Gold Price Today: कच्चे तेल में नरमी से सोने में फिर तेजी, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक चढ़ा; चांदी भी उछली

देश में सोने की कीमत में एक बार फिर तेजी दिख रही है। 19 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 154580 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। अन्य शहरों में भी भाव में उछाल है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,600 रुपये बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई की चिंताएं कम होने और हाल की बिकवाली के बाद निवेशकों के सराफा बाजार में लौटने से सोने के दाम चढ़े।

पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी एक जोखिम बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,390.11 डॉलर प्रति औंस पर है। सोने की वैश्विक कीमतें एक सप्ताह में 1 प्रतिशत चढ़ी हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 154580 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 141710 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली141710154580
मुंबई141560154430
अहमदाबाद141610154480
चेन्नई141560154430
कोलकाता141560154430
हैदराबाद141610154430
जयपुर141710154580
भोपाल140140154480
लखनऊ141710154580
चंडीगढ़141710154580

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चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी शनिवार को तेजी दिख रही है। 19 सितंबर की सुबह चांदी बढ़कर 250100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत बढ़कर 66.70 डॉलर प्रति औंस हो गई है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

दिल्ली-मुंबई छोड़िए इन 11 शहरों में आया प्रॉपर्टी मार्केट का नया बूम! 5 साल में 63% बढ़ी कीमतें, यहां देखिए पूरी लिस्ट

घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। घर खरीदने के लिए लोग लंबे समय से पैसे बचाते हैं और अपने बजट की तैयारी करते हैं। वहीं अगर आप घर खरीदने की योजना कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए काम की है। भारत के बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों में भी घरों की कीमतों और प्रॉपर्टी की मांग में तेजी से बढ़ रही है। इस बात का खुलासा हाल ही में आई सीआईआई और नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 11 छोटे शहर आने वाले समय में रियल एस्टेट ग्रोथ के बड़े केंद्र बन सकते हैं। इनमें घरों की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़े शहरों के मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से

11 छोटे शहरों में घरों की कीमतों में हुई वृद्धि

शुक्रवार को उद्योग संगठन सीआईआई और प्रॉपर्टी सलाहकार नाइट फ्रैंक इंडिया ने ‘इंडियाज नेक्स्ट रियल एस्टेट मार्केट्स’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 से अब तक 11 छोटे शहरों में घरों की कीमतों में औसतन 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट में देश के 11 ऐसे शहरों की पहचान की गई है, जहां आने वाले समय में रियल एस्टेट कारोबार तेजी से बढ़ने की संभावना बताई गई है। इन शहरों में भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राईसिटी, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर शामिल हैं। इन शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी आठ बड़े रियल एस्टेट बाजारों के मुकाबले ज्यादा रही है।

2016 से 2026 में हुई इतनी वृद्धि

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2026 के बीच इन 11 शहरों में घरों की औसत कीमत हर साल करीब 8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। वहीं, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे देश के 8 बड़े शहरों में घरों की कीमतों में सालाना औसत बढ़ोतरी करीब 4 प्रतिशत रही। कंसल्टेंट ने कहा, “ये शहर भारत के टॉप आठ शहरों की तुलना में तेजी से रेजिडेंशियल प्राइस ग्रोथ दिखा रहे हैं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और कंजम्पशन में ग्रोथ के सपोर्ट से उनके इकोनॉमिक फंडामेंटल्स के मजबूत होने की वजह से मोमेंटम में बढ़ोतरी का संकेत है।”

कहां हुई कितनी वृद्धि

नाइट फ्रैंक के मुताबिक, पिछले पांच सालों में इन 11 शहरों और देश के 8 बड़े रियल एस्टेट बाजारों के बीच घरों की कीमतों में बढ़ोतरी का अंतर और बढ़ा है। 2021 से 2026 के बीच इन 11 शहरों में घरों की कीमतें 63 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि 8 बड़े शहरों में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इन 11 शहरों में घरों की औसत कीमत करीब 4,500 रुपये से 13,500 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा रियल एस्टेट

नाइट फ्रैंक इंडिया के सीएमडी शिशिर बैजल ने कहा कि ‘भारत में रियल एस्टेट का विकास अब सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों, आसपास के नए इलाकों और तेजी से विकसित हो रहे कॉरिडोर में भी निवेश के मौके बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर विकास सिर्फ नए इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से नहीं होगा, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी को लगातार आर्थिक गतिविधियों में बदलना भी जरूरी होगा।’

