AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

MDR Charges on UPI payment

सरकार ने संसद में ऐसा बिल पेश किया है जिससे 2000 रुपए से ऊपर के UPI बिजनेस ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR चार्ज लगाने का रास्ता खुल सकता है। यह चार्ज व्यक्ति से व्यक्ति के ट्रांसफर पर यह लागू नहीं होगा। प्रस्तावित चार्ज केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों की जेब से पैसे नहीं कटेंगे। ALSO READ: योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

 

निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया बिल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर एमडीआर लगाने के प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इसे कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

 

क्या है MDR? 

एमडीआर वह फीस है जो मर्चेंट यानी दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा के लिए बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक एमडीआर फ्रेमवर्क को रेगुलेट करता है। जनवरी 2020 से सरकार ने डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने के लिए यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर जरूरी कर दिया है। ALSO READ: Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

 

बड़े व्यापारियों के लिए मुफ्त नहीं रहेगा UPI

यूपीआई भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जहां हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं। ऐसे में सिस्टम को मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकार और रेगुलेटर्स नए विकल्प तलाश रहे हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम यूजर्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़े व्यापारियों के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त नहीं रहेगा।

 

95 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा MDR?

दावा किया जा रहा है कि 2000 की सीमा कुल यूपीआई लेनदेन का सिर्फ 5 फीसदी कवर करेगी, लेकिन इन लेनदेन का मूल्य कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का 65 फीसदी है। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना या ऑटो-टैक्सी के भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा। जुलाई में 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपए रही। कहा जा रहा है कि अगर लागू भी हुआ तो 95 फीसदी लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी बिजनेस इस फीस को ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, जो बहुत छोटी राशि होगी।

गुलामी की जंजीरों से निकला आइसक्रीम को स्वाद देने वाला वनीला

how 12 year old boy changed world vanilla farming

आज जिसे हम साधारण स्वाद समझते हैं, कभी वह वनीला राजाओं की पसंद था। मेसोअमेरिका के शासकों से लेकर यूरोप के आलीशान दरबारों तक इसकी मांग थी। दुनिया भर में इसकी खुशबू फैलाने का श्रेय एक 12 साल के गुलाम लड़के को जाता है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

आज आइसक्रीम से लेकर खांसी की दवाओं तक में वनीला हर जगह मौजूद है। सिंथेटिक वैनिलिन के आने के बाद से यह स्वाद दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच गया है। अब वनीला इतना आम हो चुका है कि अंग्रेजी भाषा में इसे सादे के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है।

 

असल वनीला दुनिया की सबसे मुश्किल फसलों में से एक है। रासायनिक रूप से भी इसे बनाना काफी जटिल है। इसमें 200 से भी ज्यादा तरह के खुशबूदार कम्पाउंड्स होते हैं, जो इसकी अनोखी खुशबू और स्वाद का राज हैं। केसर के बाद वनीला दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला माना जाता है। इसकी कीमत लगभग 100 से 600 डॉलर प्रति किलोग्राम तक हो सकती है।

 

वनीला की इस कहानी में एक बिना डंक वाली मधुमक्खी, औपनिवेशिक सत्ता और एक 12 वर्षीय गुलाम बनाए गए लड़के एडमंड अल्बियस की अहम भूमिका है। जिसकी खोज ने वनीला की खेती का तरीका बदल दिया। अगर यह खोज नहीं हुई तो आज दुनिया इस स्वाद से अनजान होती। ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

सालों के कब्जे से पनपा वनीला का बीज

वनीला की कहानी शुरू होती है, प्राचीन मेसो अमेरिका से। वहां के गर्म और नम जंगलों में ‘वनीला प्लैनिफोलिया' नाम की एक खास जंगली ऑर्किड बेल उग आती है।

 

इतिहास के पन्नों में दर्ज लेखों से पता चलता है कि उस समय अलग-अलग समुदायों ने वनीला के लिए अपने-अपने नाम रखे थे। मेक्सिको के लोग इसे ‘त्लिलशाचितल', टोटोनाक लोग ‘शानात' और माया लोग ‘सिस्बिक' कहते थे। हालांकि, सभी सभ्यताओं में वनीला काफी कीमती थी। दवा बनाने से लेकर, धार्मिक अनुष्ठानों तक कई जगह इसका इस्तेमाल किया जाता था।

 

