FPI की भारतीय शेयरों में दिलचस्पी बरकरार, अगस्त में अब तक ₹16621 करोड़ की खरीद

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की ओर से खरीदारी का सिलसिला अगस्त में लगातार दूसरी महीने जारी है। मौजूदा महीने के पहले 15 दिनों में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹16,621 करोड़ का निवेश किया है। बेहतर वैल्यूएशंस, कंपनियों के अच्छे वित्तीय नतीजों और अमेरिका में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद ने निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी। फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था।

हालिया खरीदारी के बावजूद FPI की ओर से साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों में सेलिंग का आंकड़ा करीब ₹2.4 लाख करोड़ रहा है। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य बाजारों के मुकाबले भारत की वैल्यूएशंस के आकर्षक होने, कंपनियों के अच्छे नतीजों, अमेरिका में बेंचमार्क ब्याज दर में कटौती की संभावना, कच्चे तेल की नरम कीमतों और रुपये में कम उतार-चढ़ाव ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

सिलेक्टिव होती जा रही है FPI की खरीद

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि अगस्त में FPI की खरीदारी से संकेत मिलता है कि पहले की बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रेरित थी, न कि भारत को लेकर किसी बड़ी चिंता के कारण। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की नरम कीमतों और रुपये में स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के लिए भारत से दूरी बनाए रखने को काफी हद तक कम कर दिया है।

गुप्ते के मुताबिक, FPI की खरीद अब ज्यादा सिलेक्टिव होती जा रही है और निवेशक घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर सेक्टर में दिलचस्पी बढ़ रही है। विदेशी निवेशक भारतीय परिवारों पर दांव लगा रहे हैं, न कि भारतीय इनवॉइस पर।

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए ₹972 करोड़ और जनरल रूट से ₹69 करोड़ का निवेश किया है।

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आगे के लिए क्या अनुमान

आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक संकेतकों पर निर्भर रहेगा। अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड, डॉलर सूचकांक, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों की कमाई FPI का निवेश तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बजाज ब्रोकिंग में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि आने वाले हफ्ते में निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे भूराजनीतिक तनाव से जुड़ी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sunshine Pictures IPO: कमांडो, नमस्ते लंदन, द केरला स्टोरी की प्रोड्यूसर का इश्यू 18 अगस्त से, ग्रे मार्केट में चढ़ा शेयर

विपुल अमृतलाल शाह की प्रोडक्शन कंपनी सनशाइन पिक्चर्स का ₹282.14 करोड़ का IPO 18 अगस्त को खुलने जा रहा है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹342-₹360 प्रति शेयर और लॉट साइज 41 शेयर है। इश्यू में ₹172.80 करोड़ के 48 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹109.34 करोड़ के 30 लाख से ज्यादा शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर और प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह और उनकी पत्नी व एक्ट्रेस शेफाली शाह शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

IPO 20 अगस्त को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 21 अगस्त को फाइनल हो सकता है। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 25 अगस्त को होने वाली है। इस पब्लिक इश्यू में एंकर निवेशक 17 अगस्त को बोली लगा सकेंगे। IPO के लिए GYR Capital Advisors Pvt.Ltd. बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है।

सनशाइन पिक्चर्स लिमिटेड फिल्मों, टीवी सीरियलों और वेब सीरीज को बनाने, डेवलप करने, प्रोड्यूस करने, मार्केटिंग करने और डिस्ट्रीब्यूट करने का काम करती है। कंपनी ने फोर्स, कमांडो, हॉलिडे, फोर्स 2, कमांडो 2 और द केरला स्टोरी, एक्शन रीप्ले, नमस्ते लंदन, आंखें, सिंह इज किंग जैसी मशहूर फिल्में बनाई हैं। इसने 10 कमर्शियल फिल्में (6 में को-प्रोड्यूसर), 2 वेब सीरीज, 2 टीवी सीरियल और एक शॉर्ट फिल्म बनाई है। अभी यह जियो स्टूडियोज के साथ मिलकर दो फिल्में को-प्रोड्यूस कर रही है। साथ ही दूरदर्शन के लिए एक वेब सीरीज बना रही है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 14.72 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