उन्होंने कहा कि, जिन शहरों में रोजगार, कारोबार, बढ़ती आबादी, लोगों की बढ़ती जरूरतें और बेहतर शहरी सुविधाएं एक साथ मौजूद हैं, वहां रियल एस्टेट बाजार के ज्यादा मजबूत होने की संभावना है। ऐसे शहरों में प्रॉपर्टी के बाजार में अलग-अलग तरह के विकल्प और ज्यादा विकास देखने को मिल सकता है।

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Oscars 2027: मराठी थ्रिलर ने ‘धुरंधर 2’ को पीछे छोड़ा, ‘गोंधल’ का ऑस्कर में भारत की आधिकारीक एंट्री के तौर पर हुआ सिलेक्शन

Oscars 2027: फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को बताया कि मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री होगी। इस दौड़ में शामिल अन्य फिल्मों में नागा फिल्म ‘अंग’ और तमिल फिल्म ‘डोरोथी’ भी थीं।

संतोष दवाखर द्वारा निर्देशित यह फिल्म 99वें एकेडमी अवार्ड्स समारोह में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर’ कैटेगरी में देश का प्रतिनिधित्व करेगी। फिल्म निर्माता ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) 2025 में सिल्वर पीकॉक अवार्ड जीता था। जूरी पैनल में पी. शेषद्रि, विजय पाटकर, हुतु कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसेफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजोन दासगुप्ता, हासन, वासन और तनिष्ठा चटर्जी शामिल थे।

कुल 33 फिल्में सबमिट की गई थीं, जिनमें से 14 हिंदी में, चार-चार मराठी, तेलुगु और गुजराती में, तीन तमिल में और एक-एक मलयालम, कोन्याक और नेपाली भाषा में थीं। इनमें एक साइलेंट फिल्म भी शामिल थी।

महाराष्ट्र की पारंपरिक ‘गोंधल’ रस्म और लोक-प्रदर्शन शैली पर आधारित ‘गोंधल’ फिल्म सुमन नाम की एक शादीशुदा महिला की कहानी है। उसकी जिंदगी में तब एक ऐसा मोड़ आता है जब रिश्ते, इच्छा और धोखे आपस में टकराने लगते हैं। रोजमर्रा के रिश्तों से शुरू होने वाली यह कहानी धीरे-धीरे एक थ्रिलर में बदल जाती है। सुमन खुद को मुश्किल हालात में फंसा हुआ पाती है और उनसे बाहर निकलने की कोशिश करती है।

सुमन के सफर के जरिए, यह फिल्म प्यार, इच्छा, धोखे और उन तरीकों को दिखाती है, जिन्हें लोग तब अपनाते हैं जब वे खुद को किसी मुश्किल स्थिति में फंसा हुआ महसूस करते हैं। साथ ही ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा को भी सामने लाती है और सदियों पुरानी इस प्रदर्शन शैली और आज के समाज में इसके महत्व को दिखाती है।

इस फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर, अनुज प्रभु और अन्य कलाकार हैं, और इसका संगीत अनुभवी संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया है। ‘गोंधल’ को बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी पहचान मिली। यह फिल्म 14 नवंबर, 2025 को रिलीज हुई थी।

Apple Store की लाइन छोड़िए! अब इन प्लेटफॉर्म से घर बैठे मंगाए iPhone 18 Pro, वो भी खास ऑफर के साथ

iPhone 18 Pro खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है, क्योंकि भारत में इस नए iPhone की बिक्री शुरू हो चुकी है और Apple Store पर सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ लगी हुई है। लेकिन अगर आप लाइन में लगने के मूड में नहीं हैं और आप चाहते हैं कि घर बैठे iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पहुंच जाए, तो Blinkit और Zepto के जरिए ये मुमकिन हो सकता है। खास बात यह है कि इन प्लेटफॉर्म पर चारों कलर के साथ बैंक डिस्काउंट और नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी मिल रहा है।

iPhone 18 Pro के लिए Blinkit और Zepto के ऑफर देखें

जब आप iPhone 18 Pro को डिस्काउंट ऑफर के साथ सीधे अपने घर पर मंगवा सकते हैं, तो बाहर जाकर लाइन में क्यों लगना? Blinkit पर iPhone 18 Pro और 18 Pro Max के लिए चुनिंदा क्रेडिट कार्ड पर डिस्काउंट और नो-कॉस्ट EMI के विकल्प मिल रहे हैं, जिससे आपको नए iPhone पर बेहतर डील मिल सकती है।

