फ्लॉप पेसर्स के बाद स्पिनर्स ने कराई भारत की वापसी, श्रीलंका ने जड़े 363 रन

INDvsSL कुलदीप यादव , रवींद्र जडेजा और मानव सुथार (दो-दो विकेट) की बेहतरीन गेंदबाजी की बदौलत भारत ने शुक्रवार को एकमात्र अभ्यास मैच के पहले दिन शुक्रवार को श्रीलंका इलेवन के 363 रन पर आठ विकेट झटक लिये।

आज यहां श्रीलंका इलेवन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। निशान मदुश्का और रविंदु रसंता की सलामी जोड़ी ने तेज शुरुआत करते हुए पहले विकेट के लिए 110 रनों की साझेदारी की। 21वें ओवर में निशान मदुश्का 65 गेंदों में (66) के रनआउट होने पर यह साझेदारी टूटी। मदुश्का ने अपनी पारी में 11 चौके और एक छक्का लगाया।

इसके बाद बल्लेबाजी करने आये संजूला सूर्याबंडारा ने रविंदु रसंता के साथ पारी को संभाला। 40वें ओवर में रवींद्र जडेजा ने संजूला सूर्याबंडारा (35) को बोल्ड कर इस साझेदारी का अंत किया। 50वें ओवर में सुथार ने रविंदु रसंता 143 गेंदों में (71) रन को आउट किया। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके और एक छक्का लगाया। पवन रत्नायके (39) को गुरनूर बराड़ ने आउट किया। अगले ही ओवर में अहान विक्रमसिंघे (31) को कुलदीप यादव ने आउट किया। अंजला बंडारा (13) रन को आउट कर कुलदीप ने अपना दूसरा विकेट लिया।

रमेश मेंडिस (32) को रवींद्र जडेजा ने आउट किया। कप्तान सोनल दिनुशा ने 72 गेंदों में पांच चौकों और एक छक्के की मदद से 52 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। मानव सुथार ने दिनुशा को पगबाधा आउट कर भारत को आठवीं सफलता दिलाई।स्टंप्स के समय श्रीलंका इलेवन ने 90 ओवरों में आठ विकेट पर 363 रन बना लिये है। केशरा नुवंता (नाबाद नौ) और दिलम सुदीरा (नाबाद एक) रन क्रीज पर मौजूद हैं।

कड़ा हुआ खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट, 5 मिनट में दौड़ने होगे 1200 मीटर

Team India

भारतीय खिलाड़ियों का फिटनेस परीक्षण पहले यो यो टेस्ट से होता था लेकिन अब रग्बी के खेल में फिटनेस जांचने का टेस्ट जिसे BRONCO कहते हैं वह अब भारतीय क्रिकेट टीम अपनाने वाली है। यह टेस्ट योयो टेस्ट से भी काफी कठिन होने वाला है।

ब्रोंको टेस्ट एक प्रशिक्षण अभ्यास है जिसमें खिलाड़ी 20 मीटर शटल रन से शुरुआत करता है, जिसके बाद 40 मीटर और 60 मीटर की दौड़ भी होती है। ये तीन रन मिलकर एक सेट बनाते हैं। गौरतलब है कि एक खिलाड़ी को ऐसे पाँच सेट करने होते हैं, जो बिना रुके कुल 1200 मीटर दौड़ के बराबर होंगे। खिलाड़ियों को यह टेस्ट छह मिनट में पूरा करना होता है।

समझा जाता है कि टीम के कुछ खिलाड़ी पहले ही बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के बेंगलुरु स्थित उत्कृष्टता केंद्र में ब्रोंको टेस्ट दे चुके हैं। ब्रोंको टेस्ट के अलावा, बीसीसीआई भारतीय टीम के सितारों के लिए फिटनेस टेस्ट के तौर पर यो-यो टेस्ट और 2 किलोमीटर का टाइम ट्रायल भी आयोजित करता है।

गौरतलब है कि ले रॉक्स जून 2025 में भारतीय टीम में स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच के रूप में शामिल हुए थे; जनवरी 2022 से मई 2023 तक टीम इंडिया में भी वह इसी पद पर थे और दक्षिण अफ्रीका के कोचिंग स्टाफ का भी हिस्सा रहे। इसके अलावा, उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स और पंजाब किंग्स जैसी आईपीएल टीमों में भी काम किया।

