इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

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17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

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Jio Financial share price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 4% दौड़ा, अब खरीदें, बेचें या रहें बने, जानिए क्या कहते है बाजार जानकार

Jio Financial share price: रिलायंस ग्रुप का शेयर Jio Financial Services शुक्रवार, 17 जुलाई को 4 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। हालांकि शेयर आज सुबह के काराबोर में 6 फीसदी चढ़ा था। शेयर में यह तेजी कंपनी के जून तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद देखने को मिली। जून तिमाही में कंपनी का टैक्स के बाद प्रॉफ़िट (PAT) पिछले साल के 325 करोड़ से 156% बढ़कर ₹830 करोड़ हो गया। यह कंसोलिडेटेड बेसिस पर पिछली तिमाही के ₹272 करोड़ से 205% ज़्यादा था।

वहीं प्री-प्रोविज़निंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के 366 करोड़ से 38% और लगातार ₹327 करोड़ से 54% ज़्यादा है। पहली तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) या कोर इनकम बढ़कर ₹544 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹264 करोड़ से 106% और पिछली तिमाही के ₹345 करोड़ से 58% ज़्यादा है।

जून तिमाही में इसके NBFC बिजनेस का ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 163% बढ़कर ₹30,667 करोड़ हो गया। इस बीच, इसका तिमाही डिस्बर्समेंट ₹11,250 करोड़ को पार कर गया।

क्या है स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ पर “Buy” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 315 रुपये का टारगेट दिया है जो मौजूदा स्तर से इसमें 34 फीसदी की बढ़त दिखाता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ ने एक अच्छी तिमाही दर्ज की, जिसमें जियो क्रेडिट बढ़ा और साथ ही इसका AUM 30,000 करोड़ को पार कर गया। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि इसके दूसरे बिज़नेस में भी लगातार तरक्की हुई है, जिसमें पेमेंट्स बिज़नेस में प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार और इसके इंश्योरेंस और AMC फ्रेंचाइजी में लगातार बढ़ोतरी शामिल है।

हालांकि, नए बिजनेस को इनक्यूबेट करने और मौजूदा ऑपरेशन को बढ़ाने में चल रहे इन्वेस्टमेंट के कारण इसका ऑपरेटिंग खर्च ज़्यादा बना हुआ है।

ब्रोकरेज ने मौजूदा बिजनेस में इन्वेस्टमेंट की वजह से ज़्यादा ऑपेक्स को ध्यान में रखते हुए FY27 और FY28 के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमान में क्रमशः 4% और 6% की कटौती की है।स्टॉक FY27 के अनुमानित प्राइस-टू-बुक वैल्यू के 1x पर ट्रेड कर रहा है। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि यह FY26-28 के दौरान 46% की कंसोलिडेटेड PAT कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का मॉडल बनाता है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि इसके सम-ऑफ-द-पार्ट्स में इंश्योरेंस मैन्युफैक्चरिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, ब्रोकिंग और मार्केटप्लेस जैसे बिज़नेस के वैल्यूएशन को शामिल नहीं किया गया है, जो अभी भी अपने इनक्यूबेशन फेज में हैं।

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Jio Financial Q1 Results: जियो फाइनेंशियल का प्रॉफिट 156% बढ़कर 830 करोड़ रुपये पहुंचा, रेवेन्यू तीन गुना से ज्यादा

Jio Financial Q1 Results: जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने 16 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 156 फीसदी बढ़कर 830 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का नेट प्रॉफिट 325 करोड़ रुपये था। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। 17 जुलाई को कंपनी के शेयरों पर नतीजों का असर दिखेगा।

कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 227 फीसदी बढ़ा

Jio Financial Services का ऑपरेशंस से कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू जून तिमाही में 227 फीसदी बढ़कर 2,004 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 612 करोड़ रुपये था। तिमाही दर तिमाही आधार पर जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 205 फीसदी बढ़कर 272 करोड़ रुपये रहा।

कुल इनकम में 141 फीसदी इजाफा

जून तिमाही में ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज में तेज उछाल के बावजूद कंपनी की कुल इनकम साल दर साल आधार पर 141 फीसदी बढ़कर 1,496 करोड़ रुपये रही। इसमें इंटरेस्ट इनकम में उछाल का बड़ा हाथ रहा। इस दौरान इंटरेस्ट इनकम 165 फीसदी बढ़कर 962 करोड़ रुपये हो गई। फीस और कमीशन से इनकम बढ़कर पांच गुना यानी 325 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की डिविडेंड इनकम जून तिमाही में 509 करोड़ रुपये रही।

