Hero Motors IPO: 16 सितंबर को खुलेगा ₹1000 करोड़ का इश्यू, जानिए GMP, प्राइस बैंड समेत पूरी डिटेल

Hero Motors IPO: हीरो ग्रुप की Hero Motors Ltd अपना ₹1,000 करोड़ का IPO ला रही है। इश्यू 16 से 18 सितंबर तक खुलेगा। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹79-84 तय किया है। इस भाव पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹3,815 करोड़ बैठता है।

IPO में ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू है। वहीं ₹400 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) है। OFS में ₹395 करोड़ प्रमोटर O P Munjal Holdings और ₹5 करोड़ Hero Cycles को जाएंगे।

Hero Motors IPO का GMP

ग्रे मार्केट में भी हीरो मोटर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टगेन के मुताबिक, इसका लेटेस्ट GMP ₹24 है। यह अपर प्राइस बैंड के हिसाब से 28.57% लिस्टिंग गेन का संकेत है। हालांकि, इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए क्योंकि ये लगातार बदलता रहता है।

Hero Motors की कारोबारी सेहतर

हीरो मोटर्स फ्रेश इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज घटाने और क्षमता बढ़ाने में करेगी। करीब ₹190 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे। वहीं ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्लांट में नए उपकरण खरीदने पर खर्च होंगे।

FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹1,188.35 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट 25.5% बढ़कर ₹41.17 करोड़ पहुंच गया। अब कंपनी के सामने बड़ी चुनौती अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना और इन निवेशों से बेहतर रिटर्न हासिल करना है।

हीरो मोटर्स क्या करती है?

हीरो मोटर्स, पंकज एम. मुंजाल से जुड़ी ऑटो कंपोनेंट और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह सीधे ग्राहकों को बाइक या स्कूटर नहीं बेचती। कंपनी पावरट्रेन सिस्टम, गियर और ई-बाइक ड्राइवट्रेन बनाती है। इसके ग्राहक BMW, Ducati जैसी कंपनियां और दुनिया की कई ई-बाइक कंपनियां हैं।

इसका कारोबार भारत के साथ अमेरिका, यूरोप और ASEAN देशों में भी है। कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी तेजी से बढ़ रहा है।

दूसरे ‘हीरो’ कंपनियों से कैसे अलग है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Hero Motors और Hero MotoCorp अलग कंपनियां हैं। Hero MotoCorp बाइक और स्कूटर बनाकर सीधे ग्राहकों को बेचती है। इसके Splendor और Xtreme जैसे ब्रांड हैं। दूसरी ओर, Hero Motors मुख्य रूप से B2B कंपनी है। यानी यह दूसरी ऑटो कंपनियों के लिए कंपोनेंट और टेक्नोलॉजी तैयार करती है।

NSE IPO में पैसा लगाएं या नहीं? जानिए ब्रोकरेज की राय, जोखिम और लेटेस्ट GMP

Hero Cycles साइकिल कारोबार में है। वहीं, Hero Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाती है। चारों कंपनियां मुंजाल परिवार की अलग-अलग कारोबारी शाखाओं से जुड़ी हैं। इसलिए Hero नाम एक जैसा होने के बावजूद इनके कारोबार और निवेश की कहानी अलग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO : 17 सितंबर में खुल रहे इश्यू में पैसा लगाएं या नहीं? जानिए ब्रोकरेज की राय, जोखिम और लेटेस्ट GMP

NSE IPO: कई साल के इंतजार के बाद देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का अब IPO आने वाला है। NSE का IPO 17 सितंबर 2026 को खुलेगा। यह 21 सितंबर को बंद होगा। इसका प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है। शेयर की फेस वैल्यू ₹1 है।

यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी IPO से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा। खर्च और टैक्स घटाने के बाद पूरी रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी। IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को हो सकता है। वहीं, लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की संभावना है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 16 सितंबर को होगी।

