17 खिलाड़ियों को मिलेगा अर्जुन पुरुस्कार पर एक को भी खेल रत्न नहीं

खेल मंत्रालय ने मंगलवार को वर्ष 2025 के लिए किसी भी खिलाड़ी को प्रतिष्ठित ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला किया जबकि 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना।इन पुरस्कारों के लिए छह महीने पहले सिफारिश की गई थी जिनका खेल मंत्रालय ने मूल्यांकन किया और किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला लिया।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने हॉकी स्टार हार्दिक सिंह को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार के लिए नामित किया था लेकिन आखिर में वह दौड़ से बाहर हो गए। इससे पहले, 2014 में भी खेल रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया था।विश्वकप विजेता शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख, डेकाथलॉन और ऊंची कूद के एथलीट तेजस्विन शंकर और बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद उन 17 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें मंगलवार को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया।

अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों में ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती, गायत्री गोपीचंद की महिला युगल जोड़ीदार त्रीसा जॉली, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता मुक्केबाज नरेंद्र और युवा बधिर राइफल निशानेबाज धनुष श्रीकांत भी शामिल हैं।एशियाई खेल 1962 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे फुटबॉलर आई अरुमैनायगम को आजीवन उपलब्धि के लिए अर्जुन पुरस्कार दिया गया है।

इस वर्ष चयन समिति ने अर्जुन पुरस्कार के लिए 24 नामों की सिफारिश की थी, लेकिन मंत्रालय ने केवल 17 नामों को ही मंजूरी दी।पुरस्कारों की घोषणा करने में बहुत देरी हुई। खेल मंत्रालय ने योग के खिलाड़ियों को ही सम्मानित करने के उद्देश्य से पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई।

शतरंज खिलाड़ी 19 वर्षीय देशमुख विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। विदित गुजराती 2024 शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।एशियाई खेल 2023 में डेकाथलॉन में ऐतिहासिक रजत पदक और पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल करने वाले तेजस्विन शंकर ने घुटने की समस्या से जूझने के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों में एक कांस्य पदक जीता।

वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने पुरस्कारों की घोषणा में देरी की आलोचना करते हुए इसे खिलाड़ियों के प्रति अनादरपूर्ण बताया।वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 32 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिनमें से 17 पैरा-स्पोर्ट्स से थे। इस बार पैरा-स्पोर्ट्स से केवल दो नाम ही अंतिम सूची में शामिल हो पाए।

पैरा विश्व चैंपियनशिप 2024 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पैरा क्लब की थ्रोअर एकता भ्याण और पैरा विश्व कप 2024 के स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज रुद्रंश खंडेलवाल को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। हालांकि, इस सूची में किसी भी क्रिकेटर का नाम नहीं है। मोहम्मद शमी को 2023 में अर्जुन पुरस्कार दिए जाने के बाद कोई भी क्रिकेटर इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया है।

मंत्रालय ने तीन द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं के नाम घोषित किए हैं।देश का सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न में एक पदक, प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि अर्जुन पुरस्कार विजेता को 15 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।

पिछले साल खेल रत्न पुरस्कार चार खिलाड़ियों को दिया गया था। इनमें विश्व चैंपियन शतरंज खिलाड़ी डी गुकेश, पुरुष हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह, पैरा-एथलीट प्रवीण कुमार और निशानेबाज मनु भाकर शामिल थे।ये पुरस्कार परंपरागत रूप से हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में प्रदान किए जाते हैं, जो भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती भी है। लेकिन अब इसकी कोई तिथि निश्चित नहीं है।

इस वर्ष पुरस्कार चयनसमिति में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के उपाध्यक्ष गगन नारंग, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और पूर्व हॉकी खिलाड़ी एम एम सोमैया भी शामिल थे।

