सबसे तेज आधा दर्जन मैच हारने वाले पहले भारतीय T-20I कप्तान बने श्रेयस अय्यर

भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान नियुक्त किए गए श्रेयस अय्यर की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम को आयरलैंड से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और फिर वह पहले मैच के बारिश के कारण रद्द होने के बाद इंग्लैंड से टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला 0-4 से हार गई।

इस कारण वह सबसे तेज गति से बतौर कप्तान पहले  आधा दर्जन मैच हारने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैँ।  इससे पहले बतौर कप्तान आधा दर्जन मैच हारने के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली को 16-16 मैच लगे थे और महेंद्र सिंह धोनी और सूर्याकुमार यादव को 33-33 मैच लगे थे। इसमें सबसे हैरत की बात यह है कि श्रेयस अय्यर को अभी भी एक टॉस हारना बाकी है।

अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें मैच में हार के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘अपेक्षाओं से निपटना वास्तव में मुश्किल नहीं है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे कप्तानी करने का मौका मिला है। प्रत्येक व्यक्ति भारतीय टीम की कप्तानी करने और शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी संभालने का सपना देखता है। निश्चित रूप से मुझे दबाव पसंद है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए दबाव में अच्छा प्रदर्शन करना, इन मैच से सीखना निश्चित रूप से मुझे आगे चलकर बेहतर बनाएगा। मेरी अभी की सोच यही है। मैं इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा हूं कि लोग इस श्रृंखला के बारे में क्या सोचेंगे, क्योंकि अच्छा और बुरा इस खेल का अभिन्न अंग है।’’अय्यर ने कहा कि टीम के लिए सकारात्मक मानसिकता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि यही आगे सफलता की कुंजी होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में मुझे इस बात को लेकर बेहद सकारात्मक रहना होगा कि मैं विशेषकर विदेश की परिस्थितियों में अपने खिलाड़ियों के खेल में निखार लाने में कैसे मदद कर सकता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि हमें ऑस्ट्रेलिया (अगला टी20 विश्व कप) खेलना है। उससे पहले हमें कई अन्य स्थानों पर खेलना है। हमारा लक्ष्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जो इन परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर सके। भविष्य के लिए हमारी यही योजना है।’’

भारत को शनिवार को पांचवें और अंतिम टी20 मैच में 56 रन से हार का सामना करना पड़ा और अय्यर ने स्वीकार किया कि उनकी टीम इस दौरे के दौरान परिस्थितियों के अनुकूल जल्दी से ढल नहीं पाई।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक मैदान से दूसरे मैदान पर जाते रहे और हमें लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम जितनी जल्दी परिस्थितियों से सामंजस्य बिठा सकते थे, वैसा करने में नाकाम रहे। यह पहली चुनौती थी। दूसरी चुनौती उनका हर विभाग में हमसे बेहतर प्रदर्शन करना रहा। इसलिए मुझे लगता है कि इन सब कारण से हमें हार मिली।’’

Badrinath Dham Donation Case: राम मंदिर के बाद अब बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी का आरोप, SIT ने दान अधिकारी प्रमोद नौटियाल को किया गिरफ्तार

Badrinath Dham Donation Case: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद अब बद्रीनाथ धाम से भी ऐसा ही घटना सामने आई है। दरअसल, सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा और दान से जुड़े अधिकारी प्रमोद नौटियाल को कथित दान फंड में गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है।

नौटियाल को बीती रात करीब 8 बजे देहरादून से गिरफ्तार किया गया और बाद में चल रही जांच के सिलसिले में बद्रीनाथ लाया गया।

SIT ने कहा कि नौटियाल पर इस मामले में गंभीर आरोप हैं और संकेत दिया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

बता दें कि यह गिरफ्तारी देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले की जांच में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मंदिर में दान की गिनती में गड़बड़ी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक आंतरिक जांच में 2 जुलाई, 2026 को ‘थाली’ में चढ़ाए गए दान की गिनती के दौरान गड़बड़ी पाई गई। जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई और इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।

अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के दान-गणना क्षेत्र से नकदी और चढ़ावे की वस्तुएं चोरी हो गईं। शुरुआती रिपोर्टों में इस मामले को श्रद्धालुओं के दान और कीमती सामान की कथित चोरी या गबन के रूप में बताया गया है।

इस मामले में शिकायत के बाद पहले विभागीय जांच हुई, जिसके बाद पुलिस ने आपराधिक कार्यवाही शुरू की।