टोटोनाक लोग, आज के मेक्सिको के वेराक्रूज इलाके में वनीला की खेती करने वाला पहला समुदाय था। इसकी खुशबू के लिए वे इसे बेहद पसंद करते थे। बाद में जब एजटेक लोगों ने टोटोनाक इलाके पर कब्जा किया, तो टैक्स के तौर पर वनीला वसूलने लगे। एजटेक वनीला का इस्तेमाल ‘शोकोलात्ल' नामक के काकाओ ड्रिंक में स्वाद और सुगंध जोड़ने के लिए करते थे। ये ड्रिंक केवल ऊंचे पदों पर बैठे लोगों और योद्धाओं के लिए थी।

 

साल 1519 में एजटेक के सम्राट, मोक्तेजुमा द्वितीय ने यह खास ड्रिंक स्पेनिश सैनिकों को परोसा। यह घटना तब की है, जब स्पेन सेंट्रल मेक्सिको में अपना औपनिवेशिक शासन स्थापित कर रहा था।

 

बाद में स्पेनिश लोग वनीला यूरोप लेकर आ गए। शुरुआत में यह मेक्सिको से लाए गए चॉकलेट ड्रिंक के रूप में स्पेन के शाही दरबार तक पहुंचा। फिर धीरे-धीरे वनीला फ्रांस और इंग्लैंड के राजदरबारों की रसोइयों तक पहुंच गया, जहां इसका इस्तेमाल कर खास मिठाइयां और पेस्ट्रियां बनाई जाने लगी।

 

एक मधुमक्खी ने यूरोप को किया दंग 

इस जंगली ऑर्किड की बेल को फ्रांस और इंग्लैंड के बागानों में उगाने की बहुत कोशिश की गई। लेकिन हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ आई, लाख कोशिशों के बावजूद उसके फूलों में फल नहीं लगे।

 

औपनिवेशिक शासकों ने वनीला की बेलों को अपने दूसरे उपनिवेशों जैसे भारत, जावा, फिलीपींस और फ्रांस के कब्जे वले रीयूनियन द्वीप में भी उगाने की कोशिश की। वहां बेलें तो अच्छी तरह बढ़ीं, फूल भी खिले, लेकिन उन पर वनीला की फलियां नहीं आईं। यह परेशानी लगभग 300 सालों तक ऐसी ही बनी रही।

 

साल 1836 में बेल्जियम के बागवानी विशेषज्ञ, चार्ल्स मोरेन ने पता लगाया कि वनीला के फूलों का प्राकृतिक परागण एक बिना डंक वाली मेलिपोना मधुमक्खी करती है, जो केवल मेक्सिको में ही पाई जाती है। मोरेन ने अपनी प्रयोगशाला में हाथ से वनीला का परागण करने में सफलता तो हासिल की, लेकिन यह तरीका काफी धीमा और खेती के लिहाज से कारगर नहीं था।

 

तभी रीयूनियन द्वीप पर रहने वाले 12 साल के गुलाम बनाए गए एक लड़के एडमंड अल्बियस ने इस समस्या का समाधान खोज निकाला। ALSO READ: मुसीबत में ट्रंप के दोस्त FIFA अध्यक्ष इनफैनटिनो! निजी निवेशकों की योजना पर लगा ब्रेक, बड़े फुटबॉल परिसंघों के विरोध में झुकी संस्था

 

अल्बियस और उसका आसान सा हल

साल 1841 में अल्बियस ने हाथ से वनीला के फूलों का पॉलिनेशन करने का तरीका खोज निकाला। एडमंड अल्बियस ने अपने अंगूठे और लकड़ी के एक छोटे-से टुकड़े की मदद से वनीला के फूल के भीतर मौजूद एक पतली झिल्ली को उठाया, जो नर प्रजनन भाग, पोलेन और मादा प्रजनन भाग, स्टिग्मा को अलग रखती है। फिर उसने दोनों को आपस में मिला दिया। इसके कुछ ही समय बाद ऑर्किड के फूलों पर वनीला की फलियां बनने लगीं।

 

इतिहासकार और ‘वनीला: द हिस्ट्री ऑफ ऐन एक्स्ट्राऑर्डिनरी बीन' (2025) के लेखक एरिक टी। जेनिंग्स ने खुद इस तकनीक को आजमाया है। उनके अनुसार, “कई महान आविष्कारों की तरह यह तरीका सुनने में बेहद आसान जरूर लग सकता है, लेकिन वनीला के फूलों के नर और मादा भागों को सही ढंग से मिलाना उतना आसान नहीं है, जितना दिखाई देता है।”

 

अल्बियस की खोज के बाद कुछ समय के लिए रीयूनियन द्वीप दुनिया का सबसे बड़ा वनीला उत्पादक बन गया था। लेकिन 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसीसी औपनिवेशिक प्रशासन ने हाथ से परागण की तकनीक अपने दूसरे उपनिवेश मेडागास्कर तक भी पहुंचा दी। आज मेडागास्कर दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक वनीला उत्पादक है। फ्रांसीसी उपनिवेशों में उगाई गई इस वनीला को ‘बॉर्बन वनीला' कहा जाने लगा। इसका नाम रीयूनियन द्वीप के पुराने औपनिवेशिक नाम ‘आइल बॉर्बन' पर रखा गया था।

 

वनीला का हीरो या कहानी का बस कोई किरादार?