सनशाइन पिक्चर्स का वित्त वर्ष 2025-26 में स्टैंडअलोन बेसिस पर मुनाफा ₹40.02 करोड़ रहा। रेवेन्यू ₹74.4 करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2025 में कंसोलिडेटेड बेसिस पर मुनाफा 35.4 प्रतिशत घटकर ₹34.5 करोड़ रहा था। रेवेन्यू भी 22.8 प्रतिशत की​ गिरावट के साथ ₹103.3 करोड़ पर आ गया। वित्त वर्ष 2025 में EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) ₹48.27 करोड़ और EBITDA मार्जिन 46.72 प्रतिशत रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

7 साल में ₹5 लाख से बनाया ₹1.30 करोड़ का पोर्टफोलियो! ट्रेडर की इस एक सीक्रेट ट्रिक ने बदली किस्मत, जानिए पूरा फॉर्मूला

Share Market Success Story: शेयर बाजार और ट्रेडिंग को लोग अक्सर रातों-रात अमीर बनने की ‘जैकपॉट मशीन’ समझते हैं। लेकिन बिना सोचे-समझे लगाया गया दांव आपको अमीर बनाने के बजाय कंगाल भी कर सकता है! इसी धारणा को पूरी तरह से झुठलाते हुए एक ट्रेडर ने साबित कर दिया कि बाजार में असली पैसा तुक्के से नहीं, बल्कि अनुशासन और सही सिस्टम से बनता है।

महज ₹5 लाख की शुरुआती पूंजी से सफर शुरू करने वाले इस ट्रेडर ने 7 सालों के उतार-चढ़ाव, भारी घाटे और अपनी गलतियों से सीखते हुए ₹1.30 करोड़ का विशाल पोर्टफोलियो खड़ा कर दिया। आइए आपको बताते हैं बिना किसी शॉर्टकट के शेयर बाजार में मिली इस शानदार कामयाबी की पूरी इनसाइड स्टोरी।

₹5 लाख से शुरुआत और ‘स्टॉक टिप्स’ की शुरुआती नाकामी

ट्रेडर ने अपने बाजार के सफर की शुरुआत साल 2018-19 में करीब ₹5 लाख के साथ की थी। नए निवेशकों की तरह वे भी शुरुआत में लोगों के दिए ‘स्टॉक टिप्स’ पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे और मार्केट खुलते ही शेयर्स में शॉर्टिंग करते थे। हालांकि इस रणनीति से कुछ पैसे जरूर बने, लेकिन ब्रोकरेज और टैक्स चुकाने के बाद हाथ में कुछ खास नहीं बचा।

ऑप्शन बाइंग से सेलिंग का सफर और ₹10 लाख के कर्ज का झटका

शुरुआती दौर के बाद उन्होंने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में कदम रखा और ऑप्शन बाइंग शुरू की। यूट्यूब पर वित्तीय एक्सपर्ट्स का वीडियो देखने के बाद उनके सोचने का तरीका बदला और वे ‘ऑप्शन बायर’ से ‘ऑप्शन सेलर’ बनने की तरफ बढ़े।

ऑप्शन सेलिंग के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने अपने दोस्त से ₹10 लाख उधार लिए। दुर्भाग्य से यह रणनीति पूरी तरह से फेल हो गई और उन्हें भारी नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, दोस्त का पूरा कर्ज चुकाया और अपनी गलतियों से सीख लेकर नए सिरे से पढ़ाई शुरू की।

‘StockMock’ पर बैकटेस्टिंग ने बदली पूरी किस्मत

उनकी ट्रेडिंग जर्नी में असली टर्निंग प्वाइंट तब आया जब उन्होंने StockMock प्लेटफॉर्म पर अपने ट्रेडिंग सिस्टम की नियमबद्ध बैकटेस्टिंग शुरू की। उन्होंने ‘टाइम-बेस्ड शॉर्ट स्ट्रैडल्स’ का टेस्टिंग किया और बिना किसी इमोशन में बहे कड़े अनुशासन से नियमों का पालन किया:

    • 2020 का रिटर्न: 86% का बंपर मुनाफा।
    • 2021 का रिटर्न: 83% का शानदार रिटर्न हासिल किया।
    • उन्होंने जेरोधा का 60-डे चैलेंज लगातार 17 विन के साथ अपने नाम किया।

‘सफल ट्रेडिंग रोमांचक नहीं, बल्कि बोरिंग होती है’

ओवरट्रेडिंग और लालच से बचने के लिए उन्होंने किताबें पढ़ना शुरू किया। जोएल ग्रीनब्लाट की मशहूर किताब ‘The Little Book That Beats the Market’ से प्रेरणा लेकर उन्होंने सिस्टमैटिक इन्वेस्टिंग का तरीका समझा।

