डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री पर योगी सरकार का फोकस, जेवर में बनेगा अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

CM Yogi Adityanath

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के पास विकसित होगा हाईटेक हब
  • एनिमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, एआई और एक्सआर तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

 

लखनऊ/नोएडा, 3 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब डिजिटल क्रिएटिव और उभरती प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों पर भी विशेष फोकस कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics एवं Extended Reality) पार्क विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार, निवेश और नवाचार को भी नई गति मिलेगी।

 

इंडस्ट्री फोकस सेक्टर के रूप में विकसित होगा एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

योगी सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) को प्रदेश के फोकस सेक्टर (Focus Sector) के रूप में चिह्नित किया है। इसी रणनीति के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट यह पार्क विकसित कर रहा है। सरकार का उद्देश्य इस उभरते उद्योग को अत्याधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराकर घरेलू और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाना तथा युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर सृजित करना है।

 

डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री का नया केंद्र बनेगा उत्तर प्रदेश

प्रस्तावित एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क को आधुनिक तकनीकों से लैस एकीकृत डिजिटल क्रिएटिव इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां देश-विदेश की कंपनियों, स्टार्टअप्स, कंटेंट क्रिएटर्स और तकनीकी विशेषज्ञों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उत्तर प्रदेश में डिजिटल मनोरंजन उद्योग, मीडिया एवं कंटेंट उत्पादन को नई ऊंचाई मिलेगी।

 

इन अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लैस पार्क

प्रस्तावित पार्क में कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें प्रमुख रूप से एनिमेशन स्टूडियो, विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) स्टूडियो, गेम डेवलपमेंट एवं गेम डिजाइन सेंटर, मोशन कैप्चर स्टूडियो, वर्चुअल प्रोडक्शन सुविधाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कंटेंट निर्माण केंद्र, एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर) व ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) लैब, डिजिटल मीडिया एवं इमर्सिव कंटेंट डेवलपमेंट सेंटर शामिल होंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से एनिमेशन फिल्म, वेब सीरीज, गेमिंग, विज्ञापन, डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल ट्रेनिंग और इमर्सिव मीडिया जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

 

जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी का मिलेगा लाभ

यह पार्क नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट विकसित किया जाएगा। इससे देश-विदेश के निवेशकों, स्टूडियो, प्रोडक्शन हाउस और तकनीकी कंपनियों को बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण मिलेगा। एयर कार्गो, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक सुविधाओं का लाभ भी इस परियोजना को मिलेगा। एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क के विकसित होने से हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। एनिमेशन, गेमिंग, ग्राफिक्स, विजुअल इफेक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ेगी। इससे स्टार्टअप संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

 

भारत को वैश्विक एवीजीएक्स-एक्सआर हब बनाने की दिशा में अहम कदम

यीडा का यह पार्क भारत को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स तथा एक्सटेंडेड रियलिटी तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, तकनीकी और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नई पहचान देने के साथ-साथ राज्य को डिजिटल कंटेंट और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।

यूपी में अवैध खनन पर योगी सरकार का डिजिटल प्रहार, IMSS से 24 घंटे निगरानी और कड़े एक्शन

UP illegal mining IMSS monitoring: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक आधारित एकीकृत खनन निगरानी तंत्र (आईएमएसएस) को मजबूत किया है। इस प्रणाली के माध्यम से खनन क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है व राजस्व संरक्षण को नई मजबूती मिली है। इस सख्ती के जरिए भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग को 756 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व भी प्राप्त हुआ।

 

उत्तर प्रदेश भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि आईएमएसएस के अंतर्गत खनन क्षेत्रों की जियो-फेंसिंग, कैमरा युक्त वे-ब्रिज, खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) माइन टैग, विभिन्न राजमार्गों पर आईओटी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मानव रहित स्वचालित चेकगेट स्थापित किए गए हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से एकीकृत किया गया है, जहां से पूरे प्रदेश की गतिविधियों की निगरानी की जाती है।

 

कमांड सेंटर में स्थापित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के माध्यम से जनपदों द्वारा चिन्हित अवैध गतिविधियों के खिलाफ तत्काल ई-नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इससे कार्रवाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनी है।

