Delhi Weather: झमाझम बारिश से राजधानी में मौसम हुआ सुहाना, 24 घंटे में 9°C तक लुढ़का तापमान, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

Delhi Weather: मौसम की कई स्थितियों के एक साथ बनने की वजह से मंगलवार को दिल्ली-NCR में जबरदस्त बारिश हुई, जिससे यह जुलाई के सबसे ज्यादा बारिश वाले दिनों में से एक बन गया। मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश की वजह से तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते उमस और गर्मी झेल रहे लोगों को काफी राहत मिली।

राजधानी के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच 57.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पूसा में सबसे ज्यादा 88.5 मिमी बारिश हुई। इसके बाद महरौली (79 मिमी), जनकपुरी (77 मिमी) और लोधी रोड (68.8 मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई।

इस महीने मंगलवार से ज्यादा बारिश सिर्फ एक बार हुई थी, जब 8 जुलाई की सुबह 8:30 बजे से अगले दिन सुबह 8:30 बजे तक 24 घंटों में 72.66 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।

मंगलवार शाम तक, दिल्ली में इस जुलाई में 258.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इसके 209.7 मिमी के मासिक औसत से ज्यादा है।

बीते कई दिनों से राजधानी में उमस इतनी ज्यादा थी कि ‘फील्स लाइक’ (महसूस होने वाला) तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लेकिन मंगलवार की झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। महज 24 घंटे में अधिकतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस गिरकर 29 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इसके साथ ही यह पिछले तीन वर्षों का सबसे ठंडा जुलाई का दिन बन गया।

इससे पहले जुलाई में इससे कम अधिकतम तापमान 8 जुलाई 2023 को दर्ज किया गया था, जब पारा 28.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार दोपहर दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया। विभाग के अनुसार, बुधवार को मध्यम बारिश और गुरुवार को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पूर्वी हवाएं, अरब सागर से आने वाली पश्चिमी हवाएं, ओडिशा के ऊपर बना गहरा निम्न दबाव (डीप डिप्रेशन) और पश्चिमी हिमालय में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मिलकर उत्तर भारत के बड़े हिस्से में जोरदार बारिश करा रहे हैं।

स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया, “ओडिशा के ऊपर बना गहरा निम्न दबाव अब उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से दिल्ली और आसपास के इलाकों में अगले दो से तीन दिनों तक रुक-रुक कर हल्की बारिश होने की संभावना है।”

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अगले कुछ दिनों तक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की यात्रा करने से बचें, क्योंकि वहां भारी बारिश के कारण हालात बिगड़ सकते हैं। वहीं, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) आने का भी खतरा बना हुआ है।

वहीं, लगातार हुई बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। मंगलवार को सफदरजंग में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस कम था। इससे दिल्लीवासियों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली।

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हिमालय की वादियों में बसा है 172 साल पुराना भारत का यह स्कूल, दुनिया के सबसे खूबसूरत कैंपस में होती है गिनती

देश के उत्तरी राज्य उत्तराखंड की खूबूसरत वादियों में एक ऐसा नायाब नगीना छुपा हुआ है, जिसकी सुंदरता का चर्चा बहुत दूर तक होता है। यहां हम बात कर रहे हैं मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल की। इसे 2024 में आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट ने दुनिया के 9 सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया था। इस ऐतिहासिक स्कूल को अपने शानदार कैंपस डिजाइन और सेटिंग के लिए जानी जाने वाली ग्लोबल लिस्ट में जगह दी गई है। उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी में बसा यह स्कूल, हेरिटेज आर्किटेक्चर, मल्टीकल्चरल लर्निंग माहौल और बड़े प्राकृतिक माहौल का परफेक्ट मिक्स है। यही वजह है कि इसे भारत के सबसे खास रेजिडेंशियल स्कूलों में से एक माना जाता है।

वुडस्टॉक स्कूल 1854 में शुरू हुआ था। यह स्कूल ईसाई मिशनरियों के बच्चों के लिए एक छोटे से संस्थान के तौर पर बनाया गया था। लेकिन, 170 से ज्यादा सालों में ये भारत के सबसे जाने-माने इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में से एक बन गया है। आज, दुनिया भर से छात्र यहां आते हैं, जहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करिकुलम और एक ऐसा कैंपस मिलता है जो इतिहास को प्रकृति बहुत खूबसूरती से जोड़ता है।

पूरी दुनिया का ध्यान खींचता है वुडस्टॉक स्कूल

उत्तराखंड के मसूरी में, लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई पर बना वुडस्टॉक स्कूल, ज्यादातर शैक्षिक संस्थानों से अलग लोकेशन पर है। इसका कैंपस जंगलों, पहाड़ों और पैदल चलने के रास्तों से घिरा हुआ है। वुडस्टॉक स्कूल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षा देता है। वुडस्टॉक स्कूल में इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) प्रोग्राम को फॉलो करता है। यह एक ऐसा पाठ्यक्रम है जिसे दुनिया भर के विश्वविद्यालय मानते हैं।

