Ather का पहला मास-मार्केट इलेक्ट्रिक स्कूटर इस दिन होगा लॉन्च, जानें कीमत

Ather Energy: अगर आप किफायती कीमत में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। दरअसल, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy 29 अगस्त को ‘Ather Community Day 2026’ पर अपना पहला मास-मार्केट इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने जा रही है। खास बात यह है कि यह नया मॉडल कंपनी के नए EL प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा। इस नए मॉडल के आने से Ather की इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज और मजबूत होगी। अभी कंपनी के पोर्टफोलियो में 450 और Rizta सीरीज के इलेक्ट्रिक स्कूटर शामिल हैं।

आने वाला यह नया इलेक्ट्रिक स्कूटर ₹1 लाख से ₹1.25 लाख की कीमत वाले सेगमेंट को टारगेट करेगा, जिससे कंपनी मास-मार्केट स्कूटर के क्षेत्र में अपना विस्तार करेगी।

बता दें कि EL प्लेटफॉर्म, 450 प्लेटफॉर्म के बाद एथर एनर्जी का पहला पूरी तरह से नया व्हीकल आर्किटेक्चर है। ज्यादा वर्सटैलिटी, स्केलेबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए बनाया गया यह प्लेटफॉर्म, अलग-अलग सेगमेंट में कंपनी के भविष्य के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को सपोर्ट करेगा। एथर एनर्जी के अनुसार, नया प्लेटफॉर्म इसके मार्केट को बढ़ाने और ग्रोथ के अगले चरण की शुरुआत करने में मदद करेगा।

एथर एनर्जी के CEO ने सोशल मीडिया पर  क्या कहा?

X पर लॉन्च की घोषणा करते हुए, एथर एनर्जी के CEO और को-फाउंडर तरुण मेहता ने कहा कि नया एथर इलेक्ट्रिक स्कूटर टेक्नोलॉजी और व्हीकल आर्किटेक्चर में सालों के निवेश का नतीजा है।

मेहता ने कहा, “इस 29 अगस्त को, Ather Community Day पर, हम अपने बिल्कुल नए स्कूटर प्लेटफॉर्म पर बना मास-मार्केट स्कूटर लॉन्च करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “हम सालों से उन चीजों को बनाने में धैर्यपूर्वक निवेश कर रहे हैं जो एक अच्छा स्कूटर बनाती हैं। हमने कई आर्किटेक्चर और टेक्नोलॉजी में नई शुरुआत की है। कभी-कभी समय से आगे, तो कभी-कभी शुरुआती इस्तेमाल करने वालों के लिए खास चीज के तौर पर।”

मेहता ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर इंडस्ट्री अब शुरुआती ग्राहकों से आगे बढ़कर आम खरीदारों तक पहुंचने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, “एक दशक बीतने के बाद, EV टू-व्हीलर अब उस शुरुआती दौर से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। टेक्नोलॉजी सबके लिए तैयार है और फीचर्स सभी के लिए काम के होते जा रहे हैं। ये सिर्फ शुरुआती ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि असल में आम ग्राहकों के लिए हैं।”

मेहता के मुताबिक, इलेक्ट्रिक स्कूटर को अपनाने का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी की ओनरशिप (मालिकाना हक) के पूरे अनुभव को कैसे बेहतर बनाया जाए।

उन्होंने कहा, अब EV को ग्राहकों की हर जरूरत को पूरा करना होगा। इसमें रीसेल वैल्यू (बिक्री के बाद मिलने वाली कीमत) से लेकर सर्विस में लगने वाला समय, खराब सड़कों पर आरामदायक सफर, गड्ढों से बचने की सुविधा, आसान चार्जिंग से लेकर फास्ट चार्जिंग तक की सभी चीजें शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “ग्राहकों को ऐसी सुरक्षा चाहिए जिसे वे देख और महसूस कर सकें, जिसे उनके माता-पिता भी समझ सकें और भरोसा कर सकें। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर पर सालों की मेहनत से तैयार की गई अंदरूनी सुरक्षा भी जरूरी है।”