Blinkit पर iPhone 18 Pro की डिलीवरी लॉन्च के दिन दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई, जयपुर और लखनऊ में उपलब्ध होगी।

वहीं, Zepto सभी वेरिएंट्स में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max पर ₹7,000 तक का डिस्काउंट दे रहा है। Zepto के पास दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में iPhone 18 Pro का स्टॉक उपलब्ध है।

भारत में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max की कीमतें, कलर और वेरिएंट

भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत ₹1,64,900 है, जबकि 18 Pro Max के बेस 256GB वेरिएंट की कीमत ₹1,79,900 है। इस साल आपको नई iPhone 18 Pro सीरीज blue, black, burgundy और silver कलर ऑप्शन में मिलेगी।

इसके अलावा, Apple ने खरीदारों के लिए iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को 2TB तक की स्टोरेज के साथ उपलब्ध कराया है, जिनकी कीमत क्रमशः ₹3,14,900 और ₹3,29,900 होगी।

बता दें कि जहां एक तरफ iPhone 18 Pro मॉडल आज से बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, वहीं iPhone Duo फोल्डेबल के लिए प्री-ऑर्डर 16 अक्टूबर से शुरू होंगे और भारत में इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से होगी।

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Silver Rate Today: फिर चढ़ी चांदी, जानें 18 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

Silver Rate Today: शुक्रवार 18 सितंबर को चांदी के दाम चढ़ गए। एमसीएक्स पर एक किलो चांदी का दाम 2,39,579 रुपये है। गुड रिटर्न के अनुसार, आज चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में 1 किलो चांदी की कीमत 2,49,900 रुपये है जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर, पुणे में 2,50,000 रुपये है। Bullions.co.in पर चांदी की कीमत 2,38,070 रुपये प्रति किलोग्राम पर है

बता दें कि चांदी का दाम सोने के दाम को फॉलो कर रहा है। जब भी सोने का बढ़ता है, चांदी का दाम भी बढ़ता है। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि चांदी भी इन्वेस्टर्स के लिए एक सेफ इन्वेस्टमेंट टूल बन गया है।

इंटरनेशनल मार्केट में क्या है दाम?

इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों के दाम गिरे है। Comex पर चांदी के दाम 0.30% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 66.295 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2,50,000 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,49,900
लखनऊ₹2,50,000
पटना₹2,50,000
जयपुर₹2,50,000
अहमदाबाद₹2,50,000
पुणे₹2,50,000
बेंगलुरु₹2,50,000
हैदराबाद₹2,50,000
भोपाल₹2,50,000
चंडीगढ़₹2,50,000
नोएडा₹2,50,000
गुरुग्राम₹2,50,000

पिछले कारोबारी दिन क्या रहा चांदी का वायदा भाव

कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों द्वारा अपने सौदों का आकार घटाने से गुरुवार को वायदा कारोबार में चांदी की कीमत 476 रुपये की गिरावट के साथ 2,34,310 रुपये प्रति किग्रा रह गया। मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी के दिसंबर महीने में डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 476 रुपये यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,34,310 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 0.08 प्रतिशत की हानि के साथ 64.87 डॉलर प्रति औंस रह गयी। बाजार एक्सपर्ट्स ने कहा कि कारोबारियों द्वारा की गई बिकवाली से मुख्यत: चांदी वायदा कीमतों में गिरावट आई।

Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोने में गिरावट लौटी, 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव आया नीचे

देश में सोने की कीमत में गिरावट लौट आई है। 18 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 152980 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अन्य शहरों में भी भाव गिरा है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 600 रुपये नीचे आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,317.11 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152980 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140240 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140090 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152830 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 152830 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140090 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152830 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140090 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140240152980
मुंबई140090152830
अहमदाबाद140140152880
चेन्नई140090152830
कोलकाता140090152830
हैदराबाद140090152830
जयपुर140240152980
भोपाल140140152880
लखनऊ140240152980
चंडीगढ़140240152980

