टॉप 10 कंपनियों में से 4 का M-Cap ₹92995 करोड़ बढ़ा, HDFC Bank को सबसे ज्यादा फायदा

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक फायदा HDFC Bank और भारती एयरटेल को हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 194.52 अंक या 0.25 प्रतिशत और निफ्टी 63.95 अंक या 0.26 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ।

टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank, भारती एयरटेल और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में 49,294.13 करोड़ रुपये की गिरावट आई।

सप्ताह के दौरान HDFC Bank का मार्केट कैप सबसे अधिक 35,808.09 करोड़ रुपये बढ़कर 12,69,454.42 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह भारती एयरटेल का मार्केट कैप 34,896.92 करोड़ रुपये बढ़कर 11,98,774.22 करोड़ रुपये, LIC का 16,065.50 करोड़ रुपये बढ़कर 5,60,205.05 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का मार्केट कैप 6,224.97 करोड़ रुपये बढ़कर 17,71,206.33 करोड़ रुपये हो गया।

बाकी 6 कंपनियों को कितना नुकसान

इसके उलट हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 12,088.65 करोड़ रुपये घटकर 5,04,997.65 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह L&T का मार्केट कैप 11,040 .23 करोड़ रुपये घटकर 5,42,938.40 करोड़ रुपये, TCS का 8,574.87 करोड़ रुपये घटकर 7,48,600.40 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस का 7,813.58 करोड़ रुपये घटकर 6,35,327.78 करोड़ रुपये, ICICI Bank का 6,315.32 करोड़ रुपये घटकर 10,05,379.71 करोड़ रुपये और SBI का मार्केट कैप 3,461.48 करोड़ रुपये घटकर 9,56,430.44 करोड़ रुपये रह गया।

टॉप 10 कंपनियों में RIL अव्वल

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमशः HDFC Bank, भारती एयरटेल, ICICI Bank, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, LIC, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज 17 जुलाई को अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। HDFC Bank और ICICI Bank के नतीजे 18 जुलाई को सामने आएंगे। TCS बीते सप्ताह 9 जुलाई को नतीजे जारी कर चुकी है।

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नए सप्ताह में 15 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Kusumgar की लिस्टिंग हो सकती है। इसके बाद 16 जुलाई को Laser Power & Infra के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने वाले हैं। इसी दिन BSE SME पर Devson Catalyst और NSE SME पर Happy Steels के शेयरों के लिस्ट होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cement Stocks: अभी और टूटेगा इस सीमेंट कंपनी का शेयर! आपके पास है?

Ramco Cements Share Price: दिग्गज सीमेंट कंपनी रामको सीमेंटस पर एक बार फिर देवेन चोकसी ने बेयरेश रुझान अपनाया है। अपनी 10 जुलाई की रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म ने रामको सीमेंट्स के शेयरों को लेकर जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है जो मौजूदा लेवल से 11% से अधिक नीचे है। एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 10 जुलाई को रौनक भरे बाजार में बीएसई पर यह 1.90% की बढ़त के साथ ₹940.70 के भाव पर बंद हुआ था। ब्रोकरेज फर्म ने इसे ₹836.00 के टारगेट प्राइस पर सेल रेटिंग दी है।

Ramco Cements पर ब्रोकरेज फर्म क्यों है बेयरेश

रामको सीमेंट्स का फोकस प्रीमियमाइजेशन, हायर ग्रीन एनर्जी एडॉप्शन और ऑपरेशनल एफिसिएंसी प्रीमियमाइजेशन के जरिए प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार पर फोकस है। प्रीमियम प्रोडक्ट्स की अब कंपनी के रेवेन्यू में 28% हिस्सेदारी है को 40% बिजली ग्रीन एनर्जी है। हालांकि अपनी 10 जुलाई की रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म देवेन चोकसी रिसर्च का कहना है कि कंपनी लागत कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन मार्जिन पर फिलहाल दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी को कमजोर मांग, ऊंची इनपुट कॉस्ट और सीमित प्राइसिंग पावर जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे नियर टर्म में मुनाफे पर दबाव दिख सकता है। कैपेक्स के चलते ब्याज और डेप्रिसिएशन का खर्च बढ़ेगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कंपनी की लॉन्ग टर्म योजनाएं तो अच्छी हैं लेकिन उसका फायदा अभी तुरंत नहीं दिखाई देगा।