मंदिर की जांच से आगे बढ़ा मामला

अब यह जांच मंदिर प्रशासन की आंतरिक जांच से आगे बढ़ चुकी है और पुलिस तथा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इसे संभाल रही हैं। गिरफ्तारी से पहले, नौटियाल ने कथित तौर पर FIR और अपने सस्पेंशन, दोनों को ही हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

बता दें कि SIT द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद, जांच अधिकारी कथित गड़बड़ियों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

SIT ने यह भी संकेत दिया है कि जांच जारी है और अगर सबूतों से अन्य लोगों की संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

मामले का बड़ा महत्व

यह मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि बद्रीनाथ धाम देश के सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है। नतीजतन, भक्तों के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को न केवल एक वित्तीय मामला, बल्कि जन-विश्वास का मुद्दा भी माना जा रहा है। इस विवाद के बाद कई धार्मिक नेताओं और जन-प्रतिनिधियों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों ने भी कहा है कि जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी है

डोनेशन फंड में कथित गड़बड़ी की चल रही जांच में SIT द्वारा प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी सबसे नया कदम है। जांच करने वाले अधिकारी मंदिर में चढ़ावे के लेन-देन, डोनेशन गिनने की प्रक्रिया और इस मामले से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।

SIT का कहना है कि जांच जारी है और संकेत दिया है कि जैसे-जैसे और सबूत मिलेंगे, आगे और कार्रवाई की जा सकती है।

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Quant Mutual Fund ने खरीद लिए इस कंपनी के 700000 शेयर, 6% बढ़ गई चमक

Ethos Share Price: लग्जरी घड़ियां और ज्वैलरी बेचने वाली एथोस के शेयर आज रॉकेट बन गए। इसके शेयरों में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब क्वांट म्यूचुअल फंड ने इसके 7 लाख शेयर खरीदे हैं। क्वांट म्यूचुअल फंड ने एक कारोबारी दिन पहले 10 जुलाई को इसके 7 लाख शेयर खरीदे थे। अब आज इसके शेयर 6% से अधिक उछल पड़े। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाते हु्ए मुनाफावसूली की तो भाव नरम पड़े लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 5.51% की बढ़त के साथ ₹2624.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 6.47% उछलकर ₹2,647.85 तक पहुंच गया था।

Quant Mutual Fund ने किस भाव पर बेचे Ethos के शेयर

क्वांट म्यूचुअल फंड ने 10 जुलाई 2026 को हर शेयर ₹2500 के भाव पर एथोस के शेयर खरीदे। फंड हाउस ने ये शेयर यूके की जुपिटर फंड मैनेजमेंट ने दो स्कीमों से खरीदे हैं। जुपिटर ग्लोबल फंड-जुपिटर इंडिया सेलेक्ट ने ₹55.84 करोड़ में 2,23,387 शेयर और जुपिटर इंडिया फंड ने ₹124.8 करोड़ में 4,99,239 शेयर बेचे। मार्च 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार जुपिटर इंडिया फंड की एथोस में 2% हिस्सेदारी (5.34 लाख शेयर) थी। मार्च 2026 तक कंपनी में 13 म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 20.16% थी।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल?

एथोस के शेयरों की करीब चार साल पहले 30 मई 2022 को एंट्री हुई थी। इसके ₹402 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशकों को ₹878 के भाव पर शेयर जारी हुई थी। मार्केट में लिस्टिंग के बाद इसका शेयर 6 जून 2022 को टूटकर ₹711.60 के भाव पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर पर शेयर संभला और यहां से रिकवर होकर यह 24 सितंबर 2024 को ₹3,514.95 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है।

अब पिछले एक साल में बात करें तो एथोस के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 26 नवंबर 2026 को बीएसई पर यह ₹3244.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 3 ही महीने में यह 40.79% टूटकर 16 मार्च 2026 को ₹1,921.00 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टेस्ट में बैजबॉल खत्म, मक्कलम अब सिर्फ इंग्लैंड के सफदे गेंद के कोच

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने ब्रेंडन मक्कलम को इंग्लैंड की पुरुष टेस्ट टीम के मुख्य कोच पद से हटा दिया है। हालांकि वह सीमित ओवर के क्रिकेट में इंग्लैंड के कोच बने रहेंगे। यह फैसल ऐसे समय आया है जब महज तीन महीने पहले ही ऐशेज में ऑस्ट्रेलिया से 4-1 की हार के बावजूद मक्कलम को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया गया था।

