Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में चार सत्रों से जारी तेजी पर ब्रेक, चांदी ₹500 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार चार सत्रों से सोने में जारी तेजी पर 26 अगस्त को ब्रेक लग गया। सोना 600 रुपये गिरकर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी में तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में कमजोरी का असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा।

चांदी की कीमतों में 500 रुपये का उछाल

चांदी में 500 रुपये का उछाल आया। इससे इसकी कीमतें 2,50,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म मडरेक्स में लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि लगातार तेजी के बाद सोने में प्रॉफिट बुकिंग हुई, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि हालिया तेजी के गोल्ड का भाव बीते कई महीनों की उंचाई पर पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरे सोना और चांदी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.66 फीसदी गिरकर 4,627 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 0.27 फीसदी की कमजोरी के साथ 68.39 प्रति औंस पर चल रही थी। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी गिरावट दिखी। इसका भाव 1.22 फीसदी गिरकर 87.51 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।

क्रूड ऑयल की कीमतों में भी गिरावट 

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट दिखी। इसकी वजह लगातार पांच सत्रों की तेजी के बाद कंसॉलिडेशन है। उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल में भी गिरावट आई है। इसकी वजह इसकी सप्लाई को लेकर चिंता में कमी है। ईरान और ओमान अस्थायी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ओपन करने के तरीकों पर बातचीत कर रहे हैं।

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फेड चेयरमैन की स्पीच पर इनवेस्टर्स की नजरें 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह 28 अगस्त यानी शुक्रवार को जैक्सन होल में स्पीच देने वाले हैं। उनकी स्पीच से फेड की पॉलिसी के संकेत मिलेंगे। सितंबर में फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। अगर वह इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रखता है तो यह सोने की कीमतों के लिए पॉजिटिव होगा।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में तूफानी तेजी जारी, चांदी ₹3500 रुपये फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में तूफानी तेजी जारी है। 25 अगस्त को सोने में लगातार चौथे सत्र तेजी रही। यह 2,700 रुपये चढ़कर 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। हालांकि, चांदी में तेजी पर तीन दिन बाद ब्रेक लग गया। दिल्ली में चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इसकी वजह प्रॉफिट-बुकिंग बताई जा रही है।

चांदी में तीन सत्रों से जारी तेजी पर लगा ब्रेक

चांदी की कीमतें मंगलवार को 3,500 रुपये गिरकर 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड 0.31 फीसदी गिरकर 4,636 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 1.48 फीसदी गिरकर 67.89 डॉलर प्रति औंस पर था।

डॉलर में मजबूती से विदेश में गिरा सोना 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद प्रॉफिट बुकिंग और डॉलर में मजबूती से उसमें गिरावट आई। अमेरिकी सरकार के बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम के ऐलान के बाद डॉलर में कमजोरी दिखी थी। यह तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया था। लेकिन, मंगलवार को इसमें तेजी लौट आई। डॉलर में मजबूती पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।

सितंबर में अमेरिका में इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद कम

अमेरिका में फेडरल रिजर्व के अगले महीने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना घटी है। टेडर्स को अगले महीने अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की सिर्फ 40 फीसदी संभावना लग रही है। 60 फीसदी संभावना यह है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं होने से सोने को सपोर्ट मिलेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घटती है, जबकि इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में बढ़ती है।

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अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने से सोने को मिल रहा सपोर्ट

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन पर दबाव बढ़ गया। अब फिर से सोने और चांदी में तेजी दिख रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का हाथ है।

Gold Price Today: सोना ₹600 उछलकर ₹1.56 लाख के पार, कमजोर डॉलर से बढ़ी चमक

Gold Price Today: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट वाला सोना ₹600 चढ़कर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद कम हुई है। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की मांग को सहारा मिला।

पिछले हफ्ते अमेरिका में महंगाई, रोजगार और रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे बाजार को लगने लगा कि फेड जल्द ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है।

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ग्लोबल बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% बढ़कर 4,398 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर 65.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की सीमित कीमतें फिलहाल सोने को सहारा दे रही हैं।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव अब भी बाजार की नजर में है। हालांकि, इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेड की FOMC बैठक के मिनट्स पर रहेगी।

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, फेड के मिनट्स से ब्याज दरों के अगले संकेत मिल सकते हैं। इससे सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर,

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोने में 7 सत्रों से जारी तेजी थमी, चांदी ₹6000 फिसली

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते सात सत्रों से सोने में जारी तेजी पर गुरुवार को ब्रेक लग गया। सोने का भाव 2,800 रुपये गिरकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 6000 रुपये की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट आई।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी 6000 रुपये गिरकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन में कमजोरी का असर भारत में इनकी कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.43 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,389.67 डॉलर प्रति औंस था। स्पॉट सिल्वर भी हल्की कमजोरी के साथ 65.03 डॉलर प्रति औंस था।