एक साल में कैसी रहेगी शेयरों की चाल

रामको सीमेंट्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 9 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹1,214.00 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से चार ही महीने में यह 30.94% टूटकर 10 जून 2026 को ₹838.40 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

न म्यूचुअल फंड, न शेयर… 50 लाख कमाने वाला प्रोफेशनल आखिर कहां लगा रहा पैसा

आज के दौर में अच्छी सैलरी मिलने पर ज्यादातर लोग अपनी बचत को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या SIP के जरिए बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसे लंबे समय में संपत्ति बनाने का सबसे लोकप्रिय तरीका माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आई एक कहानी ने इस सोच को नई बहस में बदल दिया है। 50 लाख रुपये सालाना कमाने वाले एक प्रोफेशनल ने पारंपरिक निवेश के बजाय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खुद का कारोबार खड़ा करने में लगाने का फैसला किया। उसकी यह रणनीति अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है।

कुछ लोग इसे भविष्य के लिए साहसिक और समझदारी भरा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि शेयर बाजार की कंपाउंडिंग ताकत को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

आधी सैलरी, आधे कंपनी के शेयर

X पर राम नाम के एक यूजर ने अपने दोस्त की फाइनेंशियल प्लानिंग शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त का सालाना CTC 50 लाख रुपये है। इसमें 25 लाख रुपये सैलरी के रूप में मिलते हैं, जबकि बाकी 25 लाख रुपये कंपनी के शेयर हैं, जो चार साल में धीरे-धीरे मिलते हैं।

SIP छोड़ बिजनेस पर लगाया दांव

राम के मुताबिक, उनके दोस्त ने अतिरिक्त पैसे को म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगाने के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। पिछले साल उसने बैग्स का कारोबार शुरू किया और इस साल पुरुषों के कपड़ों का बिजनेस भी लॉन्च कर दिया।

हालांकि, वह पूरी तरह पारंपरिक निवेश से दूर नहीं है। वह PPF में निवेश करता है और हर साल करीब 1.2 लाख रुपये का LIC प्रीमियम भी भरता है। लेकिन उसका सबसे बड़ा फोकस अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है।

SIP या अपना बिजनेस?

राम ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या उनका दोस्त शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में मिलने वाले लंबे समय के कंपाउंडिंग रिटर्न से चूक रहा है? या फिर अपना सफल बिजनेस खड़ा करना भविष्य में इससे भी बड़ा फायदा दे सकता है?

यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया।

लोगों ने क्या दी राय?

कई यूजर्स का मानना था कि निवेश और बिजनेस, दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना सबसे अच्छा तरीका है। उनका कहना था कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहता है, जबकि अपने बिजनेस में फैसलों पर खुद का नियंत्रण होता है।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर किसी को अपने बिजनेस और उसकी संभावनाओं पर भरोसा है, तो अपने काम में निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति खुद अपने कारोबार को संभालता है, तो उसके पास बेहतर फैसले लेने और मुनाफा बढ़ाने का मौका होता है।

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Laser Power & Infra IPO: जबरदस्त रिस्पॉन्स से फुली सब्सक्राइब, अभी भी मौका; GMP दे रहा अच्छी लिस्टिंग के संकेत

लेजर पावर एंड इंफ्रा के ₹742 करोड़ के IPO को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह 9 जुलाई को खुला था और फुली सब्सक्राइब हो चुका है। अभी इसमें पैसे लगाने के लिए एक दिन और बचा है। यह 13 जुलाई को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹203-₹214 प्रति शेयर और लॉट साइज 70 शेयर है। क्लोजिंग के बाद अलॉटमेंट 14 जुलाई को फाइनल हो सकता है। लिस्टिंग NSE और BSE पर 16 जुलाई को हो सकती है।

ग्रे मार्केट से कंपनी की लिस्टिंग अच्छी रहने के संकेत हैं। investorgain.com के मुताबिक, ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड ₹214 से 16.36% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Laser Power & Infra IPO में ₹542 करोड़ के 2.53 करोड़ नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही मौजूदा निवेशकों की ओर से ₹200 करोड़ के 93 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल है। पब्लिक इश्यू में अब तक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.68 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 2.03 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.85 गुना भर चुका है।