अल्बियस की तकनीक आज भी पूरी दुनिया में वनीला की खेती के लिए इस्तेमाल की जाती है। वनीला का यह कारोबार आज अरबों डॉलर का उद्योग बन चुका है। यह बेहद मेहनत और सावधानी वाला काम है, क्योंकि वनीला का हर फूल केवल एक दिन के लिए ही खिलता है और उसी दौरान उसका हाथ से परागण करना पड़ता है।

 

इतनी बड़ी खोज के बावजूद अल्बियस को इससे कभी कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला। 12 वर्ष की उम्र में विकसित की गई उनकी तकनीक से फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन ने भारी मुनाफा कमाया, लेकिन स्वयं अल्बियस का 1880 में गरीबी के चलते निधन हो गया।

 

जेनिंग्स ने अपने शोध के लिए रीयूनियन द्वीप का दौरा किया। वह बताते हैं कि अल्बियस की याद में उनके जन्मस्थान सैंट-सुजान में एक मूर्ति बनाई गई है। उनके नाम पर कुछ स्कूल भी हैं। फिर भी, जेनिंग्स के अनुसार, उनकी कहानी आज भी बहुत कम लोगों को पता है, जबकि उनकी खोज ने रीयूनियन द्वीप को पूरी तरह बदल दिया था।

 

जेनिंग्स के अनुसार, अल्बियस की खोज के 30 सालों के भीतर ही रीयूनियन दुनिया का सबसे बड़ा वनीला उत्पादक बन गया था। इतना ही नहीं, बल्कि इस खोज ने द्वीप की खेती को केवल गन्ने पर निर्भर रहने से बचाया। उस समय लगातार गन्ने की खेती से वहां की उपजाऊ मिट्टी भी कमजोर होती जा रही थी।

 

जेनिंग्स मानते हैं कि अल्बियस को उनकी खोज का उचित श्रेय और आर्थिक लाभ नहीं मिलने का एक बड़ा कारण यह भी था कि वह गुलाम थे। हालांकि, उन्हें इस तकनीक का असल आविष्कारक माना गया। जब रीयूनियन के प्रमुख वनस्पति उद्यान के एक श्वेत वनस्पतिशास्त्री ने इस खोज का श्रेय लेने की कोशिश की, तो वह सफल नहीं हो सका।

 

जेनिंग्स बताते हैं, “आज एडमंड अल्बियस के बारे में जो जानकारी हमारे पास है, वह इसलिए है क्योंकि उनके पूर्व मालिक और उन्हें जानने वाले लोगों ने उस झूठे दावे का विरोध किया और साबित किया कि इस तकनीक के असली आविष्कारक अल्बियस ही थे।”

 

सादी दिखने वाली हर चीज सादी नहीं होती

एडमंड अल्बियस की खोज के बाद भी वनीला की कहानी लगातार बदलती रही। 1858 में रसायनज्ञों ने वनीला की खुशबू के लिए जिम्मेदार मुख्य तत्व वैनिलिन को अलग किया और 1874 में इसे कृत्रिम रूप से बनाना मुमकिन हो गया।

 

सस्ता और बड़े पैमाने पर आसानी से बनाया जा सकने वाला सिंथेटिक वैनिलिन जल्द ही आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, परफ्यूम, बेकरी उत्पादों और पैकेज्ड फूड में इस्तेमाल होने लगा। इससे कभी बेहद कीमती माने जाने वाला वनीला एक आम स्वाद बन गया।

 

जेनिंग्स के अनुसार, कृत्रिम वैनिलिन के आने से वनीला के प्रति लोगों की धारणा बदल गई है। 1880 से 1960 के बीच सिंथेटिक वैनिलिन ने वनीला को अधिक लोगों तक पहुंचाया। लेकिन इसके साथ ही यह कुछ खास लगना भी बंद हो गया। उनके शब्दों में कहें तो, सिंथेटिक वैनिलिन की सपाट खुशबू ने वनीला के लिए ‘साधारण' या ‘फीकी' धारणा को बढ़ावा दिया। इसमें असली वनीला जैसी गहराई और विविधता महसूस नहीं होती।

 

जबकि असली वनीला की फली में 200 से भी ज्यादा तरह के प्राकृतिक कंपाउंड होते हैं, जिसका ना कभी स्वाद फीका था और ना ही इतिहास की कहानी।