1.53 लाख से अधिक वाहनों पर सख्त निगरानी

प्रदेश में 62 चेकगेट संचालित हैं, जबकि दो नए चेकगेट निर्माणाधीन हैं। 75 आरएफआईडी रीडर और एम-चेक एप की सहायता से निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है। अब तक 1.53 लाख से अधिक वाहनों पर आरएफआईडी माइन टैग लगाए जा चुके हैं, जिससे खनिज परिवहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हो रही है।

ई-नोटिस से 756 करोड़ की वसूली

उत्तर प्रदेश खनन नीति 2017 के तहत एकीकृत खनन निगरानी तंत्र को लागू किया गया था। वहीं 16 जुलाई 2026 तक आईएमएसएस के माध्यम से 2.41 लाख से अधिक ई-नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन ई-नोटिसों के माध्यम से 998 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि निर्धारित की गई है। इसमें से अब तक करीब 756 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली भी की जा चुकी है। इससे योगी सरकार की तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था अवैध खनन व खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ सरकारी राजस्व बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

एआई के आते ही लगी चपत! ₹2 लाख कमाने वाले कॉपीराइटर की इनकम पहुंची 40 हजार पर

आज के बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। वहीं एआई के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कुछ लोगों को अपनी जॉब से भी निकाला जा रहा है। वहीं इसकी वजह से कई लोगों को अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। कुछ लोग AI को नए मौके मानते हैं, जबकि कई लोगों के मुताबिक इससे उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक कॉपीराइटर का एआई की वजह से कम हुई सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

एक वायरल Reddit पोस्ट में एक कॉपीराइटर ने अपनी नौकरी और कमाई में आए बड़े बदलाव का अनुभव शेयर किया। कॉपीराइटर के मुताबिक, पहले वह हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते थे, लेकिन अब उनकी आय घटकर लगभग 40 हजार रुपये रह गई है। उन्होंने दावा किया कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके काम और करियर पर गहरा असर डाला।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

Reddit पर ये पोस्ट r/IndianWorkplace शेयर की गई थी। इस पोस्ट का टाइटल “2 लाख रुपये महीने से 40 हजार रुपये महीने की सैलरी पर पहुंचना” था। जिंदगी की सबसे बड़ी गिरावट।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि फ्रीलांसिंग से शुरुआत करने के बाद उनकी कमाई 2 लाख रुपये महीने तक पहुंच गई थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनका करियर पूरी तरह बदल गया। यूजर ने लिखा, “करीब 8 साल पहले मैंने फ्रीलांसिंग शुरू की थी। 18 साल की उम्र में मुझे पहला फुल-टाइम रिमोट कॉन्ट्रैक्ट मिला और 22 साल की उम्र तक मैं घर से काम करते हुए हर महीने 2 लाख रुपये कमा रहा था।”

कम हो गई सैलरी

लेकिन,ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। यूजर ने बताया कि साल 2026 उनके करियर के लिए सबसे मुश्किल दौर साबित हुआ। उन्होंने लिखा, “2026 मेरे लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। मेरी सभी नौकरियां और प्रोजेक्ट चले गए और सिर्फ दो हफ्तों के भीतर मेरी छह अंकों की मासिक कमाई घटकर लगभग शून्य हो गई।” यूजर के अनुसार, वर्कप्लेस पर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके करियर पर सबसे ज्यादा असर डाला। उन्होंने दावा किया कि इसी बदलाव की वजह से उनकी नौकरी भी चली गई।

एआई की वजह से गई नौकरी

पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं एक लीड कॉपीराइटर था। मैंने बिल्कुल शुरुआत से अपना करियर बनाया। कॉलेज बीच में छोड़ दिया था और अपनी पूरी जिंदगी अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने में लगा दी। लेकिन फिर AI का दौर आ गया। मेरा मानना है कि मुझे इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि कंपनी ने AI को ट्रेन करने और अपने स्थायी कर्मचारियों को बनाए रखने का फैसला किया।”