मक्कलम ने अपने बयान में कहा, “बेशक मैं आगे यह भूमिका नहीं निभा पाने से बेहद दुखी हूं, लेकिन मैं इस फै़सले का सम्मान करता हूं। अब मेरा पूरा ध्यान वनडे और टी-20 टीमों को आगे बढ़ाने और इंग्लैंड क्रिकेट को लगातार बेहतर बनाने पर रहेगा। मैं टेस्ट टीम की सफलता की कामना करता हूं।”

ईसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड गोल्ड ने मार्च में कहा था कि मक्कलम “काफ़ी सीख सकते हैं” और ऑस्ट्रेलिया में हुई ग़लतियों से आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने तब यह भी कहा था कि उन्हें हटाना “सबसे आसान विकल्प” होगा। लेकिन केवल तीन टेस्ट बाद न्यूजीलैंड से घरेलू मैदान पर 2-1 की हार के बाद, ईसीबी ने वही निर्णय किया।

गोल्ड ने कहा, “ब्रेंडन ने इंग्लैंड पुरुष टेस्ट टीम में नई जान फूंक दी थी। उनके कार्यकाल में हमें कई यादगार जीत मिलीं और इस भूमिका में उनके योगदान के लिए हम उनके आभारी हैं। अब हमें लगता है कि अगले साल ऐशेज़ जीतने के लक्ष्य को देखते हुए टेस्ट टीम के लिए बदलाव का यही सही समय है।”

उल्लेखनीय है कि मक्कलम ने 2022 में इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान संभाली थी और कप्तान बेन स्टोक्स के साथ मिलकर अपने पहले 11 मैचों में 10 जीत दिलाई थी। उस दौरान इंग्लैंड ने अभूतपूर्व आक्रामक अंदाज में क्रिकेट खेली। हालांकि इसके बाद टीम के नतीजे लगातार खराब होते गए और उनके कार्यकाल में इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया या भारत के खिलाफ एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत सका।

टेस्ट कोच के रूप में मक्कलम का रिकॉर्ड 27 जीत, दो ड्रॉ और 20 हार का रहा। इनमें से सात हार इंग्लैंड के पिछले नौ टेस्ट मैचों में आईं। उनका कार्यकाल अपने देश न्यूजीलैंड के खिलाफ़ घरेलू सीरीज से शुरू हुआ था, जिसमें इंग्लैंड ने 2022 में 3-0 से जीत दर्ज की थी। वहीं पिछले महीने उसी टीम से घरेलू सीरीज हारने के साथ उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। इसी सीरीज़ के बाद बेन स्टोक्स ने अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

Bank Holiday: इस सप्ताह 4 दिन बंद रहेंगे बैंक! तुरंत निपटा लें जरूरी काम, SBI-HDFC और PNB समेत सभी बैंकों की छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखें

Bank Holiday: अगर आप इस हफ्ते बैंक ब्रांच जाकर कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें। 13 से 19 जुलाई 2026 के बीच SBI, HDFC Bank, PNB, Bank of Baroda, ICICI Bank, Axis Bank समेत सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कई बैंक अलग-अलग राज्यों में चार दिन बंद रहेंगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, जुलाई 2026 में राष्ट्रीय, धार्मिक और क्षेत्रीय त्योहारों के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार तथा सभी रविवार को भी बैंक बंद रहेंगे।

इस हफ्ते बैंक कब-कब बंद रहेंगे?

  • 16 जुलाई (गुरुवार): भुवनेश्वर (ओडिशा), देहरादून (उत्तराखंड) और इंफाल (मणिपुर) में रथ यात्रा/कांग (रथजात्रा)/हरेला के अवसर पर सभी बैंक बंद रहेंगे।
  • 17 जुलाई (शुक्रवार): शिलांग (मेघालय) में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के कारण बैंक बंद रहेंगे।
  • 18 जुलाई (शनिवार): गंगटोक (सिक्किम) में द्रुकपा त्शे-जी (Drukpa Tshe-zi) पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेगा।
  • 19 जुलाई (रविवार): इस दिन साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक बंद रहेंगे।

(आपको बता दें कि ये छुट्टियां सभी राज्यों में लागू नहीं हैं। संबंधित राज्यों में ही बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। जबकि रविवार को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।)