भारत के कई अनुबंधित खिलाड़ी इस टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुंचे

गौरतलब है कि भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरू किए गए ब्रोंको टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुँच चुके हैं। यह टेस्ट फिटनेस मानकों को बनाए रखने के लिए शुरू किया गया है और कोच तेज़ गेंदबाज़ों के लिए वेट ट्रेनिंग की बजाय रनिंग ड्रिल को ज़्यादा प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं।

एक प्रतिश्ठित अंग्रेजी अखबार के सूत्र के हवाले से बताया, “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ब्रोंको टेस्ट शुरू किया गया है। भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी बेंगलुरु पहुँच चुके हैं और उन्होंने यह टेस्ट दिया है। ब्रोंको टेस्ट का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि फिटनेस मानक स्पष्ट हों।”

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

भारत की दो बेटिंया होंगी कोरिया मास्टर्स के सेमीफाइनल में आमने सामने

कोरिया मास्टर्स 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट में शनिवार को महिला एकल के सेमीफाइनल मैच में भारत की अश्मिता चालिहा और उनकी हमवतन रक्षिता श्री संतोष रामराज के बीच फाइनल में जगह बनाने के लिए भिड़ंत होगी। आज  बैडमिंटन रैंकिंग में 50वें स्थान पर मौजूद अश्मिता ने दिन का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए जापान की टॉप सीड और दुनिया की नंबर 22 खिलाड़ी हिना अकेची को एक घंटा तीन मिनट तक चले कड़े मुकाबले में 20-22, 21-15, 21-19 से हराया।

वहीं, दुनिया की नंबर 49 खिलाड़ी रक्षिता ने एक गेम हारने के बाद वापसी करते हुए अपनी ही देश की खिलाड़ी और तीसरी सीड तन्वी शर्मा (दुनिया में 30वें नंबर पर) को 61 मिनट तक चले मुकाबले में 18-21, 21-19, 21-18 से हराया। इन नतीजों का मतलब है कि दुनिया की रैंकिंग में एक-दूसरे से सिर्फ़ एक पायदान दूर अश्मिता और रक्षिता शनिवार को सेमीफ़ाइनल में आमने-सामने होंगी, जिससे महिला एकल बैडमिंटन फ़ाइनल में भारत की मौजूदगी पक्की हो गई है।

अश्मिता पिछले साल मलेशिया सुपर 100 में अकेची के खिलाफ अपना एकमात्र पिछला मुकाबला हार गई थीं और शुरुआत में एक बार फिर हारती हुई दिख रही थीं, क्योंकि जापानी शटलर ने कड़े मुकाबले वाले पहले गेम में 22-20 से जीत हासिल की थी।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने दूसरे गेम में जबरदस्त वापसी की और लगातार आठ अंक हासिल करते हुए 21-15 से जीत दर्ज की, जिससे मैच निर्णायक गेम तक पहुंच गया।तीसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन आखिर में अश्मिता ने संयम बनाए रखा। आखिरकार उन्होंने अपने तीसरे मैच पॉइंट को भुनाते हुए 21-19 से जीत हासिल की और उलटफेर कर दिया।

वहीं, रक्षिता ने तन्वी के खिलाफ अपना शानदार रिकॉर्ड बरकरार रखा और चौथी बार उनसे भिड़ते हुए चौथी बार जीत हासिल की। भारत की 2026 एशियाई खेलों की बैडमिंटन टीम की सदस्य तन्वी ने लगातार छह अंक जीतकर पहला गेम 21-18 से अपने नाम किया, लेकिन रक्षिता ने कड़े मुकाबले वाले दूसरे गेम में 21-19 से जीत हासिल कर मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। निर्णायक गेम में भी कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन आखिर में रक्षिता ने बढ़त बना ली और अपने तीसरे मैच पॉइंट को भुनाते हुए 21-18 से जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मैच जीत लिया।

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

Health American blueberries

नई दिल्ली, भारत| 07 अगस्त 2026: 'द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन' में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व 'एंथोसायनिन' का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने 27 वैज्ञानिक प्रकाशनों से जुड़े 18 प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट अध्ययनों (Prospective Cohort Studies) और स्वस्थ लोगों पर किए गए 65 क्लिनिकल ट्रायल्स का व्यापक विश्लेषण किया। अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में एंथोसायनिन का सेवन करने वाले लोगों में यह परिणाम देखे गए:-