आज वे F&O से मिलने वाले मुनाफे को इक्विटी में अपने बनाए सिस्टमैटिक फ्रेमवर्क के जरिए लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करते हैं। पिछले 7 सालों में उनका वास्तविक CAGR लगभग 48% रहा है। उनका सबसे बड़ा गुरुमंत्र है, ‘मैंने सब कुछ किताबों, यूट्यूब, वेबिनार और आर्टिकल्स से सीखा है, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।’

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़

X पर उनकी यह कहानी सामने आते ही लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आने लगीं। एक यूजर ने लिखा, ‘₹10 लाख के कर्ज में फेल होने के बाद आम तौर पर लोग ट्रेडिंग छोड़ देते हैं, लेकिन इन्होंने कर्ज चुकाया और सीखते रहे। यही असली कहानी है।’ दूसरे यूजर ने कहा, ‘ऑप्शन बाइंग के जाल से निकलकर सिस्टमैटिक ऑप्शन सेलिंग और बैकटेस्टिंग अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम था।’

नए निवेशकों के लिए क्या है सीख?

ट्रेडर का यह सफर यह साबित करता है कि शेयर बाजार में टिके रहने के लिए ‘टिप्स’ नहीं, बल्कि ‘सिस्टम और अनुशासन’ काम आता है। अगर आप भी बाजार में लंबे समय के लिए टिकना चाहते हैं, तो बिना सीखे दांव लगाने के बजाय बैकटेस्टिंग, रिस्क मैनेजमेंट और सब्र को अपनी ताकत बनाएं।

Disclaimer: मनीकंट्रोल ने संबंधित व्यक्ति द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। यह जानकारी पूरी तरह से  X पर उनके बयानों/पोस्ट पर आधारित है और केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है, इसे निवेश की सलाह न माना जाए।

Mukul Agrawal Portfolio: स्टार निवेशक का बदला मूड, पोर्टफोलियो में एक स्टॉक की एंट्री तो दूसरी ओर 3 की विदाई

Mukul Agrawal Portfolio: दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल के पोर्टफोलियो में पिछली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बड़े बदलाव हुए। एक तरफ उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में एरिसइंफ्रा सॉल्यूशंस को शामिल किया तो दूसरी तरफ उन्होंने लक्ष्मी फाइनेंस समेत तीन स्टॉक्स का वजन और बढ़ाया। उन्होंने सिर्फ खरीदारी ही नहीं की बल्कि कुछ मुनाफा भी बुक किया। जून तिमाही में उनके पोर्टफोलियो से रेमंड लाइफस्टाइल समेत पांच स्टॉक्स का वजन हल्का हुआ तो तीन स्टॉक्स ऐसे रहे, जिनमें उनकी होल्डिंग या तो जीरो हो गई या 1% से नीचे आ गई। सेबी के नियमों के मुताबिक कंपनियों को सिर्फ 1% या इससे अधिक की होल्डिंग वाले शेयरहोल्डर्स के नाम का खुलासा करना अनिवार्य है।

इन स्टॉक्स में की और खरीदारी और एक की हुई एंट्री

मुकुल अग्रवाल के पोर्टफोलियो में जून 2026 तिमाही में एरिसइंफ्रा सॉल्यूशंस की एंट्री हुई। उन्होंने इसके 13 लाख शेयर खरीदे जो कंपनी में 1.6% होल्डिंग के बराबर है। इसके अलावा जून तिमाही में उन्होंने लक्ष्मी फाइनेंस में अपनी हिस्सेदारी 0.8 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 4.6% (24 लाख शेयर), वेलर एस्टेट में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 1.6% (85 लाख शेयर) और लक्स इंडस्ट्रीज में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 1.6% (4,65,246 शेयर) कर ली।

इन स्टॉक्स में की बिकवाली तो ये हुए बाहर

मुकुल अग्रवाल ने जून तिमाही में कुछ स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग हल्की की। उन्होंने जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स में अपनी होल्डिंग 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर 2.6% (19,30,920 शेयर), केआरएन हीट एक्सचेंजर में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम कर 1.5% (10 लाख शेयर), इंटेलेक्ट डिजाइन एरेना में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेचकर 1.3% (17.90 लाख), विधि स्पेशल्टी फूड में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर (6,90,924 शेयर) और रेमंड लाइफस्टाइल में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर (7 लाख शेयर) कर ली। वहीं दूसरी तरफ रेडिको खेतान, सूर्या रोशनी और विक्रान इंजीनियरिंग के इतने शेयर बेचे कि उनकी होल्डिंग या तो जीरो हो गई या 1% से कम हो गई। इससे पहले मार्च 2026 तिमाही में रेडिको खेतान में उनकी होल्डिंग 1.1%, सूर्या रोशनी की 1.0% और विक्रान इंजीनियरिंग की 1.4% थी।

