Redington share Price: रेडिंग्टन के शेयर बने रॉकेट, जून तिमाही के जोरदार नतीजों का असर

Redington share Price: रेडिंग्टन के शेयर 30 जुलाई को रॉकेट बन गए। एक समय शेयर 12 फीसदी तक उछल गए। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:20 बजे शेयर 10.35 फीसदी के उछाल के साथ 317.25 रुपये पर चल रहा था। तेजी की वजह कंपनी के जून तिमाही के नतीजे हैं। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट 94 फीसदी चढ़कर 453 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में प्रॉफिट 233 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़कर 34,922 करोड़ रुपये

Redington का रेवेन्यू जून तिमाही में 35 फीसदी के उछाल के साथ 34,922 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 25,952 करोड़ रुपये था। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया, “सभी बिजनेसेज और प्रमुख ऑपरेटिंग मार्केट्स में कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। इंडिया में खासकर ग्रोथ काफी स्ट्रॉन्ग रही। साल दर साल आधार पर रेवेन्यू 63 फीसदी बढ़ा, जबकि टैक्स बाद प्रॉफिट 60 फीसदी बढ़ा।”

जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बावजूद अच्छा प्रदर्शन

जून तिमाही में मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 15 फीसदी बढ़ा। इसमें क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी ऑफरिंग्स का बड़ा हाथ रहा। कंपनी ने कहा है कि जून तिमाही में जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बावजूद प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी के एमडी एवं ग्रुप सीईओ वीएस हरिहरन ने कहा, “हमने FY27 की शुरुआत जोरदार की है। कंपनी ने इस दौरान सबसे ज्यादा प्रॉफिट और रेवेन्यू कमाया।”

सिर्फ एक हफ्ते में 22 फीसदी चढ़ा है शेयर 

उन्होंने कहा, “जून तिमाही के नतीजों से कंपनी के डायवर्सिफायड बिजनेस मॉडल के स्ट्रेंथ, एग्जिक्यूशन में अनुशासन और सभी बिजनेसेज और ज्योग्रॉफी में मोमेंटम का पता चलता है। प्रॉफिट ग्रोथ रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा रही। इससे प्रॉफिट और लगातार ग्रोथ पर कंपनी के फोकस का पता चलता है।” सिर्फ एक हफ्ते में रेडिंग्टन का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

30 जुलाई को प्रमुख सूचकांक हरे निशान में

30 जुलाई को शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में थे। 11:35 बजे निफ्टी 0.11 फीसदी यानी 26 अंक चढ़कर 24,278 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.09 फीसदी यानी 65 अंक की तेजी के साथ 77,728 पर था। हालांकि, बैंक निफ्टी पर दबाव दिखा। यह 0.50 फीसदी नीचे था। सुबह में सूचकांक कमजोर खुले। लेकिन, बाद में बाजार में रिकवरी देखने को मिली।

यह भी पढ़ें: Waaree Energies Share Price: सोलर पीवी मॉड्यूल मेकर का शेयर 6% तक लुढ़का, Q1 नतीजों के बाद सेलिंग; अब क्या करें?

कंपनी का बिजनेस कई भारत सहित कई देशों में

रेडिंग्टन एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रोवाइडर कंपनी है। इसके बिजनेसेज में सप्लाई चेन मैनेजमेंट, आईटी प्रोडक्ट डिस्ट्रिब्यूशन और क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेज शामिल हैं। कंपनी का हेड ऑफिस चेन्नई में है। यह मोबाइल फोन, पीसी और बड़े ब्रांड्स के सॉफ्टेवयर का डिस्ट्रिब्यूशन भी करती है। इसका बिजनेस कई देशों में है।

Bank of Baroda Q1 Results: प्रॉफिट 72% गिरकर 1278 करोड़ रुपये, एनएमसी सेटलमेंट का असर

Bank of Baroda Q1 Results: बैंक ऑफ बड़ौदा ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट 72 फीसदी गिरकर 1,278 करोड़ रुपये रहा। इसकी बड़ी वजह यूएई की एनएमसी हेल्थ के ज्वाइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ बैंक का कोर्ट के बाहर करीब 5,700 करोड़ रुपये का सेटलमेंट है।

Bank of Baorda (BoB) को एक साल पहले की जून तिमाही में 4,541 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.5 फीसदी बढ़कर 12,524 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 11,435 करोड़ रुपये था। जून तिमाही में बैंक के नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) में हल्की कमी आई।

