Retirement Planning: मंथली ₹5,000 SIP और ₹12,500 PPF से कैसे बन सकता है ₹2 करोड़ का फंड?

क्या आपने रिटायरमेंट प्लानिंग की है? अगर नहीं की है तो इसे जल्द पूरा कर लें। लंबी अवधि में नियमित रूप से निवेश करने पर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है। कई लोग देर से निवेश शुरू करते हैं, जिससे उनके पैसे को बढ़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता है। आप हर महीने 5000 रुपये के सिप और 12,500 रुपये के पीपीएफ में निवेश से आसानी से 2 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।

पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद स्कीम

पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए काफी अट्रैक्टिव स्कीम है। इस स्कीम में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। टैक्स के लिहाज से यह स्कीम काफी फायदेमंद है। यह एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट की कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि न तो इसमें पैसा जमा करने पर टैक्स लगता है, न तो इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है और न ही मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगता है।

पीपीएफ में मैच्योरिटी पर भी नहीं लगता है टैक्स

मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया कि पीपीएफ के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। यह पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। यह स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। अगर आप हर महीने 12500 रुपये का निवेश इस स्कीम में करते हैं तो 15 साल में आप कुल 22,50,000 रुपये का निवेश करते हैं। इस पर आपको 18,18,209 रुपये इंटरेस्ट मिलेगा। इस तरह मैच्योरिटी पर आपको 40,68,209 रुपये मिलेंगे।

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 5000 का सिप

आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में सिप से हर महीने 5000 रुपये का निवेश 15 साल तक करना है। इस तरह आप 15 साल में कुल 9,00,000 रुपये का निवेश करेंगे। सालाना 12 फीसदी रिटर्न के हिसाब से 15 साल आपका पैसा बढ़कर 23,79,657 रुपये हो जाएगा। अगर इसमें पीपीएफ से मिले 40,68,209 रुपये को मिला दिया जाए तो कुल 64,47,866 रुपये हो जाते हैं। इस पैसे को आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त निवेश करना होगा।

ऐसे तैयार हो जाएगा 25 साल में 2 करोड़ का फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त 64,47,866 रुपये का निवेश 10 साल में बढ़कर 2,00,26,093 रुपये हो जाएगा। इस कैलकुलेशन के लिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अंदाजा लगाया गया है। इस तरह आपको सिर्फ 15 साल तक हर महीने पीपीएफ में 12,500 रुपये और सिप में 5000 रुपये का निवेश करना है। 15 साल बाद आपको दोनों निवेश से मिले पैसे को म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में 10 साल के लिए निवेश करना है। इस तरह आपको निवेश सिर्फ 15 साल करना है। लेकिन, 2 लाख रुपये का फंड 25 साल में तैयार होगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स भी चुकाना होगा

एक बात आपको ध्यान में रखना होगा कि म्यूचुअल फंड में निवेश से हुए मुनाफे पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस देना होगा। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि आपको 23,79,657 रुपये पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। यह टैक्स 2,97,457.125 रुपये बनेगा। इसे तीन लाख रुपये माना जा सकता है।

टैक्स चुकाने के बाद 25 साल कुछ महीने में तैयार होगा फंड

इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड में हर महीने 5000 रुपये निवेश करने पर टैक्स काटकर आपके हाथ में करीब 20,79,657 रुपये आएंगे। अब इसमें पीपीएफ से मिले पैसे को जोड़ देते हैं, क्योंकि पीपीएफ पर टैक्स नहीं लगता है। दोनों मिलकर 61,47,866 रुपये हो जाते है। इस पैसे को एकमुश्त निवेश करने पर 10 साल कुछ महीने में 2 करोड़ का फंड तैयार हो जाएगा।

MRF देने वाली है ₹229 का बंपर डिविडेंड, शेयर नए सप्ताह में इस तारीख पर करेगा एक्स-डिविडेंड ट्रेड

टायर कंपनी MRF Ltd वित्त वर्ष 2026 के लिए 229 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने वाली है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई 2026 है। इस तारीख से एक दिन पहले मार्केट क्लोजिंग तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है।