अर्जुन पुरस्कार: तेजस्विन शंकर (एथलेटिक्स), प्रियंका गोस्वामी (एथलेटिक्स), नरेंद्र (मुक्केबाजी), विदित गुजराती (शतरंज), दिव्या देशमुख (शतरंज), धनुष श्रीकांत (बधिर शूटिंग), राजकुमार पाल (हॉकी), सुरजीत (कबड्डी), रुद्रांश खंडेलवाल (पैरा-शूटिंग), एकता भ्याण (पैरा-एथलेटिक्स), अरविंद सिंह (रोइंग), अखिल श्योराण (शूटिंग), त्रीसा जॉली (बैडमिंटन), गायत्री गोपीचंद (बैडमिंटन), लालरेम्सियामी (हॉकी), मुहम्मद अजमल (एथलेटिक्स), पूजा (कबड्डी)।

अर्जुन पुरस्कार (जीवनपर्यंत): श्री आई अरुमैनायगम (फुटबॉल)

द्रोणाचार्य पुरस्कार: परवीर सिंह, छोटे लाल यादव, नेहा चव्हाण

द्रोणाचार्य पुरस्कार (जीवनपर्यंत): धर्मेंद्र यादव, वीरेंद्र कुमार।

BPSC TRE 4 Notification 2026: बिहार में टीचरों के 32,388 पदों पर भर्ती का रास्ता हुआ साफ, बीपीएससी ने टीआरई 4 का नोटिफिकेशन किया जारी

BPSC TRE 4 Notification 2026: बिहार में शिक्षकों के पदों पर भर्ती के लिए आंदोलनरत उम्मीदवारों को सरकार के इस फैसले से राहत मिली है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आज, मंगलवार 18 अगस्त 2026 को शिक्षक भर्ती परीक्षा 4 (TRE 4)- 2026 की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही राज्य में 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। बीपीएससी टीआरई 4 भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 01 सितंबर 2026 से शुरू हागी। इस भर्ती के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2026 है। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।

इसके साथ ही पटना आदि जगहों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राहत मिलेगी। टीआरई-4 और अन्य लंबित परीक्षाओं की मांग को लेकर छात्र कई दिनों से पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ पर बैठे हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र सत्याग्रह कर रहे हैं। छात्र नेता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के अंदर टीआरई-4 का नोटिफिकेशन जारी किया जाए, नहीं तो शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। इस बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को कहा था कि टीआरई-4 का नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा। जितनी वैकेंसी की घोषणा की थी, इस बार उससे ज्यादा पदों पर भर्ती निकलेगी।

राज्य सरकार ने भेजी थी लिस्ट

बिहार सरकार की तरफ से टीआरई-4 भर्ती के लिए कुल 32,388 शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति की अधियाचना बीपीएससी को भेजी गई थी, जिसके बाद नोटिफिकेशन का इंतजार हो रहा है। सीएम सम्राट चौधरी की तरफ से इस भर्ती में कुल पदों का ऐलान किया गया था। हालांकि अभ्यर्थियों को 40 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती की उम्मीद थी। कुल पदों के साथ इसकी भी जानकारी दी गई थी कि कौन सी क्लास के लिए कितने टीचर्स की भर्ती की जाए।

ये है कुल पदों का ब्रेकअप

कक्षा 1–5: 3,847 पद

कक्षा 6–8: 8,563 पद

कक्षा 9–10: 3,877 पद

कक्षा 11–12: 16,101पद

कुल पद : 32,388

इस भर्ती की एक खास बात यह बताई जा रही है कि एसटीईटी 2026 में शामिल होने वाले अभ्यर्थी भी अीआरई 4 के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऐसे उम्मीदवारों को आवेदन करते समय अपना एसटीईटी फॉर्म आईडी नंबर दर्ज करना होगा।

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El Nino Impact: क्या अल-नीनो बिगाड़ेगा भारत की जीडीपी का खेल? सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री ने की ये प्रेडिक्शन 

Indian Economy and El Nino: अल-नीनो को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के बीच देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी GDP ग्रोथ को लेकर राहत भरी खबर आई है। ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म सिटीग्रुप के एमडी और चीफ इकोनॉमिस्ट (इंडिया) समीरन चक्रवर्ती ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि अल-नीनो के कारण FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ में 20 से 30 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है, लेकिन गैर-ग्रामीण क्षेत्रों की मजबूत मांग इस नुकसान की भरपाई कर देगी।

सिटीग्रुप के अनुसार, बाजार में अल-नीनो का डर जितना पहले था, उसके मुकाबले अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े काफी बेहतर रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।