NNPA 10 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 0.5 फीसदी पर आ गया। ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर 1.99 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2.24 फीसदी था। बैंक ऑफ बड़ौदा का कैपिटल एडक्वेसी रेशियो (CAR) 16.31 फीसदी था। एक साल पहले की समान अवधि में यह 17.61 फीसदी था। इसका मतलब है कि बीते एक साल में में इसमें 130 बेसिस प्वाइंट्स की कमी आई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का ग्लोबल एडवान्सेज जून तिमाही में 17.4 फीसदी बढ़कर 14.16 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.07 लाख करोड़ रुपये था। बैंक का डिपॉजिट 13.8 फीसदी बढ़कर 16.33 लाख करोड़ रुपये रहा।

BoB का शेयर 24 जुलाई को 1.27 चढ़कर 246.25 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर 18 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीओबी सरकारी बैंक है। इसने जून तिमाही के नतीजों के साथ डिविडेंड का ऐलान नहीं किया।

Tata Consumer Q1 Results: प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12% बढ़ा

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27.8 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये हा। इस दौरान रेवेन्यू करीब 12 फीसदी बढ़ा। कंपनी के प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों ही एनालिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा रहे। कंपनी का शेयर 24 जुलाई को 1.42 फीसदी चढ़कर 1,092 रुपये पर बंद हुआ।

रेवेन्यू 11.9 फीसदी बढ़कर 5348 करोड़ रुपये रहा

Tata Consumer Products का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर 5,348.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,778.9 करोड़ रुपये था। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने रेवेन्यू 5,340 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। EBITDA जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 19.9 फीसदी बढ़कर 724 करोड़ रुपये रहा।

EBITDA मार्जिन जून तिमाही में 13.5 फीसदी पहुंच गया

कंपनी का EBITDA मार्जिन जून तिमाही में बढ़कर 13.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.7 फीसदी था। यह सीएनबीसी-टीवी8 के पोल में एनालिस्ट्स के 13.6 फीसदी के अनुमान से थोड़ा कम है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स टाटा समूह की कंपनी है। यह नमक, चाय, कॉफी सहित कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स बनाती है।

भारत में कंपनी के ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा

टाटा कंज्यूमर के एमडी एवं सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा, “एक बार फिर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में रही। इसमें वॉल्यूम ग्रोथ का बड़ा हाथ है। इससे कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ग्रोथ 29 फीसदी पहुंच गई। इंडिया में ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की ग्रोथ बिनजेस की ग्रोथ भी स्ट्रॉन्ग रही।” कंपनी के इंडिया बिजनेस का रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़कर 3,540 करोड़ रुपये रहा।

चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही

जून तिमाही में भारत में कंपनी के चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही, जबकि रेवेन्यू कम रहा। कंपनी ने कहा है कि कंपनी ने चाय की कीमतों में कमी का फायदा ग्राहकों को दिया। नमक से रेवेन्यू 7 फीसदी बढ़ा। कॉफी बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ 24 फीसदी रही। कंपनी के रेडी-टू-ड्रिंक बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 35 फीसदी रही।

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिला। इस हफ्ते लगातार पांचवें दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 0.18 फीसदी की तेजी रही।

Dr Reddy’s Q1 Results: डॉ रेड्डीज का प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा, शेयर फिसला

डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा का असर पड़ा। इस वजह से कंपनी की इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट बढ़ गई।

Dr Reddy’s Laboratories हैदराबाद की दवा बनाने वाली कंपनी है। इसने एक साल पहले की जून तिमाही में 1,418 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 5.6 फीसदी गिरकर 8,070.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 8,545.2 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने कहा है कि उसने जून तिमाही में सेमाग्लूटाइड की सप्लाई की बाधा से जुड़े इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट के लिए 240 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया है। इस महीने की शुरुआत में डॉ रेड्डीज ने कहा था कि उसकी जेनरिक सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा जारी रहेगी। यह इंडिया में उपलब्ध नहीं होगी और चीन में भी कम से कम अक्तूबर तक इसकी सप्लाई में बाधा आएगी।

एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (API) में अशुद्धता (Impurity) से जुड़े मसले की वजह से कंपनी को नए बैचेज के प्रोडक्शन को रोकना पड़ा था। सेमाग्लूटाइड एक्टिव इनग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल वजन घटाने वाली दवा Wegovy में होता है। इंडिया में इस पर पेंटेंट खत्म हो गया है। इससे जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए इसका उत्पादन करने का रास्ता खुल गया है।

