CarTrade Q2 Results: 18% टूटा शेयर, Q2 रिजल्ट आने के बाद मची भगदड़

CarTrade Tech Q2 Results: सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे ने कारट्रेड टेक के शेयरों को ऐसा झटका दिया कि यह 18% से अधिक टूट गया। रेवेन्यू की सुस्त ग्रोथ और मुनाफे में गिरावट ने इसे तोड़ दिया। बिकवाली का दबाव इतना तेज है कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद यह संभल नहीं पाया और अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 17.55% की गिरावट के साथ ₹2325.60 पर है। इंट्रा-डे में यह 18.35% टूटकर ₹2,303.00 (CarTrade Tech Share Price) तक आ गया था।

CarTrade Tech Q2 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में कारट्रेड टेक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 0.30% घटकर ₹59.49 करोड़ रह गया।

ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू महज 10.17% की रफ्तार से बढ़कर ₹213.09 करोड़ पर पहुंचा। यह पिछले दो साल की सितंबर तिमाही में रेवेन्यू की ग्रोथ से सुस्त रही। इससे पहले वित्त वर्ष 2025 की सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 27% और वित्त वर्ष 2026 में 29% की रफ्तार से बढ़ा।

ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए ₹63.59 करोड़ से 19.52% बढ़कर ₹76.00 करोड़ पर पहुंच गया तो EBITDA मार्जिन 32.88% से 35.67% पर पहुंच गया।

सितंबर तिमाही में कंपनी ने हर महीने औसतन 7.6 करोड़ यूनिक विजिटर्स को आकर्षित किया, जिसमें से 96% ऑर्गेनिक रहा। फिलहाल कंपनी 500 से अधिक फिजिकल लोकेशन पर है।

कंपनी के रीमार्केटिंग बिजनेस ने भी ऑक्शन के लिए 16 लाख लिस्टिंग्स का एनुअलाइज्ड रन-रेट हासिल कर लिया। ओएलएक्स इंडिया का रेवेन्यू 26% की रफ्तार से बढ़ा तो ईबीआईटीडीए ग्रोथ 36% रही।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल

कारट्रेड टेक के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। करीब पांच साल पहले 20 अगस्त 2021 को इसकी मार्केट में में एंट्री हुई थी। आईपीओ निवेशकों को इसके शेयर ₹1,618.00 के भाव पर जारी हुए थे और मार्केट में इसकी करीब ₹1,600 पर एंट्री हुई थी यानी कि लिस्टिंग गेन की बजाय आईपीओ निवेशकों को झटका लगा था।

डिस्काउंट लिस्टिंग के बाद इसके शेयर उठा-पटक के साथ बीएसई पर 29 मार्च 2023 को ₹341.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। इस रिकॉर्ड निचले स्तर पर शेयर संभले और ढाई ही साल में यह 865% यानी 9 गुना से अधिक उछलकर 17 नवंबर 2025 को ₹3,291.35 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गए। हालांकि शेयरों की तेजी यहीं थम गई और फिलहाल इस हाई से यह काफी नीचे आ चुका है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dalmia Bharat Share Price: नतीजों के बाद शेयर 6% टूटा, ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट प्राइस, अब क्या करें निवेशक

Dalmia Bharat Share Price: सीमेंट बनाने वाली कंपनी डालमिया भारत (Dalmia Bharat) के शेयर में 27 अक्टूबर को भारी दबाव देखने को मिला। स्टॉक आज इंट्राडे में 6 फीसदी टूटा। स्टॉक में गिरावट कंपनी के वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद आई। सितंबर तिमाही में ज्यादा लागत और कम मांग के कारण कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा है। कंपनी को नेट लॉस (शुद्ध घाटा) भी हुआ है, जिसका एक कारण एसेट इम्पेयरमेंट (संपत्ति के मूल्य में कमी) और कर्मचारियों के लिए ‘सेपरेशन स्कीम’ (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति जैसी योजना) से जुड़े विशेष खर्च हैं।

इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹3,563 करोड़ रहा, जो विश्लेषकों के ₹3,646 करोड़ के अनुमान से कम है। बिक्री की मात्रा (सेल्स वॉल्यूम) 7.1 मिलियन टन रही, जबकि 7.3 मिलियन टन की उम्मीद थी।

ज्यादा लागत के कारण EBITDA (ईबीआईटीडीए) गिरकर ₹493 करोड़ रह गया, जबकि विश्लेषकों ने इसके ₹552 करोड़ रहने का अनुमान लगाया था। EBITDA मार्जिन 13.84% रहा, जो 15.14% की उम्मीद से कम है। वहीं, प्रति टन EBITDA ₹698 रहा, जबकि अनुमान ₹752 का था।

कंपनी को ₹208 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि विश्लेषकों को ₹75 करोड़ के नेट प्रॉफिट की उम्मीद थी।

Q2 नतीजों पर किन चीजों का असर पड़ा

डालमिया भारत के कामकाज पर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी बाजारों में कम मांग का असर पड़ा, जिससे वॉल्यूम ग्रोथ प्रभावित हुई। नेट सेल्स रियलाइजेशन (NSR) में सालाना आधार पर 1% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1% की गिरावट आई।

ईंधन की कीमतें बढ़ने से पावर और फ्यूल की लागत में इजाफा हुआ, जिससे मुनाफे पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा, सेंट्रल एसेट्स के एकीकरण (integration) का भी तिमाही के प्रदर्शन पर असर पड़ा।

कंपनी ने अपनी कुछ संपत्तियों (जिनमें तीन कैप्टिव पावर प्लांट और एक ब्रांड शामिल हैं) के मूल्य का आकलन करने के बाद, ₹282 करोड़ का ‘इम्पेयरमेंट लॉस’ (संपत्ति के मूल्य में कमी) दर्ज किया। साथ ही, कुछ इकाइयों में पात्र कर्मचारियों के लिए ‘सेपरेशन स्कीम’ से जुड़ा ₹57 करोड़ का एकमुश्त खर्च भी कंपनी के खातों में दर्ज हुआ।

ब्रोकरेज फर्मों की क्या है राय

HSBC ने डालमिया भारत की रेटिंग को घटाकर Hold कर दिया है और इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹1,820 कर दिया है। ब्रोकरेज ने तिमाही शुद्ध घाटे के मुख्य कारणों के रूप में वॉल्यूम ग्रोथ में सुस्ती, लागत में भारी बढ़ोतरी और एसेट इम्पेयरमेंट (संपत्ति के मूल्य में कमी) के खर्चों को जिम्मेदार बताया है।

HSBC का यह भी मानना ​​है कि दिसंबर तिमाही में भी अधिग्रहित संपत्तियों (acquired assets) का प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 (FY27) के अंत तक ‘ब्रेक-ईवन’ (न लाभ-न हानि की स्थिति) तक पहुंचना है।

Morgan Stanley

मॉर्गन स्टेनली ने डालमिया भारत पर अपनी ‘अंडरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹1,640 तय किया है। कंपनी के तिमाही प्रदर्शन को उन्होंने ‘कमजोर’ बताया है।

ब्रोकरेज ने वॉल्यूम में सुस्ती (जिसका एक कारण मौसमी असर भी है) और बढ़ती लागतों की ओर इशारा किया है। हालांकि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ‘ऑपरेटिंग लेवरेज’ से मुनाफे को कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन वेरिएबल कॉस्ट (परिवर्तनशील लागत) के ऊंचे बने रहने की उम्मीद है। इससे हाल ही में कीमतों में की गई बढ़ोतरी से मिलने वाला फायदा कुछ हद तक कम हो जाएगा।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि कंपनी की कमजोर लाभप्रदता को देखते हुए, वे अभी भी सतर्क रुख अपनाना ही बेहतर समझते हैं।

citi

सिटी (Citi) ने डालमिया भारत पर अपनी Buy रेटिंग तो बरकरार रखी है, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹1,900 कर दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार, EBITDA में साल-दर-साल 29% की गिरावट आई है। इसका कारण यह है कि लागत में 9% की बढ़ोतरी ने वॉल्यूम ग्रोथ और रियलाइजेशन (प्राप्ति मूल्य) में 1% के सुधार से मिलने वाले फायदों को खत्म कर दिया।