मास-मार्केट स्कूटर लॉन्च करने के अलावा, Ather Community Day 2026 में टेक्नोलॉजी, चार्जिंग और ओनरशिप इकोसिस्टम से जुड़े नए इनोवेशन भी दिखाए जाएंगे।

जानकारी के मुताबिक, EL प्लेटफॉर्म को सबसे पहले Ather Community Day 2025 के दौरान दिखाया गया था। इस इवेंट में कंपनी ने ‘रिडक्स’ (Redux) कॉन्सेप्ट व्हीकल, अपनी अगली पीढ़ी की फास्ट-चार्जिंग टेक्नोलॉजी और AtherStack 7.0 को भी पेश किया था।

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Who is Yash Vir Singh: बांस के भाले से शुरू की थी प्रैक्टिस…आज CWG 2026 जीता ब्रॉन्ज मेडल, जानें कौन है यश वीर सिंह

Who is Yash Vir Singh: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की जैवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। जैवलिन थ्रो के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता तो वहीं यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। शुक्रवार को यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। वहीं, स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ 85.83 मीटर थ्रो किया और सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीता है। श्रीलंका के रुमेश थरंगा (89.75 मीटर) ने गोल्ड मेडल जीता है। यश वीर सिंह के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। आइए जानते हैं कौन है यश वीर सिंह

पहली बार लिया हिस्सा

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 24 वर्षीय यश वीर सिंह ने अपने आखिरी और छठे प्रयास में पर्सनल बेस्ट 85.41 मीटर का शानदार थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 83.72 मीटर था। इस जीत के साथ यश वीर उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष जैवलिन थ्रो में पदक जीता है। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में गोल्ड और 2026 में सिल्वर मेडल जीता था, जबकि काशीनाथ नाइक ने 2010 में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

कौन है यश वीर सिंह

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यश वीर सिंह ने अपने खेल करियर की शुरुआत बास्केटबॉल से की थी। लेकिन बाद में उन्होंने भाला फेंक को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने बांस से बने भाले से प्रैक्टिस किया और धीरे-धीरे प्रोफेशनल इक्विपमेंट के साथ ट्रेनिंग शुरू की। यश वीर सिंह के पिता राय सिंह से जैवलिन थ्रो से बारीकियां सिखी। यश के पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। मेहनत और लगातार प्रैक्टिस का नतीजा यह रहा कि 2022 में यश ने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में 80 मीटर से ज्यादा भाला फेंककर नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यश वीर ने किया शानदार प्रदर्शन

यश वीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सीनियर स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2025 में उन्होंने दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां 82.57 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवें स्थान पर रहे। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें विश्व रैंकिंग के आधार पर 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी चुना गया, जहां उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में भारत की ओर से हिस्सा लिया। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे यश ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

चढ़ावा चोरी के बाद बदली राम मंदिर की पूरी व्यवस्था, कैश गिनती, सुरक्षा व पास के लिए सख्त दिशानिर्देश

ayodhya ram mandir trust meeting

Ayodhya Ram Mandir security: ​अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर हमेशा ही विश्व में सुर्खियों में रहा है—चाहे वह राम मंदिर आंदोलन हो, भव्य मंदिर का निर्माण हो, या फिर सम्पूर्ण विश्व को साक्षी बनाने वाला राम लला का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव। ​हाल ही में राम लला के चरणों में अर्पित चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, चढ़ावा व गिनती की निगरानी, संपूर्ण सुरक्षा और VIP/VVIP दर्शन पास से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल दिया है और बेहद सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं।

​चढ़ावा और गिनती की 360-डिग्री निगरानी

​पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अब हाई-टेक निगरानी के दायरे में लाया गया है। दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावा गिनने तक की हर पल की रिकॉर्डिंग 360-डिग्री कैमरों और पेशेवर वीडियोग्राफरों (SLR और 360 डिग्री कैमरों से लैस) द्वारा की जाएगी। दानपात्र से जुड़ी पुरानी टीम को बदल दिया गया है। निगरानी के लिए 8 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें ​2 बैंक कर्मी (भारतीय स्टेट बैंक), ​2 ट्रस्ट प्रतिनिधि, ​2 SIS सुरक्षा कर्मी, ​2 पेशेवर वीडियोग्राफर शामिल हैं। 

