भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

MDR charge on UPI payment

मंगलवार को संसद में देश के भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए जाने के साथ ही भारत अपने लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए गए लेन-देन पर मर्चेंट शुल्क को फिर से लागू करने के एक कदम और करीब पहुंच गया है। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक यूपीआई ने जुलाई में 29.9 ट्रिलियन रुपये ($313.5 बिलियन) मूल्य के 23.6 बिलियन लेन-देन संसाधित किए। वॉलमार्ट का फोनपे और अल्फाबेट का गूगल पे यूपीआई के माध्यम से होने वाले भुगतान में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

उद्योग जगत के अधिकारियों ने लंबे समय से यह तर्क दिया है कि डिजिटल भुगतान में वृद्धि को बनाए रखना कठिन हो गया है क्योंकि भुगतान कंपनियों को यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं मिलता है, जिससे इस पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में निवेश करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

 

उद्योग और नियामक स्रोतों के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए भारत के भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुरू करने की अनुमति मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि यह बदलाव एमडीआर वसूलने का एक कानूनी आधार तैयार करता है, लेकिन शुल्क के स्तर या वे कहाँ लागू होंगे, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

 

एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारियों द्वारा डिजिटल लेन-देन को संसाधित करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाता है। हालांकि भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का एमडीआर लगता है, लेकिन वर्तमान में व्यापारियों के लिए यूपीआई लेन-देन मुफ़्त है।

 

दो दृष्टिकोणों पर विचार किया जा रहा है

नीति निर्माता दो व्यापक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं: एक निश्चित सीमा (थ्रेसहोल्ड) से ऊपर के लेन-देन पर एमडीआर लगाना या व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर के आधार पर शुल्क वसूलना। एक प्रस्ताव में केवल बड़े व्यापारियों पर शुल्क लागू करने की बात कही गई है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ़्त रहेगा।

 

सरकार 1.5 करोड़ रुपये (15 मिलियन रुपये) से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये ($20.97) से अधिक के लेन-देन पर 0.3% से 0.5% का एमडीआर लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मंगलवार को जेफरीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन व्यापारी भुगतान मात्रा (वॉल्यूम) का केवल 4% हिस्सा हैं, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य (वैल्यू) का लगभग 67% हिस्सा हैं।

नई कार पर 4 और बाइक पर 6 साल का इंश्योरेंस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के इंश्योरेंस बड़ा फैसला सुनाया है। अब नई प्राइवेट कार खरीदने पर 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा। नई बाइक खरीदने पर 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि एक साल कम थी। कोर्ट ने कहा कि इससे सड़क हादसों के पीड़ितों को जल्दी मुआवजा मिलेगा।

यह आदेश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने कहा कि देश में अब भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं। इसे रोकना जरूरी है।

2018 के बाद भी नहीं बदले हालात

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में नई कार के लिए 3 साल और नई बाइक के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था। लेकिन इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। कोर्ट ने कहा कि अब अवधि एक साल और बढ़ाई जा रही है।

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लेकिन कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को ज्यादा अहम माना।

हर दूसरी गाड़ी के पास इंश्योरेंस नहीं

कोर्ट ने कहा कि देश में करीब 56% गाड़ियां बिना वैध इंश्योरेंस के चल रही हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 16.54 करोड़ के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं है। इसका मकसद पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है।

बिना इंश्योरेंस गाड़ी पर ई-चालान

कोर्ट ने कहा कि ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau से जोड़ा जाए। इससे बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों की पहचान हो सकेगी। फिर उन्हें अपने आप ई-चालान जारी होगा।

राज्य पुलिस को भी ऐसे मोबाइल ऐप और डिवाइस दिए जाएंगे। इससे मौके पर ही इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।

बिना इंश्योरेंस पेट्रोल भी नहीं

कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। इसके तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने की योजना बनाई जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकें। इसके लिए भी व्यवस्था बनाई जाए।

इंश्योरेंस खरीदने से पहले पूरी जानकारी

कोर्ट ने IRDAI को चार-स्तरीय इंश्योरेंस व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, पिलियन या यात्रियों का कवर और ओन डैमेज कवर का विकल्प भी होगा। हर ग्राहक को बीमा खरीदने से पहले आसान भाषा में पूरी जानकारी भी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