प्रति टन एडजस्टेड EBITDA ₹694 रहा, जबकि जून तिमाही में यह ₹1,055 था और एक साल पहले ₹1,010 था। केंद्रीय संपत्तियों (central assets) को हटा दें, तो प्रति टन EBITDA ₹746 बैठता है। सिटी के अनुसार, प्रति टन EBITDA में आई इस गिरावट के पीछे कम रियलाइजेशन, बढ़ती लागत, कमजोर वॉल्यूम और JPA से जुड़े नुकसान मुख्य कारण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नेट डेट-टू-EBITDA (शुद्ध कर्ज और EBITDA का अनुपात) पिछली तिमाही के 1.5 गुना से बढ़कर 2 गुना हो गया है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि निकट भविष्य में लागत में सुधार की संभावना कम है, लेकिन मध्यम अवधि में ‘प्रीमियमाइजेशन’ (बेहतर उत्पादों पर जोर) और लागत दक्षता (cost efficiencies) से रिटर्न में सुधार हो सकता है। बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज, उत्पादों का सही मिश्रण और ऊंची कीमतें समय के साथ प्रति टन EBITDA को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

CLSA

CLSA ने डालमिया भारत पर अपनी ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹2,000 कर दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि नतीजे उम्मीद से काफी खराब रहे और अन्य कंपनियों के मुकाबले कमजोर रहे। इसके पीछे प्रतिकूल क्षेत्रीय मिश्रण (regional mix), बाजार हिस्सेदारी में कमी, अधिग्रहित संपत्तियों (acquired assets) से नुकसान और लागत का अधिक दबाव जैसे कारण बताए गए।

CLSA को उम्मीद है कि सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी, फिक्स्ड-कॉस्ट के बेहतर प्रबंधन और अधिग्रहित संपत्तियों के कामकाज में तेजी आने से निकट भविष्य में मुनाफे में सुधार होगा। हालांकि, ईंधन की बढ़ती लागत इन फायदों को कुछ हद तक कम कर सकती है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि मध्यम अवधि में, कंपनी की संपत्तियों के बेहतर उपयोग और लागत बचाने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होगी। हालांकि वैल्यूएशन उचित लग रहे हैं, लेकिन ब्रोकरेज ने चेतावनी दी कि स्टॉक में कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव (ट्रिगर) आने में समय लग सकता है।

Jefferies

सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों (जिसमें EBITDA सालाना आधार पर 29% गिर गया) के बाद, जेफरीज (Jefferies) ने डालमिया भारत पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग तो बरकरार रखी, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹2,125 कर दिया।

ब्रोकरेज के अनुसार, खराब प्रदर्शन का कारण पूर्वी क्षेत्र में कमजोरी रही, जहां सीमेंट की बिक्री और कीमतें कम रहीं, साथ ही लागत भी अधिक रही। उन्हें उम्मीद है कि पूरे उद्योग में सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी से दूसरी छमाही में सुधार देखने को मिलेगा। हालांकि, दिसंबर तिमाही में JPA से जुड़े नुकसान कम होने से पहले और बढ़ सकते हैं। जेफरीज ने अपने EBITDA अनुमानों को भी 7–11% तक घटा दिया है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Netweb धड़ाम, 4 गुना बढ़ा मुनाफा और रेवेन्यू, लेकिन इस कारण 5% टूट गया शेयर

Netweb Tech Share Price: सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम बनाने वाली नेटवेब टेक्नोलॉजीज के शेयरों को आज तगड़ा शॉक लगा। सितंबर तिमाही में मुनाफे और रेवेन्यू में चार गुना से अधिक गुना के उछाल के बावजूद नेटवेब के शेयर 5% से अधिक टूट गए। कंपनी का एक मोर्चे पर फेल होना ऐसा झटका लगा कि शेयरों की चमक फीकी पड़ गई। दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए। फिलहाल बीएसई पर यह 3.55% की गिरावट के साथ ₹4,181.90 पर है। इंट्रा-डे में यह 5.29% की फिसलन के साथ ₹4106.35 तक आ गया था।

