Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में जारी गिरावट पर लगा ब्रेक, चांदी में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 25 सितंबर को सोने में बीते चार दिनों से जारी गिरावट पर ब्रेक लग गया। हालांकि, सोने की कीमतों में मामूली तेजी दिखी। सोना 200 रुपये चढ़कर 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की तेजी देखने को मिली।

चांदी 2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी का भाव बगैर किसी बदलाव के 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहा। ट्रेडर्स का कहना है कि सोने में तेजी की वजह कम कीमत पर खरीदारी है। इसके अलावा क्रूड ऑयल में नरमी और डॉलर में हल्की कमजोरी का भी फायदा सोने की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का प्राइस अब भी 105 डॉलर प्रति बैरल बना हुआ है।

 रिकवरी के बावजूद इस हफ्ते सोने में गिरावट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने की कीमतों में रिकवरी के बावजूद इस हफ्ते सोने में गिरावट दिखी है। सोने की कीमतों पर इस हफ्ते दबाव की बड़ी वजह हफ्ते की शुरुआत में डॉलर में आई मजबूती थी। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में हल्की तेजी देखने को मिली।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मामूली तेजी के साथ 4,279 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी भी हल्की तेजी के साथ 63.92 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। कोटक सिक्योरिटीज में एवीपी कायनात चेनवाला ने कहा कि लागातर दो दिन गिरने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल बदली है। इसकी वजह डॉलर में नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट है।

अगले महीने अमेरिका में बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट 

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को रिकवरी के बावजूद यह हफ्ता गोल्ड के लिए अच्छा नहीं रहा। इसकी वजह क्रूड में उछाल है। इससे महंगाई बढ़ने का डर बढ़ा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े जो डेटा आए हैं, उनसे संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व अगले महीने इंटरेस्ट रेट में एक बार फिर वृद्धि कर सकता है।

इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है

अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक अगले महीने इंटरेस्ट बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घट जाती है। इंटरेस्ट रेट घटने पर सोने की चमक बढ़ जाती है। डॉलर में मजबूती का भी सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ता है। इससे दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 1600 रुपये फिसला, चांदी 5000 रुपये लुढ़की

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 सितंबर को लगातार चौथे दिन गिरावट आई। यह 1,600 रुपये गिरकर 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी में भी बड़ी गिरावट आई। यह 5,000 रुपये गिरकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। सोने और चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर पड़ा।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड का प्राइस एक बार फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। इसका मतलब है कि महंगाई बढ़ने का डर अब पहले से ज्यादा है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट 

ट्रेडर्स का कहना है कि चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसकी वजह मुनाफावसूली हो सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट देखने को मिली। यह गिरकर 95.96 के लेवल पर आ गया। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट 

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली। कमोडिटी एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 0.55 फीसदी गिरकर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 1.16 फीसदी गिरकर 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव देखने को मिला।

शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.41 फीसदी गिरकर 4,269 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 1.46 फीसदी गिरकर 63.48 डॉलर प्रति औंस थी। शेयर बाजारों में भी 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। छोटे-बड़े शेयरों के सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई।

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क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर

अगर क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अक्तूबर की पॉलिसी में एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अगले महीने के आखिर में फेड की बैठक होने वाली है। अगर वह इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

Gold Silver Prices: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1500 रुपये गिरा, चांदी में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में 22 सितंबर को गिरावट आई। यह 1,500 रुपये गिरकर 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। दिल्ली सर्राफा बाजार में यह सोने में गिरावट का लगातार दूसरा दिन था।

चांदी की कीमतें 2.42 लाख रुपये पर स्थिर

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी कीमत 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोने में मंगलवार को भी गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का बयान और अमेरिकी डॉलर में मजबूती है।”

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का सोने पर असर

डॉलर इंडेक्स 100 से ऊपर बना हुआ है। यह जुलाई के आखिर के बाद से इसका सबसे हाई लेवल है। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिसका असर उसकी कीमतों पर पड़ता है। इस बीच, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने कहा है कि इंटरेस्ट रेट लंबे समय तक हाई बना रह सकता है।

क्रूड में गिरावट का फिलहाल सोने पर असर नहीं 

क्रूड की कीमतों में गिरावट आई है। लेकिन, फिलहाल इसका असर गोल्ड पर नहीं दिख रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 98.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। यह हाल में 108-109 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है। क्रूड में नरमी से महंगाई बढ़ने का डर घटा है। लेकिन, कीमत अब भी फरवरी में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले के लेवल से काफी ज्यादा है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में कमजोरी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड करीब 1 फीसदी गिरकर 4,315 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। स्पॉट सिल्वर भी नरमी के साथ 65.60 डॉलर प्रति औंस पर था। इस बीच, इनवेस्टर्स की नजरें गुरुवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर लगी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में मध्यपूर्व क्राइसिस पर भी चर्चा होगी।

Bitcoin 8 महीने के हाई पर पहुंचा, क्रिप्टो में आई इस तेजी की वजह क्या है?

