Gold Price Today: जन्माष्टमी पर सोना हुआ महंगा, चांदी को भी लगे पंख; चेक करें नए रेट

4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस मौके पर देश में सोने की कीमत में गिरावट पर ब्रेक लग गया है। जन्माष्टमी की सुबह ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 155510 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,443.93 डॉलर प्रति औंस पर है। नए भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

गोल्डमैन सैक्स ने इस साल के अंत तक सोने की कीमतें 4,900 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। उसका कहना है कि कई देशों के केंद्रीय बैंक 2026 में हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद रहे हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 155510 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली142560155510
मुंबई142410155360
अहमदाबाद142460155410
चेन्नई142410155360
कोलकाता142410155360
हैदराबाद142410155360
जयपुर142560155510
भोपाल142460155410
लखनऊ142560155510
चंडीगढ़142560155510

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमत में भी तेजी लौटी है। 4 सितंबर की सुबह चांदी बढ़कर 250100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 65.77 डॉलर प्रति औंस है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में सोना 3,400 रुपये तक और चांदी 5000 रुपये चढ़ी थी। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

 

Gold Rate Today: सोने में नहीं थम रही गिरावट, लगातार हो रहा सस्ता; ये है लेटेस्ट रेट

सोने की कीमत में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। 3 सितंबर की सुबह भी ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट का भाव गिरा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में हाजिर सोना लगातार छठे कारोबारी दिन गिरा और 3 सप्ताह से ज्यादा समय के निचले स्तर पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं के बीच हाजिर सोने की कीमतें दबाव में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,303.12 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली139490152160
मुंबई139340152010
अहमदाबाद139390152060
चेन्नई139340152010
कोलकाता139340152010
हैदराबाद139340152010
जयपुर139490152160
भोपाल139390152060
लखनऊ139490152160
चंडीगढ़139490152160

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चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमतें भी दबाव में हैं। 3 सितंबर की सुबह चांदी टूटकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.64 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से 2 करोड़ नाम कटे, मुंबई में 35% की भारी गिरावट! नाम जुड़वाने के लिए कैसे करें अप्लाई?

Maharashtra SIR List: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं।

मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।

क्यों हटाए गए नाम?

अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे।

इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है।

मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम

SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया।

17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट मतदाता’ मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है।

30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा।

18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका

इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा।

ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है।

नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?

ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

  • नाम जोड़ने के लिए: Form 6
  • मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7
  • एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8

ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें

महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें।

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दूध 9 रुपये, CNG 2 रुपये और PNG एक रुपये महंगी! 1 सितंबर से लागू हुआ ये नया रेट लिस्ट चेक करिए

मुंबई में रहने वाले लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। 1 सितंबर से दूध, कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के दाम बढ़ गए हैं।  रोजमर्रा की इन जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। CNG और घरेलू PNG के दाम बढ़ने से अब वाहन चलाना और घर में गैस का इस्तेमाल करना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा। नई कीमतें 1 सितंबर की आधी रात से लागू हो गई हैं। वहीं बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BMPA) ने भी दूध के दाम बढ़ा दिए है। जानें कितना बढ़े CNG, PNG और दूध के दाम

दूध के बढ़े दाम

बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BMPA) ने डेयरियों और स्थानीय फार्म से आने वाले दूध के थोक दाम में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। मुंबई में दूध के दाम बढ़ने की संभावना के बीच सीधे फार्म से मिलने वाले दूध की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। एसोसिएशन के मुताबिक, पशुओं के चारे और उनके रखरखाव पर लगातार बढ़ रहे खर्च के कारण यह कदम उठाया गया है। थोक कीमत बढ़ने के बाद आने वाले दिनों में इसका असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है।

इससे पहले इस महीने महाराष्ट्र के बड़े सहकारी दूध संघ गोकुल ने भैंस के दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद मुंबई और पुणे में भैंस के दूध की कीमत 78 रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती कीमतों से आने वाले समय में आम लोगों के घरेलू बजट पर भी असर पड़ सकता है।

