इस हफ्ते बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा चढ़ा बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल

भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता बीते करीब चार महीनों में सबसे अच्छा रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। इसमें उम्मीद से बेहतर जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों, रुपये में मजबूती और विदेशी निवेशकों की खरीदारी का हाथ रहा।

सेंसेक्स-निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी

इस हफ्ते सेंसेक्स 2.67 फीसदी यानी 2,034 अंक चढ़कर 78,094 पर बंद हुआ। Nifty 50 भी 2.59 फीसदी यानी 616 अंक की मजबूती के साथ 24,383 पर बंद हुआ। निफ्टी आईटी इस हफ्ते सबसे ज्यादा चढ़ने वाला सूचकांक रहा। इसमें 6.75 फीसदी उछाल आया। निफ्टी ऑटो में भी 5.61 फीसदी मजबूती आई।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी अच्छी तेजी

खास बात यह है कि इस हफ्ते छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। Nifty Smallcap 100 Index 2.6 फीसदी चढ़ा। Redington, Kaynes Technology India, Firstsource Solutions, Brigade Enterprises, Affle 3I, IIFL Finance, KFin Technologies और IFCI के शेयरों में 24 फीसदी तक तेजी दिखी।

इन मिडकैप शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी

Nifty Midcap Index में भी इस हफ्ते 2 फीसदी तेजी आई। Coforge, Lauras Labs, Swiggy, Container Corporation of India और Ashok Leyland के शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी आई। गिरने वाले शेयरों में Suzlon Energy, Phoenix Mills, Billionbrains Garage Ventures, Bank of India और LICHF प्रमुख रहे।

विदेशी निवेशकों की अच्छी खरीदारी 

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने दो हफ्ते के बाद भारतीय बाजार में इस हफ्ते निवेश किया। उन्होंने 5,946 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,387 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया। रुपये में बीते पांच हफ्तों से जारी गिरावट पर भी ब्रेक लग गया। यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 118 पैसे की मजबूती के साथ 95.39 के लेवल पर बंद हुआ।

निफ्टी अगले हफ्ते 24,500-24,60 लेवल टेस्ट कर सकता है

सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के लिए 24,100-23,800 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। रेसिस्टेंस 24,500-24,700 के लेवल पर है। बैंक निफ्टी के लिए 56,000-54,500 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। इसे 58,500-6000 के लेवल पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। अगले हफ्ते निफ्टी के 24,500-24,600 का लेवल टेस्ट करने की उम्मीद है।

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इस हफ्ते आए इन दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे

इस हफ्ते मारुति सुजुकी, ह्युंडई, एशियन पेंट्स, स्विगी, आईटीसी और सन फार्मा सहित कई दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आए। मारुति का प्रॉफिट 11 फीसदी गिरा। आईटीसी का प्रॉफिट 27 फीसदी गिरा। लेकिन, सन फॉर्मा का प्रॉफिट 27 फीसदी बढ़ा। एशियन पेंट्स का प्रॉफिट तो 40 फीसदी तक बढ़ गया।

ट्राइडेंट कैपिटल की साची त्रिवेदी ने भारतीय बाजार को बताया अट्रैक्टिव, कहा-कोरिया में तेजी सुस्त पड़ने से भारत में निवेश के मौके

भारतीय शेयर बाजार विदेशी निवेशकों के लिए फिर से अट्रैक्टिव बन रहा है। ट्राइडेंट कैपिटल इनवेस्टमेंट्स की फाउंडर और डायरेक्टर साची त्रिवेदी ने यह कहा है। मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने शेयर बाजार को लेकर कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में एआई शेयरों की बदौलत आई तेजी अब ठंडी पड़ रही है। इधर, भारतीय बाजारों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है।

सिर्फ कुछ एआई स्टॉक्स की बदौलत चढ़ा कोरिया का बाजार

त्रिवेदी ने कहा कि दक्षिण कोरिया के बाजार में आई जबर्दस्त तेजी की वजह सिर्फ कुछ AI कंपनियों के शेयरों में आया उछाल है। सभी शेयरों में ऐसी तेजी नहीं दिखी है। दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बीते एक साल में दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर बाजार बन गया है।

इनवेस्टर्स की खरीदारी से कोस्पी में आई जरूरत से ज्यादा तेजी 

क्या दक्षिण कोरिया का बाजार जरूरत से ज्यादा चढ़ गया है? इस सवाल का जवाब त्रिवेदी ने हां में दिया। उन्होंने कहा, “रिटेल इनवेस्टर्स की ज्यादा खरीदारी और उधार के पैसे से बनाए गए डेरिवेटिव्स पोजीशन से बाजार काफी चढ़ गया। जब आप FOMO ट्रेड की कोशिश करते हैं…तो बाजार में ऐसा रिएक्शन दिखता है। “

हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशन घटी

उन्होंने कहा कि हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार का अट्रैक्शन बढ़ा है। पहले वैल्यूएशन काफी बढ़ गई थी। उन्होंने कहा, “सितंबर 2024 में भारतीय बाजार की वैल्यूएशन काफी ज्यादा थी। मुझे लगता है कि यह 24 गुना या इससे ज्यादा पहुंच गई थी। दूसरे मार्केट्स की वैल्यूएशन सिंगल डिजिट में थी। ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए दूसरे बाजार ज्यादा अट्रैक्टिव हो गए थे। अब मुझे लगता है कि अब स्थिति उलट गई है।”

निवेश के लिए भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब अट्रैक्टिव

त्रिवेदी ने बताया कि अब भारतीय बाजार की वैल्यूएशन ज्यादा अट्रैक्टिव हो गई है, क्योंकि दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में बड़ी तेजी आई है। उन्होंने कहा, “भारतीय बाजार की वैल्यूएशन काफी अट्रैक्विट यानी 20 गुना पर आ गई है। इसलिए मुझे लगता है कि अब भारतीय बाजार अट्रैक्टिव दिख रहा।”

कोविड के बाद से बाजार में आ रहा सिप से बड़ा निवेश 

उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार की वैल्यूएशन को कोविड पीरियड के बाद अलग नजरिए से देखने की जरूरत है, क्योंकि सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार घरेलू निवेशकों का पैसा आ रहा है। उन्होंने कहा, “कोविड के बाद भारतीय बाजार में नए निवेशक आए हैं और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में सिप के जरिए पैसा आया है।”

इनवेस्टर्स के लिए यह भारतीय बाजार में निवेश का अच्छा मौका

उन्होंने कहा कि लगातार घरेलू खरीदारी से भारतीय बाजार की वैल्यूएशन एक दशक पहले के मुकाबले बढ़ गई। मौजूदा वैल्यूएशन पर निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए अच्छा मौका है। भारतीय बाजार में निवेश करने वाले किसी इनवेस्टर के लिए यह अच्छा मौका है।

(नलिन मेहता मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर और नेटवर्क18 में चीफ एआई ऑफिसर-एडिटोरियल ऑपरेशंस हैं। नलिन ‘द न्यू बीजेपी: मोदी एंड द मेकिंग ऑफ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट पॉलिटिकल पार्टी’ किताब के लेखक हैं।)

Swiggy Q1 results: जून तिमाही में लॉस घटकर 791 करोड़ पर आया, रेवेन्यू में 37 फीसदी उछाल

Swiggy Q1 results: स्विगी ने 30 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान कंपनी का लॉस साल दर साल आधार पर करीब 34 फीसदी घटकर 791 करोड़ रुपये पर आ गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी को 1,197 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। मार्च तिमाही में कंपनी का लॉस 800 करोड़ रुपये था। स्विगी का फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 6812 करोड़ रुपये

जून तिमाही में स्विगी के लॉस में कमी में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ का हाथ रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 37 फीसदी बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,961 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 6,383 करोड़ रुपये था।

घट रहा क्विक कॉमर्स बिजनेस का लॉस

स्विगी इंस्टामार्ट पर निवेश बढ़ा रही है। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च बढ़ने की रफ्तार रेवेन्यू बढ़ने की रफ्तार से कम रही। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी के क्विक कॉमर्स बिजनेस के लॉस में कमी आ रही है। हालांकि, कंपनी का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस मुनाफे में है। स्विगी की प्रतिद्वंद्वी कंपनी जोमैटो जून तिमाही में 92 करोड़ रुपये के मुनाफे में रही। इसका रेवेन्यू 17 फीसदी बढ़कर 20,211 करोड़ रुपये रहा।

जून तिमाही में कुल खर्च 7813 करोड़ रुपये 

जून तिमाही में स्विगी का कुल खर्च 7,813 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 6,244 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में यह 7,448 करोड़ रुपये था। कंपनी के एमडी एवं ग्रुप सीईओ हर्ष मजेटी ने कहा, “फूड डिलीवरी इकोनॉमिक्स में मजबूती दिख रही है। आउट ऑफ होम कंजम्प्शन प्रॉफिट में है। यह बिजनेस का तेजी से बढ़ता हिस्सा है। इससे प्रोग्रेस अच्छा है।”

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स्विगी के शेयरों में 30 जुलाई को तेजी

30 जुलाई को स्विगी के शेयरों में तेजी दिखी। यह 2.25 फीसदी चढ़कर 293.80 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक हफ्ते में यह शेयर करीब 19 फीसदी चढ़ा है। उधर, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी चढ़कर बंद हुए। निफ्टी 66 अंक चढ़कर 24,317 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 273 की मजबूती के साथ 77,928 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Redington share Price: रेडिंग्टन के शेयर बने रॉकेट, जून तिमाही के जोरदार नतीजों का असर