जुलाई 2026 में कुल 12 दिन की छुट्टियां

RBI ने जुलाई 2026 के महीने में कुल 12 दिन बैंकों के बंद रहने की घोषणा की है। इसमें महीने के सभी रविवार, दूसरे और चौथे शनिवार भी शामिल हैं।

जुलाई के बचे हुए दिनों में वीकेंड की छुट्टियां:-

19 जुलाई: रविवार (पूरे भारत में बंद)

25 जुलाई: चौथा शनिवार (पूरे भारत में बंद)

26 जुलाई: रविवार (पूरे भारत में बंद)

इसके अलावा 22 जुलाई को खारची पूजा के चलते अगरतला में भी बैंक बंद रहेंगे।

ऑनलाइन बैंकिंग रहेगी चालू

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को डिजिटल सेवाओं में कोई परेशानी नहीं होगी। छुट्टियों के दौरान भी ऑनलाइन सेवाएं चालू रहेंगी।

बंद होने पर कैसे होंगे आपके काम?

भले ही अगले हफ्ते बैंकों के शटर गिरे रहेंगे। लेकिन ग्राहकों को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में आपकी बैंकिंग से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं 24×7 चालू रहेंगी:-

ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग: आप घर बैठे अपने फोन से Google Pay, PhonePe, Paytm या बैंक के ऑफिशियल ऐप के ज़रिए UPI ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।

फंड ट्रांसफर: पैसे भेजने या मंगाने के लिए नेट बैंकिंग के ज़रिए IMPS, NEFT और RTGS की सुविधाएं बिना किसी रुकावट के काम करेंगी।

ATM सेवाएं: कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम मशीनें खुली रहेंगी।

अन्य डिजिटल काम: क्रेडिट/डेबिट कार्ड के लिए अप्लाई करना, चेकबुक रिक्वेस्ट डालना या लॉकर के लिए आवेदन करने जैसे काम भी ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए किए जा सकेंगे।

(नोट: कभी-कभी बैंकों के शेड्यूल्ड मेंटेनेंस (Scheduled Maintenance) के कारण कुछ समय के लिए ऑनलाइन सेवाएं बाधित हो सकती हैं, जिसकी जानकारी बैंक पहले ही दे देते हैं।)

Shadowfax Technologies में हो सकती है ब्लॉक डील, ₹700 करोड़ के शेयर बेचने की तैयारी में Flipkart

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रही है। इस हिस्सेदारी की कीमत 700-750 करोड़ रुपये हो सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने मनीकंट्रोल को बताया, “फ्लिपकार्ट जुलाई महीने के आखिर में एक बड़ी ब्लॉक डील के तहत शैडोफैक्स में शेयर बेच सकती है। शैडोफैक्स के शेयरहोल्डर्स के​ लिए 6 महीने का लॉक-इन पीरियड जुलाई के आखिर में खत्म हो रहा है।”

शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO ₹1,907.27 करोड़ का था। फ्लिपकार्ट ने शैडोफैक्स के IPO में ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के तहत कुछ शेयर बेचे और शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी घटाकर लगभग 8 प्रतिशत कर ली। उसके पास अभी भी लगभग 4.26 करोड़ शेयर हैं। शैडोफैक्स के शेयर की कीमत फिलहाल 230 रुपये के आसपास ट्रेड कर रही है।

फ्लिपकार्ट ने पहली बार 2019 में शैडोफैक्स में निवेश किया था और बाद के फंडिंग राउंड में भी इस लॉजिस्टिक्स कंपनी को सपोर्ट किया। आज शैडोफैक्स, फ्लिपकार्ट के मुख्य लास्ट-माइल डिलीवरी पार्टनर्स में से एक है। यह हाइपरलोकल और ई-कॉमर्स शिपमेंट संभालती है, खासकर पीक डिमांड के समय जब कंपनी का अपना लॉजिस्टिक्स नेटवर्क दबाव में होता है। साथ ही यह उन कई कारोबारों के लिए मुख्य डिलीवरी पार्टनर के तौर पर भी काम करती है, जो पूरी तरह से थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स पर निर्भर हैं।

पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच सकती फ्लिपकार्ट

सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि फ्लिपकार्ट एक बड़ी ब्लॉक डील के तहत 700-750 करोड़ रुपये के शेयर बेच सकती है। यह डील आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है। हालांकि फ्लिपकार्ट, शैडोफैक्स में अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच सकती। मौजूदा 4.26 करोड़ शेयरों में से, फ्लिपकार्ट के लगभग 3.37 करोड़ शेयर बेचने की संभावना है। अगर यह डील हो जाती है, तो फिर फ्लिपकार्ट के पास शैडोफैक्स में लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। बाकी बचे 89 लाख शेयर फ्लिपकार्ट को अपने पास रखने होंगे क्योंकि वे ‘मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन’ का हिस्सा हैं।

मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन वह न्यूनतम हिस्सेदारी है, SEBI किसी IPO के बाद लॉक-इन रखने के लिए जरूरी मानता है। ऐसा इसलिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रमोटर्स का कंपनी में लंबे समय तक हित बना रहे और पब्लिक इनवेस्टर्स को भरोसा दिलाया जा सके कि मुख्य शेयरधारक लिस्टिंग के तुरंत बाद बाहर नहीं निकल सकते। इन शेयरों पर एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड लागू होता है, जो कि आमतौर पर 18 महीने होता है। इस दौरान इन्हें बेचा नहीं जा सकता।

Share Market Crash: IT Sector मे रौनक लेकिन Sensex में 700 अंकों की गिरावट, 4 वजहों से Nifty लाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

International Physics Olympiad: इंटरनेशनल फिकक्स ओलंपियाड में बजा भारत का डंका, 8 साल बाद झटके 5 गोल्ड मेडल

International Physics Olympiad: भारत के नौनिहालों ने पूरी दुनिया में एक बार फिर नाम रोशन किया है। इस बार मंच 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड का था, जहां अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से भारत के 5 छात्रों ने स्वर्ण पदक झटके। खास बात यह है कि भारत को यह उपलबधि 2018 के बाद मिली है। इस ओलंपियाड प्रतियोगिता में भारत के इन छात्रों ने अपनी बुद्धिमानी का लोहा मनवाया है। इन छात्रों ने अपने जबरदस्त प्रदर्शन से न सिर्फ गोल्ड मेडल झटका, बल्कि अपने देश को मेडल टैली में सबसे ऊपर पहुंचा दिया।

यह एक वैश्विक प्रतियोगिता थी जिसमें 85 देशों के 381 छात्रों ने हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता कोलंबिया में 5 से 12 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। भारत ने इस बार चीन, रूस, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे दिग्गज देशों के साथ शीर्ष स्थान पर भी कब्जा जमाया है। फिजिक्स ओलंपियाड के मंच पर डंका बजाने का यह भारत के इतिहास में दूसरा मौका है। इससे पहले साल 2018 में भारत ने यह कमाल किया था, जब पूरी टीम के सभी पांचों सदस्य एक साथ गोल्ड मेडल लेकर स्वदेश लौटे थे।

देश के 5 ‘गोल्डन बॉयज’

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराने वाले पांचों छात्र भारत के अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें मुंबई के श्रेष्ठ सुरैया, पुणे के कनिष्ठ जैन, इंदौर के ऋद्धेश अनंत बेंदले, दिल्ली के ऋषित गर्ग और अहमदाबाद के स्वरित जोशी शामिल हैं। इन छात्रों ने दुनियाभर से आए 85 देशों के 381 दिग्गज छात्रों के बीच अपनी जगह बनाई। प्रतियोगिता में कुल 51 गोल्ड, 80 सिल्वर और 97 ब्रॉन्ज मेडल बांटे गए थे।

5 घंटे की मैराथन प्रतियोगिता

भारतीय छात्रों को जीत के ताज तक पहुंचने के लिए 5 घंटे का लंबा थ्योरी एग्जाम देना पड़ा। इसमें फिजिक्स के बेहद पेचीदा सवाल पूछे गए थे। इसमें पैरामैग्नेटिक कूलिंग की थर्मोडायनामिक्स, चाय के कप के अंदर रोशनी के रिफ्लेक्शन से बनने वाले पैटर्न (कॉस्टिक्स और कस्प्स), ओजोन का फोटोआयोनाइजेशन और इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन जोड़ों के मूवमेंट जैसे मुश्किल विषय शामिल थे। सिर्फ थ्योरी ही नहीं, भारतीय दल ने प्रैक्टिकल के मोर्चे पर भी तगड़ा स्कोर हासिल किया। 5 घंटे तक चले मैराथन प्रैक्टिकल (एक्सपेरिमेंटल) एग्जाम में भी भारतीय टीम ने अपना पूरा दम दिखाया।