डॉ रेड्डीज का प्लान भारत में तेजी से बढ़ते सेमाग्लूटाइड मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने का था। लेकिन, इसका उत्पादन रुकने से कंपनी के प्लान पर पानी फिर गया। नॉर्थ अमेरिका से भी कंपनी का रेवेन्यू 35.3 फीसदी गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया। यह कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी को लेनालिमाइड की बिक्री में गिरावट का भी सामना करना पड़ रहा है। यह ब्रिस्टल मेयर्स स्क्विब की कैंसर की दवा रेवलीमिड का जेनरिक वर्जन है।

डॉ रेड्डीज का शेयर 22 जुलाई को 2.16 फीसदी गिरकर एनएसई पर 1,179.90 रुपये पर बंद हुआ। दूसरी फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान है, जिसमें उन्होंने जेनरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका असर सन फार्मा, सिप्ला और डॉ रेड्डीज जैसी दवा कंपनियों पर पड़ेगा।

इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

यह भी पढ़ें: इस डिफेंस स्टॉक ने नागपुर की नुवाल फैमिली को बना दिया 1.2 लाख करोड़ रुपये का मालिक

17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Jio Financial share price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 4% दौड़ा, अब खरीदें, बेचें या रहें बने, जानिए क्या कहते है बाजार जानकार

Jio Financial share price: रिलायंस ग्रुप का शेयर Jio Financial Services शुक्रवार, 17 जुलाई को 4 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। हालांकि शेयर आज सुबह के काराबोर में 6 फीसदी चढ़ा था। शेयर में यह तेजी कंपनी के जून तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद देखने को मिली। जून तिमाही में कंपनी का टैक्स के बाद प्रॉफ़िट (PAT) पिछले साल के 325 करोड़ से 156% बढ़कर ₹830 करोड़ हो गया। यह कंसोलिडेटेड बेसिस पर पिछली तिमाही के ₹272 करोड़ से 205% ज़्यादा था।

वहीं प्री-प्रोविज़निंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के 366 करोड़ से 38% और लगातार ₹327 करोड़ से 54% ज़्यादा है। पहली तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) या कोर इनकम बढ़कर ₹544 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹264 करोड़ से 106% और पिछली तिमाही के ₹345 करोड़ से 58% ज़्यादा है।

जून तिमाही में इसके NBFC बिजनेस का ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 163% बढ़कर ₹30,667 करोड़ हो गया। इस बीच, इसका तिमाही डिस्बर्समेंट ₹11,250 करोड़ को पार कर गया।

क्या है स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ पर “Buy” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 315 रुपये का टारगेट दिया है जो मौजूदा स्तर से इसमें 34 फीसदी की बढ़त दिखाता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ ने एक अच्छी तिमाही दर्ज की, जिसमें जियो क्रेडिट बढ़ा और साथ ही इसका AUM 30,000 करोड़ को पार कर गया। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि इसके दूसरे बिज़नेस में भी लगातार तरक्की हुई है, जिसमें पेमेंट्स बिज़नेस में प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार और इसके इंश्योरेंस और AMC फ्रेंचाइजी में लगातार बढ़ोतरी शामिल है।

हालांकि, नए बिजनेस को इनक्यूबेट करने और मौजूदा ऑपरेशन को बढ़ाने में चल रहे इन्वेस्टमेंट के कारण इसका ऑपरेटिंग खर्च ज़्यादा बना हुआ है।

ब्रोकरेज ने मौजूदा बिजनेस में इन्वेस्टमेंट की वजह से ज़्यादा ऑपेक्स को ध्यान में रखते हुए FY27 और FY28 के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमान में क्रमशः 4% और 6% की कटौती की है।स्टॉक FY27 के अनुमानित प्राइस-टू-बुक वैल्यू के 1x पर ट्रेड कर रहा है। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि यह FY26-28 के दौरान 46% की कंसोलिडेटेड PAT कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का मॉडल बनाता है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि इसके सम-ऑफ-द-पार्ट्स में इंश्योरेंस मैन्युफैक्चरिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, ब्रोकिंग और मार्केटप्लेस जैसे बिज़नेस के वैल्यूएशन को शामिल नहीं किया गया है, जो अभी भी अपने इनक्यूबेशन फेज में हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Jio Financial Q1 Results: जियो फाइनेंशियल का प्रॉफिट 156% बढ़कर 830 करोड़ रुपये पहुंचा, रेवेन्यू तीन गुना से ज्यादा

Jio Financial Q1 Results: जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने 16 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 156 फीसदी बढ़कर 830 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का नेट प्रॉफिट 325 करोड़ रुपये था। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। 17 जुलाई को कंपनी के शेयरों पर नतीजों का असर दिखेगा।

कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 227 फीसदी बढ़ा

Jio Financial Services का ऑपरेशंस से कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू जून तिमाही में 227 फीसदी बढ़कर 2,004 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 612 करोड़ रुपये था। तिमाही दर तिमाही आधार पर जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 205 फीसदी बढ़कर 272 करोड़ रुपये रहा।

कुल इनकम में 141 फीसदी इजाफा

जून तिमाही में ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज में तेज उछाल के बावजूद कंपनी की कुल इनकम साल दर साल आधार पर 141 फीसदी बढ़कर 1,496 करोड़ रुपये रही। इसमें इंटरेस्ट इनकम में उछाल का बड़ा हाथ रहा। इस दौरान इंटरेस्ट इनकम 165 फीसदी बढ़कर 962 करोड़ रुपये हो गई। फीस और कमीशन से इनकम बढ़कर पांच गुना यानी 325 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की डिविडेंड इनकम जून तिमाही में 509 करोड़ रुपये रही।

कुल एक्सपेंसेज 291 फीसदी बढ़ा

जियो फाइनेंशियल का कुल एक्सपेंसेज जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 291 फीसदी बढ़कर 991 करोड़ रुपये रहा। इसमें ज्यादा फाइनेंस कॉस्ट, स्टाफ एक्सपेंसेज और दूसरे ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज का हाथ रहा। लेकिन, इनकम में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ से प्री-प्रोविजनिंग प्रॉफिट (PPOP) साल दर साल आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 505 करोड़ रुपये रहा।

सभी वर्टिकल्स में अच्छी ग्रोथ 

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ हितेश सेठिया ने कहा, “हमारी सभी वर्टिकल्स में लगातार बिजनेस मोमेंटम से हमारे फुल-स्टॉक ईकोसिस्टम के स्ट्रॉन्ग आर्किटेक्चर की पुष्टि होती है। इससे हमारे एग्जिक्यूशन की ताकत का भी संकेत मिलता है। स्ट्रेटेजिक रूप से AI और डेटा एनालिटिक्स को इंटिग्रेट करने से हमें एफिशियंसी के मामले में काफी फायदा हुआ है।”

यह भी पढ़ें: Tech Mahindra Q1 Profit: टेक महिंद्रा का प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 1,465 करोड़ रुपये पहुंचा

एनबीएफसी बिजनेस का भी बेहतर प्रदर्शन

जियो फाइनेंशियल ने इनवेस्टर प्रजेंटेशन में बताया कि उसके एनबीएफसी बिजनेस ने लगातार अच्छी ऑर्गेनिक ग्रोथ दिखाई है। तिमाही डिस्बर्समेंट 11,000 करोड़ रुपये के पार हो गया। कंपनी के एसेट मैनेजमेंट बिजनेस का एयूएम जून तिमाही के अंत में 18,412 करोड़ रुपये पहुंच गया। रीइंश्योरेंस प्रीमियम अंडररिटेन ऑपरेशन की पहली तिमाही में 266 करोड़ रुपये रहा।

Cochin Shipyard Share Price: बीते 6 महीनों में 10% गिरावट के बाद कोचिन शिपयार्ड के शेयरों में निवेश का बड़ा मौका

Cochin Shipyard Share Price: किसी सरकारी कंपनी का शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के ऐलान के बाद गिरने लगता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर्स को लगता है कि कंपनी डिस्काउंट पर अपने शेयर बेचेगी। कंपनी के कई मौजूदा इनवेस्टर्स ओएफएस से पहले अपने शेयर बेचते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि शेयर की कीमत गिरकर डिस्काउंटेड ऑफर प्राइस के करीब पहुंच जाएगी। कोचिन शिपयार्ड के ओएफएस के वक्त भी ऐसा देखने को मिला।

OFS के ऐलान के बाद शेयरों में गिरावट 

सरकार ने कोचिन शिपयार्ड में ओएफएस के जरिए अपनी 5.04 फीसदी हिस्सेदारी बेची है। उसने प्रति शेयर 1400 रुपये का प्राइस तय किया था। इसके बाद शेयर की कीमत इस साल मई के मध्य में 1800 रुपये से करीब 7 फीसदी गिर गई। हालांकि, इस गिरावट से शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है। लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ की अच्छी संभावना है। कंपनी की ऑर्डर बुक स्ट्रॉन्ग है। एग्जिक्यूशन में इम्प्रूवमेंट है। शिप रिपेयर क्षमता भी बढ़ रही है।