Bitcoin Price: ग्लोबल रिस्क एसेट्स में सुधार का असर क्रिप्टोकरेंसी पर भी दिखा। यहीं वजह है कि बिटकॉइन की कीमत $87,000 के पार जाकर 8 महीने के हाई पर पहुंच गई। US स्पॉट बिटकॉइन ETF में नई खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग ने भी इस तेजी को बढ़ावा दिया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, न्यूयॉर्क में बिटकॉइन की कीमत 7.7% बढ़कर $87,354 हो गई। पिछले हफ़्ते के निचले स्तर से इसकी कीमत में $10,000 से ज़्यादा का उछाल आया है। यह क्रिप्टोकरेंसी जनवरी के आखिर में देखे गए स्तरों के आसपास ट्रेड कर रही थी, हालांकि यह अक्टूबर में बने अपने रिकॉर्ड हाई से अभी भी लगभग एक-तिहाई नीचे है।

यह तेजी ग्लोबल स्टॉक और बॉन्ड में बढ़त के साथ आई। तेल की कम कीमतों और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित समिट को लेकर उम्मीदों ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, छोटी क्रिप्टोकरेंसी में भी बढ़त देखी गई। डॉजकॉइन (Dogecoin) में 14% तक और XRP में लगभग 8% की बढ़ोतरी हुई।

इस तेज़ी के दौरान क्रिप्टो मार्केट में बड़े पैमाने पर पोजीशन लिक्विडेशन भी देखा गया।

ब्लूमबर्ग ने CoinGlass के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 24 घंटों में डिजिटल एसेट्स में लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का लिक्विडेशन लगभग $1 बिलियन तक पहुंच गया, जो अगस्त के आखिर के बाद सबसे ज़्यादा स्तर है।

इस दौरान हुए लिक्विडेशन में शॉर्ट पोजीशन का हिस्सा लगभग $878 मिलियन था।

बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर 

मुद्रेक्स (Mudrex) के बिजनेस हेड प्रतीक गुप्ता ने कहा कि फेडरल रिजर्व के रुख को अपेक्षाकृत नरम (dovish) माने जाने के बाद रिस्क के लिए बेहतर माहौल बना, जिससे इस तेज़ी को सपोर्ट मिला। साथ ही, तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं कम करने में मदद की। उन्होंने शॉर्ट कवरिंग को भी एक अतिरिक्त वजह बताया।

मुद्रेक्स के अनुसार, इस तिमाही में बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर है। कंपनी ने कहा कि यह 2024 की चौथी तिमाही के बाद से इसकी सबसे मज़बूत तिमाही बढ़त होगी। फर्म ने यह भी बताया कि स्ट्रैटेजी (Strategy) ने 950 और बिटकॉइन जोड़े हैं, जिससे उनकी होल्डिंग 846,000 बिटकॉइन हो गई है।

ETF में आने वाले फंड (इनफ्लो) ने भी सपोर्ट का एक और ज़रिया दिया है।

गियोटस (Giottus) के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि हफ़्ते की शुरुआत में भारी आउटफ्लो के बाद, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में 18 सितंबर को $433 मिलियन और 21 सितंबर को $617.6 मिलियन का इनफ्लो दर्ज किया गया। CoinSwitch के मार्केट्स डेस्क ने कहा कि बिटकॉइन का $87,000 से ऊपर जाना $82,000 के लेवल को तोड़ने के बाद हुआ, जबकि लगभग $750 मिलियन की शॉर्ट पोजीशन लिक्विडेट हो गईं। उन्होंने फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट में लगभग $2 बिलियन की बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया, जिससे पता चलता है कि कीमत में उछाल के साथ-साथ लेवरेज भी बढ़ा है।