 

  • हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम: 26% तक कम
  • हार्ट अटैक (हृदयघात) का खतरा: 18% तक कम
  • टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम: 11% तक कम
  • हृदय संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा: 9% तक कम
  • हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) का जोखिम: 8% तक कम

 

क्लिनिकल ट्रायल्स में यह भी पाया गया कि प्रतिदिन 50 मिलीग्राम या उससे अधिक एंथोसायनिन का सेवन करने से रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की कार्यक्षमता और इंसुलिन स्तर में सुधार होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि एंथोसायनिन युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करके यह मात्रा आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

 

भारत के लिए इस अध्ययन का महत्व

भारत में हृदय संबंधी बीमारियों, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे जीवनशैली से जुड़े रोगों के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए इस अध्ययन के निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं।

 

दैनिक आहार में प्राकृतिक रूप से लाल, नीले और बैंगनी रंग के फलों व सब्जियों को शामिल करने से भोजन की गुणवत्ता में सुधार होता है। अमेरिकी ब्लूबेरी का सेवन ताज़ा, फ्रोजन या सूखे (ड्राई) रूप में किया जा सकता है। इसे दही, ओट्स, स्मूदी, नाश्ते के व्यंजनों, सलाद, डेजर्ट और भारतीय व्यंजनों में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

 

विशेषज्ञों की राय

“यह शोध हमारे रोजमर्रा के आहार में विविधता लाने और प्राकृतिक रूप से रंगीन खाद्य पदार्थों को शामिल करने के महत्व को रेखांकित करता है। अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जिसे भारतीय खानपान का हिस्सा बनाना बेहद आसान है।”

— राज कपूर, भारत प्रतिनिधि, यूएस हाईबश ब्लूबेरी काउंसिल (USHBC)

 

“अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि खानपान में किए गए छोटे और व्यावहारिक बदलाव लंबे समय में हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में बड़ा योगदान दे सकते हैं।”

— प्रोफेसर एडीन कैसिडी, मुख्य शोधकर्ता

 

संतुलित जीवनशैली ही कुंजी है

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एक खाद्य पदार्थ अकेले किसी बीमारी को पूरी तरह रोक या ठीक नहीं कर सकता। इसके बजाय, संतुलित आहार के रूप में एंथोसायनिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और डॉक्टरी सलाह मिलकर ही बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकते हैं।

Has the latest crop of midsize SUVs dented the Hyundai Creta’s dominance?

hyundai creta h1 2026 sales compared to rivals

The Hyundai Creta wasn’t the first midsize SUV to hit the Indian market, but it sure is the most popular one of them all. At the start of 2026, however, many believed that the Creta’s dominance on the sales charts was in jeopardy on account of new and upcoming entrants in the midsize SUV space, like the Maruti Suzuki Victoris, Tata Sierra, Kia Seltos, and Renault Duster, as well as the facelifted Skoda Kushaq and Volkswagen Taigun.

If things were to pan out that way, it would be bad news for Hyundai, since the Creta is the Korean carmaker’s bread-and-butter in India. Now that we have sales data for the first half of calendar 2026, and production, deliveries have stabilized for this fresh barrage of midsize SUVs, let’s take a look if any model has eaten into the Creta’s market, or if the Hyundai SUV continues to rule its segment.

Hyundai Creta vs latest midsize SUV sales in H1 2026

ModelJanuaryFebruaryMarchAprilMayJuneTotal
Hyundai Creta^17,92117,93817,83815,29115,2357,16891,391
Maruti Victoris15,24013,02111,06213,70110,85310,03573,912
Kia Seltos*10,63910,30811,04110,56610,5979,65462,805
Tata Sierra7,0037,1009,0037,3166,6066,39243,420
Skoda Kushaq*^^2,3071,8511,3109926,460
Renault Duster1,4022,3591,2671,0116,039
Volkswagen Taigun*^^1,5431,2811,1824,006

^Includes Creta Electric sales

*May include carryover sales of outgoing models

^^Sales counted from the facelift’s month of launch

Six months into 2026, the Creta has managed to retain its moniker of midsize SUV sales champion, averaging over 15,000 sales a month. Compared to H1 2025 (1,00,560 units sold), the Creta’s sales are actually 9.12 percent down YoY, but the Hyundai SUV is still far ahead of its rivals on the chart. That said, though the newer midsize SUVs haven’t dethroned the Creta, they’ve done a lot to grow the segment.

