ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini ने 1 अरब यूजर्स का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि, यूजर बेस के मामले में ChatGPT अभी भी आगे है, लेकिन Gemini तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और OpenAI की बढ़त को लगातार कम कर रहा है।

 

ChatGPT और Gemini के 1 अरब यूजर्स

OpenAI और Google दोनों अपने जनरेटिव AI टूल्स के साथ 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। Google के CEO सुंदर पिचाई ने बताया कि Gemini के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच गई है। उन्होंने इसे Google का अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रोडक्ट बताया। यह घोषणा OpenAI के उस बयान के कुछ सप्ताह बाद आई है, जिसमें कंपनी ने कहा था कि ChatGPT भी 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा पार कर चुका है।

 

हालांकि, दोनों कंपनियां यूजर्स की संख्या को अलग-अलग तरीके और अलग-अलग समय अवधि के आधार पर मापती हैं। इसके बावजूद एक बात स्पष्ट है कि AI असिस्टेंट बेहद तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं।

 

ChatGPT के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा Gemini

 

Gemini के यूजर्स की संख्या फरवरी में करीब 75 करोड़ थी, जो जुलाई के अंत तक बढ़कर 95 करोड़ हो गई और इसके बाद 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। वहीं, OpenAI ने फरवरी में ChatGPT के 90 करोड़ साप्ताहिक एक्टिव यूजर्स होने की जानकारी दी थी। बाद में कंपनी ने बताया कि ChatGPT के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है। हालांकि, OpenAI ने हाल का मासिक यूजर आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।

 

दोनों कंपनियों द्वारा अलग-अलग टाइमफ्रेम में यूजर डेटा जारी किए जाने के कारण सीधे तौर पर तुलना करना आसान नहीं है। फिर भी मौजूदा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ChatGPT की पहुंच फिलहाल ज्यादा है, जबकि Gemini बेहद तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है।

 

Google के इकोसिस्टम से Gemini को बड़ा फायदा

Gemini की तेज ग्रोथ की एक बड़ी वजह Google का विशाल इकोसिस्टम है। Gemini को Android और Google की कई सेवाओं में गहराई से जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि ऐसे लोग भी Gemini का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो खास तौर पर किसी AI चैटबॉट की तलाश में नहीं आए थे।

 

Google ने यह भी बताया कि Gemini के 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव iPhone यूजर्स हैं। इससे संकेत मिलता है कि Gemini के कुल यूजर बेस का बड़ा हिस्सा Android से आता है। Google के लिए यह एक महत्वपूर्ण बढ़त है, क्योंकि कंपनी Gemini को लगातार ज्यादा डिवाइस और सेवाओं में शामिल कर रही है।

 

AI हार्डवेयर पर भी OpenAI की नजर

 

OpenAI अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी की AI-स्पेसिफिक हार्डवेयर में भी दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे भविष्य में ChatGPT के इस्तेमाल का दायरा स्मार्टफोन और कंप्यूटर से आगे बढ़ने की संभावना बन रही है।

 

अब AI की रेस सिर्फ ChatGPT तक सीमित नहीं

 

AI की प्रतिस्पर्धा अब केवल ChatGPT और Gemini तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में इस क्षेत्र में मुकाबला काफी तेज हुआ है। Google का Gemini, Anthropic का Claude, OpenAI का Codex और चीन की कई AI कंपनियों ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है। ChatGPT आज भी AI की दुनिया में सबसे चर्चित नामों में से एक है, लेकिन उसकी बढ़त पहले जितनी सुरक्षित नहीं दिख रही। ChatGPT और Gemini दोनों के 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंचने के बाद AI की अगली जंग सिर्फ नए यूजर्स जोड़ने की नहीं होगी।

 

अब कंपनियों के सामने यूजर्स को लंबे समय तक अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना, नए AI फीचर्स पेश करना और इतने बड़े यूजर बेस को मजबूत बिजनेस में बदलना बड़ी चुनौती होगी।

ईरान में अब रेयर अर्थ खोजने के लिए अपने वैज्ञानिक भेज रहा चीन! जानिए दुनिया के लिए क्या हैं इसके मायने

Iran rare earths: महत्वपूर्ण खनिजों की ग्लोबल रेस में अब चीन और अमेरिका के बीच का कंपीटिशन और तीखा होता नजर आ रहा है। दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ के प्रोसेसिंग में अपने दबदबे को अमेरिका से चुनौती मिल रही है। इसी बीच चीन अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन के लिए ईरान में अपने वैज्ञानिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ जियो पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने ईरान नेशनल साइंस फाउंडेशन (INSF) के साथ अपने नए जॉइंट वर्कशॉप प्रोग्राम में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन को शामिल किया है।

क्या है चीन और ईरान की योजना और कैसे होगी फंडिंग?