CIBIL Score: पुराना बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड बंद कर रहे? जानिए सिबिल स्कोर पर क्या असर पड़ेगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Flipkart Freedom Sale: iPhone 17 Pro पर 13,000 तक की छूट, जानिए किस मॉडल पर कितना ऑफर

फ्लिपकार्ट ने अपनी फ्रीडम सेल 2026 शुरू होने से पहले कई बड़े ऑफर्स की जानकारी दे दी है। इस बार कंपनी ने सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने के बजाय कई प्रोडक्ट्स की असली सेल कीमत भी बता दी है। खासकर एप्पल के प्रोडक्ट्स पर मिलने वाली छूट अब साफ हो गई है। फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस, फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहक 7 अगस्त से ही सेल का फायदा उठा सकेंगे।

iPhone 17 Pro पर मिलेगा शानदार ऑफर

इस सेल में iPhone 17 Pro पर भी अच्छी छूट मिलेगी। इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी, लेकिन सेल के दौरान यह 1,26,900 रुपये में मिलेगा। यह सीधी छूट है और इसके लिए किसी बैंक कार्ड की जरूरत नहीं होगी। यानी ग्राहकों को सीधे 8,000 रुपये की बचत होगी। अगर ग्राहक एसबीआई बैंक या फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। इस तरह सभी ऑफर्स के बाद iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये रह जाएगी, जो इसकी लॉन्च कीमत से 13,000 रुपये कम है।

iPhone 17 Pro Max पर भी फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में अच्छी छूट मिलेगी। इस फोन की कीमत सेल के दौरान 1,41,900 रुपये होगी। वहीं, एसबीआई बैंक और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड धारक इसे 1,32,900 रुपये की प्रभावी कीमत पर खरीद सकेंगे। सीधी छूट के अलावा, फ्लिपकार्ट कुछ चुनिंदा बैंक कार्ड पर अतिरिक्त कैशबैक और नो-कॉस्ट ईएमआई का भी फायदा देगा। हालांकि, इन ऑफर्स के साथ कुछ नियम और शर्तें लागू होंगी। इसलिए खरीदारी करने से पहले ऑफर की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना बेहतर रहेगा।

सिर्फ iPhone ही नहीं, एंड्रॉयड फोन पर भी मिलेंगे शानदार ऑफर्स

फ्लिपकार्ट ने सिर्फ आईफोन ही नहीं, बल्कि कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन की सेल कीमतों का भी खुलासा कर दिया है। इससे ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों के फोन की कीमत और ऑफर्स की तुलना करने में आसानी होगी। गूगल पिक्सल 10 सीरीज की कीमतें भी सामने आ गई हैं। पिक्सल 10 की कीमत 62,999 रुपये, पिक्सल 10ए की 50,999 रुपये, पिक्सल 10 प्रो की 99,999 रुपये और पिक्सल 10 प्रो एक्सएल की कीमत 1,14,999 रुपये होगी।

वहीं, सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा और गैलेक्सी S26 प्लस पर भी छूट मिलेगी। हालांकि, इन दोनों फोन की अंतिम सेल कीमत का अभी ऐलान नहीं किया गया है। अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह अच्छा मौका हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल मेमोरी चिप समेत कई मोबाइल पार्ट्स की कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एप्पल जल्द ही आईफोन 17 सीरीज की कीमत बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में मिल रही मौजूदा कीमतें ग्राहकों के लिए बेहतर सौदा साबित हो सकती हैं। इसलिए जो लोग आईफोन 17 सीरीज खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह सेल अच्छा अवसर हो सकती है।

अगर आप पहले से ही नया आईफोन खरीदने या अपना पुराना फोन बदलने की योजना बना रहे हैं, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल आपके लिए अच्छा मौका हो सकती है। इस बार कंपनी ने सिर्फ ऑफर्स का प्रचार नहीं किया है, बल्कि कई आईफोन की वास्तविक सेल कीमत भी पहले ही बता दी है। iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी। यानी ग्राहकों को अच्छी-खासी बचत का मौका मिलेगा।