NSE IPO का लेटेस्ट GMP

ग्रे मार्केट में NSE IPO के GMP में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। यह शुरुआत में ₹310 के आसपास था। लेकिन, अब घटकर ₹192 पर आ गया है। ये अपर प्राइस बैंड के हिसाब से 11.71% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। हालांकि GMP को लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए। ये बस आईपीओ की डिमांड का अंदाजा होता है।

NSE IPO की अहम डिटेल

पैमानाडिटेल
IPO कब खुलेगा17 सितंबर 2026
IPO कब बंद होगा21 सितंबर 2026
प्राइस बैंड₹1,700-₹1,785
लॉट साइज8 शेयर
न्यूनतम निवेश₹14,280
इश्यू का प्रकार100% OFS
संभावित लिस्टिंग24 सितंबर 2026
कुल इश्यू साइजकरीब ₹22,569 करोड़ तक
कर्मचारी छूट₹170 प्रति शेयर

NSE IPO पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज हाउस SAMCO Securities ने NSE IPO पर Subscribe की सलाह दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह IPO अच्छा मौका हो सकता है। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड पर NSE का वैल्यूएशन FY2026 की कमाई का 42.89 गुना है।

SAMCO के मुताबिक NSE की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत मार्केट पोजिशन है। NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसके पास बड़ा निवेशक बेस है। टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत है। इसके अलावा कंपनी के पास अपना क्लियरिंग सिस्टम है। बैलेंस शीट भी मजबूत है। कंपनी पर फंड-बेस्ड कर्ज भी नहीं है।

NSE IPO में क्या जोखिम हैं?

NSE के लिए सबसे बड़ा जोखिम डेरिवेटिव्स पर ज्यादा निर्भरता है। FY2026 में सिर्फ ऑप्शंस से 60.22% रेवेन्यू आया था। ऐसे में नियमों में बदलाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है। एक और चिंता इक्विटी ऑप्शंस में NSE की घटती हिस्सेदारी है। FY2024 में यह 96.86% थी। Q1 FY2027 में यह घटकर 68.48% रह गई।

कंपनी का रेवेन्यू कुछ बड़े ट्रेडिंग मेंबर्स पर भी निर्भर है। Q1 FY2027 में टॉप 10 ट्रेडिंग मेंबर्स से 47% रेवेन्यू आया। अगर इनमें से बड़े सदस्य दूसरी जगह चले जाते हैं या उनकी ट्रेडिंग गतिविधि घटती है, तो NSE के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Kanohar Electricals IPO: 16 साल बाद शेयर मार्केट में वापसी, 90 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद शानदार रह सकती है लिस्टिंग; चेक करें GMP

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का ₹1,055.74 करोड़ का IPO 90.59 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हो चुका है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 215.37 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 87.74 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 20.51 गुना भरा। इश्यू 8 सितंबर को खुला था और 10 सितंबर को बंद हुआ। अब कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 16 सितंबर को लिस्ट होने वाले हैं।

ग्रे मार्केट की मानें तो लिस्टिंग अच्छे गेन के साथ होने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में शेयर 38.61 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यह एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि ग्रे मार्केट के संकेत सच ही हो जाएं।

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के पब्लिक इश्यू में ₹300 करोड़ के 47.47 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹755.74 करोड़ के 1.20 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। प्राइस बैंड ₹601-₹632 प्रति शेयर था। इश्यू की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹316.72 करोड़ जुटाए। कंपनी अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाली कमाई का इस्तेमाल पूंजीगत खर्च के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

क्या करती है Kanohar Electricals

Kanohar Electricals पावर ट्रांसमिशन, रेलवे, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर डिस्ट्रीब्यूशन जैसे उद्योगों की जरूरतों को पूरा करती है। कंपनी दो बिजनेस सेगमेंट के जरिए काम करती है: (i) ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग और (ii) इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC)। यह भारत की उन 4 मैन्युफैक्चरर्स में से एक है, जिन्हें 100 MVA 132 kV स्कॉट ट्रांसफॉर्मर बनाने के लिए रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) से सर्टिफिकेशन मिला है। RDSO भारतीय रेलवे की रिसर्च और डेवलपमेंट शाखा है। उत्तर प्रदेश की कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के प्रमोटर दिनेश सिंघल, आदेश सिंघल, विवेक सिंघल, अभिषेक सिंघल, विराट सिंघल और आदित्य सिंघल हैं।