​चरणबद्ध तरीके से खाली होंगे दानपात्र

परिसर में स्थित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ खाली करने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जाएगा। सीलबंद बक्सों को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा विधिवत सील व हैंडल किया जाएगा। कोष प्रबंधन समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच किसी भी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

​दर्शन पास के लिए नई व्यवस्था

​पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र एवं गोपाल राव की ID बंद होने के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट ने अपने तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ID को दर्शन पास जारी करने के लिए अधिकृत किया है। ​वर्तमान में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के प्रबंध किए जा रहे हैं।

​प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

मंदिर के इतिहास में पहली बार सचिव पद पर जगदीश आफले को नियुक्त किया गया है (जिसकी आधिकारिक घोषणा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में होगी)। आफले को SBI में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) भी बनाया गया है। दूसरी ओर, ​मंदिर के आधिकारिक प्रवक्ता के लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ​CEO पद के लिए 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और लिस्टिंग सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

​त्रि-स्तरीय (Three-Layer) अत्याधुनिक सुरक्षा चक्र

​श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। CRPF (केंद्रीय सुरक्षा बल), PAC (प्रांतीय सशस्त्र बल) और SSF (विशेष सुरक्षा बल) के सैकड़ों जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही AI-आधारित अत्याधुनिक CCTV कैमरे और स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू की गई है। परिसर की सुरक्षा के लिए 4 किलोमीटर लंबी परिधि दीवार (Boundary Wall) और उच्च क्षमता वाले वॉच टावर स्थापित किए गए हैं।

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती के ये 6 अवतार जानकर दंग रह जाएंगे आप

frinendship day 2026

दोस्ती का कोई एक रंग नहीं होता- यह तो सतरंगी गुलाल है! कभी बेपरवाह टांग खिंचाई, तो कभी ढाल बनकर साथ खड़े रहने का हौसला। कभी खट्टी-मीठी चटपटी, तो कभी सुकून देने वाली मीठी चाय जैसी। सच कहें तो हर दोस्ती अपने आप में एक अलग ही वाइब (Vibe) लेकर आती है। इस फ्रेंडशिप डे 2026 पर चलिए करते हैं दोस्ती के 6 अनोखे 'अवतारों' की एक मजेदार सैर!

 

1. 'बिज़नेस पार्टनर' वाली गाढ़ी दोस्ती

यह सिर्फ पैसों या काम का सौदा नहीं, बल्कि अटूट भरोसे पर टिकी एक ऐसी केमिस्ट्री है जहाँ दो दिमाग एक दिशा में सोचते हैं। जब दो दोस्त मिलकर कोई बिज़नेस खड़ा करते हैं, तो वे किसी सगे भाई-बहन से भी बढ़कर हो जाते हैं। अब आप इन्हें 'पार्टनर्स' कहें, 'फाउंडर्स' कहें या फिर 'लंगोटिया यार', इनकी ट्यूनिंग का कोई तोड़ नहीं होता!

 

2. '9-टू-5' का मरहम: लंच ब्रेक वाली दोस्ती

फाइलों के पहाड़, बॉस की डांट, टारगेट का प्रेशर या फिर घर की किचकिच—कॉलेज के बाद अगर कोई चीज़ कॉर्पोरेट लाइफ में बचाती है, तो वो है 'लंच टाइम गैंग'।

लंच के 30 मिनट में यहाँ सिर्फ टिफिन नहीं खुलते, बल्कि दिल के सारे दर्द बंट जाते हैं। यही वो जगह है जहाँ कोई सहयोगी आपके अटके सरकारी काम की जुगाड़ मिनटों में निकाल देता है या आपके पर्सनल संकट का एक्सपर्ट सॉल्यूशन दे देता है।

 

3. 'अरे! तुम्हें भी यह पसंद है?' वाली सिमिलर-वाइब दोस्ती

इस दोस्ती की शुरुआत सिर्फ एक जुमले से होती है—”क्या बात कर रहे हो, तुम्हें भी यह पसंद है?”

