रिटायरमेंट के बाद अगर आ जाए ₹40 लाख का मेडिकल खर्च तो क्या करेंगे? शख्स ने शेयर किया अनुभव

एक बुजुर्ग पड़ोसी की हार्ट सर्जरी पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने की बात ने एक शख्स को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। अब तक उसे लगता था कि उसने भविष्य के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है, लेकिन इस घटना ने उसे अचानक आने वाले मेडिकल खर्च की चिंता से रूबरू करा दिया। उम्र बढ़ने के साथ इलाज और दवाइयों का खर्च कितना बढ़ सकता है, इसका अंदाजा इस मामले से लगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक लाखों रुपये के इलाज की जरूरत पड़ जाए, तो क्या हमारी बचत उसका बोझ उठा पाएगी?

80 की उम्र में आई बड़ी मेडिकल जरूरत

शख्स ने Reddit पर बताया कि उसके पड़ोसी की उम्र 80 साल से ज्यादा है और उन्हें हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने इलाज के दो विकल्प बताए थे। पहला पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का था, जिसमें जोखिम ज्यादा था। दूसरा कम इनवेसिव और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प था, लेकिन इसकी कीमत काफी ज्यादा थी। उम्र को देखते हुए उनके लिए दूसरा विकल्प चुना गया। पड़ोसी का बेटा विदेश में रहता है और आर्थिक रूप से मदद करने की स्थिति में था, इसलिए महंगा इलाज संभव हो पाया।

40 लाख का खर्च देखकर हिल गई अपनी प्लानिंग

इस घटना ने उस व्यक्ति को सबसे ज्यादा इसलिए परेशान किया क्योंकि 40 लाख रुपये उसके अनुमानित सालाना खर्च से करीब दोगुना था। उसने सोचा कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक इतना बड़ा मेडिकल बिल आ जाए, तो क्या उसकी बचत उसका सामना कर पाएगी? उसके मुताबिक, उसने अब तक अपनी रिटायरमेंट की तैयारी को काफी हद तक व्यवस्थित समझा था, लेकिन इस घटना ने उसे एक नया नजरिया दिया।

क्या सिर्फ सेविंग्स काफी हैं?

इस चर्चा में एक बड़ा सवाल यह उठा कि बुढ़ापे में मेडिकल खर्च के लिए कितनी रकम अलग रखनी चाहिए। कई लोगों ने सुझाव दिया कि रिटायरमेंट फंड के अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और अलग मेडिकल इमरजेंसी फंड रखना भी जरूरी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कवर की जरूरत पर जोर दिया, जबकि कुछ ने मेडिकल खर्च के लिए अलग से बड़ी रकम बचाने की बात कही।

लोगों ने दी अलग-अलग सलाह

Reddit पर चर्चा के दौरान एक यूजर ने सुझाव दिया कि उम्र बढ़ने के साथ पर्याप्त हेल्थ कवर होना चाहिए। दूसरे ने कहा कि मेडिकल जरूरतों के लिए अलग फंड बनाना समझदारी हो सकती है, ताकि अचानक आने वाला बड़ा खर्च रोजमर्रा की रिटायरमेंट जरूरतों को प्रभावित न करे। वहीं, कुछ लोगों ने इलाज के खर्च को कम करने के लिए अच्छी सेहत बनाए रखने और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी जोर दिया।

My neighbour who is in his 80s just had a heart surgery that cost around 40Lakhs. How do you even plan for something like this?

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u/GradeDry1283 in

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रिटायरमेंट प्लानिंग का एक और पहलू सामने आया

इस पूरी चर्चा ने ये सवाल जरूर खड़ा किया कि रिटायरमेंट की तैयारी केवल घर चलाने, यात्रा या रोजमर्रा के खर्च तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं और उनका खर्च काफी बड़ा हो सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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40 लाख की भारतीय सैलरी या 1.90 लाख डॉलर की अमेरिकी कमाई? परचेजिंग पावर को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

भारत और अमेरिका की सैलरी और खर्च को लेकर सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में कहा गया कि, भारत में सालाना 40 लाख रुपये कमाने वाले व्यक्ति की लाइफस्टाइल अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाले व्यक्ति जैसी होती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोग इस पोस्ट पर कई लोग कमेंट कर रहे हैं। लोगों ने घर, कार, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर अपने-अपने तर्क दिए।