16 साल बाद शेयर मार्केट में वापसी फिर कर रही है एंट्री

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स  16 साल बाद शेयर बाजार में वापसी कर रही है। यह पहले 1995 में लिस्ट हुई थी लेकिन फिर 2010 में अपनी मर्जी से डीलिस्ट हो गई। कंपनी की ओर से जमा किए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में कहा गया, “हमारी कंपनी के इक्विटी शेयर पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज एसोसिएशन लिमिटेड (अब DSE एस्टेट्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) और उत्तर प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज एसोसिएशन लिमिटेड (अब U.P. स्टॉक एंड कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) पर क्रमशः 13 नवंबर 1995, 1 नवंबर 1995 और 31 अक्टूबर 1995 को लिस्ट हुए थे। लेकिन, बाद में कम लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण, कंपनी के इक्विटी शेयरों को BSE, दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज और उत्तर प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज से क्रमशः 12 जुलाई 2010, 30 अगस्त 2010 और 20 अक्टूबर 2010 से स्वेच्छा से डीलिस्ट करा लिया गया था।”

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Kanohar Electricals की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 662.86 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 99 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 129.73 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 39 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 457.30 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 65.12 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Raymond Realty पर Motilal Oswal बुलिश, दी शेयर खरीदने की सलाह, यह टारगेट किया फिक्स

Raymond Realty Share Price: रेमंड ग्रुप की रेमंड रियल्टी के शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे हैं। हालांकि रिकॉर्ड निचले स्तर से यह महज चार ही महीने में दोगुना से अधिक ऊपर चढ़ गया और घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक अभी भी इसके शेयरों से कमाई का शानदार मौका है। मौजूदा लेवल से यह करीब 20% ऊपर चढ़ सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले यानी शुक्रवार 11 सितंबर को बीएसई पर यह 2.24% की बढ़त के साथ ₹584.25 पर बंद हुआ था।

Raymond Realty पर क्यों Motilal Oswal बुलिश?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में रियल्टी सेगमेंट में एंट्री के बाद से अब रेमंड ग्रुप की रियल्टी बिजनेस यूनिट रेमंड रियल्टी देश की पांच सबसे बड़े प्रीमियम लिस्टेड रेजिडेंशियल डेवलपर्स में शुमार हो गई है, जिसकी MMR (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) में दमदार मौजूदगी है। ठाणे में करीब 100 एकड़ जमीन और 8 ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट्स के दम पर इसके पास फिलहाल ₹52 हजार करोड़ का अनुमानित GDV (ग्रास डेवलपमेंट वैल्यू) है। ऐसे में ब्रोकरेज फर्म ने इसकी खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और टारगेट प्राइस ₹700 पर फिक्स किया है। अब रिस्क की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक अगर ठाणे वाली जमीन का सही भाव न लगी या सही समय पर फायदा नहीं मिला तो कंपनी की सेहत पर झटका दिख सकता है।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल?

रेमंड से अलग होकर इसकी रियल्टी बिजनेस रेमंड रियल्टी के शेयर पिछले साल 1 जुलाई 2025 को लिस्ट हुए थे। इसके शेयरों का सफर बीएसई पर ₹1005 के भाव पर शुरू हुआ था और फिर यह 5% के अपर सर्किट ₹1055.20 पर पहुंच गया। हालांकि शेयरों की तेजी कायम नहीं रह सकी और इस साल 16 मार्च 2026 को यह ₹350.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इस निचले स्तर पर शेयर संभला और फिर चार ही महीने में 109.86% चढ़कर 13 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹734.50 पर पहुंच गया यानी कि महज चार महीने में इसने निवेशकों का पैसा डबल से अधिक कर दिया।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SML का भी आएगा IPO! अगले 2 से 3 साल में लिस्ट होने पर कर रही विचार