Stocks to Watch: 5 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 19 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 5 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर फोकस में रहने वाले हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के दमदार नतीजे पेश किए हैं। कुछ के शेयर बड़े कॉरपोरेट ऐलान की वजह से चर्चा में रहेंगे। इसके अलावा HDFC Bank की AGM और RBI की मौद्रिक नीति का फैसला भी बाजार की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में इन 19 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा बैंक HDFC Bank की 32वीं सालाना आम बैठक (AGM) 5 अगस्त को होगी। बैठक में नए नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजीव कुमार की नियुक्ति पर मुहर लग सकती है। बैंक AT-1, Tier-II और लॉन्ग-टर्म बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने की मंजूरी भी मांगेगा। नए CEO की नियुक्ति पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Marico

FMCG कंपनी Marico का जून तिमाही का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 27% बढ़कर ₹652 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹513 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹3,957 करोड़ पहुंच गया। मुनाफा और रेवेन्यू दोनों बाजार के अनुमान से बेहतर रहे।

Bharti Airtel

टेलीकॉम कंपनी Bharti Airtel का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 11.5% बढ़कर ₹8,167 करोड़ रहा। रेवेन्यू 5.7% बढ़कर ₹58,539 करोड़ और EBITDA 4.8% बढ़कर ₹33,599 करोड़ पहुंच गया। ARPU बढ़कर ₹264 हो गया। मुनाफा अनुमान से कम रहा, लेकिन रेवेन्यू, EBITDA और मार्जिन उम्मीद से बेहतर रहे।

LIC

सरकारी बीमा कंपनी LIC के OFS में सरकार ने 4% के ग्रीनशू ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके बाद OFS का आकार बढ़कर 6.5% हिस्सेदारी के बराबर हो जाएगा। शुरुआती ऑफर 2.5% हिस्सेदारी का था। बेहतर मांग मिलने के बाद सरकार ने ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल किया।

Nykaa

ब्यूटी और लाइफस्टाइल ई-कॉमर्स कंपनी Nykaa का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 3 गुना बढ़कर ₹79.7 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹24.4 करोड़ था। रेवेन्यू 29.1% बढ़कर ₹2,782 करोड़ और EBITDA 67.8% बढ़कर ₹236 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन 6.5% से बढ़कर 8.5% हो गया।

ONGC

सरकारी महारत्न तेल एवं गैस कंपनी ONGC का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 156% बढ़कर ₹17,034 करोड़ पहुंच गया। यह बाजार के अनुमान से भी काफी बेहतर रहा। कंपनी की कुल आय 29.3% बढ़कर ₹46,461 करोड़ और EBITDA 124% बढ़ा। कंपनी ने अब तक का सबसे ऊंचा प्री-टैक्स प्रॉफिट भी दर्ज किया।

NHPC

सरकारी पावर कंपनी NHPC का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 2.9% बढ़कर ₹1,095.87 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 18.5% बढ़कर ₹3,808.31 करोड़ रहा। EBITDA 30.6% बढ़कर ₹2,352.19 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 56.1% से बढ़कर 61.8% हो गया।

Tata Investment Corporation

निवेश कंपनी Tata Investment Corporation का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा ₹139 करोड़ से बढ़कर ₹164 करोड़ हो गया। कंपनी की आय भी ₹170 करोड़ से बढ़कर ₹209 करोड़ पहुंच गई। तिमाही के दौरान निवेश से बेहतर कमाई का असर नतीजों में दिखा।

MCX

कमोडिटी एक्सचेंज MCX का शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 22% घटकर ₹413.4 करोड़ रह गया। कंपनी की आय 21% घटकर ₹702 करोड़ रही। EBITDA 26% घटकर ₹494 करोड़ और EBITDA मार्जिन 74.9% से घटकर 70.4% पर आ गया।

Bharti Hexacom

टेलीकॉम कंपनी Bharti Hexacom का शुद्ध मुनाफा 23.2% बढ़कर ₹482.4 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 10.9% बढ़कर ₹2,510 करोड़ रहा। EBITDA 13.9% बढ़कर ₹1,322.2 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 51.29% से बढ़कर 52.68% हो गया।

Sundram Fasteners

ऑटो कंपोनेंट्स कंपनी Sundram Fasteners का शुद्ध मुनाफा ₹138 करोड़ से बढ़कर ₹151 करोड़ हो गया। कंपनी की आय भी ₹1,350 करोड़ से बढ़कर ₹1,615 करोड़ पहुंच गई। मजबूत बिक्री से कंपनी के नतीजों में सुधार देखने को मिला।