Netweb Tech के शेयरों को क्यों लगा झटका

प्रॉफिट और रेवेन्यू के मोर्चे पर नेटवेब टेक ने शानदार परफॉर्म किया। सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नेटवेब टेक का शुद्ध मुनाफा ₹31.43 करोड़ से 334.75% बढ़कर ₹136.66 करोड़ और ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹303.72 करोड़ से 335.68% उछलकर ₹1323.28 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए ₹34.87 करोड़ से 333.93% उछलकर ₹151.31 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि मार्जिन के मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा और ईबीआईटीडीए मार्जिन 14.97% से 14.91% पर आ गया।

सितंबर 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹2,629 करोड़ रहा जिससे आने वाली तिमाही में कंपनी के कारोबार को लेकर आउटलुक अच्छा दिख रहा है। इसके अलावा ₹652.5 करोड़ का एल1 ऑर्डर है यानी इसके लिए कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई है। कंपनी ने ₹11,151.8 करोड़ की सक्रिय बिजनेस पाइपलाइन की भी जानकारी दी। सितंबर तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा और ऑपरेशंस से रेवेन्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल

नेटवेब टेक के शेयरों ने निवेशकों की शानदार कमाई कराई है और आठ ही महीने में निवेशकों का पैसा लगभग डबल हो गया और लिस्टिंग से लेकर तो अब तक इसने धुंआधार पैसे बरसाए हैं। आईपीओ निवेशकों को इसके शेयर ₹500 के भाव पर जारी हुए थे और मार्केट में इसकी 27 जुलाई 2023 को एंट्री हुई थी। आईपीओ को ताबड़तोड़ बोली मिलने के बाद इसके शेयर 88% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट होने के बाद और ऊपर चढ़े।

आने वाले समय में इसके शेयरों की चमक तेजी से बढ़ी और तीन ही साल में यह 24 अगस्त 2026 को ₹5,810.00 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक 1062% मुनाफे में पहुंच गए यानी कि आईपीओ निवेशकों की पूंजी तीन ही साल में 11 गुना से अधिक बढ़ गया। पिछले साल 9 दिसंबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹2,942.45 पर था।

Gold-Silver Outlook: तेज बिकवाली के बाद संभले सोना-चांदी! खरीदारी से पहले इस हफ्ते इन बातों पर रखें नजर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

JK Cement Q2 Results: 8% बढ़ा मुनाफा और नई पेंट फैक्ट्री लगाने की मंजूरी, अब 26 अक्टूबर को शेयर फोकस में

JK Cement Q2 Results: जेके सीमेंट का मुनाफा सितंबर तिमाही में 8% बढ़ गया तो ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी का परफॉरमेंस दमदार रहा। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने तेलंगाना में ₹130 करोड़ के निवेश से पेंट बनाने की फैक्ट्री लगाने की मंजूरी दी है। कंपनी ने 24 अक्टूबर को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी और अब 24 अक्टूबर को मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर नजर रहेगी। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 23 अक्टूबर को बीएसई पर यह 0.04% की गिरावट के साथ ₹4858.30 (JK Cement Share Price) पर बंद हुआ था।

JK Cement Q2 Results: खास बातें

सितंबर 2026 तिमाही में जेके सीमेंट का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8% बढ़कर ₹160.5 करोड़ से ₹173 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 24% उछलकर ₹3,733.4 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए 13.5% बढ़कर ₹507.4 करोड़ हो गया। नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने जानकारी दी है कि उसके बोर्ड ने सब्सिडियरी जेके मैक्स पेंट्स (JK Maxx Paints) के बोर्ड के फैसले को मंजूरी दे दी है।