ग्रामीण इलाकों से मिल रहे मजबूत संकेत

अल-नीनो की आशंकाओं के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था से पॉजिटिव आंकड़े सामने आ रहे हैं। FADA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 (FY27) के दौरान देश में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 21% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान टू-व्हीलर्स की बिक्री में भी 17% का उछाल देखने को मिला है।

समीरन चक्रवर्ती ने बताया कि ‘हाई-फ्रीक्वेंसी ग्रोथ नंबरों में अल-नीनो का खौफ नहीं दिखता। इस साल अल-नीनो का असर खरीफ के बजाय रबी पर अधिक हो सकता है।’

बारिश और खाद्य महंगाई की मौजूदा स्थिति

देश में मानसून और महंगाई के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। जून में हुई कम बारिश के कारण कुल बारिश में 13% की कमी जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई और अगस्त में स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बुवाई का रकबा भी पिछले साल के लगभग बराबर ही है। सब्जियों या अनाज की कीमतों में कोई असामान्य उछाल नहीं देखा गया है। जुलाई 2026 में खाद्य महंगाई दर 5.52% पर रही।

महंगाई को लेकर असली जोखिम वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में आ सकता है, अगर उस दौरान असामान्य रूप से ज्यादा गर्मी देखने को मिलती है।

न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी से बढ़ी ग्रामीण मांग

सिटीबैंक के अर्थशास्त्री का मानना है कि पिछले दो सालों से ग्रामीण इलाकों की मांग शहरी इलाकों से बेहतर बनी हुई है। 2025 से सभी राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में दोहरे अंकों की वृद्धि हुई है।

पिछले 6-7 सालों में लेबर के मुकाबले कंपनियों का पलड़ा भारी था, लेकिन लेबर कानूनों के तहत हुए एकमुश्त वेज एडजस्टमेंट ने आम लोगों के हाथों में पैसा पहुंचाया है, जिससे मांग में तेजी आई है।

सरकारी प्रोत्साहन और क्रेडिट ग्रोथ का मिला सहारा

भारत में घरेलू मांग को बढ़ाने में पिछले साल दिए गए राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहन की बड़ी भूमिका रही है। इनकम टैक्स में छूट, जीएसटी दरों में कटौती और ब्याज दरों में कटौती जैसे कदमों ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाई।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक देश के सभी शेड्यूल्ड बैंकों का कुल क्रेडिट ₹225.87 लाख करोड़ पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 19% अधिक है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में FMCG कंपनियों की बिक्री में जबरदस्त वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिली है, जो मजबूत उपभोक्ता मांग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Spyker returns with 800hp C8 Preliator XXV Coupe

Spyker returns with 800hp C8 Preliator XXV Coupe
spyker c8 preliator xxv

Dutch carmaker Spyker has resurfaced with the C8 Preliator XXV Coupe, a limited-run mid-engined supercar that marks the start of a new chapter for the troubled brand. Unveiled at The Quail during Monterey Car Week, the XXV is based on the C8 Preliator that debuted in 2016 and will be limited to just 25 examples. Pricing has not been disclosed for the C8 Preliator XXV.

Spyker’s return follows its 2021 bankruptcy and a subsequent years-long legal dispute over the brand. In October 2025, co-founder Victor Muller finally reacquired the rights to the Spyker name, and Ukrainian-born cryptocurrency entrepreneur Volodymyr Nosov acquired a significant stake in the company in June 2026 to facilitate its return.

Spyker C8 Preliator XXV powertrain and performance

Built on an aluminium space frame chassis with hand-formed exterior panels, the C8 Preliator XXV is powered by an Audi-sourced 4.0-litre twin-turbo petrol V8 that belts out 800hp and 1,000Nm of torque, and revs to 8,000rpm. Power is sent to the rear wheels via a 6-speed manual gearbox, 0-100kph comes up in a claimed 2.7 seconds, and the top speed is rated in excess of 349kph.

Spyker C8 Preliator XXV exterior design

The C8 Preliator XXV’s design continues Spyker’s long-running aviation aesthetic, with propeller-inspired alloy wheels, air ducts, flowing lines, fighter-jet-esque afterburner tail-lamps, and a central roof intake. Other notable styling cues include sleek headlamps with ‘XXV’ DRL signatures, a split grille, a sizable front splitter, a panoramic glass roof, and badging behind the front wheel arches that displays the production number.