The next bestselling midsize SUV during H1 2026 was the Victoris, which fell 17,479 units behind the Creta. For perspective, you could fit the sales of the Duster, Kushaq, and Taigun within that gap and still come up around 1,000 units short. Launched in September 2025, the Victoris had a few months to establish itself in the market, and differentiates itself from the Creta by offering CNG and strong hybrid powertrains, which appeal to buyers seeking practicality and fuel efficiency, as well as Maruti’s famed peace of mind.

In third position comes the Seltos, which in theory should’ve been stiff competition for the Creta, with the Kia SUV offering a near-identical set of powertrains, a more modern platform (which will even underpin the next-gen Creta), similar pricing, and greater safety credentials by way of a 5-star Bharat NCAP rating. That said, the Seltos did record a whopping 70.28 percent YoY surge in sales, clearly reflecting the boosted popularity of the second-gen model.

The Sierra is Tata’s most formidable contender against the Creta to date, but sold less than half of what the Hyundai SUV did in H1 2026. It should be noted that the Sierra’s sales were initially production-constrained, with Tata steadily increasing manufacturing capacity every month to meet demand. The Sierra is undoubtedly a more feature-packed offering than the Creta, but also costs more. Concerns around fit-and-finish and Tata’s aftersales experience also play a role here.

Renault made its long-awaited return to the midsize SUV space with the new Duster in March, with deliveries commenced in April, but it hasn’t quite set the H1 sales chart alight. Like the Sierra, the Duster’s production is being increased in a phased manner, which could explain the relatively low sales numbers. The Duster has a lot going for it, like aggressive pricing, muscular looks, and a competitive feature set, but the SUV’s exclusively turbo-petrol powertrain line-up limits its appeal for many buyers. A strong hybrid powertrain is set to join the Duster line-up by Diwali 2026, and could pique buyer interest further.

Facelifts of the Kushaq and Taigun were launched in March and April, respectively – nearly five years since the midsize SUVs originally went on sale in India. Both packed some long-requested feature additions and changes, which led to demand spikes in subsequent months. Much like the Duster, though, the Kushaq and Taigun are available with turbo-petrol engines only, and are also on the dimensionally smaller side of the segment, which means they’re best-suited for enthusiast buyers.

Why does the Creta keep selling?

The biggest reason behind the Creta’s persistent reign on the midsize SUV sales charts is its deeply well-established brand name and perception. Many Indian car buyers are very conservative and safe in their purchasing decisions, and seeing a consistently high number of Cretas on the road every single day builds the image of it being the best option in the segment by virtue of sheer popularity. Not to mention, the more ubiquitous and established the car, the better its resale value, which is also very important to most Indian buyers.

Another key driver behind the Creta’s popularity is its proven reliability and no-nonsense ownership experience. Though many of the Creta’s rivals are just as, if not more durable, the Hyundai SUV’s reliability comes alongside a decently long list of features, a comfortable and well-built interior, great levels of refinement, a wide variety of powertrains, and an easy driving experience – making for an excellent overall package.

The Creta is even among the few in its segment to offer a diesel engine, which many midsize SUV buyers still prefer. For those who primarily commute in the city, there’s a smooth naturally aspirated petrol engine on offer, while enthusiast buyers can pick from the sporty Creta N Line range, which is powered by a direct-injection turbo-petrol motor. Basically, there’s something for everyone, and that’s exactly why the Creta is still unbeaten.

नई Bajaj Pulsar N160 S ₹1.34 लाख में लॉन्च, साथ में आया फीचर्स से भरपूर SS वेरिएंट, जानें अंतर

अगर आप नई बाइक खरीदने की प्लानिंग कर रह हैं, जो बेहतरीन माइलेज दे और दिखने में स्टाइलिश भी हो तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Bajaj Auto ने Pulsar N160 S को ₹1.34 लाख में लॉन्च किया है। इसके साथ ही इससे भी अधिक फीचर्स वाली N160 SS को भी 1.43 लाख रुपये में पेश किया है। बता दें कि दोनों ही मॉडल एक बिल्कुल नए 165cc इंजन पर आधारित हैं, जो मौजूदा N160 के एयर-कूल्ड इंजन की जगह लेता है। हालांकि, 160cc सेगमेंट के खरीदारों के लिए यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि यह सिर्फ स्पेसिफिकेशन में मामूली सुधार नहीं है।