जेके मैक्स पेंट्स ने तेलंगाना में एक नया वाटर-बेस्ड पेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की मंजूरी दी है, जिसकी सालाना क्षमता 75 हजार किलोलीटर होगी। यह फैसिलिटी तेलंगाना के सूर्यपेट जिले के रघुनंदपलेम में होगा और इस पर ₹130 करोड़ का खर्च आएगा। इसकी फंडिंग ₹600 करोड़ के उस निवेश से आएगा, जिसे बोर्ड ने पेंट बिजनेस के लिए पहले ही मंजूर कर चुकी है। इसके 12 महीने में चालू होने की उम्मीद है। जेके मैक्स पेंट्स अभी राजस्थान के भिवाड़ी में सालाना 73 हजार किलोलीटर की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चला रही है। इसका फिलहाल 60% इस्तेमाल हो रहा है और वित्त वर्ष 2028 तक फुल यूटिलाइजेशन की उम्मीद है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

जेके सीमेंट के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 23 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर यह ₹6,503.70 के भाव पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 8 महीने में यह 28.19% टूटकर 12 जून 2026 को ₹4,670.05 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: बेसिक बे में डीए के विलय पर एंप्लॉयीज की टिकी निगाहें, क्या 8वां वेतन आयोग इसकी सिफारिश करेगा?

आठवें वेतन आयोग का मुंबई का दौरा खत्म हो गया है। दो दिन के दौर में आयोग के सदस्यों ने एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों और यूनियंस के सदस्यों की राय जानने की कोशिश की। इस बीच, कई एंप्लॉयीज यूनियंस ने डियरनेस अलाउन्स, डियरनेस रिलीफ और बेसिक पे को लेकर बड़े बदलाव करने की मांग की है। सवाल है कि क्या आयोग यह मांग पूरी करेगा?

केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का डीए अभी बेसिक पे का 60 फीसदी है। यह इस साल 1 जनवरी को इस लेवल पर पहुंच गया था। दरअसल, डीए का मकसद इनफ्लेशन के असर को देखते हुए एंप्लॉयीज की सैलरी को बढ़ाना है। इसकी वजह यह है कि इनफ्लेशन की वजह से एंप्लॉयीज की कॉस्ट ऑफ लिविंग बढ़ जाती है। सरकार एक साल में डीए में दो बार बदलाव करती है। पहला बदलाव 1 जनवरी को होता है और दूसरा 1 जुलाई को होता है।

डीए के कैलकुलेशन के लिए एक फॉर्मूला है। इसे इंडस्ट्रियल वर्कर्स के ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के 12 महीनों के औसत में हुई वृद्धि के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। लेबर ब्यूरो AICPI-IW को पब्लिश करता है। खास बात यह है कि डीए बढ़ने पर ट्रांसपोर्ट अलाउन्स भी बढ़ जाता है। इसकी वजह यह है कि ट्रांसपोर्ट अलाउन्स डीए से लिंक्ड है।

कई एंप्लॉयीज यूनियंस, एसोसिएशंस और पेंशनर्स ऑर्गेनाइजेशंस ने आठवें वेतन आयोग को डीए की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने की सलाह दी है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) का मानना है कि डीए 25 फीसदी पार कर जाने पर इसका विलय बेसिक पे में कर देना चाहिए। फेडरेशन का मानना है कि इससे केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को फायदा होगा।

भारत पेंशनर्स समाज का कहना है कि सरकार को साल में डीए में दो बार संशोधन करने की जगह डीए में हर तिमाही में संसोधन करना चाहिए। अगर आयोग इसकी सिफारिश करता है और सरकार इसे मान लेती है तो साल में डीए में दो बार की जगह चार बार संशोधन होगा। एंप्लॉयीज से जुड़े कुछ संगठनों का मानना है कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) की समीक्षा होनी चाहिए।

अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग के तीन सदस्य डीए के मसले की समीक्षा करने के बाद सरकार को इस बारे में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उधर, सरकार डीए की व्यवस्था में किसी तरह की बदलाव की सिफारिश को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि उसकी वित्तीय स्थिति पर इस बदलाव का प्रतिकूल असर ना पड़े। क्रूड की कीमतें लगातार हाई लेवल पर बने रहने से पहले से ही सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।