इसके अलावा, आईफोन 15 जैसे पुराने मॉडल, जिसकी शुरुआती कीमत 55,900 रुपये से शुरू होगी, से लेकर iPhone 17 Pro मैक्स तक कई मॉडलों पर आकर्षक छूट दी जा रही है। ऐसे में लगभग हर बजट के ग्राहकों के लिए इस सेल में खरीदारी का अच्छा मौका होगा। फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस और फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर एक दिन पहले यानी 7 अगस्त से ही इन ऑफर्स का लाभ उठा सकेंगे।

iPhone 16 पर बड़ी डील, 67,900 रुपए वाला फोन 40,612 रुपए में खरीदने का मौका, ऐसे मिलेगा डिस्काउंट

apple iphone 16

Apple के iPhone 16 पर Flipkart शानदार ऑफर लेकर आया है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर iPhone 16 के 128GB मॉडल की कीमत सीधे डिस्काउंट के बाद 67,900 रुपए हो गई है। वहीं, अगर ग्राहक एक्सचेंज ऑफर और चुनिंदा बैंक कार्ड के डिस्काउंट का फायदा उठाते हैं, तो इस फोन को प्रभावी तौर पर सिर्फ 40,612 रुप में खरीदा जा सकता है। यह ऑफर फिलहाल White कलर ऑप्शन पर उपलब्ध है। हालांकि, स्टॉक और ऑफर्स के आधार पर दूसरे कलर वेरिएंट पर भी इसी तरह की कीमत मिल सकती है।

 

iPhone 16 को ₹40,612 में कैसे खरीदें?

 

Flipkart पर iPhone 16 (128GB) की कीमत 67,900 रुप है। इसकी लॉन्च कीमत 69,900 रुपए थी। यानी फोन की कीमत में पहले ही 2,000 रुपए की कटौती की जा चुकी है। अब ग्राहक अपने पुराने iPhone 13 को एक्सचेंज करके कीमत को और कम कर सकते हैं। Flipkart की लिस्टिंग के मुताबिक, iPhone 13 पर 23,150 रुपए तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। इसके अलावा, योग्य Flipkart Axis Bank Credit Card और Flipkart SBI Credit Card से भुगतान करने पर 4,138 रुपए तक का बैंक डिस्काउंट मिल रहा है।

 

इस तरह कैलकुलेशन कुछ इस प्रकार है:

 

  • iPhone 16 (128GB) की बिक्री कीमत: 67,900
  •  रुपए iPhone 13 पर अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू: ₹23,150
  • योग्य बैंक डिस्काउंट: 4,138
  •  रुपए प्रभावी कीमत: 40,612 रुपए

 

हालांकि, ध्यान रखें कि रुपए 40,612 कोई फ्लैट डिस्काउंट कीमत नहीं है। यह कीमत अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू और बैंक ऑफर को मिलाकर बनती है।

 

एक्सचेंज ऑफर में इन बातों का रखें ध्यान

 

पुराने iPhone की एक्सचेंज वैल्यू उसके कंडीशन, उम्र और काम करने की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर फोन की हालत खराब है या उसमें कोई तकनीकी समस्या है, तो एक्सचेंज वैल्यू कम हो सकती है। इसी तरह बैंक डिस्काउंट भी कार्ड की पात्रता और लागू नियम एवं शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए खरीदारी पूरी करने से पहले Flipkart के checkout page पर मिलने वाली final payable amount जरूर चेक करें।

 

iPhone 16 के स्पेसिफिकेशंस

 

iPhone 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन में Apple का A18 चिपसेट मिलता है। इसका बेस मॉडल 128GB इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 48MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 12MP का सेकेंडरी कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 12MP का फ्रंट कैमरा मिलता है।

 

iPhone 16 में वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है। इसके अलावा फोन Apple के लेटेस्ट सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस, फोटोग्राफी, गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए कई फीचर्स के साथ आता है। हैंडसेट और बॉक्स में मिलने वाले एक्सेसरीज पर 1 साल की वारंटी भी दी जाती है।

 

खरीदने से पहले जरूर देखें अंतिम कीमत

 

iPhone 16 को 40,612 रुपए में खरीदने के लिए तीन फायदे एक साथ मिलने जरूरी हैं—67,900 रुपए की मौजूदा बिक्री कीमत, iPhone 13 पर 23,150 रुपए तक का एक्सचेंज और योग्य क्रेडिट कार्ड पर 4,138 रुपए का बैंक डिस्काउंट। चूंकि एक्सचेंज वैल्यू फोन की स्थिति के अनुसार बदल सकती है और बैंक ऑफर भी समय के साथ अपडेट हो सकते हैं, इसलिए ऑर्डर प्लेस करने से पहले checkout page पर मिलने वाली अंतिम कीमत की जांच जरूर करें।

अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या होता है? जानें इसका मतलब और इसे कैसे बेहतर करें

अपने क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना खुद की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है. भारत में आपको लोन, क्रेडिट कार्ड्स या दूसरी क्रेडिट फैसिलिटीज आसानी से तभी मिल सकती हैं, जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो. ट्रांसयूनियन CIBIL की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 119 मिलियन भारतीयों ने अपना CIBIL स्कोर चेक किया था. ये पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा है, यानी 43.6 मिलियन ज्यादा लोग अपने क्रेडिट स्टेटस को लेकर एक्टिव हुए हैं. खास बात ये कि Gen Z और मिलेनियल्स 77% हिस्सेदारी के साथ इसमें सबसे आगे हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 46% लोग, जो रेगुलर अपने CIBIL स्कोर और रिपोर्ट चेक करते हैं, 6 महीने में अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर कर लेते हैं. ये उन 41% लोगों से ज्यादा है, जो अपने स्कोर पर ध्यान नहीं देते. यानी क्रेडिट को एक्टिवली मैनेज करने से स्कोर बेहतर होता है, जिससे कम इंटरेस्ट रेट्स, अच्छे ऑफर्स और ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है. आइए, समझते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है.

क्रेडिट स्कोर क्या है?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है, जो आपकी क्रेडिटवर्थिनेस दिखाता है, यानी आप उधार लिया पैसा चुकाने में कितने काबिल हैं. ये आपके क्रेडिट हिस्ट्री पर बेस्ड होता है. भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 तक होता है. 750 से 900 का स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है.

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क्रेडिट स्कोर की रेंज को ऐसे समझें:

  • 750-900: ये शानदार स्कोर है. इस रेंज में आपको क्रेडिट आसानी से मिलेगा और अच्छे टर्म्स पर.
  • 650-749: ये अच्छी रेंज है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ठीक है, लेकिन टॉप स्कोर जितनी मजबूत नहीं.
  • 550-649: ये एवरेज रेंज है. क्रेडिट मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा हो सकते हैं और टर्म्स उतने अच्छे नहीं.
  • 550 से नीचे: ये कमजोर स्कोर है. इस रेंज में क्रेडिट पाना मुश्किल हो सकता है.

भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो हैं, इनमें ट्रांसयूनियन CIBIL, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और CRIF हाई मार्क शामिल हैं. हर ब्यूरो की रेंज और इंटरप्रिटेशन में थोड़ा अंतर हो सकता है.  

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

आपके क्रेडिट स्कोर को ये चीजें प्रभावित करती हैं:

  • पेमेंट हिस्ट्री: लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI टाइम पर चुकाना बहुत जरूरी है. लेट पेमेंट्स या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नीचे ला सकते हैं.
  • क्रेडिट यूसेज: अपनी क्रेडिट लिमिट का ज्यादा यूज करना स्कोर को नुकसान पहुंचाता है. कोशिश करें कि 30% से ज्यादा लिमिट इस्तेमाल न हो.
  • लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके स्कोर को बेहतर करता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट बिहेवियर की ज्यादा जानकारी मिलती है.
  • क्रेडिट टाइप्स: क्रेडिट कार्ड्स और लोन जैसे अलग-अलग क्रेडिट का मिक्स होना अच्छा है, बशर्ते आप इन्हें जिम्मेदारी से मैनेज करें.
  • नए क्रेडिट एप्लिकेशंस: छोटे वक्त में कई क्रेडिट कार्ड्स या लोन के लिए अप्लाई करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. हर एप्लिकेशन से हार्ड इन्क्वायरी होती है, जो स्कोर को थोड़ा कम करती है.

क्रेडिट स्कोर कैसे बेहतर करें?