काम आई होमी भाभा सेंटर की ट्रेनिंग

इस जीत के पीछे छात्रों की मेहनत के साथ-साथ उनके मेंटर्स का भी बड़ा हाथ रहा. भारतीय दल की अगुवाई मुंबई के होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBSCE) के अन्वेष मजूमदार और सेंट जेवियर्स कॉलेज की लीना जोशी कर रही थीं। वहीं कोलकाता के IISER से आनंद दासगुप्ता और रत्नागिरी के गोगटे-जोगलेकर कॉलेज की निशा केलकर साइंटिफिक ऑब्जर्वर के रूप में टीम के साथ थे। इन सभी ने मुंबई के होमी भाभा सेंटर में कई दिनों तक बेहद कठिन और स्पेशल ट्रेनिंग ली थी, जिसका नतीजा पूरी दुनिया के सामने है।

AIIMS Paramedical Result 2026: एम्स के रिजल्ट पोर्टल पर जारी हुआ नतीजों का पीडीएफ, यहां बताए स्टेप्स की मदद से चेक करें अपना रोल नंबर

ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

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Trading Plan: क्या US-ईरान तनाव और तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद निफ्टी 24000 और बैंक निफ्टी 57300 के स्तर को बनाए रख पाएगा?

Trading Plan : पिछले दो सेशन में देखने को मिली अच्छी रिकवरी के बावजूद,निफ्टी लॉन्ग बेयरिश कैंडलस्टिक के दायरे में और पिछले बुधवार को बने बेयरिश गैप के नीचे ही बना रहा। इसलिए,जब तक इंडेक्स बेयरिश गैप को भर नहीं लेता और उसके ऊपर टिक नहीं जाता और साथ ही US-ईरान तनाव कम होने से तेल की कीमतें नीचे नहीं आ जातीं, तब तक मौजूदा कंसोलिडेशन और सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (रेंज-बाउंड ट्रेड) के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी के लिए 24,000 पर त्तकाल सपोर्ट और उसके बाद 23,800 पर अगला बड़ा सपोर्ट देखने को मिल सकता है। अगर निफ्टी 24,400 के लेवल से ऊपर जाकर मजबूती दिखाता है तो अपट्रेंड के फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

उधर बैंक निफ्टी में और तेजी की पुष्टि के लिए 58,600-58,700 के जोन से ऊपर लगातार क्लोजिंग की जरूरत है। जानकारों के मुताबिक,तब तक कंसोलिडेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसमें 57,500-57,300 के जोन में तत्काल सपोर्ट और उसके बाद 56,500 पर अगला अहम सपोर्ट दिख रहा है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

एक्सिस सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड राजेश पालविया का कहना है कि पिछले हफ्ते निफ्टी में काफी उतार-चढ़ाव रहा,क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटने से जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ गया और ब्रेंट क्रूड की कीमत $80 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। उतार-चढ़ाव के बावजूद,हफ्ते के आखिर में इंडेक्स 64 अंक गिरकर बंद हुआ। वीकली चार्ट पर,इंडेक्स ने एक छोटी ‘बेयरिश कैंडल’ बनाई, जिसके दोनों तरफ लंबी शैडो (परछाई) थीं। यह मार्केट में तेज उतार-चढ़ाव और दुविधा की स्थिति को दिखाता है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो पिछले हफ्ते के 24,521 के हाई से ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 24,750 की ओर जा सकता है। यह लेवल फरवरी-अप्रैल 2026 की गिरावट के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के बराबर है। इसके बाद 24,846 पर स्थित 200-डे SMA अगला अहम लेवल होगा। नीचे की तरफ, 24,000 एक अहम सपोर्ट लेवल बना हुआ है। इस लेवल के नीचे जाने पर 23,817-23,650 का बुलिश गैप जोन दोबारा टेस्ट हो सकता है।

वीकली RSI अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना हुआ है,जो दिखाता है कि मार्केट का ओवरऑल रुख पॉजिटिव है। हालांकि,अमेरिका-ईरान विवाद और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव ही आने वाले समय में मार्केट की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे।

अहम रेजिस्टेंस: 24,250, 24,400

अहम सपोर्ट: 24,100, 23,900

स्ट्रेटेजी: 24,080 के आसपास निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें, स्टॉप-लॉस 23,950 रखें और 24,250–24,350 के जोन का टारगेट सेट करें।

Market cues : बाजार में रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी रहने की उम्मीद, निफ्टी के लिए 24000 पर तत्काल सपोर्ट