क्या करती है कंपनी

लेजर पावर एंड इंफ्रा लिमिटेड कोलकाता की कंपनी है, जो भारत में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए पावर केबल, कंडक्टर और दूसरे स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट और कंपोनेंट बनाती है। कंपनी पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) बेसिस पर भी काम करती है। कंपनी के प्रमोटर दीपक गोयल, देवेश गोयल, अक्षत गोयल और राखी गोयल हैं।

IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

IPO में 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35% हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15% हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। लेजर पावर एंड इंफ्रा अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कर्ज कम करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

क्या करना चाहिए निवेश?

मास्टर कैपिटल के IPO नोट के अनुसार, “निवेशक इस IPO को लंबे समय के निवेश के एक अच्छे मौके के तौर पर देख सकते हैं।” नोट में कहा गया है कि पूर्वी भारत में पावर केबल और कंडक्टर बनाने की क्षमता के मामले में कंपनी का नाम दिग्गज कंपनियों में शामिल है। हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे कि-

– कुछ ही ग्राहकों पर ज्यादा निर्भरता: कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा टॉप 10 ग्राहकों से ही आता है।

– रेवेन्यू के बड़े हिस्से के लिए पावर केबल और कंडक्टर पर निर्भरता

– कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर

– लॉन्ग टर्म खरीद समझौतों के बिना सीमित सप्लायर बेस पर निर्भरता

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Laser Power & Infra की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹151.6 करोड़ रहा। रेवेन्यू 9% फिसलकर ₹2,347.89 करोड़ पर आ गया। उधारी ₹828.23 करोड़ की थी। वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू ₹2,592.53 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹106.75 करोड़ दर्ज किया गया। लेजर पावर एंड इंफ्रा IPO के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड है। रजिस्ट्रार, MUFG इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूरोप की सिलिकॉन वैली बना विलनियस:शहर की आबादी 29 लाख, 6 यूनिकॉर्न काम कर रहीं; स्टार्टअप के मामले में दुनिया में 13वें नंबर पर