CNG-PNG के भी बढ़े दाम

मुंबई में आज से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) महंगी हो गई है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने CNG के दाम में 2 रुपये प्रति किलोग्राम और PNG में 1 रुपये प्रति SCM की बढ़ोतरी की है। कीमतों में बदलाव के बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में CNG अब 88 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिलेगी। कंपनी के अनुसार, नई कीमतें 1 सितंबर की आधी रात से लागू हो गई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के चलते गैस की लागत बढ़ी है।

Gold Price Today: सप्ताह के पहले दिन सोना कमजोर, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक गिरा भाव

सप्ताह के पहले दिन सोमवार को देश में सोने की कीमत में गिरावट है। 31 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 158380 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भाव 158230 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। बीते सप्ताह 24 कैरेट गोल्ड 4850 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 4450 रुपये नीचे आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,599.70 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 163890 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 145190 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 145040 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 158230 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 158230 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 145040 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 158230 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 145040 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली145190158380
मुंबई145040158230
अहमदाबाद145090158280
चेन्नई145040158230
कोलकाता145040158230
हैदराबाद145040158230
जयपुर145190158380
भोपाल145090158280
लखनऊ145190158380
चंडीगढ़145190158380

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चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट दिख रही है। 31 अगस्त की सुबह चांदी 254900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 70.31 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Tukaram Mundhe: “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?” बॉम्बे हाई कोर्ट ने IAS तुकाराम मुंढे के FDI को क्यों लगाई फटकार?

Tukaram Mundhe: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई के दौरान जमकर फटकार लगाई। इसके बाद रेगुलेटर को पुणे में सिप्ला (Cipla) की एक फैसिलिटी और मुंबई में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) परिसर में चल रहे पांच रेस्टोरेंट के खिलाफ जारी आदेश वापस लेने पड़े। कोर्ट ने FDA की आलोचना करते हुए कहा कि उसने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में काम किया।

अदालत ने कहा कि कानून का ठीक से विश्लेषण नहीं किया गया। कोर्ट के मुताबिक एक मामले में तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया। MCA मामले में बेंच ने रेगुलेटर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने के बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला नजरिया अपनाने का आरोप भी लगाया।

‘क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?’

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबसे तीखी टिप्पणी बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में MCA परिसर के पांच रेस्टोरेंट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने FDA के रवैये पर सवाल उठाए। इस दौरान यह बात सामने आई कि एक नए जांच में पाया गया कि ये रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे। कोर्ट ने FDA से पूछा, “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं। आप कुछ भी कर सकते हैं?” साथ ही यह भी पूछा कि विभाग बार-बार बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में क्यों काम करता है।

‘न्यूज 18’ के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी FDA से मामले पर सोच-समझकर और व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। लेकिन आरोप लगाया कि विभाग ने इसके बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला रवैया अपनाया। अदालत ने कहा, “हम हर समय विभाग और अधिकारियों को फटकार लगाकर थक चुके हैं। अब कड़े आदेश जारी करने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझाएं या जेल जाएं।”

कामकाज रोकने का आदेश वापस

इसके बाद FDA ने हाई कोर्ट को बताया कि वह पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोकने का अपना आदेश वापस ले लेगा। साथ ही MCA को नया नोटिस जारी करेगा, ताकि उसे M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट के बारे में जवाब देने का मौका मिल सके। कोर्ट ने इस कदम को मंजूरी देते हुए कहा कि चूंकि रेस्टोरेंट अब फूड सेफ्टी नियमों का पालन कर रहे हैं, इसलिए कामकाज रोकने का आदेश रद्द माना जाएगा। अदालत ने कहा कि अब रेस्टोरेंट फिर से खुल सकते हैं।

‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’

यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। जबकि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसी व्यवस्था को रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है। FDA के फैसला लेने के तरीके पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, “हमें कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि विभाग का हौसला न टूटे? हम क्यों कहते हैं, ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि FDA लागू कानून का ठीक से विश्लेषण किए बिना आदेश क्यों जारी कर रहा था?