कई देशों में छात्र पढ़ते हैं यहां

स्कूल एक बहुसांस्कृतिक माहौल को भी बढ़ावा देता है। दर्जनों देशों के छात्र यहां पढ़ते हैं। यह एक्सपोजर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है और छात्रों को एक बड़ा ग्लोबल नजरिया विकसित करने में मदद करता है। बेहतरीन शिक्षा के साथ-साथ यह संस्थान को-करिकुलर लर्निंग को भी उतना ही महत्व देता है। यहां छात्र संगीत, थिएटर, स्पोर्ट्स, आउटडोर एजुकेशन, एनवायरनमेंटल इनिशिएटिव और कम्युनिटी सर्विस प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं।

वुडस्टॉक स्कूल की विरासत पढ़ाई से कहीं आगे तक फैली हुई है

अपने लंबे इतिहास में, वुडस्टॉक स्कूल ने भारत और विदेशों से कई जाने-माने एल्युम्नाई दिए हैं। इसके पुराने छात्रों में लेखक, डिप्लोमैट, उद्यमी, कलाकार और दूसरे पब्लिक फिगर शामिल हैं जिन्होंने अलग-अलग प्रोफेशन में योगदान दिया है।

वुडस्टॉक स्कूल पर एक नजर

खास जानकारी

स्कूल : वुडस्टॉक स्कूल

जगह : मसूरी, उत्तराखंड

शुरू हुआ : 1854

उम्र : 172 साल

ऊंचाई : लगभग 2,000 मीटर

दुनिया भर में पहचान : 2024 में आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट द्वारा दुनिया के नौ सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल

करिकुलम : इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) प्रोग्राम

स्टूडेंट कम्युनिटी : दर्जनों देशों के स्टूडेंट

कैंपस की खास बातें : हेरिटेज पत्थर की इमारतें, जंगल, पहाड़ों के नज़ारे और खुली हरी-भरी जगहें

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कल भारी बारिश का तांडव: 22+ राज्यों में अलर्ट, IMD ने इन 3 राज्यों में रेड कलर वॉर्निंग जारी की, दिल्ली से यूपी तक ऐसा रहेगा मौसम

Kal Ka Mausam 29 July: देशभर के कई इलाकों में इस वक्त भारी बारिश देखने को मिल रही है। देशभर में इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। एक डीप डिप्रेशन के चलते पूर्वी और मध्य भारत में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है जबकि उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भी तेज बारिश देखने को मिल है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 जुलाई के लिए वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है।

इसके मुताबिक देश के 22 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के लिए रेड कलर वॉर्निंग (अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी) जारी की है।

ओडिशा-बंगाल पर बना डीप डिप्रेशन बढ़ा रहा खतरा

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरी आंतरिक ओडिशा और उससे सटे गांगेय पश्चिम बंगाल के ऊपर बना गहरा दबाव 12 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है। यह सिस्टम ओडिशा के बारीपदा से लगभग 20 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम, बालेश्वर से 50 किमी उत्तर-उत्तर-पश्चिम और झारखंड के जमशेदपुर से 110 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में केंद्रित है। अगले 24 घंटों के दौरान यह सिस्टम उत्तर ओडिशा, दक्षिणी झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। इसी मौसमी तंत्र के कारण देश के बड़े हिस्से में भारी बारिश दर्ज की जा रही है।

इन 3 राज्यों के लिए रेड कलर वॉर्निंग: अत्यंत मूसलाधार बारिश का खतरा

IMD ने 29 जुलाई को तीन प्रमुख क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी (रेड कलर वॉर्निंग) दी है:-

छत्तीसगढ़

पूर्वी मध्य प्रदेश

विदर्भ (महाराष्ट्र)

इन राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

IMD के मुताबिक 29 जुलाई को नीचे दिए गए राज्यों और क्षेत्रों के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश होगी:-

दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़

पंजाब

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड

पश्चिम मध्य प्रदेश

ओडिशा

पूर्वोत्तर राज्य: नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

दिल्ली-यूपी से दक्षिण भारत तक: यहां होगी भारी बारिश

मौसम विभाग ने 29 जुलाई को देश के कई अन्य राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है:-

उत्तर भारत और मैदान: उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर राजस्थान, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख।

पूर्वी भारत: झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय।

पश्चिम व मध्य भारत: कोंकण व गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा।

दक्षिण व तटीय भारत: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और माहे।

तेज हवाएं, बिजली गिरने और समुद्र में हलचल की चेतावनी

आंध्र प्रदेश, गुजरात, कोंकण व गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अनुमान है। बिहार, तटीय कर्नाटक, गांगेय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, केरल व माहे, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और विदर्भ में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और बिजली गिरने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है।