चाहे किसी हॉलीवुड मूवी की सनक हो, हैरी पॉटर का जादू, वही पुराना राइटर, या फिर स्ट्रीट फूड का सेम क्रेज़! बस जहाँ आपकी पसंद मैच हुई, वहीं बिना किसी मेहनत के एक नई और दिलचस्प 'हॉबी वाली दोस्ती' की शुरुआत हो जाती है।

 

4. 'डिजिटल दौर' वाली नो-बाउंड्री दोस्ती

टेक्नोलॉजी के पंखों पर सवार यह दोस्ती मीलों की दूरियों को पलक झपकते मिटा देती है। 80 के दशक के बिछड़े क्लासमेट्स हों या सरहद पार बैठा कोई अनजान साथी—इंटरनेट ने सबको एक धागे में पिरो दिया है। आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जहाँ एक तरफ 75 साल के दादू की 'फ्रेंड रिक्वेस्ट' होती है, वहीं दूसरी तरफ 7 साल की छोटी भानजी का 'हार्ट इमोजी'!

 

5. नॉस्टैल्जिया का खजाना: स्कूल-कॉलेज वाली दोस्ती

यह दोस्ती का 'गोल्डन एरा' है—सबसे निश्चल, सबसे बेफिक्र!

किताबों में मोर का पंख छुपाने से लेकर, चाय-समोसे की 'कॉन्ट्री', रात-रात भर जागकर नोट्स की जुगाड़ और एक-दूसरे के कपड़े-जूते मांगकर पहनना… यह सब इसी दौर की देन है। इस दोस्ती की पार्टियां भले ही बजट-फ्रेंडली हों, लेकिन इनका 'धूम-धड़ाका' और यादें पूरी ज़िंदगी के लिए अनलिमिटेड होती हैं।

 

6. 'गली-मोहल्ले' वाली साझी दोस्ती

भर दोपहर में छत पर धूप से बचने का जुगाड़ हो, या संकरी गली में साइकिल को स्टंप बनाकर क्रिकेट खेलना—यह दोस्ती भारत के हर मोहल्ले की जान है। कटोरी लेकर पड़ोसी के घर से चीनी या अचार मांग लाना हो, या किसी एक के घर की शादी में पूरे मोहल्ले के अंकल-आंटी का अपना घर समझकर काम में जुट जाना। जैसे छत पर सूखते अमचूर पर पूरे मोहल्ले के बच्चों का हक होता है, ठीक वैसे ही इस दोस्ती पर पूरे इलाके का प्यार होता है!

 

चलते-चलते:

आपकी लाइफ में इनमें से कौन-कौन से दोस्त मौजूद हैं? इस फ्रेंडशिप डे पर उन्हें यह आलेख टैग करके शुक्रिया कहना मत भूलिएगा!

इस हफ्ते बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा चढ़ा बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल

भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता बीते करीब चार महीनों में सबसे अच्छा रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। इसमें उम्मीद से बेहतर जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों, रुपये में मजबूती और विदेशी निवेशकों की खरीदारी का हाथ रहा।

सेंसेक्स-निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी

इस हफ्ते सेंसेक्स 2.67 फीसदी यानी 2,034 अंक चढ़कर 78,094 पर बंद हुआ। Nifty 50 भी 2.59 फीसदी यानी 616 अंक की मजबूती के साथ 24,383 पर बंद हुआ। निफ्टी आईटी इस हफ्ते सबसे ज्यादा चढ़ने वाला सूचकांक रहा। इसमें 6.75 फीसदी उछाल आया। निफ्टी ऑटो में भी 5.61 फीसदी मजबूती आई।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी अच्छी तेजी

खास बात यह है कि इस हफ्ते छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। Nifty Smallcap 100 Index 2.6 फीसदी चढ़ा। Redington, Kaynes Technology India, Firstsource Solutions, Brigade Enterprises, Affle 3I, IIFL Finance, KFin Technologies और IFCI के शेयरों में 24 फीसदी तक तेजी दिखी।

इन मिडकैप शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी

Nifty Midcap Index में भी इस हफ्ते 2 फीसदी तेजी आई। Coforge, Lauras Labs, Swiggy, Container Corporation of India और Ashok Leyland के शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी आई। गिरने वाले शेयरों में Suzlon Energy, Phoenix Mills, Billionbrains Garage Ventures, Bank of India और LICHF प्रमुख रहे।