सिपला का लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस

दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने FDA को पुणे के वाडकी में सिपला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग सुविधा के दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने के लिए मजबूर किया। ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग और उन्हें वापस मंगाने (रिकॉल) की फॉलो-अप जांच के दौरान कथित उल्लंघन पाए जाने के बाद 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।

कोर्ट ने FDA द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसमें राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक छुट्टी के दिन सुनवाई के लिए कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाने वाला ईमेल भी शामिल था। अदालत ने FDA से कहा, “आप सराहनीय काम कर रहे हैं। लेकिन अब आप हद से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपने गलत किया है, और अब आपको इस मामले को सुलझाना होगा।”

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मुंढे पिछले कुछ दिनों से एफडीए द्वारा मुंबई में खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां (जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं) के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में, एफडीए कमिश्नर ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी।

‘आंखों के सामने कार बही, लगा अब हमारी बारी है’:लोग बोले- जिस पुल से आए, वो डूब गया; नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती

‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हम लोग घबरा गए थे।’ उस वक्त लगा कि अब हम लोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’ नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों ने ये बातें बताईं। 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित उनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी… नेपाल से सही सलामत लोग सीतामढ़ी पहुंचे, 3 फोटोज… ‘बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे’ नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप काठमांडू से भारत लौट आया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे। जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। हालांकि, बिहार प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए लिए गए। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की। नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, ‘नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हम लोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया, वो पूरी तरह डूब चुका है।’ योगेश ने ये भी कहा कि जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’ योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है। हम लोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हम लोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए। इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई। ’50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकाला’ पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे। 50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया। जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हम लोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था। काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’ एक अन्य यात्री सरला ने बताया, ‘नेपाल से निकलकर जब हम लोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।’ सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हम लोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वे घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं। ‘नेपाल बॉर्डर पर यात्रियों को रिसीव किया, खाना दिया, आगे की व्यवस्था की’ आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई। महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट सभी यात्रियों ने गुरुवार, 27 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद फडणवीस ने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति बताई। सांसद देवेश ठाकुर ने गुरुवार रात काठमांडू सांसद संदीप राणा से कॉन्टैक्ट किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया। रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे। यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाया और आराम करने की व्यवस्था की। महाराष्ट्र की महिलाओं ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी ——————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

यूपी में ‘आधी आबादी’ पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

यूपी में 'आधी आबादी' पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

Dimple Yadav: उत्तर प्रदेश में आगामी ‍विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात पर समाजवादी पार्टी (सपा) 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को साधने में पूरी ताकत से जुट गई है। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' जैसी बड़ी घोषणाओं के केंद्र में मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव नजर आईं।

 

इस बीच, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से डिंपल यादव को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर सवाल किया गया, तो उनके गोल-मोल जवाब और रहस्यमयी मुस्कान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इस समय यूपी में योगी आदित्य के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है। योगी भी राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की जी-तोड़ प्रयास कर रहे हैं। 

 

दरअसल, हाल के दिनों में डिंपल यादव के राजनीतिक कद और शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसद के मानसून सत्र से लेकर दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन तक, डिंपल बेहद मुखर होकर पार्टी की बात रख रही हैं। 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत महिलाओं को सालाना 40,000 रुपए देने के बड़े चुनावी वादे का ऐलान भी अखिलेश ने डिंपल यादव के हाथों ही कराया। इससे यह साफ संदेश जाता है कि सपा अब महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर डिंपल को 'फ्रंटफुट' पर रखकर आगे बढ़ाना चाहती है।

अखिलेश की रहस्यमयी मुस्कान!

पत्रकारों द्वारा जब डिंपल यादव को राज्य में पार्टी का सीएम चेहरा बनाए जाने पर सीधा सवाल पूछा गया, तो अखिलेश यादव ने सीधे न तो इसका समर्थन किया और न ही सवाल का खंडन किया। वे केवल मुस्करा कर रह गए। इससे इन अटकलों को बल मिला है। दरअसल, भाजपा की की महिला केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं की काट के लिए सपा एक मजबूत और सर्वमान्य महिला चेहरे की तलाश में है, जिसमें डिंपल यादव पूरी तरह फिट बैठती हैं। इसके साथ ही डिंपल की सौम्य और सादगी से भरी छवि महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। अखिलेश ने डिंपल को आगे करके यह संकेत दिया है कि पार्टी का नेतृत्व एक नया और व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने के लिए तैयार है।

कौन हैं डिंपल यादव?