क्रेडिट स्कोर को बेहतर करना आसान नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से यह संभव है. ये रहे कुछ टिप्स:

  • टाइम पर बिल्स पे करें: क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और लोन EMI हमेशा टाइम पर चुकाएं. ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करें ताकि ड्यू डेट मिस न हो.
  • क्रेडिट कम यूज करें: अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा यूज न करें. इससे लेंडर्स को लगता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट रेगुलर चेक करें और कोई गलती या फ्रॉड दिखे तो ठीक करवाएं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.
  • नए क्रेडिट के लिए ज्यादा जल्दबाज़ी न करें: हर एप्लिकेशन से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है. जरूरत पड़ने पर ही नए क्रेडिट के लिए अप्लाई करें.
  • हेल्दी क्रेडिट मिक्स रखें: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिट का बैलेंस आपके स्कोर को बेहतर कर सकता है.

क्रेडिट स्कोर को कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब आपके पास सही टूल्स हों. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म आपको आपकी क्रेडिट हेल्थ की लेटेस्ट अपडेट देता है. चाहे आप अपना स्कोर जानना चाहें या उसे बेहतर करना चाहें, मनीकंट्रोल के टूल्स और इनसाइट्स आपकी मदद करेंगे.

कुल मिलाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और मौकों को आसान बनाता है. भारत में 750 या उससे ज्यादा का स्कोर शानदार माना जाता है और लेंडर्स के लिए आपका फेवर बढ़ाता है. क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर और उसे मैनेज करने के लिए सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं और अच्छे क्रेडिट टर्म्स पा सकते हैं.

40 लाख की भारतीय सैलरी या 1.90 लाख डॉलर की अमेरिकी कमाई? परचेजिंग पावर को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

भारत और अमेरिका की सैलरी और खर्च को लेकर सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में कहा गया कि, भारत में सालाना 40 लाख रुपये कमाने वाले व्यक्ति की लाइफस्टाइल अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाले व्यक्ति जैसी होती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोग इस पोस्ट पर कई लोग कमेंट कर रहे हैं। लोगों ने घर, कार, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर अपने-अपने तर्क दिए।

व्यक्ति ने किया पोस्ट

सूरज कुमार तलरेजा नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर आप भारत में सालाना 40 लाख रुपये (40 LPA) कमा रहे हैं, तो आपकी लाइफस्टाइल लगभग वैसी ही है जैसी अमेरिका में सालाना 1,92,000 डॉलर कमाने वाले व्यक्ति की होती है।” उन्होंने आगे लोगों से ये भी कहा कि वे टैक्स को लेकर सोशल मीडिया पर बेवजह शिकायत करना बंद करें।

यूजर ने किया कमेंट

इस दावे पर नवीन नेगी नाम के एक अन्य यूजर ने आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, इस तरह की तुलना करते समय भारत और अमेरिका की परचेजिंग पावर और घर-कार जैसी बड़ी संपत्तियों की कीमतों में मौजूद बड़े अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने X पर लिखा, “अगर आप कभी अमेरिका में नहीं रहे हैं, तो इस तरह की बेवकूफी भरी बातें नहीं करनी चाहिए।” इसके बाद उन्होंने दोनों देशों में घरों और कारों की कीमतों का भी उदाहरण दिया।

3 लाख डॉलर में घर खरीद सकते हैं

नवीन नेगी ने लिखा, “सिर्फ जानकारी के लिए बता दूं कि अगर अमेरिका में आपकी सालाना आय 1.90 लाख डॉलर है, तो आज भी ऑस्टिन जैसे शहर में करीब 3 लाख डॉलर में 3BHK कॉन्डोमिनियम खरीदा जा सकता है। वहीं लगभग 50 हजार डॉलर में BMW 3 सीरीज का बेस मॉडल मिल जाता है, जो 1.90 लाख डॉलर की सालाना कमाई का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।”

भारत में घर खरीदना मुश्किल

नवीन नेगी ने आगे कहा कि अगर भारत में किसी व्यक्ति की सालाना आय 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 80 लाख रुपये भी कर दी जाए, तब भी कई टियर-1 शहरों में आराम से दो बेडरूम का फ्लैट खरीदना आसान नहीं होगा। उन्होंने लिखा, “मान लीजिए भारत में किसी की सालाना कमाई 40 लाख रुपये की जगह 80 लाख रुपये हो जाए, तब भी देश के किसी बड़े टियर-1 शहर में आसानी से 2BHK फ्लैट खरीदना मुश्किल है। वहीं भारत में BMW 3 सीरीज की कीमत करीब 80 लाख रुपये या उससे अधिक है, जो एक साल की आय से लगभग दोगुनी बैठती है।”

 

