Bank of Baroda Share Price: नोमुरा ने जून तिमाही के नतीजों के बाद घटाया टारगेट प्राइस, शेयर गिरा

बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के शेयर में 28 जुलाई को गिरावट दिखी। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने बीओबी के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। उसने बैंक के जून तिमाही के नतीजों के बाद ऐसा किया है। उसने टारगेट प्राइस को 300 रुपये से घटाकर 280 रुपये कर दिया है। हालांकि, शेयर पर उसने अपनी रेटिंग ‘न्यूट्रल’ बनाए रखी है।

नोमुरा ने कहा है, “बीओबी के जून तिमाही के नतीजे कमजोर रहे। प्रोविजनिंग से पहले बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 6480 करोड़ रुपये रहा। यह साल दर साल आधार पर 13 फीसदी ज्यादा है। लेकिन तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 19 फीसदी कम है। यह अनुमान से 4 फीसदी कम है।”

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “जून तिमाही में बैंक की फीस से इनकम कम रही। इसका असर मुनाफे पर पड़ा। हालाांकि, कोर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) तिमाही दर तिमाही आधार पर स्टेबल रहा।” हालांकि, रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बैंक को एनएमसी ग्रुप के साथ 56.8 अरब रुपये के सेटलमेंट के असर को बर्दाश्त करना पड़ा।

जून तिमाही में ऑपरेटिंग प्रदर्शन कमजोर रहने के बावजूद क्रेडिट कॉस्ट कम रहने से प्रॉफिट को सपोर्ट मिला। बैंक की ग्रॉस लोन ग्रोथ साल दर साल आधार पर 18 फीसदी रही। हालांकि, तिमाही दर तिमाही आधार पर एडवान्सेज में 1 फीसदी गिरावट आई। डिपॉजिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 14 फीसदी रही। लेकिन, CASA रेशियो तिमाही दर तिमाही आधार पर 117 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 37.7 फीसदी पर आ गया।

नोमुरा ने बैंक ऑफ बड़ौदा के FY27 के प्रति शेयर अर्निंग्स के अनुमान को 13 फीसदी तक घटाया है। इसकी बड़ी वजह एनएमसी सेटलमेंट है। हालांकि, उसने FY28 के प्रति शेयर अर्निंग्स अनुमान को अपरिवर्तित रखा है। बीओबी का शेयर 25 जुलाई को 2.05 फीसदी गिरकर 239 रुपये पर बंद हुआ। 2026 में यह शेयर 20 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

28 जुलाई को शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक कारोबार के अंतिम कुछ मिनटों में हरे से लाल निशान में आ गए। सेंसेक्स 0.05 फीसदी यानी 46 अंक गिरकर 76,796 पर बंद हुआ। निफ्टी 0.02 फीसदी यानी 7 अंक गिरकर 23,990 पर क्लोज हुआ।

पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं! जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कितना सख्‍त है नया कानून

jitendra singh on paper leak in parliament

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। ALSO READ: “छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

उन्होंने कहा कि धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सजा की यही अवधि कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपए तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सजा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है… अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

 

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने उसमें भी समय सीमा तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी हो या विशेष कार्य बल। ALSO READ: कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

 

यूपीए राज में भी लीक होते थे पेपर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले भी पेपर लिक होते थे। 2009, 2011, 2012 और 2013 में पेपर लीक हुए। यह सिर्फ एक राज्य तक सिमित नहीं। पीएम ने जल्द न्याय का फैसला किया है। नए बिल में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है।  

Suzlon Q1 Results: सुजलॉन एनर्जी का मुनाफा गिरा, मार्जिन भी घटा; 7% टूटा स्टॉक

Suzlon Q1 Results: विंड एनर्जी कंपनी सुजलॉन एनर्जी के जून तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6% घटकर ₹305 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹324 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹3,829 करोड़ पहुंच गया।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन कैसा रहा?