2 लाख से 40 हजार हुई सैलरी

इनकम के एक रेगुलर सोर्स के लिए यूजर ने हैदराबाद की एक मार्केटिंग एजेंसी जॉइन की। जो तेलंगाना टूरिज्म के प्रचार से जुड़े काम संभालती है। उन्होंने बताया कि ज्यादा जिम्मेदारियां संभालने के बावजूद उनकी सैलरी पहले की तुलना में काफी कम है। यूजर ने बताया कि नई नौकरी में सबसे बड़ा झटका उन्हें सैलरी को लेकर लगा। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा हैरानी सैलरी देखकर हुई। ऐसा लगता है कि कई कंपनियां यहां लोगों के टैलेंट का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं। पहले जिस काम के लिए मुझे 2 लाख रुपये महीने मिलते थे, अब उससे भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सिर्फ 40 हजार रुपये मिल रहे हैं। यह बात मुझे हर दिन परेशान करती है।”

लोगों में नहीं है उत्साह

यूजर ने कहा कि कम सैलरी के साथ-साथ दफ्तर का माहौल भी उन्हें निराश करता है, क्योंकि वहां लोगों में काम के प्रति जुनून और रचनात्मक सोच की कमी है। उन्होंने लिखा, “पैसों की समस्या के अलावा मुझे सबसे ज्यादा इस बात का दुख है कि मेरे आसपास क्रिएटिव माहौल नहीं है। ज्यादातर लोग सिर्फ काम पूरा करने के लिए काम करते हैं। उनमें न उत्साह दिखता है और न ही जुनून। इससे मेरा भी काम करने का मन कम हो जाता है, जबकि मैं अकेले कई लोगों का काम संभाल रहा हूं।”

लोगों ने किया कमेंट

यूजर ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी, जिसके बाद कई यूजर्स ने उनका हौसला बढ़ाया और नई स्किल्स सीखने व बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “हममें से ज्यादातर लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं। आपने जोखिम लिया, सही समय पर सफलता भी मिली, लेकिन हर दौर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। हर पीढ़ी में बड़े बदलाव आते हैं और इस बार AI ऐसा ही बदलाव लेकर आया है।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “अपनी स्किल्स को लगातार बेहतर बनाइए, नए लोगों से जुड़िए और दोबारा फ्रीलांसिंग शुरू कीजिए। इससे आपको बेहतर मौके मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।”

Persistent Systems Q1 Results: मुनाफा घटा, लेकिन AI और रिकॉर्ड डील्स से कमाई बढ़ी; शेयरों पर रहेगी नजर

Persistent Systems Q1 Results: आईटी सर्विसेज कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 8.7% घटकर ₹483 करोड़ रह गया। मार्च तिमाही में यह ₹529 करोड़ था। हालांकि, कारोबार की रफ्तार बनी रही। कंपनी का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹4,303 करोड़ पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में ₹4,056 करोड़ था।

डॉलर के हिसाब से भी कंपनी की कमाई बढ़ी। जून तिमाही में रेवेन्यू 3.8% बढ़कर 452.4 मिलियन डॉलर रहा। मार्च तिमाही में यह 436 मिलियन डॉलर था।

ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव

इस तिमाही में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की ऑपरेटिंग कमाई पर थोड़ा दबाव दिखा। EBIT 12% घटकर ₹581.5 करोड़ रह गया। पिछली तिमाही में यह ₹659 करोड़ था। वहीं, EBIT मार्जिन भी 16.2% से घटकर 13.5% पर आ गया। यानी रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफे का मार्जिन कम हुआ।

लगातार 25वीं तिमाही में बढ़ा कारोबार

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप कालरा ने कहा कि पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने लगातार 25वीं तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। सालाना आधार पर कंपनी का रेवेन्यू 16.1% बढ़ा है। उनके मुताबिक, यह लगातार मजबूत डील जीतने और ग्राहकों से बढ़ते कारोबार का नतीजा है।

रिकॉर्ड TCV हासिल किया

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने इस तिमाही में 1.15 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड Total Contract Value (TCV) हासिल किया। यह अब तक का सबसे बड़ा तिमाही TCV है। इसमें एक बड़ी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ 6.5 साल का रणनीतिक सर्विस एग्रीमेंट भी शामिल है, जिसकी वैल्यू 650 मिलियन डॉलर से ज्यादा है। इससे आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Nagarro के साथ बड़ी डील

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने यूरोप की डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी Nagarro के साथ बिजनेस कॉम्बिनेशन एग्रीमेंट भी साइन किया है। इस डील का मकसद कंपनी की तकनीकी क्षमता बढ़ाना, नए देशों में कारोबार फैलाना और अलग-अलग इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।