बीते सात सत्रों मे सोने में आई थी ₹12400 की तेजी

इससे पहले सोना बीते 7 सत्रों से लगातार चढ़ रहा था। इससे इसकी कीमतें 4400 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई थी। दिल्ली में भी बीते सात सत्रों में सोना 12,400 रुपये चढ़ा था। चांदी में भी इस दौरान अच्छी तेजी आई थी। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। देश और विदेश में मुनाफावसूली का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका में 12 अगस्त को इनफ्लेशन के डेटा आए, जो उम्मीद के मुताबिक रहे। इससे फेडरल रिजर्व के सितंबर की पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। हालांकि, क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर हैं। ब्रेंट क्रूड अब भी करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर है।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के संकेत नहीं 

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे क्रूड की कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स का आवागमन नाममात्र का हो रहा है। अगर क्रूड लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। फिर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ जाएगी। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Silver Price Outlook: इस साल चांदी ने निवेशकों को निराश किया है। साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमत करीब 23% गिर चुकी है। सिर्फ जून महीने में ही इसमें 22% की बड़ी गिरावट आई। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारत में इसका भाव करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है। इसका मतलब है कि इस साल चांदी ₹65,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

हालांकि, पिछले एक साल में चांदी ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। लेकिन अब कीमतें दिसंबर 2025 के स्तर के आसपास लौट आई हैं। सवाल यह है कि आखिर चांदी पर दबाव क्यों बना हुआ है?

तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है। इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें चढ़ गईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और दुनिया भर के बाजारों पर दबाव आएगा।

फेड की ब्याज दरें क्यों हैं अहम?

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। ऐसे समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट छोड़कर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है।

चांदी सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली

चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे सेक्टरों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में थोड़ा भी बदलाव कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

गोल्ड सिल्वर रेशियो क्या होता है

जून 2026 में जब सोना 4,000-4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस पर थी। उस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 67 था। इससे पहले मई में यह 55 और जनवरी में 50 तक आ गया था।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। इसे सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। अगर रेशियो 75 या उससे ज्यादा हो, तो इसका मतलब माना जाता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। वहीं, अगर यह 50-60 या उससे नीचे हो, तो सोना सस्ता माना जाता है।

क्या अभी चांदी सस्ती है?

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव का कहना है कि 70 का रेशियो अपने लंबे समय के औसत के करीब है। यह बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी चांदी सोने के मुकाबले थोड़ी सस्ती नजर आती है। खासकर तब, जब औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहे। भारत में दिसंबर 2025 से चांदी की कीमत लगातार ₹2 लाख प्रति किलो से ऊपर बनी हुई है।

आगे किस धातु में ज्यादा दम?

निरपेन्द्र यादव का मानना है कि फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 65 से 75 के बीच रह सकता है। यह काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर फेड ब्याज दरें घटाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार आता है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे Gold-Silver Ratio घटकर 60-65 तक आ सकता है।

वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, मंदी का खतरा गहराता है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, तो सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में यह रेशियो 70 से ऊपर बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ सोना या सिर्फ चांदी चुनने के बजाय दोनों में संतुलित निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है और आप कम जोखिम लेना चाहते हैं, तो सोना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धीरे-धीरे चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से चांदी में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।

Gold Price Today: अगस्त के पहले दिन सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ गया भाव

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US Fed ने नहीं बदली ब्याज दरें, क्या होगा इसका भारतीय बाजार पर असर और गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के मामूली गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। Wall Street में रात भर हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT Nifty सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। AI से जुड़े खर्च को लेकर बनी चिंताएं और US Federal Reserve के पॉलिसी फैसले के बाद अनिश्चितता ने पॉजिटिव इंस्टीट्यूशनल फ्लो और बुधवार की घरेलू बाजार की जोरदार रैली के असर को कम कर दिया है।

सुबह करीब 8:00 बजे GIFT Nifty 88 अंक या 0.36 फीसदी गिरकर 24,215 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि Nifty 50 बुधवार के 24,250.20 के क्लोजिंग लेवल से नीचे खुल सकता है। यह कमजोर संकेत बुधवार को भारतीय शेयरों में जोरदार रिकवरी के बाद आया है। Sensex 888.68 अंक या 1.16 फीसदी बढ़कर 77,654.60 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 264.85 अंक या 1.10 फीसदी बढ़कर 24,250.20 पर बंद हुआ।

US फेड मीटिंग का नतीजा

उम्मीद के मुताबिक, US फेडरल रिज़र्व ने चेयर केविन वॉर्श की अगुवाई में गुरुवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। यह लगातार पांचवीं पॉलिसी मीटिंग थी जिसमें सेंट्रल बैंक ने दरों को स्थिर रखने का फ़ैसला किया, क्योंकि अधिकारी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव करने से पहले महंगाई के आउटलुक और व्यापक आर्थिक स्थितियों का आकलन कर रहे थे।