सुबह के करीब दस बजे हैं। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस की साइबर सिटी में कांच की ऊंची इमारतों के बीच तेज कदमों से युवा प्रोफेशनल्स गुजर रहे हैं। एक तरफ नॉर्ड सिक्योरिटी जैसे दुनियाभर में मशहूर यूनिकॉर्न का दफ्तर है, तो कुछ ही कदम पर हॉस्टिंगर का। हॉस्टिंगर यानी एक ऐसा स्टार्टअप जिसके यूजर 150 से ज्यादा देशों में हैं। यहां फ्यूचर, एआई और स्टार्टअप जैसे शब्द हर बातचीत में सुनाई देते हैं। विलनियस को अब यूरोप की ‘सिलिकॉन वैली’ भी कहा जाने लगा है। यूरोप के इस छोटे से देश लिथुआनिया की आबादी मात्र 29 लाख के करीब है, लेकिन यहां हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं। आकार और आबादी में भले ही यह देश छोटा है, लेकिन सोच बड़ी और ग्लोबल है। यूनिकॉर्न लिथुआनिया की सीईओ गिन्तारे वेरबिकाइते बताती हैं कि आज विलनियस यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती स्टार्टअप सिटी है। इस मामले में दुनिया में भी ये 13वें नंबर पर है। यहां कारोबार स्थानीय नहीं, वैश्विक सोच के साथ शुरू होता है। यहां के लोग कहते हैं कि जब हम कोई स्टार्टअप शुरू करते हैं तो उसे दुनिया की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाते हैं, क्योंकि हम सिर्फ लिथुआनिया तक सीमित रहना नहीं चाहते हैं। आबादी यानी प्रति व्यक्ति के हिसाब से लिथुआनिया दुनिया के सबसे अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप वाले देशों में है। यहां विंटेड, नॉर्ड सिक्योरिटी, बीसीजी, फ्लो, कास्ट एआई और ऑक्सीलैब्स, छह यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। विंटेड ने यूनिकॉर्न बिल्ड करने का एक अलग मॉडल पेश किया है। उसने पुराने कपड़े खरीदने और बेचने का ऑनलाइन मॉडल शुरू किया और वो यहां की पहली यूनिकॉर्न बनी। इन्वेस्ट लिथुआनिया की स्ट्रैटजिस्ट डायना गिरडेनाइट कहती हैं कि बढ़ती स्किल्ड वर्कफोर्स, फाइनेंशियल इन्सेंटिव और सरकार की नीतियां जैसे प्रमुख कारण हैं, जिनके कारण लिथुआनिया स्टार्टअप पावरहाउस बन रहा है। सीखने-सिखाने का कल्चर, भारत इनका बड़ा बाजार चार कारण… लिथुआनिया कैसे बन रहा स्टार्टअप पावरहाउस 1. तेजी से बढ़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम देश में 300 से ज्यादा फिनटेक कंपनियां काम कर रही हैं। 2020 से 2025 के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम का मूल्य 5.9 गुना बढ़कर करीब 1.56 लाख करोड़ रु. हो गया। 2025 में स्टार्टअप्स ने करीब 2400 करोड़ रु. की वेंचर कैपिटल जुटाई। 2. वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा एक्सेल, जनरल कैटलिस्ट, इनसाइट पार्टनर जैसी विश्व की प्रमुख निवेशक कंपनियां, जिन्होंने फेसबुक, स्पाॅटिफाई, एयर बीएनबी जैसी कंपनियों में निवेश किया है, वे भी लिथुआनिया के स्टार्टअप्स में निवेश कर रही हैं। सार्वजनिक वाई-फाई स्पीड में लिथुआनिया पहले स्थान पर व साइबर सुरक्षा सूचकांक में छठे स्थान पर है। 3. एआई प्रतिभा से बनी मजबूत नींव देश में 77,600 से अधिक आईसीटी (सूचना और संचार तकनीक) विशेषज्ञ कार्यरत हैं। सरकार ने एआई विकास के लिए करीब 457 करोड़ रु. से अधिक का निवेश किया और 2018 में ही राष्ट्रीय एआई रणनीति लागू कर दी। 13 हजार छात्र आईसीटी की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 4. कंपनी शुरू करना आसान यहां नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकारी प्रक्रियाएं सरल और ऑनलाइन होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों बचते हैं। कॉर्पोरेट प्रॉफिट टैक्स 0-16% के बीच, फ्री इकोनॉमिक जोन में पहले 10 वर्षों तक 0% टैक्स, RD प्रोत्साहन, पेटेंट बॉक्स, तेज लाइसेंसिंग प्रक्रिया, विश्वस्तरीय डिजिटल नेटवर्क और 2030 तक 100% रिन्यूएबल बिजली का लक्ष्य- ये तमाम ऐसे कारण हैं जिनके कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

LTM Q1 Results: जून तिमाही में सुस्त रेवेन्यू लेकिन 6% बढ़ा मुनाफा, 13 जुलाई को रहेगी शेयरों पर नजर

LTM Q1 Results: आईटी सर्विसेज कंपनी एलटीएम का रेवेन्यू जून तिमाही में सुस्त रफ्तार से बढ़ा लेकिन ऑपरेटिंग मोर्चे पर कंपनी का परफॉरमेंस उम्मीद से बेहतर रहा। कंपनी ने शनिवार 11 जुलाई को कारोबारी नतीजे पेश किए तो अब सोमवार 13 जुलाई को जब स्टॉक मार्केट खुलेगा तो इसके शेयरों में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले यानी नतीजे आने के एक दिन पहले शुक्रवार 10 जुलाई को बीएसई पर यह 4.89% की बढ़त के साथ ₹4041.15 के भाव (LTM Share Price) पर बंद हुआ था।