नेगी ने कहा कि उनकी तुलना सिर्फ घरों और कारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने लिखा, “मैंने अभी कम ब्याज दरों, सस्ती लीज की सुविधाओं, क्रेडिट कार्ड का बकाया दूसरे कार्ड में ट्रांसफर करने जैसी सुविधाओं और कई अन्य बातों का जिक्र भी नहीं किया है, जो अमेरिका में लोगों की खरीदने की क्षमता को और मजबूत बनाती हैं। इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी स्कूलों की शिक्षा भी अच्छी गुणवत्ता की होती है और लगभग मुफ्त होती है।”

लोगों ने दिया मजेदारा रिएक्शन

इस बहस ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और बड़ी संख्या में यूजर्स ने अपनी-अपनी राय रखी। एक यूजर ने लिखा, “बेंगलुरु में किसी अच्छी सोसाइटी में 3BHK फ्लैट की कीमत 2 करोड़ रुपये से कम नहीं है। अगर आप साल में 10 लाख रुपये भी बचाते हैं, तो बिना ब्याज जोड़े सिर्फ घर खरीदने में ही 20 साल लग जाएंगे।” एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आप सिर्फ चीजों की कीमतों की तुलना कर रहे हैं। क्या अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाला व्यक्ति फुल-टाइम घरेलू मदद रख सकता है? वहां सेवाएं काफी महंगी हैं।”

आप आसानी से सेट कर सकते हैं ऑटोपे और रेकरिंग यूपीआई मैनडेट, यहां जानिए पूरा प्रोसेस

ज्यादातर सब्सक्रिप्शंस के लिए हर महीने पेमेंट करना जरूरी होता है। कई यूटिलिटी सर्विसेज का भी पेमेंट हर महीने करना पड़ता है। मोबाइल बिल, इलेक्ट्रिसिटी बिल, ओटीसी सब्सक्रिप्शंस, इंश्योरेंस प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड पेमेंट इसके उदाहरण हैं। आज की व्यस्तता भरी जिंदगी में किसी के लिए सभी सब्सक्रिप्शन का पेमेंट और उसकी ड्यू डेट याद रखना मुमकिन नहीं है। समय पर बिल का पेमेंट नहीं होने पर सर्विसेज बंद हो सकती हैं, जिससे आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

हर महीने तय तारीख को बैंक अकाउंट से पैसा अपने आप कट जाएगा

इस समस्या का आसान समाधान ऑटोपे और रेकरिंग यूपीआई मैनडेट है। रेकरिंग पेमेंट के लिए यूपीआई मैनडेट सेट करना मुश्किल नहीं है। इससे सर्विस बंद होने या लेट पेमेंट पर पेनाल्टी लगने का खतरा नहीं रह जाएगा। हर बिल का पेमेंट तय तारीख को अपने आप आपके बैंक अकाउंट से हो जाएगा। ज्यादातर पेमेंट ऐप पर यह सुविधा उपलब्ध है। अगर यूजर के स्मार्टफोन में पेमेंट ऐप नहीं है तो इसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।

ऑटोपे मैनडेट सेट करने के लिए किसी डॉक्युमेंट की जरूरत नहीं

खास बात यह है कि ऑटोपे सेट करने के लिए किसी तरह के डॉक्युमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। यूजर को प्री-नोटिफिकेशन भी आता है। यह पेमेंट की तय तारीख से कम से कम 24 घंटे पहले आता है। इससे यूजर को पता चल जाता है कि उसके बैंक अकाउंट से बिल का पेमेंट होने वाला है। आजकल ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म सब्सक्रिप्शन लेते ही ऑटोपे पर जोर देते हैं।

ज्यादातर यूपीआई पेमेंट में होती हे ऑटोपे सेट करने की सुविधा

आप अपने स्मार्टफोन पर यूपीआई पेमेंट ऐप के जिरए ऑटोपे सेट कर सकते हैं। मान लीजिए आप गूगल पे ऐप का इस्तेमाल करते है। आपको स्क्रीन के दाहिने में सबसे ऊपर लगे अपने प्रोफाइल पिक्कचर पर टैप करना होगा। उसके बाद आपको ऑटोपे बटन पर क्लिक करना होगा। यहां आप अलग-अलग सर्विसेज के लिए मैनडेट सलेक्ट कर सकते हैं। आपको पेंडिंग सेक्शन में जाकर एक्सेप्ट बटन पर क्लिक करना होगा। आखिर में आपको यूपीआई पिन डालना होगा। इसके बाद आपका ऑटोपे सेट हो जाएगा।