नया इंजन, राइड मोड्स और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स को उस कीमत पर लाता है जिस पर आमतौर पर ये फीचर्स नहीं मिलते। मौजूदा N160 इन दोनों मॉडलों के साथ उपलब्ध है, इसलिए खरीदारों के पास अब चुनने के लिए तीन अलग-अलग ट्रिम्स हैं। आइए जानते हैं इनमें क्या अंतर है।

इंजन में क्या बदलाव हुए?

नई Pulsar N160 S और N160 SS में सबसे बड़ा बदलाव इसके इंजन में किया गया है। बाइक में अब 4-वॉल्व वाला नया 165cc इंजन दिया गया है, जो 9,500rpm पर 18.24 hp की पावर और 8,000rpm पर 14.4 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। जबकि, इसकी तुलना में पुराने N160 में 2-वॉल्व इंजन मिलता था, जो 8,750rpm पर 15.78 hp की पावर और 6,750rpm पर 14.65 Nm का टॉर्क देता था। यानी नया इंजन ज्यादा पावर और हाई-रेव पर बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए तैयार किया गया है, जबकि लो-एंड टॉर्क में थोड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

इसके अलावा, इंजन की कूलिंग सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। पुराने एयर-कूल्ड सिस्टम की जगह अब ऑयल-कूल्ड सिस्टम दिया गया है। वहीं, थ्रॉटल कंट्रोल को मैकेनिकल से बदलकर इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल-बाय-वायर (ETB) कर दिया गया है। यही नया सिस्टम बाइक में राइडिंग मोड्स, ट्रैक्शन कंट्रोल और क्रॉल फंक्शन जैसे फीचर्स को संभव बनाता है।

कंपनी का दावा है कि नई Pulsar N160 0-60 kmph की रफ्तार 4.5 सेकंड में पकड़ लेता है और बजाज का कहना है कि यह इस सेगमेंट का सबसे तेज और सबसे पावरफुल इंजन है। हालांकि, इस दावे की असली तस्वीर स्वतंत्र रिव्यू और टेस्ट के बाद ही साफ होगी।

S और SS में क्या अंतर है?

दोनों Pulsar मॉडलों में चार राइड मोड मिलते हैं – रेन, स्पोर्ट, रोड और ऑफ-रोड। साथ ही, इनमें क्रॉल टेक्नोलॉजी भी है, जिससे कम स्पीड पर बिना लगातार क्लच या गियर बदले राइडिंग की जा सकती है। हालांकि, ट्रैक्शन कंट्रोल सिर्फ N160 SS में ही उपलब्ध है। SS में 5 इंच का TFT डिस्प्ले मिलता है, जिसमें गूगल मैप्स मिररिंग की सुविधा है, जबकि S में LCD कंसोल और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन दिया गया है।

डिजाइन और आराम के लिहाज से भी दोनों बाइक्स में अंतर है। N160 SS में कलरफुल अलॉय व्हील्स, नया हैंडलबार और बदली हुई सीट हाइट दी गई है, जिससे राइडिंग पोजिशन ज्यादा आरामदायक हो जाती है। ये बदलाव बेस मॉडल N160 S में नहीं मिलते हैं।

बता दें कि दोनों ही मॉडल तीन कलर ऑप्शन Atlantic Blue, Pearl Metallic White और Brooklyn Black में उपलब्ध हैं।

क्या बाकी सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा?

चेसिस के डायमेंशन मौजूदा Pulsar N160 जैसे ही रखे गए हैं। इसका व्हीलबेस 1,348mm, ग्राउंड क्लीयरेंस 165mm और कर्ब वेट 151kg ही है। यानी इंजन बदलने के बावजूद बाइक की राइडिंग पोजिशन और हैंडलिंग में बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा, पूरी Pulsar N160 रेंज में 14 लीटर का फ्यूल टैंक पहले की तरह ही दिया गया है।

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The Last House Advertising: ‘द लास्ट हाउस’ का प्रमोशन देख लोगों के उड़े होश, नेटफ्लिक्स ने क्रिटविटी की सारी हदें की पार