डिंपल यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख महिला चेहरा और समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। वह वर्तमान में मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की बहू तथा सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1978 को पुणे (महाराष्ट्र) में एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिसके कारण उनकी शुरुआती पढ़ाई अलग-अलग स्थानों पर हुई। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से पास की। वे लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। 

 

डिंपल यादव पहली बार 2012 में कन्नौज लोकसभा सीट से निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। इसके बाद 2014 में भी वह कन्नौज से सांसद रहीं। 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने मैनपुरी से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। डिंपल यादव अपनी सादगी, सौम्यता और महिलाओं व युवाओं के मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए जानी जाती हैं। हाल के समय में वे पार्टी के भीतर नीतिगत फैसलों और अभियानों में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

मराठी सीखने के लिए ऑटो-कैब ड्राइवरों को 1 साल की मोहलत, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान

Maharashtra Language Controversy: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य सरकार के भाषा संबंधी आदेश को लेकर हो रहे विरोध और राजनीतिक विवाद के बीच, ऑटो-रिक्शा और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि अगले एक साल तक ड्राइवरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, ताकि उन्हें मराठी का कामकाजी ज्ञान हासिल करने के लिए समय मिल सके।

फडणवीस ने कहा, “मैंने कैब और ऑटो ड्राइवरों से मुलाकात की। वे सभी इस बात से सहमत हैं कि हर किसी को मराठी आनी चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा कि इस पेशे में अलग-अलग उम्र के लोग हैं और उनके लिए जल्दी मराठी सीखना मुश्किल है। उन्होंने एक योजना तैयार की है और इसके लिए एक साल का समय मांगा है। हालांकि, राज्य सरकार ने यह मांग मान ली है। इस साल कोई कार्रवाई नहीं होगी।”

बता दें कि यह घोषणा महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के उस बयान के कुछ दिनों बाद की गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो ड्राइवर मराठी का कामकाजी ज्ञान दिखाने में विफल रहेंगे, उनके ऑथराइजेशन बैज सस्पेंड किए जा सकते हैं।

मराठी भाषा को लेकर बढ़ा विवाद

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सख्ती के बीच मुंबई के कुछ ऑटो ड्राइवर बिहार और उत्तर प्रदेश लौटने लगे हैं। वहीं, पुणे में कुछ ड्राइवर RTO की कार्रवाई से बचने के लिए यात्रियों से बातचीत के दौरान सतर्कता बरत रहे हैं।

मराठी से जुड़ा नया नियम क्या है?

सरनाईक ने कहा था कि अगर ड्राइवर को मराठी की कामकाजी जानकारी नहीं है, तो उसका ड्राइवर बैज शुरू में एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा। इस महीने की शुरुआत में बदले गए नियमों के मुताबिक, अगर ड्राइवर उस समय में भाषा नहीं सीख पाता है, तो बैज रद्द करने से पहले उसे तीन महीने का और समय दिया जाएगा।

मंत्री ने यह भी कहा था कि जो ड्राइवर चार महीने बाद भी मराठी नहीं सीख पाते हैं, वे असल में यह दिखा रहे होंगे कि उन्हें “भाषा से प्यार नहीं है” और उन्हें मराठी पहचान की जरूरत नहीं है।

इस बीच, सरनाईक ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता मुंबई और ठाणे में “मराठी-हिंदी” विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए।

बता दें कि भाषा से जुड़े इस नियम की वजह से दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के बीच भी तनाव पैदा हो गया है। सोमवार को मुंबई के कांदिवली इलाके में चार ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने कथित तौर पर मराठी बोलने वाले एक ड्राइवर के साथ मारपीट की, क्योंकि उसने मराठी भाषा की जानकारी की अनिवार्यता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