कुल एक्सपेंसेज 291 फीसदी बढ़ा

जियो फाइनेंशियल का कुल एक्सपेंसेज जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 291 फीसदी बढ़कर 991 करोड़ रुपये रहा। इसमें ज्यादा फाइनेंस कॉस्ट, स्टाफ एक्सपेंसेज और दूसरे ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज का हाथ रहा। लेकिन, इनकम में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ से प्री-प्रोविजनिंग प्रॉफिट (PPOP) साल दर साल आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 505 करोड़ रुपये रहा।

सभी वर्टिकल्स में अच्छी ग्रोथ 

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ हितेश सेठिया ने कहा, “हमारी सभी वर्टिकल्स में लगातार बिजनेस मोमेंटम से हमारे फुल-स्टॉक ईकोसिस्टम के स्ट्रॉन्ग आर्किटेक्चर की पुष्टि होती है। इससे हमारे एग्जिक्यूशन की ताकत का भी संकेत मिलता है। स्ट्रेटेजिक रूप से AI और डेटा एनालिटिक्स को इंटिग्रेट करने से हमें एफिशियंसी के मामले में काफी फायदा हुआ है।”

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एनबीएफसी बिजनेस का भी बेहतर प्रदर्शन

जियो फाइनेंशियल ने इनवेस्टर प्रजेंटेशन में बताया कि उसके एनबीएफसी बिजनेस ने लगातार अच्छी ऑर्गेनिक ग्रोथ दिखाई है। तिमाही डिस्बर्समेंट 11,000 करोड़ रुपये के पार हो गया। कंपनी के एसेट मैनेजमेंट बिजनेस का एयूएम जून तिमाही के अंत में 18,412 करोड़ रुपये पहुंच गया। रीइंश्योरेंस प्रीमियम अंडररिटेन ऑपरेशन की पहली तिमाही में 266 करोड़ रुपये रहा।

Cochin Shipyard Share Price: बीते 6 महीनों में 10% गिरावट के बाद कोचिन शिपयार्ड के शेयरों में निवेश का बड़ा मौका

Cochin Shipyard Share Price: किसी सरकारी कंपनी का शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के ऐलान के बाद गिरने लगता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर्स को लगता है कि कंपनी डिस्काउंट पर अपने शेयर बेचेगी। कंपनी के कई मौजूदा इनवेस्टर्स ओएफएस से पहले अपने शेयर बेचते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि शेयर की कीमत गिरकर डिस्काउंटेड ऑफर प्राइस के करीब पहुंच जाएगी। कोचिन शिपयार्ड के ओएफएस के वक्त भी ऐसा देखने को मिला।

OFS के ऐलान के बाद शेयरों में गिरावट 

सरकार ने कोचिन शिपयार्ड में ओएफएस के जरिए अपनी 5.04 फीसदी हिस्सेदारी बेची है। उसने प्रति शेयर 1400 रुपये का प्राइस तय किया था। इसके बाद शेयर की कीमत इस साल मई के मध्य में 1800 रुपये से करीब 7 फीसदी गिर गई। हालांकि, इस गिरावट से शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है। लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ की अच्छी संभावना है। कंपनी की ऑर्डर बुक स्ट्रॉन्ग है। एग्जिक्यूशन में इम्प्रूवमेंट है। शिप रिपेयर क्षमता भी बढ़ रही है।

26000 करोड़ रुपये की स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक

कंपनी की ऑर्डर बुक करीब 26,000 करोड़ रुपये की है। यह FY26 में रेवेन्यू की छह गुनी है। इससे अगले कुछ सालों तक कंपनी के रेवेन्यू की तस्वीर साफ है। आगे डिफेंस और कमर्शियल शिप बिल्डिंग के करीब 10,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं। कंपनी इनके लिए बोली लगाएगी। मैनेजमेंट को मीडियम टर्म में ऑर्डर बुक 12-15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसकी वजह नवल शिपबिल्डिंग, कमर्शियल शिप और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते मौके हैं।