इसके तहत चीन बैठकों, आवास और घरेलू यात्रा को कवर करने के लिए हर कार्यशाला पर 30,000 युआन (लगभग $4,200) देगा। दूसरी ओर ईरान में जाने वाले चीनी रिसर्चर्स के रहने की व्यवस्था और ईरानी प्रतिभागियों की इंटरनेशनल फ्लाइट का खर्च ईरान उठाएगा। यह रेयर अर्थ पहल चीन और ईरान के बीच व्यापक वैज्ञानिक सहयोग के विस्तार का हिस्सा है।

इस वर्कशॉप प्रोग्राम में कुल 5 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन, बीमारी का पता लगाने के लिए नैनोमैटेरियल्स, प्रदूषण निगरानी, भूकंप रेजिस्टेंट कंस्ट्रक्शन और ग्रीनर मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

इसके अलावा बीते 4 जुलाई को दोनों देशों ने एक डिटेल्ड रिसर्च सेल शुरू किया है। इसके तहत 15 सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 23 अगस्त रखी गई है और दिसंबर के उत्तरार्ध में अंतिम चयन के बाद स्वीकृत परियोजनाएं जनवरी 2027 से शुरू होंगी। इसमें जल और ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, सूखा व जलवायु परिवर्तन के बीच जल प्रबंधन, और कृषि व चिकित्सा बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं।

दशक भर पुराना है दोनों देशों का वैज्ञानिक संबंध

चीन की NSFC और ईरान के नेशनल साइंस फाउंडेशन ने साल 2017 में बीजिंग में एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे। तब से दोनों देशों ने चिकित्सा, नवीकरणीय ऊर्जा, सामग्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है।

साल 2024 में दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्यशाला कार्यक्रम शुरू हुआ था जो शुरुआत में जलवायु परिवर्तन, एआई, उन्नत सामग्री और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित था। हालांकि अब इसमें रेयर अर्थ को शामिल किए जाने से यह साझेदारी रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश कर गई है।

अमेरिका-चीन तनाव के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील खनिज हैं। अमेरिका-चीन संबंधों में यह एक बड़ा प्रेशर पॉइंट बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर शुरू करने के बाद, बीजिंग ने रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू कर दिए थे, जिससे कई अमेरिकी निर्माताओं के इंपोर्ट पर असर पड़ा।

इसके जवाब में अमेरिका ने अपने घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है। बीते 7 अगस्त को ही ट्रंप प्रशासन ने क्रिटिकल मिनरल्स और बैटरी प्रोजेक्ट्स में 3 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया है ताकि रक्षा भंडार को फिर से भरा जा सके और चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

दुनिया के लिए यह खबर क्यों मायने रखती है?

इस घटनाक्रम का तात्कालिक महत्व इस बात पर निर्भर नहीं करता कि ईरान आज कितना रेयर अर्थ उत्पादन कर सकता है बल्कि इस बात पर है कि चीन अपनी विश्व स्तरीय विशेषज्ञता को एक ऐसे देश में ले जा रहा है जिसके पास मूल्यवान लेकिन काफी हद तक अविकसित संसाधन मौजूद हैं। चीन के पास रेयर अर्थ के खनन, सेपरेशन और प्रसंस्करण की दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक है।

चीनी वैज्ञानिकों के आने से ईरान को अपनी रेयर अर्थ क्षमता को समझने और भविष्य में घरेलू प्रसंस्करण क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि ईरान को एक प्रमुख रेयर अर्थ उत्पादक बनने में अभी कई साल लगेंगे, क्योंकि इसके लिए व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक भंडार स्थापित करने के साथ-साथ खनन और प्रसंस्करण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा।

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इसके बावजूद, अमेरिका द्वारा चीन की घेराबंदी के प्रयासों के बीच चीन का ईरान जैसे देश के साथ मिलकर रणनीतिक खनिजों पर काम करना वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन के लिए एक बड़ा संकेत है।