इस डिविडेंड का ऐलान मई महीने में हुआ था। इस पर 6 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर पेमेंट 17 अगस्त को या उसके बाद किया जाएगा। इससे पहले MRF वित्त वर्ष 2026 के लिए दो बार में 3-3 रुपये का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है। वित्त वर्ष 2025 के लिए भी कंपनी ने दो बार 3-3 रुपये का अंतरिम और 229 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था।

MRF के शेयर का क्या है भाव

MRF के शेयर की कीमत 10 जुलाई को BSE पर 134082.80 रुपये पर बंद हुई। कंपनी का मार्केट कैप 56800 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 27.77 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर की कीमत एक महीने में 9 प्रतिशत चढ़ी है। बीएसई पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,63,500 रुपये और एडजस्टेड लो 1,22,000 रुपये है। MRF के शेयर के लिए अपर सर्किट 1,60,703.85 रुपये पर और लोअर सर्किट 1,07,135.95 रुपये पर है। सर्किट लिमिट 20 प्रतिशत है।

Stock Split: 5 साल में 1200% रिटर्न, अब 5 छोटे टुकड़ों में टूटेगा शेयर; 20 जुलाई है रिकॉर्ड डेट

कंपनी की वित्तीय सेहत

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में MRF का स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 680.44 करोड़ रुपये रहा। इस बीच रेवेन्यू 7,908.43 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 2,355.40 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 30,652 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

DDA Dwarka Commercial Hub Plan: दिल्ली का अगला ‘गुड़गांव’ बनेगा द्वारका! डीडीए बनाएगा मेगा इकोनॉमिक हब, जानिए क्या है पूरा प्लान

DDA Dwarka Plan: दिल्ली का द्वारका उप-शहर आने वाले समय में राजधानी का सबसे बड़ा बिजनेस और कमर्शियल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका को एक प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए उद्योग जगत के टॉप रिप्रेजेंटेटिव के साथ एक इंटरैक्टिव बैठक की अध्यक्षता की है। इस बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ किया कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए शहरी पुनर्विकास, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और योजना सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने द्वारका में एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और लेबर सेंट्रिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की वकालत की है। ऐसा सिस्टम जो लोकल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके।

एयरपोर्ट से नजदीकी और बेहतरीन कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

एलजी ने कहा रि एशिया की सबसे बड़ी प्लांड सब सिटी में से एक होने की वजह से द्वारका इन्वेस्टमेंट के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के लिए सही स्थिति में है। इसकी कनेक्टिविटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से काफी आसान है। यहां मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। एलजी ने स्पष्ट किया कि द्वारका पूरी तरह विकसित हो चुकी है। इस लिहाज से ये कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी जैसे अलग अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रदूषण मुक्त उद्योगों और रोजगार पर रहेगा मुख्य फोकस

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेष रूप से जोर दिया कि द्वारका का औद्योगिक विकास पूरी तरह से स्वच्छ, टिकाऊ और गैर-प्रदूषणकारी होना चाहिए। यहां ऐसे उद्योगों से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी जो उप-शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता करते हों।

एफएआर (FAR) मानदंडों की होगी समीक्षा, सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक में रीयल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ-साथ डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने हिस्सा लिया। उपराज्यपाल ने उद्योग जगत के रचनात्मक सुझावों की सराहना की और कहा कि उभरती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सहित योजना और विकास मानदंडों की समीक्षा और उन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने द्वारका और दिल्ली में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाएं, एक सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म और सिंप्लिफाई अप्रूवल्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज, आईटी, आईटीईएस और जीसीसी को प्रोत्साहित करने के साथ यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे प्रमुख कन्वेंशन और एग्जीबिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

TOD पॉलिसी और 5-स्टार होटल

निवेश और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य के निवेश के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। हाल ही में उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तह टीओडी समिति पात्र परियोजनाओं के लिए सिंगल-पॉइंट और समयबद्ध मंजूरी की सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने आश्वासन दिया कि द्वारका और दिल्ली में निवेश के लिए बड़ा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार चल रहा है।

इसके तहत एक नई औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है और विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रियाओं को इंटिग्रेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन सचिव ने बताया कि दिल्ली की इवनिंग इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यटन को आकर्षित करने के लिए अर्बन डेस्टिनेशन डेवलप किए जा रहे हैं। आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने कहा कि दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइव-स्टार होटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विचार किया जा रहा है।