45 फीसदी का दमदार मार्केट शेयर 

भारत में शिप-रिपेयर इंडस्ट्री में कोचिन शिपयार्ड ने अपनी अच्छी पैठ बना ली है। इसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी तक पहुंच गई है। यह अकेली भारतीय शिपयार्ड कंपनी है, जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर की रिपेयरिंग क्षमता भी है। पिछली 2-3 तिमाहियों में इस सेगमेंट में प्रदर्शन कमजोर रहा है। लेकिन, मैनेजमेंट को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने अगले तीन सालों में शिप रिपेयर से करीब 2,500 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट रखा है। वाडिनार शिफ रिपेयर फैसिलिटी के तैयार हो जाने पर कंपनी की रिपेयिरंग क्षमता बढ़ जाएगी।

15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ का गाइडेंस

मैनेजमेंट ने रेवेन्यू ग्रोथ के लिए करीब 15 फीसदी गाइडेंस दिया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही से एग्जिक्यूशन में इम्प्रूवमेंट दिखा है। ग्रोथ बढ़ाने के लिए कंपनी ने अगले तीन सालों में 2,500 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का प्लान बनाया है। यह कंपनी के 6,500 करोड़ रुपये के इनवेस्टमेंट प्लान का हिस्सा है। कंपनी नॉन-डिफेंस ग्रोथ के रास्ते भी तलाश रही है।

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शेयरों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर 

कंपनी के शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के करीब 32 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह इसके एक साल के औसत करीब 65 गुना के फॉरवर्ड पी/ई से काफी कम है। कंपनी के शेयरों की वैल्यूएशन में कमी आई है, जबकि फंडामेंटल्स बेहतर हुए हैं। अभी शेयरों में निवेश का अच्छा मौका है। स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक, बढ़ता शिप रिपेयरिंग बिजनेस और बेहतर होती अर्निंग्स की तस्वीर शेयर को अट्रैक्टिव बनाती है।

विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भारतीय शेयर बाजारों को लेकर बदला है। उन्होंने 10 जुलाई को भी भारतीय बाजार में अच्छी खरीदारी की। उन्होंने 2,603.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवशकों (डीआईआई) ने भी 2,019.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा पर आधारित है। एफआईआई और डीआईआई की खरीदारी से 10 जुलाई को भारतीय बाजार में अच्छी रौनक दिखी।

10 जुलाई को ज्यादातर सूचकांकों में रही तेजी

बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स सहित सभी दूसरे सूचकांक 10 जुलाई को हरे निशान में बंद हुए। Nifty 1.02 फीसदी यानी 244.10 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.08 फीसदी यानी 827 अंक के उछाल के साथ 77,569 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.39 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। 9 जुलाई को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। 8 जुलाई को बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटना था।

10 जुलाई को FIIs ने की 2019 करोड़ रुपये की खरीदारी

FII ने 10 जुलाई को 15,318.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 12.714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह भारतीय बाजार में उनकी शुद्ध खरीदारी 2,603.73 करोड़ रुपये की रही। DII ने 17,171.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 15,152.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 2,019 करोड़ रुपये की रही। डीआआई ने लगातार खरीदारी कर घरेलू शेयर बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही तो चढ़ेगा बाजार

विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में बदलाव दिख रहा है। जुलाई में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से खरीदारी की है। उन्होंने इस महीने 1,968.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस दौरान DII ने 9,245.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लौटना भारतीय शेयर बाजारों के लिए शुभ संकेत है। अगर आगे वे खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है।

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निवेशकों की नजरें जून तिमाही के नतीजों पर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इनवेस्टर्स का फोकस अब जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर है। आगे इन नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता है। अगर क्रूड की कीमतें भी स्टेबल रहती हैं तो बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बाजार के लिए बड़ा रिस्क है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

भारत के बारे में विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर बदले, कहा-जल्द बाजार में लौटने वाली है रौनक

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर भारतीय शेयर बाजारों पर बदल गए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में टेंशन फिर से बढ़ने से बाजार में तेज गिरावट के बावजूद निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर हायर इनपुट कॉस्ट्स और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर पड़ सकता है। लेकिन, कॉर्पोरेट अर्निंग्स में रिकवरी की संभावनाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

मीडियम टर्म में बाजार की संभावनाओं पर असर नहीं

मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि भारतीय बाजार में आई गिरावट की वजह साइक्लिकल है, न कि स्ट्रक्चरल। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मीडियम टर्म में भारतीय शेयर बाजार की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसने इसकी कई वजहें बताई हैं। जैसे ग्रोथ मोमेंटम में इम्प्रूवमेंट है। इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। भारतीय बाजार को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की राय बदलने की बड़ी वजह यह है कि डिमांड को लेकर उनकी चिंता कम हुई है।

जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

जेफरीज को जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ बीती 13 तिमाहियों में सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसमें बढ़ती इकोनॉमिक एक्टिविटी और हायर नॉमिनल जीडीपी का हाथ है। ऑयल एंड गैस और मेटल्स को छोड़ कंपनियों की अर्निंग्स साल दर साल आधार पर करीब 12 फीसदी बढ़ने की उम्मीद। फिलिप कैपिटल ने भी ऑयल एंड गैस को छोड़ निफ्टी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।

निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह

ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह दी है। कई स्ट्रेटेजिस्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मार्केट का फोकस अर्निंग्स मोमेंटम पर बढ़ेगा। यूपीएस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में फिर से टेंशन बढ़ने का असर भारत में मध्यम अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा।

इन सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद

ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों को फाइनेंशियल्स स्टॉक्स का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत बैलेंसशीट है। इंडस्ट्रियल और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि इनवेस्टमेंट से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से शेयरों बाजार के प्रदर्शन में इम्प्रूवमेंट आएगा। जेपी मॉर्गन ने कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स को अपनी पसंद बताया।

इन सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ ज्यादा रह सकती है

फिलिप कैपिटल ने जून तिमाही में एनबीएफसी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, डिफेंस और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की अर्निंग्स ग्रोथ सबसे ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, ऑयल एंड गैस, सीमेंट, हेल्थकेयर और मेटल्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे पेश करने शुरू कर दिए हैं। टीसीएस ने 9 जुलाई को अपने नतीजे पेश किए।

PB Fintech का शेयर बाजार खुलते ही क्रैश, ब्लॉक डील के बाद बढ़ा बिकवाली का दबाव

पीबी फिनटेक का शेयर 3 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। कंपनी के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की बिक्री करीब 1,741 करोड़ रुपये में हुई। इसके बाद शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। 10 बजे शेयर 7.31 फीसदी गिरकर 1,563.50 रुपये पर चल रहा था। पहले खबर आई थी कि सिंगापुर की सॉवरेन इनवेस्टमेंट फर्म टेमासेक होल्डिंग्स पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है।

इस साल अब तक 14 फीसदी गिर चुका है शेयर 

PB Fintech का शेयर इस साल अब तक करीब 14 फीसदी गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी में 7 फीसदी गिरावट आई है। पीबी फिनटेक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ब्लॉक डील में 1.08 शेयरों का ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 1,601 रुपये के रेट पर हुआ है। यह 2 जुलाई को शेयर के 1,682.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से करीब 4.8 रुपये का डिस्काउंट है।

अभी खरीदार और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं

स्टॉक एक्सचेंजों पर अभी शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह ट्रांजेक्शन 2 जुलाई को आई खबरों के मुताबिक है। खबरों में कहा गया है था कि टेमासेक होल्डिंग्स अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए पीबी फिनेटक के 1.19 करोड़ शेयर बेचना चाहती है। यह पीबी फिनेटक में 2.6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। खबरों में प्रति शेयर करीब 1,909 रुपये की कीमत पर ब्लॉक डील होने का अनुमान जताया गया था।

बीते कुछ महीनों में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने बेची हिस्सेदारी

इस ट्रांजेक्शन से पहले टेमासेक होल्डिंग्स की सब्सिडियरी MacRitchie Investments की PB Fintech में 6.47 फीसदी हिस्सेदारी थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को इस डील का एकलौता प्लेसमेंट एजेंट बताया गया था। बताया गया था कि इस डील के बाद टेमासेक पर अपनी बाकी हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिन का लॉक-अप लागू होगा। बीते कुछ महीनों में पीबी फिनटेक में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने हिस्सेदारी बेची है।

मई में दहिया और बंसल ने भी बेचे थे कंपनी के शेयर

इस साल मई में पीबी फिनेटक के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने करीब 38 लाख शेयर बेचे थे। यह कंपनी में करीब 0.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर था। यह ट्रांजेक्शन 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए हुआ था। मई में ही चीन की टेक्नलोजी कंपनी Tencent ने पीबी फिनटेक में अपनी बाकी 1.05 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।

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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी

3 जुलाई को शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। 10:20 बजे निफ्टी 0.68 फीसदी यानी 165 अंक चढ़कर 24,342 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 506 अंक के उछाल के साथ 78,000 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। आज बाजार में अच्छी तेजी का लगातार तीसरा दिन है।

Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल के शेयरों की बुलेट जैसी रफ्तार, जानिए क्या है एनालिस्ट्स की राय

Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 2 जुलाई को 17 फीसदी उछाल आया। शेयरों में लगातार दूसरे दिन तेजी दिखी। एक दिन पहले शेयर का भाव 20 फीसदी चढ़ा था, जिसके बाद अपर सर्किट लग गया था। बीते दो दिनों में यह शेयर करीब 37 फीसदी चढ़ चुका है।

15 जून को लिस्ट हुआ था शेयर

गुरुवार को वेदांता ऑयल एंड गैस का शेयर एनएसई पर 45.69 रुपये पर पहुंच गया। 15 जून को यह शेयर एनएसई पर 38 रुपये और बीएसई पर 39 रुपये पर लिस्ट हुआ था। गुरुवार को 45 रुपये की कीमत का मतलब है कि यह शेयर एनएसई में अपने लिस्टिंग प्राइस से 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है।

ग्रोथ के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एनालिस्ट मीट में प्रोडक्शन बढ़ाने, रिजर्व को बढ़ाने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाने के बारे में विस्तार से बताया। कंपनी का मानना है कि पूरे राजस्थान, कोस्टल एसेट्स, उत्तरपूर्व भारत और डीपवाटर में कंपनी के लिए ग्रोथ की काभी संभावनाएं हैं। इसे ऑयल रिकवरी प्रोग्राम पर सरकार के बढ़ते फोकस का भी फायदा मिलेगा।

ऑपरेटिंग खर्च बढ़ाने पर फोकस

पीएल कैपिटल के एनालिस्ट्स का कहना है कि वेदांता् ऑयल FY29 तक उत्पादन बढ़ाकर दोगुना करना चाहती है। कंपनी का फोकस ऑपरेटिंग खर्च घटाने पर भी है। FY26 में यह 16.5 डॉलर प्रति बैरल था। कंपनी इसे घटाकर 10-13 डॉलर प्रति बैरल तक लाना चाहती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एसेट-लेवल रोडमैप के बारे में बताया है। शॉर्ट टर्म में कई फैक्टर्स कंपनी को प्रोडक्शन बढ़ाने में हेल्पफुल हो सकते हैं।

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1 जुलाई को T2T से बाहर आया शेयर

वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर के शेयर 15 जून को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था। T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है। 1 जुलाई को ये शेयर टी2टी से बाहर आ गए।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

क्या सोना बेचकर शेयर खरीदने का समय आ गया? एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव ने निफ्टी और बैंक निफ्टी पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में पॉजिटिव बदलाव दिख रहा है। बीते करीब दो सालों में शेयर बाजार का रिटर्न अच्छा नहीं रहा है। पहले हाई वैल्यूएशन बड़ा चैलेंज था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की। वैल्यूएशन अब घटा है। उधर, मध्यपूर्व में तनाव कम हुआ है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका पाॉजिटिव असर शेयर बाजारों पर दिख रहा है। सीएनबीसी-टीवी18 ने निवेश और शेयर बाजार के आउटुलक के बारे में जानने के लिए इंडियाचार्ट्स के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के साथ बातचीत की।

बाजार नई तेजी के शुरुआती चरण में

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार कई वैश्विक और भू-राजनीतिक झटकों के बाद अब एक नए अपट्रेंड के शुरुआती चरण में है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का असर पहले ही पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्निकल चार्ट्स पर ‘हायर लो’ (Higher Lows) का बनना यह दर्शाता है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। बाजारों में इस तेजी के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी 24,300 के लेवल को तोड़ने के बाद ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाएगा। बैंक निफ्टी के भी 63,000 पर पहुंच जाने की उम्मीद है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स की तेजी में बड़ी भूमिका

उन्होंने कहा कि मार्केट में अगले चरण की रैली में बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स का बड़ा योगदान होगा। यह सेक्टर आने वाले समय में स्टार परफॉर्मर बन सकता है। अगर आगे इंटरेस्ट रेट में कमी देखने को मिलती है तो इससे बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। रुपये में स्थिरता भी बैंकिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। उधर,