यह घोषणा फेडरल रिज़र्व की दो दिन की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) मीटिंग खत्म होने के बाद की गई।फेड ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50%-3.75% पर बनाए रखा। इसने महंगाई, बेरोज़गारी और कुल आर्थिक विकास के अपने अनुमानों को भी जून की पॉलिसी मीटिंग में पेश किए गए अनुमानों के मुकाबले काफ़ी हद तक जस का तस रखा।

एशियाई बाजारों में तेजी

Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के बाद गुरुवार को एशियाई शेयरों मेंबढ़त के साथ कारोबार हुआ। वहीं, ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली के बाद निवेशक AI से जुड़े खर्च के आउटलुक का आकलन करते रहे। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की बढ़त हुई, जबकि जापान के Nikkei में लगभग 2 फीसदी की तेजी आई। दक्षिण कोरिया के Kospi में हफ्ते की शुरुआत में भारी नुकसान के बाद 4 फीसदी की रिकवरी हुई, हालांकि यह साप्ताहिक आधार पर बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा था। Nasdaq फ्यूचर्स में 1.2 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि यूरोपियन फ्यूचर्स ने हल्की पॉजिटिव शुरुआत का संकेत दिया।

गुरुवार की रिकवरी के बावजूद, भारी AI निवेश पर रिटर्न को लेकर चिंताओं के बीच सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी गिरावट के बाद निवेशक सतर्क बने रहे।

बुधवार को US शेयर बाजार में भारी गिरावट के साथ कारोबार खत्म हुआ, क्योंकि Federal Reserve ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया और टेक्नोलॉजी शेयरों में हालिया गिरावट जारी रही। फेड ने ब्याज दरों को 3.50-3.75 प्रतिशत की रेंज में ही बनाए रखा, जो उम्मीदों के मुताबिक था, हालांकि तीन पॉलिसीमेकर्स ने दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के पक्ष में असहमति जताई।

माइक्रोसॉफ्ट और मेटा प्लेटफॉर्म्स के नतीजों से पहले निवेशकों द्वारा AI-से जुड़े शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करने के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 2.19 प्रतिशत, S&P 500 1.52 प्रतिशत और नैस्डैक कम्पोजिट 1.74 प्रतिशत गिर गए।

क्रूड में नरमी

पिछले सेशन में तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि तनाव बढ़ने के बावजूद मध्य पूर्व से टैंकरों का आवागमन जारी रहा। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.42 प्रतिशत गिरकर 89.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.66 प्रतिशत गिरकर 83.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट ईरान संघर्ष के दौरान आई सबसे बड़ी तेजी के बाद हुई है; बुधवार को ब्रेंट में लगभग 8 प्रतिशत और WTI में 6.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई थी।

हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई, लेकिन US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयानों और क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण जियोपॉलिटिकल तनाव बना हुआ है।

क्या होगा इसका भारतीय बाजार पर असर

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले से निकट भविष्य की एक बड़ी अनिश्चितता खत्म हो गई है, लेकिन पॉलिसीमेकर्स के बीच बंटे हुए वोट से संकेत मिलता है कि भविष्य की पॉलिसी का रास्ता डेटा पर निर्भर करेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मध्य पूर्व में फिर से बढ़ा जियोपॉलिटिकल तनाव भी भारतीय बाजारों के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं, जबकि FII और DII की खरीदारी से सपोर्ट मिल रहा है।

पोनमुडी ने कहा कि 24,200 के स्तर को फिर से हासिल करने के बाद निफ्टी में सकारात्मक रुख बना हुआ है। 24,300-24,400 का ज़ोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और इसके ऊपर निर्णायक रूप से जाने पर 24,500-24,600 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। नीचे की ओर, 24,150-24,000 मुख्य सपोर्ट ज़ोन है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर 23,900-23,800 के स्तर की ओर प्रॉफिट-बुकिंग शुरू हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, फोकस में NBCC, MTAR Tech, Eicher Motors

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Commodity Outlook: कच्चे तेल से सोना-चांदी तक, अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल? एक्सपर्ट कायनात चैनवाला से जानिए

Commodity Outlook: पिछला हफ्ता कमोडिटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। ऐसे में अगले हफ्ते भी बाजार की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी।

कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एक्सपर्ट कायनात चैनवाला के मुताबिक, आने वाले दिनों में कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बड़े फैक्टर तय करेंगे। इनमें पश्चिम एशिया का तनाव, अमेरिकी फेड की नीति और वैश्विक सप्लाई की स्थिति सबसे अहम होगी।

कच्चे तेल में क्यों आया उछाल?

पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आई। ब्रेंट क्रूड एक समय 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि, हफ्ते के आखिर में मुनाफावसूली से इसमें कुछ गिरावट आई।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह लाल सागर (Red Sea) में बढ़ा तनाव रहा। हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले का दावा किया। इसके बाद कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। दूसरी ओर, ड्रोन हमले के बाद कजाकिस्तान की पाइपलाइन क्षमता भी करीब 80% प्रभावित हुई। इससे सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई।

सोना-चांदी में कैसी रही चाल?

स्पॉट गोल्ड पिछले हफ्ते करीब 1% चढ़कर 4,050 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद हुआ। वहीं, चांदी में करीब 4% की तेजी आई और यह 58 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

कायनात चैनवाला का कहना है कि सोना-चांदी में आई तेजी की बड़ी वजह नई खरीदारी नहीं, बल्कि गिरावट के बाद हुई खरीदारी (Dip Buying) और शॉर्ट कवरिंग रही। मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी इन धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं।

MCX गोल्ड के लिए कौन से स्तर अहम?

MCX गोल्ड पिछले हफ्ते ₹1,43,106 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, ऊपर की ओर ₹1,46,000 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद ₹1,48,000 अहम स्तर होगा। नीचे की ओर ₹1,41,000 पहला सपोर्ट है। अगर ₹1,39,800 का स्तर टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है।

बेस मेटल्स में भी रही मजबूती

कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और लेड में भी पिछले हफ्ते तेजी रही। चीन में कॉपर का स्टॉक घटने और रिफाइंड मेटल्स पर संभावित टैरिफ को लेकर अनिश्चितता की वजह से कॉपर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

फेड की बैठक पर रहेगी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 28-29 जुलाई की बैठक अगले हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगी।

कायनात चैनवाला का मानना है कि सिर्फ तेल की कीमतों में आई तेजी के आधार पर फेड अगले हफ्ते ब्याज दर बढ़ाने का फैसला शायद ही ले। हालांकि, सितंबर की बैठक को लेकर जोखिम पहले के मुकाबले ज्यादा बना हुआ है।

अगले हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

कायनात चैनवाला के मुताबिक, अगले हफ्ते कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बातें तय करेंगी। पहली, लाल सागर और पश्चिम एशिया में तनाव का घटनाक्रम।

दूसरी, फेड की बैठक और ब्याज दरों को लेकर उसके संकेत। तीसरी, ईरान की ओर से आने वाले किसी भी कूटनीतिक संकेत। इन तीनों का असर कच्चे तेल, सोना, चांदी और दूसरे कमोडिटी बाजारों की चाल पर साफ दिख सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

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Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

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Gold Silver Price Today: चांदी 4 दिन में ₹12500 सस्ती हुई, सोना लगातार दूसरे दिन सपाट

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन स्थिर रही। 24 कैरेट वाला सोना ₹1,46,300 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। वहीं, चांदी ₹1,500 टूटकर ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह स्तर दो हफ्ते से ज्यादा समय का निचला स्तर है।

4 दिन में ₹12,500 टूटी चांदी

चांदी में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 10 जुलाई को चांदी ₹2,37,000 प्रति किलो पर थी, जो अब घटकर ₹2,24,500 प्रति किलो रह गई है। यानी सिर्फ चार कारोबारी सत्र में चांदी ₹12,500 या 5.3% टूट चुकी है।

सोना सीमित दायरे में क्यों?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहे। वहीं, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इन दोनों वजहों का असर एक-दूसरे को संतुलित करता रहा। इसलिए सोना लगातार दूसरे दिन सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।

चांदी पर क्यों बना दबाव?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ी है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) के ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना बनी हुई है। इसी कारण चांदी में मुनाफावसूली और कमजोर औद्योगिक मांग का दबाव देखा गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 61 डॉलर यानी 1.68% गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 3% गिरकर 56 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, ईरान की ओर से बातचीत की संभावना जताए जाने के बाद सोने में गिरावट सीमित रही।

वहीं, Lemonn Markets Desk के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग का कहना है कि अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रिटेल सेल्स और जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़ों पर रहेगी। इनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेड की ब्याज दरों की अगली दिशा का संकेत मिल सकता है।

MCX पर गोल्ड का हाल

LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, सोने की कीमतों पर अभी दबाव बना हुआ है। MCX पर गोल्ड करीब ₹950 गिरकर ₹1,40,900 पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX में सोना करीब 60 डॉलर टूटकर 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हाल में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े नरम रहे, क्योंकि मई-जून में ऊर्जा की कीमतें कम थीं। लेकिन अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो महंगाई फिर बढ़ सकती है। इसका असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के फैसले पर भी पड़ सकता है।

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। तकनीकी रूप से MCX Gold के ₹1,40,000 से ₹1,43,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। साथ ही, बाजार में उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है।

Gold Silver Prices Today: गोल्ड 4000 डॉलर से नीचे फिसला, चांदी में भी बड़ी गिरावट

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।