कंपनी ने बताया कि ओपन ऑफर से जुड़े दस्तावेज जर्मनी के वित्तीय नियामक BaFin को भेज दिए गए हैं। वहीं, भारत में RBI से भी मंजूरी मांगी गई है। दूसरे देशों में भी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रक्रिया चल रही है।

AI पर रहेगा बड़ा दांव

संदीप कालरा का कहना है कि दुनिया भर की कंपनियां अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपना रही हैं। इसे देखते हुए पर्सिस्टेंट सिस्टम्स भी AI बेस्ड प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में निवेश बढ़ाती रहेगी। कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों को AI की मदद से बेहतर तकनीक, तेज कामकाज और ज्यादा बिजनेस वैल्यू देना है।

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर

आईटी कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 0.35% बढ़कर 5,534 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 20.81% चढ़ा है। इसने एक साल में 6.89% का रिटर्न दिया है। वहीं बीते पांच साल में इससे 254.93% का मल्टीबैगर रिटर्न मिला है। कंपनी का मार्केट कैप 86.96 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नौकरी से छंटनी हुई तो इस शख्स को मिल गया जीवन बदलने का मौका, AI की मदद से मिल गई 1.5 करोड़ की जॉब! जानिए कैसे

एक ही कंपनी में दस साल बिताने के बाद नौकरी छूटने से किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता है। एक प्रोफेशनल के लिए, उसके बाद के महीने अनिश्चितता, बार-बार रिजेक्शन और ऐसे इंटरव्यू से भरे रहे जिनसे कोई नतीजा नहीं निकला।

हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया। इंटरव्यू की प्रैक्टिस करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी मिल गई, जिसमें सालाना लगभग 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है।

AI ने उनके इंटरव्यू की तैयारी का तरीका बदल दिया

इस प्रोफेशनल ने Reddit पर “kml3141” यूज़रनेम से अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक ही कंपनी में 10 साल काम करने और तीन प्रमोशन पाने के बाद फरवरी के आखिर में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह फैसला एक झटके जैसा था, और अगले पांच महीने नौकरी की मुश्किल तलाश में बीते। उन्होंने कई इंटरव्यू दिए लेकिन उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा।

कुछ पद रद्द कर दिए गए, कुछ को होल्ड पर डाल दिया गया, जबकि कुछ पद आखिरकार कंपनी के अंदर के लोगों से ही भर दिए गए। अपने चांस बेहतर करने के लिए, उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी में AI का इस्तेमाल करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे AI टूल्स में जॉब डिस्क्रिप्शन पेस्ट करते थे और उन लोगों के बारे में भी जानकारी शेयर करते थे जो उनका इंटरव्यू लेने वाले थे।

इसके बाद AI ने उन्हें इंटरव्यू में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों का अंदाजा लगाने, इंटरव्यू लेने वालों के बारे में जानकारी जुटाने और STAR मेथड का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करने में मदद की। उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से वे इंटरव्यू के दौरान बहुत ज़्यादा बातें करने के बजाय अपने जवाब छोटे और काम की बात पर केंद्रित रख पाए।

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Layoffs

आखिरकार मेहनत रंग लाई

कई महीनों की खोज के बाद, उन्हें एजेंसी इंडस्ट्री से बाहर की एक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। इस नई नौकरी में सालाना सैलरी $155,000 (लगभग ₹1.5 करोड़) है, साथ ही 15% सालाना बोनस और पहले दिन से ही एम्प्लॉई बेनिफिट्स भी मिलेंगे। इसमें फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स के साथ हाइब्रिड वर्क मॉडल की सुविधा भी है।

हालांकि उन्होंने सैलरी पर बातचीत (नेगोशिएशन) करने के बारे में सोचा था, लेकिन उन्होंने ऑफर स्वीकार करने का फैसला किया क्योंकि यह उनकी पिछली नौकरी की कमाई से ज़्यादा था। पीछे मुड़कर देखने पर, Reddit यूज़र ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें धैर्य रखने और लगातार अप्लाई करते रहने का महत्व सिखाया, भले ही कोई नौकरी पहुंच से बाहर लग रही हो।