विदेशी निवेशकों की अच्छी खरीदारी 

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने दो हफ्ते के बाद भारतीय बाजार में इस हफ्ते निवेश किया। उन्होंने 5,946 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,387 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया। रुपये में बीते पांच हफ्तों से जारी गिरावट पर भी ब्रेक लग गया। यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 118 पैसे की मजबूती के साथ 95.39 के लेवल पर बंद हुआ।

निफ्टी अगले हफ्ते 24,500-24,60 लेवल टेस्ट कर सकता है

सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के लिए 24,100-23,800 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। रेसिस्टेंस 24,500-24,700 के लेवल पर है। बैंक निफ्टी के लिए 56,000-54,500 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। इसे 58,500-6000 के लेवल पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। अगले हफ्ते निफ्टी के 24,500-24,600 का लेवल टेस्ट करने की उम्मीद है।

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इस हफ्ते आए इन दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे

इस हफ्ते मारुति सुजुकी, ह्युंडई, एशियन पेंट्स, स्विगी, आईटीसी और सन फार्मा सहित कई दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आए। मारुति का प्रॉफिट 11 फीसदी गिरा। आईटीसी का प्रॉफिट 27 फीसदी गिरा। लेकिन, सन फॉर्मा का प्रॉफिट 27 फीसदी बढ़ा। एशियन पेंट्स का प्रॉफिट तो 40 फीसदी तक बढ़ गया।

बच्चे की परवरिश पर 1.39 करोड़ रुपये का दावा कर फंसे इन्फ्लुएंसर, लोगों ने लगा दी क्लास

क्या भारत में एक बच्चे की परवरिश पर करोड़ों रुपये खर्च हो सकते हैं? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी सवाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक कंटेंट क्रिएटर ने बच्चे की परवरिश का अनुमानित खर्च बताते हुए दावा किया कि माता-पिता को जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। हालांकि, उनके आंकड़ों से ज्यादा लोगों का ध्यान उस तुलना ने खींचा, जिसमें उन्होंने पैरेंटहुड की तुलना एक लग्जरी कार खरीदने से कर दी।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक गणना बताया, जबकि कई लोगों ने इस सोच को गलत और भावनाओं से परे करार दिया। आखिर इस वीडियो में ऐसा क्या कहा गया कि इंटरनेट पर बहस छिड़ गई और लोग दो हिस्सों में बंट गए? जानिए पूरा मामला।

क्यों चुना ‘Child-Free’ रहने का फैसला?

करीब 2.88 लाख फॉलोअर्स वाले विख्यात ने बताया कि उन्होंने खुद माता-पिता न बनने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्होंने बच्चे की परवरिश से जुड़े संभावित खर्चों का आकलन किया और इसी आधार पर अपनी सोच लोगों के सामने रखी।

गर्भावस्था से शुरू किया पूरा हिसाब

विख्यात ने सबसे पहले गर्भावस्था और डिलीवरी के खर्च का अनुमान लगाया। डॉक्टर की फीस, जांच, दवाइयां, मैटरनिटी कपड़े और निजी अस्पताल में डिलीवरी को मिलाकर उन्होंने करीब 3 लाख रुपये का खर्च बताया। इसके बाद उन्होंने बच्चे के शुरुआती दो साल में डायपर, दूध, टीकाकरण, खिलौने, किताबें, स्ट्रोलर, पालना और अन्य जरूरी सामान पर करीब 6 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया।

पढ़ाई बनी सबसे महंगी जिम्मेदारी

उनके अनुसार बच्चे की शिक्षा सबसे बड़ा खर्च है। प्री-स्कूल से लेकर स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल एक्टिविटीज को जोड़ते हुए उन्होंने करीब 33 लाख रुपये का अनुमान लगाया। उनका कहना था कि यह आंकड़ा दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के औसत खर्च के निचले स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