यह घटना उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा ड्राइवर MG रोड पर सरकार की मराठी भाषा संबंधी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने दूसरे ऑटो ड्राइवरों से भी अपने वाहन चलाना बंद करने को कहा।

सरकार के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। चार कैब ड्राइवरों ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब ड्राइवरों के लिए काम चलाने लायक मराठी जानना जरूरी किए जाने वाले नियम पर रोक लगाने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 12 अगस्त को जारी सरकारी नोटिफिकेशन से लाखों “गरीब और प्रवासी” ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कोर्ट से इस नियम को लागू करने पर फिलहाल रोक लगाने की मांग की है।

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पुणे की इस महिला ने 29 साल की उम्र में लिया रिटायरमेंट, वीडियो शेयर कर बताया 4-स्टेप मैजिकल फॉर्मूला

कॉर्पोरेट की भागदौड़ भरी जिंदगी से थककर, एक महिला ने 29 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया और अपने पिता के साथ मिलकर एक ‘फ़ार्म स्टे’ शुरू किया। पर्माकल्चर और फलों की खेती अपनाकर और काम के तनाव (बर्नआउट) के बजाय अपनी सेहत और खुशी पर ध्यान देकर, उन्होंने एक आत्मनिर्भर जीवनशैली बनाई। इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे ज़मीन खरीदकर और एक अच्छा इकोसिस्टम बनाकर उन्होंने अपनी मर्ज़ी की ज़िंदगी जी। उनका वायरल वीडियो अब तक हज़ारों लोगों को प्रेरित कर चुका है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में स्नेहा राजगुरु कहती हैं, “मैं 29 साल की उम्र में रिटायर हो गई। मैं आपको बताती हूं कैसे,” और फिर वे उन 4 स्टेप्स के बारे में बताती हैं जिनकी मदद से उन्होंने कॉर्पोरेट ज़िंदगी छोड़ दी।

स्टेप 1- ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदें। उसका कोई ऐसा नाम रखें जो आपके दिल के करीब हो, जैसे मैंने ‘बाब बेटी फ़ार्म’ रखा।

स्टेप 2- फलों के पेड़ लगाएं। वे आपके साथ-साथ बढ़ते हैं, उनमें सबसे कम मेहनत लगती है और वे सालों तक आपको फल देते रहेंगे।

स्टेप 3- अपना खाना खुद उगाना शुरू करें। ताकि अगर लॉकडाउन या युद्ध जैसी कोई स्थिति आए, तो आप किसी पर निर्भर न रहें। मेरा यकीन मानिए, सरकार पर भी नहीं।

स्टेप 4- अपनी ज़मीन को फूलों से भर दें। यकीन मानिए, जब आपका मन रोज़ सुंदरता देखता है, तो उसे अस्पतालों की ज़रूरत नहीं पड़ती। और सबसे ज़रूरी बात, ऐसी जगह बनाएँ जो सिर्फ़ आपके पेट को ही नहीं, बल्कि आपकी आत्मा को भी सुकून दे। क्योंकि रिटायरमेंट का मतलब उम्र से नहीं, बल्कि दबाव के बजाय शांति को चुनने से है।

उन्होंने इंस्टाग्राम वीडियो के कैप्शन में लिखा- “क्या आप भी ऐसी ज़िंदगी का सपना देखते हैं? साथ जुड़िए, आपकी यात्रा यहीं से शुरू हो सकती है,”। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे 4 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और कमेंट सेक्शन में लोगों की ढेरों प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

एक यूज़र ने लिखा, “मुझे फ़ार्म का नाम बहुत पसंद आया। यह मेरा भी सपना है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “मैं भी दबाव के बजाय शांति चुनना चाहता हूं।”तीसरे यूज़र ने लिखा, “वाह, यह सचमुच बहुत सुंदर है। उम्मीद है कि मैं भी कभी अपनी ऐसी जगह बना पाऊंगा। आप जो कर रही हैं, वह मुझे बहुत पसंद है।” एक और कमेंट करने वाले ने पूछा, “आप किस इलाके में रहती हैं? वहां ज़मीन की कीमत क्या है?”