Deepak Nitrite

केमिकल कंपनी Deepak Nitrite का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा ₹345 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹112.2 करोड़ था। रेवेन्यू 36.4% बढ़कर ₹2,577.6 करोड़ और EBITDA ₹189.4 करोड़ से बढ़कर ₹540.2 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन 10.03% से बढ़कर 20.96% पहुंच गया।

Castrol India

लुब्रिकेंट कंपनी Castrol India का शुद्ध मुनाफा 42.5% बढ़कर ₹347 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹1,871 करोड़ और EBITDA 40.8% बढ़कर ₹599.4 करोड़ रहा। कंपनी ने ₹6.25 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

Dredging Corporation of India

सरकारी ड्रेजिंग कंपनी Dredging Corporation of India घाटे से मुनाफे में लौट आई है। कंपनी ने ₹11.23 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में ₹23.33 करोड़ का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 46.7% बढ़कर ₹355.4 करोड़ और EBITDA 32% बढ़कर ₹62 करोड़ रहा।

BSE

स्टॉक एक्सचेंज BSE का शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 9.6% बढ़कर ₹874 करोड़ हो गया। रेवेन्यू ₹1,566 करोड़ रहा। कंपनी ने India International Bullion Holding (IIBH) में अपनी हिस्सेदारी 3.33% से बढ़ाकर 20% करने का भी फैसला किया है।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance का शुद्ध मुनाफा 4.3% बढ़कर ₹554.5 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 7.5% बढ़कर ₹788.4 करोड़ पहुंच गई। कंपनी का लोन कारोबार लगातार बढ़ता रहा।

United Breweries

बीयर बनाने वाली कंपनी United Breweries का शुद्ध मुनाफा 9.5% घटकर ₹166 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 7.1% बढ़कर ₹3,067 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 9.1% घटकर ₹283 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन 10.9% से घटकर 9.2% हो गया।

ASK Automotive

ऑटो कंपोनेंट्स कंपनी ASK Automotive का शुद्ध मुनाफा 28.8% बढ़कर ₹85.12 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 52.4% बढ़कर ₹1,358.1 करोड़ और EBITDA 34.3% बढ़कर ₹160.6 करोड़ रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन 13.42% से घटकर 11.83% रह गया।

Metropolis Healthcare

डायग्नोस्टिक कंपनी Metropolis Healthcare का शुद्ध मुनाफा 25.8% बढ़कर ₹57 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 16.6% बढ़कर ₹450 करोड़ रहा। EBITDA 22% बढ़कर ₹217 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन बढ़कर 48.3% हो गया।

RBI की मौद्रिक नीति

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर बुधवार को बाजार की नजर रहेगी। गवर्नर संजय मल्होत्रा रेपो रेट, महंगाई, GDP ग्रोथ और पॉलिसी रुख का ऐलान करेंगे। उनके बयान का असर बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और हाउसिंग फाइनेंस शेयरों पर देखने को मिल सकता है।

तिमाही नतीजे

कई कंपनियां 5 अगस्त को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Aegis Vopak Terminals, Allcargo Logistics, Arisinfra Solutions, Asahi India Glass, Aurobindo Pharma, Bikaji Foods International, Biocon और Cummins India जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन शेयरों पर कारोबार के दौरान नजर रहेगी।

ONGC Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 112% बढ़ा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का फायदा मिला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IndiGo की 20वीं सालगिरह पर बड़ा ऑफर, 20 हजार लोगों को मिलेगा फ्लाइट का फ्री टिकट! जानें कैसे उठाएं स्कीम का फायदा

अगर आप इंडिगो से घरेलू फ्लाइट बुक करने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की है। इंडिगो अपनी एनिवर्सरी के मौके पर एक खास ऑफर लेकर आया है। इस कैंपेन के तहत कुछ चुनिंदा यात्रियों को 10,000 रुपये तक का फ्लाइट किराया वापस मिलने का मौका मिलेगा। ये सुविधा केवल तय अवधि के दौरान की गई एलिजिबल डोमेस्टिक बुकिंग पर ही लागू होगी। पहले कुछ लोगों का रैंडम तरीके से सेलेक्ट किया जाएगा और इसके बाद उन्हें इंडिगो से जुड़े एक सवाल का सही जवाब देना होगा। सभी शर्तें पूरी करने वाले यात्रियों को ही इस ऑफर का फायदा मिल सकेगा। आइए जानते हैं कैसे कर सकते हैं इसके लिए आवेदन

