ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने कहा- ‘लोकतंत्र हमेशा रहेगा, तानाशाही और फासीवाद कभी नहीं’

ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने कहा- 'लोकतंत्र हमेशा रहेगा, तानाशाही और फासीवाद कभी नहीं'

Lula da Silva Brazil Election Win

लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश और लोकतंत्र ब्राजील में एक नया राजनीतिक इतिहास रचा गया है। वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा (Luiz Inácio Lula da Silva) ने देश के राष्ट्रपति चुनाव के रन-ऑफ (दूसरे दौर) में अपने घोर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ़्लैवियो बोल्सोनारो (Flávio Bolsonaro) को 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक मतों के भारी अंतर से हराकर सत्ता में ऐतिहासिक चौथा कार्यकाल हासिल कर लिया है।

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, 1964-1985 के सैन्य शासन के बाद से आधुनिक ब्राजील के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पहले दौर की वोटिंग में पिछड़ने के बाद किसी उम्मीदवार ने दूसरे दौर के रन-ऑफ में ऐसी अभूतपूर्व राजनीतिक वापसी की हो।

“यह भगवान की कृपा और जनता की ताकत है” : लूला का भावुक संबोधन

साओ पाउलो के मध्य में जीत का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए लाखों समर्थकों के जनसैलाब को संबोधित करते हुए 81 वर्षीय लूला ने कहा: “यह भगवान की कृपा है—और यह आप सभी की वजह से संभव हुआ है। आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है। लोकतंत्र हमेशा रहेगा, तानाशाही अब कभी नहीं। लोकतंत्र हमेशा रहेगा, फासीवाद अब कभी नहीं।”

Lula da Silva Brazil Election Win

लूला के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्जेंडर पैडिल्हा ने इस जनादेश पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह न केवल ब्राजील के लिए एक बहुत बड़ी जीत है, बल्कि यह शेष लैटिन अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है।”

फ़्लैवियो का हार मानने से इनकार, ‘नॉर्थ-ईस्ट‘ पर फोड़ा भड़ास

अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के नक्शेकदम पर चलते हुए फ़्लैवियो बोल्सोनारो ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने लूला की जीत को “साकानागेम” (Sacanagem – जिसका अर्थ ‘धोखाधड़ी‘ या ‘बकवास‘ होता है) करार दिया।

  • बंगले में पसरा सन्नाटा: राजधानी ब्रासीलिया स्थित बोल्सोनारो के बंगले में, जहाँ मतगणना देखने के लिए समर्थकों का जमावड़ा लगा था, नतीजे स्पष्ट होते ही सन्नाटा छा गया।
  • क्षेत्रीय अपमान: हार से बौखलाए बोल्सोनारो के समर्थकों ने मीडियाकर्मियों के सामने ब्राजील के ‘उत्तर-पूर्वी क्षेत्र’ (North-East Region) को निशाना बनाया, जहाँ लूला को ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा जनसमर्थन और वोट मिले हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की खामोशी और अमेरिका को करारा जवाब

इस चुनाव परिणाम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पूरी तरह चुप्पी छाई हुई है। अमेरिकी प्रशासन बोल्सोनारो की जीत की उम्मीद कर रहा था ताकि दक्षिण अमेरिका में तथाकथित “ऑरेंज वेव” (नारंगी लहर) का विस्तार किया जा सके।

ब्राजील की संसद (कांग्रेस) में हाल ही में चुनी गईं पहली ट्रांसजेंडर सांसद एरिका हिल्टन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “हमने अमेरिकी सरकार के आर्थिक और राजनयिक दबाव को हरा दिया है। उन्होंने सोचा था कि वे हमारे देश को अपना पिछवाड़ा (Backyard) बना सकते हैं, लेकिन ब्राजील की जनता ने उन्हें उनका जवाब दे दिया है।”  ALSO READ: ब्राजील में ट्रंप समर्थित बोल्सोनारो की हार US मिडटर्म चुनाव में कितना बड़ा झटका? भारत पर क्या पड़ेगा असर, समझें पूरा गणित

वैश्विक नेताओं ने किया लूला का स्वागत

डोनाल्ड ट्रंप की चुप्पी के विपरीत, दुनिया भर के राजनीतिक स्पेक्ट्रम के नेताओं ने लूला की जीत का खुलकर स्वागत किया है:

  • मेक्सिको (राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबाम): “लोकतंत्र अमर रहे, ब्राजील की जनता की जीत हुई है।”
  • स्पेन (प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़): “वैश्विक प्रगतिशील पुनरुत्थान (Global Progressive Resurgence) अभी शुरू ही हुआ है।”
  • यूरोपीय संघ (उर्सुला वॉन डेर लेयेन): “ब्राजील में लोकतंत्र और बहुपक्षवाद (Multilateralism) की जीत हुई है।”
  • चीन (विदेश मंत्रालय): “चीन ब्राजील की जनता के लोकतांत्रिक फैसले का सम्मान करता है।”
  • चिली और पेरू: दक्षिणपंथी विचारधारा के नेताओं (चिली के जोस एंटोनियो कास्ट और पेरू की केइको फुजीमोरी) ने भी लूला को बधाई दी और ब्राजील के लोकतांत्रिक ताने-बाने का अभिनंदन किया।