समरी

स्टॉक जून तिमाही के आखिरी में होल्डिंग बदलाव (पर्सेंटेज प्वाइंट) शेयरों की संख्या शेयर का मौजूदा भाव 52 हफ्ते का निचला स्तर (तारीख) 52 हफ्ते का हाई लेवल (तारीख)
Arisinfra Solutions1.6%नया13,00,000₹134.09₹82.18 (09/02/26)₹178.30 (23/10/25)
Laxmi Finance4.6%0.824,00,000₹124.38₹71.06 (30/03/26)₹180.90 (18/09/25)
Valor Estate1.6%0.185,00,000₹111.91₹83.50 (30/03/26)₹187.05 (13/08/25)
Lux Industries1.6%0.14,65,246₹1,188.10₹824.05 (30/03/26)₹1,823.35 (24/04/26)
J Kumar Infraprojects2.6%(-)0.119,30,920₹497.65₹425.00 (30/03/26)₹685.40 (18/08/25)
KRN Heat Exchanger1.5%(-)0.110,00,000₹1,468.30₹589.80 (27/01/26)₹1,468.30 (14/08/26)
Intellect Design Arena1.3% (-)0.217,90,000₹700.60₹595.20 (30/03/26)₹1,244.60 (03/11/25)
Vidhi Specialty Food1.4%(-)0.26,90,924₹309.90₹258.60 (30/03/26)₹410.00 (04/09/25)
Raymond Lifestyle1.2%(-)0.27,00,000₹741.20₹677.00 (03/08/26)₹1,350.00 (16/09/25)
Radico Khaitan1% के नीचे₹4,650.00₹2,500.00 (02/03/26)₹4,675.20 (13/09/26)
Surya Roshni1% के नीचे₹222.98₹187.35 (30/03/26)₹320.15 (13/08/26)
Vikran Engineering1% के नीचे₹62.22₹51.10 (30/03/26)₹118.40 (20/11/25)

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Video: हजारों जूतों के बीच गुम हुई एक चप्पल, शख्स ने अपनाया AI का अनोखा जुगाड़; वीडियो हुआ वायरल

हजारों जूतों और चप्पलों के बीच अपनी एक जोड़ी तलाशना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में एक शख्स ने इस उलझन को सुलझाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। बताया जा रहा है कि उसके सामने 1,000 से ज्यादा जोड़ी फुटवियर का ढेर था, जिसमें उसकी एक चप्पल कहीं गुम हो गई थी। हर जोड़ी को खुद देखकर तलाशने में काफी समय लग सकता था, इसलिए उसने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया। शख्स ने पूरे ढेर की तस्वीर खींची और उसे ChatGPT के सामने रखकर अपनी खोई हुई चप्पल पहचानने में मदद मांगी।

दावा है कि AI ने तस्वीर का विश्लेषण कर उसे संभावित जगह बताई, जिससे चप्पल तलाशना आसान हो गया। इस अनोखे इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और यूजर्स ने AI के इस ‘जुगाड़’ पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं।

तस्वीर खींची और AI से मांगी मदद

Instagram यूजर शुभांग बोरकर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में बड़ी संख्या में फुटवियर एक साथ रखे नजर आते हैं। पोस्ट के मुताबिक, इस ढेर में 1,000 से ज्यादा जोड़ी जूते-चप्पल थे और शख्स की एक clog कहीं गुम हो गई थी। उसने पूरे ढेर की तस्वीर खींचकर ChatGPT से पूछा कि उसकी खोई हुई चप्पल कहां हो सकती है। दावा है कि AI ने तस्वीर देखकर उसे सही जगह तक पहुंचने में मदद की और आखिरकार चप्पल मिल गई।

20 लाख से ज्यादा बार देखा गया वीडियो

यह अनोखा AI इस्तेमाल सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आया। वीडियो को 20 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब ChatGPT का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां सुलझाने के लिए भी होने लगा है। एक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता था कि ChatGPT का इस्तेमाल इस तरह भी कर सकते हैं।” वहीं दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि सबसे सुंदर जोड़ी चुनकर वहां से निकल जाना चाहिए।

किसी ने कहा- AI तो रो रहा होगा!