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मौसम विभाग के मुताबिक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं चलेंगी। सोमालिया और ओमान तटों, मध्य अरब सागर और उत्तरी अरब सागर के हिस्सों में 45-55 किमी/घंटा से लेकर 65 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलने की संभावना है। आंध्र प्रदेश तट, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में 40-50 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं चलेंगी। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

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अगले 7 दिन बारिश का कहर: यूपी से गुजरात तक इन 15+ राज्यों में हैवी रेन का अलर्ट, इन 6 राज्यों में तो मूसलाधार वाला मौसम

India Weather Update: देश भर के कई इलाके इस वक्त भारी से बेहद भारी बारिश से जूझ रहे हैं। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा वेदर बुलेटिन में चेतावनी जारी की है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश होगी। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक 15 से अधिक राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक, उड़ीसा और गंगीय पश्चिम बंगाल पर बने गहरे दबाव, उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम यूपी और पूर्वोत्तर असम के निचले ट्रोपोस्फीयर में बने चक्रवातीय परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ के असर सेआने वाले 7 दिनों (28 जुलाई से 3 अगस्त) तक देश भर में मूसलाधार बारिश का दौर बना रहेगा।

इन 6 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

IMD के मुताबिक 6 प्रमुख राज्यों में 21 सेंटीमीटर या उससे अधिक की अत्यंत भारी बारिश का तांडव देखने को मिल सकता है:-

ओडिशा: 28 जुलाई को थंडरस्क्वाल (50-60 किमी/घंटा से 70 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं) के साथ अत्यंत भारी बारिश।

छत्तीसगढ़: 28 और 29 जुलाई को कई जगहों पर भारी से बहुत भारी और अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत मूसलाधार बारिश।

पूर्वी मध्य प्रदेश: 29 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट।

विदर्भ: 29 और 30 जुलाई को मूसलाधार बारिश की संभावना।

पश्चिम मध्य प्रदेश: 30 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश।

गुजरात रीजन: 31 जुलाई को अत्यंत भारी वर्षा का पूर्वानुमान।

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी, दिल्ली, राजस्थान और पहाड़ी राज्यों का हाल

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 28 जुलाई से 3 अगस्त तक व्यापक बारिश दर्ज की जाएगी। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश, 29-30 जुलाई और 2-3 अगस्त को भारी बारिश। 28 जुलाई से 30 जुलाई के दौरान गरज-चमक का अलर्ट है।

इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28-29 जुलाई और 3 अगस्त को भारी बारिश, जबकि 28 से 30 जुलाई तक आकाशीय बिजली चमकने और आंधी की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 28 और 29 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज हो सकती है। इसके अलावा 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

इसी तरह पंजाब में 28-29 जुलाई को बहुत भारी बारिश, और 30 जुलाई से 3 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान। पूर्वी राजस्थान में 30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच बहुत भारी बारिश, जबकि 28-29 जुलाई और 2-3 अगस्त को भारी बारिश होगी। पश्चिम राजस्थान में 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच भारी बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 28 से 30 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश होगी। 31 जुलाई से 3 अगस्त के दौरान भी भारी बारिश और बिजली गिरने का सिलसिला बना रहेगा। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 30 जुलाई को बहुत भारी बारिश, जबकि 28-29 जुलाई और 31 जुलाई से 3 अगस्त के दौरान भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी।

मध्य और पश्चिम भारत: एमपी, महाराष्ट्र और गुजरात का पूर्वालोकन

पश्चिम मध्य प्रदेश में 29 और 31 जुलाई को और पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 और 30 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। दोनों क्षेत्रों में 28 जुलाई से 1 अगस्त तक 30-40 किमी/घंटा की हवाएं और बिजली चमकने का अलर्ट है। महाराष्ट्र के विदर्भ में 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 29 से 31 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। कोंकण और गोवा में 31 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 28-30 जुलाई एवं 1 अगस्त को भारी बारिश होगी।

मध्य महाराष्ट्र में 30-31 जुलाई को अति भारी बारिश और 28-29 जुलाई व 1 अगस्त को भारी बारिश की संभावना। मराठवाड़ा में 28 से 30 जुलाई के दौरान भारी बारिश और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी। गुजरात क्षेत्र में 30 जुलाई और 1-2 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी। सौराष्ट्र और कच्छ में 31 जुलाई से 1 अगस्त के दौरान भारी बारिश और 40-50 किमी/घंटा की तूफानी हवाओं का अलर्ट है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: झारखंड, बिहार और असम का मौसम

ओडिशा में 29 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड में 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 29 जुलाई तथा 2-3 अगस्त को भारी बारिश होगी। बिहार में 31 जुलाई से 3 अगस्त के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 28 जुलाई को 40-50 किमी/घंटा की हवाओं के साथ भारी बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 28 जुलाई को भारी बारिश के आसार हैं।