The example displayed at The Quail was finished in Quail Green with rose gold accenting on the grille, front splitter, ORVM stalks, air intakes, wheels, rear diffuser, roof, and more.

Spyker C8 Preliator XXV interior

Inside, the C8 Preliator XXV features a refreshingly analogue milled dashboard beset with gauges and physical controls, instead of a barrage of screens. The turbine-like AC vents further the aviation inspiration, and the entire interior is trimmed in an orange-brown leather Spyker calls Tuscan Saddle. In fact, such is the attention to detail in the C8 Preliator XXV, that all the screw heads in the cabin are aligned by hand to face the same direction, and the chassis number is stamped into the space frame.

Ahead of the driver sits a three-spoke flat-bottomed steering wheel, which houses lots of dials, rocker switches, and buttons, along with individual stalks for the left and right indicators. The green-accented instrument cluster is very traditional in look too, though it’s worth noting that Spyker has included a heads-up display as the only digital interface in the C8 Preliator XXV. At the bottom of the dashboard lies a gear lever with an exposed shift linkage, which looks very cool.

What’s next for Spyker?

The revived Spyker says the C8 Preliator XXV is the first step in a larger comeback for the carmaker. Spyker is currently mulling a return to motorsport, specifically GT3-level endurance racing, and is also expected to resume the long-delayed development (owing to financial hardships) of the D8 Peking-to-Paris, a super SUV first previewed at the 2006 Geneva Motor Show.

टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के मारने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने ऋषभ पंत

भारतीय विकेटकीपर ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के मारने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। यह कारनामा उन्होंने गॉल टेस्ट में मेजबान श्रीलंका के खिलाफ किया। उनसे ज्यादा छक्के सिर्फ बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम ने लगाए हैं।

पंत ने अपने 51वें मैच में 100 छक्के लगाने का रिकॉर्ड बनाया। इस तरह से वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम मैच में 100 छक्के जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स ने अपने 82वें टेस्ट में यह मुकाम हासिल किया था।

पंत से पहले स्टोक्स (138 छक्के), न्यूजीलैंड के ब्रेंडन मैकुलम (107 छक्के) और ऑस्ट्रेलिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट (100 छक्के) ने टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने की विशिष्ट उपलब्धि हासिल की थी।

मैच शुरू होने से पहले पंत के नाम पर 97 छक्के दर्ज थे। उन्होंने पहली पारी में क्रिस गेल के 98 छक्कों के रिकॉर्ड की बराबरी की थी।भारतीय बल्लेबाजों में वीरेंद्र सहवाग और रोहित शर्मा दोनों 91 छक्कों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं।

ऋषभ पंत ने भारत को दूसरी पारी में पहुंचाया 194 रनों तक

ऋषभ पंत के आतिशी अर्धशतक के कारण भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में दूसरी पारी में 10 विकेटों के नुकसान पर 193 रन बना लिए। भारत पहली पारी के आधार पर मेजबान श्रीलंका से 178 रन आगे था। इस कारण अब श्रीलंका को जीत के लिए 372 रन बनाने होंगे।

आज सुबह भारत की दूसरी पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही जब यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले अशिता की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद केएल राहुल और देवदत्त पड्डीकल के बीच 80 रनों की साझेदारी हुई लेकिन गिल और राहुल के जाने के बाद टीम ने संभलकर खेला। पड्डीकल भी अपने पचास रन नहीं बना पाए और 44 रनों पर आउट हो गए।

इसके बाद क्रीज पर आए ऋषभ पंत ने टेस्ट में चिरपरिचित अंदाज में बल्लेबाजी की । उन्होंने 69 गेंदों में 66 रन बनाए और एक छक्का ऐसा मारा कि गॉल स्टेडियम के बाहर गेंद जाकर गिरी। हालांकि दूसरे छोर से विकेटों का पतन बदस्तूर जारी रहा और भारत 193 रन बना पाया। श्रीलंका को यह मैच जीतने के लिए 372 रन बनाने होंगे।