विकसित दिल्ली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उपराज्यपाल ने अंत में दोहराया कि प्रशासन एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह केंद्रित है। यह पहल सतत विकास को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी और दिल्ली के विकसित दिल्ली बनने के सफर को और मजबूत करेगी।

यह भी पढ़ें: Delhi Power Cut 11 July: शनिवार को दिल्ली के इन इलाकों में रहेगा पावर कट, जानें समय और प्रभावित इलाके

Commodity Cornor: घरेलू बाजार में ग्वार पैक में आई तेजी, क्या आगे भी आएगा कीमतों में उछाल

Commodity Cornor: ग्वार की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। भाव 7 महीनों की ऊंचाई पर कारोबार कर रहे है। घरेलू बाजार में ग्वार पैक में तेजी आई है और ग्वार गम का भाव 12300 के पार निकला जबकि ग्वार सीड 6300 के करीब पहुंचा।

जुलाई में अब तक ग्वार गम 6% चढ़ा है जबकि ग्वार सीड 3% चढ़ा है। ग्वार पैक की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में ग्वार सीड 5 फीसदी और ग्वार गम 7 फीसदी चढ़ा है। जबकि 3 महीने में ग्वार सीड 9 फीसदी, 6 महीने में 14 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। वहीं ग्वार गम 1 महीने में 8 फीसदी, 3 महीने में 14 फीसदी और 6 महीने में 21 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।

इस बीच हल्दी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। NCDEX पर 7 महीनों की ऊंचाई पर दाम पहुंचे। अगस्त वायदा जनवरी 2026 के बाद `18700 तक पहुंचा। हल्दी के दाम 7 जनवरी को 18780 तक पहुंचे थे। कीमतों में लगातार 5वें महीने तेजी का दौर जारी है। 5 महीनों में दाम 19% से ज्यादा चढ़ चुके हैं।

वहीं धनिया की कीमतों में भी लगातार 5वें महीने तेजी जारी है। अगस्त वायदा 16100 के पार निकला। 5 महीनों में धनिया में करीब 35% की तेजी आई। जून में ही दाम 22% से ज्यादा चढ़े थे। सप्लाई में गिरावट से सपोर्ट मिल रहा।

एग्री कमोडिटी एक्सपर्ट के पुखराज चोपड़ा ने कहा कि कमजोर बारिश का असर ग्वार पैक पर दिख रहा है। मॉनसून बीकानेर में पहुंच चुका है लेकिन बारिश बेहद कम है । IMD 21 जुलाई तक बारिश न होने की बात कर रहा है। ग्वार की अभी तक 34 फीसदी बुआई हुई है। उन्होंने आगे कहा कि 25000 टन मांग लगातार बनी हुई है।

उत्पादन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ग्वार का उत्पादन पिछले साल से कम रहने की आशंका है। अगर मॉनसून कमजोर रहता है तो ग्वार पैक के भाव बढ़ेंगे।

Gold silver Outlook: MCX पर सोने की कीमतें गिरी, क्या अब ये हैं पैसे लगाने का सही समय या करना चाहिए और इंतजार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Mutual Fund: ₹10000 की मंथली SIP से बन गए ₹97 लाख! इस धाकड़ म्यूचुअल फंड ने 16 साल में किया कमाल

Mirae Asset Large & Midcap Fund Return: म्यूचुअल फंड से पैसा बनाना अनुशासन और सब्र का खेल है। और जब ये दोनों मिल जाएं तो कैसी वेल्थ क्रिएट होती है, इसका एक जीता-जागता एक उदाहरण सामने आया है। मिराए एसेट लार्ज एंड मिडकैप फंड ने बाजार में अपने शानदार 16 साल पूरे कर लिए हैं।

फंड हाउस द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिन निवेशकों ने इस फंड की शुरुआत से ही हर महीने महज ₹10,000 की एसआईपी जारी रखी थी, उनका फंड 31 मई 2026 तक बढ़कर लगभग ₹97 लाख हो चुका है। आइए समझते हैं इस स्कीम के रिटर्न का पूरा रिपोर्ट कार्ड।

₹19 लाख निवेश पर मिले ₹97 लाख

मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के डेटा के अनुसार, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट ने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। 16 साल में ₹10,000 प्रति माह के हिसाब से निवेशक ने कुल ₹19 लाख जमा किए। 31 मई 2026 तक यह ₹19 लाख का निवेश बढ़कर ₹96.9 लाख हो गया। इस एसआईपी निवेश पर फंड ने 18.44% का जोरदार XIRR डिलीवर किया है।