Redington share Price: रेडिंग्टन के शेयर 30 जुलाई को रॉकेट बन गए। एक समय शेयर 12 फीसदी तक उछल गए। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:20 बजे शेयर 10.35 फीसदी के उछाल के साथ 317.25 रुपये पर चल रहा था। तेजी की वजह कंपनी के जून तिमाही के नतीजे हैं। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट 94 फीसदी चढ़कर 453 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में प्रॉफिट 233 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़कर 34,922 करोड़ रुपये

Redington का रेवेन्यू जून तिमाही में 35 फीसदी के उछाल के साथ 34,922 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 25,952 करोड़ रुपये था। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया, “सभी बिजनेसेज और प्रमुख ऑपरेटिंग मार्केट्स में कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। इंडिया में खासकर ग्रोथ काफी स्ट्रॉन्ग रही। साल दर साल आधार पर रेवेन्यू 63 फीसदी बढ़ा, जबकि टैक्स बाद प्रॉफिट 60 फीसदी बढ़ा।”

जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बावजूद अच्छा प्रदर्शन

जून तिमाही में मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 15 फीसदी बढ़ा। इसमें क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी ऑफरिंग्स का बड़ा हाथ रहा। कंपनी ने कहा है कि जून तिमाही में जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बावजूद प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी के एमडी एवं ग्रुप सीईओ वीएस हरिहरन ने कहा, “हमने FY27 की शुरुआत जोरदार की है। कंपनी ने इस दौरान सबसे ज्यादा प्रॉफिट और रेवेन्यू कमाया।”

सिर्फ एक हफ्ते में 22 फीसदी चढ़ा है शेयर 

उन्होंने कहा, “जून तिमाही के नतीजों से कंपनी के डायवर्सिफायड बिजनेस मॉडल के स्ट्रेंथ, एग्जिक्यूशन में अनुशासन और सभी बिजनेसेज और ज्योग्रॉफी में मोमेंटम का पता चलता है। प्रॉफिट ग्रोथ रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा रही। इससे प्रॉफिट और लगातार ग्रोथ पर कंपनी के फोकस का पता चलता है।” सिर्फ एक हफ्ते में रेडिंग्टन का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

30 जुलाई को प्रमुख सूचकांक हरे निशान में

30 जुलाई को शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में थे। 11:35 बजे निफ्टी 0.11 फीसदी यानी 26 अंक चढ़कर 24,278 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.09 फीसदी यानी 65 अंक की तेजी के साथ 77,728 पर था। हालांकि, बैंक निफ्टी पर दबाव दिखा। यह 0.50 फीसदी नीचे था। सुबह में सूचकांक कमजोर खुले। लेकिन, बाद में बाजार में रिकवरी देखने को मिली।

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कंपनी का बिजनेस कई भारत सहित कई देशों में

रेडिंग्टन एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रोवाइडर कंपनी है। इसके बिजनेसेज में सप्लाई चेन मैनेजमेंट, आईटी प्रोडक्ट डिस्ट्रिब्यूशन और क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेज शामिल हैं। कंपनी का हेड ऑफिस चेन्नई में है। यह मोबाइल फोन, पीसी और बड़े ब्रांड्स के सॉफ्टेवयर का डिस्ट्रिब्यूशन भी करती है। इसका बिजनेस कई देशों में है।

Bank of Baroda Q1 Results: प्रॉफिट 72% गिरकर 1278 करोड़ रुपये, एनएमसी सेटलमेंट का असर

Bank of Baroda Q1 Results: बैंक ऑफ बड़ौदा ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट 72 फीसदी गिरकर 1,278 करोड़ रुपये रहा। इसकी बड़ी वजह यूएई की एनएमसी हेल्थ के ज्वाइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ बैंक का कोर्ट के बाहर करीब 5,700 करोड़ रुपये का सेटलमेंट है।

Bank of Baorda (BoB) को एक साल पहले की जून तिमाही में 4,541 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.5 फीसदी बढ़कर 12,524 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 11,435 करोड़ रुपये था। जून तिमाही में बैंक के नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) में हल्की कमी आई।

NNPA 10 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 0.5 फीसदी पर आ गया। ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर 1.99 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2.24 फीसदी था। बैंक ऑफ बड़ौदा का कैपिटल एडक्वेसी रेशियो (CAR) 16.31 फीसदी था। एक साल पहले की समान अवधि में यह 17.61 फीसदी था। इसका मतलब है कि बीते एक साल में में इसमें 130 बेसिस प्वाइंट्स की कमी आई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का ग्लोबल एडवान्सेज जून तिमाही में 17.4 फीसदी बढ़कर 14.16 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.07 लाख करोड़ रुपये था। बैंक का डिपॉजिट 13.8 फीसदी बढ़कर 16.33 लाख करोड़ रुपये रहा।