यूपीआई पेमेंट ऐप में ऑटोपे मैनडेट सेट करने के हैं कई फायदे

फोनपे सहित दूसरे यूपीआई पेमेंट ऐप पर भी इसी तरीके से ऑटोपे सेट किया जा सकता है। एक बार सेट हो जाने पर किसी बिल या सर्विस का पेमेंट आपके बैंक अकाउंट से तय तारीख को अपने आप हो जाएगा। पहले सिर्फ बैंक के जरिए ऑटोपे की सुविधा मिलती थी। लेकिन, अब यूपीआई के जरिए भी यह सुविधा उपलब्ध हो गई है। यूपीआई पेमेंट ऐप ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते हैं। इससे ऑटोपे सेट करना और भी आसान हो गया है।

Google Pay-PhonePe पर UPI Autopay कैसे करें सेट? यहां देखें पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप

आज के समय में लोग कई तरह की सब्सक्रिप्शन सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, जिनके लिए हर महीने या सालाना पेमेंट करना पड़ता है। लेकिन इन सभी सेवाओं की पेमेंट डेट याद रखना और उनका हिसाब रखना अक्सर मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि यूजर किसी सब्सक्रिप्शन का पेमेंट करना भूल जाते हैं, जिसकी वजह से उनकी सर्विस बंद या कैंसिल हो जाती है। इसी परेशानी को आसान बनाने के लिए साल 2020 में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI Autopay सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए, आप अपनी पसंद के किसी भी UPI ऐप का इस्तेमाल करके मोबाइल बिल, बिजली बिल, EMI पेमेंट, OTT सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम और म्यूचुअल फंड जैसे बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए ई-मैंडेट (e-mandate) चालू कर सकते हैं।

यहां UPI ऑटोपे मैंडेट और बार-बार होने वाले पेमेंट (Recurring Payments) के बारे में वे सभी बातें बताई गई हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। इसमें इनके फायदे और Google Pay व PhonePe का इस्तेमाल करके इन्हें सेट अप करने का तरीका भी शामिल है।

ग्राहकों और व्यापारियों के लिए UPI Autopay सेट करने के फायदे

बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए UPI Autopay मैंडेट सेट करने के कई फायदे हैं। अगर आप ग्राहक हैं, तो ऑटोपे सेट करने से आप लेट फीस और पेनल्टी से बच सकते हैं, क्योंकि यह आपकी ओर से समय पर पेमेंट कर देता है। इसी तरह, यह बार-बार होने वाले पेमेंट करने का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है, जिसमें आपको हर महीने या साल मैन्युअल रूप से पेमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि तय समय पर पेमेंट अपने आप हो जाता है।

वहीं, व्यापारियों (Merchants) के लिए भी यह सुविधा फायदेमंद है, क्योंकि इससे समय पर भुगतान मिलने में आसानी होती है और ग्राहकों के साथ पेमेंट का मैनेजमेंट बेहतर हो जाता है।

बता दें कि UPI, यूजर्स को क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस के लिए 1,00,000 रुपये तक की लिमिट के साथ ऑटो-पे सेट करने की सुविधा देता है। आप सीधे UPI ऐप में Autopay को आसानी से बदल सकते हैं, रद्द कर सकते हैं, रोक सकते हैं या दोबारा शुरू कर सकते हैं। आप लंबी लाइनों में लगने के बजाय हर महीने या साल सीधे ऑनलाइन पेमेंट भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि Autopay सेट करने के लिए किसी तरह के दस्तावेज या कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती।

इसके अलावा, Autopay पेमेंट होने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको प्री-डेबिट नोटिफिकेशन (PDN) मिल जाता है, जिससे आपको पहले ही जानकारी मिल जाती है कि आपके खाते से पेमेंट कटने वाला है।

अगर आप कोई मर्चेंट (व्यापारी) हैं, तो Autopay को इंटीग्रेट करने से ग्राहकों से समय पर भुगतान मिलना आसान हो जाता है। इससे आप ग्राहकों को बेहतर सर्विस दे सकते हैं, उनकी संतुष्टि बढ़ा सकते हैं और लंबे समय तक उनका भरोसा बनाए रख सकते हैं।