लंपसम इन्वेस्टमेंट करने वाले भी हुए मालामाल

अगर किसी निवेशक ने 9 जुलाई 2010 को इस फंड के ‘रेगुलर प्लान-ग्रोथ’ ऑप्शन में सिर्फ ₹10,000 का एकमुश्त निवेश किया होता, तो वह रकम आज बढ़कर ₹1,50,690 हो चुकी होती। इसके मुकाबले, अगर यही पैसा इस स्कीम के बेंचमार्क में लगाया गया होता, तो वह सिर्फ ₹76,908 ही बनता।

बेंचमार्क और सेंसेक्स को पछाड़ा

पिछले 15 वर्षों के प्रदर्शन को देखें तो इस फंड ने अपने बेंचमार्क और इंडेक्स के मुकाबले काफी आउटपरफॉर्म किया है। पिछले 15 सालों में इस फंड ने 18.85% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है। इसके मुकाबले स्कीम के बेंचमार्क ‘Nifty LargeMidcap 250 TRI’ ने 14.60% का रिटर्न दिया। वहीं, एडिशनल बेंचमार्क ‘BSE Sensex TRI’ इस दौरान सिर्फ 11.22% का रिटर्न ही दे पाया।

₹42,000 करोड़ से ज्यादा का फंड मैनेजमेंट

यह स्कीम एक ओपन-एंडेड इक्विटी योजना है, जो मुख्य रूप से भारतीय लार्ज-कैप और मिड-कैप के शेयरों में पैसा लगाती है। 31 मई 2026 तक यह फंड ₹42,792.20 करोड़ के विशाल एसेट बेस को मैनेज कर रहा है। इस फंड की सफलता के पीछे इसके अनुभवी फंड मैनेजर नीलेश सुराना हैं, जो इसकी शुरुआत से ही इससे जुड़े हैं। जनवरी 2019 से अंकित जैन भी सह-फंड मैनेजर के रूप में उनके साथ कमान संभाल रहे हैं।

EPF vs VPF: नौकरी जॉइन करते ही करें ये काम, 5 गुना बढ़ जाएगा आपका पीएफ फंड! जानें EPF और VPF का पूरा गणित

एक्सपर्ट नोट: हालांकि इस फंड का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है, लेकिन फंड हाउस का कहना है कि यह स्कीम किसी भी प्रकार के गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करती है। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : बाजार में लगातार दूसरे दिन दिखी तेजी, जानिए 13 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 10 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त दिखाने वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल,HDFC लाइफ,अदाणी एंटरप्राइजेज,SBI लाइफ इंश्योरेंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरने वाले शेयरों में डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,एटरनल,भारती एयरटेल,नेस्ले और सिप्ला शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस काफी हद तक पॉजिटिव रहा और सभी बड़े इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। रियल्टी शेयरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 3.5 प्रतिशत की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 3 प्रतिशत की तेजी आई। जून तिमाही के नतीजों के बाद TCS में बढ़त की वजह से निफ्टी IT इंडेक्स में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

अन्य सेक्टरों में,निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.5 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 1.4 प्रतिशत ऊपर चढ़े। जबकि ऑयल एंड गैस,प्राइवेट बैंक,एनर्जी,इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत के बीच बढ़त हुई। ऑटो इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.59 प्रतिशत और 1.41 प्रतिशत की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि थोड़े समय के करेक्शन के बाद,मार्केट में जबरदस्त रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। बैंकों के पॉजिटिव बिजनेस अपडेट,IT सेक्टर के उम्मीद के मुताबिक गाइडेंस और AI से जुड़े मौकों के साथ-साथ ग्लोबल खर्च में बढ़त की उम्मीद ने पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन की अच्छी शुरुआत के लिए माहौल तैयार कर रहे है। उम्मीद से बेहतर Q1 नतीजों का सिलसिला अर्निंग में बढ़ोतरी को लेकर बनी चिंताओं को कम करने में मदद करेगा। इससे मौजूदा तेजी को और सपोर्ट मिल सकता है।

ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में नरमी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में रिकवरी ने भारत के प्रति सेंटीमेंट को और बेहतर बनाया है,जिससे FII निवेश में रिकवरी को सपोर्ट मिला है। अहम बात यह है कि FOMC मीटिंग के सख़्त रुख का ग्लोबल मार्केट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है,क्योंकि हालिया डेटा से पता चलता है कि महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है। साथ ही,US, EU और चीन से आ रहे सुस्त आर्थिक आंकड़ो से संकेत मिल रहा है कि सेंट्रल बैंक आगे चलकर कम सख्त रुख अपना सकते हैं।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिख। कारोबार के अंत में यह 1.02% की बढ़त के साथ 24,207 पर बंद हुआ। इंडेक्स ने स्मॉल अपर विक (wick) वाली एक स्मॉल बॉडी बुलिश कैंडल बनाई,जो इंट्राडे में अनिश्चितता को दिखाती है। इसने सफलतापूर्वक अपना 100-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है और बुधवार को आई 516 अंको की भारी गिरावट का एक बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया है। RSI थोड़ा ऊपर गया है,जो धीरे-धीरे बुलिश मोमेंटम के बढ़ने का संकेत है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24400 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह शॉर्ट टर्म में 24550 और उसके बाद 24700 तक बढ़ सकता है। दूसरी ओर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24050-24000 के जोन में है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में पहली तिमाही के नतीजों की अहम भूमिका होगी। अच्छी अर्निंग, घरेलू निवेशकों की तरफ से हो रहा मजबूत निवेश और अच्छे मॉनसून से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि,मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ी बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला और पहले हाफ में एक रेंज में ट्रेड किया। फिर दूसरे हाफ की शुरुआत में ब्रेकआउट दिया और ऊपर बंद हुआ। आखिर में इंडेक्स 1.39% की बढ़त के साथ 58,046 पर बंद हुआ।

बैंक निफ्टी ने सफलतापूर्वक अपना 20-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है,जबकि RSI 60 के लेवल के करीब पहुंच रहा है। इससे पता चलता है कि इस हफ्ते की शुरुआत में दिखे सेलिंग प्रेशर को झेलने के बाद बुल्स ने फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है। इसके अलावा,ADX इंडिकेटर पर DI+ ने DI− को पार कर लिया है,जो बुलिश ट्रेंड को और मजबूत करता है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 58500-58600 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी का पुलबैक 59000 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 59500 तक जा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57600-57500 के जोन में है।

 

 

Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF vs VPF: नौकरी जॉइन करते ही करें ये काम, 5 गुना बढ़ जाएगा आपका पीएफ फंड! जानें EPF और VPF का पूरा गणित

EPF vs VPF Retirement Corpus Comparison: जब भी कोई नई नौकरी मिलती है, तो हमारा पूरा ध्यान सालाना CTC पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सीटीसी का एक छोटा सा हिस्सा, जो प्रोविडेंट फंड (EPF) में जाता है, आपके रिटायरमेंट की पूरी तस्वीर बदल सकता है?

अक्सर कंपनियां ईपीएफ योगदान की गणना के लिए एक बेसिक सैलरी की सीमा तय कर देती हैं, जिससे आपका रिटायरमेंट फंड बहुत छोटा रह जाता है। लेकिन अगर आप सही प्लानिंग के साथ EPF और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का सही तालमेल बिठाएं, तो बुढ़ापे में मिलने वाला फंड 5 गुना तक बढ़ सकता है और आप आसानी से करोड़ों रुपये के मालिक बन सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

कैसे मामूली अंतर से बन जाएगा ₹1.9 करोड़ का फंड?

मान लीजिए एक कर्मचारी की सालाना सीटीसी ₹12 लाख है। अब ईपीएफ योगदान दो अलग-अलग तरीकों से तय होता है:

केस 1: न्यूनतम सीमा पर योगदान

ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी की सरकारी सीमा यानी ₹15,000 प्रति महीने पर ही 12% ईपीएफ काटती हैं। इस स्थिति में आपके और कंपनी के हिस्से को मिलाकर हर महीने कुल ₹3,600 ईपीएफ में जमा होंगे। अगर वर्तमान ब्याज दर 8.25% और निवेश की अवधि 30 साल मान लें, तो रिटायरमेंट पर आपको मिलेंगे करीब ₹57 लाख।

केस 2: वास्तविक बेसिक सैलरी पर योगदान

अब मान लीजिए आपकी कंपनी आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी जो सीटीसी का 50% यानी ₹50,000 महीना है उस पर 12% पीएफ काटती है। ऐसे में आपका और कंपनी का मिलाकर हर महीने कुल योगदान ₹12,000 हो जाता है। इसी 8.25% ब्याज दर और 30 साल की अवधि में आपका कुल फंड बढ़कर ₹1.9 करोड़ हो जाएगा!