सुजलॉन का EBITDA ₹595 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹599 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 19% से घटकर 15.5% पर आ गया। यानी कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई पर दबाव दिखा।

किस कारोबार से कितनी कमाई

रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार का रेवेन्यू ₹2,494 करोड़ से बढ़कर ₹3,174 करोड़ हो गया। रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज का रेवेन्यू ₹632 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹584 करोड़ था। हालांकि, फाउंड्री और फोर्जिंग कारोबार का रेवेन्यू ₹146 करोड़ से घटकर ₹126 करोड़ रह गया।

ऑर्डर बुक और डिलीवरी

जून तिमाही में सुजलॉन ने 506 मेगावाट की डिलीवरी की। यह पिछले साल से 14% ज्यादा है। वहीं, 269 मेगावाट की कमिशनिंग हुई, जो सालाना आधार पर दोगुने से भी ज्यादा है। तिमाही के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक 6.1 गीगावाट (GW) रही। इसमें 84% ऑर्डर सरकारी कंपनियों और कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर से मिले हैं।

सुजलॉन के शेयरों का हाल

कमजोर नतीजों के बाद मंगलवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर करीब 7% गिरकर 50 रुपये से नीचे आ गया। दोपहर 2.16 बजे तक सुजलॉन का स्टॉक 49.69 % गिरकर 49.69 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के साथ 2026 में अब तक स्टॉक का रिटर्न भी निगेटिव हो गया है। पिछले 1 साल में स्टॉक में 17.81% की गिरावट आई है।

सुजलॉन का बिजनेस क्या है

सुजलॉन एनर्जी विंड एनर्जी सेक्टर की कंपनी है। यह विंड टरबाइन बनाती है और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सप्लाई, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस की सेवाएं देती है। कंपनी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट और फाउंड्री-फोर्जिंग कारोबार में भी मौजूद है। इसका कारोबार भारत के साथ कई विदेशी बाजारों में भी फैला हुआ है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SpaceX आया रिकॉर्ड हाई से 50% नीचे, इस कारण कमजोर हो रहा Elon Musk का शेयर

Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।

क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?

स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।

हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अब आगे कैसी रहेगी चाल?

निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।

SpaceX Shares: तीन दिनों में ₹56 लाख करोड़ स्वाहा, Elon Musk की स्पेसएक्स तीसरे दिन धड़ाम, 16% की भारी गिरावट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Commonwealth Games भारोत्तोलन में सिर्फ एक दिन में भारत जीता 3 मेडल

commonwealth games

ग्लासगो में खेले जा रहे 2026 में यह साबित हो गया कि भारत भारोत्तोलन में सिर्फ मीराबाई चानू पर निर्भर नहीं है। भारत ने सोमवार को ही भारोत्तोलन में 3 मेडल जीते। भारोत्तोलन के महिला 53 किग्रा वर्ग में एशियाई चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता ज्ञानेश्वरी ने लगातार बनते-बिगड़ते रिकॉर्ड के बीच सोमवार को रजत पदक जीता।

छत्तीसगढ़ के भोंडिया गांव की 23 साल की ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो समेत कुल 199 किलो वजन उठाया। नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला ने राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर 206 किलो वजन उठाते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 93 किलो और क्लीन एंड जर्क में 113 किलो वजन उठाया।

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग के फ़ाइनल में कुल 330 किग्रा (149 किग्रा स्नैच 181 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वज़न उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उनका 149 किग्रा का स्नैच कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड था। वल्लुरी अजय बाबू ने 145 किग्रा से शुरुआत की, भारतीय अपने दूसरे प्रयास में 149 किग्रा वजन उठाने में असफल रहे, लेकिन अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने सफलतापूर्वक उतना ही वजन उठा लिया।

अजय बाबू ने अपने पिता वल्लुरी श्रीनिवास राव के नक्शेकदम पर चलते हुए यह उपलब्धि हासिल की; उनके पिता ने भी 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था। अजय बाबू स्वर्ण पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गए। वह मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद से एक किग्रा पीछे रहे। एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किग्रा (147 184) वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड के क्रिस मरे ने 325 किग्रा (148 177) वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

बिंद्यारानी देवी ने जीता कांस्य पदक

भारत की बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कुल 199 किग्रा वज़न उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया और कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दूसरा मेडल जीता।बर्मिंघम 2022 में सिल्वर मेडल जीतने वाली बिंद्यारानी ने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का किया। यह भारत का भारोत्तोलन में पांचवां पदक है।

कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट बिंद्यारानी देवी ने स्नैच राउंड में 87 किग्रा के बेस्ट लिफ़्ट के साथ चौथे स्थान पर थीं। उन्होंने 83किग्रा से शुरुआत की, फिर इसे बेहतर करते हुए 85किग्रा और अपने तीसरे प्रयास में 87किग्रा वज़न उठाया। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।नाइजीरिया की राफियातु फोलाशाडे लावल ने 229 किग्रा (103 126) वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि कनाडा की एन सोफी टैस्चेरो ने 215 किग्रा (94 121) वजन उठाकर रजत जीता।

EXPLAINER: गलवान के 6 साल बाद फिर खुलेगा नाथू ला दर्रा, भारत-चीन की कूटनीति में क्यों बेहद खास है ‘सिल्क रूट’ की यह खिड़की?