सबसे अनुभवी बल्लेबाज के बिना श्रीलंका को पीछा करना होगा 372 रनों का लक्ष्य

INDvsSL श्रीलंका के सबसे अनुभवी बल्लेबाज जिन्होंने टीम को गॉल में साल 2015 में भारत के खिलाफ जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी वह मौजूदा गॉल टेस्ट से बाहर हो चुके हैं। दिनेश चंदीमल ने आज चौथे दिन के चौथे ओवर में राहुल के एक शॉट को रोकने के चक्कर में अपनी गर्दन और कंधे चोटिल कर लिये।

हालांकि श्रीलंका के लिए खबर बहुत बुरी से सिर्फ बुरी है और उनको 10 नहीं बल्कि 11 बल्लेबाजों के साथ खेलना होगा। गर्दन और कंधे की चोट के कारण श्रीलंका टीम को कनकशन सबस्टीट्यूट मिल गया है। उनकी जगह टीम के लिए पसींदू सूर्यबंदारा खेलेंगे जो अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ खेले थे।

हालांकि सबसे अनुभवी बल्लेबाज  दिनेश चंदीमल के ना होने से श्रीलंका खुश नहीं होगी भले ही उन्होंने पहली पारी में सिर्फ 15 गेंदों में 4 रन ही क्यों ना बनाए हों। पसींदू सूर्यबंदारा ने अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ मिली अच्छी शुरुआत को भुना नहीं पाए थे और दूसरी पारी में फ्लॉप रहे थे। पहली पारी में उन्होंने 35 रन बनाे थे और दूसरी पारी में सिर्फ 4 रन बना पाए थे।उनके आने से श्रीलंका को कोई फायदा भी नहीं हुआ क्योंकि दूसरी पारी में वह बिना खाता खोले मानव सुथार की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए।

गौरतलब है कि 36 वर्षीय दिनेश चंदीमल अपने सौंवे टेस्ट खेलने के करीब हैं। अब तक उन्होंने अपने करियर में 92 टेस्ट मैच खेलकर 6500 रन बनाए हैं। उनका औसत 43 का है जिसमने 16 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं।

पंत के आतिशी अर्धशतक की बदौलत भारत पहुंचा 194 रनों तक, श्रीलंका को जीत के लिए 372 रनों का लक्ष्य

ऋषभ पंत के आतिशी अर्धशतक के कारण भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में दूसरी पारी में 10 विकेटों के नुकसान पर 193 रन बना लिए। भारत पहली पारी के आधार पर मेजबान श्रीलंका से 178 रन आगे था। इस कारण अब श्रीलंका को जीत के लिए 372 रन बनाने होंगे।

आज सुबह भारत की दूसरी पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही जब यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले अशिता की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद केएल राहुल और देवदत्त पड्डीकल के बीच 80 रनों की साझेदारी हुई लेकिन गिल और राहुल के जाने के बाद टीम ने संभलकर खेला। पड्डीकल भी अपने पचास रन नहीं बना पाए और 44 रनों पर आउट हो गए।

इसके बाद क्रीज पर आए ऋषभ पंत ने टेस्ट में चिरपरिचित अंदाज में बल्लेबाजी की । उन्होंने 69 गेंदों में 66 रन बनाए और एक छक्का ऐसा मारा कि गॉल स्टेडियम के बाहर गेंद जाकर गिरी। हालांकि दूसरे छोर से विकेटों का पतन बदस्तूर जारी रहा और भारत 193 रन बना पाया। श्रीलंका को यह मैच जीतने के लिए 372 रन बनाने होंगे।

Porsche reveals a one-off 911 Slantnose

Porsche reveals a one-off 911 Slantnose
Porsche 911 Slantnose revealed

Porsche revealed a one-off 911 Slantnose, also known as the Flachbau, at the 2026 Monterey Car Week. It’s mechanically based on a 991.2-generation 911 GT2 RS with the Weissach Package from 2018, while the design has been inspired by the 1978 Porsche 935 Le Mans race car called ‘Moby Dick’. The brand claims teams from Weissach and Manthey, alongside its own in-house design studio, motorsport division and the Sonderwunsch (‘special request’ in German) department, took three years to complete this project.