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड का मानना है कि सोने का भाव बढ़कर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तर से देखें तो यह करीब 130% की तेजी होगी। वुड ने Jefferies India Forum 2026 के मौके पर CNBC-TV18 से बातचीत में कहा कि 10,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर संभव है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की कोशिश से डॉलर कमजोर हो सकता है। इसका फायदा सोने को मिल सकता है।

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चांदी का हाल

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी शुक्रवार को गिरावट है। 18 सितंबर की सुबह चांदी फिसलकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 64.06 डॉलर प्रति औंस हो गई है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, दिल्ली में ₹140810 पर पहुंचा 22 कैरेट; वैश्विक बाजार में कीमत लुढ़की

देश में सोने की कीमत में और तेजी दिख रही है। 17 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अन्य शहरों में भी भाव चढ़ा है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 3 सत्रों की गिरावट के बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,200 रुपये बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,240.1 डॉलर प्रति औंस पर है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद वैश्विक बाजार में सोना लुढ़का है। फेड ने आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ने का संकेत दिया है। इस फैसले के बाद डॉलर मजबूत हुआ और बिना रिटर्न वाली कीमती धातुओं जैसे सोने पर बुरा असर पड़ा। फेड ने बेंचमार्क ओवरनाइट ब्याज दर को 0.25% बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में पहुंचा दिया है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140810153600
मुंबई140660153450
अहमदाबाद140710153500
चेन्नई140660153450
कोलकाता140660153450
हैदराबाद140660153450
जयपुर140810153600
भोपाल140710153500
लखनऊ140810153600
चंडीगढ़140810153600

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चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी में गुरुवार को गिरावट है। 17 सितंबर की सुबह चांदी फिसलकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में चांदी 2 कारोबारी सत्र स्थिर रहने के बाद 7,000 रुपये उछली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 62.57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।

वैभव सूर्यवंशी को अपनी टीम में नहीं लेने पर संजीव गोयनका को हैं अफसोस? LSG के मालिक ने क्या कहा

Vaibhav Sooryavanshi: भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आईपीएल 2026 खत्म होने के बाद से ही चर्चा में हैं। वैभव सूर्यवंशी आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए बेहद अहम खिलाड़ी बन चुके हैं। वहीं अब हाल ही में लखनऊ सुपर जायंट्स के मालिक संजीव गोयनका ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है। गोयनका ने कहा, लीग की कई दूसरी टीमों को भी वैभव को अपनी टीम में शामिल नहीं कर पाने का अफसोस है। उन्होंने कहा, राजस्थान ने उन्हें जिस कीमत पर अपनी टीम में शामिल किया था, वह फैसला अब काफी फायदेमंद नजर आ रहा है। राजस्थान इस युवा खिलाड़ी को आसानी से टीम से जाने नहीं देगी। आइए जानते हैं वैभव को लेकर संजीव गोयनका ने क्या कहा

संजीव ने की वैभव की तारीफ

शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में संजीव गोयनका ने कहा, “वैभव सूर्यवंशी पूरी दुनिया से तारीफ पाने के हकदार हैं। वह एक पीढ़ी में मिलने वाला खास टैलेंट हैं। आईपीएल की हर टीम के मालिक को इस बात का अफसोस है कि वैभव उनकी टीम का हिस्सा नहीं हैं। अब जब लक्ष्मी मित्तल राजस्थान रॉयल्स के मालिक हैं, तो मुझे नहीं लगता कि वह वैभव को कभी टीम से जाने देंगे। अगर कभी ऐसा हुआ भी, तो सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि आईपीएल के कई दूसरे मालिक भी उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के इंतजार में रहेंगे।”

वैभव में हैं कॉन्फिडेंस

संजीव गोयनका वैभव सूर्यवंशी के खेल के बड़े प्रशंसक हैं। प्रतिद्वंद्वी टीम के मालिक होने के बावजूद वह कई बार सोशल मीडिया पर वैभव की बल्लेबाजी और प्रतिभा की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने आगे कहा, “वैभव की पहली पब्लिक इमेज राइजिंग पुणे सुपरजायंट की जर्सी में है और आज वह कमाल कर रहा है। जाहिर है, उसमें टैलेंट है, शानदार शॉट्स हैं, लेकिन उसका कॉन्फिडेंस ही है जिसने मेरा सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। उसमें बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंस है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस नहीं। जब आप ओवरकॉन्फिडेंट हो जाते हैं, तो वहीं से आपकी गिरावट शुरू हो जाती है।”