असम और मेघालय में 28 जुलाई से 3 अगस्त तक लगातार भारी बारिश की संभावना। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 28-29 जुलाई और 2-3 अगस्त के दौरान बहुत भारी बारिश की चेतावनी। अरुणाचल प्रदेश में 1 अगस्त को बहुत भारी बारिश और 28-31 जुलाई व 2 अगस्त को भारी बारिश की संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: कर्नाटक, केरला और तेलंगाना

तटीय और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 28 जुलाई से 1 अगस्त तक भारी बारिश होगी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 28 जुलाई और 30-31 जुलाई को अति भारी बारिश का अनुमान है। केरल और माहे में 28 जुलाई से 2 अगस्त तक भारी बारिश, तेज हवाओं (30-50 किमी/घंटा) और वज्रपात की चेतावनी दी गई है।

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इसके अलावा तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश (यनाम) में 28 और 29 जुलाई को भारी बारिश और तेज सतही हवाएं चलेंगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच भारी बारिश और 40-50 किमी/घंटा की तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

EXPLAINER: गलवान के 6 साल बाद फिर खुलेगा नाथू ला दर्रा, भारत-चीन की कूटनीति में क्यों बेहद खास है ‘सिल्क रूट’ की यह खिड़की?

India China Nathu La Trade Explainer: भारत और चीन के रिश्तों का मिजाज समझना हो, तो हिमालय की 14,000 फीट की ऊंचाई पर जमे बर्फ से ढके नाथू ला दर्रे की ओर रुख करना काफी होगा। गलवान घाटी के खूनी संघर्ष और कोविड-19 की मार के चलते पिछले 6 वर्षों से ठप पड़ा सीमा व्यापार 1 अगस्त 2026 से एक बार फिर पटरी पर लौटने जा रहा है।

अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच सिक्किम के नाथू ला, हिमाचल के शिपकी ला और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से व्यापार बहाली पर सहमति बनी थी। उसी कड़ी में अब नाथू ला के कपाट भी फिर से खोले जा रहे हैं।

सालाना कई अरब डॉलर के भारत-चीन व्यापार के समुद्री कारोबार के आगे नाथू ला से होने वाली खरीद-फरोख्त भले ही ऊंट के मुंह में जीरा लगे, लेकिन भू-राजनीतिक बिसात पर इसका रणनीतिक और कूटनीतिक वजन कहीं ज्यादा है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों नाथू ला सिर्फ एक ट्रेड रूट नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों का असली थर्मामीटर है?

जब डाक के थैलों से बची रही रिश्तों की सांस

ऐतिहासिक सिल्क रूट की एक अहम कड़ी रहा नाथू ला प्राचीन काल से ही तिब्बत की चुम्बी घाटी को सिक्किम के गंगटोक, कालिम्पोंग और कोलकाता के बंदरगाहों से जोड़ता आया है। 20वीं सदी की शुरुआत में भारत-चीन के कुल जमीनी व्यापार का करीब 80 फीसदी हिस्सा इसी दर्रे के जरिए गुजरता था। 1962 के युद्ध ने इस सदियों पुरानी व्यापारिक डोर को एक झटके में काट दिया और नाथू ला अगले 44 सालों के लिए पूरी तरह सील हो गया।

वैसे युद्ध के बाद भले ही व्यापार और बंदूकें खामोश हो गईं, पर कूटनीतिक धागा नहीं टूटा। हर गुरुवार की सुबह 14,000 फीट की बर्फीली हवाओं के बीच एक भारतीय डाकिया कटीले तारों तक जाता और चीनी डाकिये से डाक का थैला बदलता। बिना एक-दूसरे की बोली समझे, महज 3 मिनट में अंजाम दी जाने वाली यह मूक रस्म दशकों तक दोनों देशों के बीच संपर्क का अकेला जीवित जरिया बनी रही।

2006 का री-ओपनिंग मॉडल: नई सदी में पुराने जमाने का सौदा

साल 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ऐतिहासिक बीजिंग यात्रा के बाद बनी सहमति के आधार पर 6 जुलाई 2006 को नाथू ला को व्यापार के लिए दोबारा खोला गया। उसकी तस्वीरें भले ही भव्य थीं, लेकिन जिस व्यापार की इजाजत दी गई, वह गुजरे जमाने की याद दिलाता था:

चीन की ओर से भारत आने वाली चीजें (15 प्रोडक्ट्स): याक की पूंछ, बकरी-भेड़ की खाल, कच्चा रेशम, ऊन, बोरेक्स, नमक और घोड़े।

भारत से जाने वाला सामान (29 प्रोडक्ट्स): चावल, आटा, चाय, तंबाकू, कंबल और तांबे के बर्तन।

दौर बदल चुका था, लेकिन सामान की लिस्ट 19वीं सदी वाली ही रही। नतीजतन, नाथू ला कभी कोई बड़ा आर्थिक कॉरिडोर नहीं बन सका और सीमित दायरे में ही सिमटकर रह गया।

अरबों डॉलर के कारोबार के आगे कितना बड़ा है नाथू ला?