एग्री इनपुट्स बनाने वाली SML Ltd अगले 2 से 3 साल में शेयर बाजार में लिस्ट होने पर विचार कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नई केमिकल एंटिटीज (NCE) के विकास के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना है। कंपनी का पुराना नाम सल्फर इंडिया लिमिटेड था। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक इंटरव्यू में SML के मैनेजिंग डायरेक्टर बिमल शाह ने कहा कि लिस्टिंग को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अभी इसका आकलन किया जा रहा है। कंपनी को अगले एक-दो साल में इस दिशा में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

SML उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो नई केमिकल एंटिटीज के विकास पर काम कर रही हैं। शाह ने कहा कि कंपनी पिछले करीब 3 वर्षों से NCEs पर काम कर रही है और यह उसके कारोबार का एक महत्वपूर्ण फोकस एरिया बन चुका है। कंपनी का एक नया मॉलिक्यूल जल्द आने वाला है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के विकास में बड़े निवेश की जरूरत होती है। SML का अनुमान है कि एक NCE को बाजार में लाने में करीब 7-8 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकते हैं। अभी तक कंपनी ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट वर्क का खर्च खुद उठाया है।

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी है और कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त स्थिति में है। मैनेजमेंट इस रकम का इस्तेमाल भविष्य में अधिग्रहण, रेगुलेटरी एसेट्स या रणनीतिक साझेदारियों के साथ NCE प्रोग्राम में कर सकता है। शाह ने कहा कि कंपनी ने सालों से अपने बही-खाते को मजबूत रखा है और जमा पूंजी का इस्तेमाल सही अवसर मिलने पर किया जाएगा।

कंपनी अपने पारंपरिक सल्फर फर्टिलाइजर कारोबार से आगे बढ़ते हुए फसल पोषण, फसल संरक्षण और जैविक उत्पादों पर भी ध्यान दे रही है। शाह के अनुसार, अगले 3 सालों में इन 3 क्षेत्रों में से फसल पोषण (Crop Nutrition) भारत में और वैश्विक स्तर पर कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार हो सकता है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी संतुलित और पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल वाले उत्पादों को बढ़ावा दे रही है।

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कंपनी ने घटाया रेवेन्यू टारगेट

SML ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना रेवेन्यू टारगेट घटाकर करीब 1,600 करोड़ रुपये कर दिया है। इसके पीछे कमजोर मानसून, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के कारण परिवहन में आ रही बाधाएं हैं। इससे पहले कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा था। हालांकि, नया रेवेन्यू टारगेट पिछले वित्त वर्ष के करीब 1,200-1,300 करोड़ रुपये के कारोबार से अधिक है। कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।

कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में इससे करीब 600-700 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था। इस वित्त वर्ष कंपनी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 700-800 करोड़ रुपये और अगले 2 वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Pranav Constructions IPO को 126 गुना बोली, अब ग्रे मार्केट से 15 सितंबर को तगड़ी लिस्टिंग के संकेत

Pranav Constructions IPO: ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम करने वाली प्रणव कंस्ट्रक्शंस के आईपीओ को निवेशकों को धांसू रिस्पांस मिला था। तीन दिनों में इसका ₹351 करोड़ का आईपाीओ 126 गुना से अधिक भरा था। अब 10 सितंबर को शेयरों के अलॉटमेंट के बाद 15 सितंबर को लिस्टिंग का इंतजार है। लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से मजबूत संकेत मिल रहे हैं और GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) फिलहाल ₹48 यानी 38.71% है यानी कि बीएसई और एनएसई पर इसके शेयरों की करीब 39% प्रीमियम पर एंट्री हो सकती है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक जीएमपी की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं।

Pranav Constructions IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रणव कंस्ट्रक्शंस का ₹351 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 सितंबर तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹118-₹124 था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 126.34 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 268.54 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 217.73 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 45.31 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹316 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28,56,869 शेयर यानी ₹35 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला हैं। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹145.72 करोड़ रीडेवलपमेंट से जुड़े सभी खर्चों, ₹91.50 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹42.57 करोड़ भविष्य के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण की फंडिंग और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों, और ₹40.31 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Pranav Constructions के बारे में