India China Nathu La Trade Explainer: भारत और चीन के रिश्तों का मिजाज समझना हो, तो हिमालय की 14,000 फीट की ऊंचाई पर जमे बर्फ से ढके नाथू ला दर्रे की ओर रुख करना काफी होगा। गलवान घाटी के खूनी संघर्ष और कोविड-19 की मार के चलते पिछले 6 वर्षों से ठप पड़ा सीमा व्यापार 1 अगस्त 2026 से एक बार फिर पटरी पर लौटने जा रहा है।

अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच सिक्किम के नाथू ला, हिमाचल के शिपकी ला और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से व्यापार बहाली पर सहमति बनी थी। उसी कड़ी में अब नाथू ला के कपाट भी फिर से खोले जा रहे हैं।

सालाना कई अरब डॉलर के भारत-चीन व्यापार के समुद्री कारोबार के आगे नाथू ला से होने वाली खरीद-फरोख्त भले ही ऊंट के मुंह में जीरा लगे, लेकिन भू-राजनीतिक बिसात पर इसका रणनीतिक और कूटनीतिक वजन कहीं ज्यादा है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों नाथू ला सिर्फ एक ट्रेड रूट नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों का असली थर्मामीटर है?

जब डाक के थैलों से बची रही रिश्तों की सांस

ऐतिहासिक सिल्क रूट की एक अहम कड़ी रहा नाथू ला प्राचीन काल से ही तिब्बत की चुम्बी घाटी को सिक्किम के गंगटोक, कालिम्पोंग और कोलकाता के बंदरगाहों से जोड़ता आया है। 20वीं सदी की शुरुआत में भारत-चीन के कुल जमीनी व्यापार का करीब 80 फीसदी हिस्सा इसी दर्रे के जरिए गुजरता था। 1962 के युद्ध ने इस सदियों पुरानी व्यापारिक डोर को एक झटके में काट दिया और नाथू ला अगले 44 सालों के लिए पूरी तरह सील हो गया।

वैसे युद्ध के बाद भले ही व्यापार और बंदूकें खामोश हो गईं, पर कूटनीतिक धागा नहीं टूटा। हर गुरुवार की सुबह 14,000 फीट की बर्फीली हवाओं के बीच एक भारतीय डाकिया कटीले तारों तक जाता और चीनी डाकिये से डाक का थैला बदलता। बिना एक-दूसरे की बोली समझे, महज 3 मिनट में अंजाम दी जाने वाली यह मूक रस्म दशकों तक दोनों देशों के बीच संपर्क का अकेला जीवित जरिया बनी रही।

2006 का री-ओपनिंग मॉडल: नई सदी में पुराने जमाने का सौदा

साल 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ऐतिहासिक बीजिंग यात्रा के बाद बनी सहमति के आधार पर 6 जुलाई 2006 को नाथू ला को व्यापार के लिए दोबारा खोला गया। उसकी तस्वीरें भले ही भव्य थीं, लेकिन जिस व्यापार की इजाजत दी गई, वह गुजरे जमाने की याद दिलाता था:

चीन की ओर से भारत आने वाली चीजें (15 प्रोडक्ट्स): याक की पूंछ, बकरी-भेड़ की खाल, कच्चा रेशम, ऊन, बोरेक्स, नमक और घोड़े।

भारत से जाने वाला सामान (29 प्रोडक्ट्स): चावल, आटा, चाय, तंबाकू, कंबल और तांबे के बर्तन।

दौर बदल चुका था, लेकिन सामान की लिस्ट 19वीं सदी वाली ही रही। नतीजतन, नाथू ला कभी कोई बड़ा आर्थिक कॉरिडोर नहीं बन सका और सीमित दायरे में ही सिमटकर रह गया।

अरबों डॉलर के कारोबार के आगे कितना बड़ा है नाथू ला?