उनकी पोस्ट को दूसरे Reddit यूज़र्स से भी काफी सपोर्ट मिला। एक यूज़र ने पूछा, “बधाई हो! आपने इंटरव्यू की तैयारी कैसे की? आजकल वे ज़्यादातर व्यवहार और स्थिति-आधारित (बिहेवियरल और सिनेरियो-बेस्ड) इंटरव्यू पर ज़ोर देते हैं।”एक और यूज़र ने लिखा, “बधाई हो! यहां दूसरों का हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अरे OP, इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई। अगर आपको कोई दिक्कत न हो, तो क्या मैं आपसे DM में उन प्रॉम्प्ट्स के बारे में कुछ मदद ले सकता हूं जिनका आपने इस्तेमाल किया था? ये इंटरव्यू की तैयारी में मेरे काम आ सकते हैं। मुझे आपसे कुछ मेंटरशिप चाहिए।”

एक और यूज़र ने बताया, “मैंने एक एजेंसी के लिए काम किया था और मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपकी नई नौकरी के लिए शुभकामनाएं! अब इस बात पर ध्यान दें कि आपके पास एक बड़ा इमरजेंसी फंड हो और आप अपना कोई भी बकाया कर्ज़ चुका दें।”

मध्य प्रदेश में पुनर्जीवित हो रही गुरुकुल की सनातन परंपरा

sandipani vidyalaya MP

Sandipani Schools MP: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने 'सांदीपनि विद्यालयों' के जरिए गुरुकुल के संपन्न और सनातन वैभव को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की एक नायाब शुरुआत की है। ​इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जब पूरा देश आदि गुरु महर्षि वेदव्यास के अवदान को याद कर रहा है, तब मध्य प्रदेश से आ रही सांस्कृतिक और शैक्षणिक पुनर्जागरण की बयार पूरे देश को एक नई राह दिखा रही है। इन विद्यालयों में गुरुकुल की समृद्ध परंपराओं के साथ अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान की भी शिक्षा दी जा रही है, और ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का इकलौता और अग्रणी राज्य बन गया है।

 

​उज्जैन केवल बाबा महाकाल की नगरी ही नहीं है, बल्कि वह द्वापर युग में महर्षि सांदीपनि की ऐतिहासिक तपोभूमि भी रही है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में सांदीपनि अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव थे। इसके अलावा 15 जुलाई से 29 जुलाई तक गुरु शिष्य परंपरा के उत्सव के तौर पर गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान प्रदेश में  “एक गुरु एक वृक्ष” अभियान के तहत 40000 से अधिक पौधों का रोपण भी किया गया।

 

उज्जैन में महर्षि सांदीपनि का पावन आश्रम था, जहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने साथ रहकर समतावादी शिक्षा प्राप्त की थी। यहीं पर श्रीकृष्ण और बलराम ने मात्र 64 दिनों में 4 वेद, 6 वेदांग, उपनिषद, राजनीति, युद्धकला, संगीत और जीवन प्रबंधन सहित 64 कलाओं और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया था।

 

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी ऐतिहासिक नगरी उज्जैन से आते हैं। यही कारण है कि उज्जैन की इस महान सांदीपनि शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से खासे संजीदा हैं। मुख्यमंत्री इस योजना के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और प्रगति की स्वयं कड़े स्तर पर मॉनिटरिंग करते हैं। उनके विजन का ही नतीजा है कि पूर्व की “सीएम राइज़” योजना को भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ देते हुए अब 'सांदीपनि विद्यालय' के रूप में एक नई चेतना प्रदान की गई है।

 

सांदीपनि विद्यालय परंपरा और आधुनिकता का संगम हैं। ​आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, बिग डेटा और इंटरनेट का है। उंगलियों की एक क्लिक पर दुनिया भर की सूचनाएं उपलब्ध हैं, परंतु सूचना और 'विवेक' में बहुत महीन अंतर होता है। उत्तर इंटरनेट दे सकता है और निबंध एआई लिख सकता है; लेकिन सही-गलत का भेद करने वाला विवेक, मानवीय मूल्य, करुणा और अडिग चरित्र का निर्माण केवल और केवल एक 'सच्चा गुरु' ही कर सकता है।

 

​राज्य में प्रथम चरण में कुल 368 सांदीपनि विद्यालय संचालित हैं। इनमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े हैं। दूसरे चरण में 405 और विद्यालय संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। 