  • Gets staggered headlamps, a custom rear wing and unique detailing
  • Loses rear seats, infotainment & audio systems and sound-deadening
  • Weighs 31.6kg less due to aggressive weight-saving measures
  • Claimed top speed is 340kph

Porsche 911 Slantnose exterior

Features a custom Manthey Kit and some elements inspired by the 911 GT3 R rennsport

Porsche 911 Slantnose front fascia

The silhouette of this Porsche 911 GT2 RS is understandably different due to its Slantnose conversion. The front fascia sports new, staggered LED headlamps that look sleek– the low-beam, high-beam and DRL elements are stacked above one another. These are integrated into the black U-shaped portion around the bonnet, which extends to right above the lowered front fenders. The latter has specially designed vents to prevent the build-up of air pressure in the wheel arches, claims Porsche.

Porsche 911 Slantnose front quarter

The custom Manthey Kit brings along a redesigned front bumper with small canards on the sides, a new underbody structure, plus a different front splitter and rear diffuser. While the front alloy wheels are of a conventional design, the carbon-fibre aero discs used for the rear units help reduce drag, according to Porsche. The Slantnose gets a large rear wing with S-shaped mounts inspired by the 911 GT3 R rennsport, allowing three manually adjustable positions. At the car’s top speed, Porsche claims that this wing generates 554kg of downforce.

Porsche 911 Slantnose rear quarter

The one-off Slantnose is painted in the brand’s Grand Prix White colour, but gets contrasting black accents and a black finish on the bonnet and roof. Adding more contrast are the black brake callipers and exposed carbon-fibre trim. There are ‘Flachbau RS’ lettering and decals, too, while the Nordschleife is depicted on the rear wing. Since the shape of the front fenders had been altered, the fuel-filler flap and its underlying mechanism also has to be modified, says Porsche. “Our aim was to reinterpret the iconic look of the 935 without compromising on safety, technology or road legality”, Alexander Fabig, Vice President Product Offering & Individualisation at Porsche, said.

Porsche 911 Slantnose interior

The brand has stripped this interior bare of most of its convenience features

Porsche 911 Slantnose door sill

Opening the doors will reveal ‘Flachbau RS’ branding on the sills and seat headrests. There’s an outline of the Nordschleife drawn behind the front seats, along with a small gold-coloured plaque mentioning ‘Sonderwunsch’ and ‘Factory One-Off 2026 | Flachbau RS’ on the dashboard. Meanwhile, the interior continues to use the red Alcantara, black leather and exposed carbon-fibre trim originally available in the customer’s 911 GT2 RS.

Saving weight has been another important goal with this one-off Slantnose. To that effect, Porsche says it has removed the rear seats and individual wires, instead opting for simpler protective sheaths to cover newly laid wiring. Generous use of carbon fibre aside, the brand has removed the donor car’s infotainment system, replacing it with a leather-trimmed storage compartment.

Porsche 911 Slantnose dashboard

Other features to have been deleted include the audio system, floor coverings in the cabin and luggage space, and sound-deadening materials throughout the car. The end result of all these weight-saving measures means that this Slantnose is 31.6kg lighter than the donor vehicle it’s based on.

Porsche 911 Slantnose powertrain and other details

This one-off model retains the donor vehicle’s powertrain setup

Powering this one-off Slantnose is the same 3.8-litre twin-turbocharged six-cylinder engine found in the 991.2-generation 911 GT2 RS. This unit churns out 700hp and 750Nm of torque, and it drives the rear wheels via a 7-speed dual-clutch transmission. The claimed top speed of this one-off 911 is 340kph.

Porsche 911 Slantnose front

Porsche says that it built three test vehicles for validating data, while aerodynamic calculations being carried out using Computational Fluid Dynamics (CFD) to further optimise the overall design. These prototypes were subjected to multiple wind-tunnel tests, real-world road tests, and 50 laps on the Nurburgring-Nordschleife.