अगर आप आंकड़ों के चश्मे से देखेंगे, तो नाथू ला का व्यापार दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए शून्य नजर आएगा:

2016 (पीक टाइम): कुल व्यापार रिकॉर्ड ₹82.68 करोड़ तक पहुंचा।

2017 (डोकलाम विवाद): तनातनी का असर सीधा दिखा और व्यापार सिमटकर महज ₹8.86 करोड़ रह गया।

2019 (आखिरी सीजन): महामारी से ठीक पहले यहां ₹43.51 करोड़ की आवाजाही दर्ज हुई।

व्यापारिक घाटे की कड़वी हकीकत

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ कुल माल व्यापार $151.1 अरब रहा, जिसमें भारत का व्यापार घाटा $100 अरब के पार चला गया। ऐसे में नाथू ला के कुछ करोड़ का कारोबार इस विशाल खाई को नहीं पाट सकता। हां, सिक्किम के उन 600 से अधिक स्थानीय लाइसेंसधारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए यह रोजी-रोटी का मुख्य जरिया जरूर है, जिनका सामान 2020 में अचानक सीमा बंद होने से वहीं फंसा रह गया था।

बॉडर ट्रेड से परे क्यों यह ‘डिप्लोमैटिक इंडिकेटर’ है?

कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नाथू ला में माल का आना-जाना उतना मायने नहीं रखता, जितना कि गेट का खुलना और बंद होना। नाथू ला का हालिया इतिहास बताता है कि जब-जब दिल्ली और बीजिंग की दूरी घटी है, यह गेट खुला है और जब भी सरहद पर गोलियों या डंडों की गूंज हुई, ताला सबसे पहले इसी दरवाजे पर लगा।

2020 के गलवान हादसे के बाद रिश्ते सबसे गहरे अविश्वास के दौर में पहुंच गए थे। अब सीधी उड़ानों, वीजा, मानसरोवर यात्रा और नाथू ला व्यापार की एक साथ बहाली इस बात का साफ इशारा है कि दोनों मुल्क अब तनाव को नियंत्रण में रखकर रिश्तों को ‘न्यू नॉर्मल’ की तरफ ले जाना चाहते हैं।

1 अगस्त से नाथू ला का खुल जाना न तो रातों-रात सीमा विवाद सुलझाएगा और न ही चीनी सामान की निर्भरता को खत्म करेगा। लेकिन, वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में यह बहाली दर्शाती है कि दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी संवाद और सह अस्तित्व की टेबल पर बने रहने के इच्छुक हैं। इस बर्फीले दर्रे पर व्यापार की आहट, कूटनीति के मोर्चे पर एक पॉजिटिव संकेत है।

श्रावण की आस्था, शिवभक्तों का उत्साह… कांवड़ यात्रा-2026 के स्वागत को मेरठ पूरी तरह तैयार

Meerut News kanwar yatra 2026

Meerut Kanwar Yatra: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव के शरीर की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का जल अर्पित किया था। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इसी आस्था से परिपूर्ण होकर हर वर्ष करोड़ों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य पवित्र घाटों से गंगाजल भरकर कंधे पर कांवड़ रखकर पैदल अपने-अपने शिवालयों तक पहुंचते है।

 

2026 में 30 जुलाई से श्रावण मास शुरू हो रहा है, जिसके चलते एक बार फिर शिवभक्ति का यह विराट उत्सव पूरे उत्तर भारत में दिखाई देगा। विगत वर्ष हरिद्वार से 4.50 करोड़ से अधिक कांवड़ उठाई गई थीं। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के शिवभक्त “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मेरठ और मुजफ्फरनगर है, जहां लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन गुजरते हैं।

 

इसी विशाल धार्मिक आयोजन को सकुशल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मेरठ प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। रविवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय हॉल में जिलाधिकारी मेरठ एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ ने अधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

बैठक में जनपद के पुलिस अधीक्षक, सभी क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी, एसडीएम, एसीएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, शिविरों की व्यवस्था, कांवड़ मार्गों की सुगमता, विभागीय समन्वय, कानून-व्यवस्था तथा आपातकालीन तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की।

कलेक्टर और एसएसपी के निर्देश

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि सभी विभाग शेष कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करें। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें तथा किसी भी समस्या की सूचना मिलते ही तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करें।

 

जिलाधिकारी डा. वी के सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग को विशेष निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्ग पर स्थित ढाबों, रेस्टोरेंट, रेहड़ी-पटरी और खाद्य सामग्री विक्रेताओं के लाइसेंस अथवा अस्थायी लाइसेंस की जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस और रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराई जाए, ताकि श्रद्धालुओं और व्यापारियों के बीच किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

 

बरसात के मौसम को देखते हुए कांवड़ शिविरों में सांप एवं अन्य जहरीले जीवों से बचाव के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। वन विभाग और कृषि विभाग संयुक्त रूप से एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार कर शिविर संचालकों को उपलब्ध कराएंगे, जिससे आवश्यक सावधानियां समय रहते अपनाई जा सकें।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के अंत में जिलाधिकारी वीके सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता से ड्यूटी करें, आपसी समन्वय बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि शिवभक्तों की आस्था और उत्साह के इस महापर्व में उन्हें सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिले।