The Last House Advertising: ‘द लास्ट हाउस’ (The Last House) को प्रमोट करने के लिए नेटफिलिक्स ने बेहद अनोखा तरीका खोजा है। लॉस एंजिल्स के सनसेट बुलेवार्ड पर एक बेहद यूनिक और लाइव आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन लगाया गया है। खास बात ये हैं कि इस लाइव एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग कैंपेन में कुछ ऐसा जोड़ा गया है, जिसे देख हर कोई हैरान है।

दरअसल लाइव आउट-ऑफ-होम में जमीन से 30 फीट ऊपर एक बिलबोर्ड लगा है।, जिसमें एक लिविंग रूम में बनाया गया है। इतना ही नहीं इसके अंदर एक परफॉर्मर को रहने के लिए छोड़ दिया गया है। वह समय-समय पर आते जाते लोगों को क्रिएटिव स्लोगन वाले बोर्ड दिखाता है। कभी कॉफी पीता दिखता है।

बिलबोर्ड के अंदर रह रहा व्यक्ति आपको किताबें पढ़ता दिखता है, ताश खेलता नजर आता, दूरबीन से देखता है और नीचे से गुजरने वाले लोगों से बातचीत करता भी नजर आएगा। यह अनोखा विज्ञापन फिल्म की कहानी को दिखाता है, जिसमें एक परिवार अचानक अपने ही घर के अंदर फंस जाता है और सालों तक बाहर नहीं आ पाता है।

बिलबोर्ड पर आप “द लास्ट हाउस आप कब तक जिंदा रह सकते हैं?” (The Last House How long can you survive?) लिखा देख सकते हैं। यह लाइव प्रमोशन कैंपेन 6 अगस्त से 8 अगस्त 2026 तक चलने वाला है, जो फिल्म के प्रीमियर होते ही बंद कर दिया जाएगा।

कास्ट और डायरेक्टर की बात करें तो इस फिल्म का निर्देशन लुई लेटेरियर (Louis Leterrier) ने किया है। वहीं इसमें ग्रेटा ली (Greta Lee) व वैगनर मौरा (Wagner Moura) लीड रोल में हैं। फिल्म 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम की जा रही है।

सीनियर खिलाड़ियों को नहीं मिला सम्मान, भारतीय टेस्ट टीम के बारे में तीखे शब्द कह गए अजिंक्य रहाणे (Video)

अजिंक्य रहाणे ने लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अब खबर यह आ रही है कि वह किसी यूरोपिय लीग से जुड़ेंगे हालांकि अब वह कमेंट्री और पॉडकास्ट में क्रिकेट के बारे अपने विचार देते हुए नजर आते हैं। 

माइकल वॉन के साथ हुए ऐसे ही एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष के बार में बताया। अजिंक्य रहाणे ने बताया कि उनका एकदिवसीय करियर 2011 में शुरु हो गया था लेकिन उनको टेस्ट मैचों के लिए करीब 2 साल तक 12वें आदमी की भूमिका निभानी पड़ी और कम से कम 20 टेस्ट मैच तक का लंबा इंतजार करना पड़ा 

इसके अलावा उन्होंने सचिन विराट समेत क्रिकेटरों से रिश्ते, टेस्ट क्रिकेट में अभ्यास मैचों का महत्व और वर्तमान टेस्ट टीम के भविष्य पर अपनी राय रखी। 

अजिंक्य रहाणे ने कहा, मेरे पास 2 विकल्प थे या तो मैं सहानूभूति हासिल करता या तो खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता। 12वें खिलाड़ी होने और पानी पिलाने में कोई खास खराबी नहीं है। मैंने इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से लिया। 

अजिंक्य रहाणे ने हालांकि वर्तमान टेस्ट टीम के भविष्य पर तीखी टिप्पणी की। अजिंक्य रहाणे से जब पूछा गया कि क्या आपको वर्तमान भारतीय  टेस्ट टीम को देखकर चिंता होती है तो उनका जवाब हां में था। 

रहाणे ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड अच्छा खेल रही हैं। भारत के साथ अचानक इतनी दिक्कत इस कारण हो गई है क्योंकि ज्यादातर सीनियर खिलाड़ी एक साथ बाहर निकल गए हैं। ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों को बोर्ड को वह सम्मान देना जरूरी है जिसके वह हकदार हैं। 