 

​मध्य प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय आज की पीढ़ी को राज्य के गौरव से जोड़ रहे हैं। शैक्षिक सत्र 2025- 26 में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में इन विद्यालयों का रिजल्ट तकरीबन 90 फीसदी रहा है। कुल मिलाकर सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार 21वीं सदी के भारत के लिए 'मनुष्य निर्माण की एक अनुपम प्रयोगशाला' तैयार कर रही है।

 

​सांदीपनि विद्यालयों का लक्ष्य भव्य कंक्रीट की इमारतें खड़ा करना मात्र नहीं है, बल्कि आधुनिक विद्यालयों में 'गुरुकुल की आत्मा' को डालना है। यहाँ एक तरफ जहाँ आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, रोबोटिक्स और डिजिटल स्मार्ट कक्षाएं बच्चों को 21वीं सदी के लिए तैयार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति, योग, नैतिक शिक्षा, खेल, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को अनिवार्य रूप से समाहित किया गया है।

बाघ संरक्षण और पर्यावरण संतुलन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने 'सांदीपनि विद्यालयों' के जरिए गुरुकुल के संपन्न और सनातन वैभव को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की एक नायाब शुरुआत की है। ​इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जब पूरा देश आदि गुरु महर्षि वेदव्यास के अवदान को याद कर रहा है, तब मध्य प्रदेश से आ रही सांस्कृतिक और शैक्षणिक पुनर्जागरण की बयार पूरे देश को एक नई राह दिखा रही है। इन विद्यालयों में गुरुकुल की समृद्ध परंपराओं के साथ अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान की भी शिक्षा दी जा रही है, और ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का इकलौता और अग्रणी राज्य बन गया है।

 

​उज्जैन केवल बाबा महाकाल की नगरी ही नहीं है, बल्कि वह द्वापर युग में महर्षि सांदीपनि की ऐतिहासिक तपोभूमि भी रही है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में सांदीपनि अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव थे। इसके अलावा 15 जुलाई से 29 जुलाई तक गुरु शिष्य परंपरा के उत्सव के तौर पर गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान प्रदेश में  “एक गुरु एक वृक्ष” अभियान के तहत 40000 से अधिक पौधों का रोपण भी किया गया।

 

उज्जैन में महर्षि सांदीपनि का पावन आश्रम था, जहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने साथ रहकर समतावादी शिक्षा प्राप्त की थी। यहीं पर श्रीकृष्ण और बलराम ने मात्र 64 दिनों में 4 वेद, 6 वेदांग, उपनिषद, राजनीति, युद्धकला, संगीत और जीवन प्रबंधन सहित 64 कलाओं और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया था।

 

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी ऐतिहासिक नगरी उज्जैन से आते हैं। यही कारण है कि उज्जैन की इस महान सांदीपनि शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से खासे संजीदा हैं। मुख्यमंत्री इस योजना के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और प्रगति की स्वयं कड़े स्तर पर मॉनिटरिंग करते हैं। उनके विजन का ही नतीजा है कि पूर्व की “सीएम राइज़” योजना को भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ देते हुए अब 'सांदीपनि विद्यालय' के रूप में एक नई चेतना प्रदान की गई है।

 

सांदीपनि विद्यालय परंपरा और आधुनिकता का संगम हैं। ​आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, बिग डेटा और इंटरनेट का है। उंगलियों की एक क्लिक पर दुनिया भर की सूचनाएं उपलब्ध हैं, परंतु सूचना और 'विवेक' में बहुत महीन अंतर होता है। उत्तर इंटरनेट दे सकता है और निबंध एआई लिख सकता है; लेकिन सही-गलत का भेद करने वाला विवेक, मानवीय मूल्य, करुणा और अडिग चरित्र का निर्माण केवल और केवल एक 'सच्चा गुरु' ही कर सकता है।

 

​राज्य में प्रथम चरण में कुल 368 सांदीपनि विद्यालय संचालित हैं। इनमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े हैं। दूसरे चरण में 405 और विद्यालय संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। 

 