 

श्रावण का यह पावन पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। ऐसे में प्रशासन की तैयारी और जनसहयोग मिलकर कांवड़ यात्रा-2026 को सफल और यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कल 28 जुलाई को बारिश का तांडव: दिल्ली-UP समेत इन 12 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने बताया कहां-कहां रहेगा तूफानी मौसम

kal Ka Mausam 28 July: देश में इस वक्त कई इलाकों में तूफानी बारिश का दौर जारी है। असम से लेकर गुजरात और ओडिशा तक भारी बारिश ने आम जनजीवन को तबाह कर रखा है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में बारिश का और जोरदार रूप देखने को मिल सकता है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 जुलाई के लिए अपना मौसम बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 28 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

इसके अलावा देश के लगभग 15 से अधिक अन्य राज्यों में मूसलाधार बारिश, तेज अंधड़, आकाशीय बिजली और तटीय इलाकों में तूफानी हवाओं की गंभीर चेतावनी दी गई है। आइए जानते हैं कि 28 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है।

दिल्ली-UP समेत इन 12 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 28 जुलाई को देश के 12 प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में छिटपुट स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया गया है:-

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर और आसपास के मैदानी इलाकों में मूसलाधार से अति भारी बारिश दर्ज हो सकती है।

उत्तर प्रदेश: राज्य के अलग अलग जिलों में तेज बादलों के जमावड़े के साथ बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तराखंड: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भूस्खलन और जलभराव की आशंका के साथ अति भारी बारिश हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश: हिमाचल के कई हिस्सों में तेज मूसलाधार बारिश होने का पूर्वाकलन है।

पंजाब: पंजाब के अलग-अलग जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

छत्तीसगढ़: राज्य के कई इलाकों में मूसलाधार बरसात जारी रहेगी।

ओडिशा: तटीय व आंतरिक ओडिशा में भारी से बहुत भारी वर्षा होने के आसार हैं।

विदर्भ: महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

मध्य महाराष्ट्र: मध्य महाराष्ट्र और इसके घाट इलाकों में मूसलाधार बारिश की संभावना है।

तटीय कर्नाटक: तटीय जिलों में अति भारी बारिश का दौर बना रहेगा।

दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: राज्य के दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में मूसलाधार बारिश का पूर्वाकलन है।

इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने देश के 15 अन्य राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है:-

उत्तर व पश्चिम भारत: पूर्वी राजस्थान, गुजरात रीजन और कोंकण व गोवा के जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट है।

पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत: पश्चिम बंगाल व सिक्किम, झारखंड, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है।

दक्षिण भारत: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे में भारी बारिश होने की संभावना है।

40-50 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं और वज्रपात की चेतावनी

28 जुलाई को कई राज्यों में बारिश के साथ-साथ गरज-चमक, आंधी और तेज हवाओं का प्रकोप भी देखने को मिलेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, गांगेय पश्चिम बंगाल, पूरे कर्नाटक, केरल व माहे और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे (झोंके और तेज) की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी।

पूर्वी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और तेलंगाना में आंधी और आकाशीय बिजली के साथ 30 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, झारखंड, पूरे महाराष्ट्र, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर बिजली चमकने और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। कर्नाटक, केरल व माहे और तेलंगाना में दिन के दौरान तेज सतही हवाएं चलेंगी।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के लिए समुद्री चेतावनी

समुद्र में तेज हवाओं और उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने तटीय इलाकों और मछुआरों के लिए अलर्ट जारी किया है। मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम व उत्तर अरब सागर के कुछ भागों और सोमालिया और ओमान तटों के पास 45-55 किमी/घंटा (झोंके 65 किमी/घंटा) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी।

दक्षिण गुजरात और कोंकण-गोवा तटों से लगे उत्तर-पूर्वी व पूर्व-मध्य अरब सागर में 40-50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) की गति से मौसम खराब रहेगा। पश्चिम बंगाल और ओडिशा तटों और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों में 55-65 किमी/घंटा (झोंके 75 किमी/घंटा) की बेहद भीषण तूफानी हवाएं चलेंगी।

barishalert

उत्तरी आंध्र प्रदेश तट, मध्य व उत्तर बंगाल की खाड़ी के हिस्सों और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45-55 किमी/घंटा (झोंके 65 किमी/घंटा) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। अंडमान सागर, बांग्लादेश व म्यांमार तटों, उत्तर-पूर्वी, मध्य व दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी में 40-50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) की गति से तूफानी मौसम बना रहेगा।

डीप डिप्रेशन संग 3 चक्रवाती सिस्टम एक्टिव, IMD ने 7 दिनों तक यूपी समेत 25+ राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, तूफानी रहेगा मौसम