क्या AI तय करेगा अगली महाशक्ति? मार्क जुकरबर्ग ने चीन को लेकर ऐसा बता दिया जिसने उड़ाई दिग्गजों की नींद

AI Decide Global Superpower: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने AI के लिए जरूरी एनर्जी और डेटा सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से नहीं बढ़ाया, तो वह इस क्षेत्र में चीन से पिछड़ सकता है। एक नोट में जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, उनका दुनिया में ताकत के संतुलन पर बड़ा असर होगा। इसका असर लोकतंत्र, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

जुकरबर्ग के मुताबिक, आने वाले समय में जो देश अत्याधुनिक AI को विकसित करने और बड़े पैमाने पर अपनाने में सबसे आगे रहेंगे, वे दुनिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की स्थिति में होंगे। इसका असर सिर्फ टेक्नोलॉली सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, वे एक नए जियोपॉलिटिकल पावर बैलेंस में योगदान देंगे। यही भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्धि और सुरक्षा की स्थिति तय करेगा।”

क्या अमेरिका को चीन के AI बूम से टेंशन लेनी चाहिए?

सिलिकॉन पर अमेरिका के एक्सपोर्ट कंट्रोल का समर्थन करते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि AI को सपोर्ट करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में चीन की तेजी से हो रही तरक्की वॉशिंगटन के लिए खास चिंता का विषय है। उन्होंने माना कि सिलिकॉन डिजाइन में अमेरिका को बढ़त हासिल है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने और AI के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के मामले में वह पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा, “चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते 1GW से ज्यादा न्यूक्लियर कैपेसिटी शुरू कर रहे हैं। इसलिए कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए हमें एनर्जी और डेटा सेंटर बनाने की रफ़्तार बढ़ानी होगी।”

AI की दौड़ में चीन से क्यों चिंतित हैं जुकरबर्ग?

जुकरबर्ग ने अपने एक नोट में चीन की तेजी से बढ़ती AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को अमेरिका के लिए खास चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि AI मॉडल बनाने के लिए सिर्फ बेहतरीन चिप डिजाइन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए भारी मात्रा में बिजली, बड़े डेटा सेंटर और मजबूत फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास सिलिकॉन डिजाइन के क्षेत्र में बढ़त है। उनके मुताबिक ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर बनाने में चीन की गति से अमेरिका पीछे रह रहा है। जुकरबर्ग ने कहा कि चीन हर कुछ हफ्तों में बड़ी मात्रा में नई परमाणु ऊर्जा क्षमता ऑनलाइन ला रहा है।

AI को लोग बना लेंगे हथियार!

जुकरबर्ग की चेतावनी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू AI को वैश्विक शक्ति संतुलन से जोड़ना है। उनका कहना है कि भविष्य में अत्याधुनिक AI के विकास और उसके इस्तेमाल में कौन से देश सबसे आगे रहते हैं, इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्य, समृद्धि और सुरक्षा किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

यानी AI की दौड़ को केवल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे बड़ी तस्वीर यह है कि AI में तकनीकी बढ़त हासिल करने वाला देश आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

अमेरिका के लिए बिजली बड़ी चुनौती

अमेरिका ने AI से जुड़ी हाई टेक्नोलॉजी और चिप्स को लेकर चीन सहित कुछ देशों पर निर्यात करने पर प्रतिबंध लगाए हैं। जुकरबर्ग ने इन प्रतिबंधों को जारी रखने का समर्थन किया है। उनका मानना है कि इन प्रतिबंधों ने महत्वपूर्ण दौर में दूसरे देशों में AI के विकास की गति को धीमा किया है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल चिप्स पर कंट्रोल रखना पर्याप्त नहीं होगा।

AI सिस्टम को चलाने और लोगों को ट्रेंड करने के लिए विशाल कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए लगातार बिजली की आपूर्ति आवश्यक है। इसलिए अमेरिका को अपनी ऊर्जा क्षमता और डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना होगा।

AI इतिहास का सबसे कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री?