उन्होंने आगे कहा, “वैभव को भरोसा है कि ‘मैं यह कर सकता हूं।’ और मैंने अब तक जो भी देखा है, उसमें वह हर गेम के साथ बेहतर होता जा रहा है। वह खुद को थोड़ा-थोड़ा बदलना सीख रहा है और इससे वह आगे चलकर और भी ज्यादा असरदार बनेगा। वह बड़े मौकों के लिए बना खिलाड़ी है।”

वैभव को 1.1 करोड़ रुपये में किया था शामिल

राजस्थान ने उन्हें जेद्दा में हुए आईपीएल ऑक्शन में 1.1 करोड़ रुपये में खरीदा था। बता दें राजस्थान रॉयल्स में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय कारोबारी लक्ष्मी मित्तल ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर करीब 1.65 अरब डॉलर यानी लगभग 15,660 करोड़ रुपये में टीम का अधिग्रहण किया है। इस सौदे के बाद मित्तल के पास टीम की करीब 75 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि पूनावाला के पास लगभग 18 फीसदी हिस्सा है। बाकी करीब 7 फीसदी हिस्सेदारी मनोज बडाले समेत टीम के मौजूदा निवेशकों के पास बनी हुई है।

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

Mokshagundam Visvesvaraya

हर साल 15 सितंबर को भारत में अभियंता दिवस यानी इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह दिन महान अभियंता, राष्ट्र-निर्माता और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (सर एम.वी.) की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों से आधुनिक भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

सर एम. विश्वेश्वरैया को भारतीय इंजीनियरिंग के महान स्तंभों में गिना जाता है। उन्हें आधुनिक मैसूर के विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उनकी सोच केवल इंजीनियरिंग परियोजनाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे औद्योगिक विकास, शिक्षा, सिंचाई, जल संरक्षण और आर्थिक प्रगति को भी राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे।

 

15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है अभियंता दिवस?

अभियंता दिवस हर वर्ष 15 सितंबर को सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन देशभर में इंजीनियरिंग संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों में कार्यक्रम आयोजित कर उनके योगदान को याद किया जाता है।

 

खासकर कर्नाटक में यह दिन विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। उनके जीवन, कार्यों और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर चर्चा की जाती है तथा नई पीढ़ी को उनकी उपलब्धियों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

 

शुरुआती जीवन और शिक्षा

सर एम. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को तत्कालीन मैसूर रियासत के मुद्देनहल्ली गांव में हुआ था, जो वर्तमान में कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले में स्थित है। उनका जन्म एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

 

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद बेंगलुरु के सेंट्रल कॉलेज से बी.ए. की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए पुणे के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान में प्रवेश लिया। सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की और जल्द ही अपनी प्रतिभा तथा कार्यकुशलता के कारण अलग पहचान बना ली।

 

इंजीनियरिंग से राष्ट्र सेवा तक का सफर

सर एम.वी. ने अपने करियर की शुरुआत बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोक निर्माण विभाग (PWD) से की। इंजीनियर के रूप में उन्होंने जल संसाधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया।

 

उनकी तकनीकी समझ और समस्या के व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता ने उन्हें अपने समय के अग्रणी इंजीनियरों में शामिल कर दिया। वर्ष 1912 से 1918 तक उन्होंने मैसूर राज्य के दीवान के रूप में भी सेवाएं दीं।

 

दीवान के रूप में उन्होंने मैसूर के औद्योगिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इसी कारण उन्हें आधुनिक मैसूर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्तित्व माना जाता है।

 

जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में बड़ा योगदान

सर एम. विश्वेश्वरैया का सबसे महत्वपूर्ण योगदान जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था के क्षेत्र में माना जाता है। उस दौर में भारत के कई हिस्से बाढ़, सूखे और सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

 

उन्होंने जल के संरक्षण, बांधों के निर्माण और अतिरिक्त पानी के प्रभावी प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों के विकास और उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी तकनीकी दक्षता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश भारत सरकार ने उन्हें अदन (वर्तमान यमन) की जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए भेजा था।

 