व्यक्ति ने किया पोस्ट

सूरज कुमार तलरेजा नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर आप भारत में सालाना 40 लाख रुपये (40 LPA) कमा रहे हैं, तो आपकी लाइफस्टाइल लगभग वैसी ही है जैसी अमेरिका में सालाना 1,92,000 डॉलर कमाने वाले व्यक्ति की होती है।” उन्होंने आगे लोगों से ये भी कहा कि वे टैक्स को लेकर सोशल मीडिया पर बेवजह शिकायत करना बंद करें।

यूजर ने किया कमेंट

इस दावे पर नवीन नेगी नाम के एक अन्य यूजर ने आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, इस तरह की तुलना करते समय भारत और अमेरिका की परचेजिंग पावर और घर-कार जैसी बड़ी संपत्तियों की कीमतों में मौजूद बड़े अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने X पर लिखा, “अगर आप कभी अमेरिका में नहीं रहे हैं, तो इस तरह की बेवकूफी भरी बातें नहीं करनी चाहिए।” इसके बाद उन्होंने दोनों देशों में घरों और कारों की कीमतों का भी उदाहरण दिया।

3 लाख डॉलर में घर खरीद सकते हैं

नवीन नेगी ने लिखा, “सिर्फ जानकारी के लिए बता दूं कि अगर अमेरिका में आपकी सालाना आय 1.90 लाख डॉलर है, तो आज भी ऑस्टिन जैसे शहर में करीब 3 लाख डॉलर में 3BHK कॉन्डोमिनियम खरीदा जा सकता है। वहीं लगभग 50 हजार डॉलर में BMW 3 सीरीज का बेस मॉडल मिल जाता है, जो 1.90 लाख डॉलर की सालाना कमाई का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।”

भारत में घर खरीदना मुश्किल

नवीन नेगी ने आगे कहा कि अगर भारत में किसी व्यक्ति की सालाना आय 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 80 लाख रुपये भी कर दी जाए, तब भी कई टियर-1 शहरों में आराम से दो बेडरूम का फ्लैट खरीदना आसान नहीं होगा। उन्होंने लिखा, “मान लीजिए भारत में किसी की सालाना कमाई 40 लाख रुपये की जगह 80 लाख रुपये हो जाए, तब भी देश के किसी बड़े टियर-1 शहर में आसानी से 2BHK फ्लैट खरीदना मुश्किल है। वहीं भारत में BMW 3 सीरीज की कीमत करीब 80 लाख रुपये या उससे अधिक है, जो एक साल की आय से लगभग दोगुनी बैठती है।”

 

नेगी ने कहा कि उनकी तुलना सिर्फ घरों और कारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने लिखा, “मैंने अभी कम ब्याज दरों, सस्ती लीज की सुविधाओं, क्रेडिट कार्ड का बकाया दूसरे कार्ड में ट्रांसफर करने जैसी सुविधाओं और कई अन्य बातों का जिक्र भी नहीं किया है, जो अमेरिका में लोगों की खरीदने की क्षमता को और मजबूत बनाती हैं। इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी स्कूलों की शिक्षा भी अच्छी गुणवत्ता की होती है और लगभग मुफ्त होती है।”

लोगों ने दिया मजेदारा रिएक्शन

इस बहस ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और बड़ी संख्या में यूजर्स ने अपनी-अपनी राय रखी। एक यूजर ने लिखा, “बेंगलुरु में किसी अच्छी सोसाइटी में 3BHK फ्लैट की कीमत 2 करोड़ रुपये से कम नहीं है। अगर आप साल में 10 लाख रुपये भी बचाते हैं, तो बिना ब्याज जोड़े सिर्फ घर खरीदने में ही 20 साल लग जाएंगे।” एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आप सिर्फ चीजों की कीमतों की तुलना कर रहे हैं। क्या अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाला व्यक्ति फुल-टाइम घरेलू मदद रख सकता है? वहां सेवाएं काफी महंगी हैं।”