LTM Q1 Result: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में एलटीएम का कंसालिडेटेड रेवेन्यू तिमाही आधार पर 2.8% बढ़कर ₹11,608 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन डॉलर टर्म में यह लगभग फ्लैट रहा और महज 0.1% बढ़कर $122 करोड़ पर पहुंचा। कॉन्स्टैंट करेंसी बेसिस पर इसका रेवेन्यू 0.3% की रफ्तार से बढ़ा जोकि मार्केट की उम्मीदों के मुताबिक ही रहा। वहीं इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा 5.9% की रफ्तार से बढ़कर ₹1,468.6 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग मोर्चे पर कंपनी का परफॉरमेंस उम्मीद से बेहतर रहा। इसका ईबीआईटी तिमाही आधार पर ₹1,709.4 करोड़ से बढ़कर ₹1,799.3 करोड़ और ईबीआईटी मार्जिन 40 बेसिस प्वाइंट्स सुधरकर 15.5% पर पहुंच गया।

जून तिमाही में कंपनी की ग्रोथ मुख्य रूप से फाइनेंशियल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज वर्टिकल्स से हुई। फाइनेंशियल सर्विसेज में कॉन्स्टैंट करेंसी में तिमाही आधार पर 3.2% और टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज वर्टिकल्स में 3.4% की ग्रोथ दिखी। वहीं दूसरी तरफ प्रोडक्शन सेगमेंट में 5.7% और कंज्यूमर बिजनेस में 0.7% की गिरावट आई। जून तिमाही में कंपनी का डील मोमेंटम मजबूत बना रहा और $168 करोड़ की डील कंपनी को हासिल हुईं। मार्च तिमाही में भी कंपनी को $169 करोड़ की डील मिली थी।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

एलटीएम के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। इस साल की शुरुआत में 19 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹6,430.00 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 ही महीने में यह 45.11% फिसलकर पिछले महीने के आखिरी कारोबारी दिन 30 जून 2026 को ₹3,529.60 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FPI ने 4 महीनों बाद की वापसी, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15157 करोड़ के भारतीय शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार 4 महीने तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में बायर नजर आ रहे हैं। इस महीने में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है। बेहतर होते घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती धारणा से यह रुझान देखने को मिला है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले FPI ने जून में भारतीय शेयरों से 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

इस बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। साल 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। पिछले साल की समान अवधि में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि जुलाई में FPI की वापसी वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता घटने और भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि घरेलू व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में FPI की बिकवाली के कारण निवेश का एक हिस्सा भारत की ओर आया है। इसके साथ ही श्रीवास्तव ने आगाह किया कि भले ही जुलाई में FPI के निवेश की यह मजबूत वापसी उत्साहजनक है, लेकिन आगे उनका रुख वैश्विक परिस्थितियों और भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि की मजबूती पर निर्भर करेगा।

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बॉन्ड मार्केट में कितना निवेश

भारत के डेट या बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। जुलाई में अब तक FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत डेट सिक्योरिटीज में 6,625 करोड़ रुपये और जनरल रूट से 3,228 करोड़ रुपये का निवेश किया।

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आने वाले हफ्ते में निफ्टी को अगर अप्रैल के हाई पर वापस पहुंचना है तो 24,500-24,550 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार करना होगा। वहीं बैंक निफ्टी अगर 58,600 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 59,200 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में निफ्टी को लेकर क्या उम्मीद जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको लगता है कि खरीदारी में नई दिलचस्पी को देखते हुए निफ्टी 50 आने वाले हफ्ते में अपने अप्रैल के हाई लेवल पर वापस पहुंच सकता है?

बाजार में खरीदारी में नई दिलचस्पी दिखी है, लेकिन हमारा मानना ​​है कि आने वाले हफ्ते में निफ्टी के अप्रैल के हाई लेवल पर वापस पहुंचने की संभावना कम है। ऐसा तब तक होना कम संभव लगता है, जब तक कि यह 24,500-24,550 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार न कर ले। इंडेक्स पिछले चार हफ्तों से एक बड़े कंसोलिडेशन फेज में फंसा हुआ है और वीकली चार्ट पर छोटी बॉडी वाली कैंडल बना रहा है। यह बुल्स और बेयर्स के बीच किसी स्पष्ट दिशा को लेकर भरोसे की कमी को दिखाता है।