BoB का शेयर 24 जुलाई को 1.27 चढ़कर 246.25 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर 18 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीओबी सरकारी बैंक है। इसने जून तिमाही के नतीजों के साथ डिविडेंड का ऐलान नहीं किया।

Tata Consumer Q1 Results: प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12% बढ़ा

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27.8 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये हा। इस दौरान रेवेन्यू करीब 12 फीसदी बढ़ा। कंपनी के प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों ही एनालिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा रहे। कंपनी का शेयर 24 जुलाई को 1.42 फीसदी चढ़कर 1,092 रुपये पर बंद हुआ।

रेवेन्यू 11.9 फीसदी बढ़कर 5348 करोड़ रुपये रहा

Tata Consumer Products का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर 5,348.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,778.9 करोड़ रुपये था। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने रेवेन्यू 5,340 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। EBITDA जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 19.9 फीसदी बढ़कर 724 करोड़ रुपये रहा।

EBITDA मार्जिन जून तिमाही में 13.5 फीसदी पहुंच गया

कंपनी का EBITDA मार्जिन जून तिमाही में बढ़कर 13.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.7 फीसदी था। यह सीएनबीसी-टीवी8 के पोल में एनालिस्ट्स के 13.6 फीसदी के अनुमान से थोड़ा कम है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स टाटा समूह की कंपनी है। यह नमक, चाय, कॉफी सहित कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स बनाती है।

भारत में कंपनी के ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा

टाटा कंज्यूमर के एमडी एवं सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा, “एक बार फिर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में रही। इसमें वॉल्यूम ग्रोथ का बड़ा हाथ है। इससे कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ग्रोथ 29 फीसदी पहुंच गई। इंडिया में ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की ग्रोथ बिनजेस की ग्रोथ भी स्ट्रॉन्ग रही।” कंपनी के इंडिया बिजनेस का रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़कर 3,540 करोड़ रुपये रहा।

चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही

जून तिमाही में भारत में कंपनी के चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही, जबकि रेवेन्यू कम रहा। कंपनी ने कहा है कि कंपनी ने चाय की कीमतों में कमी का फायदा ग्राहकों को दिया। नमक से रेवेन्यू 7 फीसदी बढ़ा। कॉफी बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ 24 फीसदी रही। कंपनी के रेडी-टू-ड्रिंक बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 35 फीसदी रही।

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिला। इस हफ्ते लगातार पांचवें दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 0.18 फीसदी की तेजी रही।

Dr Reddy’s Q1 Results: डॉ रेड्डीज का प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा, शेयर फिसला

डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा का असर पड़ा। इस वजह से कंपनी की इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट बढ़ गई।

Dr Reddy’s Laboratories हैदराबाद की दवा बनाने वाली कंपनी है। इसने एक साल पहले की जून तिमाही में 1,418 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 5.6 फीसदी गिरकर 8,070.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 8,545.2 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने कहा है कि उसने जून तिमाही में सेमाग्लूटाइड की सप्लाई की बाधा से जुड़े इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट के लिए 240 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया है। इस महीने की शुरुआत में डॉ रेड्डीज ने कहा था कि उसकी जेनरिक सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा जारी रहेगी। यह इंडिया में उपलब्ध नहीं होगी और चीन में भी कम से कम अक्तूबर तक इसकी सप्लाई में बाधा आएगी।

एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (API) में अशुद्धता (Impurity) से जुड़े मसले की वजह से कंपनी को नए बैचेज के प्रोडक्शन को रोकना पड़ा था। सेमाग्लूटाइड एक्टिव इनग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल वजन घटाने वाली दवा Wegovy में होता है। इंडिया में इस पर पेंटेंट खत्म हो गया है। इससे जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए इसका उत्पादन करने का रास्ता खुल गया है।

डॉ रेड्डीज का प्लान भारत में तेजी से बढ़ते सेमाग्लूटाइड मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने का था। लेकिन, इसका उत्पादन रुकने से कंपनी के प्लान पर पानी फिर गया। नॉर्थ अमेरिका से भी कंपनी का रेवेन्यू 35.3 फीसदी गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया। यह कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी को लेनालिमाइड की बिक्री में गिरावट का भी सामना करना पड़ रहा है। यह ब्रिस्टल मेयर्स स्क्विब की कैंसर की दवा रेवलीमिड का जेनरिक वर्जन है।

डॉ रेड्डीज का शेयर 22 जुलाई को 2.16 फीसदी गिरकर एनएसई पर 1,179.90 रुपये पर बंद हुआ। दूसरी फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान है, जिसमें उन्होंने जेनरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका असर सन फार्मा, सिप्ला और डॉ रेड्डीज जैसी दवा कंपनियों पर पड़ेगा।