लूला दा सिल्वा की यह जीत केवल ब्राजील के आंतरिक शासन का बदलाव नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ (Global South) में लोकतंत्र के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन (अमेजन के जंगलों की सुरक्षा) के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जहाँ एक तरफ तानाशाही और फासीवादी ताकतों को बड़ा झटका लगा है, वहीं लूला के सामने अब एक विभाजित देश को एकजुट करने की गंभीर चुनौती होगी।

इस राज्य के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, DA 5% बढ़ाया गया, सीधे 10000 रुपये एरियर

दिवाली से पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 5 फीसदी की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। इस फैसले के बाद कर्मचारियों का DA 45 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा, क्लास फोर कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते के साथ 10 हजार रुपये का एरियर भी दिया जाएगा। वहीं, पेंशनभोगियों के लिए भी 10 हजार रुपये देने की घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन फैसलों की जानकारी दी है। वहीं इस कॉन्फ्रेंस में सीएम ने अपनी सरकार के कार्यकाल में किए गए कामों का भी जिक्र किया। सीएम के ऐलान के बाद वित्त विभाग ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया।

कब तक मिलेगा DA

सरकार के फैसले के मुताबिक, बढ़े हुए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का लाभ अक्टूबर 2026 के वेतन और पेंशन के साथ नवंबर में दिया जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने क्लास फोर कर्मचारियों को 10 हजार रुपये का एरियर देने और पेंशनभोगियों को भी इतनी ही राशि देने की घोषणा की है। वहीं, जुलाई 2023 से सितंबर 2026 तक के बकाया DA और DR के भुगतान को लेकर अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। लेकिन, इन पैसों के भुगतान की प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी पूरी जानकारी अलग से जारी होने के बाद ही ये साफ हो पाएगा कि अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों और पेंशनरों को कुल कितना लाभ मिलेगा।

2030 तक पहले स्थान पर होगी

सीएम ने भरोसा जताया कि, आर्थिक परेशानियों के बावजूद कांग्रेस सरकार अपने चुनाव के दौरान किए गए सभी वादों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि अस्पतालों में नई भर्तियां करने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने और रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि, साल 2030 तक हिमाचल का स्वास्थ्य क्षेत्र देश में पहले स्थान पर होगा।

वहीं, प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने कई अहम सुधार किए हैं। केंद्र से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (RDG) राशि बंद होने से राज्य के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ी हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, सुधारों के तहत एक बार पांच दिनों के लिए ट्रेजरी बंद करने का फैसला भी लिया गया था।

DA Hike 2026 : 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते पर नहीं हुआ कोई एलान, कब तक करना होगा इंतजार!

DA Hike 2026 : देश भर के केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी, जुलाई 2026 की छमाही समीक्षा के तहत महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तमाम लोगों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार बुधवार, 21 अक्तूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर कोई बड़ा एलान करेगी। यह समय दशहरा उत्सव और बोनस मिलने का होता है। ऐसे में लोगों को लग रहा था कि इसी समय सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर कोई बड़ा एलान कर सकती है। लेकिन इस उम्मीद पर पानी फिर गया।

अब सबकी नजरें अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट बैठक पर हैं,जो संभवतः बुधवार, 28 अक्तूबर को आयोजित की जा सकती है। केंद्र सरकार की बैठकें आमतौर पर बुधवार को होती हैं। हालांकि,कभी-कभी इन्हें किसी और दिन के लिए टाला जा सकता है या एक हफ्ते में एक से ज्यादा बार भी आयोजित किया जा सकता है।

गौरतलब है कि जनवरी साइकिल के लिए DA (महंगाई भत्ते) में संशोधन की घोषणा भी एक महीने से अधिक समय बाद,शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद 18 अप्रैल को की गई। इस भत्ते को जुलाई 2025 साइकिल के 58 प्रतिशत से बढ़ाकर जनवरी साइकिल के लिए 60 प्रतिशत कर दिया गया।

उस समय,पेंशन एक्पर्ट्स ने इस देरी का कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और 8वें CPC ढांचे में बदलाव को बताया था। इस ढांचे के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संशोधित वेतन ढांचे को महंगाई के आंकड़ों के साथ तालमेल बिठाकर सेट करना आवश्यक होता है।एक्पर्ट्स की राय है कि वर्तमान देरी भी स्ट्रक्चरल के बजाय प्रोसीजरल है।

DA में संशोधन एक ऐसे फॉर्मूले पर आधारित होते हैं जो AICPI-IW (औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है। जुलाई 2026 में DA संशोधन के लिए जरूरी 12 महीनों के AICPI-IW आंकड़े पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस सूचकांक के आधार पर अगले छमाही DA या DR संशोधन में 3-4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। इससे मौजूदा DA 60 प्रतिशत से बढ़कर 63-64 प्रतिशत हो जाएगा।

जुलाई 2026 में होने वाले DA संशोधन के लिए जरूरी 12 महीनों के AICPI-IW आंकड़े पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस सूचकांक के आधार पर, 2-3 प्रतिशत की वृद्धि भी मासिक आय में एक अच्छी बढ़ोतरी कर सकती सकती है। 18,000 रुपये के मूल वेतन के आधार पर देखें तो इसका मतलब होगा कि हर महीने लगभग 360 से 540 रुपये की बढ़त हो सकती है। जबकि 29,200 रुपये के मूल वेतन पर यह बढ़ोतरी 584 से 876 रुपये के बीच हो सकती है।

 

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