इसके बावजूद, उतार-चढ़ाव लगातार बढ़ रहा है और निफ्टी ने पिछले सात हफ्तों में अपनी सबसे बड़ी वीकली ट्रेडिंग रेंज देखी है। बढ़ते उतार-चढ़ाव और लंबे समय तक कंसोलिडेशन का ऐसा मेल अक्सर किसी बड़े दिशात्मक बदलाव से पहले होता है। हालांकि, मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं, डेली और वीकली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) दोनों ही एक रेंज में हैं और डेली ADX भी कमजोर है। यह किसी मजबूत ट्रेंड की कमी को दिखाता है।

इसलिए, हालांकि बाजार का मूड पॉजिटिव है और खरीदारी में नई दिलचस्पी इंडेक्स को 24,500-24,550 के जोन को चुनौती देने में मदद कर सकती है, लेकिन अप्रैल के हाई लेवल तक पहुंचने के लिए इस रुकावट को मजबूती से पार करना जरूरी होगा। तब तक निफ्टी के एक रेंज में बने रहने की संभावना है, जिसमें 23,950-23,900 का जोन इमीडिएट सपोर्ट का काम करेगा।

बुल्स की मजबूत वापसी को देखते हुए, क्या बैंक निफ्टी 59,000 के लेवल पर वापस पहुंच पाएगा?

हां, पिछले हफ्ते दिखी मजबूत रिकवरी ने बैंक निफ्टी के जल्द ही 59,000 के मार्क पर वापस पहुंचने की संभावना को बेहतर बना दिया है। हाल के स्विंग लो से थोड़ा नीचे गिरने के बाद, इंडेक्स को अपने 20-वीक के EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) के आस-पास मजबूत सपोर्ट मिला और इसने तेज रिकवरी की। इसके कारण आखिरकार वीकली चार्ट पर ड्रैगनफ्लाई डॉजी पैटर्न बना। यह कैंडल फॉर्मेशन निचले लेवल पर खरीदारी में मजबूत दिलचस्पी को दिखाती है और संकेत देती है कि बुल्स धीरे-धीरे कंट्रोल वापस हासिल कर रहे हैं।

टेक्निकल नजरिए से, बैंक निफ्टी अपने मुख्य मूविंग एवरेजेज से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है। डेली RSI 60 के लेवल को पार करने वाला है, जो बेहतर होते बुलिश मोमेंटम का संकेत है। हालांकि, इंडेक्स के लिए तुरंत रुकावट 58,500-58,600 के जोन में है। अगर यह 58,600 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 59,200 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ, 57,400-57,300 का जोन मजबूत सपोर्ट देगा और तेजी के बड़े स्ट्रक्चर को बरकरार रखेगा।

अगले हफ्ते के लिए आपके टॉप 2 स्टॉक आइडिया कौन से हैं जिनमें अच्छा रिटर्न देने की क्षमता है?

गोदरेज प्रॉपर्टीज: इस शेयर ने वीकली चार्ट पर एक अहम नीचे की ओर झुकी हुई ट्रेंडलाइन को तोड़ा है, जो ट्रेंड बदलने का संभावित संकेत है। वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी, बढ़ता ADX, +DI/-DI गैप का बढ़ना और वीकली RSI का 60 के ऊपर जाना बुलिश आउटलुक को मजबूत करता है। इस स्टॉक में ₹2,115-2,140 के जोन में खरीदारी की सलाह दी जाती है, जिसमें स्टॉप-लॉस ₹2,050 पर सही रहेगा। ऊपर की ओर टारगेट ₹2,300 होगा।

लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी: लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी डेली चार्ट पर एक सिमेट्रिकल ट्रायंगल पैटर्न से ब्रेकआउट करने की कगार पर है, जो तेजी जारी रहने का संभावित संकेत है। स्टॉक को अपने 50-दिन के EMA के पास लगातार सपोर्ट मिल रहा है, जबकि बेहतर होते मोमेंटम इंडिकेटर पॉजिटिव आउटलुक को सपोर्ट करते हैं। इस स्टॉक में ₹1,785-1,805 के दायरे में खरीदारी (एक्युमुलेशन) की सलाह दी जाती है। स्टॉप-लॉस ₹1,730 पर रखा जा सकता है। ₹1,930 का अपसाइड टारगेट रखा जा सकता है।

क्या कल्याण ज्वेलर्स और इंडियन बैंक के चार्ट अगले हफ्ते भी रैली जारी रहने का संकेत दे रहे हैं?