हालांकि, लेवरेज में बढ़ोतरी का मतलब है कि इस उछाल का टिके रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या स्पॉट डिमांड कीमतों को सपोर्ट करती रहती है। CoinSwitch ने कहा कि मजबूत अंडरलाइंग बाइंग महत्वपूर्ण होगी क्योंकि बढ़ी हुई पोजीशनिंग से कीमतों में तेज गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

WazirX के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने कहा कि $86,000 से ऊपर जाने का मतलब है कि महीनों के दबाव के बाद मार्केट सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। उन्होंने $80,000 से ऊपर रिकवरी, US एजेंसियों की लगातार रेगुलेटरी एक्टिविटी और तेल की कीमतों व ट्रेजरी यील्ड में नरमी को इस उछाल को सपोर्ट करने वाले कारकों के रूप में बताया।

शेट्टी ने इंस्टीट्यूशनल एक्टिविटी में नई तेजी पर भी जोर दिया। उनके डेटा के अनुसार, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगभग $617.6 मिलियन का डेली नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो लगभग 7,610 बिटकॉइन के बराबर है, जबकि कुल ETF ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग $5.72 बिलियन था। US स्पॉट इथेरियम ETF में भी लगभग 55,640 ETH का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

ZebPay में ट्रेड के हेड हरीश जी वतनानी ने कहा कि बिटकॉइन की रिकवरी CLARITY एक्ट के लिए झटके और फेडरल रिजर्व के रेट फैसले को लेकर अनिश्चितता के दौर के बाद हुई। उन्होंने कहा कि मार्केट ने शुरू में नेगेटिव प्रतिक्रिया दी, लेकिन इन दो घटनाओं को लेकर अनिश्चितता खत्म होने के बाद यह स्थिर हो गया।

वतनानी ने कहा, “स्पॉट बिटकॉइन ETF में नए इनफ्लो, शॉर्ट कवरिंग और बेहतर होते व्यापक रिस्क सेंटीमेंट ने इस मूवमेंट को और सपोर्ट किया है।” यह उछाल ऑल्टकॉइन्स तक भी फैल गया है।

CoinDCX में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्रोथ व क्रिप्टो बिजनेस हेड मिनल ठुकराल ने कहा कि बिटकॉइन कुछ ही घंटों में लगभग $82,000 से बढ़कर $85,000 से ऊपर पहुंच गया, और इस मूवमेंट को शुरू में US स्पॉट बिटकॉइन ETF इनफ्लो और तेल व इक्विटी मार्केट में बेहतर होते सेंटीमेंट से सपोर्ट मिला। थुकराल ने कहा कि इसके बाद रैली एक ऐसे ज़ोन में पहुंच गई जहां बहुत ज़्यादा ‘शॉर्ट’ पोजीशन थीं। एक घंटे में 300 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की शॉर्ट पोजीशन बंद (लिक्विडेट) हो गईं, जिससे कीमतें बढ़ने पर ट्रेडर्स को बिटकॉइन वापस खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि SUI और NEAR में 20% से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि RENDER और AVAX में लगभग 17% से 18% की बढ़ोतरी देखी गई।

तेज़ी से हुई इस रिकवरी के बावजूद, एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि इस बदलाव को व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स कच्चे तेल की कीमतों और US ट्रेजरी यील्ड के ऊँचे स्तर को लेकर चिंतित बने हुए हैं, जबकि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का असर रिस्क वाले एसेट्स पर पड़ना जारी रह सकता है।

इन्वेस्टर्स के लिए, सुब्बुराज ने कहा कि ब्रेकआउट के बाद $82,000-$82,800 का दायरा नज़र रखने के लिए एक अहम सपोर्ट ज़ोन होगा। थुकराल ने कहा कि जो इन्वेस्टर्स लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, वे कई बार में खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं, जबकि एक्टिव ट्रेडर्स को इस तेज़ी के बाद पोजीशन साइज़, कोलेटरल और लिक्विडेशन लेवल पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।

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Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी में जोरदार तेजी, सिल्वर दो दिन में 6% उछला

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी दिखी। इससे सोने का भाव चढ़कर एक हफ्ते के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी है। ब्रेंट क्रूड 108-109 डॉलर से घटकर 104 डॉलर पर आ गया है। इससे बुलियन की कीमतों को सपोर्ट मिला है।