यानी सिर्फ बेसिक सैलरी पर पीएफ कैलकुलेट करवाने से आपकी जेब में बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ₹1.3 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त फंड जुड़ जाता है। यह है कंपाउंडिंग की असली ताकत।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

अगर आप अपने बुढ़ापे को और भी सुरक्षित और आलीशान बनाना चाहते हैं, तो आप VPF का विकल्प चुन सकते हैं। वीपीएफ आपको अनिवार्य 12% की सीमा से अधिक अपनी मर्जी से पीएफ में निवेश करने की छूट देता है। ऊपर दिए गए उदाहरण में अगर आप ईपीएफ के ₹12,000 के योगदान के साथ हर महीने वीपीएफ के जरिए ₹8,000 अतिरिक्त निवेश करते हैं, तो आपकी कुल मासिक बचत ₹20,000 हो जाएगी।

30 साल बाद 8.25% ब्याज के हिसाब से आपका यह फंड बढ़कर करीब ₹3.2 करोड़ हो जाएगा! यह शुरुआती ₹57 लाख के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा है।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

नौकरी बदलते या जॉइन करते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

हर कंपनी का पीएफ काटने का नियम अलग होता है। इसलिए सैलरी डिस्कशन के समय ये बातें जरूर जांचें:

पीएफ कैलकुलेशन का आधार: कंपनी से साफ पूछें कि वे पीएफ का योगदान ₹15,000 की न्यूनतम सीमा पर कर रहे हैं या आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी पर।

बेसिक सैलरी का हिस्सा: आपकी सीटीसी में बेसिक सैलरी का हिस्सा कितना है, क्योंकि पीएफ इसी से तय होता है।

VPF की सुविधा: क्या कंपनी आपको VPF के जरिए अतिरिक्त निवेश करने की अनुमति देती है।

टेक होम सैलरी में लगेगी चपत

ज्यादा पीएफ और वीपीएफ काटने का एक ही नुकसान है कि इससे आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाती है। इसलिए निवेश बढ़ाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके पास इमरजेंसी फंड तैयार है और आपके मंथली खर्चे आसानी से पूरे हो रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

Investment Mantra: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों के बीच लड़ाई जैसे ही बढ़ती है सोने की कीमतों में तेज गिरावट आती है। ऐसे में सोना रिकॉर्ड हाई से करीब 25% टूट चुका है। ऐसे में इतनी भारी गिरावट के बाद क्या सोने में निवेश का सही समय आ गया है? क्या आगे गोल्ड में फिर चमक लौटेगी? सिर्फ इतना ही नहीं पोर्टफोलियो की चमक बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग एक बड़ी थीम बनकर उभरी है। 2 साल की लगातार रैली के बाद क्या अब भी एक आम निवेशक ग्लोबल इन्वेस्टिंग की तरफ फोकस कर सकता है? इस सब सवालों के जबाव देनें के लिए हमारे साथ हैं ट्रुवांटा वेल्थ (Truvanta Wealth) के फाउंडर और CEO कीर्तन शाह

सोने में गिरावट के कारण

मार्च में कई सेंट्रल बैंकों ने करीब $30 bn का सोना बेचा है। तुर्की और रूस ने आगे बढ़कर सोना बेचा है। तुर्की ने अपनी गिरती करेंसी लीरा को संभालने के लिए सोना बेचा है। रूस ने यूक्रेन युद्ध खर्चों को पूरा करने के लिए सोना बेचा है। मार्च में कच्चा तेल महंगा होने से बॉन्ड यील्ड बढ़ीं हैं। यील्ड बढ़ने से फिक्स्ड इनकम निवेश की तरफ रुझान बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने भी दबाव बनाया है। सोने की कीमत डॉलर में तय होती है,मजबूत डॉलर से इसकी मांग घटती है।

अब सोने पर नजरिया?