कल्याण ज्वेलर्स के स्टॉक ने मजबूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन फेज से ब्रेकआउट किया है। DI लाइनों का फैलना और RSI का 60 के ऊपर आना बुलिश मोमेंटम के मजबूत होने का संकेत है। जब तक यह ₹430-425 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी बने रहने की संभावना है। इंडियन बैंक के मामले में 10 प्रतिशत की तेज गिरावट के बाद RSI मजबूत हुआ है, जो बेहतर होते मोमेंटम को दिखाता है। ₹885-890 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट, रिकवरी को और बढ़ा सकता है।

क्या हॉरिजॉन्टल ट्रेंडलाइन ब्रेकआउट से Paytm और CDSL में आगे चलकर तेज बढ़त की संभावना की पुष्टि होती है?

CDSL का स्टॉक डेली चार्ट पर लंबे समय के कंसोलिडेशन से बाहर निकल गया है और इसमें वॉल्यूम भी काफी ज्यादा रहा है। साथ ही, यह अपने मुख्य मूविंग एवरेजेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। DI लाइनों का दायरा बढ़ना मजबूत खरीदारी की दिलचस्पी का संकेत है। जब तक यह स्टॉक ₹1,365-1,370 के स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक इसमें बुलिश रुख बने रहने की संभावना है।

One 97 Communications (Paytm) ने 6 सेशन के छोटे से ठहराव के बाद फिर से तेजी पकड़ी है। बढ़ता ADX एक मजबूत ट्रेंड का संकेत देता है। ₹1,350-1,370 के रेजिस्टेंस जोन से निर्णायक ब्रेकआउट, रैली के अगले चरण की शुरुआत कर सकता है।

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Happy Steels या Devson Catalyst, किसके IPO में लगाएं पैसे, 13 जुलाई को आखिरी मौका

IPO News: हैप्पी स्टील्स और देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ में कल यानी 13 जुलाई को पैसा लगाने का आखिरी मौका है। ये दोनों इश्यू पूरी तरह ओवरसब्सक्राइब हो चुके हैं लेकिन देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ को अधिक बेहतर रिस्पांस मिलता दिख रहा है। ग्रे मार्केट में भी इसकी सेहत अधिक मजबूत है। ग्रे मार्केट में हैप्पी स्टील्स आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹14 यानी 21.21% और देवसन कैटेलिस्ट ₹45 यानी 38.14% की जीएमपी पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय किसी आईपीओ में बोली लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स पर ध्यान देना चाहिए। इनके लिस्टिंग की बात करें तो हैप्पी स्टील के शेयर एनएसई एसएमई पर और देवसन कैटेलिस्ट के शेयर बीएसई एसएमई पर 16 जुलाई को लिस्ट होंगे।

Happy Steels IPO

ऑटोमोटिव फॉर्ज्ड एंड मशीन्ड कंपोनेंट्स के लिए एक्सल्स बनाने वाली हैप्पी स्टील्स के ₹25 करोड़ के आईपाओ में ₹62-₹66 के प्राइस बैंड और 2000 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। अभी तक यह इश्यू 3.14 गुना भर चुका है जिसमें QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) के हिस्से को 0.63 गुना, NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) के हिस्से को 5.40 गुना और खुदरा निवेशकों के आरक्षित हिस्से को 3.61 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत 37.88 लाख लाख नए शेयर जारी होंगे। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा उठा-पटक के साथ 14% के सीएजीआर से बढ़कर ₹7.10 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 5% की रफ्तार से बढ़कर ₹96.57 करोड़ पर पहुंच गया।

Devson Catalyst IPO

ऑयल और गैस रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, फर्टिलाइजर्स और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग सेक्टर्स के लिए कैटेलिस्ट्स एडजॉर्बेंट्स और सेरामिक बाल बनाने वाली देवसन कैटेलिस्ट के ₹42 करोड़ के आईपीओ में ₹112-₹118 और 1200 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। ओवरऑल यह इश्यू 29.35 गुना सब्सक्राब हो चुका है जिसमें से QIB के आरक्षित हिस्से को 2.60 गुना, एनआईआई के हिस्से को 36.48 गुना, इंडिविजुअल इंवेस्टर्स के हिस्से को 42.92 गुना और एंप्लॉयीज के हिस्से को 0.81 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत ₹39 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 2.5 लाख शेयरों की बिक्री होगी। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना 45% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹12.52 करोड़ और टोटल इनकम भी 9% के सीएजीआर से बढ़कर ₹56.84 करोड़ पर पहुंच गया।