Dr Reddy’s Q2 Result: 36% गिरा मुनाफा, खास वजह से घटा रेवेन्यू, अब 26 अक्टूबर को शेयर फोकस में

Dr Reddy’s Q2 Result: दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज का शुद्ध मुनाफा सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 36% गिर गया लेकिन फिर भी यह अनुमान से अधिक ही रही। वहीं रेवेन्यू में सालाना आधार पर गिरावट आई तो तिमाही आधार पर इसमें अच्छी ग्रोथ दिखी। इसके रेवेन्यू को उत्तरी अमेरिका में लेनालिडोमाइड (Lenalidomide) की सुस्त बिक्री से झटका लगा। कंपनी ने ये नतीजे एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 23 अक्टूबर की शाम में पेश किया और अब सोमवार 26 अक्टूबर को मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर असर दिख सकता है। अभी इसके शेयरों की बात करें तो शुक्रवार 23 अक्टूबर को बीएसई पर 1.17% की गिरावट के साथ ₹1224.50 (Dr Reddy’s Share Price) पर बंद हुआ था।

Dr Reddy’s Q2 Result: खास बातें

सितंबर 2026 तिमाही में डॉ रेड्डीज का का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 36% गिरकर ₹913.4 करोड़ पर आ गया। हालांकि सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में अनुमान ₹650.8 करोड़ का था।

सितंबर 2026 तिमाही में डॉ रेड्डीज का का रेवेन्यू सालाना आधार पर 1.5% गिरकर ₹8,671 करोड़ पर आ गया लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 7% की तेजी आई। सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में ₹8,409 करोड़ के लगाए गए अनुमान से अधिक रहा। इसके रेवेन्यू ग्रोथ को मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में लेनालिडोमाइड की कम बिक्री से झटका लगा। उत्तरी अमेरिका में लेनालिडोमाइड और यूरोप और API को छोड़कर बाकी मुख्य कारोबार में दोहरे अंकों की ग्रोथ रही। इसके अलावा कंपनी को फेवरेबल करेंसी मूवमेंट्स से अतिरिक्त मदद मिली।

ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 24.2% गिरकर ₹1,783 करोड़ पर आ गया लेकिन यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में ₹1,192.6 करोड़ के अनुमान से काफी अधिक रहा। वहीं ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 26.7% से गिरकर 20.6% पर आया लेकिन यह भी 14.2% के अनुमान से काफी अधिक रहा।

सितंबर तिमाही में R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) पर कंपनी का खर्च सालाना आधार पर 16% और तिमाही आधार पर 9% गिरकर ₹520 करोड़ पर आ गया। आरएंडडी पर कंपनी का खर्च रेवेन्यू के मुकाबले सालाना आधार पर 7% और तिमाही आधार पर 7.1% से घटकर 6% पर आ गया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

डॉ रेड्डीज के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 29 जून 2026 को बीएसई पर यह ₹1,414.40 के भाव पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से एक ही महीने में यह 23.64% टूटकर 23 जुलाई 2026 को ₹1,080.05 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Jio IPO: ₹30313 करोड़ के आईपीओ ने बनाए कई रिकॉर्ड, छू दिया 7 अहम माइलस्टोन

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Delhi Awaas Yojana 2026: दिल्ली में सस्ता घर खरीदने का सुनहरा मौका! DDA ला रहा 1,648 नए फ्लैट, 25% डिस्काउंट के साथ सिर्फ 14.95 लाख रुपये

DDA Awaas Nivesh Yojana 2026: दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने लोगों की जबरदस्त मांग को देखते हुए नरेला में 1,648 एक्स्ट्रा एलआईजी (Low-Income Group) फ्लैट उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। इन फ्लैटों पर 25 प्रतिशत की डिस्काउंट दी जाएगी। इसके बाद एक फ्लैट की अनुमानित कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रह जाएगी। इन घरों की ऑनलाइन बुकिंग 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। इच्छुक आवेदक 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से आधिकारिक पोर्टल पर बुकिंग कर सकेंगे।