कीर्तन शाह ने कहा कि अब धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने का समय है। ग्लोबल स्तर पर युद्धों में कमी आई है। करेंसी मैनेजमेंट और फंडिंग की जरूरतें घटेंगी। सेंट्रल बैंक फिर से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान देंगे। डी-डॉलराइजेशन का ट्रेंड भी सोने के पक्ष में है। सेंट्रल बैंकों की बैलेंस शीट में सोने की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 27% हो गई है। डॉलर रिजर्व की हिस्सेदारी 25% से घटकर 23% हो गई है। अप्रैल से सेंट्रल बैंकों ने फिर से सोने की खरीद शुरू की है। चीन ने पिछले महीने 19 महीनों में सबसे ज्यादा सोना खरीदा है। वह लगातार 19 महीनों से सोने की खरीद कर रहा है। US में दरें उतनी नहीं बढ़ेंगी,जितनी बाजार को आशंका थी। जिन कारणों से सोना गिरा था वही अब आगे सोने की कीमतों को सहारा देंगे।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी है, क्या पोर्टफोलियो में हिस्सा होना चाहिए?

इस पर बात करते हुए कीर्तन शाह ने कहा कि पिछले दो सालों ने साफ किया है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग बहुत जरूरी है। कई ऐसे निवेश थीम और अवसर हैं जो भारत में मौजूद नहीं हैं। इसलिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी हो जाती है। रुपये की सालाना लगभग 4% गिरावट भी इसका एक बड़ा कारण है।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी, क्या इस समय करें निवेश?

कीर्तन शाह ने कहा कि फिलहाल अभी हम ऐसा नहीं करेंगे। ग्लोबल बाजारों में पहले ही अच्छी तेजी आ चुकी है,सब भाव में है। ग्लोबल स्तर पर AI थीम की तेजी अब चुनिंदा शेयरों में ही है। अगर LLMs ( Large Language Models) शेयर देखें तो उनके सामने अब प्राइसिंग का दबाव है। टोकन प्राइस इंडेक्स 2.5 डॉलर प्रति मिलियम टोकन से घटकर 1.8 डॉलर पर आ गया है। चीन के ओपन-सोर्स मॉडल US कंपनियों पर भी दबाव बना रहे हैं।

तो अभी कहां करें निवेश?

कीर्तन शाह की राय है कि AI थीम में करेक्शन आया तो निवेशकों का रुख फिर से भारत की ओर होगा। भारतीय बाजारों में 2 साल से टाइम और वैल्यूएशन करेक्शन देखने को मिल रहा है। कई सेक्टर अब आकर्षक वैल्यूएशन पर दिखाई दे रहे हैं।

 

 

Trading Plan : बने रहें और गिरावट में खरीदारी के सौदे बढ़ाएं, दिन के हाई पर हो सकती है आज की क्लोजिंग

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Plan : बने रहें और गिरावट में खरीदारी के सौदे बढ़ाएं, दिन के हाई पर हो सकती है आज की क्लोजिंग

Trading Plan : आज बाजार में तेजी का मोमेंटम बढ़ा है। मिडकैप इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर दिख रहा है। इधर डबल सेंचुरी लगाकर निफ्टी 24200 के पास दिख रहा है। निफ्टी 20 DEMA, 50 DMA और 100 DMA के पार निकल गया है। वहीं 700 प्वाइंट से ज्यादा के उछाल के साथ बैंक निफ्टी आज आउटपरफॉर्म कर रहा है। यह 58000 के अहम लेवल के पार कारोबार कर रहा है। स्मॉलकैप शेयरों में भी जबरदस्त मोमेंटम देखने को मिल रहा है। उधर वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX 8% फिसला है।

TCS के उम्मीद से अच्छे नतीजों ने पूरे IT सेक्टर में जोश भर दिया है। निफ्टी IT इंडेक्स करीब दो फीसदी चढ़ा है। दो फीसदी के उछाल के साथ इन्फोसिस निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल है। साथ ही रियल्टी और मेटल शेयरों में भी जोरदार तेजी है। लेकिन फार्मा और FMCG में हल्का दबाव है।