खाने से गैजेट्स तक, हर चीज का लगाया हिसाब

विख्यात ने 2 से 18 साल की उम्र तक खाने पर 15 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया। इसके अलावा ट्यूशन पर 9 लाख, इलाज और हेल्थकेयर पर 5.4 लाख, मनोरंजन पर 9 लाख, कपड़ों पर 7.2 लाख, गैजेट्स पर 4 लाख, खेल और अन्य गतिविधियों पर 8 लाख और ट्रांसपोर्ट पर भी करीब 8 लाख रुपये जोड़े।

बड़े घर का किराया भी जोड़ा

उन्होंने दावा किया कि बच्चे के लिए अतिरिक्त कमरे की जरूरत पड़ने पर बड़े घर का किराया भी बड़ा खर्च बन जाता है। इसी वजह से उन्होंने 18 साल में अतिरिक्त किराए के रूप में 32.4 लाख रुपये का अनुमान शामिल किया। विख्यात का कहना था कि इस हिसाब में कॉलेज की पढ़ाई, महंगाई और निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न को शामिल नहीं किया गया है। यानी वास्तविक खर्च इससे भी ज्यादा हो सकता है।

BMW से तुलना ने भड़का दिया इंटरनेट

अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने कहा कि बच्चे की परवरिश पर इतना पैसा खर्च करने के बजाय कोई व्यक्ति लगभग उसी रकम में BMW M4 Competition जैसी लग्जरी स्पोर्ट्स कार खरीद सकता है। यही तुलना लोगों को पसंद नहीं आई और वीडियो देखते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।

किसी ने कहा ‘गलत तुलना’, तो किसी ने बताया ‘बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया’

वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनके खर्च के अनुमान पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि बच्चे की परवरिश का खर्च हर परिवार के लिए अलग होता है और 1.39 करोड़ का आंकड़ा वास्तविकता से काफी दूर है। एक यूजर ने लिखा कि उसने अपने घर में छोटे बच्चे की परवरिश देखी है और इतना खर्च कभी नहीं हुआ।

‘बच्चे की मुस्कान की कोई कीमत नहीं’

कई लोगों ने इस बहस में भावनात्मक पक्ष भी रखा। एक यूजर ने लिखा कि उसके छह महीने के बेटे की एक मुस्कान किसी भी रकम से ज्यादा कीमती है और बच्चों की परवरिश को सिर्फ पैसों के तराजू में नहीं तौला जा सकता।

सोशल मीडिया पर जमकर हुई आलोचना

कई यूजर्स ने इन्फ्लुएंसर की सोच की आलोचना करते हुए कहा कि बच्चों की तुलना किसी लग्जरी कार से करना गलत है। कुछ लोगों ने इसे “बेकार तुलना” बताया, तो कुछ ने ऐसे कंटेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैरेंटहुड सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि भावनाओं, जिम्मेदारियों और खुशियों का भी नाम है।

हर शेयर पर मिलेगा ₹270 का शानदार डिविडेंड, 4 अगस्त रिकॉर्ड डेट; स्टॉक 3 महीनों में 14% चढ़ा

Bosch Ltd वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 270 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने जा रही है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट अगले सप्ताह में 4 अगस्त है। इस तारीख तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे। इसका मतलब है कि अगर पहले से शेयरहोल्डर नहीं हैं तो पात्र बनने के लिए बॉश के शेयर की खरीद 3 अगस्त को मार्केट क्लोज होने से पहले करनी होगी।

Bosch Ltd, जर्मनी की मल्टीनेशनल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी Robert Bosch GmbH की इंडिया यूनिट है। भारत में बॉश, मोबिलिटी सॉल्यूशंस, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर गुड्स और एनर्जी एंड बिल्डिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी और सर्विसेज की सप्लाई करती है। जर्मनी की बॉश रेवेन्यू के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोटिव सप्लायर है। यह स्पार्क प्लग से लेकर ऑटोमेटेड ड्राइविंग सॉफ्टवेयर तक सब कुछ बनाती है।

बॉश के शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। फाइनल डिविडेंड पर 11 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट 14 अगस्त को या उसके बाद किया जाएगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 512 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था।