रियल एस्टेट, एनर्जी, मेटल्स और पावर सेक्टर्स का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा मोमेंटम दिख रहा है और निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी के मौके ढूंढने चाहिए।

सोने की जगह यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय

श्रीवास्तव ने कहा कि सोने और चांदी में शॉर्ट-टर्म मोमेंटम इंडिकेटर्स ओवरबॉट (overbought) की स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इससे निकट अवधि में मुनाफावसूली दिख सकती है। उन्होंने कहा कि यह समय कीमती धातुओं (precious metals) पर फोकस थोड़ा कम कर शेयरों पर बढ़ाने का है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी अब एक नए ‘गोल्ड’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि निवेशकों को लार्जकैप आईटी शेयरों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर को लेकर भी सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।

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शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन शानदार तेजी

शेयर बाजार में 2 अप्रैल को लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 169 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.75 फीसदी यानी 579 अंक के उछाल के साथ 77,502 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी नाममात्र की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

LIC सहित इन 8 कंपनियों और बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, IDBI Bank का शेयर 2.46% उछला

सरकार एलआईसी सहित 8 बड़ी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचेगी। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने सरकार की वित्तीय सेहत पर दवाब बढ़ा दिया था। वित्तीय सेहत ठीक करने के लिए सरकार विनिवेश पर फोकस बढ़ाना चाहती है। इसके लिए एलआईसी, हिंदुस्तान जिंक सहित 8 कंपनियों में अगले कुछ महीनों में विनिवेश की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इनमें कुछ सरकारी बैंक भी शामिल हैं। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी।

LIC में हिस्सा बेचने से 10000 करोड़ मिल सकते हैं

Life Insurance Corporation (LIC) देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। ब्लूमबर्ग ने पहले खबर दी थी कि इस कंपनी में हिस्सेदारी बेच सरकार 10,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। Hindustan Zinc के शेयरों में हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 5,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार के विनिवेश कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी हर हफ्ते इस बारे में मीटिंग कर रहे हैं। इनवेस्टमेंट बैंकर्स इनवेस्टर्स डिमांड का पता लगा रहे हैं। वे शेयरों की कीमत और बिक्री के समय के बारे में भी विचार कर रहे हैं। मामले से जुड़े लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।

IDBI Bank के लिए भी नई बोलियां आमंत्रित की जा सकती हैं

इस मामले के बारे में जानकारी देने वाले लोगों ने यह भी बताया कि भविष्य में कुछ और सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए अतिरिक्त बैंकर्स की नियुक्ति की जा रही है। अथॉरिटीज IDBI Bank में ब़ड़ी हिस्सेदारी बेचने के लिए नई बोलियां (bids) आमंत्रित करने के बारे में भी सोच रही है। इसके लिए सरकार रिजर्व प्राइस में कमी कर सकती है। इससे पहले आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया इसलिए रोक दी गई थी, क्योंकि खरीदारों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। 2 जुलाई को IDBI Bank के शेयर में तेजी दिखी। यह 2.46 फीसदी चढ़कर 84.30 रुपये पर चल रहा था।

विदेशी निवेशकों ने इस साल 29 अरब डॉलर की बिकवाली की

इस बारे में पूछने पर वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सरकार ऐसे वक्त अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने जा रही है, जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ा है। इस साल की पहली छमाही में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इस दौरान निफ्टी में करीब 9 फीसदी की गिरावट में इसका बड़ा हाथ है।

इस साल जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के मेगा आईपीओ भी आएंगे

इस साल Jio Platforms और NSE के आईपीओ भी आने वाले हैं। सरकार के अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के प्लान पर इन आईपीओ का असर पड़ सकता है, क्योंकि ये दोनों ही आईपीओ काफी ज्यादा अमाउंट के होंगे। इस मामले की जानकारी देने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सरकार पहले Coal India और NHPC में हिस्सेदारी बेचकर निवेशकों के रिस्पॉन्स का पता लगाना चाहती है।

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सरकार का विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

सरकार ने इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। अप्रैल से जून के दौरान सरकार ने विनिवेश से करीब 2 अरब डॉलर (18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) जुटाए  हैं। यह बीते तीन सालों में हर साल विनिवेश से आए कुल अमाउंट से ज्यादा है। 2 जुलाई को शेयर बाजारों में तेजी दिखी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 0.50 फीसदी से ज्यादा मजबूती थी।