वीडियो पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा, “AI कोने में बैठकर रो रहा होगा।” वहीं किसी ने सुझाव दिया कि इसके लिए Google के AI चैटबॉट Gemini Live का इस्तेमाल किया जा सकता था। हालांकि, कुछ लोगों ने इसे मजाक के बजाय तकनीक के स्मार्ट इस्तेमाल के तौर पर देखा। एक कमेंट में लिखा गया, “आधुनिक समस्याओं के लिए आधुनिक समाधान चाहिए।”

सिर्फ चप्पल नहीं, किताब खोजने में भी AI की मदद

इस पोस्ट ने लोगों को अपने ऐसे अनुभव साझा करने का मौका भी दिया। एक महिला ने बताया कि उसके पति को एक किताब की तलाश थी। बुक सेल में मौजूद किताबों की तस्वीरें खींचकर उन्होंने ChatGPT की मदद ली और कथित तौर पर AI ने किताब का स्थान पहचानने में सहायता की।

Instagram पर यह पोस्ट देखें

AI का बढ़ता अनोखा इस्तेमाल

यह घटना दिखाती है कि लोग AI का इस्तेमाल अब सिर्फ लेख लिखने, सवालों के जवाब पाने या कोडिंग तक सीमित नहीं रख रहे हैं। तस्वीरों के जरिए चीजों को पहचानने और खोजने जैसे छोटे-छोटे कामों में भी AI मददगार साबित हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें बताई गई पूरी घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Ather Energy प्रेफरेंशियल इश्यू से जुटाएगी ₹1200 करोड़, शेयरहोल्डर्स से ग्रीन सिग्नल; चढ़ सकता है शेयर

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली एथर एनर्जी लिमिटेड प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए ₹1200 करोड़ तक का फंड जुटाना चाहती है। इस प्रपोजल पर कंपनी के शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिल गई है। 14 अगस्त को कंपनी की असाधारण आम बैठक थी। इसी में प्रपोजल पास हुआ। इसके पक्ष में 97.72 प्रतिशत वोट रहे। इस डेवलपमेंट के चलते सोमवार, 17 अगस्त को एथर एनर्जी के शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है।

कंपनी ने जून महीने में कई तरीकों से ₹2,500 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कहा गया था कि इन तरीकों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), राइट्स इश्यू, प्रेफरेंशियल इश्यू और फॉरेन करेंसी कनवर्टिबल बॉन्ड (FCCB) जारी करना शामिल है। कंपनी हाल ही में ₹1,300 करोड़ का QIP लाई थी। इसे ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की बोलियां मिलीं। QIP में देश और दुनिया के बड़े इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने हिस्सा लिया।

प्रेफरेंशियल इश्यू के तहत हीरो मोटोकॉर्प, एथर एनर्जी के को-फाउंडर तरुण मेहता और स्वप्निल जैन के साथ मिलकर, ₹1,260 प्रति वॉरंट के हिसाब से निवेश करेगी। यह कीमत ₹1,175.74 के फ्लोर प्राइस से 7.2 प्रतिशत ज्यादा है। स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर इंडिया-जापान फंड ₹1,230 प्रति शेयर के हिसाब से इक्विटी शेयर खरीदेगा, जो फ्लोर प्राइस से 4.6% ज्यादा है। हीरो मोटोकॉर्प लगभग ₹960 करोड़ का निवेश करेगी, जबकि इंडिया-जापान फंड ₹200 करोड़ का निवेश करेगा। को-फाउंडर तरुण मेहता और स्वप्निल जैन दोनों ₹20-20 करोड़ का निवेश करेंगे।

Ather Energy का शेयर एक साल में 263 प्रतिशत चढ़ा

एथर एनर्जी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर ₹1511.05 है। कंपनी का मार्केट कैप ₹59600 करोड़ से ज्यादा है। यह मई 2025 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 2980.76 करोड़ रुपये का था। एक साल में शेयर 263 प्रतिशत और 6 महीनों में 113 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 60 प्रतिशत और 2 सप्ताह में करीब 20 प्रतिशत उछली है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 39.58 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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जून तिमाही में घाटे में गिरावट