Bosch का शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत मजबूत

बॉश के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 41088.75 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1.21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर की कीमत 3 महीनों में 14 प्रतिशत चढ़ी है। 3 साल में निवेशकों का पैसा डबल से भी ज्यादा हो चुका है। जून महीने में ब्रोकरेज फर्म UBS ने शेयर को डबल अपग्रेड किया था। रेटिंग ‘सेल’ से बढ़ाकर सीधा ‘बाय’ कर दी। टारगेट प्राइस 27920 रुपये से बढ़ाकर 45530 रुपये प्रति शेयर कर दिया।

Zee Entertainment के पुनीत गोयनका, सुभाष चंद्रा के खिलाफ सेबी का बड़ा एक्शन, एक साल तक सिक्योरिटीज मार्केट में नहीं कर सकेंगे ट्रांजेक्शन

मार्च तिमाही में मुनाफा रहा 568 करोड़ रुपये

कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 70.54 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में बॉश लिमिटेड का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,565.70 करोड़ रुपये रहा था। इस बीच शुद्ध मुनाफा 568.50 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। ​पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 20,034.70 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2,770.30 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पाकिस्तानी नहीं श्रीलंकाई नीरज के हाथों से ले उड़ा गोल्ड पर विजयवीर जीते कांस्य

पेरिस ओलंपिक में पाकिस्तानी अरशद नदीम से गोल्ड मेडल हारने के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा श्रीलंकाई खिलाड़ी से गोल्ड मेडल हार गए। हालांकि अपने बुरे दिन पर भी उन्होंने सुनिश्चित किया कि सिल्वर मेडल कहीं नहीं जाए। इसके अलावा भारत के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि यशवीर को कांस्य पदक मिला।

तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन 28 वर्ष के नीरज ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85 . 83 मीटर थ्रो फेंका जो दूसरे स्थान पर रहने के लिये काफी था।वह 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया।

इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 . 72 मीटर था। वह पांचवें दौर के बाद 81.33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से सातवें स्थान पर थे लेकिन उनका आखिरी प्रयास जबर्दस्त रहा।

श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89.75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता।बेहद सर्दी और तेज हवाओं के प्रदर्शन उनका यह प्रदर्शन शानदार रहा । उन्होंने जून में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंका था।

चोपड़ा पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट से उबरकर लौटे थे। इस चोट के कारण उनकी वापसी दोहा में आयोजित डायमंड लीग तक टल गई थी। वह दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे थे। इससे पहले उन्होंने 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने संकेत दिया कि वह अभी भी पूरी तरह से फिट नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे उस ओर बढ़ रहे हैं।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी रोहित यादव 81.56 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे। दिलचस्प बात यह है कि भाला फेंक में पुरुषों के सभी पदक भारतीय उपमहाद्वीप के एथलीटों ने जीते।पाकिस्तान के गत चैम्पियन और मौजूदा ओलंपिक विजेता अरशद नदीम 77.41 के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीन दौर के बाद बाहर हो गए । त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैम्पियन केशोर्न वालकॉट छठे स्थान पर रहे।

पहली बार बिना सामान के चीन पहुंचे भारतीय व्यापारी:6 साल बाद भारत-तिब्बत ट्रेड शुरू; 2019 से तकलाकोट में छूटा है करोड़ों का माल

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे। खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है। वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल भी तकलाकोट में छूटा हुआ है। जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही। 8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए। फिलहाल सिर्फ 20 लोगों को मंजूरी व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था। SDM बोले- भारत-चीन व्यापार विधिवत शुरू हुआ धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है। अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे। तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है। तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा। भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं। अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है। पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है। 2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था। इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं। ——————- ये खबर भी पढ़ें : भारत-चीन व्यापार पर चाइना की टेढ़ी चाल: 1 अगस्त को बिना सामान के बुलाए 20 व्यापारी, नेपाल जून से कर रहा व्यापार करीब 6 साल बाद 1 अगस्त से लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस व्यापार पर एक बार फिर चीन ने टेढ़ी चाल चली है। दरअसल, चीन ने पहले बैच में सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट मंडी जाने की अनुमति दी है, जिनकी दुकानें या सामान 2019 से वहां फंसा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।