DDA की आवास योजना में 1,648 फ्लैट

दिल्ली में सस्ता घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए ‘DDA Awaas Nivesh Yojana 2026’ एक अहम मौका बनकर सामने आई है। दशहरा के दौरान शुरू की गई इस योजना को लोगों की शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। स्थिति यह रही कि बुकिंग शुरू होने के महज दो घंटे के भीतर पहले चरण में पेश किए गए फ्लैट बुक हो गए थे।

इसी मांग को देखते हुए अब DDA ने नरेला में 1,648 एक्स्ट्रा एलआईजी फ्लैट उपलब्ध कराने का फैसला किया है। दिल्ली के उपराज्यपाल और DDA के अध्यक्ष सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य लोगों को किफायती दरों पर नियोजित आवास उपलब्ध कराना है। एक्स्ट्रा फ्लैटों की पेशकश से उन लोगों को भी अवसर मिल सकता है, जो पहले चरण में घर बुक नहीं कर पाए थे।

कहां मिलेंगे सस्ता फ्लैट और कितनी होगी कीमत?

DDA की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ये सभी एक्स्ट्रा फ्लैट दिल्ली के नरेला इलाके के पॉकेट-1, सेक्टर G2 से G6 में स्थित हैं। इन पर फ्लैट की निर्धारित कीमत पर 25 फीसदी की डायरेक्ट डिस्काउंट दी जाएगी। 49.90 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में कॉमन एरिया भी शामिल है। इसलिए इच्छुक खरीदारों को फ्लैट की वास्तविक उपयोग योग्य जगह और अन्य डिटेल्स आधिकारिक ब्रोशर में जरूर चेक करनी चाहिए।

– फ्लैटों की संख्या: कुल 1,648

– लोकेशन: पॉकेट-1, सेक्टर G2-G6, नरेला

– अनुमानित कीमत: करीब 14.95 लाख रुपये प्रति फ्लैट

– डिस्काउंट: 25 फीसदी

– एरिया: लगभग 49.90 वर्ग मीटर है

– आवंटन का तरीका: ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के तहत फ्लैट मिलेंगे

29 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी ऑनलाइन बुकिंग

इन एक्स्ट्रा फ्लैटों के लिए ऑनलाइन बुकिंग 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इच्छुक आवेदक DDA के आधिकारिक ‘आवास पोर्टल’ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर योजना का नाम ‘DDA Awaas Nivesh Yojana 2026’ होगा। फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ यानी FCFS के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में इच्छुक आवेदकों को बुकिंग शुरू होने से पहले जरूरी दस्तावेज और भुगतान संबंधी जानकारी तैयार रखनी चाहिए।

बुकिंग पोर्टल: https://eservices.dda.org.in/

फ्लैट बुक करने के लिए कितनी रकम जमा करनी होगी?

डीडीए स्कीम के तहत प्रत्येक फ्लैट के लिए बुकिंग राशि 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यानी फ्लैट बुक करने के लिए आवेदक को हर हाल में प्रति फ्लैट एक लाख रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, यह राशि फ्लैट की कुल कीमत से अलग एक्स्ट्रा खर्च है या फाइनल भुगतान में कैसे ये रकम कैसे शामिल होगी, इसकी पुष्टि आधिकारिक ब्रोशर में दिए गए नियमों से करनी चाहिए।

DDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने पहले ही DDA के आवास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें दोबारा रजिस्टर्ड कराने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, जिन आवेदकों ने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, उन्हें पोर्टल पर उपलब्ध प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नरेला में क्यों बढ़ रही है घर खरीदने वालों की दिलचस्पी?

दिल्ली का नरेला इलाका आने वाले सालों में एक महत्वपूर्ण आवासीय एरिया के रूप में विकसित होने की संभावनाएं हैं। यहां नियोजित शहरी बुनियादी ढांचे, परिवहन सुविधाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विकास कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।

मेट्रो और RRTS से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद

नरेला को भविष्य में बेहतर परिवहन सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना है। इनमें रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर पर प्रस्तावित स्टेशन और नरेला में प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER)-I, UER-II और जीटी करनाल रोड के जरिए सड़क संपर्क भी इलाके की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