कैसे उठाए योजना का लाभ

स्टेप 1: ऑफर के दौरान करें फ्लाइट बुक

इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को 4 अगस्त से 6 अगस्त 2026 के बीच अपनी फ्लाइट बुक करनी होगी। केवल इसी अवधि में की गई बुकिंग को इस कैंपेन के लिए वैलिड माना जाएगा। ये ऑफर घरेलू उड़ानों की इकॉनमी और स्ट्रेच श्रेणी ( प्रीमियम बिजनेस क्लास) पर लागू है। इसमें एक तरफ की यात्रा, आने-जाने की टिकट, कनेक्टिंग फ्लाइट और मल्टी-सिटी यात्रा जैसी सभी आइटिनररी बुकिंग शामिल हैं।

स्टेप 2: ऑफिशियल बुकिंग चैनल का इस्तेमाल करें

इस ऑफर में शामिल होने के लिए टिकट की बुकिंग केवल इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या एयरलाइन के स्काई प्लेटफॉर्म से करनी होगी। अगर टिकट किसी ट्रैवल एजेंट, ऑनलाइन ट्रैवल वेबसाइट या किसी अन्य थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म से खरीदा गया है, तो वह इस ऑफर के लिए वैलिड नहीं होगा। इसके अलावा इंटरनेशनल उड़ानों और कोडशेयर फ्लाइट की बुकिंग पर भी ये ऑफर लागू नहीं होगा।

स्टेप 3: सही कॉन्टैक्ट डिटेल्स डालें

टिकट बुक करते समय अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही दर्ज करना बहुत जरूरी है। अगर आपका शॉर्टलिस्ट होते हैं, तो इंडिगो इन्हीं रजिस्टर्ड कॉन्टैक्ट डिटेल्स पर ईमेल और WhatsApp के जरिए एक सवाल भेजेगा। इसलिए बुकिंग के बाद इन जानकारियों में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

स्टेप 4: रैंडम सिलेक्शन का इंतजार करें

सिर्फ एलिजिबल टिकट बुक कर लेने से किसी कस्टमर को इनाम नहीं मिलेगा। सबसे पहले इंडिगो तय प्रक्रिया के तहत रैंडम तरीके से कुछ यात्रियों का चयन करेगा। एयरलाइन का लक्ष्य इस कैंपेन के दौरान करीब 20,000 लोगों को शॉर्टलिस्ट करने का है। इसके बाद चुने गए यात्रियों को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी वे ऑफर का लाभ पाने के लिए योग्य माने जाएंगे।

4 अगस्त: 10,000 पार्टिसिपेंट्स

5 अगस्त: 5,000 पार्टिसिपेंट्स

6 अगस्त: 5,000 पार्टिसिपेंट्स

स्टेप 5: सवाल का सही जवाब दें

जिन ग्राहकों का सेलेक्शन होगा, उन्हें इंडिगो की ओर से एक सवाल भेजा जाएगा। नोटिफिकेशन मिलने के बाद उसका जवाब देने के लिए 48 घंटे का समय दिया जाएगा। सही उत्तर देने के लिए तीन अवसर मिलेंगे। तय समय के भीतर सही जवाब देने वाले ग्राहक ही रिफंड पाने के लिए पात्र माने जाएंगे।

स्टेप 6: रिफंड पाएं

जो यात्री सभी शर्तें पूरी करेंगे और अंतिम रूप से चयनित होंगे, उन्हें लागू टैक्स सहित अधिकतम 10,000 रुपये तक का टिकट किराया वापस किया जाएगा। इंडिगो की ओर से पात्रता की पुष्टि होने के बाद 3 से 5 वर्किंग डेज के भीतर रिफंड की राशि उसी माध्यम से भेज दी जाएगी, जिससे टिकट का भुगतान किया गया था।

Marico Q1 Results: प्रॉफिट 25% बढ़कर 630 करोड़, रेवेन्यू 23 फीसदी बढ़ा

Marico Q1 Results: मैरिको ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफि साल दर साल आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 630 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में प्रॉफिट 504 करोड़ रुपये था। कंपनी ने 25 जून को बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया।

भारत में बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 11 फीसदी

जून तिमाही में Marico के अच्छे प्रदर्शन में स्ट्रॉन्ग डिमांड, कोपरा की कीमतों में नरमी और नए बिजनेसेज की अच्छी ग्रोथ का हाथ है। भारत में कंपनी के बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 11 फीसदी रही। यह बीती 18 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। कंपनी के शेयरों पर नतीजों का असर 5 अगस्त को बाजार खुलने पर दिखेगा।

मानसून की स्थिति और इनफ्लेशनरी प्रेशर पर नजर

कंपनी ने बयान में कहा, “जून तिमाही में डिमांड ट्रेंड में स्थिरता दिखी, जिसे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का सपोर्ट मिला। कंपनी कंजम्प्शन ट्रेंड को लेकर पाॉजिटिव है, लेकिन इनफ्लेशनरी प्रेशर पर नजर बनाए रखना जरूरी है। अल नीनो के असर के पूर्वानुमान के बीच मानसून के प्रोग्रेस पर भी नजर रहेगी।”