अगर आप आंकड़ों के चश्मे से देखेंगे, तो नाथू ला का व्यापार दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए शून्य नजर आएगा:

2016 (पीक टाइम): कुल व्यापार रिकॉर्ड ₹82.68 करोड़ तक पहुंचा।

2017 (डोकलाम विवाद): तनातनी का असर सीधा दिखा और व्यापार सिमटकर महज ₹8.86 करोड़ रह गया।

2019 (आखिरी सीजन): महामारी से ठीक पहले यहां ₹43.51 करोड़ की आवाजाही दर्ज हुई।

व्यापारिक घाटे की कड़वी हकीकत

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ कुल माल व्यापार $151.1 अरब रहा, जिसमें भारत का व्यापार घाटा $100 अरब के पार चला गया। ऐसे में नाथू ला के कुछ करोड़ का कारोबार इस विशाल खाई को नहीं पाट सकता। हां, सिक्किम के उन 600 से अधिक स्थानीय लाइसेंसधारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए यह रोजी-रोटी का मुख्य जरिया जरूर है, जिनका सामान 2020 में अचानक सीमा बंद होने से वहीं फंसा रह गया था।

बॉडर ट्रेड से परे क्यों यह ‘डिप्लोमैटिक इंडिकेटर’ है?

कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नाथू ला में माल का आना-जाना उतना मायने नहीं रखता, जितना कि गेट का खुलना और बंद होना। नाथू ला का हालिया इतिहास बताता है कि जब-जब दिल्ली और बीजिंग की दूरी घटी है, यह गेट खुला है और जब भी सरहद पर गोलियों या डंडों की गूंज हुई, ताला सबसे पहले इसी दरवाजे पर लगा।

2020 के गलवान हादसे के बाद रिश्ते सबसे गहरे अविश्वास के दौर में पहुंच गए थे। अब सीधी उड़ानों, वीजा, मानसरोवर यात्रा और नाथू ला व्यापार की एक साथ बहाली इस बात का साफ इशारा है कि दोनों मुल्क अब तनाव को नियंत्रण में रखकर रिश्तों को ‘न्यू नॉर्मल’ की तरफ ले जाना चाहते हैं।

1 अगस्त से नाथू ला का खुल जाना न तो रातों-रात सीमा विवाद सुलझाएगा और न ही चीनी सामान की निर्भरता को खत्म करेगा। लेकिन, वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में यह बहाली दर्शाती है कि दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी संवाद और सह अस्तित्व की टेबल पर बने रहने के इच्छुक हैं। इस बर्फीले दर्रे पर व्यापार की आहट, कूटनीति के मोर्चे पर एक पॉजिटिव संकेत है।

5 लगातार मेडन ओवर में 5 पाकिस्तानी टेस्ट विकेट, कैरिबियाई गेंदबाज का कहर (Video)

वेस्टइंडीज के जस्टिन ग्रीव्स ने सोमवार को एक ऐसा कारनामा कर दिया जिससे उनका नाम टेस्ट इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो गया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट में लगातार 5 मेडन ओवर डालकर 5 विकेट निकाले। टेस्ट क्रिकेट में ऐसा करने वाले वह पहले गेंदबाज बन गए। उनके इस स्पेल से वेस्टइंडीज को दूसरे दिन पाकिस्तान पर पहली पारी के आधार पर 29 रनों की बढ़त मिल गई जबकि पाक टीम 3 विकेट खोकर 199 रनों पर औसत स्थिति पर थी।

कुल 11 ओवर में उन्होंने 6 मेडन ओवर डालकर सिर्फ 27 रन दिए और 5 पाकिस्तानी बल्लेबाज को चलता किया। पाकिस्तान के कप्तान शान मसूद 88 रन बनाकर नाबाद थे और उन्होंने अपना शतक पूरा किया।पाकिस्तान ने अपने छह विकेट 38 रन पर गंवा दिए। इस तरह से शान मसूद (109) के सातवें टेस्ट शतक के बावजूद पाकिस्तान की टीम अपनी पहली पारी में 282 रन पर आउट हो गई।

इसके बाद पाकिस्तान के गेंदबाजों ने भी कहर बरपाया और पहली पारी में 311 रन बनाने वाले वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को नहीं चलने दिया। पाकिस्तान की तरफ से मोहम्मद अब्बास ने अभी तक 14 रन देकर तीन विकेट लिए हैं जबकि खुर्रम शहजाद ने दो विकेट हासिल किए हैं।वेस्टइंडीज की तरफ से तेगनारायण चंद्रपाल ही कुछ संघर्ष कर पाए। उन्होंने 35 रन बनाए।

बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

controversial statement

भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा है बृहस्पति का साथ पाने का सबसे अच्छा दिन, जानें इस दिन का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में गुरु को माता-पिता ही नहीं भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा का हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व और उत्सवों में विशेष स्थान है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन वेदों के संकलनकर्ता और महाभारत के लेखक महर्षि वेद व्यास की जयंती है। गुरु पूर्णिमा का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जितना अहम है, उतना ही ज्योतिषीय रूप से भी है।

ज्योतिष में गुरु पूर्णिमा का महत्व

ज्योतिषशास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, भाग्य, संतान, धर्म, विवेक और उच्च पद-प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त करना बहुत सुलभ होता है। जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, नीच या पीड़ित स्थिति में होता है, उनके लिए इस दिन किए जाने वाले उपाय और मंत्र-जाप विशेष लाभ प्रदान करते हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन प्रार्थना, ध्यान और आभार व्यक्त करने से, कोई भी अपनी कुंडली में बृहस्पति को मजबूत कर सकता है। ज्ञान, करियर, रिश्तों और आध्यात्मिक विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर कर सकता है।

पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

गुरु पूर्णिमा में पूर्णिमा तिथि का स्वामी स्वयं चंद्रमा है, जो व्यक्ति के मन, भावनाओं और मानसिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। इस दिन गुरु (ज्ञान) और चंद्रमा (मन) की ऊर्जा मिलकर साधक को आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि, एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करती है। इसलिए, गुरु पूर्णिमा को साल की सबसे आध्यात्मिक रूप से चार्ज पूर्णिमा में से एक माना जाता है, क्योंकि यह बताती है:

  • जीवन के अर्थ के बारे में सोचें और समझने की कोशिश करें।
  • नकारात्मक भावनाओं को छोड़ें, अपनी समझ को विकसित करें।
  • आभार जताएं और विनम्रता रखें।
  • भगवान की चेतना से जुड़ें।

कुंडली में गुरु की स्थिति का परिणाम

ज्योतिष के हिसाब से, बृहस्पति विस्तार, उम्मीद, अच्छाई और खुशहाली का ग्रह है। जन्म कुंडली में बृहस्पति मजबूत होने पर जातक को पढ़ाई में सफलता, रुपये-पैसे में स्थिरता, समाज में सम्मान, परिवार के रिश्ते अच्छे रहते हैं, आध्यात्मिक रुझान, समझदारी पूर्ण और सही फैसला लेते हैं। इसके उलट, कमजोर बृहस्पति अनिश्चितता, देर से सफलता, गाइडेंस की कमी, पढ़ाई में दिक्कतें या गलत फैसला लेने का कारण बन सकता है।

इसलिए जताएं अपने गुरु का आभार

हर इंसान का जीवन सिर्फ़ ग्रहों की चाल से ही नहीं, बल्कि कर्म से भी प्रभावित होती है। बृहस्पति इंसान को समझदारी और अनुशासन से उस कर्म को समझने और बदलने में मदद करता है। गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता, टीचर, आध्यात्मिक गुरु या गुरुओं को सम्मान देना, बृहस्पति का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु का आशीर्वाद कर्म की रुकावटों को दूर करने और तरक्की और कामयाबी की संभावनाओं को आकर्षित करने में मदद करता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 के उपाय

1. गुरु पूजा : अपने गुरु या गुरुओं को पीली मिठाई या फूल, फल या एक छोटी सी प्रार्थना दें। अगर आपके गुरु शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, तो उनकी शिक्षाओं के प्रति आभार जताएं।

2. बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें : गुरु मंत्रों का जाप करने से बृहस्पति की एनर्जी बढ़ती है। इन मंत्रों का जाप करें :

ॐ गुरवे नमः, ॐ बृं बृहस्पतये नमः। इन मंत्रों का 108 बार श्रद्धा से जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

3. ध्यान करें : गुरु पूर्णिमा के दिन, ध्यान मन को शांत करने और ध्यान लगाने में मदद करता है। कुछ पल का मौन और सोच-विचार खुद के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी है।

4. दान करें : बृहस्पति उदारता का ग्रह है। खाना, किताबें, पढ़ाई के सामान, हल्दी, या पीले कपड़े दान करने या स्टूडेंट्स और टीचरों की मदद करने से भगवान का आशीर्वाद और अच्छे कर्म मिलते हैं।

