में 0.7 प्रतिशत गिरकर $93.12 प्रति बैरल पर रहे, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से अधिक ऊपर बने रहे। US क्रूड 0.7 प्रतिशत गिरकर $86.18 प्रति बैरल पर आ गया।

तेल की कीमतों को उस समझौते की कम होती उम्मीदों से सहारा मिला है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह से फिर से खुल सकता था; यह उम्मीद तब कम हुई जब US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन ईरान पर “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” लगाएगा।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक: आगे की रिकवरी के लिए 24,265 का स्तर अहम

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,265 के स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो इसकी रिकवरी 24,400 तक बढ़ सकती है; वहीं, अगर यह इस स्तर को पार नहीं कर पाता है, तो यह 24,000-24,250 के दायरे में ही बना रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म को 24,000-23,800 पर मजबूत सपोर्ट दिख रहा है और उम्मीद है कि इंडेक्स 24,000-24,600 की व्यापक रेंज में रहेगा। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयरों को सहारा देना जारी रखा और 3,537 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक नेट सेलर बन गए और उन्होंने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेश के प्रवाह पर नज़र बनी रहेगी क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से डॉलर एसेट्स का आकर्षण बढ़ सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी 70 अंक चढ़ा, सेंसेक्स-निफ्टी की हो सकती है मजबूत शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में दबाव, वॉल स्ट्रीट में बिकवाली का दिखा असर, निक्केई और कोस्पी में गिरावट

Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।

US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।

30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।

जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।

ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “आर्थिक युद्ध” की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।

ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹4300 चढ़ा, चांदी एक दिन में ₹10000 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 20 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग गए। सोना 4,300 के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे ज्यादा प्राइस है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी बताई जा रही है।

चांदी 10,000 रुपये के उछाल से 7 हफ्ते की उंचाई पर

20 अगस्त को चांदी में 10,000 रुपये की जोरदार तेजी आई। इससे इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह बीते सात हफ्तों में चांदी का सबसे ज्यादा भाव है। इससे पहले 3 जुलाई को चांदी की कीमतें इस लेवल पर थीं। लंबे समय बाद सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर से नरमी बुलियन को सपोर्ट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोना गुरुवार को बीते दो महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी है।” उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में नरमी दिखी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर हल्की तेजी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।

बेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। उधर, ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस तनातनी की वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है।

यह भी पढ़ें: Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड 4500 डॉलर के करीब, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

क्रूड में तेजी जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अगर लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड 4500 डॉलर के करीब, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर गोल्ड पर दिखा है। 19 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,571.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हालांकि, 20 अगस्त को इसमें थोड़ी नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सवाल है कि लंबे समय बाद गोल्ड में आई तेजी पर निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड में आई तेजी

गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.64 पर आ गई है। 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.18 फीसदी पर आ गई है। इसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी गोल्ड को सपोर्ट मिला है।

कई देशों के केंद्रीय बैंक खरीद रहे हैं गोल्ड

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, “बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने के लिए फेवरेबल है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।” हालांकि, गोल्ड में तेजी की वजह सिर्फ बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं है। सुरक्षित निवेश के लिए सोने में इनवेस्टमेंट बढ़ा है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोने में खरीदारी कर रहे हैं।

दिल्ली में गोल्ड की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर 

20 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में गोल्ड में जोरदार तेजी दिखी। यह 4,300 रुपये के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह घरेलू बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे हाई लेवल है। चांदी में भी अच्छी खरीदारी से तेजी देखने को मिली।

निवेशकों को फिलहाल क्या करना चाहिए

वीटी मार्केट्स में मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी के गोल्ड के लिए सपोर्टिव रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सोने में तेजी के पीछे भागने में रिस्क है। इनवेस्टर्स सोने में अपना निवेश जारी रख सकते हैं।

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गिरावट पर गोल्ड में खरीदारी की सलाह

उन्होंने कहा कि नए निवेशक सोने में गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। कीमतें हाई रहने पर उन्हें निवेश करने से बचने की सलाह है। आगे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड, फेडरल रिजर्व के संकेतों और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।