वे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विकसित हो रही तकनीकों को समझने और उन्हें भारत की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने में भी रुचि रखते थे। उनकी यह सोच उस समय के लिए बेहद दूरदर्शी मानी जाती थी।

 

विदेश यात्राओं से सीखने का जुनून

सर एम.वी. का मानना था कि किसी भी देश की प्रगति के लिए नई तकनीकों और वैज्ञानिक सोच को अपनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विदेशों की तकनीकी प्रगति का अध्ययन किया।

 

उन्होंने जापान, अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका सहित विभिन्न क्षेत्रों की यात्राएं कीं और वहां की इंजीनियरिंग तथा औद्योगिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। उनका उद्देश्य केवल जानकारी हासिल करना नहीं था, बल्कि उपयोगी तकनीकों को भारत की जरूरतों के अनुरूप अपनाना था।

 

ब्रिटिश सरकार ने दिया 'सर' का सम्मान

सर एम. विश्वेश्वरैया के असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1915 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एम्पायर' की उपाधि प्रदान की। इसके बाद उनके नाम के साथ 'सर' की उपाधि जुड़ गई। हालांकि उनका वास्तविक सम्मान भारत के विकास और राष्ट्र सेवा में किए गए उनके कार्यों से स्थापित हुआ।

 

भारत रत्न से हुए सम्मानित

स्वतंत्र भारत में भी उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान मिला। वर्ष 1955 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पहचान था।

 

100 वर्ष से अधिक का जीवन और अंतिम समय

सर एम. विश्वेश्वरैया ने लंबा और बेहद सक्रिय जीवन जिया। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक देश के विकास, तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रगति से जुड़े विषयों पर विचार व्यक्त किए।

 

उन्होंने 14 अप्रैल 1962 को बेंगलुरु में अंतिम सांस ली। उनकी स्मृति में उनके पैतृक गांव मुद्देनहल्ली में स्मारक भी बनाया गया है, जहां आज भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।

 

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं सर एम.वी.

सर एम. विश्वेश्वरैया का जीवन इस बात का उदाहरण है कि तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी किया जा सकता है।

 

उन्होंने जल प्रबंधन से लेकर औद्योगिक विकास तक अनेक क्षेत्रों में दूरदर्शी सोच का परिचय दिया। उनका जीवन अनुशासन, मेहनत, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र सेवा के समन्वय की प्रेरक मिसाल है।

 

इसलिए 15 सितंबर का अभियंता दिवस केवल इंजीनियरों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह उस महान अभियंता को याद करने का दिन भी है, जिसने अपने ज्ञान और दूरदृष्टि से आधुनिक भारत की विकास यात्रा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वराज्य प्राप्ति में गणपति उत्सव का योगदान

युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

श्रीगणेश चतुर्थी पर विशेष

श्रीगणेश जी सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत, पूर्वी और पश्चिमी भारत में गणेश उत्सब की अलग अलग परंपराएं हैं। मगर सभी परंपराओं में श्रीगणेश जी का स्थान सबसे महत्वपूर्ण पूज्य और आदरणीय है। इन्हीं परंपराओं में महाराष्ट्र के पुणे में शुरू हुई दस दिवसीय उत्सव परंपरा आज पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में बड़ी ही उमंग और उल्लास से मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी? कैसे मनाई जाएगी? कैसे पूजा होगा इस बारे में हम सभी जानते हैं। मगर आपको शायद पता नहीं होगा कि कानून की धारा 144 से भी श्री गणेश जी का संबंध रहा है, कैसे संबंध है,क्या संबंध है? आईए आपको बताते हैं।

सन् 1857 की क्रांति के बाद घबरा कर अंग्रेजों ने 1894 में एक बडा कानून लागू किया, जिसे धारा 144 कहते थे, जो अब समाप्त हो चुकी है। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा इस कठोर कानून की धारा लागू किए जाने के बाद से किसी भी स्थान पर पांच से अधिक लोग इकठ्ठा नहीं हो सकते थे। सरल शब्दों में कहें तो सार्वजनिक आयोजनों की मनाही थी। यदि कोई ब्रिटिश अधिकारी उनको इकठ्ठा देख लेता तो इतनी कड़ी सजा दी जाती थी कि जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते है। उनको कोड़े से मारा जाता था और उनके हाथों से नाखूनों को नोंच लिया जाता था।