5. कुछ नया सीखें : गुरु पूर्णिमा को कुछ नया सीखने के लिए या नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ दिन माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 की लकी राशियां

गुरु पूर्णिमा का सभी राशियों पर अच्छा असर पड़ता है, लेकिन बृहस्पति की प्रिय राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ता है। इनमें शामिल हैं

मेष : करियर गाइडेंस और पढ़ाई के ज्यादा मौके।

कर्क : भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।

सिंह : लीडरशिप स्किल्स और कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

धनु : बृहस्पति की राशि होने के कारण, धनु राशि वालों को नई उम्मीद, आध्यात्मिक तरक्की और पढ़ाई में सफलता की उम्मीद करनी चाहिए।

मीन : आपके लिए ध्यान करने या कुछ क्रिएटिव करने का बहुत अच्छा समय है।

गुरु पूर्णिमा 2026: अपने कर्मों से अपना भाग्य बदलने का मौका

गुरु पूर्णिमा का दिन बड़े बदलावों का दिन होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान में किस्मत बदलने की ताकत होती है। यह पूर्णिमा लोगों को अहंकार छोड़ने, विनम्रता अपनाने, जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन लेने और धैर्य, दया, ईमानदारी और उदारता जैसे गुण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। ये गुण बृहस्पति की ऊर्जा के साथ गहराई से जुड़ते हैं और माना जाता है कि ये हमेशा रहने वाला आशीर्वाद देते हैं। गुरु पूर्णिमा 2026 सिर्फ एक पारंपरिक त्योहार ही नहीं है, बल्कि ज्ञान और आभार की ताकत की एक कॉस्मिक याद भी है जो बदलाव ला सकती है।

Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Godfrey Phillips Share Price: सिगरेट की घटती बिक्री पर हाहाकार! जून तिमाही के कमजोर नतीजे ने 8% तोड़ दिया शेयर

Godfrey Phillips Share Price: दिग्गज सिगरेट कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों को आज तगड़ा शॉक लगा। जून 2026 तिमाही के कमजोर नतीजे पर यह करीब 8% टूट गया। जून तिमाही में रेवेन्यू, मुनाफे और मार्जिन के मोर्चे पर यह फिसला तो शेयर भी फिसल गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज है कि निचले स्तर पर खरीदारी भी शेयरों को संभाल नहीं सका। फिलहाल बीएसई पर यह 7.75% की गिरावट के साथ ₹2,037.95 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.93% टूटकर ₹2,034.00 पर आ गया।

Godfrey Phillips के लिए कैसी रही जून तिमाही

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में गॉडफ्रे फिलिप्स का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 44.3% गिरकर ₹189.4 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी का बिजनेस भी नीचे आया और ऑपरेशंस से रेवेन्यू 18.9% फिसलकर ₹1,205.5 करोड़ पर आ गया। ऑपरेटिंग मोर्चे पर भी कंपनी कमजोर हुई और इसका ईबीआईटीडीए जून तिमाही में सालाना आधार पर 46.3% गिरकर ₹181.4 करोड़ और ईबीआईटीडीए मार्जिन 22.7% से 15.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी का सिगरेट वॉल्यूम सालाना आधार पर 2% और तिमाही आधार पर 3% गिर गया।

मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर धीरे-धीरे डालने के लिए एक बैलेंस्ड प्राइसिंग स्ट्रैटेजी अपनाई है। इससे पहले जनवरी में सरकार ने सिगरेट और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी किया था। वित्त मंत्रालय ने सिगरेट और बीड़ी समेत सभी तंबाकू प्रोडक्ट्स पर 40% जीएसटी लगाने का नोटिफिकेशन जारी किया था, जो 1 फरवरी 2026 से लागू हुआ। नए टैक्स स्ट्रक्चर में 28% जीएसटी शामिल है, जिसमें पहले की एक्साइज ड्यूटी और नेशनल कैलेमिटी कंटीजेंट ड्यूटी (NCCD) को मिला दिया गया है। यह दिसंबर में सेंट्रल एक्साइज (एमेंडमेंट) बिल, 2025 को सरकार की मंजूरी के बाद आया जिसने सिगरेट और तंबाकू के अन्य प्रोडक्ट्स पर अस्थायी लेवी की जगह ली।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 16 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹3,945.00 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से छह ही महीने में यह 53.54% टूटकर 23 मार्च 2026 को ₹1,832.65 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट कंपनी का मुनाफा 44% गिरा, डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।