Heavy Rain Alert: उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तटों पर बना डिप्रेशन अब और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदल चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा वेदर बुलेटिन के मुताबिक यह मौसमी सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए बालासोर और कैनिंग के बीच पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा तटों को पार कर रहा है। इसके असर से देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले सात दिनों (27 जुलाई से 2 अगस्त) तक मूसलाधार बारिश, अंधड़ और तूफानी हवाओं का दौर जारी रहने का अनुमान है।

आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों के दौरान मध्य महाराष्ट्र में 21 सेमी से अधिक की अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा में अति भारी बारिश (12-20 सेमी) और हिमाचल प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात रीजन, कोंकण-गोवा व उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भारी बारिश (7-11 सेमी) रिकॉर्ड हुई है।

  • उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और पहाड़ी राज्यों का पूर्वानुमान
  • उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 27 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान व्यापक स्तर पर बारिश और गरज-चमक की संभावना है।
  • उत्तराखंड: 27 से 29 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा 30 जुलाई से 2 अगस्त तक भारी बारिश का सिलसिला बना रहेगा। पूरे हफ्ते गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है।
  • हिमाचल प्रदेश: 28 से 31 जुलाई के दौरान मूसलाधार से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 27 जुलाई और 1 से 2 अगस्त को भी अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होगी।
  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख: 30 और 31 जुलाई को अति भारी बारिश हो सकती है। 29 जुलाई और 1 से 2 अगस्त को भारी बारिश का अनुमान है। इस पूरे क्षेत्र में 27 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा) की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
  • उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 जुलाई को अति भारी बारिश का अलर्ट है। 27 जुलाई, 29 जुलाई और 2 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। 27 से 29 जुलाई और 1 से 2 अगस्त के बीच व्यापक बारिश होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 28 और 29 जुलाई को अति भारी बारिश का अनुमान है। 27 जुलाई, 30 जुलाई और 1 से 2 अगस्त के बीच भारी बारिश दर्ज हो सकती है।
  • हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब: इन क्षेत्रों में 28 से 31 जुलाई के बीच व्यापक बारिश होगी, जिसमें 28 और 29 जुलाई को अति भारी बारिश का अलर्ट है। 27 जुलाई और 30 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना है।
  • राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 30 और 31 जुलाई को अति भारी बारिश की संभावना है। 28-29 जुलाई और 1-2 अगस्त के बीच भारी बारिश होगी। 28 जुलाई से 2 अगस्त के बीच 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा) की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। पश्चिमी राजस्थान में 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच भारी बारिश दर्ज हो सकती है। 30 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान तेज हवाएं और बिजली चमकने का अलर्ट है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत के राज्यों में 27 जुलाई से 2 अगस्त के बीच मानसून का मजबूत असर दिखाई देगा।

  • छत्तीसगढ़: 27 और 28 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद 29 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान लगातार भारी बारिश जारी रहेगी।
  • पूर्वी मध्य प्रदेश: 29 और 30 जुलाई को अति भारी बारिश हो सकती है। 27-28 जुलाई और 31 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। 27 और 28 जुलाई को 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश: 29 जुलाई को अति भारी बारिश का अलर्ट है। 28 जुलाई और 30 जुलाई से 1 अगस्त के दौरान भारी बारिश होने के आसार हैं।
  • विदर्भ: 28 और 29 जुलाई को अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 27 और 30 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा में रेड कलर वॉर्निंग अलर्ट, बंगाल-बिहार में मूसलाधार

डीप डिप्रेशन का सबसे सीधा प्रभाव पूर्वी भारत के तटीय और मैदानी क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

ओडिशा: 27 जुलाई को ओडिशा में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होगी। 27 जुलाई को ही 50-60 किमी/घंटा (झोंके 70 किमी/घंटा) की रफ्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है। 28 जुलाई को अति भारी बारिश होगी, जबकि 1 और 2 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड: 27 जुलाई को दोनों राज्यों में अति भारी बारिश हो सकती है। 28 जुलाई को भी भारी बारिश की संभावना है। 27 और 28 जुलाई को बंगाल में 40-50 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी।

  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: 27 जुलाई से 2 अगस्त तक रोजाना भारी बारिश होने के आसार हैं।
  • बिहार: 27 जुलाई और 29-30 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच अधिकांश स्थानों पर बारिश होगी।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: 27 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान 40-50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 जुलाई से 2 अगस्त तक लगातार भारी बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।
  • पश्चिम भारत: कोंकण, गोवा और गुजरात में भारी से अति भारी बारिश
  • कोंकण और गोवा: 27 जुलाई को अति भारी बारिश की संभावना है। 28 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान लगातार भारी बारिश जारी रहेगी।
  • मध्य महाराष्ट्र: 27, 28, 30 और 31 जुलाई को अति भारी बारिश का अलर्ट है। 1 और 2 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है।