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खराब ग्राफिक्स और अजीब कहानी का उड़ाया मजाक, अब उसी फिल्म को देखने उमड़ा दर्शकों का हुजूम

किसी फिल्म की खराब क्वालिटी की चर्चा आमतौर पर उसके लिए नुकसानदायक मानी जाती है, लेकिन चीन की एक एनिमेटेड फिल्म के साथ कहानी पूरी तरह उलट गई। ‘Niu Lai’ (The Cow Is Coming) को सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर ट्रोल किया। फिल्म के कमजोर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों और उलझी कहानी को लेकर ऐसे-ऐसे कमेंट किए गए कि यह देखते ही देखते चर्चा में आ गई। शुरुआत में फिल्म को दर्शकों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिला और इसकी कमाई भी बेहद कम रही। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए फिल्म के क्लिप्स ने लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी।

अब कई दर्शक फिल्म को इसलिए देखने पहुंच रहे हैं ताकि खुद तय कर सकें कि यह वाकई इतनी खराब है या नहीं। हैरानी की बात यह है कि जिस फिल्म को लोग मजाक का विषय बना रहे थे, वही अब बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों को टक्कर दे रही है। फिल्म की यह अजीबोगरीब सफलता सोशल मीडिया के दौर में चर्चा का नया उदाहरण बन गई है।

पहले 10 दिन में सिर्फ 300 टिकट बिके

5 अगस्त को रिलीज हुई इस 86 मिनट की फिल्म की शुरुआत बेहद कमजोर रही। पहले 10 दिनों में इसकी कमाई सिर्फ 7,700 युआन यानी करीब ₹1.04 लाख रही। देशभर में 300 से भी कम लोगों ने फिल्म का टिकट खरीदा था।  फिल्म के प्रमोशन पर भी खास ध्यान नहीं दिया गया था। न कोई बड़ा प्रचार अभियान हुआ, न ट्रेलर जारी किया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई फिल्म की ‘बदसूरती’

फिर फिल्म के कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर पहुंच गए। इसके बाद लोगों ने इसके खराब कंप्यूटर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों, कमजोर आवाज और उलझी कहानी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। किसी ने इसे खराब स्टूडेंट प्रोजेक्ट जैसा बताया, तो किसी ने इसे AI से भी खराब कह दिया। देखते ही देखते फिल्म को ‘2026 की सबसे खराब फिल्म’ जैसे टैग मिलने लगे। लेकिन यहीं से कहानी पलट गई।

मजाक बना फिल्म के लिए फ्री प्रमोशन

सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग ने फिल्म को खत्म करने के बजाय लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी। लोग अब यह देखने के लिए टिकट खरीदने लगे कि आखिर फिल्म वास्तव में इतनी खराब है या नहीं। यानी जिस चीज को फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा था, वही उसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन गई।

₹1 लाख से सीधे ₹20 करोड़ के पार

चीनी टिकटिंग प्लेटफॉर्म Maoyan के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म अब 14.9 मिलियन युआन यानी करीब 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। खास बात यह है कि फिल्म अब चीन के बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों के साथ नजर आ रही है। यानी जिस फिल्म को शुरुआत में कोई पूछ भी नहीं रहा था, वह अचानक चर्चा में आ गई।

सिर्फ दो लोगों ने 5 साल में बनाई फिल्म

‘Niu Lai’ की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे सिर्फ दो लोगों ने करीब पांच साल में तैयार किया। शिन युमेंग और सुन लिफांग को फिल्म के लेखक, निर्देशक, निर्माता और वॉइस आर्टिस्ट के तौर पर क्रेडिट दिया गया है। फिल्म का इकलौता चर्चित प्रमोशनल पोस्टर भी काफी खूबसूरत है, जिसमें पारंपरिक इंक-वॉश आर्ट नजर आती है। लेकिन पोस्टर और फिल्म के अंदर दिखने वाले साधारण एनिमेशन में जमीन-आसमान का अंतर है।

रिलीज करने से पहले भी मिली थी चेतावनी

फिल्म के वितरक के बारे में बताया गया कि उन्हें इसकी क्वालिटी को लेकर फिल्म रिलीज न करने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म रिलीज की, क्योंकि वह निर्देशक के दोस्त थे। आज वही फैसला फिल्म के लिए फायदे का सौदा साबित होता नजर आ रहा है।