एजुकेशन हब और खेल सुविधाओं का भी होगा फायदा

नरेला के सेक्टर G2–G6 में प्रस्तावित एजुकेशन हब भी इस इलाके की प्रमुख विकास योजनाओं में शामिल है। यहां कई विश्वविद्यालयों को जमीन आवंटित की गई है। इसके अलावा सेक्टर A-7 में नरेला स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और प्रस्तावित मल्टी-स्पोर्ट्स इंटीग्रेटेड स्टेडियम जैसी खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

पहले से रजिस्ट्रेशन करा चुके लोगों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा

DDA के मुताबिक, जिन आवेदकों का Awaas Portal पर पहले से रजिस्ट्रेशन है, वे उसी रजिस्ट्रेशन के जरिए आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यानी उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन से पहले आधिकारिक ब्रोशर में दी गई सभी शर्तों को पढ़ना अनिवार्य है। फ्लैटों की उपलब्धता, भुगतान की टाइमलाइन और आवंटन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी के लिए DDA के आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। किसी भी सहायता के लिए आवेदक DDA की टोल-फ्री हेल्पलाइन- 1800 110 332 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

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DA Hike 2026 : 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते पर नहीं हुआ कोई एलान, कब तक करना होगा इंतजार!

DA Hike 2026 : देश भर के केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी, जुलाई 2026 की छमाही समीक्षा के तहत महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तमाम लोगों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार बुधवार, 21 अक्तूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर कोई बड़ा एलान करेगी। यह समय दशहरा उत्सव और बोनस मिलने का होता है। ऐसे में लोगों को लग रहा था कि इसी समय सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर कोई बड़ा एलान कर सकती है। लेकिन इस उम्मीद पर पानी फिर गया।

अब सबकी नजरें अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट बैठक पर हैं,जो संभवतः बुधवार, 28 अक्तूबर को आयोजित की जा सकती है। केंद्र सरकार की बैठकें आमतौर पर बुधवार को होती हैं। हालांकि,कभी-कभी इन्हें किसी और दिन के लिए टाला जा सकता है या एक हफ्ते में एक से ज्यादा बार भी आयोजित किया जा सकता है।

गौरतलब है कि जनवरी साइकिल के लिए DA (महंगाई भत्ते) में संशोधन की घोषणा भी एक महीने से अधिक समय बाद,शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद 18 अप्रैल को की गई। इस भत्ते को जुलाई 2025 साइकिल के 58 प्रतिशत से बढ़ाकर जनवरी साइकिल के लिए 60 प्रतिशत कर दिया गया।

उस समय,पेंशन एक्पर्ट्स ने इस देरी का कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और 8वें CPC ढांचे में बदलाव को बताया था। इस ढांचे के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संशोधित वेतन ढांचे को महंगाई के आंकड़ों के साथ तालमेल बिठाकर सेट करना आवश्यक होता है।एक्पर्ट्स की राय है कि वर्तमान देरी भी स्ट्रक्चरल के बजाय प्रोसीजरल है।

DA में संशोधन एक ऐसे फॉर्मूले पर आधारित होते हैं जो AICPI-IW (औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है। जुलाई 2026 में DA संशोधन के लिए जरूरी 12 महीनों के AICPI-IW आंकड़े पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस सूचकांक के आधार पर अगले छमाही DA या DR संशोधन में 3-4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। इससे मौजूदा DA 60 प्रतिशत से बढ़कर 63-64 प्रतिशत हो जाएगा।

जुलाई 2026 में होने वाले DA संशोधन के लिए जरूरी 12 महीनों के AICPI-IW आंकड़े पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस सूचकांक के आधार पर, 2-3 प्रतिशत की वृद्धि भी मासिक आय में एक अच्छी बढ़ोतरी कर सकती सकती है। 18,000 रुपये के मूल वेतन के आधार पर देखें तो इसका मतलब होगा कि हर महीने लगभग 360 से 540 रुपये की बढ़त हो सकती है। जबकि 29,200 रुपये के मूल वेतन पर यह बढ़ोतरी 584 से 876 रुपये के बीच हो सकती है।

 

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