जुकरबर्ग ने AI को इतिहास के सबसे कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री में से एक बताया। उनके मुताबिक AI के सेक्टर में नई तकनीक और इनोवेशन बेहद तेजी से दूसरे खिलाड़ियों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में कुछ ही महीनों में उनकी नकल या उन्हें अपनाया जा सकता है। यही वजह है कि AI की इस दौड़ में छोटी-सी बढ़त भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

जुकरबर्ग का कहना है कि कभी-कभी सिर्फ दो महीने की बढ़त भी मायने रख सकती है। उन्होंने अमेरिका से ऐसी पॉलिसी बनाने की अपील की है, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को तेज करें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि घरेलू AI मॉडल को बाजार में जारी करने में अनावश्यक देरी भी अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकती है।

चीन की बढ़त से अमेरिका को खतरा?

जुकरबर्ग की चिंता का मूल कारण यह है कि AI आने वाले सालों में अर्थव्यवस्था से लेकर रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा तक लगभग हर बड़े सेक्टर को प्रभावित कर सकता है। अगर चीन AI मॉडल, कंप्यूटिंग क्षमता, एनर्जी और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से आगे बढ़ता है और अमेरिका पर्याप्त रफ्तार से अपनी क्षमता नहीं बढ़ाता, तो दोनों देशों के बीच तकनीकी अंतर कम हो सकता है। या फिर चीन कुछ क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर सकता है।

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ऐसे में AI की मौजूदा दौड़ भविष्य में अमेरिका-चीन के बीच वैश्विक प्रभाव की बड़ी लड़ाई में बदल सकती है। आपको बता दें कि जिस देश के पास पर्याप्त चिप्स, बिजली, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता होगी, उसके पास AI को बड़े पैमाने पर विकसित और इस्तेमाल करने की क्षमता भी ज्यादा होगी।

International Linguistics Olympiad 2026: लिंग्विस्टिक ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने झटका सोना, पाणिनी लिंग्विस्टक ओलंपियाड से हुआ था चयन

International Linguistics Olympiad 2026: भारतीय छात्रों ने रोमानिया में हाल ही में संपन्न हुए इंटरनेशनल लिंग्विस्टिक ओलंपियाड में अपने ज्ञान का डंका बजाया है। इस प्रतियोगिता में भारतीय छात्रों ने एक गोल्ट और तीन ब्रॉन्ज मेडल के साथ ही एक ऑनरेबल मेंशन जीता है। इस कॉम्पिटिशन में 40 से ज्यादा देशों के स्कूली छात्र हिस्सा लेते हैं। पारंपरिक ओलंपियाड के उलट, इसमें छात्रों को पहले से लिंग्विस्टिक्स पढ़ने की जरूरत नहीं होती है।

इसके बजाय, पार्टिसिपेंट्स को अनजान भाषाओं पर आधारित प्रॉब्लम दी जाती हैं और उन्हें लॉजिक और रीजनिंग का इस्तेमाल करके पैटर्न ढूंढ़ने होते हैं। आईआईआईटी हैदराबाद के मुताबिक, श्रीलक्ष्मी वेंकटरमन ने गोल्ड मेडल जीता। आरव अनिल राव, निशांत शंकर लक्ष्मणन और अद्वय मिश्रा ने ब्रॉन्ज मेडल जीते। वहीं, सोहम अमित पेडनेकर को एक ऑनरेबल मेंशन मिला।

कैसे चुने गए भारत के छात्र?

भारत इंटरनेशनल लिंग्विस्टिक्स ओलंपियाड में 2009 से हिस्सा ले रहा है। टीम का चयन पाणिनी लिंग्विस्टिक्स ओलंपियाड (PLO) के जरिए होता है, जो राष्ट्रीय चयन प्रतियोगिता के तौर पर काम करता है। पाणिनी लिंग्विस्टिक्स ओलंपियाड के अनुसार, भारत ने अब तक इंटरनेशनल लिंग्विस्टिक्स ओलंपियाड में 37 मेडल जीते हैं। इसमें छह गोल्ड, नौ सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। 2026 में चयन के लिए, पहले राउंड के लिए 525 स्टूडेंट्स ने रजिस्टर किया, जबकि 338 फरवरी में हुए क्वालिफाइंग टेस्ट में शामिल हुए।

अगला चरण पास करने वालों ने 31 मई से 10 जून तक आईआईआईटी हैदराबाद में 10 दिन के रेजिडेंशियल कैंप में हिस्सा लिया। कैंप में लेक्चर, मेंटरिंग सेशन, प्रॉब्लम-सॉल्विंग एक्सरसाइज, मॉक ओलंपियाड और टेस्ट शामिल थे। दूसरे राउंड की परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर फाइनल टीम को चुना गया। चुने गए छात्रों ने रोमानिया जाने से पहले आगे की ट्रेनिंग ली।

स्टूडेंट्स ओलंपियाड से क्या सीखते हैं?