26000 करोड़ रुपये की स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक

कंपनी की ऑर्डर बुक करीब 26,000 करोड़ रुपये की है। यह FY26 में रेवेन्यू की छह गुनी है। इससे अगले कुछ सालों तक कंपनी के रेवेन्यू की तस्वीर साफ है। आगे डिफेंस और कमर्शियल शिप बिल्डिंग के करीब 10,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं। कंपनी इनके लिए बोली लगाएगी। मैनेजमेंट को मीडियम टर्म में ऑर्डर बुक 12-15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसकी वजह नवल शिपबिल्डिंग, कमर्शियल शिप और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते मौके हैं।

45 फीसदी का दमदार मार्केट शेयर 

भारत में शिप-रिपेयर इंडस्ट्री में कोचिन शिपयार्ड ने अपनी अच्छी पैठ बना ली है। इसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी तक पहुंच गई है। यह अकेली भारतीय शिपयार्ड कंपनी है, जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर की रिपेयरिंग क्षमता भी है। पिछली 2-3 तिमाहियों में इस सेगमेंट में प्रदर्शन कमजोर रहा है। लेकिन, मैनेजमेंट को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने अगले तीन सालों में शिप रिपेयर से करीब 2,500 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट रखा है। वाडिनार शिफ रिपेयर फैसिलिटी के तैयार हो जाने पर कंपनी की रिपेयिरंग क्षमता बढ़ जाएगी।

15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ का गाइडेंस

मैनेजमेंट ने रेवेन्यू ग्रोथ के लिए करीब 15 फीसदी गाइडेंस दिया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही से एग्जिक्यूशन में इम्प्रूवमेंट दिखा है। ग्रोथ बढ़ाने के लिए कंपनी ने अगले तीन सालों में 2,500 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का प्लान बनाया है। यह कंपनी के 6,500 करोड़ रुपये के इनवेस्टमेंट प्लान का हिस्सा है। कंपनी नॉन-डिफेंस ग्रोथ के रास्ते भी तलाश रही है।

यह भी पढ़ें: विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

शेयरों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर 

कंपनी के शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के करीब 32 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह इसके एक साल के औसत करीब 65 गुना के फॉरवर्ड पी/ई से काफी कम है। कंपनी के शेयरों की वैल्यूएशन में कमी आई है, जबकि फंडामेंटल्स बेहतर हुए हैं। अभी शेयरों में निवेश का अच्छा मौका है। स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक, बढ़ता शिप रिपेयरिंग बिजनेस और बेहतर होती अर्निंग्स की तस्वीर शेयर को अट्रैक्टिव बनाती है।

विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भारतीय शेयर बाजारों को लेकर बदला है। उन्होंने 10 जुलाई को भी भारतीय बाजार में अच्छी खरीदारी की। उन्होंने 2,603.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवशकों (डीआईआई) ने भी 2,019.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा पर आधारित है। एफआईआई और डीआईआई की खरीदारी से 10 जुलाई को भारतीय बाजार में अच्छी रौनक दिखी।

10 जुलाई को ज्यादातर सूचकांकों में रही तेजी

बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स सहित सभी दूसरे सूचकांक 10 जुलाई को हरे निशान में बंद हुए। Nifty 1.02 फीसदी यानी 244.10 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.08 फीसदी यानी 827 अंक के उछाल के साथ 77,569 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.39 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। 9 जुलाई को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। 8 जुलाई को बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटना था।

10 जुलाई को FIIs ने की 2019 करोड़ रुपये की खरीदारी

FII ने 10 जुलाई को 15,318.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 12.714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह भारतीय बाजार में उनकी शुद्ध खरीदारी 2,603.73 करोड़ रुपये की रही। DII ने 17,171.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 15,152.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 2,019 करोड़ रुपये की रही। डीआआई ने लगातार खरीदारी कर घरेलू शेयर बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही तो चढ़ेगा बाजार

विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में बदलाव दिख रहा है। जुलाई में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से खरीदारी की है। उन्होंने इस महीने 1,968.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस दौरान DII ने 9,245.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लौटना भारतीय शेयर बाजारों के लिए शुभ संकेत है। अगर आगे वे खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है।

यह भी पढ़ें: Nifty Midcap 100 इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर, इंडियन बैंक सहित इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी 

निवेशकों की नजरें जून तिमाही के नतीजों पर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इनवेस्टर्स का फोकस अब जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर है। आगे इन नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता है। अगर क्रूड की कीमतें भी स्टेबल रहती हैं तो बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बाजार के लिए बड़ा रिस्क है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।