Google Pay पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने फोन पर Google Pay खोलें।
  • स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर दिखाई दे रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • अब, उस सेक्शन को खोलने के लिए ‘Autopay’ बटन पर क्लिक करें।
  • यहां आपको अलग-अलग सर्विस के लिए आए हुए Autopay Mandate दिखाई देंगे। किसी खास सर्विस के लिए Autopay चालू करने के लिए Pending सेक्शन में जाएं और संबंधित मैंडेट को चुनें।
  • इसके बाद Accept बटन पर टैप करें, ताकि Autopay सेट हो जाए।
  • अगर आप किसी रिक्वेस्ट किए गए मैंडेट के लिए Autopay सेट नहीं करना चाहते हैं, तो आप ‘Decline’ भी चुन सकते हैं।
  • आखिर में अपनी पसंद की पुष्टि करने के लिए UPI PIN दर्ज करें।
  • इसके बाद आपका Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा।

PhonePe पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने स्मार्टफोन पर PhonePe ऐप खोलें।
  • इसके बाद, स्क्रीन के ऊपर बाईं ओर अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • नीचे स्क्रॉल करके ‘Payment Settings’ सेक्शन पर जाएं।
  • अब, ‘Autopay’ बटन पर टैप करें।
  • इसके बाद एक नया पेज खुलेगा। यहां आपको वह Mandate चुनना होगा, जिसके लिए आप Autopay चालू करना चाहते हैं।
  • Autopay रिक्वेस्ट को स्वीकार करने के बाद ऐप आपसे पुष्टि के लिए UPI PIN दर्ज करने को कहेगा।
  • UPI PIN डालते ही आपका PhonePe Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा और आगे के पेमेंट तय समय पर अपने आप हो जाएंगे।

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ITR: 31 जुलाई तक फाइल किए गए करीब 6 करोड़ रिटर्न, इनकम के ट्रेंड में दिखा दिलचस्प बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख तक कुल 5.9 लाख रिटर्न फाइल हुए। आईटीआर फॉर्म-1 और आईटीआर फॉर्म-2 से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। फाइल कुल रिटर्न की संख्या की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अगस्त को दी है।

आईटीआर-3 और ITR-4 फॉर्म वाले टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की 31 जुलाई की अंतिम तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी बिजनेस और प्रोफेशनल इनकम है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल ऐसे रेजिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स करते हैं, जिनकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। उनकी इनकम में सैलरी, एक घर से इनकम और 5,000 रुपये तक की एग्रीकल्चर इनकम शामिल हो सकती है।

अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स की इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी नहीं

ITR फॉर्म 2 उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस से इनकम है। टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग का पैटर्न बदला है। अब ज्यादा टैक्सपेयर्स सैलरी के अलावा इनकम के दूसरे स्रोतों की भी रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

कैपिटल गेंस दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़ी

इस साल रिटर्न फाइल कर चुके टैक्सपेयर्स में से सिर्फ 42 फीसदी ने सैलरी को इनकम का मुख्य स्रोत दिखाया है। AY2022-23 में यह संख्या 82 फीसदी थी। टैक्सपेयर्स के इनकम में कैपिटल गेंस बड़ा स्रोत के रूप में सामने आया है। कैपिटल गेंस से इनकम वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी इस साल 39 फीसदी पहुंच गई। AY2022-23 में यह सिर्फ 9 फीसदी थी।

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26 फीसदी

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़कर 26 फीसदी पहुंच गई है। AY2022-23 में यह सिर्फ 4 फीसदी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सेल्फ-एंप्लॉयमेंट वाले लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह ट्रेंड हर उम्र वर्ग के टैक्सपेयर्स में देखने को मिला है। सीनियर सिटीजंस में ऑनलाइन रिटर्न फाइल करे वाले लोगों की संख्या बढ़कर 53 फीसदी हो गई है।

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होम लोन, कार लोन सहित दूसरी जरूरतों की वजह से ज्यादा लोग फाइल कर रहे रिटर्न

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग रिटर्न फाइल कर रहे हैं, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा रहा है। अब रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गया है। टैक्सपेयर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सरकार ने रिटर्न फाइल प्रोसेस को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। इसका फायदा भी मिल रहा है।