प्रतियोगिता में प्रॉब्लम लॉजिकल थिंकिंग, पैटर्न रिकग्निशन और एनालिटिकल स्किल्स पर फोकस करती हैं। स्टूडेंट्स को ऐसी भाषा का स्ट्रक्चर या ग्रामर समझना पड़ सकता है जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा हो।

IIIT हैदराबाद 2015 से पाणिनी लिंग्विस्टिक्स ओलंपियाड को मेंटर कर रहा है। प्रोग्राम के जरिए छात्र जिस कौशल में महारत हासिल करते हैं, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और लैंग्वेज टेक्नोलॉजी जैसे एरिया में भी काम आ सकते हैं।

Uttar Pradesh ITI Result 2026 Out: फर्स्ट, सेकेंड ईयर और सर्टिफिकेट परीक्षा का रिजल्ट घोषित, आधिकारिक वेबसाइट पर करें चेक

LU BTech AI admission 2026: लखनऊ यूनिवर्सिटी में 12वीं के नंबरों के आधार पर बीटेक की इस ब्रांच में मिल रहा प्रवेश, जानें आवेदन की लास्ट डेट

LU BTech AI admission 2026: बीटेक की सीएसई ब्रांच में प्रवेश लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बड़ा और अहम अपडेट है। यूपी की इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ने बीटेक सीएसई में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की है, वो भी 12वीं के नंबरों के आधार पर। यह उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में सीधे या लेट्रल एंट्री के जरिए प्रवेश शुरू किया है। यह मौका उन छात्रों के लिए खास है जो यूपीटीएसी (UPTAC) काउंसलिंग के बाद खाली बची सीटों पर एडमिशन लेना चाहते हैं। इस प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा बनने के इच्छुक छात्र अब 12 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय पहले सभी आवेदन स्वीकार करेगा, फिर खाली सीटों के अनुसार मेरिट लिस्ट जारी करेगा।

डायरेक्ट और लेटरल एंट्री दोनों से मिलेगा दाखिला

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि बीटेक फर्स्ट ईयर, एमसीए फर्स्ट ईयर और बीटेक लेटरल एंट्री के माध्यम से सेकेंड ईयर में सीधे प्रवेश दिए जाएंगे। आवेदन फॉर्म विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां से छात्र इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

आवेदन शुल्क और जमा करने की प्रक्रिया

एप्लीकेशन फॉर्म भरने के बाद छात्रों को 1600 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट बनवाना होगा। यह ड्राफ्ट विश्वविद्यालय के फाइनेंस कंट्रोलर के नाम से बनाया जाएगा। एप्लीकेशन फॉर्म और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ इसे फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी के डीन ऑफिस में जमा करना होगा। इसके बाद विश्वविद्यालय मेरिट लिस्ट जारी करेगा और उसी के आधार पर एडमिशन प्रोसेस पूरा किया जाएगा।

बीटेक की इन ब्रांच में मिलेगा एडमिशन

लखनऊ विश्वविद्यालय निम्नलिखित बीटेक कोर्स में डायरेक्ट एडमिशन दे रहा है:

सिविल इंजीनियरिंग

कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग

कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

मैकेनिकल इंजीनियरिंग

इसके अलावा दो साल के एमसीए कोर्स में भी एडमिशन दिया जाएगा।

प्रति सेमेस्टर फीस

विश्वविद्यालय द्वारा तय फीस इस प्रकार है:

बीटेक : 60,180 रुपये प्रति सेमेस्टर

एमसीए : 56,180 रुपये प्रति सेमेस्टर

कौन कर सकता है आवेदन?