सोने और चांदी में लगादार दो दिन तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 16 सितंबर को फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के बाद सोने और चांदी में गिरावट आई थी। लेकिन, क्रूड में नरमी की वजह से लगातार दो दिन बुलियन में अच्छी तेजी दिखी है। चांदी की कीमतें तो दो दिन में करीब 6 फीसदी उछल गई हैं। इनवेस्टर्स ने अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने के बावजूद सोने और चांदी में दिलचस्पी दिखाई है।

स्पॉट गोल्ड 4,350 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा

18 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.24 फीसदी चढ़कर 4,350 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 1.64 फीसदी के उछाल के साथ 66 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। इधर, भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में अच्छी तेजी देखने को मिली। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 0.29 फीसदी यानी 449 रुपये चढ़कर 1,53,430 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था।

एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स में 1900 रुपये का उछाल

एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स में भी अच्छी तेजी दिखी। यह 0.80 फीसदी यानी 1,896 रुपये चढ़कर 2,40,101 रुपये किलोग्राम पर चल रहा था। एक्सपर्ट का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड को 4,400-4,440 की रेंज में रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। अगर यह लेवल टूट जाता है तो गोल्ड में आगे तेजी दिख सकती है।

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मध्यपूर्व में तनाव घटाने की कोशिश सफल हुई तो आएगी बड़ी तेजी

उधर, मध्यपूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए कूटनीतिक कोशिशें चल रही हैं। अगर अगले हफ्ते इस मामले में कुछ प्रगति होती है तो क्रूड की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के संकेत दिए हैं। यह माना जा रहा है कि फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है। इसलिए सोने में फिलहाल बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना फिसला, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 17 सितंबर को सोने में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में जोरदार तेजी दिखी। लेकिन, कमजोर घरेलू मांग का असर दिल्ली में सोने की कीमतों पर पड़ा।

चांदी 2.42 लाख रुपये पर स्थिर रही

दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोना 600 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी की कीमत 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। 16 सितंबर को फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट आई थी।

16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरा था सोना

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “घरेलू बाजारों में कीमतों पर 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में आई गिरावट का असर पड़ा।” अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट 0.25 फीसदी बढ़ा दिया है। इससे यह 3.75-4 फीसदी पर आ गया है। यह बीते तीन सालों में इंटरेस्ट रेट में पहली वृद्धि है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में जोरदार रिकवरी

17 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में जोरदार तेजी देखने को मिली। सोना 2.45 फीसदी चढ़कर 4,372.95 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 4.42 फीसदी के उछाल के साथ 66.02 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। कई दिनों के बाद सोने और चांदी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी बड़ी तेजी दिखी है।

इन वजहों से विदेश में बुलियन में तेजी 

मिरै एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा, “क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी, ट्रेजरी यील्ड में कमी और डॉलर इंडेक्स के थोड़ा नीचे आने से स्पॉट गोल्ड की कीमतों में स्ट्रॉन्ग रिकवरी दिखी है।” क्रूड ऑयल में 17 सितंबर को बड़ी गिरावट दिखी है। ब्रेंट क्रूड गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है।

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महंगाई बढ़ने का खतरा अब भी बरकरार

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड के नीचे आने के बावजूद महंगाई बढ़ने का खतरा कम नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि क्रूड की कीमतों में नरमी अगर जारी रहती है तो भी इसका असर महंगाई पर काफी बाद में दिखेगा। पिछले कई हफ्तों से ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर के ऊपर बने रहने से सितंबर में रिटेल इनफ्लेशन में उछाल दिख सकता है। सितंबर के इनफ्लेशन के डेटा अगले महीने आएंगे। फेडरल रिजर्व ने कहा है कि फिलहाल मौद्रिक नीति सख्त बनी रहेगी।

Rupee vs Dollar: फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से गिरा रुपया, जुलाई के बाद पहली बार 96 के लेवल के पार पहुंचा

Rupee vs Dollar: अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का असर 17 सितंबर को रुपये पर दिखा। डॉलर के मुकाबले यह 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार हो गया। जुलाई के बाद पहली बार रुपया इस लेवल पर पहुंचा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96.03 के लेवल पर चल रहा था। 16 सितंबर को यह 95.95 के लेवल पर बंद हुआ था।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने 16 सितंबर को इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान किया। फेड ने करीब तीन साल बाद इंटरेस्ट रेट 0.4 फीसदी बढ़ाया है। इतना ही नहीं फेड ने आगे भी सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दिया है। 25 बेसिस प्लाइंट्स बढ़ने के बाद अमेरिका में अब इंटरेस्ट रेट 3.75-4 फीसदी हो गया है।