प्रणव कंस्ट्रक्शंस एक रियल एस्टेट कंपनी है जो ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। इसका फोकस वेस्टर्न सबअर्ब्स पर है। यह रीडेवलपमेंट कंपनी है यानी कि इसका मुख्य बिजनेस जमीन खरीदकर उस पर बिल्डिंग बनाना नहीं बल्कि मौजूदा पुरानी सोसायटी/प्रॉपर्टी को फिर से डेवलप करना है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से इसके 28 प्रोडेक्ट्स पूरे हो चुके हैं, 20 पर काम चल रहा है तो 17 पर काम अभी शुरू होना है। यह कम कीमत वाले घरों से लेकर प्रीमियम सेगमेंट के भी प्रोजेक्ट्स पर काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 34% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹71.32 करोड़ और टोटल इनकम 30% से अधिक के सीएजीआर से ₹763.93 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹258.44 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹159.52 करोड़ पड़े थे।

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A-One Steels IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹405 करोड़ का एक और इश्यू, रहेंगे ₹355 करोड़ के नए शेयर

देश के IPO मार्केट में पिछले कुछ वक्त से हलचल काफी तेज है। एक ​के बाद एक बड़ी संख्या में पब्लिक इश्यू लॉन्च हो रहे हैं। मेनबोर्ड सेगमेंट में भी लगातार नए IPO आ रहे हैं। इसी कड़ी में जल्द ही A-One Steels India का नाम भी जुड़ने वाला है। कंपनी ₹405 करोड़ का इश्यू लॉन्च करने जा रही है। यह 24 सितंबर को खुलेगा और 28 सितंबर को बंद होगा। प्राइस बैंड और लॉट साइज तय होना अभी बाकी है। IPO में ₹355 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹50 करोड़ का ऑफर फॉर सेल रहेगा, जिसमें कंपनी के प्रमोटर संदीप कुमार, सुनील जालान और कृष्ण कुमार जालान शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

इस IPO में एंकर निवेशक 23 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। क्लोजिंग के बाद अलॉटमेंट 29 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 अक्टूबर को हो सकती है। इस इश्यू के लिए PL कैपिटल मार्केट्स और खंबाटा सिक्योरिटीज बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज है।

A-One Steels IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए ​किया जाएगा।

क्या करती है कंपनी

A-one Steels India Limited एक बैकवर्ड-इंटीग्रेटेड स्टील मैन्युफैक्चरर है। यह लंबे और फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स के साथ-साथ स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स की भी पेशकश करती है। कंपनी MS बिलेट्स से HR और CR कॉइल बनाती है, जिन्हें बाद में HR पाइप, CR पाइप और गैल्वेनाइज्ड ट्यूब में बदला जाता है। यह लंबे स्टील प्रोडक्ट्स के तौर पर MS बिलेट्स से TMT बार भी बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है, जैसे कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर प्लांट, बांध, एयरपोर्ट, पुल, फ्लाईओवर, स्टेडियम, हाइवे, मरीन स्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल बिल्डिंग और ऊंची रिहायशी इमारतें।

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कंपनी मेट कोक और सिलिकॉन मैंगनीज/फेरोसिलिकॉन जैसे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट भी बनाती है, जिन्हें खुले बाजार में बेचा जाता है। स्टील इंडस्ट्री में एलॉयिंग (मिश्र धातु बनाने) के लिए फेरोसिलिकॉन बहुत जरूरी है। A-one Steels की 6 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जिनमें से 5 कर्नाटक में गौरीबिदानूर, बेल्लारी, कोप्पल, चिक्कंतापुर में हैं। एक यूनिट आंध्र प्रदेश के हिंदूपुर में है।

A-One Steels की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर ₹4,202 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 1552 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹127.41 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹1,010.94 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू ₹3,569.63 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹7.71 करोड़ रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के शेयर लिस्ट होते ही बन सकते हैं रॉकेट, एक्सपर्ट ने बताई कहां तक जा सकती है कीमत