बीटेक फर्स्ट ईयर : मान्यता प्राप्त बोर्ड से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है।

एमसीए : बीसीए, बीएससी (कंप्यूटर साइंस/आईटी), बीटेक (सीएसई/आईटी) या समकक्ष डिग्री वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं। अन्य ग्रेजुएट छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास 10+2 या ग्रेजुएशन लेवल पर मैथ्स विषय हो और मिनिमम 50% अंक (एससी/एसटी के लिए 45%) हों।

बीटेक लेटरल एंट्री

इंजीनियरिंग डिप्लोमा, संबंधित डी.वोक. कोर्स या मैथ्स के साथ बीएससी डिग्री वाले छात्र निर्धारित न्यूनतम अंकों के साथ आवेदन कर सकते हैं।

जरूरी डॉक्यूमेंट्स

आवेदन के साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट व सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य है। एमसीए छात्रों को ग्रेजुएशन की मार्कशीट और सर्टिफिकेट तथा लेटरल एंट्री छात्रों को डिप्लोमा की मार्कशीट संलग्न करनी होगी। आरक्षण का लाभ लेने वाले छात्रों को 1 अप्रैल 2026 के बाद जारी जाति प्रमाणपत्र देना होगा। सभी डॉक्यूमेंट्स पर छात्रों के स्वयं के हस्ताक्षर होना जरूरी है।

जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।

Tamil Nadu Budget 2026: सीएम विजय का Gen Z बजट! युवाओं के लिए AI, फ्री लैपटॉप और रोजगार का बड़ा पैकेज

Tamil Nadu Budget 2026: तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार का पहला बजट (2026-27) विधानसभा में पेश कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली इस नई सरकार ने अपने पहले बजट के जरिए साफ संदेश दिया है युवा और Gen Z इस सरकार के एजेंडे के सबसे बड़े केंद्र बिंदु हैं। सिर्फ पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित रहने के बजाय 2026-27 का यह बजट शिक्षा में सुधार, डिजिटल पहुंच, रोजगार क्षमता, कौशल विकास और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है।

बुधवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री एन मैरी विल्सन ने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, खेल और रोजगार से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों की घोषणा की। इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार ने नीट (NEET) परीक्षा का विरोध दोहराते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि राज्य में मेडिकल प्रवेश को कक्षा 12वीं की पब्लिक परीक्षा के अंकों के आधार पर ही बहाल किया जाए।

स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए खोला खजाना

शिक्षा क्षेत्र को इस बजट में सबसे बड़ा आवंटन दिया गया है। सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 44527 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 8393 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है। पल्ली निरईवु थिटम योजना के तहत 2132 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 3734 सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष के लिए योजना को 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 10 हजार स्कूलों के लिए सुपर क्लीन, सुपर कैंपस अभियान के तहत पहले चरण में 139 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत रोजना की सफाई, साफ पेयजल, शौचालय रखरखाव और 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

पेरुंथलैवर कामराजर मॉडल स्कूल का ऐलान हुआ है। इनमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को आवासीय सुविधाएं, शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, आवास, पाठ्यपुस्तकें और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त दी जाएगी।

फ्री लैपटॉप, साइकिलें और इंटीग्रेटेड हॉस्टल

टीवीके सरकार ने छात्रों के कल्याण को कक्षाओं से आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। छात्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये की लागत से वेत्री लैपटॉप योजना शुरू की जा रही है। पुथिया पयनम, पुथिया वेगम योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा 11वीं के 5.3 लाख स्टूडेंट्स को मुफ्त साइकिलें दी जाएंगी। इन साइकिलों में सुरक्षा हेलमेट और वाटर बोतल भी लगी होगी। इस पर 277 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

राज्य में हॉस्टल व्यवस्था को सुधारने के लिए ‘तमिलनाडु स्टूडेंट हॉस्टल्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन’ (TNSHIC) का गठन किया जाएगा। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 3200 करोड़ रुपये की लागत से 200 इंटिग्रेटेड हॉस्टल बनाए जाएंगे। इनमें 1 लाख छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी। पाठ्यक्रम सुधार कार्यक्रम ‘कत्रलिल मुधलीदम तमिलनाडु’ के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा मदुरै में 300 वार्षिक सीटों की क्षमता वाला नया लॉ कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की गई है।

AI मिशन, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और फ्यूचर स्किल्स

प्रौद्योगिकी के महत्व को समझते हुए बजट में AI और टेक्नोलॉजी पर खास जोर दिया गया है। तमिलनाडु AI मिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, वर्चुअल रियलिटी और दूसरी इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘तमिलनाडु AI मिशन’ का गठन किया जाएगा। यह मिशन e-Sevai 2.0 के साथ मिलकर नागरिक सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाएगा। AI और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के लिए बजट में 398 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सरकार ने कहा है कि 2031 तक इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के 5 लाख छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी।

रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और स्पोर्ट्स पर जोर

शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। वेत्रीथिरन ट्रेनिंग स्कीम के तहत 13 लाख युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के मौके दिए जाएंगे। एसएससी, आरआरबी और आईबीपीएस (IBPS) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जिला रोजगार केंद्रों के माध्यम से कोचिंग कक्षाओं का संचालन होगा। इसके लिए 3.38 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। 90 करोड़ रुपये की लागत से 5 नए ITI स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, TN Spark कार्यक्रम का विस्तार 5,000 स्कूलों से बढ़ाकर 7,600 सरकारी स्कूलों तक किया जाएगा। खेलों और एथलेटिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए तमिलनाडु भर में 50 करोड़ रुपये के बजट के साथ 10 ओलंपिक सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे।

बजट में क्यों छाया रहा Gen Z और युवा वर्ग?

मौजूदा समय में पूरे देश में सरकारें Gen Z और युवाओं की आकांक्षाओं को साधने का प्रयास कर रही हैं। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएं, स्किल गैप, डिजिटल अवसर, AI तकनीक और उच्च शिक्षा जैसे मुद्दे सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में हैं। युवा मतदाता राजनीतिक नैरेटिव को दिशा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीएम विजय का यह पहला बजट युवाओं की इसी बदलती सोच और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

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AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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YEIDA New Plan: जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के बाद YEIDA का नया धमाका, अब बनेगा एनिमेशन और गेमिंंग पार्क

YEIDA AVGC XR Park Near Jewar Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के बाद अब यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को डिजिटल मीडिया और क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बनाने की तैयारी में है।

इसी कड़ी में, YEIDA ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आगामी फिल्म सिटी के पास एक अत्याधुनिक AVGC-XR (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियल्टी) पार्क विकसित करने की योजना बनाई है।

हाई-टेक सुविधाओं से लैस होगा AVGC-XR पार्क

YEIDA अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्तावित पार्क में आधुनिक और अगली पीढ़ी के कंटेंट निर्माण से जुड़ी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:

एनिमेशन और VFX स्टूडियो: फिल्मों और शो के लिए हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स लैब।

गेम डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर्स: वीडियो गेमिंग और डिजाइनिंग के लिए एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर।

मोशन कैप्चर और वर्चुअल प्रोडक्शन: फिल्मों और विजुअल मीडिया के लिए आधुनिक शूटिंग तकनीक।

AI और VR/AR लैब्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-पावर्ड कंटेंट निर्माण, एक्सटेंडेड रियल्टी (XR), वर्चुअल रियल्टी (VR) और ऑगमेंटेड रियल्टी (AR) लैब्स।

सेक्टर-21 की फिल्म सिटी के साथ मिलकर करेगा काम

यह AVGC-XR पार्क सेक्टर-21 में बन रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बिल्कुल नजदीक स्थित है।

YEIDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह पार्क एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम बनाएगा जहां फिल्म निर्माण, एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स एक ही जगह उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स को विदेशी प्रोडक्शन हाउस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और यह पार्क घरेलू व वैश्विक स्टूडियोज को भारत की ओर आकर्षित करेगा।’

केंद्र सरकार के विजन के अनुकूल है प्रोजेक्ट

यह परियोजना भारत सरकार की उस नीति से भी मेल खाती है, जिसके तहत देश को एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल मीडिया (AVGC-XR) के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल कंटेंट, मोबाइल गेमिंग और AI क्रिएशन टूल्स की बढ़ती मांग के कारण भारत में AVGC-XR सेक्टर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन चुका है।

युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से जेवर और आसपास के इलाकों का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा:

रोजगार के मौके: एनिमेशन, गेम डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), एआई और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में युवाओं के लिए हजारों नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

इन्वेस्टमेंट हब: यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पहले से ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल डिवाइसेज, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट का बड़ा केंद्र बन रहा है। इस पार्क के जुड़ने से यहां वैश्विक स्तर का टेक-क्रिएटिव इकोसिस्टम तैयार होगा।