ऐसा रहा करियर

अजिंक्य रहाणे ने अपना टेस्ट पदार्पण साल 2013 में किया था। अभी तक वह कुल 85 टेस्ट खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 38.5 की औसत के साथ 5077 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल है।साल 2011 में अपने सफेद गेंद करियर का आगाज करने वाले अजिंक्य रहाणे अपना आखिरी टी-20 मैच साल 2016 के टी-20 विश्वकप सेमीफाइनल में खेल चुके थे जहां उनकी धीमी पारी ने टीम इंडिया का वेस्टइँडीज के खिलाफ खासा नुकसान किया था।इसके अलावा उन्होंने आखिरी वनडे 2018 में खेला था।

बाहर होने के बाद भी बतौर कप्तान जीते रणजी

टेस्ट टीम से बाहर होने के बाद से, रहाणे ने लगातार दो रणजी ट्रॉफ़ी सीजन में मुंबई का नेतृत्व किया है, जिसमें टीम ने 2023-24 में अपना 42वां खिताब जीता, जबकि 2024-25 में उपविजेता रही। वह सैयद मुश्ताक अली (टी20) खिताब जीतने वाली मुंबई टीम का भी हिस्सा थे।रहाणे ने 2024-25 के रणजी सीज़न में 14 पारियों में 35.92 की औसत से एक अर्धशतक और एक शतक सहित 467 रन बनाए

Royal Enfield Himalayan 440 launch likely in September 2026

Royal Enfield Himalayan 440 launch likely in September 2026

Back in April 2026, Autocar India exclusively revealed that Royal Enfield is working on a Himalayan 440, based on the updated Scram 440 but with the Himalayan 411’s looks. We now have a supposed launch timeline which is in September 2026. The Scram 440 was a miniscule improvement on paper from the Scram 411, but a noticeably better product. We can expect the same with the Himalayan 440 as well.

  1. Launch expected in September 2026
  2. Will share most mechanicals with the Scram 440/Himalayan 411
  3. Unlikely to be as tech-forward as the Guerrilla/Himalayan 450

Why a Himalayan 440?

For fans of the Himalayan 411 who haven’t quite taken to the Himalayan 450

The Himalayan (450) was an improvement over the 411 by all counts. It had a more powerful, modern engine, and features like a TFT instrument cluster, turn-by-turn navigation, and USD front fork; most of which were a first for Royal Enfield. However, many of the Himalayan 411 fans felt that it was more complicated than their beloved ADV.

Although the Scram 440’s sales figures aren’t openly available, Royal Enfield clearly believes that there’s financial sense in making a Himalayan 440. To recap, the Scram 440’s LS440 engine makes 25.4hp at 6,250rpm and 34Nm at 4,000rpm; a marginal improvement over the LS411’s 24.5hp at 6,500rpm and 32Nm at 4,250rpm, thanks to a 3mm larger bore. We don’t expect any changes to the engine on the Himalayan 440, considering the Himalayan 411 and Scram 411 shared identical engines.

Big difference between Scram and Himalayan will be the wheel setup

And possibly 10mm longer suspension travel too

The major difference between the Himalayan 440 and the Scram 440 should be the wheel setup. The Scram, being a road-focused motorcycle, uses a 19-inch front wheel with a 17-inch rear wheel. The 411 debuted with tubed spoke wheels, with alloy, tubeless wheels later coming in with the Scram 440. The Himalayan being off-road-oriented, the front wheel is expected to be a 21-inch unit and it will likely stick to the spoked rims with tubed tyres. The other difference is the suspension travel. The Himalayan 411’s front wheel had 200mm of travel, which dropped to 190mm for the Scrams. We’d expect that to be 200mm again on the Himalayan 440.

Besides that, the Himalayan 440 should be similar if not identical to the Scram 440. Which likely means that it won’t have the new, slightly cumbersome switchgear, a 6-speed gearbox without a slipper clutch, and the tripper pod. Compared to the current Himalayan’s 825mm seat height, the 440’s is expected to be more accessible, around 800mm, which was the 411’s seat height. Currently we don’t have the prices, but the Scram 440 retails for Rs 2.32 lakh (ex-showroom, Chennai) for the top variant, while the Himalayan 450’s top variant costs Rs 3.39 lakh (ex-showroom, Chennai). This gives the Himalayan 440 a nice middleground to slot into, but we will know for sure closer to September 2026.