एनएसई के शेयर इस महीने 24 तारीख को बीएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। लिस्ट होते ही शेयर रॉकेट बन सकते हैं। इस शेयर में 17 सितंबर से 21 सितंबर के बीच निवेश किया जा सकता है। एक लॉट 8 शेयरों का होगा। प्रत्येक 1 रुपये फैस वैल्यू वाले शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,85 रुपये है।

संस्थागत निवेशकों की डिमांड से मिलेगा सपोर्ट

कनवर्जेंट फाइनेंस के मैनेजिंग पार्टनर हर्ष राघवन का कहना है कि लिस्टिंग के चार से छह हफ्तों में एनएसई का शेयर 20-25 फीसदी चढ़ सकता है। उनका कहना है कि इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की डिमांड से इस शेयर को सपोर्ट मिलेगा। एनएसई आईपीओ पर सीएनबीसी-टीवी18 के मार्केट फोरम में उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लिस्टिंग के 4-6 हफ्ते में यह शेयर 20-25 फीसदी चढ़ जाएगा।”

म्यूचुअल फंड्स के पास एनएसई के शेयर नहींं

उन्होंने कहा कि एनएसई में पहले से कई शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी है। लेकिन, बड़े म्यूचुअल फंड्स हाउसेज और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के पास एनएसई के ज्यादा शेयर नहीं हैं। इसलिए शेयर के लिस्ट होते ही संस्थागत निवेशकों की बड़ी दिलचस्पी इस शेयर में दिखेगी। रिटेल इनवेस्टर्स को काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

कम से कम 8 शेयरों के लिए करना होगा अप्लाई

इस आईपीओ में निवेश करने के लिए प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कम से कम 14,280 रुपये की बोली लगानी होगी। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.41 लाख करोड़ रुपये है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एनएसई आईपीओ में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा, जिससे उसके पास कोई पैसा नहीं आएगा।

ये पुराने इनवेस्टर्स बेच रहे एनएसई के शेयर

इस आईपीओ में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचने जा रहे हैं। इनमें एसबीआई ग्रुप, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स, एमएस स्ट्रेटेजिक, न्यू इंडिया एश्योरेंस और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। इन इनवेस्टर्स को अपने रिटर्न पर कई गुना रिटर्न मिलने जा रहा है। एनएसई के शेयर 24 सितंबर को बीएसई में लिस्ट होंगे।

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राघवन का एनएसई में पहले से निवेश

राघवन एनएसई के पुराने निवेशकों में शामिल हैं। 2006 में उन्होंने गोल्डमैन सैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया था। फिर 2016 में उन्होंने फेयरफैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया। उन्होंने कहा कि उनके निवेश की वजह एक्सचेंज के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इंडियन इकोनॉमी में जैसे-जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी, वैसे-वैसे एनएसी की स्थिति मजबूत होगी।

Jindal Supreme IPO: ₹125 करोड़ का इश्यू 16 सितंबर से, ग्रे मार्केट में अभी से भागा शेयर; चेक करें प्राइस बैंड

स्टील सेक्टर की कंपनी जिंदल सुप्रीम (इंडिया) का IPO 16 सितंबर से खुलने जा रहा है। कंपनी का इरादा ₹124.88 करोड़ जुटाने का है। इस पब्लिक इश्यू में ₹99.89 करोड़ के 1.07 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹24.99 करोड़ के 26.87 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहेगा, जिसमें कंपनी की प्रमोटर VVJ Enterprise Pvt. Ltd. शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। IPO के लिए प्राइस बैंड ₹88-₹93 प्रति शेयर और लॉट साइज 161 शेयर है।

इश्यू की क्लोजिंग 18 सितंबर को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 21 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 23 सितंबर को शुरुआत कर सकते हैं। इस पब्लिक इश्यू के लिए Sarthi Capital Advisors बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Bigshare Services है। Jindal Supreme के पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