अप्रैल-जून 2026 ​तिमाही में एथर एनर्जी का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर ₹51.09 करोड़ रह गया। एक साल पहले घाटा 178.23 करोड़ था। थोक बिक्री 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 83,173 यूनिट्स की रही, जबकि जून 2025 तिमाही में यह 46,078 यूनिट्स की थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

4 नियम पड़े रिटेल इंवेस्टर्स पर भारी, SEBI ने लाया था खास वजह से और पड़ा ऐसा असर

पिछले दो वर्षों में मार्केट रेगुलेटर सेबी देश के कैपिटल मार्केट को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और लेस स्पेक्यूलेटिव यानी कम सट्टेबाजी वाला बनाने के लिए कई नियम लागू किए हैं। इसका उद्देश्य रिटेल इंवेस्टर्स को बचाना, लेवरेज कम करना और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करना है। ब्रोकरेज फर्म सैम्को सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी के मुताबिक सेबी की यह पहल बेहतर तो है रेगुलेशन के साथ-साथ मार्केट की एफिसिएंसी, लिक्विडिटी और फेयर एक्सेस भी बनी रहनी चाहिए। यहां ऐसे ही 4 नियमों के बारे में बताया जा रहा है, जिनसे रिटेल इंवेस्टर्स काफी प्रभावित हुए और जिमीत मोदी ने रिटेलर्स पर इसके असर को लेकर जिक्र किया है।

4 नियम और उनके असर

1.F&O पर लगाम से घटी सट्टेबाजी लेकिन एक्सेस भी हुआ कम

सेबी ने सबसे बड़ा दखल इक्विटी डेरिवेटिव्स में दिया है। इसके तहत कॉन्ट्रैक्ट का साइज बढ़ाया गया, वीकली एक्सपायरी के ऑप्शन कम किए गए, एक्सपायरी-डे पर रिस्क कवर बढ़ाया गया, ऑप्शन प्रीमियम पहले से जमा करना जरूरी किया गया और पोजिशन लिमिट की इंट्रा-डे मॉनिटरिंग शुरू की गई। इसका उद्देश्य बहुत अधिक शॉर्ट-टर्म स्पेक्यूलेटिव को रोकना और रिटेल इन्वेस्टर्स को बड़े नुकसान से बचाना था।

हालांकि वित्त वर्ष 2026 में F&O में रिटेलर्स का नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया लेकिन F&O में हिस्सेदारी भी लगभग 20% घटकर 78.6 लाख रह गई। रिटेलर्स का नुकसान कम तो हुआ लेकिन प्रति ट्रेडर औसत नुकसान ₹1.14 लाख से बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया। इससे एक अहम सवाल उठता है कि क्या हम समस्या को हल कर रहे हैं, या हिस्सेदारी कम करके एक्सपोजर को कम कर रहे हैं?

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2.लॉट साइज में बढ़ोतरी: सुरक्षित मार्केट या हाई एंट्री बैरियर्स?

मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू बढ़ाने का मकसद छोटे निवेशकों को बहुत बड़ी स्पेक्यूलेटिव वाली पोजिशन लेने से रोकना था। हालांकि डेरिवेटिव्स रिस्क-मैनेजमेंट टूल का भी एक बड़ा जरिया है, खासतौर से उन निवेशकों के लिए जो अपने कैश-मार्केट एक्सपोजर को हेज करना चाहते हैं। लॉट साइज बड़ा होने से ऐसे हेज के लिए अधिक कैपिटल की जरूरत पड़ने लगी जिससे अंडरलाइंग पोजिशन के साथ हेज का तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए मार्केट में हिस्सा लेना मुश्किल बनाने करने की बजाय इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि वे रिस्क को कैसे मैनेज करते हैं।

3.एक्सपायरी और मार्जिन के नियम

सेबी ने एक्सपायरी के समय मिलने वाले कई मार्जिन बेनेफिट्स को हटा दिया और वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव्स के नियमों को तार्किक बनाया। इसका उद्देश्य बहुत अधिक रिस्क वाली पोजिशन और एक्सपायरी के दिन होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को कम करना था, लेकिन इनसे ट्रेडिंग और हेजिंग की चली आ रही स्ट्रैटेजीज भी बदल गई हैं। सेबी की साल 2025 की स्टडी से पता चला कि इससे इक्विटी डेरिवेटिव्स में यूनिक इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या सालाना आधार पर 20% गिर गई तो प्रीमियम के हिसाब से इंडिविजुअल टर्नओवर 11% घट गया। ऐसे में सेबी का नियम सिर्फ खराब तरीके ही नहीं हटा रहा, बल्कि मार्केट के तरीके को भी बदल रहा है।