AI के दौर में कुछ लोगों को पसंद आई ‘कच्ची’ कला

हालांकि हर कोई फिल्म की आलोचना से सहमत नहीं है। कुछ दर्शकों को इसका साधारण और हाथ से तैयार किया गया अंदाज पसंद आया। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब AI कुछ ही सेकंड में शानदार विजुअल तैयार कर सकता है, इस फिल्म की कमियां भी उसे अलग बनाती हैं। लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी खासियत शायद यही है कि लोग इसे अच्छा मानकर नहीं, बल्कि खराब होने की बात सुनकर देखने पहुंच रहे हैं। कभी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनी उसकी खराब क्वालिटी, आज उसी की सबसे बड़ी ताकत और चर्चा की वजह बन गई है।

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Tata Group News: एन चंद्रशेखरन ने आखिर टाटा संस के चेयरमैन पद से क्यों दिया इस्तीफा? जानिए टाटा समूह के अंदर की पूरी कहानी

Tata Group News: एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफे के ऐलान ने चौंका दिया था। उन्होंने 12 अगस्त को यह ऐलान किया था। तब से उनके इस्तीफे की वजहों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा सुनने को मिली है। लेकिन, सच यह है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई एक वजह नहीं थी। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि तीसरी बार टाटा संस के चेयरमैन पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका असर समूह से जुड़े ब़ड़े फैसलों पर पड़ रहा था।

गवर्नेंस और कैपिटल ऐलोकेशन को लेकर चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद था। इसके अलावा होल्डिंग कंपनी यानी टाटा संस के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर भी बहस लगातार बढ़ रही थी। ये सभी मसले अगस्त के दूसरे हफ्ते में ऐसे लेवल पर पहुंच गए, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया।

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने बयान में कई बातें कही थीं। उन्होंने जुलाई 2025 टाटा ट्रस्ट्स के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्हें तीसरी बार टाटा संस का चैयरमैन पांच साल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन, फरवरी 2026 में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एक डायरेक्टर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। फरवरी से लेकर अब तक यह मसला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।

जुलाई 2025 के प्रस्ताव में एक दूसरी अहम बात भी शामिल थी। इसमें चंद्रशेखरन को टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने को कहा गया था। बाद में यह मसला बड़ा बन गया। स्ट्रक्चर के लिहाज से टाटा संस के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसका काफी असर चंद्रशेखरन पर पड़ा। सूत्रों ने बताया कि खासकर इस सवाल का जवाब नहीं था कि क्या आखिर में टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना होगा।

मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि 26 मई को बोर्ड की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को टाटा संस की लिस्टिंग के बारे में अपनी पोजीशन बताने को कहा था। सूत्रों ने बताया कि इस बारे में चंद्रशेखरन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। टाटा संस की लिस्टिंग का मसला काफी अहम है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के लिए नियम और शर्तें काफी बदल जाएंगी। खासकर टाटा ट्रस्ट्स को मिले विशेष अधिकार खत्म हो जाएंगे।

टाटा ट्रस्ट्स अभी टाटा संस से जुड़े सभी बड़े फैसले लेता है। यहां तक कि टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी का एप्रूवल जरूरी है। टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही टाटा ट्रस्ट्स के ये अधिकार खत्म हो जाएंगे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

RBI ने टाटा संस को अपर लेयर वाली NBC की कैटेगरी में रखा है। इस कैटेगरी के एनबीएफसी को सख्त रेगुलेशंस का पालन करना पड़ता है। हालांकि, आरबीआई ने 6 अगस्त को कहा था कि टाटा संस का एनबीएफसी की अपर लेयर कैटेगरी में बने रहने में उसके डीरजिस्ट्रेशन के अप्लिकेशन के नतीजों का कोई हाथ नहीं है। अभी इस अप्लिकेशन पर विचार जारी है।

टाइम्स ऑफ इंडियान ने 17 अगस्त को खबर दी कि चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों ने सरकार को अलग-अलग अपनी पोजीशन के बारे में बताया। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा का अभाव था। टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बारे में फैसला होना है। बतौर चेयरमैन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है।

18 अगस्त को 2 बजे टीसीएस का शेयर 1.25 फीसदी गिरकर 2,284 रुपये पर चल रहा था। टाइटन का शेयर 0.38 फीसदी गिरकर 5049 रुपये पर चल रहा था। टाटा मोटर्स सीवी का शेयर 0.68 फीसदी गिरकर 467 रुपये पर चल रहा था।