क्या करती है कंपनी

जिंदल सुप्रीम (इंडिया) लिमिटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल कामों के लिए स्टील पाइप, ट्यूब और दूसरे स्टील प्रोडक्ट्स बनाती और सप्लाई करती है। इसके प्रोडक्ट्स में माइल्ड स्टील ब्लैक पाइप और ट्यूब, गैल्वेनाइज्ड पाइप, मेटल बीम क्रैश बैरियर और गैल्वेनाइज्ड आयरन ट्यूबलर पोल शामिल हैं। ये प्रोडक्ट लागू भारतीय मानकों के अनुसार अलग-अलग साइज में बनाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल पानी की सप्लाई और प्लंबिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन, सड़कों और हाईवे, पुलों, तेल व गैस, केमिकल, खेती और ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने जैसे कई कामों में किया जाता है। कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हरियाणा के हिसार में है। कंपनी के प्रमोटर अभिषेक जिंदल और सोनम जिंदल हैं।

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Jindal Supreme की वित्तीय सेहत

कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹191 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹8.28 करोड़ रहा। इस बीच उधारी ₹92.46 करोड़ की थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेवेन्यू 12 प्रतिशत बढ़कर ₹675.94 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹22.53 करोड़ रहा। जिंदल सुप्रीम अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में शेयर अभी से 22.58 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zerodha के फाउंडर नितिन कामत ने आईपीओ से पहले एनएसई की जमकर की तारीफ, जानिए उन्होंने क्या कहा

एनएसई का आईपीओ खुलने से पहले जीरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने इसमें बताया है कि जीरोधा के शुरुआती दिनों में किस तरह एनएसई ने ब्रोकरेज फर्म की मदद की थी। यहां तक कि एक्सचेंज ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी थी।

NSE के अधिकारियों ने दिया पूरा सहयोग

Nithin Kamath ने X पर अपने पोस्ट में कहा है कि जीरोधा के ब्रोकरेज फर्म बनने के फैसले की एक वजह एनएसई था। उन्होंने बताया है कि एनएसई के पास तब एक फ्री ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होता था, जिसे ब्रोकर्स अपने क्लाइंट्स को ऑफर कर सकते थे। उन्होंने एनएसई के अधिकारियों की भी तारीफ की है। उन्होंने बताया है कि जब उन्होंने मेंबरशिप के लिए एक्सचेंज के अधिकारियों से बातचीत की, तब उनका व्यवहार काफी दोस्ताना था।

NSE ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी

जीरोधा के फाउंडर ने कहा कि यह जानने के बाद कि नई ब्रोकरेज फर्म के पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, एनएसई के अधिकारियों ने मेंबरशिप फीस तक माफ कर दी। यह फीस 5 लाख रुपये थी। उन्होंने कहा है कि यह मदद के कई मामलों में से सिर्फ एक है। दरअसल, एनएसई की तरफ से हर समय जीरोधा को मदद मिली।

तारीफ का मतल IPO में निवेश की सलाह नहीं है

कामत ने यह स्पष्ट किया है कि उनके इस पोस्ट का मकसद एनएसई के आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह नहीं है। लेकिन, उन्हें उम्मीद है कि यह इश्यू सफल रहेगा। उन्होंने यहां तक कहा है कि आज अगर जीरोधा है तो इसकी एकमात्र वजह एनएसई है। उन्होंने कहा है कि यह अकेली कंपनी है, जिसके लिए उनके मन में कृतज्ञता का भाव है।

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देश का मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कई पश्चिमी देशों से बेहतर

उन्होंने देश में मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह सभवत: कई पश्चिमी देशों से आगे है। भारत में स्टॉक एक्सचेंज पहले लेवल के रेगुलेटर्स हैं। भारत में एक्सचेंज कई ऐसी जिम्मेदारियां संभालते हैं, जिसे दूसरे बाजारों में ब्रोकर्स संभालते हैं। उन्होंने कहा, “मैं कई बार यह सोचता हूं कि अगर ऐसा नहीं होता तो हमारे जैसे ब्रोकर्स का क्या हाल होता।”

रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व

NSE का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एक्सचेंज ने प्रत्येक 1 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर के लिए 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट 8 शेयरों का होगा। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर यह आईपीओ 22,561.57 करोड़ रुपये का होगा। यह इंडिया का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ बनेगा। एक्सचेंज ने रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व रखे हैं।