4.क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS): बेहतर प्राइस डिस्कवरी लेकिन

3 अगस्त 2026 से सेबी ने F&O स्टॉक्स के लिए ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (CAS) शुरू किया, जिसने पहले के 30 मिनट वाले VWAP-बेस्ड क्लोजिंग सिस्टम की जगह ली। इसका उद्देश्य कीमत तय करने के तरीके को बेहतर बनाना, आखिरी मिनट के ट्रेड के असर को कम करना और भारतीय मार्केट को ग्लोबल तौर-तरीकों से जोड़ना। हालांकि शुरुआती कुछ सेशन में स्पॉट और फ्यूचर्स की कीमतों में असामान्य अंतर दिखा और शुरुआत में लोगों की भागीदारी कम रही। सेबी के मुताबिक इसमें कोई मैनिपुलेशन नहीं मिला है, और तब से भागीदारी में सुधार भी हुआ है। हालांकि इससे यह सबक मिलता है कि अच्छे ढंग से बनाए गए सुधार भी मार्केट में हिस्सा लेने वालों के लिए थोड़े समय के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

कहां आई दिक्कत?

सेबी के नियमों से एफएंडओ एक्टिविटी कम हुई। इसकी वित्त वर्ष 2026 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स 51.5% और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स 17.7% घट गया। इसकी वजह एसटीटी में बढ़ोतरी के साथ-साथ सेबी के नियम भी हैं। जिमीत के मुताबिक स्पेक्यूलेशन में कमी तब अच्छी है, जब इससे अच्छा रुख दिखे लेकिन अगर वॉल्यूम भी गिरे क्योंकि मार्केट में एंट्री बहुत महंगी या कठिन हो गई है तो इससे लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि लक्ष्य सड़क को सुरक्षित बनाना होना चाहिए, सड़क को खाली करना नहीं। जिमीत के मुताबिक भारतीय मार्केट को देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों के मजबूत निवेश की जरूरत है। जिमीत के मुताबिक बैरियर बढ़ाने की तुलना में बेहतर डिस्क्लोजर, इंवेस्टर एडुकेशन, सूटेबिलिटी चेक्स और रिस्क-बेस्ड सेफगार्ड्स अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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Share Market New Rule: देश का पहला क्लियरिंग कॉरपोरेशन और एनएसई (NSE) की सब्सिडरी एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड 17 अगस्त से सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) स्कीम के तहत कम समय वाले कॉन्ट्रैक्ट शुरू करेगा। इसके तहत महज तीन दिन के सेटलमेंट साइकिल के साथ स्टॉक-लेंडिंग ट्रांजैक्शन हो सकेगा। एनएसई क्लियरिंग ने इससे जुड़ा सर्कुलर 14 अगस्त को जारी किया जिसके मुताबिक नए कॉन्ट्रैक्ट R3 सीरीज के तहत शुरू किए जाएंगे और हर दिन उपलब्ध होंगे। ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ उन स्टॉक्स के लिए उपलब्ध होंगे जो इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए एलिजिबल हैं यानी कि जो F&O सेगमेंट का हिस्सा हैं।

क्या है नियम

नए स्ट्रक्चर के तहत ट्रांजैक्शन वाले दिन यानी T Day पर किए गए SLB ट्रांजैक्शन का पहला हिस्सा T+1 दिन पर यानी अगले दिन सेटल होगा, जबकि उससे जुड़ा रिवर्स हिस्सा T+3 दिन पर सेटल होगा इसमें सेटलमेंट की छुट्टियां शामिल नहीं होंगी। अभी के एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के उलट AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) या EGM (एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) होने पर R3 कॉन्ट्रैक्ट्स को समय से पहले बंद नहीं किया जाएगा। साथ ही कम समय वाले इन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए रीपेमेंट, रिकॉल और रोलओवर की सुविधाएं नहीं मिलेगी। मार्केट खुले रहने के दौरान यानी मार्केट टाइमिंग्स में क्लियरिंग और सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और कॉरपोरेट एक्शन से जुड़े बाकी सभी नियम वैसे ही रहेंगे जैसे मौजूदा एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