SBI Funds Management IPO: प्री-IPO राउंड के बाद साइज घटकर ₹9813 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Video: 1 लाख रुपये कमाने वाले लोग हो जाएं अलर्ट, जानिए क्यों बताई गई यह इनकम खतरनाक

हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी पाना कई लोगों के लिए आर्थिक सफलता का संकेत माना जाता है। ये आय स्तर एक आरामदायक जीवन जीने, जरूरी खर्च पूरे करने और कुछ इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता देता है। लेकिन अब इसी कमाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। साल 2026 में एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया है कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कई लोगों के लिए एक तरह का ‘कम्फर्ट ट्रैप’ बन सकती है।

उनके अनुसार, समस्या कमाई की रकम में नहीं बल्कि उस संतुष्टि में है, जो व्यक्ति को बड़े लक्ष्य तय करने से रोक सकती है। इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इससे सहमत हैं तो कुछ इसे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से अलग मान रहे हैं।

कंटेंट क्रिएटर ने बताया ‘सबसे खतरनाक सैलरी’

इंस्टाग्राम पर पर्सनल फाइनेंस और माइंडसेट से जुड़े वीडियो बनाने वाली निधि कुशवाहा ने कहा कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कम होना इसकी समस्या नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका आरामदायक होना है। उनका कहना है कि इतनी आय कई लोगों को इतना संतुष्ट कर सकती है कि व बड़े सपने देखने और आगे बढ़ने की कोशिश कम कर दें।

आराम कब बन जाता है करियर की रुकावट?

निधि के मुताबिक, 1 लाख रुपये की मासिक कमाई से लोग किराया, रोजमर्रा के खर्च, वीकेंड आउटिंग और साल में एक-दो ट्रिप जैसी चीजें आसानी से मैनेज कर लेते हैं। यही सुविधा कई बार लोगों को अपनी सीमाओं से बाहर निकलने और नए जोखिम लेने से रोक सकती है। उनका मानना है कि जब इंसान को लगता है कि जिंदगी पूरी तरह सेट हो गई है, तो आगे बढ़ने की भूख धीरे-धीरे कम हो सकती है।

‘ज्यादा कमाने की चाह’ खत्म होने का खतरा

निधि ने अपने वीडियो में कहा कि असली खतरा कम आय में नहीं बल्कि उस स्थिति में है, जहां व्यक्ति आरामदायक जीवन में इतना खुश हो जाए कि नए लक्ष्य बनाना छोड़ दे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सिर्फ आरामदायक कमाई पर रुकने के बजाय लगातार सीखने, निवेश करने और नए अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग राय रखी। कुछ यूजर्स ने माना कि ज्यादा आराम इंसान को आगे बढ़ने से रोक सकता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जीवन में सफलता का पैमाना हमेशा ज्यादा पैसा कमाना ही होना चाहिए।

एक यूजर ने पूछा कि अगर 10 लाख रुपये महीने की सैलरी हो तो क्या वह भी खतरनाक होगी? वहीं कुछ लोगों ने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में 1 लाख रुपये की कमाई उतनी बड़ी नहीं रही जितनी पहले मानी जाती थी।

असली सवाल

इस बहस का कोई तय जवाब नहीं है कि कौन-सी सैलरी इंसान को रोक देती है। कुछ लोगों के लिए 1 लाख रुपये की आय आर्थिक स्थिरता हो सकती है, जबकि दूसरों के लिए ये सिर्फ एक पड़ाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि आय चाहे जितनी हो, सही बचत, निवेश और नए लक्ष्य बनाते रहना जरूरी है, ताकि आराम विकास की राह में बाधा न बने।

19 साल की उम्र में लिखवाई वसीयत, माता-पिता नहीं बल्कि बचपन के दोस्त को सौंप दी पूरी संपत्ति