​मध्य प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय आज की पीढ़ी को राज्य के गौरव से जोड़ रहे हैं। शैक्षिक सत्र 2025- 26 में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में इन विद्यालयों का रिजल्ट तकरीबन 90 फीसदी रहा है। कुल मिलाकर सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार 21वीं सदी के भारत के लिए 'मनुष्य निर्माण की एक अनुपम प्रयोगशाला' तैयार कर रही है।

 

​सांदीपनि विद्यालयों का लक्ष्य भव्य कंक्रीट की इमारतें खड़ा करना मात्र नहीं है, बल्कि आधुनिक विद्यालयों में 'गुरुकुल की आत्मा' को डालना है। यहाँ एक तरफ जहाँ आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, रोबोटिक्स और डिजिटल स्मार्ट कक्षाएं बच्चों को 21वीं सदी के लिए तैयार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति, योग, नैतिक शिक्षा, खेल, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को अनिवार्य रूप से समाहित किया गया है।

Lakshveer offline AI storytelling device: छोटे से लक्षवीर का बड़ा कमाल, 8 साल की उम्र में ऐसी टेक्नोलॉजी बना दी जो बना सकती है ओरिजनल कहानियां

Lakshveer offline AI storytelling device: अगर आप मानते हैं कि बड़ी सोच छोटी उम्र में नहीं आ सकती, तो एक बार फिर सोच लीजिए। 8 की उम्र ऐसा ही पड़ाव है, जिसमें बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, रंग-बिरंगी और बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाली किताबों में दिल लगा रहे होते हैं। अगर इस मासूम उम्र में कोई बच्चा कहानियों में जीने और रोज नई कहानी सुनने के लिए एक मुकम्मल तकनीक खड़ी कर दे, तो उसे आप क्या कहेंगे? टेक्नोलॉजी जीनियस! अगर हां, तो ये नाम 8 साल के लक्ष्य पर पूरी तरह से सूट करता है।

आठ साल के लक्षवीर ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं उनके लिए कहानी की किताबें बना सकती है। लगभग ₹760 के कम कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर का इस्तेमाल करके, इस नन्हे इनोवेटर ने एक ऑफलाइन, आवाज से नियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहानी सुनाने वाला उपकरण बनाया है। यह ओरिजिनल कहानियां बना सकता है, उन्हें जोर से पढ़ सकता है और बोले गए कमांड का जवाब दे सकता है। वो भी बिना इंटरनेट से कनेक्ट हुए।

लक्ष्यवीर के इस प्रोजेक्ट ने टेक्नोलॉजी के शौकीनों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे कॉम्पैक्ट, ओपन-सोर्स AI मॉडल बेहद सस्ते हार्डवेयर पर भी बखूबी चल सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, वाई-फाई या पेड एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पर निर्भर रहने के बजाय, यह डिवाइस हर काम बहुत छोटे स्तर पर करता है, जिससे यह उन जगहों के लिए सही है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है या उपलब्ध नहीं है।

कैसे काम करता है ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस

प्रोजेक्ट्स बाय लक्ष के को-फाउंडर, लक्ष्यवीर ने इस डिवाइस को एक ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर के आस-पास बनाया और इसे एक INMP441 माइक्रोफोन, एक I2S स्पीकर और एक MAX98357A एम्प्लीफायर के साथ जोड़ा। ये कम्पोनेंट यूजर्स को वॉइस कमांड के जरिए एआई से इंटरैक्ट करने का मौका देते हैं। स्टोरीटेलिंग असिस्टेंट जरूरत के हिसाब से छोटी कहानियां बना सकता है, उन्हें टेक्स्ट-टू-स्पीच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सुना सकता है, आसान एनिमेशन दिखा सकता है और “प्ले”, “पॉज”, “रिज्यूम” और “अगली कहानी” जैसे बोले गए निर्देशों का जवाब दे सकता है। अधिकांश एआई असिस्टेंट के उलट, लक्ष्य के प्रोजेक्ट में प्रोसेस का हर चरण डिवाइस पर ही होता है। कोई भी डेटा बाहरी सर्वर पर नहीं भेजा जाता है, और सिस्टम बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करता रहता है।

ओपन-सोर्स AI प्रोजेक्ट को देता है पावर

शुरू से एक लैंग्वेज मॉडल बनाने के बजाय, लक्ष्य ने ESP32 के लिए TinyStories LLM नाम के एक मौजूदा ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को मॉडिफाई किया, जिसे मूल रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपर slvDev ने तैयार किया था। मूल मॉडल को क्लाउड सपोर्ट के बिना सीधे ESP32 हार्डवेयर पर स्टोरीज बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।

कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

क्या है भारत का नया ड्रोन किलर Bhargavastra, जानिए दुश्मन के Drone Swarm को तुरंत कैसे करेगा तबाह

Bhargavastra updates: मॉडर्न हो रही मिलिट्रीज के ड्रोन्स ने सैन्य अभियानों का रूप पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन-रूस के युद्ध से लेकर वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे वॉर तक, मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) ने निगरानी, रेकी और सटीक हमलों का तरीका बदल दिया है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी इस बात का प्रतीक है कि कैसे ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन ने अहम भूमिका निभाई थी। जैसे-जैसे ड्रोन्स युद्धक्षेत्र पर हावी हो रहे हैं, दुनिया भर की सेनाएं दुश्मन के ड्रोन्स को हमले से पहले ही पहचानने, ट्रैक करने और तबाह करने के लिए प्रभावी सिस्टम विकसित कर रही हैं। इसी दिशा में भारत का लेटेस्ट और बड़ा कदम है स्वदेशी ड्रोन किलर भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।

24 जुलाई को भारतीय सेना के सामने हुआ प्रदर्शन

भारतीय सेना ने 24 जुलाई को भार्गवास्त्र के प्रदर्शन को देखा। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, वीकल-माउंटेड काउंटर-स्वाम ड्रोन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से हथियारबंद ड्रोन्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन और इंडिपेंडेंट ड्रोन झुंडों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे मेक-II कार्यक्रम के तहत सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

10 किमी दूर से पहचान और सेंसर सिस्टम

भार्गवास्त्र एक उन्नत C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर से जुड़ा हुआ है। इसमें पहचान और ट्रैकिंग के लिए त्रिस्तरीय सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बड़े UAVs को 10 किलोमीटर तक की दूरी पर और छोटे ड्रोन्स को कम दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर दिन और रात दोनों समय निगरानी और ट्रैकिंग के लिए हैं। इसका पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर दुश्मन के सिग्नल और ड्रोन्स को बिना खुद की लोकेशन दिए ट्रैक कर लेता है।

नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शन

SDAL की नागपुर स्थित फैसिलिटी में प्रदर्शन के दौरान, इस सिस्टम ने ड्रोन्स के एक झुंड का सफलतापूर्वक पता लगाया और उसे ट्रैक किया। सिस्टम ने रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की, अलर्ट जारी किए और लॉन्चर को टारगेट असाइन किए। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण लाइव रॉकेट फायरिंग नहीं की गई लेकिन मेक-II कार्यक्रम के तहत स्टेटस रिव्यू के हिस्से के रूप में भारतीय सेना की टीम के सामने पूरी एंगेजमेंट सीक्वेंस का प्रदर्शन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स जैमिंग से आगे: ‘हार्ड-किल’ तकनीक

पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग पर निर्भर करते हैं लेकिन भार्गवास्त्र को एक हार्ड-किल समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह उन ऑटोनॉमस ड्रोन्स के खिलाफ बेहद कारगर है जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर या जैमिंग का असर नहीं होता। यह अपने स्वदेशी रॉकेट्स और सटीक माइक्रो-मिसाइलों के लेयर्ड आर्किटेक्चर के जरिए एकल ड्रोन्स और समन्वित ड्रोन झुंडों दोनों को नष्ट कर देता है।

5,000 मीटर की ऊंचाई और रेगिस्तान में भी तैनाती योग्य

भार्गवास्त्र को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5000 मीटर तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ आसानी से इंटिग्रेट हो सकता है, जिससे भविष्य में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध अभियानों में मदद मिलेगी।

कम लागत और आर्थिक फायदा

भार्गवास्त्र का एक बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कम कीमत वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए अत्यधिक महंगी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बजाय, भार्गवास्त्र अपेक्षाकृत सस्ते रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग करता है। इससे काउंटर-ड्रोन युद्ध में खर्च में काफी कमी आती है।

भारत का वैश्विक ड्रोन हब बनने का विजन

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दे रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि हम इस देश में वैश्विक स्तर का ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने हेतु मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें देश की भविष्य की रक्षा क्षमताओं में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।