फेडरल रिजर्व की इंटरेस्ट रेट तय करने वाली कमेटी (FOMC) की बैठक 15 सितंबर को शुरू हुई थी। इसके नतीजे भारतीय समय के मुताबिक 16 सितंबर को रात करीब 12 बजे आए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड का फैसला अनुमान के मुताबिक रहा। पहले से यह माना जा रहा था कि 16 सितंबर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा करेगा। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने पहले कहा था कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर रहेगा।

फेड इस साल इंटरेस्ट रेट में और एक बार इजाफा कर सकता है। दरअसल, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से दुनियाभर में महंगाई बढ़ी है। इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए बैंक ऑफ जापान (BoJ) और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर हुए हैं। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।

फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ा देने के बाद माना जा रहा है कि आरबीआई (RBI) भी अक्तूबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 5 अक्तूबर को शुरू होगी। तीन दिन की बैठक के बाद इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे।

भारत में भी रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ रहा है। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन 4.80 से ऊपर निकल गया। यह आरबीआई के 4 फीसदी के तय लेवल से काफी ऊपर निकल चुका है। फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का असर रुपया सहित भारतीय शेयर बाजार पर पड़ता है।

GIFT Nifty falls: US फेड के ब्याज दरों में बढ़त का Sensex-Nifty पर पड़ेगा असर,जानें ग्लोबल मार्केट और गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहे संकेत

GIFT Nifty falls:  गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के हल्की गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT Nifty कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, क्योंकि US Federal Reserve ने तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं और संकेत दिया है कि आगे और सख्ती की जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एशिया के कुछ हिस्सों में बढ़त से कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन US यील्ड में बढ़ोतरी और Fed द्वारा और रेट बढ़ाने की उम्मीदों के कारण निवेशक सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8 बजे GIFT Nifty 23,222 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से 45 अंक या 0.2 प्रतिशत नीचे था। पिछले सेशन में भारतीय इक्विटी में रिकवरी हुई थी, जिससे दो दिन की गिरावट का सिलसिला थम गया था। Sensex 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 99 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर पहुंचा। IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जो गिरावट के साथ बंद हुआ।

गुरुवार को फोकस Fed के फैसले के असर, US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में नरमी आई है, लेकिन यह अभी भी $104 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

US Fed ने दरें बढ़ाई, और सख्ती के संकेत दिए

Federal Reserve ने बुधवार को तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार अपनी मुख्य ब्याज दर बढ़ाई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच लगातार बनी हुई महंगाई को काबू में करने के लिए यह कदम उठाया गया। Fed ने कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया और संकेत दिया कि महंगाई को तेजी से कम करने के लिए निकट भविष्य में और सख्ती की जा सकती है।

इस फैसले के बाद बाजारों ने एक और रेट बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं, और दिसंबर तक एक और बढ़ोतरी की संभावना को अब पूरी तरह से मान लिया गया है। शॉर्ट-टर्म US ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया क्योंकि निवेशकों ने और सख्ती की संभावना के हिसाब से खुद को ढाला, हालांकि Fed के कदम से लंबे समय वाले बॉन्ड में हालिया बिकवाली को शांत करने में मदद मिली।

भारतीय इक्विटी के लिए, US में ऊंची दरों और यील्ड की संभावना विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो के लिए एक संभावित चुनौती बनी हुई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, तेल की कीमतों और करेंसी पर दबाव के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों से मिले-जुले संकेतों की वजह से निवेशकों का मूड सतर्क रहने की संभावना है।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट, US फ्यूचर्स में वापसी

फेड की घोषणा के बाद उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद US इक्विटीज़ ज़्यादातर गिरावट के साथ बंद हुईं। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 631.33 अंक या 1.21 प्रतिशत गिरकर 51,461.78 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,552.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ, यह 0.01 प्रतिशत गिरकर 25,978.43 पर रहा।

सप्लाई की चिंता कम होने से ब्रेंट $105 से नीचे आया

गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे हाल के हफ़्तों में एनर्जी की कीमतों में भारी उछाल के बाद भारतीय बाज़ारों को कुछ राहत मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत गिरकर $104.59 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.1 प्रतिशत गिरकर $101.29 पर आ गया। बुधवार को दोनों बेंचमार्क में लगभग $3 की गिरावट आई थी।