R3 सीरीज के आने से मार्केट पार्टिसिपेंट्स को सिक्योरिटीज लेंडिंग ट्रांजैक्शन के लिए कम होल्डिंग पीरियड मिलता है, जबकि SLB कॉन्ट्रैक्ट्स का समय ज्यादा होता है यानी कि अगर किसी ट्रेडर को किसी शेयर को शॉर्ट करने के लिए केवल कुछ दिनों के लिए शेयर चाहिए, तो R3 कॉन्ट्रैक्ट उसके लिए लंबी अवधि वाले SLB कॉन्ट्रैक्ट की तुलना में अधिक बेहतर हो सकता है। इससे ट्रेडर्स और निवेशकों को शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग और लेंडिंग की जरूरतों को मैनेज करने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिल सकती है। इस प्रकार R3 कम अवधि वाला नया SLBM कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें शेयर T+3 पर वापस होंगे।

क्या है SLBM?

सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) एक ऐसा सिस्टम है जिसके तहत निवेशक अपनी सिक्योरिटीज जैसे कि शेयर को एक तय समय के लिए दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को उधार दे सकता है। इसके बदले में उन्हें लेंडिंग फीस मिलती है। यह सिस्टम उन निवेशकों के लिए बहुत काम का है जो अपनी सिक्योरिटीज से अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं, और उन ट्रेडर्स के लिए भी जिन्हें शॉर्ट-सेलिंग को लेकर शेयर उधार लेने की जरूरत होती है। इसके तहत उधार लेने वाला सिक्योरिटीज का इस्तेमाल करने के बदले उधार देने वाले को लेंडिंग फीस देता है। एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ट्रांजैक्शन को मैच करने और कोलेटरल, सेटलमेंट व अन्य रिस्क को मैनेज करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Independence Day 2026: 1 करोड़ युवाओं की AI ट्रेनिंग, 6 करोड़ लखपति दीदी… लाल किले से हुए वो 7 ऐलान जो बदल देंगे आपकी जिंदगी

Independence Day 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए बड़े ऐलान किए हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI), शिक्षा, खेल, सिविल डिफेंस, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, परमाणु ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी शेयर की है। इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाए जाने से देश में करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकती है।

आइए आपको विस्तार से उन 7 प्रमुख ऐलानों के बारे में बताते हैं जो आपकी जिंदगी पर असर डालने जा रहे हैं-

1. 1 करोड़ युवाओं की AI ट्रेनिंग

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि अगले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। तेजी से बढ़ती तकनीक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से भारत के युवा AI की दुनिया में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने में सक्षम बनेंगे।

2. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क बनाने की घोषणा की गई। कोचिंग संस्थानों के भारी वित्तीय बोझ से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत देने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), उपलब्ध प्रतिभाओं और शिक्षकों को एक साथ लाकर यह पूरा ढांचा तैयार किया जाएगा।

3. 5-15 वर्ष के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी स्पोर्ट्स टैलेंट हंट

गांवों, शहरों और स्कूलों में 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की खेल प्रतिभा की पहचान करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। चुने गए बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। जिन ओलंपिक खेलों में भारत वर्तमान में भाग या क्वालीफाई नहीं करता है, उन पर विशेष जोर दिया जाएगा।

4. आधुनिक चुनौतियों के लिए वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क

युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए देश में एक वाइब्रेंट सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) नेटवर्क तैयार किया जाएगा। आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित न रहकर रिफाइनरी, बैंकिंग सेक्टर, डेटा सेंटर और फैक्ट्रियों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं। पिछली शताब्दी के पुराने ढर्रे के स्थान पर नागरिकों को आधुनिक प्रणालियों से परिचित कराया जाएगा और एक बड़ा स्वैच्छिक बल तैयार किया जाएगा।

5. 6 करोड़ लखपति दीदी का नया लक्ष्य

देश के विकास में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का पिछला लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। अतिरिक्त 3 करोड़ लखपति दीदी बनने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

6. आत्मनिर्भरता के लिए और सेमीकंडक्टर प्लांट्स

भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट्स शुरू हो चुके हैं और उनसे उत्पादन का निर्यात भी शुरू हो गया है। आने वाले 7-8 वर्षों में देश में 5 से 8 और नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे, जो विकसित भारत के निर्माण में सहायक होंगे।

7. 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता

चिप्स, AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत इसी दशक में 5 नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की योजना है। साथ ही फास्ट ब्रिडर टेक्नोलॉजी में मिली सफलता को परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।