बाजार: शानदार चाल

बाजार पर अपनी रणनीति साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि खुलते ही लेने की बोल्ड कॉल आज सही रही। निफ्टी अब कल के हाई के ऊपर सेटल हो गया है। बैंक निफ्टी पर ज्यादा भरोसा काम आया है। बैंक निफ्टी में खुलने के बाद भी बड़ी रैली आई है। IT भी ऊपर खुला लेकिन थोड़ा ठंडा पड़ा है। मिडकैप में शानदार तेजी देखने को मिली है। MF डेटा में फिर से उछाल आया है। एमएफ निवेश एक महीने की गिरावट के बाद उछाल है। इंडियन बैंक नतीजों के बाद भागा है। कच्चा तेल $75 के करीब आ गया है। India VIX 7.5% नीचे आया है। पुट कॉल रेश्यो भी ओवरबॉट नहीं है।

बाजार: अब क्या?

बने रहें और गिरावट में खरीदारी के सौदे बढ़ाएं। आज की क्लोजिंग शायद हाईज पर हो। वीकेंड का रिस्क लगे तो थोड़ा हेज कर लें। PSU बैंकों में मोमेंटम लौट रहा है। अभी भी शानदार स्टॉक स्पेसिफिक मौके हैं। वक्त पर एंट्री और एक्जिट बेहद अहम है। डिक्सन टेक पर हमने तब लॉन्ग नजरिया रखा जब सबने शॉर्ट कहा और आज सिर्फ CNBC-आवाज़ का डिक्सन पर मुनाफा बुक करने का नजरिया था।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,250-24,350 पर रेजिस्टेंस और 24,100-24,150 पर सपोर्ट है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 58,500-58,800 पर रेजिस्टेंस और 57,800-58,000 पर सपोर्ट है।

 

म्यूचुअल फंड से वेल्थ क्रिएशन के मंत्र, जानिए निफ्टी 50 और Nifty50 Equal Weight में से किसमें निवेश रहेगा फायदेमंद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

भारत के बारे में विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर बदले, कहा-जल्द बाजार में लौटने वाली है रौनक

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर भारतीय शेयर बाजारों पर बदल गए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में टेंशन फिर से बढ़ने से बाजार में तेज गिरावट के बावजूद निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर हायर इनपुट कॉस्ट्स और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर पड़ सकता है। लेकिन, कॉर्पोरेट अर्निंग्स में रिकवरी की संभावनाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

मीडियम टर्म में बाजार की संभावनाओं पर असर नहीं

मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि भारतीय बाजार में आई गिरावट की वजह साइक्लिकल है, न कि स्ट्रक्चरल। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मीडियम टर्म में भारतीय शेयर बाजार की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसने इसकी कई वजहें बताई हैं। जैसे ग्रोथ मोमेंटम में इम्प्रूवमेंट है। इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। भारतीय बाजार को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की राय बदलने की बड़ी वजह यह है कि डिमांड को लेकर उनकी चिंता कम हुई है।

जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

जेफरीज को जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ बीती 13 तिमाहियों में सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसमें बढ़ती इकोनॉमिक एक्टिविटी और हायर नॉमिनल जीडीपी का हाथ है। ऑयल एंड गैस और मेटल्स को छोड़ कंपनियों की अर्निंग्स साल दर साल आधार पर करीब 12 फीसदी बढ़ने की उम्मीद। फिलिप कैपिटल ने भी ऑयल एंड गैस को छोड़ निफ्टी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।

निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह

ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह दी है। कई स्ट्रेटेजिस्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मार्केट का फोकस अर्निंग्स मोमेंटम पर बढ़ेगा। यूपीएस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में फिर से टेंशन बढ़ने का असर भारत में मध्यम अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा।

इन सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद

ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों को फाइनेंशियल्स स्टॉक्स का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत बैलेंसशीट है। इंडस्ट्रियल और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि इनवेस्टमेंट से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से शेयरों बाजार के प्रदर्शन में इम्प्रूवमेंट आएगा। जेपी मॉर्गन ने कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स को अपनी पसंद बताया।

इन सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ ज्यादा रह सकती है

फिलिप कैपिटल ने जून तिमाही में एनबीएफसी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, डिफेंस और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की अर्निंग्स ग्रोथ सबसे ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, ऑयल एंड गैस, सीमेंट, हेल्थकेयर और मेटल्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे पेश करने शुरू कर दिए हैं। टीसीएस ने 9 जुलाई को अपने नतीजे पेश किए।