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

राजेश पालविया का कहना है कि वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने दोनों तरफ शैडो वाली एक छोटी बुलिश कैंडल बनाई है,जो मार्केट में अनिश्चितता को दिखाती है। 58,500 और 57,000 के बीच चल रहा कंसोलिडेशन यह बताता है कि इंडेक्स अपनी अगली चाल के लिए किसी मजबूत ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। तकनीकी तौर पर अगर इंडेक्स 58,500 के ऊपर बना रहता है, तो खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 58,700–60,000 के जोन की ओर जा सकता है। इसके उलट,अगर यह 57,500 के नीचे जाता है तो प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 57,000–56,500 के सपोर्ट एरिया की ओर गिर सकता है।

तकनीकी तौर पर अगर बैंक निफ्टी 58,500 के ऊपर बना रहता है तो खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 58,700–60,000 के जोन की ओर जा सकता है। इसके उलट,अगर यह 57,500 के नीचे जाता है तो प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 57,000–56,500 के सपोर्ट एरिया की ओर गिर सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 58,350, 58,550

अहम सपोर्ट: 57,800, 57,500

रणनीति: 57,850 के आसपास बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,57,600 पर स्टॉप-लॉस और 58,200–58,400 के जोन का टारगेट रखें।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दिल्ली में 25% की बंपर छूट के साथ सरकारी फ्लैट खरीदने का मौका! DDA ने लास्ट डेट आगे बढ़ाई, घर की कीमत समेत स्कीम की फुल डिटेल जानिए

DDA Karmayogi Awaas Yojana: अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं और देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आपके लिए बड़ी राहत दी है। डीडीए ने लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स की वजह से ‘कर्मयोगी आवास योजना’ 2025 के तहत रेडी-टू-मूव फ्लैट्स की बुकिंग की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है।

इस योजना के तहत पात्र आवेदकों को फ्लैट की कीमत पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जा रही है। योजना के अंतर्गत फ्लैट नरेला के पॉकेट-6, पॉकेट-9 और पॉकेट-13, सेक्टर A1-A4 में उपलब्ध हैं। इनका आवंटन फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS) यानी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

अब इच्छुक सेवारत एवं रिटायर सरकारी कर्मचारी 31 जुलाई 2026 तक इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। डीडीए के अनुसार, योजना को मिल रही बेहतर प्रतिक्रिया को देखते हुए आवेदन अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

25 फीसदी मिल रहा डिस्काउंट

इस योजना के तहत पात्र सरकारी कर्मचारियों को रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। ये फ्लैट दिल्ली के नरेला स्थित पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1 से A4 में उपलब्ध हैं। डीडीए ने स्पष्ट किया है कि फ्लैटों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ यानी ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में इच्छुक आवेदकों को समय रहते आवेदन और बुकिंग कराने की सलाह दी गई है।

योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को रियायती दरों पर तैयार आवास उपलब्ध कराना है। इच्छुक आवेदक डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट और E-सर्विस के पोर्टल पर जाकर योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। फिर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

किन्हें मिलेगा स्कीम का लाभ?

यह योजना केवल केंद्र और राज्य सरकार के सेवारत एवं रिटायर कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB), स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थानों और सरकारी विश्वविद्यालयों के नियमित कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लिए है। संविदा, अस्थायी या एडहॉक कर्मचारी इसके लिए पात्र नहीं हैं।

फ्लैट की कीमत कितनी है?

25% छूट के बाद अनुमानित शुरुआती कीमतें इस प्रकार हैं:-

1 BHK: लगभग ₹33.5 लाख से शुरू

2 BHK: लगभग ₹75.5 लाख से

3 BHK: लगभग ₹1.06 करोड़ से शुरू

(फ्लैट रेडी-टू-मूव हैं। इनके साथ पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।)

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक आवेदक DDA के आवास पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध फ्लैट का चयन कर बुकिंग राशि जमा करनी होगी। चूंकि आवंटन FCFS आधार पर होगा, इसलिए पसंदीदा फ्लैट पहले बुक करने वाले को मिलेगा।

स्कीम की बड़ी बातें

  • आवेदन की आखिरी तारीख अब 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई है।
  • 25% विशेष छूट केवल सेवारत और रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
  • रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट उपलब्ध है।
  • स्थान: नरेला, पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1-A4।
  • फ्लैट का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ के आधार पर होगा।