ऑपरेशंस से रेवेन्यू 23 फीसदी बढ़कर 3,957 करोड़

जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 23 फीसदी बढ़कर 3,957 करोड़ रुपये रहा। कंसॉलिडेटेड एबिड्टा मार्जिन 40 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 20.7 फीसदी रहा। EBITDA का मतलब इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन से पहले की अर्निंग्स है।

स्टैंडएलोन रेवेन्यू 19 फीसदी बढ़कर 2794 करोड़ रुपये

स्टैंडएलोन बेसिस पर कंपनी का नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 40 फीसदी गिरकर 460 करोड़ रुपये रहा। इसकी वजह कंपनी के खर्च में इजाफा है। स्टैंडएलोन रेवेन्यू 19 फीसदी बढ़कर 2,794 करोड़ रुपये रहा। इंडियन बिजनेस का रेवेन्यू 21 फीसदी बढ़कर 3,003 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कहा है कि उसका 96 फीसदी मार्केट पोर्टफोलियो जून तिमाही में बढ़ा या मार्केट शेयर मौजूदा लेवल पर बनाए रखा।

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बीते एक साल में करीब 23 फीसदी चढ़ा है शेयर 

कंपनी के प्रोडक्ट्स में कई लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं। इनमें Parachute, Saffola, Hair and Care, Nihar Naturals, Beardo, Just Herbs, True Elements, Plix, Cosmix और 4700BC शामिल हैं। कंपनी के शेयर 4 अगस्त को 0.68 फीसदी गिरकर 875 रुपये पर बंद हुए। बीते एक साल में यह शेयर 22.73 फीसदी चढ़ा है।

PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! ‘अल जजीरा’ पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत

Al Jazeera ban in Pakistan

Al Jazeera ban in Pakistan: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालिया चुनावी घटनाक्रम और सरकार विरोधी प्रदर्शनों की निष्पक्ष कवरेज करने पर कतर के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'अल जजीरा' पर पाकिस्तान सरकार की गाज गिरी है। पाकिस्तान में अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक किए जाने की खबरें हैं। जानिए इस पूरे विवाद का विवरण और क्या है PoK से जुड़ा ऐतिहासिक व राजनीतिक मामला।

 

मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया दावों के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार ने कतर के इस प्रमुख समाचार नेटवर्क की अंग्रेजी वेबसाइट तक पहुंच को बाधित (ब्लॉक) कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने औपचारिक रूप से बैन का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन देश भर में यूजर्स अल जजीरा की वेबसाइट एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। ALSO READ: PoK के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता, मुनीर ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को ही गोलियों से भून डाला

पाकिस्तान सरकार का आरोप

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अल जजीरा की रिपोर्टिंग पर सख्त ऐतराज जताते हुए उस पर 'चुनिंदा रिपोर्टिंग' और 'पीत पत्रकारिता' करने का आरोप लगाया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि अल जजीरा ने PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद के कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों से एकतरफा रिपोर्टिंग की और चुनिंदा लोगों के बयानों को दिखाकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश की। पाकिस्तान का दावा है कि इस तरह की कवरेज बाहरी ताकतों के उस एजेंडे को बढ़ावा देती है जिसका मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को कमजोर करना है। ALSO READ: PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

CPJ की चिंता, पत्रकारों के गायब होने से बवाल

दूसरी ओर, प्रेस की स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मीडिया पर बढ़ते प्रतिबंधों और सेंसरशिप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। CPJ के अनुसार, 1 अगस्त को स्वतंत्र पत्रकार राजी ताहिर और उनके सहयोगी मुहम्मद सैफ को इस्लामाबाद स्थित उनके दफ्तर से पुलिस की वर्दी में आए लोग उठा ले गए, जिसके बाद से वे लापता हैं।

 

एक अन्य कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम को भी 1 अगस्त को हिरासत में लिया गया था, हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। CPJ का कहना है कि 5 जून से ही PoK में आंशिक इंटरनेट बंदी, टेलीकॉम सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध और अल जजीरा जैसी वैश्विक वेबसाइट्स को ब्लॉक करना यह साबित करता है कि पाकिस्तान मीडिया की आवाज दबाने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहा है। ALSO READ: पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK/PoJK): कब बनेगा भारत का हिस्सा, जानिए इतिहास

क्या है PoK से जुड़ा पूरा मामला?

वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के बाद, पाकिस्तान ने कबायलियों के वेश में अपनी सेना भेजकर जम्मू-कश्मीर रियासत के एक बड़े भू-भाग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। इसे भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) कहता है। पाकिस्तान इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटकर देखता है— एक हिस्से को वह 'आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK)' कहता है और दूसरे हिस्से को 'गिलगित-बाल्टिस्तान'।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत का स्पष्ट और निरंतर रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल हैं) भारत का अखंड और अभिन्न अंग है। 1994 में भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के तहत, पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करना होगा।

PoK में जनता का आक्रोश

PoK में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ स्थानीय जनता में भारी असंतोष है। महंगाई, भारी टैक्स, बुनियादी सुविधाओं की कमी, राजनीतिक अधिकारों के हनन और चुनावों में धांधली को लेकर मुजफ्फराबाद, रावलकोट, और कोटली जैसे इलाकों में अक्सर बड़े पैमाने पर उग्र प्रदर्शन होते रहे हैं। पाकिस्तान जब भी यहां दिखावे के लिए चुनाव कराता है, तो उस पर भारी धांधली और सेना के हस्तक्षेप के आरोप लगते हैं।

MTAR Tech Share Price: लगातार चौथे दिन शेयर में अपर सर्किट, एक साल में पैसा तीन गुना किया

MTAR Tech Share Price: एमटीएआर के शेयरों में 4 अगस्त को लगातार चौथे दिन अपर सर्किट लगा। करीब एक हफ्ते में यह शेयर 21 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। शेयरों में तेजी की वजह जून तिमाही में कंपनी का अच्छा प्रदर्शन है। इसके अलावा अमेरिका में कंपनी के मुख्य क्लाइंट को लेकर इनवेस्टर सेंटीमेंट पॉजिटिव है। मंगलवार को बाजार खुलते ही शेयर 5 फीसदी के उछाल से 6,312 रुपये पर पहुंच गया। कंपनी न्यूक्लियर, स्पेस, डिफेंस और क्लीन एनर्जी सेक्टर्स के लिए प्रिसिजन कंपोनेंट्स बनाती है।

शेयर ने एक साल में पैसा तीन गुना किया

एनालिस्ट्स का कहना है कि MTAR Technologies का प्रदर्शन जून तिमाही में शानदार रहा। कंपनी की ऑर्डर बुक स्ट्रॉन्ग रही और एग्जिक्यूशन भी बेहतर रहा। यह शेयर 30 जुलाई से लगातार चढ़ रहा है। इस दौरान यह करीब 22 फीसदी उछला है। बीते एक साल में यह शेयर 335.39 फीसदी चढ़ा है। इस साल शेयर में 163.5 फीसदी उछाल आ चुका है।

ऑपरेशन से जुड़े रिस्क में आई है कमी 

शेयर डॉट मार्केट बाय फोनपे में मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि कंपनी के ऑपरेशन से जुड़ा रिस्क घटा है। इससे शेयरों पर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। जून तिमाही में कंपनी का नेट वर्किंग कैपिटल डेज घटकर 59 पर आ गया है। मार्च तिमाही में यह 172 था। वर्किंग कैपिटल डेज से कंपनी की ऑपरेशनल एफिशियंसी और शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी का पता चलता है।

कुल ऑर्डरबुक बढ़कर 5000 करोड़ रुपये के पार

उन्होंने कहा कि कंपनी की ग्रोथ में उसकी रिकॉर्ड ऑर्डरबुक का हाथ है। उन्होंने कहा, “जून तिमाही में कंपनी को 2,895 रुपये के ऑर्डर मिले। यह किसी एक तिमाही में मिला सबसे ज्यादा ऑर्डर (वैल्यू में) हैं। इससे कंपनी के कुल ऑर्डर FY26 से ज्यादा हो गए हैं। इससे 30 जून को कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 5,143 करोड़ रुपये की हो गई।”

रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 130 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 130.4 फीसदी बढ़कर 360.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 199.7 फीसदी बढ़कर 85.1 करोड़ रुपये हो गया। टैक्स के बाद कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 364.5 फीसदी बढ़कर 50.2 करोड़ रुपये हो गया। जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 50.2 करोड़ रुपये रहा।

क्या अभी निवेश करने का सही टाइम है?

ब्लूम एनर्जी से रिश्तों ने एमटीएआर को मजबूती दी है। ब्लूम एनरजी AI डेटा सेंटर्स के लिए फ्यूल सेल सॉल्यूशंस सप्लाई करती है। व्योमिंग (Wyoming) में प्रस्तावित 1.8 GW के डेटा सेंटर में ब्लूम एनर्जी के फ्यूल सेल्स के इस्तेमाल की संभावना है। एक्सपर्ट का कहना है कि नए निवेशक इस शेयर में निवेश के लिए सही मौके का इंतजार कर सकते हैं।

मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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