ब्रिटिश हुकूमत के इस कड़े कानून के कारण गुलाम भारतीयों में भय व्याप्त हो गया था। लोगों में अंगेजो के प्रति व्याप्त भय को ख़त्म करने तथा इस कानून का विरोध करने के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत की। शुरुआत पुणे के शनिवारबाडा में गणेश उत्सव के आयोजन को वृह्द स्तर पर मनाकर हुई। सन् 1894 के पूर्व तक गणेश उत्सव को लोग घरों में ही मनाया करते थे। पुणे के शनिवारबाडा में वर्तमान समय में भी हजारों लोगो की भीड़ उमड़ती है। तिलक जी ने अंग्रेजों को चेतावनी दी थी कि अंग्रेज पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। असल में कानून के हिसाब से अंग्रेज पुलिस सिर्फ राजनीतिक समारोह में उमड़ी भीड़ को ही जेल में डाल सकती थी, धार्मिक समारोह में उमड़ी भीड़ को नही।

तिलक जी द्वारा शुरू की गई पहल के बाद पूरे 10 दिन 20 से 30 अक्टूबर 1894 के बीच पुणे के शनिवारबाड़ा में गणपति उत्सव मनाया गया। प्रतिदिन लोकमान्य तिलक भारतीयों को उद्बोधन देने के लिए किसी बड़े क्रांतिकारी को आमंत्रित करते थे। 20 तारीख को बंगाल के सबसे बड़े नेता बिपिन चन्द्र पाल तथा 21 तारीख को उत्तर भारत के लाला लाजपत राय वहां पहुंचे। इसी प्रकार चापेकर बंधू भी वहा पहुंचे। वहां 10 दिनों तक इन महान नेताओं के उद्बोधन होते रहे। सभी भाषणों का मुख्य आधार यही होता था कि हम भारत को अंग्रेजो से आजाद कराएं। गणपति जी हमें इतनी शक्ति दें की हम स्वराज्य लाएं।

दूसरे वर्ष यानी वर्ष 1895 में पुणे में 11 गणपति स्थापित किए गए। इसी प्रकार संख्या को बढ़ाते हुए अगले साल 31 और अगले साल यह संख्या एक सौ पार कर गई, जिसके बाद से गणेश उत्सव के कार्यक्रम ने मंच और पंडालों का रुप ले लिया। धीरे-धीरे पुणे के नजदीकी बड़े शहरो जैसे अहमदनगर, मुंबई, नागपुर आदि तक गणपति उत्सव फैलता गया। हर गणपति उत्सव पर लाखों लोगों की भीड़ जमा होती थी। उत्सव में आमंत्रित नेता उनमें देश प्रेम के भाव जाग्रत करने का कार्य करते थे। इस प्रकार का प्रयास सफल हुआ और लोगों के मन में देशभक्ति के प्रति भावना बढने लगी.स्वतंत्रता आन्दोलन में लोगों को एकजुट करने में इस प्रयास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1904 में लोकमान्य तिलक ने अपने भाषणों में लोगों से कहा था कि गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य आजादी हासिल करना है, स्वराज्य हासिल करना है, देश से अंग्रेजों को भगाना है। बिना स्वराज्य के गणपति उत्सव का कोई औचित्य नही है।

अगर इसके धार्मिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संदर्भ की बात करें तो भारत में गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाता है। यह दस दिनों तक चलने वाला हिंदू धर्म का पौराणिक पर्व है। युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

चूंकि गणेशजी पेशवाओं के कुलदेवता थे इसी कारण उनके शासन में गणेशजी को राष्ट्रदेव के रूप में दर्जा प्राप्त हो गया था। पेशवा वंशजों के बाद ब्रिटिश हुकूमत के दौर में सन् 1892 तक गणेश उत्सव केवल हिन्दू घरों तक ही सीमित था। संविधान के अनुसार भारत एक गण राज्य है और जो देवता गण यानी जनता जनार्दन का प्रतीक बनकर पूजे जाएं ऐसे ही देवता का नाम गणपति है, गणेश है। इस तरह कहा जा सकता है भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक जीवन में गणपति का जितना महत्व है उतना ही अंग्रेजों को भगाने और भारत के स्वराज की प्राप्ति के अभियान में भी उनका महत्व है। (लेखक भोजपुरी समाज (दिल्ली) के अध्यक्ष एवं मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार के पूर्व उपाध्यक्ष हैं।)