गुजरात (क्षेत्र और सौराष्ट्र-कच्छ): गुजरात रीजन में 27 जुलाई और 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच अति भारी बारिश होने का अनुमान है। 28 और 29 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। सौराष्ट्र व कच्छ में 30 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: अंधड़ और तेज सतही हवाओं की चेतावनी

तटीय आंध्र प्रदेश और यनम: 27 जुलाई को 50-60 किमी/घंटा (झोंके 70 किमी/घंटा) की रफ्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है। 27 से 29 जुलाई के बीच भारी बारिश हो सकती है। 27 और 28 जुलाई को इस क्षेत्र में उमस भरी गर्मी बनी रहेगी।

कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 27 से 30 जुलाई के दौरान अति भारी बारिश और 31 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान भारी बारिश होगी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 28 जुलाई को अति भारी बारिश की संभावना है। उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 27 से 31 जुलाई के बीच भारी बारिश होगी। 27 से 31 जुलाई के दौरान कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलेंगी।

केरल और माहे: 27 जुलाई से 2 अगस्त तक लगातार भारी बारिश का अलर्ट है। 27 और 28 जुलाई को 40-50 किमी/घंटा की गति से हवाएं चल सकती हैं।

तेलंगाना और तमिलनाडु: तेलंगाना में 27 से 29 जुलाई के दौरान भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 30 जुलाई से 1 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दोनों क्षेत्रों में 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

दिल्ली पुलिस 2022 की तरह CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से वापस लेगी केस? सामने आया बड़ा अपडेट्स

Delhi Police: संसद परिसर के हाल में और जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए दिल्ली पुलिस वर्ष 2022 में अपनाई गई प्रक्रिया को दोहरा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। मंगलवार 28 जुलाई तक इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के दौरान दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी मॉडल को इस बार भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, उस समय पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को भेजा था। इसके बाद फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास पहुंची। गृह मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई। फिर 28 फरवरी को एलजी कार्यालय लौटने पर उसी दिन उसे मंजूरी मिल गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों से मांगी राय 

अब संसद प्रदर्शन से जुड़े मामलों में भी दिल्ली पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से राय मांगी है कि FIR वापस लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाए। एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को रद्द (Quash) कराने का अनुरोध करे।

15 FIR दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका गंभीर नहीं पाई गई है। उन्हें फिलहाल जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, आपराधिक साजिश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।

 पुलिस ने उठाकर मसूरी छोड़ दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों को खाना देने वाले एक स्वयंसेवक जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, आंखों पर पट्टी बांधी गई और अगले दिन उन्हें उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।

जुनैद के अनुसार, पुलिस ने उनसे खाना बांटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता और इतने बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था के बारे में सवाल पूछे। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद ने दावा किया कि उन्हें भोजन और पानी समर्थकों से मिलने वाले दान और डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था।

पीएम मोदी के मामले में होगी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि पुलिस ऐसे पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर सकती है।

सूत्र ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड की गई सामग्री की समीक्षा के बाद पुलिस अपमानजनक प्रकृति की पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी करेगी।” उन्होंने कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने का अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है।”

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सूत्र के मुताबिक, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी सामग्री में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने होने की आशंका थी। सूत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नजर रखे हुए है, ताकि विरोध-प्रदर्शन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की पहचान की जा सके।

Weather Update : हिमाचल में बादल फटा; असम में 68 मौतें, गुजरात में सेना का रेस्क्यू, IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

weather update 27 july : rain, flood, imd alert

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है तो गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ALSO READ: Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

असम में 68 की मौत

असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से अब तक 68 लोगों की मौत हो गई। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को फोन कर हालात की जानकारी ली। सोनोवाल बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर हैं।

 

गुजरात ने सेना ने संभाली कमान

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद कई इलाकों में भीषण जलभराव की स्थिति बन गई है। विशेष रूप से अहमदाबाद जिले के बावला और सानंद क्षेत्र में जलजमाव के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। राज्य में वर्षाजन्य हादसों में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से 29 मौतें वलसाड और नवसारी जिलों में हुई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ टेलीफोन पर बातचीत कर बारिश के बाद के हालात की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने और जल निकासी का काम तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। है। 

 

हिमाचल में फटे बादल

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में शनिवार रात बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। इससे मयाड़ घाटी के सात गांवों का संपर्क टूट गया। भूस्खलन की वजह से राज्य में करीब 135 सड़कें बंद कर दी गई है। प्रदेश में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड से 15 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने 5 जिलों में 28 से 31 जुलाई के बीच भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।

 

IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारी बारिश के साथ ही तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

 

ओडिशा में रेड अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र रविवार को और गहरा होकर डिप्रेशन में बदल गया है। अगले 24 घंटे के दौरान इसके और मजबूत होकर उत्तर ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटों को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 29 जुलाई तक सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।