यह गिरावट उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब ओमान के ज़रिए अतिरिक्त क्रूड कार्गो की पेशकश कर रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की कुछ चिंताएं कम हुईं।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी निफ्टी के लिए 23,300-23,400 को तुरंत रेजिस्टेंस ज़ोन मानते हैं। अगर यह 23,400 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 23,500-23,600 की ओर रिकवरी में मदद मिल सकती है, हालांकि वह इलाका एक मज़बूत बाधा बना हुआ है और वहां फिर से बिकवाली हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, फेड ने बढ़ाई ब्याज दरें एशिया बाजार में ते

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‘ब्याज दरें जल्द कम करें…’ फेड की दर वृद्धि के बाद ट्रंप ने 1% या उससे कम रेट की मांग की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती की मांग की है। खास बात यह है कि ट्रंप की यह मांग ऐसे समय आई है, जब फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। हालांकि, इस बार ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श पर सीधे निशाना साधने से परहेज किया है। अब चलिए जानते हैं ट्रंप ने आखिर ब्याज दरों में कटौती की मांग क्यों की, और फेड ने इसके उलट दरें बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?

गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “हम दुनिया के लगभग हर देश का ‘बोझ उठा’ रहे हैं, और ऐसा अब और नहीं चल सकता। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के लिए ब्याज दरें कम करें, और जल्द करें!”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि देश की क्रेडिट रेटिंग बहुत अच्छी है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कम लागत पर उधार लेना सही ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, उनके साथ व्यापार बंद करने से हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमाए जा सकते हैं। दरअसल, उनका तर्क था कि व्यापार घाटा असल में नुकसान ही है।

उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा, “अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हमारी क्रेडिट रेटिंग दुनिया में सबसे अच्छी है — और इसमें कोई शक नहीं है। हमारे देश में नए निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं! अगर हम उन सभी देशों के साथ व्यापार बंद कर दें जिनके साथ हमारा व्यापार घाटा है — और ऐसे ज्यादातर देश हैं — तो हम हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमा सकते हैं। ‘Deficit’ शब्द असल में ‘Loss’ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फैंसी शब्द है।”

बता दें कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। वहीं, इस फैसले के साथ फेड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को नजरअंदाज कर दिया जिसमें उन्होंने ब्याज दरें घटाने की मांग की थी। सेंट्रल बैंक के प्रमुख केविन वार्श ने कहा कि महंगाई अभी भी काफी ज्यादा है और लंबे समय से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

फेड की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4.00% के बीच करने के लिए वोट किया। कमिटी का कहना है कि दरें बढ़ने से महंगाई को उसके 2% के लक्ष्य तक जल्द वापस लाने में मदद मिलेगी।

ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने कहा कि यह फैसला “गंभीर” था, लेकिन इसे लेना जरूरी था।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “साफ बात यह है कि महंगाई बहुत ज्यादा है और काफी समय से ऐसी ही बनी हुई है।”

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लौटी तेजी, चांदी एक दिन में ₹7400 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 16 सितंबर को सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना लगातार तीन दिनों तक गिरने के बाद बुधवार को 1,200 रुपये चढ़ा। इससे इसकी कीमत 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी का असर भी घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

चांदी एक दिन में 7400 रुपये चढ़ी

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में जोरदार तेजी दिखी। यह 7,400 रुपये चढ़कर 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद ट्रेडर्स ने सोने की कम कीमतों का फायदा उठाने के लिए खरीदारी की, जिसका असर कीमत पर पड़ा।

क्रूड में नरमी का सोने पर असर

उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी का असर भी सोने पर पड़ा है। हालांकि, मार्केट और इनवेस्टर्स की नजरें अब फेडरल रिजर्व के फैसले पर लगी हैं। फेड भारतीय समय के मुताबिक आज रात 11:30 से 12 बजे के बीच अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा। इस बात की ज्यादा उम्मीद है कि वह इंटरेस्ट रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा करेगा।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजरें

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर दिखेगा। अगर वह इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करता है तो सोने की कीमतों में तेजी दिख सकती है। हालांकि, फेड यह संकेत दे चुका है कि फिलहाल उसका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल में रखने पर है। क्रूड की कीमतों में उछाल से इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। यह 1.3 फीसदी चढ़कर 4,348 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी भी 1.5 फीसदी के उछाल के साथ 64.61 डॉलर प्रति औंस पर थी। इस साल जनवरी में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट आई थी। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन पर दबाव बढ़ गया था।